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सियासी पलटवार: 9 पार्षदों के फैसले से BJP बैकफुट पर, कांग्रेस की मेयर कुर्सी तय

मुंबई  महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले सियासी उलटफेर की बड़ी खबर सामने आई है. यहां मेयर के चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. उसके 22 पार्षदों में से 9 ने अलग गुट बनाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया है. इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी के लिए यहां अपना मेयर चुनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. इस महानगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं. हालांकि किसी पार्टी को यहां बहुमत नहीं मिला है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं. कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बुधवार (18) को जानकारी देते हुए बताया कि अलग हुए पार्षदों की ओर से गठित भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (बीएसएफ) के समर्थन से कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) गठबंधन ने 90 सदस्यीय निकाय में 46 सीटों के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कांग्रेस का मेयर बनना तय? उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 9 पार्षदों ने हमारा समर्थन करने का फैसला किया है और बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं. गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने शिवसेना का समर्थन किया था. पिछले महीने हुए भिवंडी-निज़ामपुर नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस अब अपना मेयर और डिप्टी मेयर नियुक्त करने के लिए तैयार दिख रही है. भिवंडी-निजामपुर में किस पार्टी के पास कितनी सीटें? महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इस पार्टी को सबसे अधिक 30 सीटें मिलीं थीं, उसके बाद बीजेपी को 22 सीटें मिली.  वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई.

BJP से कांग्रेस तक का सरप्राइज, वरिष्ठ नेता की बेटी का पार्टी बदलना मचा रहा हलचल

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश खाद एवं ग्रामोद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस में शामिल हो गई है। कनुप्रिया ने आज भोपाल में कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अर्चना जायसवाल की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस कार्यालय में हुआ सदस्यता ग्रहण भोपाल स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कनुप्रिया सत्तन को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत करते हुए संगठन को मजबूत करने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा के वरिष्ठ नेता के परिवार से जुड़ी यह एंट्री इंदौर और प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है। सियासी हलकों में चर्चा तेज कनुप्रिया सत्तन का कांग्रेस में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस संगठन में किस भूमिका में नजर आती हैं।

भाजपा उपाध्यक्ष का बगावती कदम: अरविंद खन्ना ने पार्टी छोड़ी, राज्य में राजनीतिक हलचल

चंडीगढ़  भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पंजाब इकाई के उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना  संगरूर में शिरोमणि अकाली दल (SAD) में शामिल हो गए। BJP की पंजाब इकाई में शामिल होने से पहले खन्ना कांग्रेस के विधायक थे। खास बात है कि पंजाब में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। फिलहाल, राज्य में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार है। SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने संगरूर में खन्ना के घर का दौरा किया, जहां उन्होंने पूर्व विधायक को SAD में शामिल किया। बादल ने कहा कि उन्हें अपने मित्र का SAD में स्वागत करते हुए और उन्हें संगरूर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त करते हुए खुशी हो रही है। पूर्व कांग्रेस विधायक और व्यवसायी खन्ना जनवरी 2022 में BJP में शामिल हुए थे। वह 2002 में संगरूर विधानसभा क्षेत्र से और 2012 में धुरी सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। खन्ना ने 2022 के विधानसभा चुनाव में संगरूर सीट से और 2024 के लोकसभा चुनाव में संगरूर संसदीय क्षेत्र से BJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। पार्टी में शामिल होने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए खन्ना ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत SAD से की थी और पार्टी में दोबारा शामिल होने को उन्होंने 'घर वापसी' बताया। संगरूर विधायक ने भाजपा पर लगाए ऑपरेशन लोटस के आरोप संगरूर सीट से आप विधायक नरिंदर कौर भरज ने गुरुवार को दावा किया था कि भाजपा ने उन्हें टिकट देने की पेशकश की है। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का नाम लिया था। हालांकि, सैनी ने आरोपों का खंडन किया था। पीटीआई भाषा के अनुसार, जब पत्रकारों ने भरज के दावों पर टिप्पणी के लिए सैनी से संपर्क किया, तो मुख्यमंत्री ने कहा, मैं उन्हें नहीं जानता, न ही उनके निर्वाचन क्षेत्र को जानता हूं जिसका वह प्रतिनिधित्व करती हैं।' संगरूर सीट से आप विधायक ने यह भी दावा किया कि उन्हें बंद कमरे में बैठक की पेशकश की गई थी। दावे पर फरीदाबाद में मीडियाकर्मियों के सवालों पर सैनी ने पूछा, 'कब?' इससे पहले, भरज ने यहां मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए दावा किया कि भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' के तहत सैनी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की और कुछ दिन पहले उनसे बात भी की थी। उन्होंने दावा किया कि सैनी ने बंद कमरे में एक बैठक का प्रस्ताव रखा।

एपस्टीन फाइल्स को लेकर भाजपा ने कपिल सिब्बल और राहुल गांधी को घेरा

नई दिल्ली. अमेरिका के बदनाम फाइनेंशर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइल्स ने भारत में भी राजनैतिक बवाल मचाया हुआ है। कांग्रेस की तरफ से पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ऊपर हमला किया गया, अब भाजपा ने भी पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल पर निशाना साधा है। भाजपा ने राहुल गांधी से जवाब देने की मांग करते हुए दावा किया कि कपिल सिब्बल को एक ऐसे कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार मिला था, जिसे यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने फंड किया था। कपिल सिब्बल से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस दावे के बकवास बताकर खारिज कर दिया। कांग्रेस की तरफ से प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर जवाब दिया। मीडिया से बात करते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि उस समय सिब्बल केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री थे। उन्हें ''शिक्षा में वैश्विक सहयोग के प्रति उनके दृढ़ समर्थन' के लिए समारोह में पुरस्कार दिया गया था। खेड़ा ने कहा, ''इसका जेफ्री एप्स्टीन से कोई संबंध नहीं है।'' दरअसल यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ, जब भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कपिल सिब्बल पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "2010 में, जेफ्री एप्स्टीन द्वारा कथित तौर पर वित्त पोषित एक पुरस्कार कांग्रेस के (तत्कालीन) वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को मिला था। सिब्बल को लंबे समय से गांधी परिवार के करीबी के रूप में देखा जाता रहा है।'' भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विदेश इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा भी ''उसी गुट'' से जुड़े हुए थे। 2010 में, जेफ्री एप्स्टीन द्वारा कथित तौर पर वित्त पोषित एक पुरस्कार कांग्रेस के (तत्कालीन) वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को मिला था। सिब्बल को लंबे समय से गांधी परिवार के करीबी के रूप में देखा जाता रहा है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विदेश इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा भी ''उसी गुट'' से जुड़े हुए थे। आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल 2022 तक कांग्रेस में शामिल थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी, वर्तमान में वह समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के सांसद हैं। एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आने पर कांग्रेस लगातार हमलावर बनी हुई है। कांग्रेस की तरफ से पवन खेड़ा ने पुरी पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह लगातार झूठ बोल रहे हैं, ऐसे व्यक्ति को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है, उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनकी काम के सिलसिले में एपस्टीन से जान-पहचान थी, उसके अपराधों से उनका कोई लेना-देना नहीं।

वकीलों ने भी छोड़ा साथ, बीजेपी नेता पंकज घारू पर जज धमकी का मामला गंभीर

 देवास देवास में बीजेपी नेता पंकज घारू द्वारा न्यायाधीश के साथ अभद्रता करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. नाहर दरवाजा थाना पुलिस ने जज का रास्ता रोकने और धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर मुख्य आरोपी पंकज घारू और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं एक अन्य आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार घटना देवास के जय श्री नगर इलाके में हुई. चतुर्थ जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रसन्न सिंह बहरावत अपनी कार से कोर्ट जा रहे थे. इसी दौरान धन लक्ष्मी मैरिज गार्डन के पास आरोपियों ने अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी सड़क पर खड़ी कर रखी थी. जय श्री नगर में जज का रास्ता रोकने को लेकर हुआ विवाद जब न्यायाधीश ने वाहन हटाने को कहा तो आरोपियों ने अभद्रता की और धमकियां दीं. इस घटना के बाद जज साहब ने नाहर दरवाजा थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. साथ ही एसपी और डीजीपी को भी मोबाइल पर घटना की जानकारी दी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने पंकज घारू सहित दो अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. मामले के तूल पकड़ने के बाद बुधवार दोपहर जिला प्रशासन ने भी सख्त कदम उठाया. अभद्रता और धमकी देने पर भाजपा नेता पंकज घारू पर FIR दर्ज प्रशासनिक टीम ने आरोपी पंकज घारू के भोपाल रोड और बिलावली बामनखेड़ा क्षेत्र में शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया. तहसीलदार सपना शर्मा ने बताया कि संबंधित शख्स ने कांकड़ की सरकारी जमीन पर पोल्ट्री फार्म सहित अन्य निर्माण कर रखे थे. मामला बढ़ने के बाद प्रशासन ने अवैध कब्जे पर चलाया बुलडोजर कई बार नोटिस देने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, इसलिए कार्रवाई की गई. पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध निर्माणों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी. वहीं जिला अभिभाषक संघ ने पत्र जारी कर कहा है कि संघ का कोई भी सदस्य आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा.

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित….

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित…. बिलासपुर  भाजपा मंडल बिलासपुर  में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके तेलीय चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय एक प्रमुख राजनीतिक चिंतक, अर्थशास्त्री एवं भारतीय जनसंघ के शीर्ष नेताओं में से थे। वे अपने दार्शनिक सिद्धांत ‘एकात्म मानव दर्शन’ के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी की विचारधारा का मूल आधार यह था कि विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित न होकर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य को उन्होंने विकास का केंद्र बिंदु माना। उनके अनुसार आर्थिक नीतियों का उद्देश्य केवल उत्पादन और उपभोग बढ़ाना नहीं, बल्कि मानव के समग्र विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए। वे 1968 में अपने असामयिक निधन तक भारतीय जनसंघ का नेतृत्व करते रहे। भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को अंत्योदय और एकात्म मानववाद का प्रणेता बताते हुए कहा कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का वास्तविक मापदंड है। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी के विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। भाजपा मंडल बिलासपुर के महामंत्री ने भी उन्हें निस्वार्थ कर्मयोगी और महान विचारक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से दिया गया अंत्योदय का मंत्र आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण की मजबूत बुनियाद है। राष्ट्र सेवा और समर्पण के उनके आदर्श सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे। कार्यक्रम में भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी भाजपा मंडल बिलासपुर के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी मंडल महामंत्री विनायक तिवारी उपाध्यक्ष रवि शंकर सोनी,विजय सोनी,गोविंद सोनी,बच्चू सोनी,किश्शू महार एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

विवादित नेताओं को बनाया पदाधिकारी, भोपाल में बीजेपी की नई कार्यकारिणी पर शुरू हुआ अंदरूनी बवाल

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी का गठन विवादों की भेंट चढ़ गया है। शहर अध्यक्ष रविंद्र यती द्वारा मंगलवार को घोषित की गई टीम के खिलाफ पार्टी के भीतर ही जबरदस्त नाराजगी और विरोध के स्वर उठने लगे। मामला इतना बढ़ा कि कुछ ही घंटों के भीतर इस नई कार्यकारिणी को होल्ड पर रखना पड़ा। कार्यकारिणी पर क्यों मचा बवाल? विरोध का सबसे बड़ा कारण जिला महामंत्री के पद पर सचिन दास बब्बा की नियुक्ति को माना जा रहा है। पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सचिन दास 2013 में भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी सुरेंद्र नाथ सिंह के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, उन पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ करने जैसे गंभीर आरोप भी हैं। ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद दिए जाने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में गहरा रोष फैल गया। बीजेपी की ये कार्यकारिणी हुई होल्ड ये बनाए गए थे उपाध्यक्ष: राजकुमार विश्वकर्मा, अश्विनी राय, राकेश कुकरेजा, अशोक वाणी, राजू अनेजा, भाषित दीक्षित, विभा गरुण, शिखा मोनू गोहल, ये बने महामंत्री : मनोज राठौर, योगेश परमार, सचिन दास बब्बा मंत्री: अमन यादव, योगेश वासवानी, सुनील यादव, सुषमा बावीसा, लक्ष्मी ठाकुर, पार्थ पाटीदार, प्रतीक्षा ब्रह्मभट्ट कोषाध्यक्ष: राघवेन्द्र द्विवेदी सह कोषाध्यक्ष: संतोष जाट कार्यालय मंत्री: योगेन्द्र मुखरैया सह कार्यालय मंत्री: अमित कुमार सिंह, सुमित पांडे आईटी प्रभारी: विश्वविजय सिंह आईटी सह प्रभारी: रवि यादव, शरद पंडित, शेखर श्रीवास्तव सोशल मीडिया प्रभारी: जगदीश विश्वकर्मा सोशल मीडिया सह प्रभारी: हेतराम, चंद्रभान यादव, आरती बोराना कार्यालय प्रभारी: शैलेन्द्र निगम मन की बात प्रभारी: सुनील निगम, सह प्रभारी: चंद्रशेखर तिवारी(राधे महाराज), राजेश खटीक, अनुपम जैन इन वजहों से हुआ विरोध तो होल्ड हुई सूची बीजेपी ऑफिस में तोड़फोड़ करने वाले को महामंत्री बनाया बीजेपी की जिला कार्यकारिणी में सचिन दास बब्बा को जिला महामंत्री बनाया गया था। लिस्ट जारी होने के बाद संगठन में भोपाल के कई नेताओं ने इस बात की शिकायत की कि सचिन दास प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ में शामिल थे। 2013 में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी सुरेन्द्र नाथ सिंह के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा था। पार्षदों का क्लब बनी जिला कार्यकारिणी बीजेपी की जिला कार्यकारिणी में पांच पार्षद पदाधिकारी बनाए गए थे। इनमें वार्ड 70 के पार्षद अशोक वाणी, वार्ड 32 के पार्षद प्रतिनिधि राजू अनेजा, वार्ड 45 के पार्षद प्रतिनिधि मोनू गोहल, वार्ड 50 की पार्षद सुषमा बावीसा और वार्ड 13 के पार्षद मनोज राठौर जिला पदाधिकारी बनाए गए हैं। जिला और प्रदेश अध्यक्ष ने पोस्ट डिलीट की भोपाल की जिला कार्यकारिणी घोषित होने की लिस्ट बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, भोपाल के शहर अध्यक्ष रविन्द्र यती और बीजेपी मध्य प्रदेश के ऑफिशियल पेज पर पोस्ट की गई लेकिन, कुछ ही समय बाद सबने पोस्ट डिलीट कर दी। पार्षदों का क्लब बनी टीम संगठन के भीतर इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि नई कार्यकारिणी में पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों का दबदबा रहा। वार्ड 70 के पार्षद अशोक वाणी, वार्ड 32 के पार्षद प्रतिनिधि राजू अनेजा, वार्ड 45 के पार्षद प्रतिनिधि मोनू गोहल, वार्ड 50 की पार्षद सुषमा बावीसा और वार्ड 13 के पार्षद मनोज राठौर को टीम में जगह दी गई। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इससे संगठन 'पार्षदों का क्लब' बनकर रह गया और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई। हटाए गए सोशल मीडिया पोस्ट विवाद इतना गहराया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, शहर अध्यक्ष रविंद्र यती और भाजपा मध्य प्रदेश के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से सूची वाले पोस्ट आनन-फानन में डिलीट कर दिए गए। फिलहाल पूरी सूची को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। गौरतलब है कि रविंद्र यती की नियुक्ति के एक साल बाद यह सूची जारी हुई थी, जिसमें राजकुमार विश्वकर्मा और अश्विनी राय जैसे नेताओं को उपाध्यक्ष और योगेश परमार को महामंत्री बनाया गया था। महाशिवरात्रि तक के लिए होल्ड हुई है लिस्ट जिला कार्यकारिणी होल्ड होने को लेकर भोपाल के शहर अध्यक्ष रविन्द्र यती ने भास्कर से कहा- अभी महाशिवरात्रि तक के लिए लिस्ट होल्ड की गई है।

कांग्रेस को झटका! सहयोगी शिवसेना UBT ने बदला खेल, भाजपा का बना मेयर

मुंबई  गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को उस समय बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जब उसकी सहयोगी शिवसेना (UBT) और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच अचानक हुए गठबंधन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा का महापौर चुन लिया गया। यह तब हुआ, जब कांग्रेस इस पद पर दावा करने की स्थिति में थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगीता खांडेकर ने कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को एक वोट से हराकर महापौर चुनाव जीत लिया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने भाजपा को समर्थन दिया। शिवसेना (UBT) के पार्षद प्रशांत दानव उपमहापौर चुने गए। सबसे बड़ी पार्टी बनी थी कांग्रेस इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता और महा विकास आघाडी (MVA) की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि शिवसेना (UBT) MVA और विपक्षी दलों के 'INDIA' गठबंधन दोनों में कांग्रेस की एक प्रमुख सहयोगी है। चंद्रपुर उन कुछ नगर निकायों में से एक है जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और महापौर का पद हासिल करने की स्थिति में थी। हालांकि, विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धनोरकर के नेतृत्व वाले गुटों के बीच गहरे आंतरिक मतभेदों ने भाजपा को अपना महापौर बनाने का अवसर प्रदान कर दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वह विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के बाद इस घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे। कांग्रेस ने इन दलों को घेरा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया और इस झटके के लिए शिवसेना (UBT), AIMIM और वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस नेता ने पत्रकारों से कहा, 'चंद्रपुर महापौर चुनाव में भाजपा को 32 वोट और कांग्रेस को 31 वोट मिले। शिवसेना (UBT), MVA और विपक्षी दलों के 'INDIA' गठबंधन की सहयोगी है। उम्मीद थी कि शिवसेना (UBT) अपने छह पार्षदों के साथ कांग्रेस को समर्थन देगी लेकिन पार्टी ने भाजपा का साथ देना चुना। इस घटनाक्रम का राज्य पर असर पड़ेगा।' महापौर पद के लिए मची थी होड़ यहां 66 सदस्यीय नगर निकाय में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी जबकि भाजपा 23 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही जिससे दोनों दलों के बीच प्रतिष्ठित महापौर और उप महापौर पदों को पाने की होड़ मच गई। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने छह सीट जीतीं, भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष (जनविकास सेना) को तीन, वीबीए को दो और एआईएमआईएम, बसपा और शिवसेना को एक-एक सीट मिली। दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव जीता। पंद्रह जनवरी को हुए चुनाव में खंडित जनादेश के बाद चंद्रपुर नगर निकाय में गठबंधन को लेकर सोमवार तक कोई स्पष्टता नहीं थी। शिवसेना यूबीटी थी भाजपा के विरोध में महापौर चुनाव से पहले, शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी विपक्ष में बैठना पसंद करेगी और भाजपा का कभी समर्थन नहीं करेगी। हालांकि, परिणाम आने के बाद, शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना हुआ प्रतीत होता है। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने अलग-अलग स्पष्टीकरण दिया। चंद्रपुर जिला शिवसेना (UBT) के अध्यक्ष संदीप गिरहे ने बताया कि स्थानीय नेताओं ने महापौर पद के लिए कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार से मुलाकात की थी, लेकिन कांग्रेस ने पांच साल के लिए यह पद देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ''इसके बाद शिवसेना (UBT) ने 'विकास के हित में' भाजपा से बातचीत शुरू की।'' गिरहे ने कहा कि वह शिवसेना (UBT) के नेता वरुण सरदेसाई के संपर्क में रहे और नेतृत्व ने स्थानीय इकाइयों को संगठनात्मक एकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उप महापौर दानव ने पुष्टि की कि भाजपा और शिवसेना (UBT) के बीच हुई चर्चा के परिणामस्वरूप एक समझौता हुआ जिसके तहत भाजपा को महापौर का पद और शिवसेना (UBT) को उपमहापौर का पद मिला। भाजपा ने क्या कहा भाजपा के महापौर चुनाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के समर्थन के कारण भाजपा को बढ़त मिली, जबकि प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी (VBA) मतदान के दौरान अनुपस्थित रही। सपकाल ने कहा, ''वंचित बहुजन आघाडी के साथ हमने नगर निकाय चुनावों में वास्तविक गठबंधन किया और अगर उसने कांग्रेस का समर्थन किया होता तो हमारा उम्मीदवार जीत जाता। पार्षदों की खरीद-फरोख्त हुई।'' चंद्रपुर कांग्रेस में गुटबाजी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पार्टी के पार्षद एकजुट हैं और उन्होंने चंद्रपुर में कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेदों को सुलझा लिया है। उन्होंने कहा, ''शिवसेना (UBT), एआईएमआईएम और वीबीए की वजह से ही भाजपा अपना महापौर बना सकी।'' शिवसेना (UBT) पर निशाना साधते हुए, शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के पार्षदों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अब कांग्रेस और राकांपा के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते।

बंगाल चुनाव में यूपी के 54 भाजपाई लेंगे मोर्चा, 47 विधानसभा सीटों का मिलेगा जिम्मा

कलकत्ता  बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से मंत्रियों, संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं और रणनीतिकारों की एक जंबो टीम बंगाल भेजी है, ताकि चुनावी जमीन मजबूत की जा सके। भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत बंगाल को छह क्षेत्रों में विभाजित किया है। इनमें से तीन क्षेत्रों की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को सौंपी गई है। इनके साथ संबंधित राज्यों के संगठन महामंत्री भी तैनात किए गए हैं।  47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को पार्टी ने 244 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को सौंपा है। बंगाल का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है और देशभर की निगाहें यहां के नतीजों पर टिकी हैं। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री रह चुके जेपीएस राठौर को उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए अक्टूबर में ही बंगाल भेज दिया गया था। वे कोलकाता दक्षिण क्षेत्र का प्रभार संभाल रहे हैं और इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान यहां सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं पूर्व गन्ना विकास मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके सुरेश राणा को कोलकाता उत्तर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए अहम सीटों पर काम कर चुके हैं। राज्य के 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं के पास है। इनमें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, संजय गंगवार, पूर्व सांसद अजय मिश्र टेनी और सुब्रत पाठक शामिल हैं। सुब्रत पाठक को हुगली जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां की सात विधानसभा सीटों पर फिलहाल भाजपा का कोई विधायक नहीं है, हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा सांसद जीत दर्ज कर चुके हैं।पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता दक्षिण की बिहाला सीट, उपेंद्र तिवारी को हावड़ा टाउन की संकरेल सीट और आनंद शुक्ला को हाबरा सीट का दायित्व दिया गया है। वहीं मेरठ-गाजियाबाद क्षेत्र से एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज बैरकपुर जिले की जगतदल विधानसभा सीट और कानपुर से एमएलसी अरुण पाठक नईहाटी सीट पर कैंप किए हुए हैं। इसके अतिरिक्त जिला, क्षेत्र और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक पदाधिकारियों को भी चुनावी रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल भेजा गया है। 

एमपी बीजेपी के बड़े नेता दिल्ली पहुंचे, पार्टी में बड़े बदलाव की योजना, हेमंत खंडेलवाल की अगुवाई

भोपाल  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने डिनर डिप्लोमेसी का फॉर्मूला अपनाते हुए प्रदेश के सभी सांसदों को सहभोज पर बुलाया। यहां उन्होंने सांसदों से संगठनात्मक विषय व आगामी रणनीति पर वन-टू-वन चर्चा भी की। माना जा रहा है कि यह डिनर केवल आपसी संवाद तक सीमित नहीं था। बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति की नींव रखने की कोशिश भी थी। सांसदों से एमपी बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने किया आग्रह भाजपा के दोनों सदनों के सांसदों से खंडेलवाल ने आग्रह किया कि वे प्रदेश से जुड़े विषयों और विकास आवश्यकताओं के समाधान के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि केंद्र की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संवाद आने वाले समय में संगठात्मक निर्णयों और कार्ययोजनाओं में अहम भूमिका निभाएगा। केंद्र के साथ मिलकर काम कर रही है भाजपा की सरकार उन्होंने कहा, भाजपा सरकारमध्यप्रदेश की प्रगति और जन कल्याण के लिए हर स्तर पर केंद्र के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इस सहभोज में केंद्रीय राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद एम. मुरुगन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद वीडी शर्मा, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, इंदौर शंकर लालवानी सहित प्रदेशभर के सांसद शामिल हुए। इन मुद्दों पर हुई चर्चा सूत्रों के मुताबिक बैठक में चर्चा के दौरान बुनियादी ढ़ांचा, सड़क-रेल कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश, क्षेत्रीय विकास और केंद्र प्रायोजित योजनाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए हैं। 'डिनर' से साफ संदेश राजनीतिक जानकारों के मुताबिक दिल्ली में आयोजित यह सहभोज भाजपा के नेतृत्व की ओर से एकजुटता और सक्रियता का बड़ा संदेश देता है। विपक्ष के लिए भी संदेश साफ है कि एमपी प्रदेश संगठन पूरी तरह सक्रिय और समन्वित है। वहीं आने वाली राजनीतिक चुनौतियों को लेकर गंभीर और तैयार है। अब आगे क्या बड़े परिवर्तन की है तैयारी? एक्सपर्ट का मानना है कि दिल्ली दौरे के बाद भाजपा प्रदेश संगठन भोपाल में भी समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो सकता है। इसमें सांसदों से मिले फीडबैक के आधार पर रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है। यानी पार्टी की ये कवायद काफी कुछ बदलने की तैयारी मानी जा सकती है।