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युद्ध की आंच UAE तक: Apple ने सुरक्षा कारणों से ऑफिस और रिटेल स्टोर्स बंद किए

संयुक्‍त अरब अमीरात ईरान-अमेरिका-इस्राइल की जंग में घ‍िरे मिड‍िल ईस्‍ट में हालात को देखते हुए दिग्‍गज कंपनी ऐपल ने UAE (संयुक्‍त अरब अमीरात) में अपने कॉरपोरेट ऑफ‍िस और सभी ऐपल स्‍टोर्स को अस्‍थायी तौर पर बंद कर दिया है। MacRumours की रिपोर्ट में बताया गया है क‍ि कंपनी ने अपने स्‍टोर्स को कम से कम मंगलवार 3 मार्च तक के लिए बंद किया है। आगे की स्‍थ‍ित‍ि को देखते हुए स्‍टोर्स खोलने पर फैसला लिया जाएगा। दिलचस्‍प यह है कि कंपनी इस हफ्ते अपने कई नए गैजेट लॉन्‍च करने वाली है, जिनमें iphone 17e को भी शामिल बताया जा रहा है। UAE में 3 मार्च तक बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स रिपोर्ट के अनुसार, UAE में ऐपल स्‍टोर्स को 3 मार्च तक बंद रखा जाएगा। यूएई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं और ऐपल स्‍टोर्स उनके लिए तब पसंदीदा जगह हाे जाती है, जब उन्‍हें नया ऐपल गैजेट खरीदना होता है। ऐपल इस सप्‍ताह अपने कई नए गैजेट लेकर आने वाली है। इनमें नया आईपैड, आईफोन 17e, मैक शामिल हो सकता है। अगर ऐपल स्‍टोर्स को अधिक दिनों तक बंद रखा गया तो कंपनी की बिक्री पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। इन जगहों पर बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स     दुबई मॉल     मॉल ऑफ द ऐमिरेट्स     यास मॉल     अल जिमी मॉल     अल मरिया आईलैंड SIM स्‍कैम का खतरा बढ़ा मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच यूएई में सिम स्‍कैम के मामलों का खतरा भी बढ़ गया है। दुबई पुलिस ने इसको लेकर अपने लोगों को चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग क्राइसि‍स मैनेजमेंट अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बचने के लिए लोगों से उनकी पर्सनल डिटेल्‍स ना बताने की हिदायत दी गई है। साथ ही किसी संदिग्‍ध कॉल या मैसेज पर ना रिप्‍लाई करने को कहा गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि मदद के नाम साइबर धोखेबाज लोगों की जरूरी जानकारी चुरा सकते हैं। भारत के संदर्भ में यह खबर इसलिए महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि दुबई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं। अगर आपका भी कोई जानकार, करीबी इन जगहों पर है तो उसे सिम स्‍कैम के बारे में सतर्क अवश्‍य करें।

Apple का नया आलीशान ऑफिस बेंगलुरु में, ₹2.84 करोड़ मासिक किराया

बेंगलुरु  Apple बेंगलुरु में 10 साल के लिए ऑफिस स्पेस लीज पर लेकर भारत में अपना विस्तार कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दिग्गज टेक कंपनी ने 'एम्बेसी जेनिथ' (Embassy Zenith) नाम की कमर्शियल ऑफिस टावर में 1.21 लाख वर्ग फुट का वर्कस्पेस हासिल किया है, जिसका मासिक किराया 2.84 करोड़ रुपये है. इस विस्तार के बाद, एप्पल अब इस पूरी इमारत में कुल 3.89 लाख वर्ग फुट क्षेत्र का उपयोग कर रहा है. रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म 'प्रॉपस्टैक' (Propstack) द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक, नया लीज समझौता सटीक रूप से 1,21,203 वर्ग फुट के चार्जेबल एरिया के लिए है. एप्पल ने पूरे 10 साल के लिए  ऑफिस लीज पर लिया है. इस जगह का कुल किराया लगभग 1,333 करोड़ रुपये होगा. यह ऑफिस स्पेस इमारत की ग्राउंड फ्लोर से लेकर चौथी मंजिल तक फैला हुआ है. 14.24 करोड़ की सिक्योरिटी जमा की यह प्रॉपर्टी मैक चार्ल्स (इंडिया) द्वारा लीज पर दी गई है और इस लीज की शुरुआत 25 सितंबर 2025 से हो चुकी है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, एप्पल पहले ही सिक्योरिटी डिपोजिट के रूप में 14.24 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है.  यह भी रिपोर्ट किया गया है कि 3 अप्रैल 2026 से किराए में हर साल 4.5% की वृद्धि होगी. समझौते में यह भी उल्लेख किया गया है कि एप्पल 2 अप्रैल 2030 से पहले इस लीज को समाप्त नहीं कर सकता है. इसके अलावा, एप्पल 123 पार्किंग स्लॉट के लिए अलग से मासिक शुल्क का भुगतान करेगा, जिसकी कीमत 11.07 लाख रुपये तय की गई है. हालांकि रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स ने विस्तार के इस विवरण का खुलासा किया है, लेकिन एप्पल ने इस नए जोड़े गए स्पेस के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. फिर भी, कंपनी धीरे-धीरे अपने ऑफिस और रिटेल स्टोर नेटवर्क को बढ़ाकर भारत में अपनी उपस्थिति का विस्तार कर रही है.

बिना टावर भी चलेगा फोन! ऐपल ला सकता है एंटीना वाला स्मार्ट कवर

एंटीना वाला फोन कवर, जी हां आपने सही सुना। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, Apple एक नए स्मार्ट केस डेवलप करने पर विचार कर रहा है। इसमें एक बड़ा और ज्यादा एडवांस्ड एंटीना सिस्टम जोड़ जाएगा ताकि सैटेलाइट कम्युनिकेशन को काफी बेहतर बनाया जा सके। बता दें कि कंपनी ने अपने आईफोन में 2022 में सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS फीचर लॉन्च किया था। इसके बाद अब ऐपल भविष्य में आने वाले फोन्स में कई बड़े अपग्रेड देने पर विचार कर रही है। लेटेस्ट पेटेंट से पता चलता है कि इमरजेंसी SOS फीचर में जल्द ही एक बड़ा अपग्रेड आ सकता है। इस फीचर को बेहतर बनाने के लिए नए स्मार्ट कवर का पेटेंट कराया गया है। फोन के एंटीना नहीं होते इतने पावरफुल Apple ने iPhone 14 के साथ सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की शुरुआत की थी। इस फीचर के साथ कंपनी ने लोगों को चौंका दिया था। यूजर्स अपने आईफोन को लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की ओर पॉइंट करके इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन फोन के अंदर दिए गए एंटीना का सरफेस एरिया और पावर सीमित होती है, इसलिए डेटा ट्रांसमिशन भी सीमित हो जाता है। बिल्डिंग, पेड़ और जमीन के कारण सैटेलाइट के साथ कनेक्शन बनाए रखना में मुश्किल आती है। कवर बड़े ग्रुप के साथ बनाता है कनेक्शन इस समस्या को हल करने और अपनी सैटेलाइट SOS को और भी बेहतर बनाने के लिए Apple ने एक हटाने वाले कवर के लिए पेटेंट फाइल किया है। इसे फेज्ड ऐरे एंटीना के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सिग्नल बीम बनाने और उन्हें चलाने के लिए कई ट्रांसमीटर और रिसीवर का इस्तेमाल करता है। कवर किसी एक सैटेलाइट पर लॉक होने के बजाय बड़े ग्रुप के साथ कनेक्शन बनाए रखता है। यह आसमान में घूमते हुए सैटेलाइट के बीच आसानी से शिफ्ट हो सकता है। पेटेंट के इलस्ट्रेशन में एक फोल्ड-आउट कवर दिखाया गया है। यह आसमान की ओर पॉइंट करता है और डेडिकेटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) लिंक या नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) के जरिए iPhone के साथ सिंक होता है। ज्यादा डेटा भेजने में मिलेगी मदद केस में एक बड़ा एंटीना लगा है, जो iPhone को ज्यादा डेटा भेजने में मदद कर सकता है। इसके बाद, फोन शायद ज्यादा सैटेलाइट कनेक्टिविटी को सपोर्ट कर सकता है। यह होने वाली रुकावट को कम कर सकता है और ट्रांसमिशन की ताकत को भी बढ़ा सकता है। हालांकि, इसे कब मार्केट में लाया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन ये साफ है कि आईफोन कवर के साथ अगर एनटीना लगा होगा तो SOS सर्विस काफी बेहतर हो जाएगी।

iPhone खोना पड़ा भारी? नहीं! Apple ने थमा दिया 2TB का नया मॉडल

नई दिल्ली एक शख्स के लिए उसके iPhone का खो जाना बेहद फायदेमंद साबित हुआ। दरअसल Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' ने आप बीती शेयर करते हुए बताया कि किस तरह उसका 256GB स्टोरेज वाला iPhone 17 Pro Max खो गया था। इसके बाद जब उसने AppleCare+ प्लान के तरह फोन के चोरी या गुमशुदगी का क्लेम फाइल किया, तो ऐपल ने उसे 8 गुना ज्यादा स्टोरेज वाला iPhone लौटा दिया। गौर करने वाली बात है कि इस शख्स का iPhone सिर्फ 256 GB का था लेकिन बदले में उसे 2TB वाला मॉडल मिल गया। सर्विस सेंटर की गलती से यूजर की मौज रेडिट पर शेयर किया गया ये मामला,(REF.) काफी दिलचस्प है। Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' को उनके 256GB वाले iPhone 17 Pro Max के बदले 2TB वाला मॉडल थमा दिया गया। इसे लेकर यूजर ने अपने पोस्ट में फोन के सीरियल नंबर और स्टोरेज से जुड़ी तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि iPhone के सीरियल नंबर के जरिए पता लगाया जा सकता है कि फोन नया है या Apple द्वारा रिप्लेस किया गया यूनिट। खोने पर क्यों मिला रिप्लेसमेंट? आपके मन में सवाल आ सकता है कि इस यूजर को आखिर फोन खोने पर रिप्लेसमेंट क्यों मिला। बता दें कि AppleCare+ प्लान लेने पर यूजर फोन खराब होने, टूटने और खो जाने पर ऐपल से रिप्लेसमेंट मांग सकता है। iPhone के टूटने या खराब होने पर अगर फोन रिपेयर हो सकता है, तो ऐपल फोन ठीक करके देता है। वहीं अगर फोन ठीक होने की हालत में न हो या खो जाए, तो AppleCare+ प्लान के तहत बदले में फोन उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए कुछ चार्ज ऐपल लेता है। हालांकि जिस फोन के खोने की शिकायत की जाती है, उसे ऐपल बैकएंड से ब्लॉक कर देता है ताकि उसका इस्तेमाल कोई न कर पाए। ऐपल ने क्यों दिया ज्यादा महंगा फोन? कई बार यूजर जिस फोन के लिए क्लेम करता है, वह अगर ऐपल के पास न हो तो ऐपल हर्जाने के तौर पर उससे बेहतर मॉडल अपने यूजर को उपलब्ध कराता है। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि संभव है इस यूजर के फोन का मॉडल ऐपल के पास स्टॉक में नहीं होगा। इसके साथ ही ऐसा होने पर ऐपल किसी तरह का एक्सट्रा चार्ज नहीं लेता। ऐसा ही इस यूजर के साथ भी हुआ है। Apple ने पहले भी दिखाई है उदारता ऐसा पहली बार नहीं है कि ऐपल ने किसी के साथ इतनी उदारता दिखाई हो। 2018 में इंटेल मैकबुक प्रो के मालिक को रिपेयर के बदले सीधे M4 Max चिप वाला मैकबुक प्रो दे दिया गया था। इसी तरह 2019 में मैकबुक प्रो के मालिक को M5 मॉडल वाला लेटेस्ट मैकबुक प्रो रिप्लेसमेंट में मिला था। यही वजह है कि अक्सर लोग ऐपल के प्रोडक्ट लेते समय Apple का Care+ प्लान जरूर लेते हैं।

भारत ने C+1 फॉर्मूला के लिए बिछाया रेड कारपेट, यही रणनीति बनाएगी सोने की चिड़ीया

नई दिल्ली ज‍ियोपॉल‍िट‍िक्‍स में अब खेल इकोनॉमी के जर‍िये खेला जा रहा है. आपको याद होगा, जब कोव‍िड आया तो पूरा का पूरा सप्‍लाई चेन ह‍िलने लगा. यूक्रेन संकट ने आग में घी का काम क‍िया.दुन‍िया को समझ नहीं आया क‍ि अब जाएं तो जाएं कहां.ज‍िन देशों के साथ वे कारोबार कर रहे थे,वे फंस चुके थे. रही सही कसर अमेर‍िकी टैर‍िफ ने पूरी कर दी. अब दुन‍िया को डर लग रहा क‍ि अगर चीन पर अमेर‍िकी सख्‍ती बढ़ी, ताइवान पर हमला हुआ तो मुश्क‍िल होगी. इसल‍िए ज्‍यादातर देश ‘चीन + 1’ (C+1) फार्मूला अपना रहे हैं. भारत यह भांप चुका है. इसील‍िए बजट में सरकार ने ऐसे देशों, ऐसी कंपन‍ियों के ल‍िए रेड कारपेट ब‍िछा द‍िए हैं. मोबाइल, लैपटॉप और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को टैक्स में छूट दी गई है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम को बजट से ताकत दी है ताकि विदेशी कंपनियां चीन छोड़कर भारत आएं. मैसेज साफ है क‍ि अगर ताइवान या चीन में संकट आता है, तो भारत दुनिया की बैकअप फैक्ट्री बनने के ल‍िए पूरी तरह तैयार है. और यहीं से फ‍िर सोने की च‍िड़‍िया बनने का रास्‍ता खुलेगा. 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का एक्सप्रेसवे दुनिया की 40% मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा है. यहीं से पूरी दुन‍िया में जरूरत की बहुत सारी चीजें जा रही हैं. लेकिन साल 2026 ‘टर्निंग पॉइंट’होने जा रहा है. शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों और ब्लैक बॉक्स जैसी अर्थव्यवस्था से तंग आकर ग्लोबल कंपनियां अब एक ऐसे देश की तलाश में हैं, जो न केवल लोकतांत्रिक हो बल्कि जिसके पास चीन को टक्कर देने वाला स्केल भी हो.भारत ने इसी ‘चीन प्लस वन’ (C+1) मौके को भुनाने के लिए अपना ‘रेड कारपेट’ बिछा दिया है. यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का वह एक्सप्रेसवे है जो भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ की गद्दी पर बैठाएगा. दुनिया को आखिर भारत की जरूरत क्यों है?     सप्लाई चेन का वेपनाइजेशन: कोरोना काल में चीन ने मेडिकल सप्लाई रोककर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. दुनिया समझ गई कि एक ही सप्लायर पर निर्भर रहना आत्मघाती है. अब एपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों को अपनी सुरक्षा के लिए भारत जैसा भरोसेमंद पार्टनर चाहिए.     बूढ़ा होता चीन: चीन की वर्किंग पॉपुलेशन तेजी से घट रही है. वहां मजदूरी महंगी हो गई है. दूसरी ओर, भारत के पास 65% युवा आबादी है, जो अगले 30 साल तक दुनिया को सबसे सस्ती और कुशल लेबर दे सकती है.     ताइवान का साया: दुनिया की 90% एडवांस चिप्स ताइवान में बनती हैं. चीन की ताइवान पर नजर ने वैश्विक टेक कंपनियों को डरा दिया है. उन्हें एक ऐसा ‘बैकअप’ चाहिए जो युद्ध की स्थिति में भी ग्लोबल सप्लाई चेन को चालू रख सके. चीन की राह रुकी, तो भारत को कैसे होगा बंपर फायदा?     इलेक्ट्रॉनिक्स का नया गढ़: बजट 2026 में मोबाइल और लैपटॉप कंपोनेंट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाना एक सोची-समझी चाल है. भारत अब केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है. 2025 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 120 बिलियन डॉलर पार करने का अनुमान है.     सेमीकंडक्टर: चीन की दुखती रग: चीन चिप वॉर में अमेरिका से पिछड़ रहा है. भारत ने इसका फायदा उठाते हुए 1.5 लाख करोड़ रुपये का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ शुरू किया है. टाटा और माइक्रोन (Micron) जैसी कंपनियों के प्लांट भारत को उस लिस्ट में खड़ा कर देंगे, जहाँ आज केवल ताइवान और चीन हैं.     केमिकल सेक्टर में ‘प्रिवी’ जैसे खिलाड़ियों का दबदबा: चीन में पर्यावरण नियमों की सख्ती के कारण वहां के केमिकल प्लांट बंद हो रहे हैं. इसका सीधा फायदा प्रिवी स्पेशलिटी और आरती इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की जगह ले रही हैं. कंपनियों को क्या मिल रहा है? PLI स्कीम: जितना बनाओगे, उतना पैसा पाओगे. 14 से ज्यादा सेक्टरों में सरकार कंपनियों को कैश इंसेंटिव दे रही है. यह चीन की सब्सिडी का भारतीय जवाब है. नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम: पहले भारत में जमीन से लेकर बिजली तक के लिए 50 दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब एक ही पोर्टल पर सारी क्लीयरेंस मिल रही है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अब केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिख रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश: बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. पीएम गतिशक्ति के तहत नए पोर्ट्स और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, ताकि भारत से माल भेजना चीन से भी सस्ता पड़े.

भारत में Apple पर संकट के बादल, सरकार की चेतावनी से बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली भारत की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था यानी कि Competition Commission of India (CCI) ने Apple को एक कड़ी चेतावनी जारी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल 2021 से चल रही एंटीट्रस्ट जांच में देरी करने की कोशिश कर रही है। इससे नाराज होकर CCI ने कंपनी को आखिरी चेतावनी दी है। यह मामला इन ऐप पेमेंट से जुड़ा है और कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर यानी कि लगभग 32 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल बार-बार जवाब देने में देरी कर रही है, जिससे जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है। अब CCI ने साफ कर दिया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple ने जवाब नहीं दिया, तो वह एकतरफा कार्रवाई करेगी। क्या है पूरा मामला? भारत में ऐपल 2021 से एक एंटीट्रस्ट मामले में फंसी है, जो कि इन-ऐप पेमेंट से संबंधित है। इस कानूनी लड़ाई में कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर का जुर्माना लग सकता है। वहीं ऐपल ने भारत के नए एंटीट्रस्ट दंड कानून को चुनौती दी है। दरअसल यह कानून CCI को जुर्माने की राशि तय करने के लिए ऐपल के ग्लोबल टर्नओवर का इस्तेमाल करने की मंजूरी देता है। इसके जवाब में CCI ने ऐपल से जांच पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए कहा था। इस पर ऐपल को लंबे समय से मौका दिया जा रहा है। CCI की सख्त चेतावनी 31 दिसंबर 2025 एक आदेश में CCI ने कहा है कि साफ निर्देश के बाद भी बार-बार समय बढ़ाना सही नहीं है और इससे नियम-कानून कमजोर होते हैं। साथ ही ऐसा करने से मामले को समय पर खत्म करने में समस्या आती है। ऐपल को लेकर CCI का यह भी कहना है कि ऐसी छूट हमेशा के लिए नहीं दी जा सकती। अब CCI ने फैसला किया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple की ओर से जवाब नहीं मिलता, तो वह खुद ही आगे बढ़ेगी और फैसला लेगी। बता दें कि लंबे समय से ऐपल सरकारी आदेश के जवाब देने में सुस्ती दिखा रही है, जिससे मामले को आगे बढ़ाने में समस्या हो रही है। ऐपल का रुख और आगे क्या? रिपोर्ट के मुताबिक Apple का मानना है कि CCI अदालती कार्यवाही को रोकने की कोशिश कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को है और इससे पहले ऐपल की ओर से CCI को जवाब दिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में साफ है कि ऐपल अदालत के फैसले के इंतजार में है। हालांकि अगर Apple जवाब नहीं देती है, तो भारत सरकार सख्त कदम उठा सकती है और भारी जुर्माना लगा सकती है।

2026 में लॉन्च हो सकता है फोल्डेबल iPhone, डिजाइन लीक होने पर Apple ने किया मुकदमा

 नई दिल्ली ऐपल उन गिनी चुनी कंपनियों में से है जो अपने आने वाले प्रोडक्ट्स को सालों तक पूरी तरह छुपाकर रखती है. इसलिए आपने दूसरी कंपनियों की तरह ऐपल के किसी प्रोडक्ट का टीजर कभी नहीं देखा होगा. हालांकि सालों से ऐपल के आईफोन लॉन्च से पहले लीक हो जाते हैं.  टेक इंडस्ट्री में एक सच्चाई यह भी है कि ऐपल से जुड़ी सबसे बड़ी कहानियां अक्सर लॉन्च से पहले ही बाहर आ जाती हैं. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. फर्क बस इतना है कि इस बार लीक किसी अफवाह या सप्लाई चेन रिपोर्ट से नहीं, बल्कि उस शख्स से आया है जिसके खिलाफ ऐपल पहले ही कानूनी कार्रवाई कर चुका है. हाल के दिनों में ऐपल के Foldable iPhone को लेकर चर्चाएं फिर तेज़ हो गई हैं. यह वही प्रोडक्ट है जिसे लेकर सालों से कहा जाता रहा है कि ऐपल इस सेगमेंट में तब तक एंट्री नहीं करेगा जब तक टेक्नोलॉजी पूरी तरह तैयार न हो जाए. अब जो जानकारी सामने आई है, वह इसी सोच को मजबूत भी करती है और नए सवाल भी खड़े करती है. जॉन प्रॉसर नाम के यूट्यूबर ने एक बार फिर से Foldable iPhone का डिजाइन लीक किया है. लीक के मुताबिक ऐपल का फोल्डेबल आईफोन बुक स्टाइल डिजाइन में हो सकता है. यानी फोन बंद रहने पर यह एक नॉर्मल बार स्मार्टफोन जैसा दिखेगा और खोलने पर टैबलेट साइज स्क्रीन में बदल जाएगा. बताया जा रहा है कि बाहर की स्क्रीन कॉम्पैक्ट होगी ताकि रोज़मर्रा के इस्तेमाल में फोन भारी न लगे, जबकि अंदर की स्क्रीन बड़ी होगी जो वीडियो, पढ़ने और मल्टीटास्किंग के लिए बनाई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक फोल्डेबल आईफोन में क्रीज ना के बराबर होगा. फोल्डेबल फोन की सबसे बड़ी कमजोरी यही रही है कि स्क्रीन के बीच एक लाइन साफ दिखती है. इंडस्ट्री में लंबे समय से चर्चा है कि ऐपल बिना क्रीज़ या बहुत कम क्रीज़ वाली डिस्प्ले टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, और इसी वजह से वह अब तक फोल्डेबल फोन लॉन्च करने से बचता रहा. इस पूरे मामले को और दिलचस्प बनाता है कानूनी बैकग्राउंड. जिस व्यक्ति ने यह जानकारी शेयर की है, उसके खिलाफ ऐपल पहले ही ट्रेड सीक्रेट चोरी करने का आरोप लगा चुका है. कंपनी का दावा है कि उसके इंटरनल सॉफ्टवेयर और डिजाइन से जुड़ी जानकारी गैरकानूनी तरीके से बाहर लाई गई. इसके बावजूद नई जानकारी सामने आना यह दिखाता है कि ऐपल के लिए अपने सीक्रेट्स को पूरी तरह कंट्रोल में रखना अब पहले जितना आसान नहीं रहा. टेक इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि फोल्डेबल आईफोन की टाइमिंग भी बेहद अहम होगी. अभी तक फोल्डेबल मार्केट में सैमसंग और कुछ हद तक गूगल जैसे ब्रांड्स मौजूद हैं, लेकिन यह सेगमेंट अभी भी नीश कैटेगरी में ही गिना जाता है. ऐपल की एंट्री इस कैटेगरी को मेनस्ट्रीम बना सकती है, ठीक वैसे ही जैसे उसने पहले स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच के साथ किया था. यह भी मुमकिन है कि ऐपल फोल्डेबल आईफोन को एक अलग पहचान के साथ पेश करे. चर्चा है कि कंपनी इसे प्रो या अल्ट्रा कैटेगरी में रख सकती है ताकि यह एक प्रीमियम और लिमिटेड ऑडियंस के लिए बना प्रोडक्ट लगे. इससे ऐपल को टेक्नोलॉजी को धीरे धीरे स्केल करने का वक्त भी मिल जाएगा. फिलहाल ऐपल की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. कंपनी हमेशा से लीक और रूमर्स पर प्रतिक्रिया नहीं देती. लेकिन इतना साफ है कि फोल्डेबल आईफोन अब सिर्फ एक दूर की संभावना नहीं रह गया है. इस साल सितंबर में ऐपल iPhone 18 सीरीज के साथ ही फोल्डेबल लॉन्च कर सकता है. 

Apple का बड़ा फैसला: iPhone SE, MacBook Air M3 सहित लगभग 25 गैजेट्स की बिक्री बंद

नई दिल्ली टेक दिग्‍गज ऐपल ने इस साल अपनी प्रोडक्‍ट लिस्‍ट को काफी छोटा कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने 25 से ज्‍यादा डिवाइस और एक्‍सेसरीज को बंद कर दिया, जिसमें 7 आईफोन मॉडल, macbook air m3 समेत कई मैकबुक शामिल हैं। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं कि इन प्रोडक्‍ट्स को अब खरीदा नहीं जा सकता। दरअसल, ऐपल हमेशा से नए मॉडल आने पर पुराने मॉडल को बंद यानी डिस्‍कंन्‍टीन्‍यू कर देती है। इस साल बंद किए गए सबसे अहम मॉडलों में शामिल रहा आईफोन SE। फरवरी में कंपनी ने तीसरी जेनरेशन के आईफोन एसई को बंद कर दिया। कौन से गैजेट्स पर चली कैंची, आइए जानते हैं। Iphone SE की जगह आया iphone 16e ऐपल ने Iphone SE काे बंद करने के बाद iphone 16e को पेश किया। यह ऐपल का सबसे कॉम्‍पैक्‍ट और सस्‍ता आईफोन है। बहरहाल, अब ऐपल ऑफ‍िशियली ऐसा कोई आईफोन नहीं बेचती जिसमें होम बटन, टच आईडी, एलसीडी स्‍क्रीन, 6 इंच से छोटा डिस्‍प्‍ले या लाइटनिंग पोर्ट हो। उनके जगह ऐपल की तमाम आईफोन लाइनअप में अब फेस आईडी, ओएलईडी डिस्‍प्‍ले और यूएसबी-सी टाइप चार्जिंग है। Iphone Plus मॉडल की विदाई इस साल आई आईफोन 17 सीरीज में कोई प्‍लस मॉडल शामिल नहीं था। इसके अलावा, कंपनी ने आधिकारिक तौर पर आईफोन 14 प्‍लस और आईफोन 15 प्‍लस को बंद कर दिया है। जल्‍द आईफोन 16 प्‍लस की विदाई भी हो सकती, जो यह संकेत है कि कंपनी प्‍लस मॉडल के बजाए अब स्‍ल‍िम स्‍मार्टफोन पर फोकस कर रही है। इस साल प्‍लस मॉडल की जगह आईफोन एयर को लाया गया है। यह फोन चर्चाओं में तो खूब रहा, लेकिन सेल में इसे मामूली परफॉर्म किया। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले वक्‍त में आईफोन सीरीज के प्‍लस मॉडल नहीं लॉन्‍च होंगे। इस साल कितने आईफोन बंद हुए?     आईफोन 16 प्रो     आईफोन 16 प्रो मैक्स     आईफोन 15     आईफोन 15 प्लस     आईफोन 14     आईफोन 14 प्लस     आईफोन SE (थर्ड जेनरेशन)। 2025 में कितनी मैकबुक्‍स बंद     M2 मैक्स और M2 अल्ट्रा वाला मैक स्टूडियो     M4 चिप वाला 14-इंच मैकबुक प्रो     macbook air m3 13 इंच और 15 इंच     macbook air m2 13 इंच ऐपल वॉच के ऑप्‍शन भी हुए कम इस साल ऐपल ने कई वॉच मॉडल को आध‍िकारिक तौर पर अपने स्‍टोर से हटा दिया। इनमें ऐपल वॉच अल्ट्रा 2, ऐपल वॉच सीरीज 10 और ऐपल वॉच SE 2 शामिल है। M4 चिप वाले आईपैड प्रो, M2 चिप वाले आईपैड एयर और 10वीं जनरेशन के आईपैड को बंद कर दिया। ध्‍यान रहे कि इन गैजेट्स को ऐपल स्‍टोर से हटाया गया है। थर्ड पार्टी स्‍टोर जैसे- एमेजॉन, फ्लिपकार्ट से इन्‍हें खरीदा जा सकता है। अगर ये वहां आपको डिस्‍काउंटेड प्राइस में मिलते हैं तो आप इन्‍हें खरीद सकते हैं।

2026 में सरप्राइज देने आ रहा है ऐपल का ये खास डिवाइस, आईफोन नहीं फिर भी सबकी नजर

 नई दिल्ली  नए साल का आगाज होने वाला है। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में साल 2026 कई बदलाव लेकर आ सकता है। टेक‍ दिग्‍गज ऐपल को लेकर कहा जा रहा है कि नए साल में कंपनी आईफोन या मैकबुक से ज्‍यादा किसी और प्रोडक्‍ट पर ध्‍यान दे रही है। ऐपल सीईओ टिम कुक के लिए कंपनी के टेक डेवलपमेंट की सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐपल ग्‍लासेज हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा हो सकता है कि नए साल में कंपनी एक बड़ा लॉन्‍च आयोजित करे। 2026 में हो सकता है बड़ा लॉन्‍च 9to5Mac की रिपोर्ट (ref.) के मुताबिक, ऐसा हो सकता है कि ऐपल साल 2026 में बड़े लॉन्‍च की तैयारी कर रही है और ऐपल ग्‍लासेज उसका हाइलाइट हो सकते हैं। अन्‍य रिपोर्टों की मानें तो कंपनी ‘अनवील्‍ड’ शब्‍द पर अधिक जोर दे रही है जो संकेत हो सकता है कि ऐपल ग्‍लासेज को सिर्फ प्रदर्शित किया जाएगा, लॉन्‍च को टाला जा सकता है। ऐसा हुआ तो कंपनी वियरेबल सेगमेंट में एक और डिवाइस तो ले आएगी, लेकिन उसे लोगों के बीच पहुंचने में वक्‍त लग सकता है। हर दिन पहनने वाले चश्‍मे हालांकि ऐपल ग्‍लास ेज के लॉन्‍च होने की संभावनाएं इसलिए भी बन रही हैं, क्‍योंकि गूगल भी अपने ग्‍लासेज नए साल में ला सकती है और मेटा के मेटा ग्‍लास पहले से ही मार्केट में मौजूद हैं। यह सेगमेंट ऐसा है, जिसमें चीनी स्‍मार्टफोन कंपनियों की मौजूदगी अधिक नहीं है। ऐपल इस सेगमेंट में कदम रखकर अपना दबदबा बना सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, ऐपल का मकसद पूरी तरह से ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) ग्लासेज देना है, जिसे लोग हर दिन पहन सकें। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लास को पहनने के बाद उससे ही कई सारे काम किए जा सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसा रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेज (Ray-Ban Meta smart glasses) में मुमकिन है। ऐपल ग्‍लासेज के फीचर्स ऐपल ग्‍लासेज को बिना डिस्‍प्‍ले के पेश किया जा सकता है। वह आईफोन से कनेक्‍ट होकर काम करेगा। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लासेज में सिरी, ऐपल इंटेलिजेंस और बिल्‍ट इन ओपन ईयर स्‍पीकर्स का सपोर्ट होगा। हालांकि चश्‍मों को पूरी तरह से कंट्रोल करने के लिए आईफोन चाहिए होगा। कहा जाता है कि कंपनी एक ऐसा गैजेट पेश करना चाहती है जिसे यूजर अपने रोजाना इस्‍तेमाल में पहन सके। कंपनी मेटा से मुकाबला करना चाहती है, जिसने अपने स्‍मार्ट ग्‍लासेज को एक के बाद एक लॉन्‍च करके पॉपुलर बनाने की कोशिश की है।

Apple का नया कारनामा: अब iPhone भी पहनेगा मोजे, कीमत ₹20,300

नई दिल्ली ऐपल अपने महंगे प्रोडक्ट्स के लिए काफी मशहूर है। अपनी इस पहचान को कायम रखते हुए ऐपल ने एक खास किस्म का मोजा यानी कि सॉक्स को लॉन्च किया है। कमाल की बात ये है कि इसकी कीमत 13 हजार रुपये से शुरू होकर 20 हजार रुपये तक जाती है। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो जाती। इस मोजे या मोजे जैसी एक्सेसरी को आपके लिए नहीं बल्कि आपके iPhone के लिए लॉन्च किया गया है। चलिए इस अजीबो-गरीब एक्सेसरी आईफोन पॉकेट के बारे में डिटेल में जानते हैं। क्या है आईफोन पॉकेट? आईफोन का मोजा या फिर जिसे ऐपल iPhone Pocket बता रहा है एक 3D-निटेड स्ट्रेचेबल फैब्रिक से बनी हुई लग्जरी एक्सेसरी है। यह iPhone को अच्छे से कवर कर लेती है और यह दिखने में ही नहीं अपने काम में भी बेहद खास है। इस एक्सेसरी का फैब्रिक इतना लचीला है कि अपने फोन को इसमें से निकाले बिना ही आप उसकी स्क्रीन की झलक देख सकते हैं। ऐपल ने इसे वियरेबल पॉकेट कहा है, जिसमें अपने iphone को रखकरआप पहनकर इसे कैरी भी कर सकते हैं। कीमत और डिजाइन इससे पहले भी ऐपल ने 2004 में अपने iPod के लिए 29 डॉलर यानी कि 2,400 रुपये का iPod Socks नाम से एक एक्सेसरी लॉन्च की थी। वहीं इसके मुकाबले iPhone Pocket एक लग्जरी प्रोडक्ट है। इसके शॉर्ट-स्ट्रैप वर्जन की कीमत 149.95 डॉलर या फिर 12,900 रुपये से होती है। वहीं इसके लॉन्ग-स्ट्रैप वर्जन की कीमत 229.95 डॉलर यानी कि करीब 20,300 रुपये है। बता दें कि ऐपल की इस लेटेस्ट एक्सेसरी को Issey Miyake Studio ने डिजाइन किया है। यह वही टीम है जिसने स्टीव जॉब्स के लिए मशहूर ब्लैक टर्टलनेक बनाया था। iPhone Pocket को बेहद मिनिमल डिजाइन के साथ फ्लेक्सिबल फैब्रिक का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है। इसे आप कंधे, कलाई या हैंडबैग से अटैच करके पहन सकते हैं। किन देशों में मिलेगा ऐपल की ओर से यह साफ किया गया है कि iPhone Pocket एक लिमिटेड एडिशन प्रोडक्ट है। इसे कुछ ही देशों में उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, चीन, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं। iPhone Pocket के रंगों की बात करें, तो इसका शॉर्ट स्ट्रैप वाला मॉडल lemon, mandarin, purple, pink, peacock, sapphire, cinnamon और black जैसे रंगों में खरीदा जा सकेगा। वहीं इसका लॉन्ग स्ट्रैप वाला वेरिएंट सिर्फ sapphire, cinnamon और black कलर में मिलेगा।