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चंडीगढ़ BJP ऑफिस अटैक में पाकिस्तान मेड ग्रेनेड का प्रयोग, संदिग्धों के 2 और वीडियो हुए सार्वजनिक

चंडीगढ़ चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी के मुख्यालय के बाहर हुए ब्लास्ट में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इस हमले में GHD2P हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है। जानकारी के अनुसार, विस्फोट के बाद यह करीब 5 से 10 मीटर के दायरे में बेहद घातक साबित हो सकता है। वहीं इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है। इससे पहले 2 नए वीडियो सामने आए। हमले से कुछ मिनट पहले वीडियो में BJP ऑफिस के पास स्थित एक अन्य दफ्तर के बाहर 2 संदिग्ध खड़े दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरे वीडियो में हमले के बाद दोनों संदिग्ध सड़क के दूसरी ओर भागते हुए कैद हुए हैं। बुधवार शाम को पंजाब बीजेपी के मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट हुआ था। इससे मौके पर खड़ी कई कारों के शीशे टूट गए और आसपास की दीवार पर छर्रों के निशान बन गए। घटना के 2 वीडियो वायरल हुए, जिसमें से एक में व्यक्ति ग्रेनेड बम फेंकता दिखा। जबकि, दूसरे वीडियो में बाइक पर जाते दो लोग दिखे, जिन्हें हमलवार बताया गया। वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हुई, जिसमें इस हमले की जिम्मेदारी खालिस्तानी संगठन ने ली। अब तक पुलिस ने इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की है। चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर ने कहा था कि क्रूड जैसी चीज फेंकी गई है। चंडीगढ़ पुलिस और सीएफएसएल की टीम बीजेपी ऑफिस के बाहर जांच में जुटी हुई हैं। 30 फुट दूरी से फेंका गया ग्रेनेड BJP मुख्यालय के बाहर करीब 30 फुट दूरी से ग्रेनेड फेंका गया था। दीवार की ऊंचाई लगभग 3 फुट है, जबकि उसके ऊपर करीब 2 फुट ऊंची एल्यूमीनियम ग्रिल लगी हुई है। जिस जगह ग्रेनेड गिरा, वहां से बीजेपी दफ्तर के मुख्य द्वार की दूरी करीब 25 फीट बताई जा रही है। मुख्य द्वार के पास सुरक्षा कर्मियों के लिए केबिन बना हुआ है, जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दो जवान राउंड द क्लॉक तैनात रहते हैं। वहीं मुख्य गेट पर चंडीगढ़ पुलिस के कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं। हालांकि जिस स्थान पर ग्रेनेड गिरा, वहां अकसर आने वाले लोग अपनी गाड़ियां पार्क करते हैं और घटना के समय भी वहां वाहन खड़े थे। खालिस्तानी आतंकी सुखजिंदर सिंह बब्बर ने इस घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा गया है कि चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में हुए ग्रेनेड हमले के पीछे वही है। पोस्ट में कहा गया है कि भारतीय सिस्टम चाहे पंजाब के सिख युवाओं के खिलाफ कितने भी कदम उठा ले, इसका जवाब दिया जाएगा। खालसा पंथ उचित प्रतिक्रिया करेगा। गुरदासपुर में रणजीत सिंह की हत्या का जिक्र करते हुए उसके आरोपियों को भी न बख्शने की बात कही गई है। पंजाब की धरती खालसा की धरती पोस्ट के अंत में खालिस्तान समर्थक नारे भी लिखे गए हैं, जिनमें खालिस्तान के समर्थन और खालसा राज की बात दोहराई गई है। इस में कहा गया है कि पंजाब की धरती खालसा की धरती है। पंजाब में खालिस्तान बनेगा खालिस्तान जिंदाबाद, खालसा राज करेगा। वायरल पोस्ट में संगठन की ओर से इस वारदात को अंजाम देने का जिक्र करते हुए पंजाब के डीआईजी संदीप गोयल को भी चेतावनी दी गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें एक शख़्स ग्रेनेड की पिन निकाल कर फेंकते हुए दिख रहा है। हमले की जांच में पुलिस को सीसीटीवी में दो संदिग्ध दिखे हैं। दोनों लोगों को मोटरसाइकिल पर बीजेपी ऑफिस के आसपास घूमते देखा गया। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। कहीं पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष तो नहीं थे निशाना? पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस घटना के तार प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने की आशंका है। इसके अलावा इस हमले को पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी कुमार शर्मा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। करीब 15 दिन पहले एसएसपी पठानकोट ने अश्वनी शर्मा को सतर्क रहने और सार्वजनिक स्थानों पर कम जाने की चेतावनी दी थी। घटना से दो दिन पहले तक शर्मा पार्टी कार्यालय में मौजूद थे और बुधवार सुबह ही दिल्ली में एक कार्यक्रम के लिए रवाना हुए थे। क्रूड बम का इस्तेमाल किया: एसएसपी चंडीगढ़ सेक्टर-37 में पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर बुधवार शाम करीब 4:48 बजे जोरदार धमाके से भाजपा कार्यालय के बाहर खड़ी कार का शीशा टूट गया। काले रंग की एक एक्टिवा क्षतिग्रस्त हो गई और चारदीवारी पर 50 से अधिक स्थानों पर छर्रों के निशान देखने को मिले। चण्डीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने कहा कि विस्फोट के लिए क्रूड बम का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने बताया कि इससे पहले क्रूड बम का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में एक घटना में किया गया था। घटना के बाद केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीमों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए। वहीं, घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

तमिलनाडु ओपिनियन पोल: इंडिया ब्लॉक के किले पर संकट, BJP गठबंधन को मिल रही मजबूत बढ़त

चेन्नई  तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही रोमांचक और अनिश्चित रही है. 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले वोटवाइब के वोट ट्रैकर ओपिनियन पोल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य में सत्ता की लड़ाई बेहद करीबी होने वाली है. सहयोगी चैनल सीएनएन-न्यूज18 पर विशेष रूप से जारी इस सर्वे के अनुसार एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन यानी एनडीए को 115-125 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि सत्तारूढ़ डीएमे-कांग्रेस गठबंधन (कांग्रेस, भाकपा और माकपा सहित) यानी इंडिया गठबंधन को 104-114 सीटें मिलने का पूर्वानुमान है. ऐसे में देखा जाए तो तमिलनाडु इंडिया गठबंधन का एक तरह से अंतिम किला है. यह भी इस बार ढह जाने की संभावना है।  कुल 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है. ऐसे में साफ दिख रहा है कि राज्य में कांटे की टक्कर है. इससे पहले के वोट ट्रैकर पोल में डीएमके गठबंधन को 113-123 सीटों पर बढ़त दिखाई गई थी, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन को 106-116 सीटें मिलने की उम्मीद है. लेटेस्ट पोल में थोड़ी सी शिफ्ट एआईएडीएमके की तरफ हुई है, जो दर्शाता है कि अंतिम दिनों में वोटर मूड में बदलाव संभव है. अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके युवा और शहरी वोटरों पर दांव लगा रही है और इसे 2-8 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि टीवीके का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, लेकिन यह वोट कटौती का खेल जरूर बदल सकती है।  मुख्यमंत्री की पसंद- स्टालिन बनाम ईपीएस ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री की पसंद के सवाल पर एमके स्टालिन 39.8 फीसदी के साथ थोड़ी बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि ई के पलानिस्वामी 38.8 फीसदी लोग अपनी पंसद बताते हैं. विजय को 13.6 फीसदी लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है. लिंग और जाति का फैक्टर यहां साफ नजर आता है. महिलाएं और एससी/दलित वोटर स्टालिन के पक्ष में ज्यादा झुके हुए हैं, जबकि पुरुष और अपर कास्ट हिंदू ईपीएस को अधिक पसंद करते दिख रहे हैं. युवा वोटरों में विजय के प्रति आकर्षण दिख रहा है. ये आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु की राजनीति अभी भी जाति, लिंग और उम्र के आधार पर बंटी हुई है।  डीएमके सरकार की परफॉर्मेंस पर राय बंटी हुई है. सिर्फ 35.5 फीसदी लोगों ने इसे अच्छा या बहुत अच्छा बताया, जबकि 40.8 फीसदी ने खराब या बहुत खराब कहा. महिलाओं और बुजुर्ग वोटरों में संतोष ज्यादा है, वहीं युवा और अपर कास्ट हिंदू ज्यादा आलोचनात्मक हैं।  मुख्य मुद्दे क्या हैं? सर्वे में वोटरों ने जो मुद्दे सबसे ज्यादा उठाए उनमें कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा (23.1 फीसदी), शराब और नशीले पदार्थ (20.8 फीसदी) और बेरोजगारी (17.3 फीसदी) प्रमुख हैं. भ्रष्टाचार, महंगाई और विकास संबंधी चिंताएं भी शामिल हैं. एससी/दलित वोटर बेरोजगारी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि अपर कास्ट वोटर कानून-व्यवस्था पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. ये मुद्दे चुनावी रणनीति तय करने में दोनों गठबंधनों के लिए अहम होंगे।  फ्रीबीज का असर सीमित तमिलनाडु में फ्रीबीज (मुफ्त योजनाएं) की राजनीति लंबे समय से चर्चा में रही है, लेकिन इस पोल में इसका प्रभाव काफी सीमित नजर आया. 44.2 फीसदी वोटरों ने कहा कि फ्रीबीज उनका वोट तय नहीं करते, जबकि 28.9 फीसदी ने फ्रीबीज देने वाली पार्टियों के खिलाफ वोट करने की बात कही. सिर्फ 8.6 फीसदी ही फ्रीबीज से सकारात्मक रूप से प्रभावित हैं. अपर कास्ट हिंदू (31.8 फीसदी) और OBC (30.6 फीसदी) फ्रीबीज के खिलाफ सबसे ज्यादा हैं, जबकि एससी/दलित वोटरों में वेलफेयर स्कीम्स अभी भी कुछ असर रखती हैं. यह इंगित करता है कि अब वोटर परफॉर्मेंस, मुद्दों और नेतृत्व पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।  ईरान युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर सकारात्मक नजरिया पोल में एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भी सवाल पूछा गया. यह सवाल ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर था. 40.9 फीसदी वोटरों ने भारत के प्रदर्शन को बहुत अच्छा बताया, 15.3 फीसदी ने अच्छा, 20.6 फीसदी ने औसत और 17.8 फीसदी ने खराब राय दी. यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी तमिलनाडु के वोटर सकारात्मक सोच रखते हैं, हालांकि 5.5 फीसदी कुछ नहीं कह सकते रहे, जो जागरूकता की कमी या उदासीनता दर्शाता है।  नई सरकार या हंग असेंबली? वर्तमान पोल के अनुसार एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन 115-125 सीटों के साथ बहुमत (118) के काफी करीब है, लेकिन अभी भी अनिश्चितता बाकी है. डीएमके गठबंधन 104-114 सीटों पर सिमट सकता है, लेकिन छोटे बदलाव से नतीजे पलट सकते हैं. टीवीके अगर 4-5 सीटें भी जीत ले या वोट काटे तो गठबंधनों का गणित बिगड़ सकता है. पिछले पोल से तुलना करें तो पहले डीएमके को मामूली बढ़त दिख रही थी, अब एआईएडीएमके ने थोड़ी बढ़त हासिल कर ली है. यह दर्शाता है कि अंतिम चरण में कैंपेन, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन की मजबूती फैसला करेंगे. तमिलनाडु की राजनीति में ड्रामे की कमी नहीं रहती – पिछले चुनावों में भी अंतिम समय में कई सरप्राइज देखे गए हैं।  ऐसे में यह ओपिनियन पोल साफ संकेत देता है कि तमिलनाडु एक और कड़ी टक्कर देखने को तैयार है. एआईएडीएमके-बीजेपी को मामूली बढ़त है, लेकिन डीएमके की सत्ता में वापसी की संभावना पूरी तरह से खारिज नहीं की जा सकती. विजय की टीवीके युवा वोटरों को आकर्षित कर कुछ हलचल जरूर पैदा कर सकती है। 

राणा सोढ़ी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन

फिरोजपुर पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता Rana Gurmit Singh Sodhi के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah से मुलाकात कर विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin भी मौजूद रहे। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। नितिन नवीन ने जल्द ही पंजाब दौरे का भी आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में अनीश सिडाना (अरोड़ा खत्री समुदाय), हंसा सिंह कामरेड (राय सिख समुदाय), पूर्ण चंद (2022 विधानसभा चुनाव उम्मीदवार), बाबा बलविंदर सिंह (जिला परिषद चुनाव उम्मीदवार), दविंदर सिंह जंग (पूर्व जिला परिषद सदस्य) और पुरुषोत्तम कुमार (ओबीसी नेता) शामिल थे। राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी ने पंजाब की रणनीतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंजाब केवल एक सीमावर्ती राज्य ही नहीं, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा का भी अहम आधार है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास राष्ट्रीय हित से जुड़ा हुआ विषय है। ज्ञापन में खास तौर पर किसानों, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाया गया। किसानों के हित में मांग की गई कि डिफेंस वायर और जीरो लाइन के पार खेती कर रहे किसानों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जाए, ताकि उन्हें सुरक्षा और स्थायित्व मिल सके। सड़क अवसंरचना को मजबूत करने के लिए फिरोजपुर–फाजिल्का मार्ग को 4 लेन कर राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग की गई। इसके अलावा हुसैनीवाला चेक पोस्ट को सुरक्षा मानकों के साथ पुनः खोलने की मांग भी रखी गई, ताकि व्यापार और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल सके। सीमावर्ती इलाकों में हर वर्ष आने वाली बाढ़ की समस्या को देखते हुए मजबूत बांध और सुरक्षात्मक ढांचे के निर्माण पर भी जोर दिया गया। साथ ही खूंढर घाटी से फिरोजपुर शहर को जोड़ने के लिए पुल निर्माण की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने हेतु सीमावर्ती क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही फाजिल्का से श्री मुक्तसर साहिब होते हुए बठिंडा और नई दिल्ली तक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की मांग भी की गई। अंत में राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी ने कहा कि पंजाब देश के अन्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से अपील की गई कि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई कर सीमावर्ती इलाकों में संतुलित विकास, सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और लोगों के जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित किया जाए।

BJP का असम घोषणापत्र: जमीन जिहाद पर कड़ी कार्रवाई, 5 लाख करोड़ का निवेश होगा

गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है. मंगलवार को निर्मला सीतारमण ने बीजेपी का चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया. इसमें पार्टी ने फिर से सत्ता में आने पर प्रदेश में पांच लाख करोड़ के निवेश के साथ ही जमीन जिहाद पर रोक का वादा किया है।  गुवाहाटी स्थित असम बीजेपी के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जारी घोषणापत्र को पार्टी ने संकल्प पत्र नाम दिया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप सैकिया के साथ केंद्र की मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह घोषणापत्र जारी किया. बीजेपी ने असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, दो लाख नौकरियां देने का भी वादा किया है।  मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मौके पर यह भी स्पष्ट किया कि छठी अनुसूची में शामिल क्षेत्रों के साथ ही अनुसूचित जनजाति के क्षेत्रों को इससे बाहर रखा जाएगा. लव जिहाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और असम को बाढ़मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे. सरकार गठन के बाद शुरुआती दो वर्ष में बाढ़मुक्त असम के निर्माण के लिए 18 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  सीएम ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज, वन यूनिवर्सिटी, वन इंजीनियरिंग कॉलेज’ को अपना लक्ष्य बताया और कहा कि अगले पांच साल में हम दो लाख रोजगार देंगे. वहीं, असम बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि 'सुरक्षित असम, विकसित असम' का निर्माण बीजेपी का लक्ष्य है. उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश से मिले कुल दो लाख 45 हजार सुझावों को समेटकर पार्टी ने यह संकल्प पत्र तैयार किया है।  लोग अपने राज्य में लौटने लगेः सीतारमण केंद्रीय मंत्री सीतारमण ने कहा, “पूर्वोत्तर क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास पर कांग्रेस की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया. असम में शांति बहाली और विकास तभी संभव होगा जब यहां पर स्थिरता आएगी. राज्य में बीजेपी के शासन के दौरान अवसरों में खासी वृद्धि हुई और इस वजह से असम के युवा अब वापस राज्य में लौटने लगे हैं।  कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस की नीतियों की वजह से असम को 32 सालों तक AFSPA के साए में रहना पड़ा, लेकिन BJP सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि इस कानून को ज्यादातर राज्यों से हटा दिया जाए।  ‘संकल्प पत्र’ को लेकर केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा, “‘संकल्प पत्र’ तैयार करने के पीछे की पृष्ठभूमि यह है कि हम असम से जुड़े सभी हिस्सों में लोगों के पास गए. हम घर-घर गए और अगले कार्यकाल में क्या करना है, इस बारे में लोगों के सुझाव मांगे और उसे एकत्र किए. इस दस्तावेज के आधार पर, यानी असम के लोगों के सुझावों के आधार पर, हम तीसरे कार्यकाल में काम करेंगे.” उन्होंने बताया कि करीब 3 लाख से अधिक लोगों ने अपने सुझाव दिए हैं।  मंत्री सीतारमण ने कहा, '2015-16 में असम का जीएसडीपी 2.24 लाख करोड़ रुपये था और आज 2025-26 में यह 7.41 लाख करोड़ रुपये है. 2020-21 में प्रति व्यक्ति आय 1.03 लाख रुपये थी, जबकि 2024-25 में यह 1.59 लाख रुपये है. यानी सिर्फ 4 सालों में 54फीसदी की बढ़ोतरी।  इस मौके पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और पवित्र मार्गेरिटा, राज्य बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा, राज्य मंत्रिमंडल के मंत्री और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे. राज्य की 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।  असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। 

मध्य प्रदेश में BJP की तैयारी तेज, 1800 कार्यकर्ताओं को जल्द मिलेगी जिम्मेदारी

भोपाल एमपी बीजेपी में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं में और जोश जगाने सांग​ठनिक स्तर पर गहन विचार विमर्श चल रहा है। इसके अंतर्गत अब कुछ पद बांटे जाने का निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रदेशभर के 18 सौ नेता-कार्यकर्ताओं को जल्द ही अहम दायित्व दिया जाएगा। इसके लिए पार्टी ने की पहल की है। नगरीय निकाय चुनावों से पहले पकड़ मजबूत करने खास एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें जिलों के अनुभवी नेताओं को एल्डरमैन बनाकर एडजस्ट करने की तैयारी की है। प्रादेशिक भाजपा नेताओं के मुताबिक लंबे अरसे से राजनीतिक नियुक्तियों के इंतजार में बैठे जिलों के वरिष्ठ नेताओं को एल्डरमैन में एडजस्ट करने की तैयारी कर चुकी है। इस पर जिले से प्रदेश संगठन के बीच समन्वय और सहमति बनाई जा चुकी है। हालांकि एल्डरमैन की परिषदों में कोई संवैधानिक भूमिका नहीं होती है पर इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को अहमियत का अहसास जरूर होता है। एल्डरमैन को वोटिंग का अधिकार नहीं होता है और परिषदों की बैठक में भी इन्हें हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है। पर पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते पार्षद या अध्यक्ष इनसे चर्चा कर मार्गदर्शन लेते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अब कभी भी एल्डरमैन की घोषणा हो सकती है। दरअसल, भाजपा नगरीय निकायों में होने वाली एल्डरमैन की नियुक्ति में उन्हीं चेहरों को तवज्जो देगी, जिसके अनुभव का लाभ पार्टी को चुनाव में मिले। साथ ही परिषदों के कामकाज और विकास कार्यों की भी मॉनीटरिंग करवाई जा सके। बता दें, संगठन द्वारा नियुक्त एल्डरमैन न तो परिषदों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं और न ही इनके पास वोटिंग का अधिकार होता है। कुल मिलाकर इनकी भूमिका मार्गदर्शक के रूप में होती है। 413 निकायों में 18 सौ से अधिक नेता होंगे एडजस्ट निकायों में नेताओं को एडजस्ट करने का फॉर्मूला पार्टी ने तैयार किया है। 413 निकायों में करीब 1800 सक्रिय कार्यकर्ताओं को एडजस्ट किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक निकायों में 10 लाख से अधिक आबादी वाले 12 निकायों में 4-4 एल्डरमैन और 10 लाख से कम आबादी वाले में 8-8 की नियुक्ति की जाएगी। ऐसे ही नगर पालिकाओं में 6-6 और नगर परिषदों में 4-4 का फॉर्मूला तय हुआ है।

मंत्री के किन्नर संग अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

मुंबई  महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता नरहरी झिरवल एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका ट्रांसपर्सन (किन्नर) के साथ एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसके बाद उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस ने उनके इस कृत्य को अश्लील और अनैतिक बताते हुए मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वीडियो और मंत्री का बचाव कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह वीडियो मंत्री के आधिकारिक आवास का है, जिसमें वह किन्नर के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे हैं। हालांकि, गुरुवार को एक मराठी समाचार चैनल से बात करते हुए झिरवल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। झिरवल ने दावा किया कि यह एक 'डॉक्टर्ड' (छेड़छाड़ किया हुआ) और असेंबल किया गया वीडियो है, जिसे केवल उन्हें ब्लैकमेल करने की नीयत से लीक किया गया है। मंत्री ने यह माना कि वह वीडियो में दिख रहे किन्नर को पिछले पांच सालों से जानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि इस ब्लैकमेलिंग के पीछे किसी ऐसे व्यक्ति का हाथ है जो उस ट्रांसपर्सन को जानता है। वीडियो में शराब की बोतलें दिखने के सवाल पर झिरवल ने स्पष्ट किया कि वह शराब नहीं पीते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक किसी ने उनसे इस्तीफा नहीं मांगा है। विपक्ष का तीखा हमला और बर्खास्तगी की मांग इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस (विजय वडेट्टीवार): कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इसे बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के भीतर चल रहा गैंग वॉर करार दिया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल एक-दूसरे को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वडेट्टीवार ने दावा किया कि ट्रांसपर्सन के भाई ने ही ब्लैकमेल करने के लिए यह वीडियो वायरल किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (हर्षवर्धन सपकाल): उन्होंने इसे महाराष्ट्र की राजनीति में नैतिक पतन का ज्वलंत उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि जनता के भरोसे और टैक्सपेयर्स के पैसे पर बैठे एक जनप्रतिनिधि का ऐसा व्यवहार बेहद निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से झिरवल को तुरंत कैबिनेट से हटाने की मांग की। आम आदमी पार्टी (प्रीति शर्मा मेनन): आप की मुंबई अध्यक्ष ने सीएम फडणवीस द्वारा अब तक कार्रवाई न किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तव में 'कलयुग' है, जहां यौन अपराधी हमारे शासक हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि झिरवल जैसे वरिष्ठ मंत्री को अपनी मर्यादाओं और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने माना कि यह वीडियो ब्लैकमेल करने के इरादे से बनाया और वायरल किया गया है, और मामले की गहन जांच की मांग की। भ्रष्टाचार के पुराने विवादों से भी जुड़ा है नाम नासिक जिले के डिंडोरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले आदिवासी नेता नरहरि झिरवल पिछले महीने भी सुर्खियों में थे, जब उनके ही विभाग में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था। 12 फरवरी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने FDA विभाग के क्लर्क राजेंद्र ढेरंगे को राज्य सचिवालय (मंत्रालय) के भीतर 35,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। रिश्वतखोरी से जुड़े एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद झिरवल के निजी सचिव, डॉ. रामदास गाडे को भी उनके पद से हटाकर उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया था।

पिछलग्गू BJP ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कैसे बनाई चुनौती, जानें उनकी रणनीति

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच दो-तरफा मुकाबला देखा जा रहा है. 2021 के चुनाव के बाद राज्य में इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच सीधी टक्कर दिख रही है. लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में राज करने वाले वामदल और कांग्रेस की ताकत जहां लगातार सिमटती जा रही है, वहीं उस खाली हुए स्पेस को बीजेपी भरती दिख रही है. कभी टीएमसी के साथ गठबंधन में सहयोगी रही बीजेपी मौजूदा वक्त में उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी बन चुकी है।  पिछले कुछ सालों में, भारतीय जनता पार्टी साइडलाइन से हटकर पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरी है. बीजेपी ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को चुनौती देने की सबसे मज़बूत उम्मीद बन चुकी है. 2016 में सिर्फ़ तीन विधानसभा सीटें जीतने से लेकर 2021 के चुनाव में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरने तक, BJP ने राज्य में काफ़ी बढ़त बनाई है. बंगाली बोलने वाले राज्य में नेशनल पार्टी की बढ़त लोगों को अचंभित कर रही है।  बंगाल में लगातार बढ़ रहा बीजेपी का वोट शेयर 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते थे. उस चुनाव में पूरे राज्य में केवल चार फीसदी वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी ने 18 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थीं. 2016 में, उसे लगभग 10 फीसदी वोट के साथ तीन विधानसभा सीटें मिली थीं. 2021 में 77 सीटों और 38 फीसदी से ज़्यादा वोट शेयर तक पहुंची. इसके साथ ही बीजेपी ने दिखा दिया कि वह बंगाल जैसे राज्य में भी मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकती है. बेहद कुछ सालों में ही बीजेपी ने लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस की जगह ले ली, जो दशकों से बंगाल की राजनीति पर हावी थे. इस तरह बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत बन गई।  2021 में, BJP के लिए एक अहम पल तब आया जब नंदीग्राम में मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी की जीत हुई. सुवेंदु, जो कभी ममता के करीबी थे, 1,956 वोटों के बहुत कम अंतर से जीते. यह मुकाबला एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल गया था जब CM ने खुद अधिकारी को उनके घरेलू मैदान पर चुनौती देने का फैसला किया, जिससे यह नतीजा पार्टी के लिए एक सिंबॉलिक जीत बन गया।  उत्तर बंगाल के जरिए बीजेपी ने मजबूत की पकड़ BJP की बढ़त ज़्यादातर स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में केंद्रित रही है. उत्तर बंगाल, जिसमें दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार और मालदा और दिनाजपुर के कुछ हिस्से में 54 विधानसभा क्षेत्र हैं, पार्टी का गढ़ बन गया है. दार्जिलिंग हिल्स में, BJP ने दार्जिलिंग, कुर्सेओंग और माटीगारा-नक्सलबाड़ी जैसी सीटों पर दबदबा बनाया, जिससे उसे गोरखा समुदाय का समर्थन मिला. डुआर्स और तराई बेल्ट – जिसमें जलपाईगुड़ी, राजगंज, डाबग्राम-फूलबाड़ी, माल, अलीपुरद्वार और कुमारग्राम शामिल हैं- में आदिवासी और राजबंशी वोटरों का दबदबा है, जबकि सिलीगुड़ी जैसे शहरी केंद्र भी BJP की तरफ झुके हुए हैं।  2021 में, BJP ने अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसने कूचबिहार की नौ में से सात सीटें जीतीं. जलपाईगुड़ी में, BJP ने सात में से चार सीटें और हिल्स की छह में से पांच सीटें जीतीं, जिसमें सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग टाउन शामिल हैं, जबकि कलिम्पोंग एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।  2019 के लोकसभा चुनावों ने न केवल बीजेपी को केंद्र में अब तक का सबसे बड़ा जनादेश दिया, बल्कि राज्य में पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन भी दिखाया. बीजेपी ने 18 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं, जो टीएमसी की 22 सीटों से पीछे थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ़ 2 सीटें ही जीत पाई. 2019 के लोकसभा चुनावों में भी BJP ने नॉर्थ बंगाल की 8 में से 7 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में, BJP ने 12 सीटें जीतीं, जबकि TMC ने 29 सीटों के साथ दबदबा बनाया।  BJP की बढ़ती पकड़ के पीछे की रणनीति क्या है?       राज्य में BJP की बढ़त कई वजहों से हो सकती है. 2014 से, पार्टी ने RSS के सपोर्ट वाले एक मज़बूत ज़मीनी नेटवर्क के ज़रिए अपनी ऑर्गनाइज़ेशनल पहुंच को मज़बूत किया है. इसने पहचान की राजनीति का कामयाबी से फ़ायदा उठाया, राजबंशी, आदिवासी और शहरी समुदायों के बीच हिंदू वोटों को मज़बूत किया, साथ ही तृणमूल के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय शिकायतों को भी सामने लाया।      पिछले कुछ सालों में टीएमसी और कांग्रेस के कई बड़े नेता भी बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे बंगाल में पार्टी की लीडरशिप का दबदबा बढ़ा.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दूसरे सीनियर नेताओं के बार-बार दौरों से भी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की उपलब्धता बढ़ी, जिससे क्रेडिबिलिटी और वोटर अपील बढ़ी।      साथ ही, तृणमूल की कमज़ोरियों, जिसमें कथित कुशासन और एंटी-इनकंबेंसी भावना शामिल है. खासकर नॉर्थ बंगाल में BJP को पूरे राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका दिया।   

BJP विधायक को तलब किया गया, सरकार के खिलाफ धरना देने पर CM और प्रदेश अध्यक्ष ने भोपाल बुलाया

भोपाल भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा 'गुड्डू' ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह और प्रशासन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की है। बीजेपी विधायक अमरीश शर्मा को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने बुलाया और सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुलाकात की। एक फूंक मारेंगे तो पाकिस्तान जाकर गिरोगे बताया जा रहा है बीजेपी विधायक के प्रदर्शन से पार्टी के ऊपर कई सवाल खड़े हो रहे थे। प्रदर्शन के दौरान विधायक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आए। वहीं बीजेपी विधायक ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा था कि एक फूंक मारेंगे तो पाकिस्तान जाकर गिरोगे। बीजेपी विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। 550 दिनों से धरने पर बैठे लोग, क्या वजह विधायक शर्मा का आरोप है कि कांग्रेस नेता गोविंद सिंह की कोठी की वजह से दलित बस्ती का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है और प्रशासन विपक्षी दबाव में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।गौरतलब है कि इस रास्ते को खुलवाने के लिए स्थानीय लोग पिछले 550 दिनों से धरने पर बैठे हैं, जिनके समर्थन में रविवार को खुद विधायक भी धरने पर बैठ गए थे। बिजली कटौती, रेत खनन की समस्या भी उठाई मुख्यमंत्री ने इस मामले में दखल देते हुए न केवल जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि क्षेत्र में रेत खनन शुरू करने और बिजली कटौती की समस्या को तुरंत खत्म करने के निर्देश भी जारी किए हैं। विधायक अंबरीश शर्मा ने साफ कर दिया है कि जब तक दलितों को उनका हक और रास्ता नहीं मिल जाता, उनकी यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी। अब देखने की बात होगी कि आगे क्या कार्यवाही होती है।

सांस्कृतिक प्रकोष्ठ भाजपा की प्रथम वर्चुवल बैठक संपन्न

सांस्कृतिक प्रकोष्ठ भाजपा की प्रथम वर्चुवल बैठक संपन्न रायपुर  छत्तीसगढ़ भाजपा की इकाई सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के नवनियुक्त पदाधिकारियों की आज प्रथम बैठक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अनुपम पाल के नेतृत्व में संपन्न हुई जिसका संचालन सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक शरद श्रीवास्तव ने किया l बैठक के प्रथम सत्र में सभी 14 पदाधिकारियों ने अपना परिचय दिया और सभी ने पूरी निष्ठा से अपने दायित्व के निर्वहन की बात कही l सहसंयोजक शरद श्रीवास्तव ने अपने अनुभव और शीर्ष नेतृत्व के आदेश को साझा करते हुये कहा कि हमें एक हजार से अधिक कलाकारों की एक भव्य टीम बनाना है ताकि समय पड़ने पर हम अपने अपने कला के माध्यम से पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के लिये सकारात्मक कार्य कर सके l वही प्रदेश संयोजक अनुपम पाल ने प्रकोष्ठ के सभी पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि कला एक ऐसा माध्यम है जिसके सहयोग से हम सरकारी योजनाओं आम जनमानस तक अल्प समय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते है साथ ही भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ में कोई ईमानदारी और निष्ठा से संयमित होकर कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया। अंत में शरद अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित कर आज के महत्वपूर्ण वर्चुवल बैठक के  समाप्ति की घोषणा की l  आज के इस बैठक में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के संयोजक अनुपम पाल,सहसंयोजक शरद श्रीवास्तव,शरद अग्रवाल, उर्वशी साहू,रवि शर्मा, कोषाध्यक्ष मुकेश जोशी,कार्यालय प्रभारी तरल सोलंकी,सहकार्यालय प्रभारी जीवनमिश्रा, कार्यक्रम प्रभारी  तेजराम साहू, कार्यक्रम सह प्रभारी सुतापा पाल, मिडिया प्रभारी निशु पाण्डेय,सह मिडिया प्रभारी सतेंद्र सोनी,सोशल मिडिया प्रभारी रवि जग्गी,सोशल मिडिया सह प्रभारी रामानंद त्रिपाठी उपस्थित थे l

नई टीम, नया जोश: महानगर में भाजपा पदाधिकारियों का जोरदार स्वागत, मिला मजबूत संगठन का लक्ष्य

बरेली भारतीय जनता पार्टी महानगर इकाई में नई टीम के गठन के साथ ही संगठन ने ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सिविल लाइंस स्थित पार्टी कार्यालय में नवनियुक्त पदाधिकारियों का भव्य स्वागत किया गया, जहां मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने साफ संदेश दिया कि अब संगठन की नीतियां घर-घर तक पहुंचानी होंगी। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार, सांसद छत्रपाल गंगवार, महापौर डॉ. उमेश गौतम और महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को पटका और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में उत्साह और जोश का माहौल देखने को मिला। मंत्री बोले, हर घर तक पहुंचे भाजपा की नीति वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि सभी कार्यकर्ता संगठन की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करें। उन्होंने कहा कि यही कार्यकर्ताओं की असली जिम्मेदारी है और इसी से संगठन मजबूत होगा। सांसद छत्रपाल गंगवार ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता पूरी ताकत और समर्पण के साथ संगठन में काम करे। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती ही भाजपा की असली ताकत है। महापौर बोले, महानगर में बनें संगठन की पहचान महापौर डॉ. उमेश गौतम ने पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे महानगर में संगठन की पहचान बनें और सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता महत्वपूर्ण है और सभी को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। एससी-एसटी आयोग सदस्य उमेश कठेरिया ने भी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।   ये बने नए पदाधिकारी, बड़ी जिम्मेदारी संभाली नवनियुक्त पदाधिकारियों में महानगर उपाध्यक्ष प्रभु दयाल लोधी, डॉ. तृप्ति गुप्ता, विष्णु अग्रवाल, राज किशोर कश्यप, प्रवेश वर्मा, डॉ. रामचंद्र मौर्य, अमरीश कठेरिया, विभु शर्मा, महामंत्री विष्णु शर्मा, डॉ. आदेश गंगवार, राजीव साहनी, मंत्री अजय चौहान, रितेश गुप्ता, लता सिंह बघेल, रेनू शर्मा, कुमार गौरव शर्मा, राधे गुर्जर, मनजीत सिंह नागपाल, सत्तू सागर, श्रीमती रितु सागर, बंटी ठाकुर, गरिमा कमांडो, संतोष कश्यप, छंगमल मौर्य, सतीश कातिव, वीरेंद्र अरोड़ा, नरेंद्र मौर्य सहित महानगर के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष और पार्षद बड़ी संख्या में मौजूद रहे।