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भारतीय आईटी सेक्टर को एआई से मिलेगी रफ्तार, राजस्व में 6% तक की बढ़ोतरी का अनुमान

नई दिल्ली भारतीय आईटी सर्विस कंपनियों के राजस्व में वित्त वर्ष 27 में 5-6 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि कार्य की मात्रा में 8-10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। यह जानकारी बुधवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आईटी कंपनियां अमेरिका की मजबूत व्यापक आर्थिक पृष्ठभूमि से लाभान्वित होने के लिए तैयार हैं, क्योंकि उनके टॉप अमेरिकी क्लाइंट्स ने कई वर्षों में अपनी सबसे मजबूत तिमाहियों में से एक दर्ज की है। रिसर्च फर्म के विश्लेषकों को उम्मीद है कि यह गति कॉर्पोरेट विश्वास को बढ़ाएगी और 2025 तक उच्च टेक्नोलॉजी खर्च को बढ़ावा देगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई एजेंट मल्टी-एजेंट सिस्टम में विकसित हो रहे हैं, जिससे एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर के रिडिजाइन को बढ़ावा मिल रहा है। यह बदलाव भारतीय आईटी फर्मों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। इसके अलावा, रिपोर्ट में उद्योग के अनुमानों का हवाला दिया गया है, जो बताते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू होने पर अगले तीन से चार वर्षों में एआई आईटी सेवाओं के मूल्य को 8-10 प्रतिशत तक कम कर सकता है, जिसका मतलब है कि 2025-27 में इसका वार्षिक प्रभाव 3-4 प्रतिशत तक हो सकता है। हालांकि, भारतीय आईटी कंपनियों ने कहा कि उन्होंने अब तक ग्राहकों से प्राप्त परियोजनाओं की संख्या बढ़ाकर इसकी भरपाई की है और इसलिए कुल राजस्व में वृद्धि जारी है। एचएसबीसी ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि 2026 में इस अपस्फीतिकारी प्रभाव और व्यापक अनुकूल परिस्थितियों के बीच खींचतान होगी।" कंपनी ने एजेंटिक एआई या एडवांस्ड मल्टी-एजेंट सिस्टम पर चिंताओं को खारिज कर दिया, जो संभावित रूप से सॉफ्टवेयर उद्योग को खत्म कर सकते हैं और लंबी अवधि में आईटी सर्विस को प्रभावित कर सकते हैं। भारत की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने अगस्त में अपने लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों के वेतन संशोधन की घोषणा की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कंपनी 2025 में लगभग 12,000 कर्मचारियों, यानी अपने वर्कफोर्स के 2 प्रतिशत की छंटनी करने की तैयारी कर रही है।

AI क्रांति या तबाही? विशेषज्ञ बोले– आने वाले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां जाएंगी

 नई दिल्ली दशकों पहले कंप्यूटर के आने पर जैसी हलचल मची थी, वैसी ही स्थिति अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर देखी जा रही है। कोई इसे लेकर आशंकित है कि नौकरियां चली जाएंगी तो कुछ लोगों को लगता है कि इससे तमाम काम आसान और पारदर्शी होंगे। इस बीच भारतीय अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला ने बड़ा अनुमान जाहिर किया है। उनका कहना है कि अगले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। निखिल कामथ के साथ पॉडकास्ट में विनोद खोसला ने कहा इन नौकरियों में लगे लोगों का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से होने लगेगा। यही नहीं उन्होंने छात्रों को भी जागरूक करते हुए कहा कि भविष्य के छात्रों को स्पेशलिस्ट बनने की बजाय जनरलिस्ट बनना होगा यानी उन्हें तमाम चीजों की जानकारी रखनी होगी। विनोद खोसला ने उम्मीद भरी एक बात भी की। उन्होंने कहा कि भले ही मौजूदा तमाम नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि कुछ अवसर भी इससे पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर भी पैदा होंगे, जिनके बारे में आज हम सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि ऐसी बहुत सी शानदार नौकरियां हैं, जिन्हें इंसान कर रहे हैं। उन कामों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किया जाएगा। ऐसी करीब 80 पर्सेंट नौकरियां होंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2040 तक बहुत सी चीजें बदल जाएंगी। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे होंगे कि कई काम तो खत्म ही हो जाएंगे। यदि कोई उन्हें करना चाहेगा तो वह उनका शौक होगा, लेकिन जरूरत नहीं होगी। विनोद खोसला का यह अनुमान ऐसे समय में आया है, जब दिग्गज टेक कंपनियों में छटनी का दौर है। इन कंपनियों का कहना है कि वे वर्कफोर्स का पुनर्गठन कर रही हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि चीजें बदल रही हैं। हाल ही में देश की सबसे बड़ी टेक कंपनी कही जाने वाली टीसीएस ने 12 हजार कर्मचारियों की छटनी का ऐलान किया है। इसके अलावा नीतियों में भी कुछ बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे भविष्य में भी नौकरियों पर तलवार रहेगी।

निमाड़ी में पूछो, निमाड़ी में पाओ जवाब — AI बना आपकी बोली का साथी, मिलेगा स्मार्ट जवाब

 धार अब अगर आप एआई से निमाड़ी में सवाल पूछेंगे, तो जवाब भी उसी बोली में मिलेगा। यह सपना अब साकार हो रहा है। केंद्र सरकार ने देश की भाषायी विविधता को तकनीक से जोड़ने के लिए एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल तैयार किया है, जिसका नाम है 'भारत जेन (Bharat Jain)'। हाल ही में इसे लॉन्च किया गया है और यह मॉडल खासतौर पर भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों को समझने और उनके अनुरूप जवाब देने में सक्षम है। भारत जेन को आईआईटी मुंबई ने विकसित किया है और इसमें देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं, जिनमें आईआईएम इंदौर (IIM Indore) भी एक प्रमुख भागीदार है। अब इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की निमाड़ी बोली को एआई में शामिल करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। यह कदम भाषायी समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। भारत जेन परियोजना के सहायक प्रबंधक प्रतीक जोशी ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश के दूरदराज और जनजातीय अंचलों में रहने वाले लोग भी तकनीक से जुड़ सकें, चाहे उन्हें अंग्रेज़ी या हिंदी न भी आती हो। इसके लिए भारत जेन को लोकभाषाओं और बोलियों को समझने योग्य बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आबादी भी इसका लाभ उठा सके। परियोजना की शुरुआत धार जिले के खलघाट से की गई है, जहां निमाड़ी भाषा को आधार बनाकर AI मॉडल को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय साहित्यकारों, शिक्षकों, और बोलियों के जानकारों से संवाद स्थापित किया गया है। बोलचाल की शैली, मुहावरे और सांस्कृतिक संदर्भों को एआई के डेटा में शामिल किया जा रहा है, ताकि जवाब न केवल सही बल्कि संदर्भपूर्ण भी हों।