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नई रिसर्च में खुलासा: विटामिन B3 (Nicotinamide) से स्किन कैंसर का खतरा 14% तक घट सकता है

  नई दिल्ली कैंसर का नाम सुनते ही लोग खौफ में आ जाते हैं. इस बीमारी से होने वाले जान के खतरे के साथ ही लोगों को इसके इलाज में खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम करने का भी स्ट्रेस होने लगता है. दरअसल, इसका इलाज बहुत महंगा होता है और उसमें लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. यहां तक कि इसकी टेस्टिंग भी बहुत महंगी होती है.  ऐसे में अक्सर लोग सोचते हैं कि कैंसर से बचने के लिए महंगी दवाइयां, बड़े-बड़े इलाज या मुश्किल थेरेपी की जरूरत होती है. लेकिन अगर हम कहें कि स्किन कैंसर जैसे खतरनाक और दुनिया के सबसे आम कैंसर से बचाव एक सस्ती, रोज ली जाने वाली विटामिन की गोली से हो सकता है, तो? सुनने में हैरानी जरूर होती है, लेकिन एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर, जस्टिन स्टेबिंग के अनुसार, एक नई रिसर्च ने यही साबित किया है. है ना चौंकाने वाली बात? चलिए जानते हैं कौन सा है ये विटामिन और कैसे ये स्किन कैंसर के खतरे को कम करता है.   कौस सा विटामिन करता है स्किन कैंसर से बचाव? Nicotinamide, यानी विटामिन B3 का बहुत ही साधारण और सस्ता रूप, स्किन कैंसर के खतरे को कम कर सकता है. खास बात ये है कि इसका फायदा उन लोगों में और भी ज्यादा है जिन्हें पहले से एक बार स्किन कैंसर हो चुका है. इस स्टडी ने स्किन कैंसर प्रिवेंशन को एक नया मोड़ दे दिया है और डॉक्टरों को अपने पुराने तरीकों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है. कैसे काम करता है Nicotinamide? Nicotinamide विटामिन B3 का एक रूप है, जो शरीर की एनर्जी बनाने में मदद करता है और स्किन को रिपेयर करने की प्रोसेस को तेज करता है. ये UV किरणों से हुए डैमेज को ठीक करने में मददगार होता है और स्किन में होने वाली सूजन को कम करता है. इसके अलावा, ये इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत बनाता है कि वो खराब सेल्स को जल्दी पहचान सके. इस तरह, ये विटामिन स्किन को कैंसर बनने से पहले ही लड़ने की ताकत देता है. क्यों बढ़ रहा है स्किन कैंसर? स्किन कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है और हर साल इसके लाखों नए केस सामने आते हैं. खासकर बेसल सेल कार्सिनोमा और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ये कैंसर ज्यादा धूप में रहने, गोरी स्किन, बढ़ती उम्र और UV किरणों के ज्यादा एक्सपोजर से जुड़ा होता है. सबसे चिंताजनक बात ये है कि जिन्हें एक बार स्किन कैंसर हो चुका हो, उनमें इसके दोबारा होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कितने लोगों पर की गई रिसर्च? नई रिसर्च 33,000 से ज्यादा अमेरिकी वेटरंस पर की गई थी. इसमें 12,000 लोग Nicotinamide (500 mg, दिन में दो बार) ले रहे थे, जबकि 21,000 लोग कोई सप्लीमेंट नहीं ले रहे थे. इतने बड़े ग्रुप पर की गई स्टडी ने स्किन कैंसर प्रिवेंशन को लेकर बेहद अहम जानकारी सामने रखी. क्या मिला नतीजा? रिसर्च के नतीजे हैरान कर देने वाले थे. Nicotinamide लेने वाले लोगों में नया स्किन कैंसर होने का खतरा लगभग 14% कम पाया गया. यानी सिर्फ एक सस्ती विटामिन की नियमित खुराक स्किन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. ये भी सामने आया कि अगर ये सप्लीमेंट पहली बार स्किन कैंसर डाइजनोज होने के तुरंत बाद शुरू किया जाए, तो दूसरी बार ये कैंसर होने का खतरा 54% तक कम हो सकता है. यह फायदा खास तौर पर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा में सबसे ज्यादा देखा गया. सबसे बड़ा फायदा कब मिलता है? स्टडी ने साफ दिखाया कि इसका प्रभाव तभी सबसे ज्यादा होता है जब Nicotinamide को सही समय पर यानी पहले कैंसर के तुरंत बाद शुरू किया जाए. इससे शरीर को कैंसर बनने से पहले ही उससे लड़ने की ताकत मिलती है. क्या ये सनस्क्रीन का ऑप्शन है?  Nicotinamide स्किन कैंसर रोकने का एक नया और असरदार तरीका जरूर है, लेकिन ये कभी भी सनस्क्रीन का ऑप्शन नहीं हो सकता. डॉक्टर साफ कहते हैं कि आपको अब भी धूप में कम समय बिताना चाहिए, रोज सनस्क्रीन लगानी चाहिए, टोपी और फुल-स्लीव कपड़े पहनने चाहिए और स्किन की नियमित चेकअप करानी चाहिए. Nicotinamide सिर्फ एक extra protection की तरह काम करता है, धूप से बचाव की बुनियादी आदतों को ये रिप्लेस नहीं करता. इतना खास क्यों है ये विटामिन? इस विटामिन की खासियत इसकी आसान उपलब्धता और सुरक्षा में है. ये बेहद सस्ता है, आसानी से मिल जाता है और रोजाना बिना किसी परेशानी के लिया जा सकता है. सबसे बड़ी बात, ये स्किन कैंसर के दोबारा होने के खतरे को कम करने में प्रभावी साबित हुआ है. कई महंगी दवाइयों और बीमारी के इलाज की तुलना में Nicotinamide एक आसान, सुरक्षित और किफायती ऑप्शन है.  कुछ बातें अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हैं. ये स्टडी एक ऑब्जर्वेशनल रिसर्च थी, जिसका मतलब है कि इसे मेडिकल रिकॉर्ड्स के आधार पर किया गया था, न कि किसी कंट्रोल्ड ट्रायल की तरह जहां सभी परिस्थितियां तय होती हैं. इसी वजह से कुछ सीमाएं बनी रहती हैं. स्टडी में ज्यादातर गोरी स्किन वाले पुरुष शामिल थे, इसलिए अलग-अलग नस्लों, महिलाओं और युवा लोगों पर इसका असर कैसा होगा, यह अभी पता नहीं है. इसके अलावा, जिन लोगों को कभी स्किन कैंसर नहीं हुआ, उन पर Nicotinamide का क्या प्रभाव होगा, यह भी अभी क्लियर नहीं है.

Hero VIDA ने लॉन्च की बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड मोटरसाइकिल VIDA DIRT.E K3, शुरुआती कीमत 69,990 रुपये

मुंबई   इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero VIDA ने अपनी पहली ऑफ-रोड मोटरसाइकिल VIDA DIRT.E K3 को लॉन्च कर दिया है. इस मोटरसाइकिल को खास तौर पर 4 से 10 साल के युवा राइडर्स के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसका मकसद बच्चों को बड़ी और ज़्यादा पावरफुल मशीनों पर जाने से पहले, मोटरसाइकिलिंग में एक सुरक्षित, काबिल और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला एंट्री पॉइंट देना है. Vida DIRT.E K3 मोटरसाइकिल की खास चीजों की बात करें तो, इसमें एक थ्री-पोज़िशन एडजस्टमेंट मैकेनिज्म दिया गया है, जिससे आप सिर्फ़ एक एलन-की की मदद से छोटे, मीडियम और बड़े साइज़ के बीच स्विच कर सकते हैं. यह सिस्टम सीट की हाइट और व्हीलबेस दोनों को एडजस्ट करता है, जिससे यह पक्का होता है कि बाइक बच्चे की हाइट के साथ बढ़ाई या कम की जा सकती है और कई सालों तक इस्तेमाल करने के लायक रहती है, बजाय इसके कि वह जल्दी छोटी पड़ जाए. कंपनी ने बाइक को लेकर बताया कि जब बच्चा ऐसे स्किल लेवल पर पहुंच जाता है, जहां फ्रंट और रियर सस्पेंशन की ज़रूरत होती है, तो उन्हें ऑप्शनल एक्सेसरीज़ के तौर पर खरीदा जा सकता है. Vida DIRT.E K3 की बैटरी नई DIRT.E K3 में कंपनी ने 500W की मोटर इस्तेमाल की है, जिससे यह 23-25 ​​किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड तक पहुंच सकती है. इसकी रिमूवेबल बैटरी को 0 से 100 प्रतिशत चार्ज होने में लगभग तीन घंटे का समय लगता है और यह इलाके और राइडर के चलाने के तरीके के आधार पर तीन घंटे तक चलती है. इस मोटरसाइकिल में तीन राइड मोड – बिगिनर, अमेच्योर और प्रो – दिए गए हैं, जो स्पीड को क्रमशः 8 किलोमीटर प्रति घंटे, 16 किलोमीटर प्रति घंटे और 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित करते हैं. माता-पिता एक खास ऐप के ज़रिए इन सेटिंग्स को एक्सेस कर सकते हैं, जिससे वे स्पीड लिमिट सेट कर सकते हैं, कुछ मोड लॉक कर सकते हैं और अपने बच्चे के राइडिंग सेशन पर नज़र रख सकते हैं. चूंकि यह मोटरसाइकिल बच्चों के लिए है, इसलिए VIDA ने इसमें कई सेफ्टी-फोकस्ड एलिमेंट भी शामिल किए हैं. इनमें मज़बूत वायरिंग, छोटे हाथों के लिए ब्रेक लीवर, खास इम्पैक्ट वाली जगहों पर एनर्जी-एब्जॉर्बिंग मटीरियल और एक इमरजेंसी कटऑफ टेदर भी शामिल है, जो राइडर के गिरने पर मोटर को बंद कर देता है. कीमत की बात करें तो VIDA DIRT.E K3 की शुरुआती कीमत 69,990 रुपये रखी गई है, और इसे आंध्र प्रदेश में VIDA के तिरुपति प्लांट में बनाया जाएगा. शुरुआती फेस में इस मोटरसाइकिल की डिलीवरी दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, जयपुर और कालीकट में शुरू की जाएगी.

6 घंटे की नींद से शरीर पर पड़ रहे हैं गंभीर असर, डॉक्टरों ने दी चेतावनी- नींद है शरीर का रीसेट बटन

इंदौर  बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना का एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह बताते हैं कि उनकी नींद अधिकतम छह घंटे ही हो पाती है। यह बात भले ही सामान्य लगे, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ औसतन छह घंटे की नींद युवाओं के लिए गंभीर खतरे का संकेत मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छह घंटे की नींद को सामान्य मानना एक भ्रम है। कम नींद दिमाग और शरीर पर धीमे जहर की तरह असर डालती है। इसका तात्कालिक प्रभाव एकाग्रता में कमी, कमजोर निर्णय क्षमता, मूड में बदलाव और धीमे रिएक्शन टाइम के रूप में दिखता है, जबकि भीतर ही भीतर इम्यून सिस्टम कमजोर और हार्मोनल संतुलन बिगड़ता जाता है। इसी वजह से आगे चलकर अल्जाइमर, डिमेंशिया और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इंदौर में आयोजित न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी आफ इंडिया की 73वीं राष्ट्रीय कान्फ्रेंस ‘एनएसआइकान-2025’ में सम्मिलित हुए विशेषज्ञों ने कम नींद को चिंताजनक बताया। उनका सुझाव सात से आठ घंटे की औसत नींद का है। शरीर और दिमाग के मरम्मत का समय रात की नींद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में 33 वर्ष सेवाएं दे चुके प्रोफेसर सुरेश्वर मोहंती ने एनएसआईकान में कहा कि शरीर और दिमाग दोनों की मरम्मत का असली समय रात की नींद ही होता है। जब व्यक्ति लगातार छह घंटे से कम या केवल छह घंटे की नींद पर निर्भर रहता है, तो हृदय व मस्तिष्क संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। उनका मानना है कि एक स्वस्थ आदमी को सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लेनी ही चाहिए, ताकि उसका ब्रेन अपनी पूरी क्षमता से काम कर सके और मेटाबालिज्म संतुलित रहे। नींद शरीर का रीसेट बटन फोर्टिस मोहाली में न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. वीके खोसला के अनुसार, लोग समझते हैं कि कम सोने से प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। नींद शरीर का रीसेट बटन है। अगर इसे कम कर देंगे, तो सेहत को नुकसान ही होगा। वह सुझाव देते हैं कि प्रतिदिन सात से नौ घंटे की अच्छी नींद से सेहत भी ठीक रहती है और काम करने की क्षमता भी बेहतर होती है। ऐसे नुकसान पहुंचाती है सिर्फ छह घंटे की नींद     दिमाग में टॉक्सिन : ग्लिम्फेटिक सिस्टम पूरी सफाई नहीं कर पाता।     कमजोर याददाश्त : प्रीफ्रंटल कार्टेक्स की गतिविधि घटती है। इसका असर सोचने-समझने पर पड़ता है। स्मरणशक्ति और निर्णय क्षमता कमजोर हो जाती है।     स्ट्रोक-हार्ट का खतरा : कम नींद लेने वालों में स्ट्रोक का जोखिम कई गुना अधिक होता है।     मूड स्विंग व तनाव : सेरोटोनिन-डोपामिन गड़बड़ाते हैं, एंग्जायटी-डिप्रेशन बढ़ता है।     इम्यून सिस्टम कमजोर : साइटोकाइन्स कम बनते हैं, संक्रमण जल्दी पकड़ता है।     दिमाग जल्दी बूढ़ा होता है : न्यूरान डैमेज और ग्रे मैटर लास तेज होता है। आदर्श नींद कितनी होनी चाहिए?     सामान्य व्यक्ति (18-60 वर्ष): सात से नौ घंटे प्रतिदिन     वरिष्ठ नागरिक (60+): सात से आठ घंटे     किशोर (13-18 वर्ष): आठ से 10 घंटे (स्रोत- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) जिससे प्यार करते हो, उसे सोने दो…     मुझे सोना पसंद है। अगर आप किसी से वाकई प्यार करते हो, तो उसे सोने दो। नींद से उठाने वाला आपका सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है। मैं छह घंटे से ज्यादा नहीं सो पाता हूं। – आयुष्मान खुराना, अभिनेता का कथन  

Google Pixel 10a के फीचर्स लीक, सस्ते दाम में iPhone 16e से मुकाबला करेगा नया स्मार्टफोन

नई दिल्ली Google Pixel 10a के लॉन्च होने में अभी वक्त है. हालांकि, स्मार्टफोन के सभी स्पेसिफिकेशन्स लीक हो गए हैं. इस फोन को कंपनी अगले साल लॉन्च कर सकती है, जो कम कीमत में फ्लैगशिप फीचर्स के साथ आता है. लीक डिटेल्स से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये फोन जल्द ही लॉन्च हो सकता है.  गूगल का मिड रेंज डिवाइस 6.3-inch के AMOLED डिस्प्ले के साथ आएगा, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करेगा. फोन को पावर देने के लिए 5100mAh की बैटरी दी जा सकती है. ये फोन Pixel 9a का सक्सेसर होगा, जो मार्च 2025 में लॉन्च हुआ था. आइए जानते हैं इस फोन की खास बातें.  क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स?  लीक रिपोर्ट्स की मानें, तो Google Pixel 10a में 6.28-inch का FHD+ OLED HDR डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आएगा. स्क्रीन की पीक ब्राइटनेस 2000 Nits की होगी. फोन Google Tensor G4 प्रोसेसर के साथ आएगा और इसमें Titan M2 सिक्योरिटी चिप दिया जा सकता है.  इसमें 8GB RAM और 128GB/ 256GB स्टोरेज का विकल्प मिलता है. फोन Android 16 के साथ लॉन्च होगा. कंपनी इसे सात साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स ऑफर करेगी. डुअल सिम सपोर्ट वाले इस फोन को कंपनी 50 हजार रुपये के बजट में लॉन्च कर सकती है.  हैंडसेट 48MP के मेन लेंस और 13MP के अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस वाले डुअल रियर कैमरा सेटअप के साथ आएगा. वहीं फ्रंट में कंपनी ने 13MP का सेल्फी कैमरा दिया है. डिवाइस की प्रोटेक्शन के लिए इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिल रहा है. स्मार्टफोन को पावर देने के लिए 5100mAh की दी गई है. फोन वायरलेस चार्जिंग के साथ आएगा.  कितनी होगी कीमत?  स्मार्टफोन की कीमत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी इसे अगले साल की पहली तिमाही में लॉन्च कर सकती है. लीक्स की मानें, तो कंपनी इस फोन को 499 डॉलर (लगभग 44 हजार रुपये) की कीमत पर लॉन्च कर सकती है. ये कीमत फोन के 128GB स्टोरेज वेरिएंट की होगी. हालांकि, भारत में Pixel 10a की कीमत 50 हजार रुपये से ज्यादा होगी.

होंठों से जानें शरीर की छिपी बीमारियां, क्या आप पहचान रहे हैं इन अहम संकेतों को?”

हम सभी चाहते हैं क‍ि हमारे होंठों का रंग गुलाबी हो। लेक‍िन कुछ कमी और अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के कारण होंठों का रंग बदल जाता है। लेक‍िन क्‍या आपको मालूम है क‍ि ये हमारी सेहत का आईना भी हैं। आमतौर पर हमारे होंठ नरम, चिकने और गुलाबी दिखते हैं, जो सही पानी और पोषण का संकेत देते हैं। अगर इनमें जरा भी बदलाव द‍िखे तो ये कई बीमार‍ियों का संकेत भी हो सकते हैं। आज का हमारा लेख भी इसी व‍िषय पर है। हम आपको बताएंगे क‍ि हमारे होंठ कौन-कौन सी बीमारी होने का संकेत देते हैं। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपी एक स्‍टडी बताती है क‍ि होंठों का रंग और बनावट दिल और सांस की सेहत से गहराई से जुड़े होते हैं। इसके अलावा हमारे होंठ ओवरऑल सेहत का संकेत भी देते हैं। होंठ का सफेद या नीला होना बहुत सफेद या नीले होंठ खून में ऑक्सीजन की कमी का संकेत देते हैं। ये एनीमिया, सांस की दिक्कत या ब्‍लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी का संकेत हो सकते हैं। होंठ का ड्राई होना ठंड के मौसम में हमारे होंठ अक्‍सर ड्राई हो जाते हैं। लेकिन लगातार ड्राईनेस की समस्‍या है तो ये पानी की कमी, विटामिन की कमी खासकर व‍िटाम‍िन बी या कुपोषण की वजह से भी हो सकता है। NIH के अनुसार, होंठ सबसे जल्दी डिहाइड्रेशन और पोषण की कमी दिखा देते हैं। होंठों में सूजन होंठों की सूजन एलर्जी, इन्फेक्शन या सूजन वाली बीमारियों के कारण हो सकती है। अचानक या बार-बार सूजन होना एलर्जी या एंजियोएडेमा जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। छाले या घाव होंठों पर छाले या घाव अक्सर वायरल इन्फेक्शन की वजह से होते हैं। बार-बार छाले आना इम्यून सिस्टम की कमजोरी या तनाव का असर हो सकता है। होंठों के क‍िनारों पर दरार होंठों के किनारों पर दरारें (एंगुलर चेलाइटिस) आयरन या विटामिन बी की कमी या फंगल इन्फेक्शन से जुड़ी हो सकती हैं। हेल्‍दी डाइट और होंठों की सफाई से इसे रोका जा सकता है। होंठ का रंग बदलना होंठों पर काले धब्बे या रंग बदलना हार्मोन की गड़बड़ी, विटामिन की कमी या दवाओं का असर हो सकता है। कई बार ये शरीर के अंदर चल रही परेशानी का शुरुआती संकेत भी होते हैं। होंठों को हेल्‍दी रखने के ट‍िप्‍स     पानी ज्यादा पिएं     लिप बाम और SPF लगाएं     होंठ चाटने से बचें     हेल्‍दी डाइट लें     हाइजीन मेंटेन करें  

Aston Martin ने Timex के साथ मिलकर भारत में पेश किया शानदार प्रीमियम वॉच कलेक्शन

मुंबई  कुछ समय पहले ही स्पोर्ट्स मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी Ducati India ने घड़ी निर्माता कंपनी Titan के साथ साझेदारी कर अपनी प्रीमियम घड़ियों की रेंज बाजार में उतारी थी. अब आइकॉनिक स्पोर्ट्सकार बनाने वाली कंपनी Aston Martin ने Timex के साथ मिलकर भारत में घड़ियों का एक खास कलेक्शन लॉन्च किया है. यह पहली बार है जब यह कंपनी फाइन वॉचमेकिंग की दुनिया में कदम रख रहा है. यह कलेक्शन Aston Martin के आइकॉनिक डिज़ाइन लैंग्वेज को सड़क से ग्राहकों की कलाई तक दो पिलर्स – टाइमलेस और आइकॉन के ज़रिए लाता है. इन घड़ियों में टाइटेनियम और कार्बन फाइबर जैसे प्रीमियम मटीरियल के साथ-साथ ऑटोमोटिव से प्रेरित डिटेलिंग भी देखने को मिलती है. कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार, यह क्यूरेटेड डिज़ाइन लैंग्वेज कलेक्टरों, शौकीनों और स्टाइल पसंद करने वालों सभी को पसंद आएगी. जहां टाइमलेस सीरीज़ में Aston Martin की विरासत का सम्मान करने वाली विंटेज-प्रेरित घड़ियां शामिल हैं, वहीं आइकॉन एक आधुनिक लग्ज़री रेंज मिलती है, जो इस ब्रांड के शानदार समकालीन प्रोफ़ाइल को दिखाती है. टाइटेनियम, कार्बन फ़ाइबर और सिलिकॉन स्ट्रैप जैसे सिग्नेचर मटीरियल इस रेंज में शामिल हैं, साथ ही कार के इंटीरियर से प्रेरित स्टिचिंग पैटर्न और व्हील रिम के आकार में फ़िनिश किए गए डायल भी हैं. इसका मकसद पहनने वाले और परफॉर्मेंस की दुनिया के बीच एक गहरा जुड़ाव बनाना है. कंपनी ने इन घड़ियों की कीमत 17,995 रुपये से 57,995 रुपये के बीच रखी है. इस कलेक्शन का मुख्य आकर्षण TRG ऑटोमैटिक है, जो एक स्केलेटन-डायल मास्टरपीस है, जिसमें जापानी ऑटोमैटिक मूवमेंट लगाया गया है और यह हल्के टाइटेनियम टोन्यू केस में बना हुआ है. इसका खुला स्ट्रक्चर Aston Martin के सिग्नेचर रिम्स को श्रद्धांजलि देता है, जबकि इसका कार्बन फाइबर केस फ्लैंक और परफॉर्मेंस-टेक्सचर्ड स्ट्रैप सटीकता और पावर दोनों का एहसास दिलाते हैं. Timex Group India के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक छाबड़ा ने कहा कि, "हम भारत में एस्टन मार्टिन के साथ इस पार्टनरशिप को लेकर बहुत उत्साहित हैं, उनकी विरासत और खास डिज़ाइन हमारे क्राफ़्ट्समैनशिप और इनोवेशन के प्रति कमिटमेंट से पूरी तरह मेल खाते हैं, जिससे एक ऐसा टाइमपीस कलेक्शन पेश करने के रोमांचक मौके मिलेंगे जो दोनों ब्रांड्स की ताकत और प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर हमारे लगातार फोकस को दिखाता है." Aston Martin के ब्रांड डाइवर्सिफिकेशन के डायरेक्टर स्टेफानो सैपोरेटी ने कहा कि, "यह कलेक्शन Aston Martin की हाई-परफॉर्मेंस आर्टिस्टिक और सोफिस्टिकेटेड डिज़ाइन के असली सार को एक पर्सनल, पहनने लायक रूप में पेश करता है। यह उन लोगों के लिए है जो हर दिन कुछ असाधारण चलाते हैं."

Skin Itching = Kidney Problem? डॉक्टर ने बताया क्यों बढ़ सकती है गंभीर बीमारी का जोखिम

नई दिल्ली  किडनी हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी अंग है। यह खून को साफ करने, मिनरल संतुलन बनाए रखने और फ्लूइड बैलेंस नियंत्रित करने में मदद करती है। लेकिन जब किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है, तो शरीर में बढ़ते टॉक्सिन कई बार सबसे पहले त्वचा पर दिखाई देते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि त्वचा पर नजर आने वाले बदलाव क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। त्वचा का अत्यधिक सूखापन बहुत रूखी, खुरदरी त्वचा CKD का आम संकेत है। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, CKD वाले लगभग 72 प्रतिशत लोगों में जेरोसिस यानी अत्यधिक सूखी त्वचा पाई गई। किडनी हमारे पसीने और ऑयल ग्लैंड को नियंत्रित करती है, इसलिए इसकी कमजोरी से त्वचा सूखने लगती है। नुकसान: सूखी त्वचा में दरारें पड़ सकती हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। रोजाना हल्के मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें। लंबे समय तक गर्म पानी से नहाने से बचें। कॉटन जैसे सांस लेने वाले कपड़े पहनें। यदि सूखापन लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से किडनी की जांच कराना जरूरी है। लगातार खुजली होना किडनी की कमजोरी में लगातार और तीव्र खुजली आम समस्या है। जब शरीर में यूरिया और अपशिष्ट बढ़ते हैं, तो त्वचा के नर्व्स प्रभावित होते हैं, जिससे खुजली बढ़ती है। संख्या: लगभग 56% CKD मरीज इस समस्या का सामना करते हैं। नुकसान: लगातार खुजलाने से त्वचा पर घाव, निशान या मोटे पैच बन सकते हैं। कभी-कभी खुजली इतनी बढ़ जाती है कि नींद और रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं। इलाज: डॉक्टर टॉपिकल क्रीम, UVB थेरेपी या ओटमील बाथ की सलाह दे सकते हैं। सबसे जरूरी है किडनी की समस्या को नियंत्रित करना। त्वचा पर दाने, रैशेज या बैंगनी पैच किडनी ज्यादा खराब होने पर त्वचा पर रैशेज या छोटे-छोटे बम्प्स दिखाई देने लगते हैं। जब खून में अपशिष्ट बढ़ता है, तो ये बम्प्स खुजली वाले पैच में बदल जाते हैं। संभावित संकेत: रैश, बैंगनी धब्बे या अल्सर, खासकर पैरों पर। गंभीर स्थिति में कैल्सिफिलैक्सिस, जिसमें त्वचा कठोर और अल्सर जैसी हो जाती है। संख्या: लगभग 43% CKD मरीज फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी जूझते हैं। सुरक्षा: माइल्ड, फ्रेगरेंस-फ्री साबुन का इस्तेमाल करें। त्वचा को रगड़ने की बजाय हल्के हाथों से पोंछें। यदि रैश बढ़े, दर्द हो या पस निकलने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।  

आइसर के सहयोग से अब 45 मिनट में मिलेगी DNA जांच की रिपोर्ट, समय और पैसे की होगी बचत

पंचकूला  DNA जांच रिपोर्ट के लिए अब आपको 24 या 72 घंटे तक का इंतजार नहीं करना होगा. ये रिपोर्ट आपको अब 45 मिनट में मिल जाएगी. वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसी किट तैयार की है, जिससे डीएनए टेस्ट का काम आसान हो जाएगा. इस किट से 13 की जगह सिर्फ तीन टेस्ट लेने होंगे. इससे समय की बचत तो होगी ही, साथ में खर्च भी 60 से 70 प्रतिशत तक कम आएगा. खास बात ये है कि इस किट को पीसीआर (पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) के लिए भी तैयार किया जा रहा है. जिससे टाइफाइड, तपेदिक, इन्फ्लूएंजा, मलेरिया और डेंगू की जांच भी हो सकेगी. अब 45 मिनट में होगी DNA की जांच: मोहाली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च यानी आइसर के सहयोग से इंडोक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक जिम्मी भांबरा की टीम ने इस किट को तैयार किया है. वैज्ञानिक इस किट को पंचकूला में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में लेकर आए हैं. इस विशेष किट को आइसर की लैब में तैयार किया गया है. इसके तहत सैंपल तैयार करने के लिए इन्नो एक्सट्रैक्ट (तरल रूप) और लैब के काम के लिए विशेष यंत्र (इंस्ट्रूमेंट) विकसित किए गए हैं, जो चंद मिनटों में डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) जांच की रिपोर्ट दे देंगे. इस तरह काम करती है तकनीक: इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइसर) टीम के सदस्य सचिन वर्मा ने बताया "अभी तक रक्त के नमूने लेने के बाद डीएनए निकालने के लिए 13 से 14 जांच की जाती है. जिसमें चार से 6 घंटे का वक्त लग जाता है. इस नई तकनीक में खून से डीएनए निकालने के लिए इन्नो एक्सट्रैक्ट यानी तरल रूप का इस्तेमाल किया जाता है. इसके तहत दस मिनट के अंदर दो से तीन बार जांच करने के बाद ही डीएनए अलग हो जाएगा." पुराने तरीके से लगता है ज्यादा वक्त: इससे पहले जांच के लिए डीएनए सैंपल को लैब जाना पड़ता है. लैब के अंदर डीएनए को एक निश्चित तापमान (-40 डिग्री सेल्सियस) में रखना होता है. निर्धारित तापमान पर आने के बाद इसकी जांच होती है. जिसमें 12 से 15 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन नई तकनीक के तहत लैब का काम नए यंत्र से 15 मिनट के अंदर आ जाएगा. इस तरह ये पूरी प्रक्रिया महज आधा घंटा से लेकर 45 मिनटों में पूरी होगी. 'पैसे की भी होगी बचत': सचिन वर्मा ने बताया कि "मौजूदा समय में बाजार में उपलब्ध मशीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये है और एक टेस्ट 800 से एक हजार रुपये में होता है, जबकि उनकी टीम द्वारा तैयार इस मशीन की कीमत करीब ढाई लाख रुपये है और टेस्ट भी 300-400 रुपये में हो सकेगा. इसके अलावा डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट के लिए जहां पहले 24 से 72 घंटों तक इंतजार करना पड़ता था, वो समय घटकर अब 35 से 45 मिनट रह गया है." '13 चरणों की जगह महज 3 चरण': सचिन वर्मा ने बताया कि "डीएनए टेस्ट के लिए पहले 13 चरण फॉलो करने होते थे, लेकिन अब ये पूरी प्रक्रिया महज तीन चरणों में पूरी कर ली जाएगी, जिस कारण समय भी कम लगेगा. समय की बचत के साथ ही टेस्ट पर आने वाला संभावित खर्च भी 60 से 70 प्रतिशत तक कम होगा. इन बीमारियों की भी होगी जांच: बताया गया कि इस किट को महत्वपूर्ण प्रयोगशाला तकनीक पीसीआर (पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) के लिए भी तैयार किया जा रहा है. इससे टाइफाइड, तपेदिक, इन्फ्लूएंजा, मलेरिया और डेंगू जैसे रोगों संबंधी जांच भी की जा सकेगी. निजी कंपनी के सदस्य सचिन वर्मा ने बताया कि मोहाली स्थित आइसर के सहयोग से इस किट को तैयार किया गया है. इससे सैंपल तैयार करने के लिए इन्नो एक्सट्रैक्ट (तरल रूप) और लैब के काम के लिए विशेष यंत्र विकसित किए गए हैं, जो चंद मिनटों में डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) जांच रिपोर्ट दे देंगे. इससे पहले सैंपल तैयार होने के बाद आगामी जांच के लिए लैब जाने की आवश्यकता भी नहीं होगी. 'रूम टेंपरेचर में भी हो सकेगा टेस्ट': सचिन वर्मा ने बताया कि "कई बार गांव-कस्बों में या बिजली नहीं होने पर टेंपरेचर मेंटेन नहीं हो पाता. सामान्य तौर पर इन किट्स को चार डिग्री सेल्सियस या माइनस 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रखना पड़ता है." उन्होंने बताया कि उनके द्वारा तैयार किट्स को रूम टेंपरेचर में रखा जा सकता है, किसी रेफ्रिजरेटर/फ्रीजर की आवश्यकता भी नहीं पड़ती. बताया कि इन सभी जटिलताओं के मद्देनजर किट्स को तैयार किया गया है. 'सौ प्रतिशत स्वदेशी है किट, मोबाइल पर मिलेगी रिपोर्ट'': सचिन वर्मा ने बताया कि "ये मशीन और किट सौ प्रतिशत स्वदेशी है, कोई भी चीज इंपोर्ट नहीं की गई है. किट को लैब में तैयार किया और मशीन भी उनके द्वारा तैयार की गई है. साथ ही इस मशीन से होने वाले सभी टेस्ट की रिपोर्ट भी मोबाइल पर प्राप्त हो जाएगी, नतीजतन दूसरा चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस किट को केवल सूरज की रोशनी से बचाकर रखना है. इसके अलावा इसे कमरे में कहीं भी कितनी ही देर के लिए क्यों ना रख लिया जाए, कल्चर में कोई बदलाव नहीं आएगा. कंपनी एक पेटेंट ले चुकी है, जबकि अन्य तीन पेटेंट के लिए काम किया जा रहा है."

वॉटर प्यूरिफायर बोतल: गंदे पानी को 99.99% साफ करने वाली तकनीक, कीमत जानें

मुंबई  डिजिटल और स्मार्ट गैजेट्स के दौर में सबकुछ हाई-टेक होता जा रहा है. इसी क्रम में अब पानी की सफाई भी हाई-टेक हो चुकी है! मार्केट में एक ऐसी बोतल आ गई है जो बिना बिजली के ही पानी साफ करती है. इस बोतल को ZeroB ने मार्केट में उतारा है. ZeroB अपने नए H2OHH Water Purifier (H2OHH) बोतल को लेकर दावा की है कि यह बोतल बिना बिजली के कुछ ही पल में 99.99% शुद्ध करती है. खास बात यह है कि यह एक बोतल अपने लाइफटाइम में करीब 3,000 प्लास्टिक बोतलों को रिप्लेस कर सकती है. यानी सेहत के साथ-साथ पर्यावरण की भी बड़ी बचत! आउटडोर ट्रैवल, ऑफिस या जिम हर जगह के लिए यह बोतल बेस्ट साबित हो सकती है. आइए जानते हैं इसकी कीमत और फीचर्स. पहले जानिए कैसे काम करती है H2OHH? ZeroB कंपनी की यह स्मार्ट बोतल ExSil Nano सिल्वर टेक्नोलॉजी पर काम करती है जो पानी के संपर्क में आते ही 99.99% बैक्टीरिया और वायरस को खत्म कर देती है.  इसके लिए न तो बिजली की जरूरत होती है और न ही फिल्टर बदलने की कभी जरूरत होती है. सिल्वर आयन पानी को शुद्ध करते हुए उसके स्वाद में भी कोई बदलाव नहीं करता है.  डिजाइन और कैपेसिटी बात करें इस बोतल की डिजाइन की तो इसमें 600ml की कैपेसिटी मिलती है. साथ ही यह हल्की है जो किसी भी नार्मल कप होल्डर में फिट हो जाने वाली है. कंपनी का दावा है कि इसकी प्यूरीफिकेशन क्षमता हजारों बार इस्तेमाल के बाद भी बनी रहेगी. कितनी है कीमत? बात करें इसकी कीमत की तो  ZeroB ने इसे H2OHH को 2 मॉडल्स में उतारा है, पहला Tritan मॉडल जिसकी कीमत ₹1,499 रखी गई है वहीं दूसरा मॉडल है Stainless Steel SS304 मॉडल जिसकी कीमत ₹2,499 रखी गई है. ZeroB के मुताबिक एक H2OHH बोतल करीब 3,000 प्लास्टिक बोतलों को रिप्लेस कर सकती है. यह उन यूजर्स के लिए परफेक्ट है जो प्लास्टिक वेस्ट कम करना चाहते हैं और साथ ही सुरक्षित पानी भी पाना चाहते हैं. इन दोनों बोतलों में एक ही प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी दी गई है, फर्क सिर्फ मैटेरियल और लुक का है. किसके लिए है बेस्ट है यह बोतल? ट्रैवलर्स जिम या आउटडोर एक्टिविटी करने वाले लोग ऑफिस या फील्ड में रहने वाले प्रोफेशनल्स ऐसे यूजर्स जो बिजली या फिल्टर-चेंज की परेशानी से बचना चाहते हैं. इस बोतल को लेकर कंपनी के CTO डॉ. राजेश मिश्रा का कहना है कि H2OHH एक दो नहीं बल्कि 5 साल की रिसर्च का नतीजा है जिसका मकसद लैब-ग्रेड प्यूरीफिकेशन को एक पोर्टेबल रूप में देना था. यह बोतल ZeroB की ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल रही है. आप zerobonline सर्च कर सकते हैं. 

बस कीमत होगी सस्ती! iPhone-स्टाइल डिज़ाइन वाला Realme Narzo 90 सीरीज 16 दिसंबर को लॉन्च

नई दिल्ली  रियलमी भारत में जल्द मिड-रेंज सेगमेंट में दो नए स्मार्टफोन लॉन्च करने वाला है। ये फोन्स Realme अपनी लोकप्रिय Narzo सीरीज के साथ पेश करेगा। कंपनी ने पुष्टि कर दी है कि Realme Narzo 90 Series 5G में दो मॉडल आएंगे Realme Narzo 90 और Realme Narzo 90x होंगे। ये फोन्स 16 दिसंबर 2025 को भारत में Amazon और Realme की आधिकारिक वेबसाइट पर पेश किए जाएंगे। Amazon की माइक्रो-साइट पर दिखाए गए टीजर्स से कुछ संकेत मिल रहे हैं कि Narzo 90 सीरीज पिछले Narzo मॉडल्स से काफ़ी बेहतर होगी। Realme Narzo 90 Series 5G के फीचर्स Realme ने टीजर में स्पष्ट किया है कि Narzo 90 Series में “सबसे बड़ी बैटरी इन सेगमेंट” दी जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि फोन में 7000mAh की बैटरी हो सकती है जिससे बैकअप समय अच्छा रहने की उम्मीद है। Amazon के टीज़र में दो अलग-अलग कैमरा मॉड्यूल दिखाए गए हैं मतलब कंपनी दो मॉडल पेश करने जा रही है। एक मॉड्यूल में गोल और प्रो-स्टाइल कैमरा सेटअप जैसा दिखता है संभावना है कि यह Narzo 90 Pro / 90 जैसा मॉडल हो। दूसरा मॉड्यूल सादा और वर्टिकल कैमरा लेंस वाला है संभवतः Narzo 90x जैसा बजट-फ्रेंडली मॉडल। लीक्स के अनुसार, Narzo 90 5G वेरिएंट्स में 6 GB/8 GB/12 GB RAM और 128 GB/256 GB तक स्टोरेज ऑप्शन मिल सकते हैं। कलर ऑप्शन में “Carbon Black” और “Victory Gold” शामिल बताए गए हैं। India लॉन्च की तारीख: 16 दिसंबर 2025 उपलब्धता: Amazon.in और Realme की आधिकारिक वेबसाइट Amazon Exclusive लेबल है, मतलब पहली सेल Amazon प्लेटफार्म पर होगी।