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जवानी की 5 बड़ी गलतियां जो बुढ़ापे में बनती हैं पछतावे की वजह

जवानी जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है, जहां सपने बड़े होते हैं और उन्हें पूरा करने का जुनून भी चरम पर होता है। लेकिन यही समय सबसे नाजुक भी होता है, क्योंकि जोश में लिए गए गलत फैसले आगे चलकर पछतावे का कारण बन सकते हैं। कई बार इस उम्र में हम जोश में आकर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो हमारे करियर, रिश्तों और पूरे भविष्य को ही प्रभावित कर सकती हैं। महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीतियों में युवावस्था को बहुत ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि जवानी में की गई कुछ गलतियों का व्यक्ति के भविष्य पर गहरा असर पड़ता है। चलिए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार जवानी में किन गलतियों को करने से बचना चाहिए। ना करें समय की बर्बादी जवानी के दिन भविष्य के निर्माण के दिन होते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति अपनी जवानी के दिनों को यूं ही बर्बाद करता है, वो अपने लिए स्वयं कुंआ खोदने का काम करता है। ऐसा नहीं है कि युवाओं को मौज मस्ती से बिल्कुल दूर हट जाना चाहिए और सिर्फ काम-काम में लगे रहना चाहिए। लेकिन मौज-मस्ती में ही पूरा समय बिता देना, उनके भविष्य को अंधकार में डाल सकता है। इसलिए समय को यूं ही बर्बाद करने के बजाय अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें और उसे पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाएं। शिक्षा और करियर को नजरअंदाज करना आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति अपने जवानी के दिनों में पढ़ाई-लिखाई और अपने करियर को इग्नोर करता है, उसे पूरे जीवन पछताना पड़ता है। क्योंकि किसी भी व्यक्ति के जीवन में जवानी ही वो समय होता है, जब वह अपने भविष्य की नींव रखता है। लेकिन जो व्यक्ति इन महत्वपूर्ण दिनों को सिर्फ मौज-मस्ती में बिता देता है और अपने करियर को नजर अंदाज करता है, उसे पूरे जीवन दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो लोग अपने जवानी के दिनों में अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हैं उन्हें बुढ़ापे में काफी कष्ट झेलना पड़ता है। दरअसल जवानी में शरीर ऊर्जा और उत्साह से भरा रहता है, ऐसे में अक्सर युवाओं को लगता है कि उनके शरीर में यह ऊर्जा हमेशा बनी रहेगी और इसी गलतफहमी के चक्कर में वे अपने खान-पान और स्वास्थ्य का ध्यान नहीं देते। जवानी के दिनों में गलत खानपान और अनहेल्दी रूटीन का असर बढ़ती उम्र में देखने को मिलता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है तरह-तरह की बीमारियां घेरने लगती है। इसलिए जवानी में स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जवानी की गलत संगत का असर रहता है ता-उम्र आचार्य चाणक्य का मानना था कि व्यक्ति की संगति ही उसके भविष्य को निर्धारित करती है। इसलिए जवानी के दिनों में आत्म नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है और इसके लिए अच्छी संगत का होना जरूरी है। जवानी के दिनों में जो व्यक्ति गलत संगत में पड़ जाता है, वो अपने जीवन में कभी भी सफलता हासिल नहीं करता है। ऐसा व्यक्ति ना तो जीवन में तरक्की पाता है और ना ही पारिवारिक रूप से सुखी रहता है। पैसे की बर्बादी करना आचार्य चाणक्य के मुताबिक जवानी के दिनों में पैसे की बर्बादी करना, भविष्य के लिहाज से सबसे बड़ी गलती है। जवानी में अक्सर पैसा कमाने का जोश और ताकत दोनों चरम पर होते हैं इसलिए लोगों के खर्चे भी बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। कई बार तो लोग फालतू की चीजों पर ही खर्च करना शुरू कर देते हैं। जबकि ये आदत आपके बढ़ापे में भारी पड़ सकती है। इसलिए जवानी से ही सेविंग्स का ध्यान रखें ताकि उम्र बढ़ने के साथ आपको किसी तरह के आर्थिक समस्या का सामना ना करना पड़े।  

शरीर में B12 की कमी? जानें इसे नैचुरली बूस्ट करने के 5 असरदार घरेलू उपाय

नई दिल्ली सेहतमंद रहने के लिए शरीर में सभी पोषक तत्वों का होना बेहद जरूरी है। यह पोषक तत्व शरीर को हेल्दी और दुरुस्त बनाने में मदद करते हैं। विटामिन-बी12 इन्हीं में से एक है, जो शरीर में कई सारे फंक्शन करता है। यह डीएनए सिंथसिस, रेड ब्लड सेल्स प्रोडक्शन और नर्वस सिस्टम के काम को बेहतर बनाने में मदद करता है। ऐसे में शरीर के अंदर इसकी कमी कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि समय रहते इसकी कमी की पहचान की जाए और इसे पूरा करने के लिए सही डाइट फॉलो करे। अक्सर नॉनवेज फूड्स को इसका अच्छा सोर्स माना जाता है और कई लोग इसकी कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स की मदद लेते हैं। अगर आप भी इसकी कमी से जूझ रहे हैं, तो आप बिना सप्लीमेंट्स भी इसकी कमी दूर कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे बिना सप्लीमेंट्स दूर करें इसकी कमी- प्रोबायोटिक दही होगा मददगार बिना सप्लीमेंट विटामिन-बी12 बढ़ाने के लिए आप प्रोबायोटिक दही डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसके लिए आप लैक्टोबैसिलस स्ट्रेन वाला दही चुनें। इसमें मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया नेचुरली विटामिन B12 के प्रोडक्शन और गट हेल्थ को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं। फर्मेंटेड इंडियन फूड खाएं अगर आप वेजिटेरियन हैं और इस विटामिन की कमी को दूर करना चाहते हैं, तो फर्मेंटेड इंडियन फूड्स आपकी मदद कर सकते हैं। इडली, डोसा, ढोकला और घर का बना दही गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं, जिससे विटामिन B12 का अब्जॉर्प्शन आसान हो जाता है। डेयरी प्रोडक्ट्स को डाइट में शामिल करें विटामिन-बी12 की कमी को दूर करने के लिए अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर और चीज को शामिल करें। ये फूड्स आइटम्स नेचुरली विटामिन B12 से भरपूर होते हैं। इसलिए बेहतर नतीजों के लिए रोजाना इसे डाइट में शामिल करें। फोर्टिफाइड फूड्स आप शरीर में विटामिन B12 की कमी को पूरा करने के लिए फोर्टिफाइड अनाज, सोया या बादाम का दूध आदि शामिल कर सकते हैं, जो इस विटामिन का बेहतरीन सोर्स होते हैं। गट हेल्थ बेहतर बनाएं विटामिन-बी12 के अब्जॉर्प्शन के लिए गट हेल्थ का हेल्दी रहना बेहद जरूरी है। इसलिए आप अपनी गट हेल्थ को बेहतर बनाने की कोशिश करें। हेल्दी गट विटामिन B12 का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए फाइबर खाएं, जंक फूड से बचें, छाछ पिएं और रात में त्रिफला का सेवन करें।  

शरीर में B12 की कमी? जानें इसे नैचुरली बूस्ट करने के 5 असरदार घरेलू उपाय

नई दिल्ली सेहतमंद रहने के लिए शरीर में सभी पोषक तत्वों का होना बेहद जरूरी है। यह पोषक तत्व शरीर को हेल्दी और दुरुस्त बनाने में मदद करते हैं। विटामिन-बी12 इन्हीं में से एक है, जो शरीर में कई सारे फंक्शन करता है। यह डीएनए सिंथसिस, रेड ब्लड सेल्स प्रोडक्शन और नर्वस सिस्टम के काम को बेहतर बनाने में मदद करता है। ऐसे में शरीर के अंदर इसकी कमी कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि समय रहते इसकी कमी की पहचान की जाए और इसे पूरा करने के लिए सही डाइट फॉलो करे। अक्सर नॉनवेज फूड्स को इसका अच्छा सोर्स माना जाता है और कई लोग इसकी कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स की मदद लेते हैं। अगर आप भी इसकी कमी से जूझ रहे हैं, तो आप बिना सप्लीमेंट्स भी इसकी कमी दूर कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे बिना सप्लीमेंट्स दूर करें इसकी कमी- प्रोबायोटिक दही होगा मददगार बिना सप्लीमेंट विटामिन-बी12 बढ़ाने के लिए आप प्रोबायोटिक दही डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसके लिए आप लैक्टोबैसिलस स्ट्रेन वाला दही चुनें। इसमें मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया नेचुरली विटामिन B12 के प्रोडक्शन और गट हेल्थ को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं। फर्मेंटेड इंडियन फूड खाएं अगर आप वेजिटेरियन हैं और इस विटामिन की कमी को दूर करना चाहते हैं, तो फर्मेंटेड इंडियन फूड्स आपकी मदद कर सकते हैं। इडली, डोसा, ढोकला और घर का बना दही गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं, जिससे विटामिन B12 का अब्जॉर्प्शन आसान हो जाता है। डेयरी प्रोडक्ट्स को डाइट में शामिल करें विटामिन-बी12 की कमी को दूर करने के लिए अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर और चीज को शामिल करें। ये फूड्स आइटम्स नेचुरली विटामिन B12 से भरपूर होते हैं। इसलिए बेहतर नतीजों के लिए रोजाना इसे डाइट में शामिल करें। फोर्टिफाइड फूड्स आप शरीर में विटामिन B12 की कमी को पूरा करने के लिए फोर्टिफाइड अनाज, सोया या बादाम का दूध आदि शामिल कर सकते हैं, जो इस विटामिन का बेहतरीन सोर्स होते हैं। गट हेल्थ बेहतर बनाएं विटामिन-बी12 के अब्जॉर्प्शन के लिए गट हेल्थ का हेल्दी रहना बेहद जरूरी है। इसलिए आप अपनी गट हेल्थ को बेहतर बनाने की कोशिश करें। हेल्दी गट विटामिन B12 का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए फाइबर खाएं, जंक फूड से बचें, छाछ पिएं और रात में त्रिफला का सेवन करें।  

Redmi का नया धमाका: अब सिर्फ 1% बैटरी में चलेगा फोन 7.5 घंटे!

नई दिल्ली स्मार्टफोन बनाने वाली मशहूर कंपनी Redmi ने भारत में अपने 11 साल पूरे होने की खुशी में दो नए फोन लॉन्च करने का इशारा दिया है. कंपनी ने अभी तक इन फोन के नाम या पूरी जानकारी तो नहीं दी है, लेकिन टीज़र से इतना साफ है कि इस बार कुछ खास आने वाला है. Xiaomi India की वेबसाइट पर एक नया पेज लाइव हुआ है, जिसमें “Power Revolution” नाम की टैगलाइन के साथ एक टीजर दिखाया गया है. इसमें बताया गया है कि सिर्फ 1% बैटरी पर भी फोन 7.5 घंटे तक ऑन रह सकता है. ये सुनकर कोई भी यूजर हैरान रह जाएगा. Redmi ने इस अपकमिंग फोन की कुछ झलक भी दिखाई है. फोन का साइड प्रोफाइल साफ़ नजर आता है — जिसमें पावर बटन और वॉल्यूम बटन बाईं तरफ दिए गए हैं. पीछे की तरफ डुअल कैमरा सेटअप दिखाई दे रहा है, लेकिन पूरी डिजाइन अभी सामने नहीं आई है. Amazon पर भी हुआ लिस्ट इस नए Redmi फोन के लिए Amazon India पर भी एक माइक्रोसाइट एक्टिव हो गई है. इसका मतलब है कि फोन की बिक्री Xiaomi की वेबसाइट के साथ-साथ Amazon पर भी होगी. रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी Redmi 15 5G और Redmi 15C नाम के दो मॉडल ला सकती है. कुछ लीक और टेक रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि:     Redmi 15C में 6,000mAh बैटरी और 50MP का डुअल कैमरा सेटअप होगा.     Redmi 15 5G में 7,000mAh की बैटरी, Snapdragon 6s Gen 3 प्रोसेसर और 8GB RAM के साथ 256GB स्टोरेज दिया जा सकता है.     यह फोन Android 15-बेस्ड HyperOS 2.0 पर चलेगा और इसमें 33W फास्ट चार्जिंग भी मिलेगी.     डिजाइन की बात करें तो यह फोन IP64 रेटिंग के साथ आएगा, यानी धूल और पानी के छींटों से भी सुरक्षित रहेगा.     डिस्प्ले हो सकता है 6.9 इंच का Full HD+ LCD स्क्रीन, जिसमें 144Hz रिफ्रेश रेट मिलेगा. कब होगा लॉन्च? हालांकि Redmi ने अब तक लॉन्च की तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन टीज़र से अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह फोन बहुत जल्द भारतीय बाजार में आ सकता है.

बारिश की मस्ती न पड़े सेहत पर भारी: इन खतरनाक बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके

मानसून ने एक बार फिर ग्वालियर में दस्तक दी है। बुधवार को दिनभर रुक-रुक कर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होती रही। हालांकि यह बारिश मौसम को सुहाना बना रही है, लेकिन इसके साथ ही त्वचा रोगों का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। शहर के जेएएच अस्पताल में रैशेज, खुजली और स्किन इंफेक्शन की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप शर्मा बताते हैं कि मानसून के मौसम में लंबे समय तक भीगे रहना, पसीना और गीले कपड़े पहनना फंगल व बैक्टीरियल इंफेक्शन का मुख्य कारण बनता है। खासकर शरीर के मोड़ जैसे गर्दन, बगल, कमर और जांघों के बीच की त्वचा नाजुक होती है। जब ये क्षेत्र लंबे समय तक गीले रहते हैं और वहां हवा नहीं लगती, तो रैशेज और संक्रमण जल्दी हो जाता है। डॉ. शर्मा का कहना है कि सामान्य से दिखने वाले रैशेज अगर समय रहते नहीं संभाले जाएं, तो वे गंभीर फंगल संक्रमण में बदल सकते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में त्वचा की साफ-सफाई और सूखेपन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बारिश में रैशेज से बचने के आसान उपाय 1. हमेशा सूती और ढीले कपड़े पहनें, जिससे हवा लगती रहे और त्वचा सूखी रहे। 2. भीगने के तुरंत बाद कपड़े बदलें और शरीर को अच्छे से पोंछें। 3. नहाने के बाद शरीर को पूरी तरह सुखाएं, खासकर पसीने वाले हिस्सों को। 4. दिन में दो बार एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल करें, विशेषकर गर्दन, बगल और कमर में। 5. त्वचा पर खुजली, जलन या रैशेज दिखने पर देरी न करें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 6. एंटीफंगल क्रीम या लोशन डॉक्टर की सलाह से लगाएं। 7. गीले जूते-मोजे या कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें।

काली ब्रा से ब्रेस्ट कैंसर का डर सिर्फ एक मिथक, मेडिकल रिसर्च ने किया साफ

नई दिल्ली   हाल ही में सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि काली रंग की ब्रा पहनने से महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इस खबर ने कई महिलाओं को डराया है, जबकि कुछ इसे अफवाह मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं। आइए, इस दावे की वैज्ञानिक जांच करते हैं और समझते हैं कि इसमें कितनी हकीकत है। काली ब्रा और ब्रेस्ट कैंसर का दावा कैसे फैला? इंटरनेट पर कई बार यह बात सामने आई है कि काली ब्रा, खासकर टाइट या अंडरवायर ब्रा पहनने से शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है और यह ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों का मानना है कि काले रंग की ब्रा सूरज की किरणों को ज्यादा सोखती है, जिससे स्तन के टिश्यू में गर्मी बढ़ती है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन क्या यह सच है? क्या है वैज्ञानिक सच? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और Cancer Research UK जैसी प्रमुख संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि ब्रा का रंग, चाहे वह काला हो या कोई भी रंग, ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनता है। 2014 में फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर, सिएटल की एक स्टडी में 1500 महिलाओं पर रिसर्च की गई, जिसमें ब्रा पहनने की आदतों जैसे कि ब्रा की टाइटनेस, पहनने का समय, और रंग का ब्रेस्ट कैंसर से कोई संबंध नहीं पाया गया। 2023 में कैंसर रिसर्च यूके ने भी इस बात को दोहराया कि ब्रा का रंग या स्टाइल ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ा नहीं है। 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में मैमोग्राम और बायोप्सी डेटा की मदद से यह पाया गया कि ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क फैक्टर्स में जेनेटिक म्यूटेशन (BRCA1 और BRCA2 जीन), फैमिली हिस्ट्री, हार्मोनल बदलाव, मोटापा, शराब और स्मोकिंग जैसे कारण शामिल हैं, लेकिन ब्रा का रंग या टाइट होना इनमें कहीं भी शामिल नहीं है। डॉक्टर क्या कहते हैं? नई दिल्ली के अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रमेश शर्मा, जो 20 सालों से ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, कहते हैं कि काली ब्रा और ब्रेस्ट कैंसर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह सिर्फ एक मिथक है जो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का खतरा मुख्य रूप से जेनेटिक कारणों, जीवनशैली और उम्र से जुड़ा होता है। उन्होंने यह भी बताया कि बहुत टाइट ब्रा पहनने से त्वचा में जलन या चुभन हो सकती है, लेकिन इससे कैंसर नहीं होता। इसलिए महिलाओं को चाहिए कि वे नियमित रूप से मैमोग्राम करवाएं और ब्रेस्ट का सेल्फ-चेकअप करें। अगर ब्रेस्ट में कोई गांठ, निप्पल से स्राव, या त्वचा में कोई बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।   काली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होने का दावा पूरी तरह से गलत और बिना किसी वैज्ञानिक आधार के है। महिलाओं को इस तरह की अफवाहों से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे अपनी सेहत का ध्यान रखें, नियमित जांच कराएं और सही जानकारी ही फैलाएं।  

अब पुरुष भी ले सकेंगे गर्भनिरोधक गोली, वैज्ञानिकों ने पास किया मानव परीक्षण का पहला चरण

नई दिल्ली पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोली की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है. YCT-529 नाम की इस नई गोली ने पहला ह्यूमन सेफ्टी टेस्ट पास कर लिया है. ये गोली बिना हार्मोन के पुरुषों में शुक्राणु (स्पर्म) बनने की प्रक्रिया को रोकती है. अभी ये शुरुआती टेस्ट था, जिसमें 16 लोगों पर जांच की गई कि गोली शरीर में सही मात्रा में पहुंचती है या नहीं और क्या इससे कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं. अच्छी खबर ये है कि कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं दिखा. अब ये गोली बड़े टेस्ट्स की ओर बढ़ रही है, जहां इसकी सेफ्टी और असर दोनों की जांच होगी. आइए, समझते हैं कि ये गोली क्या है? कैसे काम करती है? पुरुषों के लिए ये क्यों खास है? पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोली: क्या है ये नया आविष्कार? अभी तक पुरुषों के पास गर्भनिरोध के लिए सिर्फ दो विकल्प थे: कन्डोम और वासेक्टॉमी (नसबंदी). कन्डोम हर बार इस्तेमाल करना पड़ता है. वासेक्टॉमी एक स्थायी तरीका है, जिसे उलटना (रिवर्सल) मुश्किल होता है. लेकिन YCT-529 नाम की ये गोली पुरुषों के लिए नया और आसान विकल्प ला सकती है. ये गोली…     बिना हार्मोन के काम करती है: महिलाओं की गर्भनिरोधक गोलियों में हार्मोन होते हैं, जो कई बार साइड इफेक्ट्स जैसे मूड स्विंग्स या वजन बढ़ना लाते हैं. YCT-529 में ऐसा कुछ नहीं है.     शुक्राणु बनने से रोकती है: ये पुरुषों के शरीर में शुक्राणु बनाने की प्रक्रिया को अस्थाई तौर पर बंद कर देती है.     उलटने योग्य (रिवर्सिबल): गोली बंद करने के 4-6 हफ्तों में पुरुष की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) वापस आ जाती है. 22 जुलाई 2025 को Communications Medicine जर्नल में इस टेस्ट के नतीजे छपे. यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा और कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने इस गोली को बनाया. YourChoice Therapeutics कंपनी इसके टेस्ट्स कर रही है. कैसे काम करती है YCT-529? YCT-529 गोली पुरुषों के शरीर में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को रोकती है. ये कैसे होता है, समझते हैं…     रेटिनॉइक एसिड रिसेप्टर अल्फा: हमारे शरीर में एक प्रोटीन होता है, जिसे रेटिनॉइक एसिड रिसेप्टर अल्फा कहते हैं. ये प्रोटीन शुक्राणु बनाने में अहम रोल निभाता है. इसे एक ताले की तरह समझिए, जिसमें विटामिन A (रेटिनॉइक एसिड) एक चाबी की तरह काम करता है. जब चाबी ताले में लगती है, तो शुक्राणु बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.     YCT-529 का जादू: ये गोली उस चाबी को ताले में लगने से रोकती है. इससे शुक्राणु बनने की प्रक्रिया रुक जाती है. पुरुष अस्थाई तौर पर बांझ (इन्फर्टाइल) हो जाता है.     बिना हार्मोन: ये गोली हार्मोन को छूती तक नहीं, इसलिए इससे हार्मोनल बदलाव जैसे मूड स्विंग्स, वजन बढ़ना या यौन इच्छा में कमी जैसी समस्याएं नहीं होतीं. वैज्ञानिकों ने इस गोली को बनाने के लिए रेटिनॉइक एसिड रिसेप्टर की संरचना को गहराई से समझा. कई अणुओं (मॉलिक्यूल्स) का टेस्ट किया, ताकि सही दवा बन सके. पहला ह्यूमन टेस्ट: क्या हुआ? पहला टेस्ट 16 पुरुषों (32 से 59 साल की उम्र) पर किया गया. ये टेस्ट सिर्फ ये देखने के लिए था कि…     क्या गोली शरीर में सही मात्रा में पहुंचती है?     क्या इससे कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं, जैसे दिल की धड़कन, हार्मोन, सूजन, मूड या यौन स्वास्थ्य में बदलाव? खास बात: सभी पुरुषों ने पहले वासेक्टॉमी (नसबंदी) करा रखी थी. ऐसा इसलिए, ताकि अगर गोली से कोई लंबा असर हुआ, तो प्रजनन क्षमता पर खतरा न हो. टेस्ट का तरीका कुछ लोगों को प्लेसीबो (बिना दवा की गोली) दी गई, कुछ को कम डोज (90 मिलीग्राम) और कुछ को ज्यादा डोज (180 मिलीग्राम). कुछ ने खाली पेट गोली खाई. कुछ ने खाना खाने के बाद ताकि ये देखा जाए कि खाना दवा के असर को कैसे प्रभावित करता है. नतीजे सभी डोज में गोली शरीर में अच्छी मात्रा में पहुंची. 180 मिलीग्राम डोज सबसे अच्छी थी. शायद यही भविष्य में इस्तेमाल होगी. कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं दिखा. न हार्मोन बदले.न मूड खराब हुआ. न यौन स्वास्थ्य प्रभावित हुआ. गोली दिन में एक बार लेने की जरूरत होगी, लेकिन ये पक्का अगले टेस्ट्स में तय होगा. डॉ. स्टेफनी पेज (यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन) ने कहा कि ये पुरुषों के लिए नया गर्भनिरोधक विकल्प लाने की दिशा में पहला कदम है. हमें पुरुषों के लिए रिवर्सिबल तरीकों की सख्त जरूरत है.  जानवरों पर टेस्ट: क्या कहते हैं नतीजे? इससे पहले YCT-529 का टेस्ट चूहों और बंदरों पर किया गया था… चूहों पर: गोली लेने के 4 हफ्तों में शुक्राणु बनना बंद हो गया. गोली बंद करने के 4-6 हफ्तों में प्रजनन क्षमता वापस आ गई. मादा चूहों के साथ टेस्ट में 99% गर्भधारण रुका. बंदरों पर: 2 हफ्तों में शुक्राणु की संख्या बहुत कम हो गई. गोली बंद करने के 10-15 हफ्तों में पूरी फर्टिलिटी वापस आ गई. इन नतीजों ने गोली को इंसानों पर टेस्ट करने का रास्ता खोला. क्यों है ये गोली जरूरी? पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोली कई मायनों में खास है…     जिम्मेदारी बांटना: अभी तक परिवार नियोजन (फैमिली प्लानिंग) का ज्यादातर बोझ महिलाओं पर है. ये गोली पुरुषों को भी जिम्मेदारी लेने का मौका देगी.     आजादी: पुरुषों को अपनी प्रजनन क्षमता पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा. वो खुद तय कर सकेंगे कि कब बच्चा चाहिए और कब नहीं.     सुरक्षित और आसान: कंडोम हर बार इस्तेमाल करना पड़ता है. वासेक्टॉमी स्थाई है. ये गोली रोज लेने का आसान और उलटने योग्य विकल्प है.     साइड इफेक्ट्स कम: क्योंकि ये हार्मोन-फ्री है, इससे मूड, वजन या यौन इच्छा पर असर होने की संभावना कम है. गुंडा जॉर्ज (यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा), जिन्होंने इस गोली को बनाया है कहती हैं कि ये गोली कपल्स को ज्यादा विकल्प देगी. पुरुषों को परिवार नियोजन में बराबर का रोल देगी.  आगे क्या? पहला टेस्ट पास होने के बाद अब बड़े टेस्ट्स की बारी है… 28 और 90 दिन का टेस्ट: अभी एक नया ट्रायल चल रहा है, जिसमें पुरुष 28 और 90 दिन तक YCT-529 लेंगे. इसमें सेफ्टी के साथ-साथ शुक्राणु की संख्या पर असर देखा जाएगा. ज्यादा लोग शामिल होंगे: अगले टेस्ट्स में ज्यादा पुरुषों को शामिल किया जाएगा, ताकि … Read more

ऑफिस में स्ट्रेस फ्री रहना चाहते है तो अपनाएं ये टिप्स

बेवक्त की बेचैनी, गुस्सा, उदासी, चिड़चिड़ाहट महसूस हो, काम सही तरीके से करने में परेशानी हो रही हो, नींद और थकान के कारण किसी भी काम में मन न लग रहा हो, तो ये किसी बीमारी के अलावा जॉब या काम का स्ट्रेस भी हो सकता है। स्ट्रेस फिजिकली और मेंटली, हमारी लाइफ पर असर डालने लगता है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हो तो डॉक्टर से संपर्क करें और इस संबंध में सलाह-मशविरा करें। इसके साथ ही कुछ खास टिप्स को अपनाकर भी स्ट्रेस आसानी से दूर किया जा सकता है। पूरी नींद लें स्ट्रेस सबसे पहले नींद चुरा लेता है। इसका हेल्थ पर बहुत ही खराब असर पड़ता है। इसीलिए प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखने के लिए पूरी नींद लेना बहुत ही जरूरी है। टाइम को इस तरह से मैनेज करें कि 7-8 घंटे की नींद ले सकें। इससे दिमाग शांत रहेगा, नए और क्रिएटिव आइडियाज आ सकते हैं। जल्दी उठने की आदत डालें सुबह जल्दी उठने से भी ऑफिस जाने के लिए होने वाली भागदौड़ से बचा जा सकता है। साथ ही, टाइम पर भी पहुंचेंगे। दिन की शुरुआत अच्छी होगी तो पूरा दिन फ्रेश और अच्छा रहता है। जल्दी उठकर मेडिटेशन के साथ एक्सरसाइज करना हेल्थ के लिए अच्छा रहेगा। नोट बनाएं काम को ऑर्गनाइज तरीके से करने पर ही स्ट्रेस से दूर रहा जा सकता है। अगले दिन करने वाले सभी कामों की लिस्ट बना लें। जरूरी कामों को पहले निपटाने की कोशिश करें। इससे काम बिना किसी गलती के आसानी से और जल्दी किया जा सकता है। काम को टालें नहीं किसी भी काम को अगले दिन के लिए टालें नहीं। आज का काम आज ही खत्म करें, वरना वर्क लोड बढ़ते जाता है और कई जरूरी काम नहीं हो पाते। क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी दें आप कितना ज्यादा काम कर रहे हैं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है तो इस बात से कि आप उस काम को कितने अच्छे तरीके से कर पा रहे हैं। इसीलिए ज्यादा से ज्यादा काम करने के बजाय जितना भी काम करें, उसमें ही अपना बेस्ट देने की कोशिश करें। ब्रेक लेते रहें लगातार सीट पर बैठे रहने से आंखों, पेट और पीठ से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इससे मोटापा बढ़ने के साथ ही बैक पेन भी होने लगता है। आंखों की विजिबिलटी कम होती जाती है। इसलिए बीच-बीच में सीट से उठते रहें और लंच के बाद जरूर टहलें। इमोशनल इंटेलिजेंस ऑफिस के मामलों और घर के मामलों को बिल्कुल अलग रखें, तभी किसी भी काम को स्मार्टली किया जा सकता है। ऑफिस में अगर आप किसी ऐसी पोजिशन पर हैं, जहां डिसीजन खुद ही लेने हैं तो दिमाग को स्ट्रेस फ्री रखना बहुत ही जरूरी है। डिसीजन लेने से पहले उसके अच्छे-बुरे के बारे में सोच लें, ताकि कोई गलती होने की संभावना न रहें। टीम वर्क करना सीखें। इससे काम भी जल्दी होता है, साथ ही स्ट्रेस भी कम होता है।  

मॉडल्स जैसी खूबसूरती पानी है तो करें ऐसा

जब भी आप किसी मॉडल को देखती हैं तो मन में एक ही सवाल उठता है कि इनमें और हमारी पर्सनैलिटी में कोई ज्यादा फर्क नहीं, फिर भी ये हमसे अलग क्यों दिखती हैं। ये भी वही मेकअप प्रोडक्ट इस्तेमाल करती हैं, जो हम करती हैं या फिर जिन ब्यूटी प्रोडक्ट्स का यह विज्ञापन करती हैं, हम उन्हें खरीद कर इस्तेमाल करती हैं फिर भी जब देखो ये मॉडल्स हमेशा अलग-सी ही नजर आती हैं। बात केवल यह नहीं कि वे कौन-सा ब्यूटी प्रोडक्ट इस्तेमाल करती हैं, परंतु यह जानना बहुत जरूरी है कि वे अपने मेकअप के लिए कौन सी ट्रिक इस्तेमाल करती हैं। मॉडलिंग ग्लैमर का फील्ड है, जहां हर समय खूबसूरत एवं प्रैजैंटिंग दिखना बेहद जरूरी होता है, सो हर मॉडल अपने हिसाब से ही मेकअप करती है और इसके लिए वह पूरी तरह से डैडीकेटेड रहती है। उनके मेकअप टिप्स को सीखने एवं फॉलो करने के बाद आप भी उनके जैसी दिख सकती हैं। डार्क एवं लाइट मेकअप कांबीनेशन मॉडल्स के चेहरे या उनकी तस्वीरों को ध्यान से देखेंगी तो पता चलेगा कि कोई भी मॉडल जब अपने लिप्स पर डार्क मेकअप करती है, तो वह चेहरे पर हल्का मेकअप रखती है। जब चेहरे पर मेकअप डार्क होता है, तो वे होंठों पर नैचुरल कलर की लिपस्टिक को इस्तेमाल करती हैं। यही नहीं वे अपने चेहरे के दाग-धब्बों को हटाने के लिए थोड़ा सा कंसीलर इस्तेमाल करती हैं, जिस से उनका चेहरा उभर कर सामने आता है। कंसीलर के दो शेड मॉडल्स हमेशा कंसीलर के दो शेड्स इस्तेमाल करती हैं। इस से मेकअप की लुक अच्छी आती है। लाइट कंसीलर को आंखों के पास लगाएं तथा डार्क कंसीलर को चेहरे के बाकी हिस्सों पर अप्लाई करें। इससे आपके चेहरे पर काफी नैचुरल लुक आएगी, जो आपकी खूबसूरती को अलग पहचान देगी। ड्रामैटिक और सिडक्टिव लिप्स आपने हमेशा देखा होगा कि मॉडल्स के लिप्स बहुत आकर्षक दिखते हैं। यदि आप भी ऐसे ही लिप्स चाहती हैं, तो सबसे पहले लिप्स पर कंसीलर लगाएं, उसके बाद ही लिपस्टिक अप्लाई करें। आप चाहें तो रैड पैंसिल लाइनर से आऊटिंग दे सकती हैं। रैड कलर की लिपस्टिक ज्यादा हॉट दिखती है। भरे हुए लिप्स होंठों की वास्तविक शेप से हट कर लाइनिंग करना और उसके बाद होंठों पर ग्लॉसी लिपस्टिक लगा कर उन्हें निखारना ही भरे हुए लिप्स वाला मेकअप कहलाता है। इस प्रकार लिप्स बड़े और हॉट दिखने लगते हैं। स्मोकी आइका आंखों का मेकअप करने से पहले बेस तैयार कर लें। इसके लिए लाइट कलर का फाऊंडेशन लें और इसे लगाएं। फिर हल्के ग्रे कलर के पैंसिल लाइनर से ऊपर से नीचे की ओर अप्लाई करें। बाद में इसे हल्के हाथों से स्मज कर लें। इससे स्मोकी लुक आती है। यह सब करने के बाद ही मस्कारा लगाएं। बालों के लिए रूखे बालों पर थोड़ी सी मात्रा में फेस क्रीम लगाने से उनमें चमक आ जाती है, जिससे बाल अच्छी तरह सैट हो जाते हैं।  

जाड़े के मौसम में लापरवाही ना बरते, पौष्टिक संतुलित भोजन लें…

जाड़े के मौसम में के मौसम में सेहत के प्रति जरा-सी लापरवाही परेशानी का कारण बन सकती है। इस मौसम में खानपान का विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है इसीलिये संतुलित भोजन करना आवश्यक है जिसमें शरीर के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व हों, साथ ही भोजन रुचिकर, सस्ता व पौष्टिक भी हो। भोजन से शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलती है, शरीर की रोगों से रक्षा होती है व शरीर के निर्माण और क्षयग्रस्त कोषों की मरम्मत के लिए जरूरी तत्व भी भोजन से ही मिलते हैं। खाद्य पदार्थों को तीन हिस्सो में बांटा जा सकता है। ऊर्जादायक भोजन यानि कार्बोहाईड्रेट पूर्ण- इनमें सभी प्रकार के अनाज, गेहूं, चावल, जौ, बाजरा, मकई, घी, तेल, गुड़, शकर, मक्खन, आलू, शकरकंद, जमींकंद आदि आते हैं। शरीर निर्माणकारीया प्रोटीन युक्त भोजन- इसमें प्रोटीन से भरपूर मेवे, दालें, दूध आदि आते हैं। रक्षाकारी या इम्यूनिटी प्रदान करने वाला भोजन- शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए विटामिनों व खनिज लवणों और प्रोटीन से युक्त दूध, पनीर, फल, सब्जियां आदि चीजें शामिल हैं। अनाज- अनाज की अपनी विशेषता है। गेहूं, चावल, बाजरा, मक्का आदि अनाज के आटे में से चोकर न निकालें। बिना पॉलिश किए चावल का प्रयोग करें। चावल की परत में विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स होता है। दालें- शाकाहारी लोगों के लिए दालें अत्यंत आवश्यक हैं। दालें बलवर्द्घक व प्रोटीन से भरपूर होती हैं। मूंग की दाल सुपाच्य है और बुजुर्गों के लिए उत्तम आहार है। घी या तेल- मूंगफली, सरसों, तिल या घी इनमें पौष्टिकता की दृष्टि से कोई अंतर नहीं है। भोजन में वनस्पति घी का प्रयोग न करें। शुद्घ देशी घी या तेल खाना स्वास्थ्य की दृष्टि से ज्यादा अच्छा है। ताजी सब्जियां और फल- सब्जियां खनिज लवण से भरपूर होती हैं। मौसमी सब्जियों को भोजन में अवश्य शामिल करें। मूली, मैथी, गाजर, पालक को कच्चा भी सलाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। कम से कम 100 ग्राम सब्जी नियमित खाना चाहिए। फल भी विटामिन से भरपूर होते हैं। आवश्यक नहीं कि आप महंगे फल ही खाएं। मौसम के अनुसार अमरूद, आंवला, केला, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि अत्यंत लाभदायक हैं। गुड़ अथवा चीनी- शक्कर की अपेक्षा गुड़ में अधिक पोषक तत्व होते हैं। इसमें लोहा, विटामिन एवं अन्य खनिज लवण हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से सफेद चीनी अत्यंत हानिकारक है और प्राकृतिक चिकित्सा में इसे श्वेत विष की संज्ञा दी गई है। पशुजन्य प्रोटीन- सभी आयु वर्ग के लोगों के भोजन में दूध, दही, लस्सी आदि की आवश्यकता है। सप्रेटा दूध में भी सभी आवश्यक तत्व हैं। अतः इसे भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रकार आसानी से मिलने वाले अनाज, दालें, मौसमी फल, सब्जियां तेल, गुड़ को अपने भोजन में शामिल कर संतुलित भोजन किया जा सकता है। सर्दी के रोगों के घरेलू नुस्खे:- -हल्के गर्म पानी के साथ एक चम्मच शहद खाली पेट लेना फायदेमंद है। इससे शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। -गर्म पानी में एक चुटकी काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से सर्दी के मौसम में होने वाली खांसी में राहत मिलती है। -वायरल संक्रमण में एक-एक चुटकी अदरक का पाउडर, काली मिर्च और हल्दी पाउडर दूध में उबाल कर पीने से आराम मिलता है। -तुलसी और अदरक के रस को शहद के साथ मिला कर लेना फायदेमंद है। -वायरल होने पर संतरा, मौसमी जैसे विटामिन सी से भरपूर फल खाना उपयोगी है। -सर्दी-जुकाम होने पर चुटकी-भर हल्दी मिला कर गर्म दूध पीना बहुत फायदेमंद है।