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एनडीए की प्रचंड बढ़त पर ओपी चौधरी का बयान– बिहार में एनडीए की सुनामी

रायपुर बिहार चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों में एनडीए गठबंधन की बढ़त पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होने कहा कि यह सिर्फ एनडीए की बढ़त ही नहीं आंधी और सुनामी भी है. बिहार की जनता ने एनडीए को आशीर्वाद दिया. एनडीए विकसित भारत की नींव डाल रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार की जनता भी समझ रही हैं कि भाजपा और उनके सहयोगियों की सरकार बेहतर हैं. भाजपा और एनडीए को आशीर्वाद मिल रहा है. वहां सुशासन स्थापित किया जा रहा है. कांग्रेस पर वित्तमंत्री चौधरी ने साधा निशाना कांग्रेस के वोट चोरी वाले अभियान को लेकर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कांग्रेस डूबती नांव हैं. महागठबंधन को जनता ने महठगबंधन करार दिया है. उनकी पार्टी के लोग अपनी जान बचाने इधर उधर भाग रहे हैं. इन्हें देश की जनता सबक सिखा रही है. जनता के बीच ये लोग नकारात्मक एजेंडा लेकर जाते हैं, अनर्गल आरोप लगाते हैं, जिसका जवाब जनता दे रही हैं.

बिहार चुनाव 2025 : सीमा पर सट्टेबाजी का खेल: हार-जीत में उड़ रहे लाखों रुपये

फारबिसगंज भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में जनादेश से पहले धनादेश का खेल शुरू हो गया है । बिहार की राजनीति न सिर्फ अब मतदान के मैदान में बल्कि सट्टे के बाजार में भी अपनी किस्मत आजमा रही है। बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न हो चुके हैं और मतपेटियों में अब तक का सबसे बड़ा जनादेश कैद हो चुका है। जहां जनता का फैसला 14 नवंबर को खुलेगा, वहीं फारबिसगंज सहित सीमांचल से लेकर नेपाल और बंगाल की सीमा तक सट्टे का खेल अपने चरम पर है। सीमा पार नेपाल के विराटनगर और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी सहित फारबिसगंज, अररिया, पूर्णिया से लेकर कटिहार तक सट्टा बाजार खूब गर्म है। सटोरिए न सिर्फ हार-जीत पर बल्कि उम्मीदवारों के वोटों के अंतर पर भी लाखों का दांव लगा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि पहले आईपीएल और क्रिकेट मैचों पर दांव लगाते थे मगर अब खासकर व्यापार से जुड़े लोग चुनावी सट्टे के नए बाजार में सक्रिय हो गए हैं। मोबाइल एप्स और ऑनलाइन ग्रुप्स के ज़रिए युवा वर्ग भी इस का हिस्सा बन चुका है। फारबिसगंज और विराटनगर में सैकड़ों युवाओं के मोबाइल फोन पर यह राजनीतिक ट्रेडिंग चल रही है। सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है, परंतु सट्टा कारोबार पूरी तरह भूमिगत नेटवर्क से संचालित हो रहा है। नेपाल की खुली सीमा और बंगाल की नज़दीकी के कारण एजेंसियों के लिए इसे रोक पाना मुश्किल साबित हो रहा है। सत्ता के लिए सट्टा—जनादेश से पहले धनादेश का खेल जनता का फैसला अभी ईवीएम में बंद है, पर सत्ता के सौदागर पहले ही अपने-अपने हिसाब से हार-जीत तय कर रहे हैं।बिहार की राजनीति अब न सिर्फ मतदान के मैदान में, बल्कि सट्टे के बाजार में भी अपनी किस्मत आज़मा रही है । जहां हर वोट की कीमत लाखों में आंकी जा रही है। एनडीए की 200 पार पर ‘ठंडा’ बाजार, इंडिया गठबंधन पर हलचल तेज सट्टा बाजार के रुझानों के अनुसार बिहार में एनडीए को 125 से 135 सीटें, जबकि इंडिया गठबंधन को 100 से 120 सीटें मिलती दिख रही हैं। हालांकि एनडीए के 200 पार के नारे पर सट्टा बाजार में खास उत्साह नहीं है। एक सटोरिए ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एनडीए की जीत पर तो भाव अच्छा चल रहा है, लेकिन 200 पार की बात पर कोई पैसा लगाने को तैयार नहीं। बाजार इसे अव्यावहारिक मान रहा है। इसके विपरीत, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव की जीत-हार पर सट्टा बाजार में जबरदस्त दांव लग रहे हैं। दोनों भाइयों की सीटों को हॉट सीट घोषित किया गया है, जहाँ मतों के अंतर पर लाखों रुपये का सट्टा लग चुका है। नेपाल के विराटनगर और बंगाल के सिलीगुड़ी बने सट्टे के अड्डे फारबिसगंज में भाजपा और कांग्रेस के बीच, अररिया में कांग्रेस-जदयू के बीच, नरपतगंज में भाजपा-राजद के बीच और धमदाहा में जदयू की लेसी सिंह और राजद प्रत्याशी पर भारी सट्टा चल रहा है। सहरसा, मधेपुरा और कटिहार की सीटों पर भी जीत-हार के अंतर पर हाई वैल्यू दांव लगाए जा रहे हैं। क्या कहते हैं अधिकारी फारबिसगंज एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा ने कहा कि इस तरह के धंधे पर प्रशासन की सख्त नजर है। सीमा पर भी पुलिस सक्रिय है। ऐसे सटोरियों की खैर नहीं है। जो इस तरह के धंधे को अंजाम दे रहे हैं ,पकड़े जाने पर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जानकार बताते हैं कि सीमा पार नेपाल के विराटनगर स्थित मारवाड़ी अतिथि सदन के पास मंगलवार की शाम से ही सटोरियों की भीड़ जुट रही है। सूत्रों के अनुसार मतदान खत्म होते ही यहां राजनीतिक सट्टे की बड़ी मंडी सज गई। वहीं सिलीगुड़ी के एक होटल में भी करोड़ों रुपये के दांव खेले जा रहे हैं। राजस्थान से आए कुछ कारोबारी इस अवैध धंधे के प्रमुख संचालक बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कई भारतीय व्यापारी जो नेपाल में कारोबार करते हैं, वे भी इस राजनीतिक सट्टे में खास दिलचस्पी ले रहे हैं।

PM मोदी का दावा: इस बार बिहार में NDA की जीत होगी ऐतिहासिक, टूटेंगे सारे रिकॉर्ड

नई दिल्ली  बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता भी चुनाव मैदान में उतर गए हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार की मातृशक्ति के साथ ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत- महिला संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पीएम मोदी ने ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत- महिला संवाद’ कार्यक्रम में कहा कि इस चुनाव में मुझे जहां-जहां जाने का मौका मिला और जब-जब कार्यकर्ताओं से बात करने का अवसर मिला, मैं देख रहा हूं कि इस बार बिहार का कार्यकर्ता जी-जान से जुटा हुआ है। आप सभी बहुत परिश्रम कर रहे हैं। हर रैली पहले वाली रैली का रिकॉर्ड तोड़ रही है, और उसमें भी हमारी बहनें-बेटियां बहुत बड़ी संख्या में आ रही हैं। बिहार भाजपा की महिला कार्यकर्ताएं 'मेरा बूथ, सबसे मजबूत' संकल्प के साथ बहुत शानदार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में ये पक्का हो चुका है कि एनडीए की विजय हो रही है, बहुत भारी विजय हो रही है। आज बिहार में जो विकास हो रहा है, वो गरीब, दलित, महादलित, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, सभी के मन में रच-बस गया है। बिहार के लोग मन बना चुके हैं कि इस बार एनडीए की जीत का पिछले 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। वही जंगलराज वालों को अब तक की सबसे करारी हार मिलेगी। बिहार का विकास एनडीए ही कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिहार में एनडीए सरकार ही बहनों-बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है, इसलिए बिहार की हर नारीशक्ति कह रही है- फिर एक बार एनडीए सरकार, फिर एक बार सुशासन की सरकार। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार महिलाओं के जीवन को आसान बनाने और उन्हें सशक्त करने के लिए लगातार काम कर रही है। बिहार में बिजली का खर्च कम हुआ है। सीएम नीतीश कुमार ने तय यूनिट बिजली मुफ्त कर दी है। इससे लोगों को बहुत लाभ हो रहा है। हमने बिहार के कई शहरों में मेट्रो चलाने की तैयारी की है। उन्होंने कहा कि जंगलराज के दौर में बेटियों का बाहर निकलना मुश्किल था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज रात के समय में भी अस्पतालों में, रेलवे स्टेशनों पर, और अनेक जगहों पर बेटियां बिना डर के काम कर रही हैं। बिहार की महिलाएं जंगलराज के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं। उन्होंने ठान लिया है कि जंगलराज की वापसी कभी नहीं होने देंगी, इसलिए जंगलराज वाले बिहार की महिलाओं को तरह-तरह के झूठ बोलने में जुटे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जब सुशासन होता है, कानून व्यवस्था का राज होता है तो महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, इसलिए बिहार की बेटियां अब स्वरोजगार के जरिए नौकरी देने वाली भी बन रही हैं। मुद्रा योजना ने छोटे व्यापार के सपने पूरे किए हैं। जीविका दीदी और डेयरी योजनाओं ने आत्मनिर्भरता की ताकत दी है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में ऐसी विजय देनी है कि जिन्होंने झूठ बोला है, छठी मईया का अपमान किया है, और बिहार को जिन्होंने जंगलराज में रखा था, उनकी जमानत जब्त होनी चाहिए।

तेजस्वी यादव का विजन दस्तावेज़ — महागठबंधन ने पेश किया ‘तेजस्वी प्रण’ घोषणा पत्र

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन ने मंगलवार को अपना संयुक्त घोषणापत्र जारी किया, जिसे ‘तेजस्वी प्रण' (RJD Manifesto 2025) नाम दिया गया है। विपक्षी गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार एवं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव , कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, उप मुख्यमंत्री पद के चेहरा एव विकासशील इंसान पार्टी के नेता मुकेश सहनी , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और कई अन्य नेताओं की मौजूदगी में यह चुनावी घोषणा पत्र जारी किया गया। इस घोषणापत्र में कई बड़े-बड़े वादे किए गए हैं। इस मौके पर तेजस्वी (RJD Manifesto 2025) ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह दलों और दिलों का प्रण है। एक-एक घोषणा दिल से लिया गया प्रण है। एक-एक प्रण को प्राण झोंककर पूरा करना पड़े तो भी हम लोग इसे पूरा करेंगे।'' महागठबंधन ने वादा किया है कि सरकार बनने के 20 दिन के भीतर ही हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का विधेयक लाया जाएगा। उसने यह भी कहा कि सरकार बनने पर बिहार में वक्फ संशोधन कानून पर रोक लगाई जाएगी। हमने नया बिहार बनाने के लिए संकल्प पत्र जारी किया वहीं, VIP प्रमुख और महागठबंधन की तरफ से उप-मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार मुकेश सहनी ने कहा, "…आज हमने एक नया बिहार बनाने के लिए संकल्प पत्र जारी किया है। अगले 30-35 सालों तक हमने बिहार की जनता के बीच रहना है, सेवा करनी है। हमने आज जो संकल्प लिया है हर एक संकल्प हम पूरा करेंगे। बता दें कि बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में छह नवंबर और 11 नवंबर को मतदान होना है। मतगणना 14 नवंबर को होगी। 

सीट शेयरिंग में बराबरी, पर भाजपा का बढ़ता प्रभुत्व बना बड़ा सवाल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय कर लिया है। फॉर्मूले के तहत, भाजपा और जदयू इस बार 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों को 41 सीटें दी गई हैं। सहयोगी दलों में लोजपा (रामविलास) को 29 सीटें, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को 6-6 सीटें दी गई हैं। इस बार भाजपा और जदयू दोनों बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। इंफो इन डाटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "2025 के बिहार चुनावों में, भाजपा और जेडीयू प्रत्येक 101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि सहयोगी एलजेपी (आरवी), एचएएम और आरएलएम 41 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। पहली बार, भाजपा और जेडीयू दोनों बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, जो राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभुत्व और प्रभाव को दर्शाता है।" इससे पहले के सीट बंटवारे पर अगर हम नजर डालें तो 2005 के अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में जदयू 139 सीटों और भाजपा 102 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस चुनाव में जदयू को 88 सीटों पर, जबकि भाजपा को 55 सीटों पर सफलता मिली थी। इसी तरह, 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू 141 और भाजपा 102 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस चुनाव में जदयू ने 115 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 91 सीटें मिलीं। 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू के रास्ते अलग-अलग हो गए थे। इस चुनाव में जदयू महागठबंधन के साथ थी और नीतीश कुमार ने राजद और कांग्रेस के सहयोग से सत्ता में वापसी की थी। इस चुनाव में भाजपा ने 157 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन केवल 53 सीटों पर ही जीत हासिल की थी। इसके अलावा, 86 सीटों पर एनडीए के सहयोगी दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें महज 5 सीटों पर ही जीत दर्ज की थी। वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू 115 सीटों पर, भाजपा 110 सीटों पर और अन्य सहयोगी दल 18 सीटों पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में भाजपा ने 74 सीटों पर और जदयू ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा, सहयोगी दल 8 सीट जीतने में कामयाब रहे थे। हालांकि, 2025 में भाजपा और जदयू के बीच 101-101 सीटों का बराबर बंटवारा हुआ है। इस बदलाव से यह साफ है कि भाजपा बिहार की राजनीति में अब जूनियर पार्टनर नहीं रही। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह बराबरी का फॉर्मूला चुनावी मैदान में दोनों दलों के बीच समान साझेदारी का संदेश देगा।

कांग्रेस नेता भूपेश बघेल बोले, 1-2 दिन में तय होगा बिहार महागठबंधन का सीट बंटवारा

रायपुर एनडीए में सीट बंटवारे के बाद अब सब की नजर महागठबंधन पर है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद और नेता प्रतिपक्ष दिल्ली में हैं। वहीं कांग्रेस के भी कई प्रमुख नेता दिल्ली में कैंप कर रहे हैं। आज कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। वहीं बैठक से पहले कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने बिहार में महागठबंधन के सीट बंटवारे पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह 1-2 दिन में हो जाएगा। सारी तैयारी हो चुकी है, ये जल्दी हो जाएगा। बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार के विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह सीटें दी गई हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को भी छह सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिला है। भाजपा महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर लिखा, संगठित व समर्पित एनडीए…आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए परिवार के सभी सदस्यों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति से सीटों का वितरण पूर्ण किया, जो कि इस प्रकार है– भाजपा – 101 सीट जदयू – 101 सीट लोजपा (रामविलास) – 29 सीट रालोमो – 06 सीट हम – 06 सीट आज दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक आज कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। इसके बाद संभावना है कि शाम तक सीट बंटवारे की घोषणा हो जाएगी। हालांकि कई सीटों पर कांग्रेस और राजद के बीच पेज फंसा हुआ ही है। इसलिए कांग्रेस ने इस बार अलग-अलग नीति बनाने शुरू कर दी है। 2020 के विधानसभा के तरह ही इस बार भी कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची भी पूरी तरह से तैयार कर ली है। दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस पर मोहर भी लग जाएगी। सूत्र बता रहे हैं कि राजद और वामदल अब भी कांग्रेस को 70 सीट देने के लिए तैयार नहीं हैं।  

बिहार चुनाव 2025: एनडीए ने सीट बंटवारा किया, जानें किसे कितनी मिली सीटें

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे का ऐलान हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू और बीजेपी ने 101-101 बराबर सीटें अपने पास रखी हैं। वहीं, चिराग पासवान की लोजपा रामविलास को 29 सीटें मिली हैं। उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 6 और जीतनराम मांझी की हम (हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा) को भी 6 सीटें मिली हैं। एनडीए में कई राउंड की बैठकों के बाद यह फॉर्मूला निकला है। एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूला की घोषणा साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं हुई बल्कि गठबंधन के नेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, आरएलएम चीफ उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल समेत अन्य नेताओं ने रविवार को ट्वीट कर सीट बंटवारे का आंकड़ा साझा किया। बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग होने के बाद अब घटक दलों की कैंडिडेट लिस्ट आना शुरू हो जाएगी। भाजपा में उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल हो चुके हैं, रविवार शाम को दिल्ली में हो रही पार्टी के केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस पर मुहर लगा दी जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में भी कैंडिडेट फाइनल हो चुके हैं। लोजपा (रामविलास) ने भी कल कहा था कि एनडीए में सीट बंटवारा होने के बाद चिराग पासवान कैंडिडेट लिस्ट जारी कर देंगे। कोई बड़ा भाई, कोई छोटा भाई नहीं? पहले कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश की जेडीयू, भाजपा से एक सीट ज्यादा अपने पास रखेगी। मगर दोनों ही दलों ने बराबर सीटों पर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला लिया है। दोनों ने साफ संदेश दिया है कि गठबंधन में छोटा या बड़ा भाई फिलहाल कोई नहीं है। फिलहाल एनडीए में कौन-सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी यह ऐलान हुआ है। अब घटक दलों के द्वारा लड़ी जाने वालीं सीटों के नामों का इंतजार है। बता दें कि 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा का चुनाव दो चरणों में हो रहा है। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे फेज की वोटिंग 11 नवंबर को होगी। दोनों चरणों के नतीजे 14 नवंबर को आएंगे, नामांकन की प्रक्रिया चल ही है।  

ओवैसी की रणनीति: बिहार में 100 सीटों पर AIMIM का कब्जा, थर्ड फ्रंट बनाने का प्लान

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है. एक तरफ जहां एनडीए और इंडी एलायंस में सीट बंटवारे को लेकर अब तक बात नहीं बनी है वहीं दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बड़ा ऐलान कर दिया है. पार्टी ने कहा है कि वह इस बार करीब 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जो 2020 के मुकाबले पांच गुना ज्यादा है. बिहार में थर्ड फ्रंट बनाने की कोशिश में ओवैसी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने शनिवार को कहा, 'हमारा लक्ष्य बिहार में तीसरा विकल्प तैयार करना है, एनडीए और महागठबंधन दोनों को इस बार हमारी मौजूदगी का एहसास होगा.' उन्होंने बताया कि पार्टी कुछ समान विचारधारा वाले दलों से भी बातचीत कर रही है, ताकि एक 'थर्ड फ्रंट' (Third Front) खड़ा किया जा सके. इमान ने कहा कि उन्होंने पहले लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को गठबंधन के लिए पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. 'अब हम अपने दम पर विस्तार करेंगे' . बिहार की 243 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी. बिहार विधानसभा की हर सीट का हर पहलू, हर विवरण यहां पढ़ें 2020 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने बसपा और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में पार्टी ने 5 सीटें जीतीं, लेकिन 2022 में उसके चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए, जिससे अख्तरुल इमान अब पार्टी के एकमात्र विधायक बचे हैं. सीमांचल में AIMIM का है प्रभाव राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एआईएमआईएम बिहार में विशेषकर सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार) में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां मुस्लिम आबादी 17% से अधिक है. बीते दिनों ओवैसी ने इन इलाकों में ताबड़तोड़ रैली की थी.

BJP की नई चाल शाहाबाद-मगध में, 2020 की 36 सीटों को फिर से जीतने की तैयारी

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी ने इस बार ‘जीती सीटों को बचाने’ के साथ-साथ ‘हारी सीटों को वापस पाने’ का बड़ा अभियान शुरू किया है. पार्टी के भीतर इसे “मिशन रिकवरी प्लान” का नाम दिया गया है. पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 74 पर जीत हासिल की थी. हालांकि, पार्टी ने बाद में हुए उपचुनावों में कुढ़नी, रामगढ़ और तरारी जैसी तीन सीटों पर अपनी वापसी दर्ज करायी थी. इन 36 सीटों के लिए बीजेपी तैयार कर रही रणनीति अब भाजपा की निगाह उन 36 सीटों पर है जहां 2020 में हार मिली थी. पार्टी ने इन सभी सीटों को दो चरणों में विभाजित कर उनकी अलग-अलग रणनीति तैयार की है. पहले चरण की 18 सीटों में बैकुंठपुर, दरौली, सीवान, राघोपुर, गरखा, सोनपुर, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, बखरी, उजियारपुर, बक्सर, तरारी, शाहपुर, बख्तियारपुर, फतुहा, दानापुर, मनेर और बिक्रम शामिल हैं. वहीं, दूसरे चरण की हार वाली सीटों में कल्याणपुर, भागलपुर, रजौली, हिसुआ, बोधगया, गुरुआ, औरंगाबाद, गोह, डिहरी, काराकाट, रामगढ़, मोहनिया, भभुआ, चैनपुर, जोकिहाट, बायसी, किशनगंज और अरवल हैं. बीजेपी 2020 में जहां हारी, उन क्षेत्रों में विशेष फोकस इन सभी सीटों के लिए भाजपा ने अपने बूथ और जातिगत समीकरणों की गहराई से समीक्षा की है. विशेष रूप से उन जिलों पर फोकस किया गया है, जहां 2020 में पार्टी का ‘संपूर्ण सफाया’ हुआ था. इनमें औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर और बक्सर जैसे जिले शामिल हैं. इन चारों जिलों में पिछली बार एक भी सीट नहीं मिल पाई थी. दिलचस्प बात यह है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में कैमूर की चारों सीटें भाजपा के खाते में थीं, लेकिन 2020 में पार्टी को यहां करारी हार झेलनी पड़ी. यही वजह है कि इस बार भाजपा शाहाबाद और मगध क्षेत्र को लेकर बेहद सतर्क है. शाहाबाद-मगध में ‘पावर स्टार’ का दांव पार्टी ने इन क्षेत्रों में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए ‘लोकप्रिय चेहरों’ की रणनीति अपनाई है. भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह को एक बार फिर भाजपा के प्रचार अभियान में सक्रिय किया गया है. पवन सिंह की क्षेत्र में पकड़ और लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें ‘जनसंपर्क का चेहरा’ बना रही है. इसके अलावा RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का मगध और शाहाबाद क्षेत्र में गहरा प्रभाव है. इसी कड़ी में भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने हाल ही में दिल्ली में पवन सिंह और कुशवाहा की मुलाकात कराई थी. जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. हर जिले के लिए ‘माइक्रो प्लान’ भाजपा संगठन ने हर जिले की हारी हुई सीट के लिए अलग-अलग ‘माइक्रो प्लान’ तैयार किया है. इसमें पुराने उम्मीदवारों का आकलन, स्थानीय समीकरणों की पुनर्समीक्षा, और सहयोगी दलों के साथ सीट तालमेल पर जोर दिया गया है. हालांकि एनडीए में सीटों का बंटवारा अभी अंतिम रूप में नहीं है, लेकिन भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे सीटें बदली जाएं या नहीं, पार्टी का संगठन हर क्षेत्र में पूरी ताकत के साथ उतरेगा. ‘हारी नहीं, छोड़ी सीटों पर भी वापसी’ का लक्ष्य पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 2020 में कुछ सीटें हार की वजह से नहीं, बल्कि सीट-शेयरिंग के कारण छूटी थीं. इस बार भाजपा ऐसे क्षेत्रों पर भी फोकस कर रही है, जहां उसके संगठन की मजबूत जड़ें हैं लेकिन पिछले बार साथी दलों को मौका मिला था. शाहाबाद-मगध में BJP की परीक्षा कुल मिलाकर, भाजपा ने बिहार में इस बार चुनावी जंग को दो हिस्सों में बांट दिया है. ‘सेव द सीट्स’ (जीती सीटें बचाने का अभियान) और ‘रिक्लेम द लॉस्ट’ (हारी सीटें वापस पाने की रणनीति). शाहाबाद और मगध की सियासी जमीन पर भाजपा की सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है, जहां से पार्टी अपने खोए जनाधार को वापस पाने की जुगत में जुटी है. 

सीट शेयरिंग को लेकर NDA में तनाव? डिप्टी CM के आवास पर हुई अहम बैठक

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक दलों में सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान जारी है। ऐसे में एनडीए गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर महत्वपूर्ण बैठक डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर हुई। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, विजय कुमार चौधरी, उमेश कुशवाहा के साथ भाजपा के सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल और धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद थे।  इस बैठक में दूर हुए कुछ मतभेद बैठक का मुख्य एजेंडा सीट शेयरिंग पर सहमति बनाना था। चर्चा के दौरान गठबंधन के सभी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर स्थिति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। खबर है कि इस बैठक में कुछ मतभेद दूर कर लिए गए हैं और जल्द ही सीट शेयरिंग का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी ने 15 से 20 सीटों की मांग की थी, जबकि एनडीए गठबंधन ने केवल 7 से 10 सीटें देने की बात कही थी। अब बताया जा रहा है कि बीच का रास्ता निकाल लिया गया है और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है। एनडीए के नेताओं का कहना है कि गठबंधन के सभी सदस्य दल मिलकर चुनाव मैदान में उतरेंगे और कोई नाराजगी या मतभेद नहीं है। वे जल्द ही सीट बंटवारे की घोषणा कर बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देंगे। यह बैठक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।