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‘रुक-रुक कर होंगे भविष्य के युद्ध’, आर्मी चीफ ने कहा- सैनिकों के हिसाब से बने सैन्य तकनीक

 नई दिल्ली  रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में हथियार और सैन्य उपकरण बनाना नहीं है। भारत के पास ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे वह लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में अपनी सैन्य ताकत को बनाए रख सके। रविवार को यह बात थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने कही। उन्होंने कहा कि ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे बदलती जरूरतों के अनुसार सैन्य ताकत को ढाल सके और लगातार मजबूत कर सके। रुक-रुक कर होने वाले युद्ध उन्होंने आज के युद्धों को ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ बताया है। ‘बदलते युद्ध के दौर में आत्मनिर्भरता’ विषय पर बोलते हुए थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि युद्ध का स्वरूप, तकनीक और उसकी अवधि तेजी से बदल रही है। इसलिए सैन्य क्षमता के विकास और आत्मनिर्भरता की हमारी सोच को भी लगातार बदलना होगा। आर्मी चीफ ने 1971 के युद्ध का किया जिक्र साल 1971 में ढाका में हुए ऐतिहासिक आत्मसमर्पण का जिक्र करते हुए जनरल सेठ ने कहा, “पिछली सदी के युद्धों की एक स्पष्ट समाप्ति होती थी। 1971 की वह तस्वीर ऐसा ही एक क्षण थी, जब यह साफ था कि युद्ध समाप्त हो गया है। लेकिन आज के युद्धों में ऐसी स्पष्ट समाप्ति दिखाई नहीं देती। संघर्ष लंबे समय तक चलते हैं और बीच-बीच में भीषण लड़ाई होती रहती है। तकनीक लड़ाइयों की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह युद्धों की अवधि भी कम करे। ये ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ हैं।” चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता को तैयार करने, विकसित करने, परखने और सेना में शामिल करने में कई वर्ष लगते हैं, जबकि तकनीक बहुत कम समय में बदल जाती है। इसलिए चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि सेना में शामिल होने तक वह तकनीक उपयोगी और आधुनिक बनी रहे। सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए क्षमताएं उन्होंने कहा, “हर परिस्थिति के लिए एक ही समाधान कारगर नहीं हो सकता। भारतीय सेना समुद्र तल से लेकर अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक और अत्यधिक गर्मी से लेकर शून्य से काफी नीचे के तापमान तक काम करती है। इसलिए हमारी सैन्य क्षमताएं भारत की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, अलग-अलग इलाकों और सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। कुछ सौ डॉलर की कीमत वाला ड्रोन लाखों डॉलर की कीमत वाले सैन्य प्लेटफार्म के लिए खतरा बन सकता है। कम कीमत वाली, स्मार्ट और बड़े पैमाने पर उपलब्ध तकनीक अब बेहद महंगे सैन्य हथियारों और उपकरणों के लिए भी खतरा बन सकती है।” कुछ देशों तक सीमित नहीं रही तकनीक इसके साथ ही सेनाध्यक्ष ने बताया कि तकनीक अब कुछ देशों या संस्थाओं तक सीमित नहीं रही है। जो तकनीक हमारे पास है, वही हमारे विरोधी के पास भी हो सकती है। इसलिए केवल नई तकनीक हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। असली बढ़त इस बात से मिलेगी कि हम विरोधी से कितनी तेजी से नए समाधान खोजते हैं, खुद को बदलते हैं और उसकी तकनीक का जवाब तैयार करते हैं। हालांकि उन्होंने पुरानी सैन्य प्रणालियों को जल्दबाजी में बेकार मान लेने के प्रति भी आगाह किया। पुराने हथियारों को बदलना नहीं उन्होंने कहा, “आज के युद्ध दिखा रहे हैं कि पुरानी प्रणालियां भी नई तकनीक के साथ बेहद प्रभावी हो सकती हैं। दशकों पहले विकसित की गई एयर डिफेंस तोपें आधुनिक सेंसर और अग्नि नियंत्रण प्रणाली के साथ ड्रोन और ड्रोन समूहों के खिलाफ प्रभावी हो सकती हैं। इसलिए भविष्य की सैन्य क्षमता का अर्थ हमेशा पुराने हथियारों को बदलना नहीं है। कई बार पुरानी और भरोसेमंद प्रणालियों को नई तकनीक से जोड़कर उन्हें और प्रभावी बनाया जा सकता है।” भारत की इन दोनों की जरूरत जनरल सेठ ने कहा कि हमें दूर से मार करने की क्षमता और जमीन पर सीधे युद्ध करने की क्षमता, दोनों की आवश्यकता है। लंबी दूरी के हथियार युद्धक्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन जमीन पर कब्जा करने, उसे अपने नियंत्रण में रखने और उसकी रक्षा करने का काम अंततः सैनिक को ही करना होगा। उन्होंने कहा, “भारतीय सेना को लंबी मारक क्षमता और मजबूत जमीनी क्षमता, दोनों की जरूरत है।” इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए ये काम सूचना, साइबर और अंतरिक्ष सहित युद्ध के नए क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका के बावजूद थल सेनाध्यक्ष ने कहा, “जमीन पर नियंत्रण ही सफलता का एकमात्र प्रत्यक्ष संकेतक है। जमीन पर नियंत्रण सैनिक ही स्थापित करता है और वही उसकी रक्षा करता है। इसलिए सैन्य क्षमता से जुड़ा हर निर्णय इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए कि वह सैनिक को कितना अधिक सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के केंद्र में योद्धा होना चाहिए। हर सैन्य क्षमता अंततः योद्धा के लिए बनाई जानी चाहिए।” हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है आत्मनिर्भरता इन वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए थल सेनाध्यक्ष ने भविष्य की सैन्य क्षमताओं के विकास के लिए समर्थ की अवधारणा सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुंचे हैं। आज 175 में से 159 प्रकार के गोला-बारूद का स्वदेशीकरण हो चुका है। रक्षा उत्पादन में करीब 16,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भरता हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है। क्षमता हमें लड़ने की सामर्थ्य देती है। योद्धा हमें लड़ने की इच्छाशक्ति देता है। ये सभी मिलकर हमें जीतने की क्षमता देते हैं।

आर्मी चीफ का बड़ा बयान: जम्मू-कश्मीर में बदले हालात, 31 आतंकियों का सफाया

नई दिल्ली भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील है लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में यहां 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के आतंकी थे। यहां मारे गए आतंकियों में पहलगाम हमले के तीनों मुख्य अपराधी भी शामिल हैं। ये आतंकी जम्मू कश्मीर में शुरू किए गए ऑपरेशन ‘महादेव’ में मारे गए थे। मंगलवार को दिल्ली में एक वार्षिक प्रेसवार्ता में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में अब स्थानीय सक्रिय आतंकवादी न के बराबर है। उन्होंने बताया कि इनकी संख्या अब एकल अंक (सिंगल डिजिट) में रह गई है। यहां आतंकवादी भर्ती लगभग समाप्त हो चुकी है। सेनाध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव के ये स्पष्ट संकेत मिलते हैं। जम्मू कश्मीर में विकास गतिविधियां, पर्यटन का फिर से शुरू होना और शांतिपूर्ण श्री अमरनाथ यात्रा मजबूत सकारात्मक बदलावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ यात्रा में इस वर्ष 4 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री आए। जम्मू कश्मीर में टेररिज्म टू टूरिज्म की थीम धीरे-धीरे आकार ले रही है। सेनाध्यक्ष ने यहां पूर्वोत्तर में, विशेष रूप से मणिपुर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई तथा सरकार की सक्रिय पहलों के कारण वर्ष 2025 में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पूर्वोत्तर की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण डुरंड कप का आयोजन शामिल हैं। यहां सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे कि शिरुई लिली और संगाई जैसे सांस्कृतिक उत्सवों की वापसी हुई। सितंबर 2025 में उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) का नवीनीकरण किया गया। सेनाध्यक्ष ने बताया कि म्यांमार में अस्थिरता के मद्देनजर, असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय के समन्वय से एक व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। यह तंत्र इसलिए है ताकि पूर्वोत्तर को किसी भी प्रकार के सीमा-पार प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके। म्यांमार में चुनावों के सफल आयोजन के बाद आपसी सहयोग और प्रभावी होने की संभावना जताई गई। थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि भारतीय सेना ने वर्ष 2025 में दो पड़ोसी देशों और देश के 10 राज्यों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों को अंजाम दिया। इन अभियानों में 30,000 से अधिक लोगों को बचाया गया। वहीं पंजाब में बाढ़ के दौरान पटियाला में ढहती इमारत से सीआरपीएफ कर्मियों को सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा बचाने की साहसिक कार्रवाई का विशेष उल्लेख किया गया। इस कार्रवाई ने सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाया। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि म्यांमार में जारी अस्थिरता के मद्देनजर भारत ने पूर्वोत्तर को किसी भी दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए यह व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा ग्रिड स्थापित किया है। इसमें असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय मिलकर कार्य कर रहे हैं। म्यांमार में दूसरे चरण के चुनावों के सफल आयोजन के बाद अब दोनों देशों के बीच सहयोग और समन्वय को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा। जनरल द्विवेदी ने कहा कि कई सीमावर्ती राज्यों में सेना ने औपचारिक अनुरोध मिलने से पहले ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय सेना आपदा के समय ‘नेचुरल फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाती है। थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि चाहे वह सीमा-पार अस्थिरता हो या प्राकृतिक आपदाएं, भारतीय सेना हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहती है।

आर्मी चीफ की हुंकार: PAK के 8 कैंपों पर सेना की नजर, संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत एक्शन होगा

 नई दिल्ली भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 दोपहर 12 बजे से मानेकशॉ सेंटर में वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा कि IB और LC के सामने 8 आतंकी कैंप हैं. जिसमें ट्रेनिंग जैसी गतिविधि चल रही है. सेना की नजर है. अगर एक गलती की तो तुरंत सख्त एक्शन लिया जाएगा.  यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आर्मी डे (15 जनवरी) से पहले हुई, जिसमें उन्होंने देश की सुरक्षा स्थिति, सीमाओं पर हालात, आधुनिकीकरण और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की.  उत्तरी सीमाओं पर स्थिति सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी सीमाओं (चीन के साथ) पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. उच्च स्तर पर बातचीत से मदद मिल रही है. स्थिति स्थिर है, लेकिन लगातार सतर्क रहने की जरूरत है. सेना की तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है. पश्चिमी मोर्चा और ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम हमले के बाद 22 मिनट में 'ऑपरेशन रीसेट' रणनीति से कार्रवाई की गई. ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. पाकिस्तान की कोई भी भविष्य की गलती का सख्त जवाब दिया जाएगा. जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील है, लेकिन नियंत्रण में है. पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को भारत-चीन सीमा पर बेअसर कर दिया गया है. मणिपुर और पूर्वोत्तर की स्थिति मणिपुर में स्थिति स्थिर हो रही है. सुरक्षा बलों और सरकार के समन्वित प्रयासों से सुधार हुआ है. म्यांमार में चुनाव खत्म होने के बाद भारत और म्यांमार की सेनाएं बेहतर तरीके से सहयोग कर सकेंगी. पूर्वोत्तर में कुल मिलाकर हालात सुधर रहे हैं. आधुनिकीकरण पर फोकस सेना का मुख्य ध्यान अब आधुनिकीकरण पर है. जनरल द्विवेदी ने कहा कि उन्नत ब्रह्मोस मिसाइल, बेहतर क्षमता वाले ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन (घूमने वाली मिसाइलें) जल्द आने वाली हैं. 90 प्रतिशत से ज्यादा गोला-बारूद अब स्वदेशी बन रहा है. महिलाओं की भर्ती CMP (कॉमन मेडिकल पैरामेडिकल?) के बाद अब AEC (आर्मी एजुकेशनल कोर) और मेडिकल (नॉन-टेक्निकल) में महिलाओं को सैनिक/अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाएगा. अन्य महत्वपूर्ण बातें सेना 2026 को 'नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष' घोषित कर चुकी है, जिससे रियल-टाइम निर्णय और युद्ध क्षमता बढ़ेगी. सेना प्रमुख ने जोर दिया कि सेना स्वदेशी तकनीक, संयुक्तता और नवाचार पर काम कर रही है.

INS माहे भारतीय नौसेना में शामिल, जनरल उपेंद्र द्विवेदी बने ऐतिहासिक समारोह के साक्षी

मुंबई मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में माहे-श्रेणी का पहला स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आज नौसेना में शामिल हो गया। कोचीन शिपयार्ड में निर्मित इस श्रेणी के आठ पनडुब्बी रोधी पोत नौसेना के बेड़े में शामिल होने हैं, जिनमें से यह पहला पोत है। यह माहे-क्लास का पहला पनडुब्बी रोधी (एंटी सबमरीन) और उथले पानी (जहां पानी की गहराई कम हो) में चलने वाला युद्धपोत है, जो तटीय इलाकों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। मुंबई में हुए समारोह में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। द्विवेदी ने तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति सिनर्जी है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह जहाज उथले पानी में ऑपरेशन, तटीय इलाकों में गश्त, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश जैसे कामों में बड़ी भूमिका निभाएगा। ये काम बिना शोर के करने की काबिलियत के चलते इसे ‘साइलेंट हंटर’ नाम दिया गया है। INS माहे को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने तैयार किया है, जो नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक मजबूत कदम माना जा रहा है। नौसेना ने इसे “नए दौर का तेज, फुर्तीला और आधुनिक भारतीय युद्धपोत” कहा है। INS माहे भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी का युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। यह शैलो वॉटर यानी कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी उच्च सटीकता (हाई-प्रिसिजन) के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसका 80 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना है। यह एक मल्टी-रोल वॉरशिप है, जो कोस्टल डिफेंस, अंडरवॉटर सर्विलांस और सर्च-एंड-रेस्क्यू जैसे कई महत्वपूर्ण मिशन में तैनात किया जा सकता है। इसमें माइन ले-ड्रॉपिंग की क्षमता भी है, जिससे यह समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और दुश्मन की गतिविधियों को रोकने में सक्षम है। युद्धपोत निर्माण में भारती की बढ़ती महारत माहे का जलावतरण स्वदेशी उथले पानी के लड़ाकू विमानों की एक नई पीढ़ी के आगमन का प्रतीक है- आकर्षक, तेज और पूरी तरह से भारतीय। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, माहे-श्रेणी युद्धपोत डिजाइन, निर्माण और एकीकरण में भारत की बढ़ती महारत को दर्शाता है। क्या है एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट? एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ऐसे युद्धपोत हैं जिन्हें तटीय क्षेत्रों के उथले पानी में पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये जहाज नौसेना की तटीय सुरक्षा क्षमता को बढ़ाते हैं और उन्नत सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर जैसी प्रणालियों से लैस होते हैं। ये जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, खोज और बचाव कार्यों को करने और माइन बिछाने जैसे काम भी कर सकते हैं। देश चैन से सोएगा क्योंकि आप जागते रहेंगे- थलसेनाध्यक्ष मुंबई में भारतीय नौसेना के नए युद्धपोत INS माहे के भव्य कमीशनिंग समारोह में थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह अवसर न सिर्फ गर्व का है, बल्कि देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति का सशक्त प्रतीक भी है। उन्होंने सबसे पहले जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को ‘ब्रावो जूलू’ कहते हुए शानदार आयोजन के लिए बधाई दी।

भूल जाएगा संयम: सेना प्रमुख ने पाकिस्तान को दिया सख्त संदेश

अनूपगढ़ सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को आतंकवाद रोकने की सख्त चेतावनी दी है और कहा है कि अगर पाकिस्तान दुनिया के नक्शे पर बना रहना चाहता है तो उसे हर हाल में आतंकवाद रोकना होगा, वरना हम संयम भूल जाएंगे और पाकिस्तान का नक्शे पर से नामोनिशां मिटा देंगे। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि यह सोचना और तय करना अब पाकिस्तान का काम है कि उसे भूगोल और इतिहास में रहना है या नहीं? उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि पश्चिमी पड़ोसी को हर हाल में राज्य प्रायोजित आतंकवाद रोकना ही होगा। राजस्थान के अनूपगढ़ में एक सैन्य चौकी पर बोलते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना इस बार कोई संयम नहीं दिखाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि अगर इस्लामाबाद आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता है और आतंकियों की सप्लाई बंद नहीं करता है, तो 'ऑपरेशन सिंदूर-2.0' दूर नहीं होगा और उस दौरान हम संयम भूल जाएंगे। ऑपरेशन सिंदूर-2.0 के लिए तैयार रहें जवान: सेना प्रमुख सेना प्रमुख ने कहा, "इस बार हम ऑपरेशन सिंदूर 1.0 जैसा संयम नहीं बरतेंगे। इस बार हम कुछ ऐसा करेंगे जिससे पाकिस्तान को सोचना पड़ेगा कि वह भूगोल में अपनी जगह बनाए रखना चाहता है या नहीं। अगर पाकिस्तान भूगोल में अपनी जगह बनाए रखना चाहता है, तो उसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद रोकना होगा।" इसके साथ ही उन्होंने जवानों से भी तैयार रहने को कहा। सेना प्रमुख ने कहा, “अगर ईश्वर ने चाहा, तो आपको जल्द ही मौका मिलेगा। शुभकामनाएँ।” 5 पाक लड़ाकू विमानों को मार गिराने का एयर चीफ का दावा सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी की यह चेतावनी एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें सिंह ने कहा था कि भारतीय सेना ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका निर्मित एफ-16 और चीन के जेएफ-17 सहित चार से पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान में अपने ठिकाने भले ही कितनी दूर और कहीं भी बना लें भारतीय वायु सेना के पास उन्हें नष्ट करने की क्षमता है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने वायु सेना दिवस से पहले शुक्रवार को अपने सालाना संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में यह बात कही।  

पहलगाम अटैक के बाद कैसे बदली रणनीति? आर्मी चीफ ने बताई पूरी कहानी

नई दिल्ली.  सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने 22 अप्रैल को हुए पाहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने बताया कि हमले के अगले ही दिन सशस्त्र बलों को “फ्री हैंड” दे दिया गया था, ताकि वे अपनी रणनीति और विवेक के अनुसार कार्रवाई कर सकें। जनरल द्विवेदी ने कहा कि 23 अप्रैल को हुई बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा- “अब बहुत हो चुका”। इस बैठक में तीनों सेना प्रमुख मौजूद थे और यह सहमति बनी कि निर्णायक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “पहली बार हमने इस तरह का राजनीतिक आत्मविश्वास, स्पष्टता और दिशा देखी, जिसने हमारे कमांडरों का मनोबल बढ़ाया।” 25 अप्रैल को सेना प्रमुख ने उत्तरी कमान का दौरा किया, जहां विस्तृत योजना पर काम हुआ। नौ में से सात प्रमुख आतंकी ठिकानों को प्राथमिकता दी गई। लक्ष्य था कि पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकवादी बुनियादी ढांचे को तबाह करना है। इन सात लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट किया गया और बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया गया। पाहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सेना प्रमुख की पहली बैठक 29 अप्रैल को हुई थी। जनरल द्विवेदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक नाम नहीं था, बल्कि यह पूरे राष्ट्र को जोड़ने वाला अभियान था। यही वजह थी कि लोग पूछ रहे थे- आपने क्यों रोका? और इस सवाल का पूरा जवाब दिया गया।” हमले के पंद्रह दिन बाद, 7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के अनुसार, इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान और एक बड़ा एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान मार गिराया गया। 100 से अधिक आतंकियों को पाकिस्तान और PoK में ढेर किया गया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को हाल के वर्षों की सबसे सटीक और सफल जवाबी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। सेना प्रमुख के अनुसार, स्पष्ट राजनीतिक समर्थन और तीनों सेनाओं की संयुक्त योजना ने इसे संभव बनाया।