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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कार में आग, राजस्थान में एक ही परिवार के पांच लोग जिंदा जल गए

अलवर   राजस्थान के अलवर में कार में आलग लगने से एक ही परिवार के 5 लोग जिंदा गए। यह घटना बुधवार रात अलवर जिले में लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई। बताया जा रहा है कि यह आग सीएनजी लीक होने की वजह से लगी। पुलिस के अनुसार, पीड़ित मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के चैनपुरा गांव के रहने वाले थे। यह परिवार वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करके घर लौट रहा था और उन्होंने इस यात्रा के लिए एक टैक्सी किराए पर ली थी। जब गाड़ी मौजपुर पहुंची, तो अचानक सीएनजी गैस लीक होने की खबर मिली, जिससे तुरंत आग लग गई और पूरी कार लपटों की चपेट में आ गई। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को बचने का कोई मौका ही नहीं मिला। इस भयानक घटना में तीन महिलाएं, एक पुरुष और एक छोटी बच्ची जिंदा जल गए। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि शव जलकर राख हो गए। गाड़ी का ड्राइवर बड़ी मुश्किल से बच निकला, लेकिन उसे गंभीर रूप से जलने की चोटें आई हैं। उसे पहले स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया और बाद में जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उसका अभी इलाज चल रहा है। सूचना मिलते ही, लक्ष्मणगढ़ पुलिस दमकल की गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंची। आग बुझाने वाली एक गाड़ी तैनात की गई और आग पर काबू पाने की कोशिशें की गईं। हालांकि, जब तक आग बुझाई गई, तब तक पांचों यात्री आग की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके थे। लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना प्रभारी नेकी राम ने पुष्टि की कि गाड़ी सीएनजी और पेट्रोल दोनों पर चल रही थी और आग लगने का कारण गैस लीक होना माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएनजी से लगी आग की तीव्रता बहुत ज्यादा होती है। आग से शव पूरी तरह से नष्ट हुए, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। पीड़ितों की पहचान के लिए डीएनए जांच करने के लिए मौके पर एक मेडिकल टीम बुलाई गई। परिवार के सदस्यों को इस घटना के बारे में सूचित कर दिया गया।पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी भी देर रात स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे।

डिवाइडर में टकराई तेज रफ्तार बोलेरो दो घायल, चार को आई गंभीर चोटें

डिवाइडर में टकराई तेज रफ्तार बोलेरो दो घायल, चार को आई गंभीर चोटें राजेंद्र ग्राम/छबिलाल  थाना क्षेत्र राजेंद्रग्राम के सल्हरो तिराहा के पास मंगलवार शाम करीब 9:00 बजे तेज रफ्तार बोलेरो अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में बोलोरो में सवार4 व्यक्तियों को चोटें आईं, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल है जिसमें एक ड्राइवर भी शामिल है।  कैसे हुआ हादसा। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार ग्राम जरही से बारातियों को लेकर ग्राम बेलगावा के लिए रवाना हुई थी लेकिन साल्हारो तिराहा के पास ड्राइवर को झपकी लग गई। इससे गाड़ी बेकाबू होकर सड़क के किनारे बने डिवाइडर पर चढ़ गई और बेकाबू होकर पलट गई टक्कर इतनी तेज थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।  घायलों की स्थिति  *गंभीर घायल: हुकुमचंद वर्ष पिता स्वर्गीय घनश्याम प्रसाद(28) वर्ष ग्राम जरही कब बताया जा रहा है और मनोज कुमार पिता लाला प्रसाद 25 वर्ष ग्राम सोनिया मार ग्राम पंचायत हर टोला का निवासी बताया जा रहा है।*समान्य घायल: पूरनलाल पिता ओमकार चंद्रवंशी ग्राम जरही और तीन अन्य को मामूली चोटें आई है। सभी घायलों को 108 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है डॉक्टर के साथ इन दोनों को गंभीर गालों की हालत गंभीर बनी हुई है।

नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर टवेरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर, 5 की मौत, 7 घायल

नर्मदापुरम  मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में आधी रात हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. टवेरा कार और अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली की आमने-सामने टक्कर में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग घायल हो गए. हादसा नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर आंचलखेड़ा के पास हुआ, जहां टक्कर इतनी तेज थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. यह घटना उस समय हुई जब कार सवार लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे. अचानक हुए इस हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।  रात करीब 1 बजे हुए इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद कार के परखच्चे उड़ गए. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जोरदार आवाज के साथ दोनों वाहन आपस में भिड़े और कुछ ही पलों में चीख-पुकार मच गई. आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया. हादसे के तुरंत बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ।  आमने-सामने की टक्कर बनी मौत की वजह प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, टवेरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली के बीच सीधी भिड़ंत हुई. ट्रॉली में अनाज भरा हुआ था, जिससे उसका वजन ज्यादा था और टक्कर का असर भीषण रहा. कार सवारों को संभलने का मौका नहीं मिला।  शादी से लौट रहे थे सभी लोग बताया जा रहा है कि कार में सवार सभी लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे. खुशी के माहौल में घर लौटते वक्त अचानक यह हादसा हुआ. परिवार और रिश्तेदारों के बीच खुशी का माहौल कुछ ही पलों में शोक में बदल गया।  घायलों का इलाज जारी, कुछ की हालत गंभीर हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है. प्रशासन की ओर से बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।  तेज रफ्तार और कम दृश्यता का असर पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसे की वजह तेज रफ्तार और रात के समय कम दृश्यता हो सकती है. हाईवे पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण ड्राइवर को सामने से आ रहे वाहन का अंदाजा नहीं लग पाया।  जांच में जुटी पुलिस, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है। 

मिर्जापुर हादसा: ट्रक की ब्रेक फेल, बोलेरो को टक्कर मारने के बाद 9 लोगों की जलकर मौत

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में बुधवार रात हुआ एक भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। रीवा-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्रमंडगंज घाटी की ढलान पर तेज रफ्तार और ब्रेक फेल ट्रक ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते चार वाहन आपस में टकरा गए और एक बोलेरो आग का गोला बन गई। इस दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से 9 लोग बोलेरो में जिंदा जल गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन आग इतनी तेज थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका। इस भीषण सड़क हादसे पर सीएम योगी ने दुख जताया है। ब्रेक फेल ट्रक बना हादसे की वजह पुलिस के मुताबिक हादसा ड्रमंडगंज घाटी के पास रात करीब 8:30 बजे हुआ। मध्य प्रदेश से चना लादकर आ रहा एक ट्रक ढलान पर अचानक ब्रेक फेल होने के कारण बेकाबू हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने सामने चल रही बोलेरो को टक्कर मार दी और उसे धकेलते हुए आगे चल रहे गिट्टी से भरे ट्रक में दे मारा। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने भी संतुलन खो दिया और वह आगे चल रही कार से टकरा गया। कुछ ही पलों में सड़क पर मलबा, आग और चीख-पुकार का भयावह दृश्य फैल गया। 9 लोग जिंदा जले टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि उसमें सवार लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। बोलेरो में मौजूद 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा एक कार सवार व्यक्ति और एक ट्रक चालक ने भी इस हादसे में दम तोड़ दिया। कुल 11 मौतों ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मैहर धाम से लौट रहे थे श्रद्धालु पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के अनुसार बोलेरो सवार सभी लोग प्रयागराज के मांडा क्षेत्र के हाटा गांव के रहने वाले थे। ये लोग मैहर धाम से दर्शन कर वापस लौट रहे थे। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बोलेरो में कुल कितने लोग सवार थे, लेकिन मृतकों की संख्या और स्थिति ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना दिया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी पुलिस और फायर टीम घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया, लेकिन आग की तीव्रता के चलते बोलेरो सवारों को बचाया नहीं जा सका। मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। फिलहाल पुलिस शवों की पहचान कराने और पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। आधे घंटे बाद बचाव टीम पहुंची स्थानीय लोगों के अनुसार, फायर ब्रिगेड को सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची. तब तक आग पूरी तरह विकराल रूप ले चुकी थी और सभी लोग जलकर दम तोड़ चुके थे. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।  हादसे में मरने वालों में बोलेरो सवार 9 लोग शामिल हैं, जो मैहर से दर्शन कर लौट रहे थे. इनमें एक ही परिवार के मां, बेटा और बेटी के अलावा दूसरे परिवार के मां-बेटे की भी मौत हुई है. इसके अलावा एक अन्य कार सवार व्यक्ति की भी जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रक का खलासी केबिन में फंसने के कारण जान गंवा बैठा. इस तरह कुल 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।  शव बुरी तरह झुलस चुके थे मृतकों की पहचान में काफी दिक्कतें आईं, क्योंकि शव बुरी तरह झुलस चुके थे. बाद में परिजनों ने घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर अपने प्रियजनों की पहचान की. हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं परिजन अपने प्रियजनों के शव लेकर घर लौट रहे हैं. बोलेरो में सवार वीना सिंह, इनका बेटा पीयूष सिंह, बेटी सोनम की मौत हुई है. वहीं, पंकज सिंह, वंदना सिंह और शिव सिंह की भी मौत हुई है. ये सभी मिर्जापुर के रहने वाले थे। 

टूटी सांसें, थमा जीवन: मनेंद्रगढ़ सड़क हादसे में युवक की दर्दनाक मौत, मुआवजे के बाद हुआ अंतिम विदाई का फैसला

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी मनेंद्रगढ़ की सड़कों पर एक और ज़िंदगी अचानक थम गई, पीछे छोड़ गई रोता-बिलखता परिवार और गहरे दर्द की लकीरें। सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले युवक की पहचान होने के बाद जहां एक ओर परिजनों का दुख और गहरा हो गया, वहीं मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद भी अंततः समाप्त हो गया। भारी मन से परिजनों ने अब अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया है। इस बीच डीवी ग्रुप ने मृतक परिवार को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बंजी निवासी 37 वर्षीय राजभान सिंह अपने ससुराल ग्राम परसगढ़ी गए हुए थे। किसे पता था कि यह सफर उनका आखिरी सफर साबित होगा। परसगढ़ी में मेडिकल कॉलेज निर्माण कार्य में लगे डीवी ग्रुप के पानी टैंकर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसा इतना भयावह था कि उनके सिर पर आई गंभीर चोटों के कारण शुरुआत में शव की पहचान तक मुश्किल हो गई। परिजनों की बेचैनी और अनिश्चितता के बीच मनेंद्रगढ़ सिटी कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मोबाइल के जरिए मृतक की पहचान की और परिवार को सूचना दी। जैसे ही घटना की खबर गांव पहुंची, माहौल गम और गुस्से से भर गया। परिजन और ग्रामीण सड़कों पर उतर आए, न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर विरोध शुरू हो गया। इस दुख की घड़ी में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर अध्यक्ष सौरव मिश्रा अपने साथियों के साथ पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। आखिरकार जनदबाव और विरोध के बाद डीवी ग्रुप ने मृतक के परिजनों को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही बीमा की राशि दिलाने का आश्वासन भी दिया गया। मुआवजा मिलने के बाद परिजनों ने भारी मन से अंतिम संस्कार के लिए सहमति जताई। इस फैसले के साथ ही क्षेत्र में फैला तनाव कुछ हद तक कम हुआ, लेकिन एक परिवार की जिंदगी में जो खालीपन आया है, उसे कोई भी मुआवजा कभी भर नहीं पाएगा। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

बाइक स्टंट के दौरान हुई त्रासदी, ट्रेलर से टकराकर 3 युवकों की मौत

रीवा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रील बनाने का खतरनाक शौक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ. मऊगंज के नेशनल हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार में रील बनाते समय यह हादसा हुआ. घटना का खौफनाक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तीन युवक तेज रफ्तार बाइक पर नजर आ रहे हैं।  दरअसल, मऊगंज थाना क्षेत्र के पन्नी पथरिया स्थित नेशनल हाईवे पर यह हादसा हुआ. दो बाइकों में सवार कुल पांच लोग इसकी चपेट में आ गए. जानकारी के अनुसार, एक पल्सर बाइक पर सवार तीन युवक तेज रफ्तार में चलते हुए मोबाइल से रील बना रहे थे. इसी दौरान उनकी बाइक सड़क किनारे खड़े ईंट से लोड ट्रेलर से जा टकराई।  टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक उछलकर दूर जा गिरे और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई. इसी बीच पीछे से आ रही दूसरी बाइक भी उसी खड़े ट्रेलर से भिड़ गई, जिससे उसमें सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।  पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया. सची पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ. घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।  डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है. पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है।  मृतकों और घायलों की पहचान पुलिस के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान 17 वर्षीय उपलक्ष कोल, 22 वर्षीय अमरीश कोल और 17 वर्षीय हेमराज कोल के रूप में हुई है. तीनों बेला गांव के निवासी थे और लौर थाना क्षेत्र से संबंधित थे।  वहीं, हादसे में घायल हुए दो सगे भाइयों की पहचान प्रशांत द्विवेदी और प्रदीप द्विवेदी के रूप में हुई है, जो चितपुरवा गांव के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट के कारण तीन लोगों की मौत और दो के घायल होने की पुष्टि हुई है। 

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में बस दुर्घटना, 15 की मौत; मृतकों की संख्या बढ़ सकती है

उधमपुर  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में एक यात्री बस खाई में गिर गई है। इस भीषण हादसे में 15 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि कई यात्री घायल हुए हैं। यह घटना तब हुई, जब बस रामनगर से उधमनगर की ओर जा रही थी। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब बस रामनगर के पास ही एक गांव कगोर्ट से गुजर रही थी। जानकारी मिली है कि ऊंची पहाड़ी पर बने रोड से गुजरती हुई बस का एक तीखे मोड़ के पास नियंत्रण खो गया। यह हादसा सुबह 10 बजे के करीब ही हुआ। हादसे के बाद से बचाव अभियान जारी है। कई लोगों को इस घटना के बाद अस्पताल में एडमिट कराया गया है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। यह बस उधमपुर जा रही थी, तभी यह हादसा हुआ। इस घटना को लेकर एलजी मनोज सिन्हा ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद और दिल तोड़ने वाला है। मेरी संवेदनाएं मृतकों के साथ हैं। मैं पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। इसके अलावा घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस घटना को लेकर एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि मेरी उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर मिंगा शेरपा से बात हुई है। उनका कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन समय रहते शुरू हो गया था और घायलों को उचित इलाज दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बारे में मुझे कुछ समय पहले ही जानकारी मिली थी और मैंने तुरंत उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर से बात की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई. घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है. उधमपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में इमरजेंसी वार्ड को अलर्ट कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है. जिला प्रशासन ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है. रामनगर के एसडीएम ने बताया कि बचाव कार्य जारी है और घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।  उधमपुर-रामनगर मार्ग पर सड़क की स्थिति और मौसम को लेकर अक्सर हादसे होते रहते हैं. पहाड़ी इलाका होने के कारण मोड़ों पर सतर्कता बरतना जरूरी होता है. इस हादसे के कारण स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित हुआ है. पुलिस ने आसपास के इलाके में यातायात को डायवर्ट कर दिया है. स्थानीय लोग बस हादसों को रोकने के लिए सड़क सुधार और बेहतर यातायात प्रबंधन की मांग कर रहे हैं। 

सकरी नेशनल हाईवे पर खड़े ट्रेलर में लगी भीषण आग, मचा हड़कंप

सकरी नेशनल हाईवे पर खड़े ट्रेलर में लगी भीषण आग, मचा हड़कंप  सकरी सकरी नेशनल हाईवे पर रविवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरा ट्रेलर धू-धू कर जलने लगा। आग की लपटें दूर से ही दिखाई दे रही थीं, जिससे आसपास के लोग सहम गए और मौके पर भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेलर हाईवे किनारे खड़ा था, तभी अचानक उसमें से धुआं उठने लगा और कुछ ही देर में आग भड़क उठी। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में ट्रेलर का अधिकांश हिस्सा जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अंदेशा शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी को माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जिससे आसपास खड़े अन्य वाहनों और संपत्ति को नुकसान होने से बचाया जा सका। हादसे के दौरान ट्रेलर चालक और सहायक सुरक्षित बताए जा रहे हैं, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। हालांकि, ट्रेलर में रखा सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया, जिससे लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। आग लगने की घटना के कारण कुछ समय के लिए नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात को सुचारू कराया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रशासन ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों की नियमित जांच कराएं और सुरक्षा मानकों का पालन करें, ताकि इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।

मथुरा नाव हादसा: पंकज मल्होत्रा का शव बरामद, मृतकों की संख्या 16, जलालाबाद में दुख का माहौल

जलालाबाद  मथुरा नाव हादसे में लापता चल रहे पंकज मल्होत्रा का शव बरामद कर लिया गया है। उनका शव हादसे वाली जगह से करीब ढाई किलोमीटर आगे देवराहा बाबा घाट और पानीगांव पुल के नीचे यमुना नदी में मिला।   प्रशासन और गोताखोरों की टीम पिछले सात दिनों से लगातार यमुना में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। आज सुबह तलाशी अभियान के दौरान पंकज मल्होत्रा का शव पानी में उतराता हुआ दिखाई दिया जिसके बाद उसे बाहर निकालकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। जलालाबाद के अग्रवाल कॉलोनी, गली नंबर एक के रहने वाले पंकज मल्होत्रा अपने मौसा-मौसी के साथ मथुरा गए थे। हादसे में उनके मौसा-मौसी की भी मौत हो चुकी है। पंकज का परिवार हादसे के बाद से मथुरा में अपने बेटे की तलाश में जुटे हुए थे। 10 अप्रैल को यमुना नदी में श्रद्धालुओं से भरी नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई थी। हादसे के बाद कई लोग नदी में डूब गए थे। तब से प्रशासन, पुलिस और गोताखोरों की टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। सातवें दिन अंतिम लापता व्यक्ति का शव मिलने के बाद सर्च अभियान समाप्त कर दिया गया है।

अंडमान सागर में बड़ा हादसा: 300 रोहिंग्याओं से भरी नाव पलटी, 250 लोगों की मौत की आशंका

ढाका संयुक्त राष्ट्र (UN) ने  एक बेहद दुखद घटना की जानकारी दी है। अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों से भरी एक नाव पलट गई है, जिसमें बच्चों सहित लगभग 250 लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। जीवित बचे लोगों ने बताया कि इस नाव पर महिलाओं, बच्चों, चालक दल के सदस्यों और संदिग्ध मानव तस्करों सहित लगभग 300 लोग ठसाठस भरे हुए थे। हादसा कब, कहां और कैसे हुआ? शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस नाव में लगभग 280 लोग सवार थे। यह नाव 4 अप्रैल को दक्षिणी बांग्लादेश के 'टेकनाफ' इलाके से मलेशिया के लिए निकली थी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, समुद्र में तेज हवाओं, खराब मौसम और नाव में क्षमता से बहुत अधिक लोगों के भरे होने के कारण यह बीच समुद्र में पलट गई। बचाव कार्य और एक खौफनाक आपबीती बांग्लादेश तट रक्षक (BCG) के अनुसार, उनका एक जहाज 'एम.टी. मेघना प्राइड' इंडोनेशिया जा रहा था, उसने 9 अप्रैल को समुद्र से 9 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। इनमें एक महिला भी शामिल है। ये लोग अंडमान द्वीप समूह के पास गहरे पानी में ड्रम और लकड़ियों के सहारे अपनी जान बचाते हुए पाए गए। आधिकारिक समाचार एजेंसी एए के मुताबिक 280 लोगों अवैध तरीके से बोर्ट में बैठकर मलेशिया की ओर जा रहे थे. लेकिन अंडमान सागर की लहरों को कुछ और ही मंजूर था. समंदर की उफनती लहरों के कारण ऐसा हुआ. उन चीखों की गवाह बनीं, जो मदद के लिए उठीं और फिर हमेशा के लिए खामोश हो गईं. ये बोट बांग्‍लादेश के कॉक्स बाजार से शुरू चली थी. इस हादसे में बाल-बाल बचे रफीकुल इस्लाम ने बताया कि नाव पर क्षमता से कहीं ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें 13 क्रू मेंबर और मानव तस्कर भी शामिल थे. रफीकुल ने दावा किया कि नाव पलटने से पहले ही करीब 25 से 30 लोग भीड़ और दम घुटने के कारण दम तोड़ चुके थे. इसके बाद समंदर की विशाल लहरों ने नाव को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते सब कुछ खत्म हो गया।  बचाए गए 9 लोगों में से 6 तस्‍कर टेकनाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी सैफुद्दीन इस्लाम के अनुसार, बांग्लादेशी जहाज ने 9 अप्रैल को हिंद महासागर से 9 लोगों को रेस्क्यू किया था. जांच में पता चला कि बचाए गए 9 लोगों में से 6 कथित मानव तस्कर हैं जिन्हें अब जेल भेज दिया गया है. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है कि इस अवैध यात्रा के पीछे और कौन-कौन से सिंडिकेट शामिल हैं।  UNHCR और IOM की चेतावनी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की बेबसी और उनके दीर्घकालिक समाधान की कमी का नतीजा है. बांग्लादेश वर्तमान में लगभग 1.3 मिलियन रोहिंग्याओं की मेजबानी कर रहा है, जो म्यांमार के सैन्य दमन के बाद वहां रह रहे हैं।  40 वर्षीय रफीकुल इस्लाम इस हादसे में बाल-बाल बचे हैं। उन्होंने बताया कि मानव तस्करों ने उन्हें मलेशिया में नौकरी दिलाने का लालच देकर नाव पर चढ़ाया था। उन्होंने बताया कि यात्रियों ने समुद्र में चार दिन और रातें बिताईं और इस दौरान हालात तेजी से बिगड़ते गए। गश्ती दलों की नजर से बचने के लिए, तस्करों ने यात्रियों को मछली और जाल रखने वाले बेहद तंग स्टोरेज कम्पार्टमेंट में छिपने के लिए मजबूर किया। इस्लाम ने बताया कि वहां सांस लेने के लिए मुश्किल से ही कोई ऑक्सीजन थी। नाव पलटने से पहले कम से कम 30 लोगों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। हम सांस तक नहीं ले पा रहे थे। जब नाव पलटी, तो सैकड़ों लोग समुद्र में गिर गए। इस्लाम के अनुसार, हादसे के समय नाव पर लगभग 240 लोग सवार थे, जिनमें करीब 20 महिलाएं और कई बच्चे शामिल थे। इनमें से मुट्ठी भर लोग ही जिंदा बच सके। रफीकुल ने बताया- हममें से कई लोगों को नाव के निचले हिस्से में रखा गया था, जहां कुछ लोगों की तो वहीं मौत हो गई। नाव से जो तेल रिसा था, उससे मैं जल गया। हादसा होने के बाद रेस्क्यू होने तक वे लगभग 36 घंटे तक समुद्र में तैरते रहे। ये लोग खतरनाक समुद्री यात्रा क्यों कर रहे थे? म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों को लंबे समय से जुल्म और हिंसा का सामना करना पड़ा। इस समय म्यांमार के रखाइन राज्य में सेना और एक विद्रोही गुट 'अराकान आर्मी' के बीच भीषण जंग चल रही है। जान बचाने के लिए 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में बने विशाल शिविरों में रह रहे हैं, जहां हालात बेहद खराब और अमानवीय हैं। मलेशिया जाने की चाहत मलेशिया एक अपेक्षाकृत अमीर देश है, जहां कंस्ट्रक्शन और खेती के काम के लिए एशिया के गरीब हिस्सों से मजदूर जाते हैं। तस्कर इन्ही मजबूर लोगों से पैसे लेकर उन्हें खतरनाक और खचाखच भरी नावों से अवैध तरीके से ले जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र (UNHCR) ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह घटना म्यांमार के लोगों के लंबे समय से बेघर होने और उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान न होने का एक भयानक परिणाम है। यह त्रासदी याद दिलाती है कि म्यांमार में हालात सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि रोहिंग्या शरणार्थी सुरक्षित और सम्मान के साथ अपनी मर्जी से अपने घर लौट सकें। यह कोई पहली घटना नहीं है। अंडमान सागर, जो म्यांमार, थाइलैंड और मलेशिया के बीच फैला है, वह ऐसे कई हादसों का गवाह बनता रहता है। पिछले साल मई में भी म्यांमार तट के पास दो नावों के डूबने से 427 रोहिंग्या लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई थी। गहराता मानवीय संकट और हताशा यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की उस गहरी हताशा को उजागर करती है, जिसके चलते वे मलेशिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड जैसे देशों में जाने के लिए जान की बाजी लगा रहे हैं। सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि मानवीय सहायता में लगातार हो रही कमी के कारण स्थिति और खराब हो रही है। कॉक्स बाजार में … Read more