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AI ने कहा ‘नो बिकनी’, X के नए नियमों का दावा और टेस्ट में सामने आई अलग हकीकत

आखिरकार दुनियाभर में भद्द पिटवाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) ने अपने AI चैटबॉट Grok में जरूरी बदलाव किए हैं। ये बदलाव इसलिए किए गए हैं ताकि X पर लोग Grok का इस्तेमाल करके लोगों की अनुचित तस्वीरें न बनाई जा सकें। बता दें कि इससे पहले AI चैटबॉट Grok के जरिए लोग महिलाओं और नाबालिगों की तस्वीरें X पर शेयर करके डिजिटली उनके कपड़े उतार रहे थे। The Verge की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में आलोचना और कार्रवाई की धमकी मिलने के बाद X ने इसे लेकर जरूरी बदलाव किए हैं। हालांकि इस फीचर को टेस्ट करने वाले पत्रकारों ने बताया है कि Grok अभी भी अश्लील तस्वीरे बना रहा है। इससे पहले X के मालिक एलन मस्क ने कहा था कि वह इसे ठीक कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रकारों ने टेस्ट में पाया कि Grok अभी भी बेहद आसानी से किसी की भी बिना कपड़ों के तस्वीर बना पा रहा है। क्या है पूरा मामला? दरअसल X के AI चैटबॉट Grok का इस्तेमाल किसी की भी फोटो को अश्लील बनाने के लिए किया जा रहा था। इस अनिचित फीचर के निशाने पर ज्यादातर महिलाएं और यहां तक कि नाबालिग भी थे। बता दें कि इस तरह की तस्वीरों को डीपफेक कहा जाता है, यानी कि ऐसी नकली तस्वीरें जो कि बिलकुल असली लगती हैं। इस खतरनाक फीचर का इस्तेमाल किसी की भी प्रतिष्ठा की धज्जियां उड़ाने के लिए किया जा सकता था। इसे लेकर एलन मस्क का कहना था कि ऐसा यूजर्स और हैकर्स की वजह से हो रहा है लेकिन टेक एक्सपर्ट्स का कहना था कि बाकी AI टूल्स की तुलना में Grok में अश्लीलता को लेकर किसी तरह के फिल्टर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मस्क ने रातों-रात किया बदलाव मंगलवार को X की ओर से घोषणा हुई हैं कि उन्होंने Grok की पॉलिसी में बदलाव किए हैं। अब लोग उनके AI टूल का इस्तेमाल कर अश्लील तस्वीरें नहीं बना सकेंगे। हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को भी टेस्टिंग में Grok अश्लील तस्वीरें बनाते पाया गया। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि कंपनी की कथनी और करनी में फर्क हैं। क्या कर रहीं सरकारें? X को पहले ही भारत सरकार की ओर से अल्टीमेटम मिल चुका है और X ने अपनी गलती भी मानी है। वहीं ब्रिटेन की संचार नियामक संस्था Ofcom ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इसी हफ्ते ब्रिटेन में एक कानून पास होने वाला है, जिसके मुताबिक किसी की बिना सहमति अश्लील डीपफेक बनाने को अपराध घोषित किया जाएगा। ब्रिटेन की सरकार ने साफ किया है कि वह तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक X पूरी तरह से अपने AI टूल को सुधार नहीं लेता। क्या सुधर गया Grok? एलन मस्क और X की ओर से भले कहा जा रहा हो कि उन्होंने X में जरूरी बदलाव किए हैं लेकिन इसे टेस्ट करने वाले पत्रकारों ने बताया है कि Grok अभी भी अश्लील तस्वीरें बना रहा है।

लंबा बैकअप, जबरदस्त परफॉर्मेंस: OnePlus लाने वाला है 8000mAh बैटरी वाला फोन

 नई दिल्ली OnePlus एक ऐसा स्मार्टफोन लाने की तैयारी में है, जो 8000mAh बैटरी के साथ आएगा। लीक हुई जानकारी के मुताबिक, इस स्मार्टफोन में बड़ी बैटरी के साथ-साथ फ्लैट LTPS डिस्प्ले और दमदार परफॉर्मेंस वाला सॉफ्टवेयर दिया जाएगा। अभी तक कंपनी ने फोन की लॉन्चिंग या फीचर्स कन्फर्म नहीं किए हैं। कई रिपोर्ट से पता चला है कि फोन को बेहतरीन बैटरी पावर और परफॉर्मेंस के लिए लाया जा रहा है। आइये, फोन के बारे में जानते हैं। 6.59 इंच के डिस्प्ले वाले फोन की चल रही टेस्टिंग एक जाने-माने टिप्सटर डिजिटल चैट स्टेशन ने बताया है कि कंपनी की एक फैक्ट्री में 6.59 इंच के फ्लैट डिस्प्ले का टेस्ट चल रहा है। यह डिस्प्ले 1.5K LTPS पैनल वाला है, जिसके कोने गोल होंगे और चारों तरफ एक जैसे बेजेल्स होंगे। इस डिस्प्ले को एक ऐसे फोन के लिए टेस्ट किया जा रहा है, जिसे मिड-साइज परफॉरमेंस मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा। टिप्सटर ने यह भी साफ किया है कि यह डिस्प्ले सैमसंग की बजाय चीन के ही एक सप्लायर से लिया गया है। बैटरी की बात करें तो, मिड-साइज डिस्प्ले वाले फोन में 8,000mAh तक की बैटरी आसानी से लगाई जा सकती है, जबकि बड़े डिस्प्ले में बैटरी का साइज बढ़ाना मुश्किल होता है। स्क्रीन साइज और बैटरी हार्डवेयर को देखकर लग रहा है कि यह वनप्लस का कोई नया मॉडल हो सकता है। वनप्लस Ace 6 Ultra नाम से भी आ सकता है फोन इससे पहले भी कुछ रिपोर्ट्स सामने आया थीं, जिनमें एक वनप्लस इंजीनियरिंग प्रोटोटाइप का जिक्र किया गया था। इस प्रोटोटाइप में 6.78 इंच का 1.5K LTPS फ्लैट डिस्प्ले था, जिसका रिफ्रेश रेट 165Hz था। यह प्रोटोटाइप मीडियाटेक के Dimensity 9500 चिपसेट से लैस था। पिछली लीक के अनुसार, इस प्रोटोटाइप को वनप्लस Ace 6 Ultra नाम से लाना था। इसमें बड़े गोल कोने, अल्ट्रासोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर और 8000mAh की बैटरी के साथ टेस्टिंग चल रही थी। ऐसी भी खबरें हैं कि भविष्य के वर्जन में इसमें 9,000mAh की बैटरी, कस्टम परफॉरमेंस ट्यूनिंग और एक एक्टिव कूलिंग फैन भी शामिल हो सकता है। यह नया फोन उन लोगों के लिए खास हो सकता है, जो एक ऐसा स्मार्टफोन चाहते हैं जिसमें गेमिंग या भारी ऐप्स चलाने पर भी परफॉरमेंस कम ना हो और बैटरी भी दिन भर चले।

बेजल-लेस स्क्रीन और दमदार साउंड के साथ Haier TV

नई दिल्ली जाने-माने होम अप्‍लायंसेज ब्रैंड हायर ने Flipkart पर अपने नए स्‍मार्ट टीवी लॉन्‍च किए हैं। इन्‍हें Haier H5E सीरीज 4K अल्‍ट्रा HD स्‍मार्ट Google TV के तहत लाया गया है। नए हायर टीवी बेजल-लेस स्‍क्रीन ऑफर करते हैं। इनमें डाउन-फायरिंग स्टीरियो स्पीकर्स लगे हैं। कंपनी का कहना है कि बेजल-लेस स्‍क्रीन पर एकदम साफ 4K अल्‍ट्रा एचडी विजुअल्‍स नजर आएंगे। शानदार डॉल्‍बी ऑडियो साउंड दिया जाएगा। खास बात है कि कंपनी ने 25990 रुपये की शुरुआती कीमत में इन टीवी को उतारा है। यह 43 इंच टीवी के दाम है। Haier H5E Series 4K Ultra HD की कीमत Haier H5E Series 4K Ultra HD को 43 इंच, 50 इंच, 55 इंच, 65 इंच स्‍क्रीन साइज में लाया गया है।     43 इंच मॉडल के दाम 25990 रुपये हैं।     50 इंच वाला स्‍मार्ट टीवी 32990 रुपये में लाया गया है।     55 इंच मॉडल की कीमत 38990 रुपये है।     65 इंच मॉडल को 57990 रुपये में लिया जा सकेगा। Haier H5E Series 4K Ultra HD टीवी के फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस Haier H5E सीरीज के सभी मॉडलों में 4K रेजॉलूशन वाला बेजल लेस डिस्‍प्‍ले दिया गया है। दावा है कि इसमें शार्प और डिटेल्‍ड विजुअल्‍स उभरते हैं। कंपनी ट्रू 4K रेजॉलूशन की बात कह रही है और HDR10 सपोर्ट दिया गया है। यह दर्शाता है कि सभी टीवी में ज्‍यादा क्‍लीयर इमेज मिलेगी। कॉन्‍ट्रास्‍ट भी बेहतर होगा। कलर्स में एकदम रियल नजर आएंगे। बच्‍चों के लिए किड्स मोड सभी नए हायर टीवी में किड्स मोड दिया गया है। इससे यह तय करना आसान हो जाएगा कि बच्‍चों को क्‍या कंटेंट दिखाना है। हायर टीवी में 178 डिग्री वाइड व्‍यूइंग एंगल है। इसका फायदा यह होगा कि किसी भी साइड से देखने पर एक जैसी पिक्‍चर क्‍वॉलिटी मिलेगी। ये MEMC टेक्‍नोलॉजी के साथ आते हैं जो ओरिजिनल फ्रेम्‍स के बीच एक्‍स्‍ट्रा फ्रेम को जोड़कर उन्‍हें स्‍मूथ बनाता है और मोशन ब्‍लर को कम करता है। इससे ऐक्‍शन सीन ज्‍यादा रियल नजर आते हैं। 2 जीबी रैम, 32 जीबी स्‍टोरेज Haier H5E सीरीज में 7 मल्टी पिक्चर मोड्स दिए गए हैं। इससे यूजर्स को यह चुनने की सुविधा मिलती है कि वो क्या देख रहे हैं। इस फीचर से फिल्में ज्‍यादा सिनेमैटिक लगती हैं। रही बात साउंड की तो, नए हायर टीवी में 20W डाउन-फायरिंग स्‍टीरियो स्‍पीकर्स दिए गए हैं। इनमें डॉल्‍बी ऑड‍ियो का सपोर्ट है। सराउंड साउंड दिया गया है, जिससे डायलॉग्‍स एकदम क्‍लीयर सुनाई देंगे। नए हायर टीवी में 2 जीबी रैम, 32 जीबी इंटरनल स्‍टोरेज है। 2.4GHz और 5GHz डुअल बैंड वाई-फाई सपोर्ट दिया गया है। इससे ब्लूटूथ 5.1 को सपोर्ट करने वाले हेडफोन, स्पीकर और अन्य एक्सेसरीज आसानी से कनेक्‍ट हो जाती हैं। इसमें 4 HDMI पोर्ट्स और 2 USB पोर्ट्स के साथ, गेमिंग कंसोल, साउंडबार, सेट-टॉप बॉक्स और स्टोरेज डिवाइस को कनेक्ट किया जा सकता है।

हर दिन ‘जिंदा’ होने की पुष्टि नहीं की तो परिवार को भेज देगा मौत का मैसेज, वायरल ऐप की सच्चाई

 नई दिल्ली अगर आपका फोन हर दो दिन में आपसे एक सवाल पूछे… 'क्या आप जिंदा हैं'?  और अगर आपने जवाब नहीं दिया, तो आपके परिवार को अलर्ट चला जाए. सुनने में अजीब लगता है, लेकिन चीन में यही ऐप इस वक्त लाखों लोग डाउनलोड कर रहे हैं. ये ऐप अनोखे फीचर की वजह से वायरल भी हो रहा है.  इस ऐप का नाम है 'Are You Dead?'. इसका काम बेहद सीधा है. यूज़र को हर 48 घंटे में एक बटन टैप कर के बताना होता है कि वह ठीक है. अगर लगातार दो बार चेक-इन नहीं हुआ, तो ऐप अपने-आप आपके चुने हुए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को मैसेज भेज देता है कि शायद कुछ गलत हुआ है. यह ऐप खासतौर पर अकेले रहने वालों के लिए बना है. बड़े शहरों में काम करने वाले युवा, परिवार से दूर रहने वाले प्रोफेशनल्स, या वो बुज़ुर्ग जिनके बच्चे दूसरे शहरों में बस चुके हैं. टेक्नोलॉजी यहां सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा की छोटी गारंटी बनकर सामने आई है. सबसे दिलचस्प बात इसका नाम है. 'Are You Dead?' . सीधा लेकिन डार्क और चौंकाने वाला. यही वजह है कि यह ऐप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. कुछ लोग इसे मज़ाकिया मानते हैं, तो कुछ इसे आज के शहरी जीवन की कड़वी सच्चाई बताते हैं. ऐप का इंटरफेस बेहद सिंपल है. कोई चैट, कोई सोशल फीचर, कोई लंबा प्रोफाइल नहीं. बस एक बड़ा बटन.  'I’m Alive'. टेक एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यही सादगी इसकी ताकत है. यूज़र पर कोई बोझ नहीं, लेकिन जरूरत पड़ने पर अलर्ट सिस्टम काम करता है. असल में यह ट्रेंड चीन के बदलते समाज की तरफ इशारा करता है. बड़े शहरों में लाखों लोग अकेले रहते हैं. परिवार दूर है. पड़ोसियों से बातचीत कम है. ऐसे माहौल में अगर किसी के साथ कुछ हो जाए, तो कई बार देर से पता चलता है. यही डर इस ऐप की मांग बना रहा है. अब सवाल उठ रहा है, क्या टेक्नोलॉजी रिश्तों की जगह ले सकती है? क्या एक ऐप वो काम कर सकता है, जो पहले परिवार या समाज करता था? कुछ लोग इसे लोनलीनेस टेक कह रहे हैं, यानी टेक्नोलॉजी जो अकेलेपन की समस्या को थोड़ा मैनेजेबल बनाने की कोशिश कर रही है. लेकिन साथ ही यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या हम ऐसी दुनिया की तरफ जा रहे हैं, जहां जिंदा होने का सबूत भी मोबाइल ऐप से देना पड़ेगा. फिलहाल इतना तय है कि 'Are You Dead?' सिर्फ एक ऐप नहीं रहा. यह आज की शहरी ज़िंदगी, टूटते सोशल कनेक्शन और अकेलेपन की डिजिटल तस्वीर बन चुका है. और शायद यही वजह है कि यह कहानी सिर्फ चीन की नहीं, बल्कि आने वाले वक्त में भारत जैसे देशों की भी बन सकती है.

Siri और Apple Intelligence को बेहतर बनाने के लिए Apple-Google की साझेदारी, कॉम्पिटिटर्स बने पार्टनर

मुंबई  AI की रेस में अब Apple ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी उम्मीद शायद बहुत कम लोगों को थी. iPhone बनाने वाली कंपनी ने ऑफिशियली इस बात को कन्फर्म कर दिया है, कि आने वाले समय में Siri और Apple Intelligence को ताकत देने के लिए वह Google के Gemini AI मॉडल्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करेगी. यह नया Siri इस साल 2026 के अंत तक यूजर्स के सामने आ सकता है. ऐसे में यह साझेदारी Apple के सॉफ्टवेयर इतिहास की सबसे अहम डील्स में से एक मानी जा रही है. क्योंकि, पहली बार कंपनी ने खुले तौर पर माना है कि जेनरेटिव AI की रेस में उसकी अपनी टेक्नोलॉजी फिलहाल पीछे रह गई है. ऐसे में Apple ने अपने पुराने कॉम्पिटिटर Google के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया. Apple और Google के बीच क्या तय हुआ है? Apple और Google के बीच हुई यह मल्टी-ईयर पार्टनरशिप, एप्पल के अगले जेनरेशन के Apple Foundation Models को Google के Gemini मॉडल्स पर बेस्ड बनाएगी. इन्हीं,मॉडल्स के सहारे Apple Intelligence के नये फीचर्स तैयार होंगे, जिनमें इस साल के अंत तक आने वाला ज्यादा पर्सनलाइज्ड Siri भी शामिल है. हालांकि, Apple ने साफ किया है कि यूजर्स को जो फीचर्स मिलेंगे, वे पूरी तरह Apple Intelligence के नाम से ही आएंगे. Google सीधे तौर पर Siri नहीं बना रहा और न ही यह डील किसी कंज्यूमर-फेसिंग प्रोडक्ट के लिए है. Gemini सिर्फ एक मजबूत टेक्निकल लेयर की तरह काम करेगा, जो Apple की AI टेक्नोलॉजी के नीचे रहेगा. सबसे अहम बात यह है कि यह समझौता एक्सक्लूसिव नहीं है. Apple ने भविष्य में अन्य AI कंपनियों के साथ काम करने का रास्ता खुला रखा है और अपनी AI मॉडल डेवलपमेंट भी जारी रखेगा. फिलहाल Apple का OpenAI के साथ भी समझौता है, जिसके तहत ChatGPT कई Apple Intelligence फीचर्स को पावर करता है. Apple ने क्यों चुना Google का Gemini? Apple और Google की ओर से जारी बयान में कहा गया है, कि कई ऑप्शंस को देखने के बाद Gemini को चुना गया है. Apple के मुताबिक, Google की AI टेक्नोलॉजी उसके Apple Foundation Models के लिए सबसे मजबूत आधार साबित हुई है. इस मल्टी-ईयर डील के तहत Gemini और Google का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ Siri ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में Apple Intelligence के दूसरे फीचर्स को भी पावर देगा. प्राइवेसी को लेकर Apple की सबसे बड़ी चिंता वहीं, एप्पल-गूगल की इस डील की सबसे नाजुक पहलू है यूजर्स की प्राइवेसी. Apple के लिए यूजर्स प्राइवेसी ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है. ऐसे में Apple ने यह साफ किया है कि यूजर डेटा की प्रोसेसिंग या तो डिवाइस पर होगी या फिर उसकी Private Cloud Compute सर्विस पर. यानी प्राइवेसी को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. Google सिर्फ AI मॉडल्स और टेक्निकल क्षमता दे रहा है, यूजर डेटा को न तो विज्ञापन (AD) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और न ही AI ट्रेनिंग के लिए. बार-बार टलता रहा Siri का AI अपग्रेड एप्पल-गूगल की यह साझेदारी Apple की Plan-B मानी जा रही है. कंपनी ने पहली बार WWDC 2024 में AI-पावर्ड Siri की झलक दिखाई थी. उस वक्त दावा किया गया था, कि नया Siri यूजर के पर्सनल कॉन्टेक्स्ट को समझ सकेगा और बातचीत के जरिए ऐप्स को कंट्रोल करने जैसी खूबियां देगा. लेकिन हकीकत में चीजें इतनी आसान नहीं रहीं. मार्च 2025 में Apple को खुद स्वीकार करना पड़ा कि Siri का यह बड़ा अपग्रेड तय समय पर तैयार नहीं हो पाया है. इसके बाद लॉन्च को 2026 तक टाल दिया गया, जिससे कंपनी की AI रणनीति पर सवाल उठने लगे. अब क्या बदलेगा? Google के Gemini के जुड़ने से Apple को वह तकनीकी आधार मिल गई है, जिसकी उसे कमी महसूस हो रही थी. अगर सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक रहा, तो आने वाला Siri पहले से कहीं ज्यादा समझदार, तेज और नेचुरल बातचीत करने वाला होगा. हालांकि, अब असली परीक्षा यूजर्स के एक्सपीरियंस में होगी, कि क्या Apple, Google की AI ताकत को अपने डिजाइन और प्राइवेसी-फर्स्ट अप्रोच के साथ सही तरह से जोड़ पाएगा या नहीं. अगर यह तालमेल सफल रहा, तो Siri को आखिरकार वह अपग्रेड मिल सकता है, जिसका इंतजार सालों से आईफोन यूजर्स कर रहे हैं.

100 घंटे बैटरी और ANC सपोर्ट के साथ CMF हेडफोन लॉन्च, कीमत ₹6999

नई दिल्ली नथ‍िंग के सब ब्रैंड CMF ने उसके पहले ओवर-ईयर ANC हेडफोन को भारत में लॉन्‍च कर दिया है। इन्‍हें आकर्षक कीमतों में लाया गया है। CMF Headphone Pro को लेकर दावा है कि इनकी बैटरी एक बार चार्ज करने पर 100 घंटे चल जाएगी। ये एक्‍ट‍िव नॉइस कैंसिलेशन (ANC) को सपोर्ट करते हैं और बाहर से आने वाले शोर को 40 डेसिबल तक घटा देते हैं। सीएमएफ ने इनका डिजाइन ऐसा रखा है कि ये भीड़ से अलग नजर आएंगे। CMF Headphone Pro के प्राइस, उपलब्‍धता CMF Headphone Pro की कीमत 7999 रुपये है। इन्‍हें डार्क ग्रे, लाइट ग्रीन और लाइट ग्रे कलर्स में लाया गया है। एक्‍सक्‍लूसिव लॉन्‍च प्राइस के तहत हेडफोन्‍स को 6999 रुपये में लिमिटेड टाइम के लिए बेचा जाएगा। इनकी सेल 20 जनवरी से फ्लिपकार्ट और ऑफलाइन स्‍टोर्स पर शुरू होगी। CMF Headphone Pro के फीचर्स, स्‍पेस‍िफ‍िकेशंस CMF Headphone Pro का डिजाइन भीड़ से अलग आने वाला है। एनबीटी टेक के पास ये हेडफोन आए हैं और लुक्‍स से काफी प्रीमियम और हटकर नजर आते हैं। दावा है कि एक बार चार्ज करके इन्‍हें कई दिनों तक इस्‍तेमाल किया जा सकता है, क्‍योंकि इनमें 100 घंटों का प्‍लेबैक टाइम मिलता है। CMF Headphone Pro में फ‍िजिकल बटन्‍स दिए गए हैं। इनके जरिए वॉल्‍यूम कंट्रोल कर पाएंगे। एक्‍ट‍िव नॉइस कैंस‍िलेशन इस्‍तेमाल कर पाएंगे और म्‍यूजिक को प्‍ले व पॉज कर सकेंगे। एनर्जी स्‍लाइडर को भी इसमें जोड़ा गया है जिसकी मदद से यूजर बास और ट्रेबल के अलग-अलग लेवल्‍स के बीच स्विच कर पाएगा। एक्‍ट‍िव नॉइस कैंसिलेशन को इनकी बड़ी खूबी बताया जा रहा है। दावा है कि इससे बाहर का शोर 40डेसिबल तक कम हो जाएगा। सीएमएफ का कहना है कि उसकी इंजीनिय‍रिंग टीम ने एडैप्‍ट‍िव नॉइस कैंसिलेशन को इस्‍तेमाल किया है जिससे एबिंएंट नॉइस को एडजस्‍ट किया जा सकता है। फास्‍ट चार्ज सपोर्ट CMF Headphone Pro में 40एमएम के ड्राइवर्स लगाए गए हैं। हाई-रेस और LDAC का सपोर्ट है। डिजाइन की बात करें तो इसके कुशन बदले जा सकते हैं। इसमें स्‍पेशल ऑड‍ियो का सपोर्ट है। सिनेमा मोड मिलता है, जिसकी मदद से आपको डॉयलॉग एकदम क्‍लीयर सुनाई देंगे। कन्‍सर्ट मोड के साथ किसी लाइव म्‍यूजिक को बेहतर सुना जा सकेगा। इनकी चार्जिंग क्षमता भी तेज है। 5 मिनट चार्ज करके ANC ऑफ रखकर इन्‍हें 8 घंटे इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इनमें टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट दिया गया है।

iPhone की कीमत गिरी ₹50,249 तक, Samsung-OnePlus यूजर्स को भी राहत

नई दिल्ली अमेजन पर रिपब्लिक डे सेल 16 जनवरी 2026 से शुरू हो रही है। प्राइम मेंबर्स को एक दिन पहले यानी 15 जनवरी से सेल का लाभ मिलेगा। सेल शुरू होने से पहले आईफोन की कीमत रिवील कर दी गई हैं। नए आईफोन पर भी तगड़ा ऑफर है। Amazon Republic Day Sale 2026 की डेट आ गई है। 16 जनवरी, 2026 से शुरू होने वाली सेल में स्मार्टफोन और एक्ससेरीज पर तगड़ा डिस्काउंट मिल रहा है। सेल के दौरान SBI के कार्ड पर 10 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा। सेल पेज, अमेजन पर लाइव हो गया है। साथ ही, आईफोन्स पर मिलने वाले ऑफर्स भी लाइव कर दिए हैं। सेल पेज के अनुसार, आईफोन 15 को सेल में 50229 रुपये में खरीदा जा सकेगा। इसके अलावा, लेटेस्ट आईफोन यानी आईफोन 17 प्रो और आईफोन 17 प्रो मैक्स पर भी ऑफर हैं। आईफोन के साथ-साथ सैमसंग, वनप्लस, रेडमी, रियलमी और वीवो फोन्स की डील्स भी रिवील कर दी गई हैं। आइये, जानते हैं कितने का मिलेगा कौन सा फोन। प्राइम मेंबर्स के लिए एक दिन पहले शुरू होगी सेल अमेजन की सेल 16 जनवरी से शुरू हो जाएगी। प्राइम मेंबर्स एक दिन पहले यानी 15 जनवरी, 2026 से सेल का लाभ उठा पाएंगे। सेल में SBI के कार्ड पर छूट दी जाएगी। साथ ही साथ प्रोडक्ट पर एक्सचेंज ऑफर भी होगा। प्रोडक्ट्स को No Cost EMI पर भी खरीदा जा सकेगा। बता दें कि इसके साथ ही फ्लिपकार्ट पर सेल 17 जनवरी से शुरू हो रही है। 91,294 रुपये में मिलेगा नया आईफोन आईफोन को सस्ते में खरीदने का अच्छा मौका आने वाला है। सेल में आईफोन 15 आपको 50,249 रुपये में मिलेगा। वहीं, आईफोन 17 प्रो को सेल के दौरान 1,25,400 रुपये में खरीद पाएंगे। आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी कीमत 1,34,900 रुपये से शुरू है। इसके अलावा, आईफोन 17 प्रो मैक्स को सेल में 1,40,400 रुपये में खरीदा जा सकेगा। अभी इसकी कीमत 1,49,900 रुपये है। सेल में ऐपल के सबसे पहले फोन आईफोन एयर पर भी अच्छा ऑफर होगा। यह 91,249 रुपये में खरीद पाएंगे। फोन अभी 1,19,900 रुपये में मिल रहा है। ध्यान रखें कि ये कीमतें बैंक डिस्काउंट के साथ हैं। आप अपने पुराने फोन को एक्सचेंज करके और भी कम में नया आईफोन खरीद पाएंगे। इन एंड्रॉयड फोन पर तगड़ा डिस्काउंट आईफोन के अलावा एंड्रॉयड स्मार्टफोन भी छूट में मिलेंगे। Samsung Galaxy M17 को 12,999 रुपये में खरीदा जा सकेगा। iQOO 15 फोन 69,999 रुपये में मिलेगा। इसके अलावा, OnePlus 15 की कीमत 68,999 रुपये हो जाएगी। ओप्पो, वीवो, रेडमी और रियलमी के फोन पर भी ऑफर्स हैं।

14 साल बाद सैमसंग को पीछे छोड़ ऐपल ने बनाई स्मार्टफोन बाजार में सबसे बड़ी स्थिति

नई दिल्ली Apple ने सैमसंग और दूसरे एंड्रॉयड प्लेयर्स को पछाड़ दिया है. इसके साथ ही Apple 2025 में दुनिया का टॉप सेलिंग ब्रांड बन गया है. इसकी वजह iPhone 17 सीरीज की जबरदस्त डिमांड है. पिछले 14 सालों में ये पहला मौका है जब अमेरिकी स्मार्टफोन ब्रांड Apple ने सैमसंग को पीछे छोड़ते हुए टॉप स्पॉट हासिल किया है.  काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, टॉप 5 ब्रांड्स की लिस्ट में ऐपल ने सबसे ज्यादा ईयर-ऑन-ईयर (पिछले साल के मुकाबले इस साल) ग्रोथ हासिल की है. कंपनी 20 परसेंट ग्लोबल मार्केट शेयर के साथ टॉप स्पॉट पर पहुंच गई है.  2025 में जमकर हुई iPhone की बिक्री रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले 2025 में ऐपल की ग्रोथ 10 परसेंट हुई है. इसका मुख्य कारण iPhone 17 सीरीज की सफलता है, जो सितंबर 2025 में लॉन्च हुई है. इसके साथ ही iPhone 16 सीरीज की सेल भी एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से ऐपल को इतनी ग्रोथ मिलती है.  हर बार ये देखा गया है कि ऐपल के नए मॉडल्स के लॉन्च होने पर पुराने मॉडल्स की सेल बढ़ जाती है. इसकी वजह iPhone के पुराने मॉडल्स की कीमत का कम होना और उन पर मिलने वाली डील्स हैं. पिछले साल iPhone 16 भारत का बेस्ट सेलिंग फोन रहा है.  2025 की आखिरी तिमाही में ऐपल ने सबसे ज्यादा बिक्री की है. ऐपल को प्रीमियम डिवाइसेस की मांग बढ़ने का भी फायदा मिला है. पिछले कुछ वक्त से इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा था कि ऐपल बेस्ट सेलिंग स्मार्टफोन की रेस में सैमसंग को पछाड़ देगा. वहीं सैमसंग का मार्केट शेयर अब 19 परसेंट रह गया है.   सैमसंग के अलावा टॉप-5 में कौन से ब्रांड हैं? पिछले साल के मुकाबले इस साल कंपनी ने 5 परसेंट की ग्रोथ हासिल की है. कंपनी की A-सीरीज और Galaxy S25 सीरीज की अच्छी डिमांड की वजह से ब्रांड की सेल बढ़ी है. प्रीमियम सेगमेंट में Galaxy Z Fold 7 की मांग ठीक-ठाक रही है. हालांकि, दुनिया के कुछ एरिया में कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.  सैमसंग और ऐपल के अलावा टॉप 5 लिस्ट में चीनी ब्रांड्स शामिल हैं. तीसरी पोजिशन पर Xiaomi है जिसका ग्लोबल मार्केट शेयर 13 फीसदी है. वहीं Vivo और Oppo क्रमशः चौथे और पांचवे नंबर पर हैं. Vivo की 3 परसेंट ग्रोथ हुई है, जबकि ओपो का मार्केट शेयर गिरा है.

Vivoo स्मार्ट टॉयलेट का नया फीचर: अब हर फ्लश के बाद मिलेगा हेल्थ चेकअप रिपोर्ट

नई दिल्ली अब तक आपने स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड को अपनी सेहत पर नजर रखते देखा था. लेकिन टेक्नोलॉजी अब एक कदम और आगे बढ़ चुकी है. अब आपका टॉयलेट भी आपकी हेल्थ मॉनिटर कर सकता है. CES 2026 में पेश हुई नई स्मार्ट टॉयलेट टेक्नोलॉजी ने दिखा दिया है कि आने वाले समय में बाथरूम सिर्फ साफ होने की जगह नहीं, बल्कि डेली हेल्थ चेक-अप पॉइंट बन सकता है. इस पूरे ट्रेंड में सबसे ज्यादा चर्चा में रही अमेरिकी हेल्थ-टेक कंपनी Vivoo. आप इसे स्मार्टफोन मेकर Vivo ना समझें, क्योंकि Vivoo एक अलग अमेरिकी कंपनी है. बहरहाल, कंपनी यानी Vivoo ने CES में Vivoo Smart Toilet Sensor पेश किया है. यह कोई पूरा नया टॉयलेट नहीं, बल्कि एक छोटा डिवाइस है जिसे किसी भी सामान्य टॉयलेट के रिम पर क्लिप किया जा सकता है. हर बार जब यूज़र टॉयलेट इस्तेमाल करता है, यह सेंसर पेशाब के सैंपल को ऑटोमैटिकली स्कैन करता है. इसके अंदर लगे ऑप्टिकल सेंसर यूरिन की डेंसिटी और कलर को पढ़ते हैं और इससे पता चलता है कि शरीर में पानी की मात्रा सही है या नहीं. यह सेंसर ब्लूटूथ से मोबाइल ऐप से जुड़ता है. हर फ्लश के बाद ऐप पर हाईड्रेशन रिपोर्ट आ जाती है. दिन, हफ्ते और महीने का ट्रेंड भी दिखता है कि कब शरीर में पानी की कमी हुई और कब हाईड्रेशन सही रहा. कंपनी के मुताबिक यह डिवाइस खासतौर पर फिटनेस फॉलो करने वाले लोगों, बुजुर्गों और उन यूज़र्स के लिए बनाया गया है जिन्हें किडनी या यूरिन से जुड़ी हेल्थ पर लगातार नजर रखनी होती है. कीमत करीब 100 अमेरिकी डॉलर के आसपास रखी गई है, यानी भारतीय बाजार के हिसाब से 8-9 हजार रुपये.  बेसिक ऐप फ्री है, जबकि एडवांस्ड ट्रेंड एनालिसिस के लिए बाद में सब्सक्रिप्शन मॉडल भी रखा गया है. CES में कुछ दूसरी कंपनियों ने इससे भी आगे की टेक्नोलॉजी दिखाई. ऐसे फुल स्मार्ट टॉयलेट सिस्टम, जो सिर्फ हाईड्रेशन ही नहीं बल्कि यूरीन और स्टूल से हेल्थ पैटर्न भी पहचान सकते हैं. इससे शुरुआती स्तर पर किडनी प्रॉब्लम, इंफेक्शन या डाइजेशन से जुड़ी गड़बड़ी के संकेत मिल सकते हैं. आसान भाषा में कहें तो बाथरूम से निकलने वाला डेटा अब शरीर के अंदर की कहानी बता सकता है. अब एक नया सवाल भी उठ रहा है. जब स्मार्टवॉच, स्मार्ट स्पीकर और हेल्थ ऐप पहले ही हमारा पर्सनल डेटा इकट्ठा कर रहे हैं, तो स्मार्ट टॉयलेट से निकलने वाला हेल्थ डेटा भी प्राइवेसी का मुद्दा बनेगा. कंपनियां दावा कर रही हैं कि डेटा एन्क्रिप्टेड रहेगा और यूज़र की अनुमति के बिना शेयर नहीं होगा. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि हेल्थ डेटा सबसे संवेदनशील जानकारी में से एक है, इसलिए इस पर भरोसा और नियम दोनों जरूरी होंगे. फिलहाल इतना तय है कि टेक्नोलॉजी अब शरीर के सबसे निजी हिस्सों तक पहुंच चुकी है. आने वाले समय में डॉक्टर के पास जाने से पहले पहला हेल्थ चेक-अप शायद आपके अपने बाथरूम में ही हो जाएगा. और यह बदलाव हेल्थकेयर की दुनिया में उतना ही बड़ा हो सकता है, जितना कभी स्मार्टवॉच का आना था ये देखना दिलचस्प होगा.   

बार-बार पेशाब की समस्या पुरुषों के लिए खतरे की घंटी, जानलेवा रोग का हो सकता है शुरुआती लक्षण

नई दिल्ली अगर किसी पुरुष को बार-बार पेशाब आने की समस्या हो रही है और वह इसे बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर रहा है, तो यह लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, खासतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में यह प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इलाज जटिल हो सकता है। शुरुआती दौर में नहीं दिखते साफ लक्षण प्रोस्टेट कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर साफ नजर नहीं आते। कई मामलों में बीमारी बिना किसी खास परेशानी के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। यही कारण है कि थोड़ी-सी भी शंका होने पर जांच कराना जरूरी माना जाता है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज बार-बार पेशाब आना, पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब शुरू या बंद करने में दिक्कत और यह महसूस होना कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ—इन संकेतों को अक्सर लोग सामान्य बुढ़ापे से जोड़ देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं। खून आना हो सकता है गंभीर संकेत पेशाब या वीर्य (स्पर्म) में खून आना एक गंभीर लक्षण है, जिसे किसी भी हालत में हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई पुरुष इसे अस्थायी समस्या मानकर टाल देते हैं, जबकि यह कैंसर की ओर इशारा कर सकता है।   मिलते-जुलते लक्षण, लेकिन फर्क समझना जरूरी प्रोस्टेट बढ़ने (BPH), यूरिन इंफेक्शन और प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। फर्क यह है कि इंफेक्शन में जलन, बुखार या पेशाब में बदबू हो सकती है। BPH में आमतौर पर खून नहीं आता, जबकि कैंसर में समय के साथ लक्षण लगातार गंभीर होते जाते हैं। देर से दिखने वाले संकेत कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो अक्सर नजर से छूट जाते हैं, जैसे कूल्हे या कमर में लगातार दर्द, बिना वजह वजन कम होना और हमेशा थकान महसूस होना। ये संकेत आमतौर पर तब सामने आते हैं, जब बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है। किन लोगों में ज्यादा खतरा प्रोस्टेट कैंसर के सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन उम्र, जेनेटिक कारण और हार्मोनल बदलाव इसकी अहम वजह माने जाते हैं। इसके अलावा मोटापा, धूम्रपान, शराब और खराब जीवनशैली भी जोखिम बढ़ा सकती है। जांच ही है सबसे बड़ा बचाव विशेषज्ञों की सलाह है कि 50 साल की उम्र के बाद पुरुषों को नियमित जांच जरूर करानी चाहिए, चाहे कोई लक्षण हों या नहीं। अगर परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, तो जांच और भी पहले शुरू करनी चाहिए। समय पर जांच और सतर्कता से इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।