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BJP विधायक समेत 6 लोगों को बंगला खाली करने का नोटिस, विधायक ने CM के पदचिह्नों पर चलने की बात की

उज्जैन  मध्यप्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में बंगलों से कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही विवाद गहरा गया है। विवि प्रशासन ने आलोट से बीजेपी विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय सहित 6 लोगों को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस थमाए हैं। नोटिस मिलने के बाद बीजेपी विधायक ने आवास को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे सियासत गर्मा गई है। विपक्ष को भी हमला करने का मौका मिल गया है। विवि का अवैध कब्जाधारियों को नोटिस विश्वविद्यालय की हाल ही में हुई कार्यपरिषद (EC) की बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन लोगों का यूनिवर्सिटी से कोई संबंध नहीं है, उनसे आवास खाली कराया जाएगा। बताते हैं करीब आधा दर्जन आवासों पर बाहरी लोगों का कब्जा है, जिनमें बीजेपी विधायक, पूर्व एडिशनल एसपी, असिस्टेंट प्रोफेसर, लेक्चरर सहित कई लोग शामिल हैं। बाहरी कब्जों के कारण विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पा रहे हैं। उन्हें परेशानी हो रही है। वर्तमान में 50 से अधिक कर्मचारी आवास के लिए आवेदन कर चुके हैं। प्रशासन अब प्रभाव का इस्तेमाल कर वर्षों से कब्जा जमाए लोगों को हटाने की तैयारी कर रहा है। विधायक ने उठाया गंभीर सवाल आलोट विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय को वर्ष 2009 में विश्वविद्यालय का ई-4 बंगला आवंटित हुआ था, जिसका मासिक किराया 1620 रुपए है। उन्होंने अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले एक ही दिन में 9.09 लाख रुपए जमा कराए थे, हालांकि इसके बाद से किराया जमा नहीं किया। विधायक ने यह भी कहा नोटिस के बाद विधायक चिंतामणि ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे सियासत गर्मा गई है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय से उनका कुछ बकाया हिसाब है। उन्होंने चुनाव से पहले करीब 10 लाख रुपए जमा किए थे। उनका दावा है कि 2010 में उनका प्रमोशन होना था, जो 4 साल लंबित रहा, जिससे उनका भुगतान बाकी है। विधायक ने कहा कि वे कई बार विश्वविद्यालय से हिसाब करने का अनुरोध कर चुके हैं और हिसाब होने पर वे आवास खाली कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस विषय में गहराई से जांच होगी तो मामला लंबा हो सकता है। एक महीने में आवास खाली करने का नोटिस विक्रमादित्य विवि के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने बताया कि कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। जिन लोगों को नोटिस दिया गया है, उन्हें एक महीने का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ क्वार्टरों पर बाहरी लोगों का कब्जा है। आवास खाली होने के बाद इन्हें कर्मचारियों को आवंटित किया जाएगा और जर्जर हो चुके 21 भवनों को हटाने की भी योजना है। विधायक बोले- हिसाब होने पर आवास खाली कर देंगे आलोट विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय को 2009 में विश्वविद्यालय का ई-4 आवास आवंटित हुआ था, जिसका मासिक किराया 1620 रुपए है। उन्होंने अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले एक दिन में 9.09 लाख रुपए जमा किए थे। इसके बाद से किराया जमा नहीं किया गया है। नोटिस के बाद विधायक ने कहा- नैतिक सवाल यह भी है कि मुख्यमंत्री ने कुलपति का बंगला ले रखा है, जो एक लैंडमार्क और ऐतिहासिक भवन होता है। हम उन्हीं के पदचिह्नों पर हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से उनका कुछ बकाया हिसाब है। उन्होंने चुनाव से पहले करीब 10 लाख रुपए जमा किए थे। उनका दावा है कि 2010 में उनका प्रमोशन होना था, जो 4 साल लंबित रहा, जिससे भुगतान बाकी है। वे कई बार विश्वविद्यालय से हिसाब करने का अनुरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि हिसाब होने पर वे आवास खाली कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जांच गहराई से होगी तो मामला लंबा हो सकता है। आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने बताया कि कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। जिन लोगों को नोटिस दिया गया है, उन्हें एक माह का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ आवासों पर बाहरी कब्जा है। आवास खाली होने के बाद इन्हें कर्मचारियों को दिया जाएगा। जर्जर 21 भवनों को हटाने की योजना भी है। सीएम को मिला कुलपति का बंगला मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव के लिए उज्जैन के देवास रोड स्थित कुलपति का बंगला खाली कराया गया था। इसके बाद उसका नवीनीकरण हुआ। ये करीब डेढ़ साल पहले तैयार किया गया। वर्तमान में मुख्यमंत्री उज्जैन प्रवास के दौरान अधिकतर इसी बंगले में रात्रि विश्राम करते हैं। इसी मुद्दे पर विधायक ने विश्वविद्यालय के नोटिस पर प्रतिक्रिया दी है।

सुखजिंदर रंधावा का आरोप: पंजाब में गैंगस्टरवाद के लिए भाजपा जिम्मेदार

पंजाब में गैंगस्टरवाद के लिए  भाजपा जिम्मेदार', सुखजिंदर रंधावा का केंद्र और राज्य सरकार पर हमला सुखजिंदर रंधावा का आरोप: पंजाब में गैंगस्टरवाद के लिए  भाजपा  जिम्मेदार सुखजिंदर रंधावा ने केंद्र और राज्य सरकार पर किया हमला, कहा- पंजाब में गैंगस्टरवाद के लिए  भाजपा जिम्मेदार चंडीगढ़  पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गैंग्सटरों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की भाजपा  को दोषी ठहराया है। रंधावा ने कहा कि पंजाब की स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में जितने भी मेन गैंग्सटर हैं, उनमें से तकरीबन भाजपा शासित राज्यों से हैं। वहीं से वह पंजाब में वारदातें अंजाम देते हैं। पंजाब पुलिस को वह चैलेंज देते हैं कि वह पता लगा लें इन सभी गैंग्सटरों के फोन पंजाब में 24X7 चलते हैं। रंधावा ने कहा कि पंजाब की स्थिति संतोषजनक नहीं है और राज्य में सक्रिय अधिकांश बड़े गैंगस्टर भाजपा शासित राज्यों से संचालित हो रहे हैं, जहां से वे पंजाब में अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने पंजाब पुलिस को चुनौती दी कि वे जांच कर साबित करें कि इन गैंगस्टरों के मोबाइल फोन 24 घंटे पंजाब में सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन पर काबू पाने में फेल साबित हो रही है। सावरमती जेल में बंद लारेंस बिश्नोई को लेकर कोर्ट से आदेश निकलवा दिया जाता है कि इस जेल के बाहर उसे कोई इंटेरोगेट नहीं कर सकता है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि बिश्नोई से कोई और राज्य या राज्य की पुलिस पूछताछ ही नहीं सकती है। उन्होंने पंजाब कैबिनेट मंत्री रहे लालजीत सिंह भुल्लर के दबाव में आकर आत्महत्या करने वाले अधिकारी रंधावा के मामले में देश के गृहमंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शाह ने कहा था कि कांग्रेस सांसद लिखकर दें तो वह इस केस की जांच सीबीआइ को सौंप देंगे, लेकिन लिखने के बावजूद उन्होंने भी कोई एक्शन नहीं लिया।

BJP का पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान, राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले – पिछली बार कम सीटें मिलीं, जुड़ाव बना रहा

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में शिरोमणि अकाली दल (SAD) व भारतीय जनता पार्टी (BJP) में गठबंधन की अटकलों पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने विराम लगा दिया। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि पंजाब में भाजपा अकेले चुनाव लड़ेगी। नितिन नबीन ने साफ कहा कि भाजपा पंजाब में इस चुनाव में नए स्वरूप में दिखेगी। पार्टी चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसमें किसी का सहयोग नहीं होगा। उन्होंने कहा- पंजाब का मिजाज हमेशा भाजपा के साथ रहा है और भाजपा पंजाब के मिजाज को समझती है। हमने कभी भी पंजाब के मूल्यों के साथ समझौता नहीं किया। हमें पंजाब में सीटें कम मिलीं, इसके बावजूद पंजाब से भाजपा का जुड़ाव हमेशा बना रहा। नितिन नबीन ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) अपने कृत्यों के कारण हारने वाली है। इसमें कोई दो राय नहीं है। पंजाब में जनाधार स्थापित करना निश्चित तौर पर हमारे लिए चुनौती रही है। हमने जनसंघ के समय से पंजाब में निरंतर काम किया और लोगों के साथ हमारा सीधा जुड़ाव है। पंजाब में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगी BJP- अमित शाह भारतीय जनता पार्टी 2027 में अपनी सरकार बनाने जा रही है. मैं पंजाब की माताओं-बहनों और बुजुर्गों से आशीर्वाद मांगने आया हूं. आप हमको आशीर्वाद दीजिए, हमारी ताकत बढ़ाइए. अगर पंजाब को नशे से कोई मुक्त कर सकता है, तो केवल और केवल नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी ही कर सकती है. पंजाब को नशे से मुक्त करवाना है, तो डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाना है. भारतीय जनता पार्टी पंजाब में सरकार बनाने के लिए जी जान लगा देगी।  सुखबीर सिंह बादल बोले- हर पार्टी को फैसला लेना का हक वहीं भारतीय जनता पार्टी के आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने के ऐलान के साथ ही पंजाब में सियासत गरमा गई है. शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा, 'मोस्ट वेलकम है. हर पार्टी को अपना फैसला लेने का हक है. हमारे लिए पंजाब पहले है और पंजाब के लोग पहले हैं। 

BJP की बड़ी कार्यशाला में निगम-मंडल नियुक्तियों की चर्चा, CM, प्रदेश अध्यक्ष और कई दिग्गज शामिल

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर में भाजपा के संगठनात्मक महाअभियान को लेकर आज एक बड़ी कार्यशाला आयोजित की जा रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण वर्ग के तहत जिला स्तर पर होने वाले प्रशिक्षण के लिए विषय वक्ताओं को तैयार करने का यह विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। इंदौर के डेली कॉलेज में आयोजित इस पश्चिम मध्य क्षेत्रीय कार्यशाला में देश और प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने भाग लिया। सत्र में भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला को अलग-अलग सत्रों में आयोजित किया गया है। इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा, दमन-दीव और दादरा एवं नगर हवेली सहित छह राज्यों के 348 से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। दरअसल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण वर्ग महाअभियान के तहत मंडल स्तर के प्रशिक्षण पहले ही पूरे किए जा चुके हैं और अब जिला स्तर के प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए विषय वक्ताओं को तैयार करने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है, ताकि संगठन को और अधिक मजबूत किया जा सके। प्रशिक्षण वर्ग को लेकर डेली कॉलेज में खास तैयारी की गई है। पूरे परिसर को भगवा रंग से सजाया गया है। प्रशिक्षण वर्ग में आने वाले सभी कार्यकर्ताओं के मोबाइल भी बाहर ही जमा कराए जा रहे हैं, जो पूरा प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद ही उन्हें वापस दिए जाएंगे।

महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य

एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हुआ इंडी एलाइंस सड़क पर निकलकर सपा व कांग्रेस का बैंड बजा रही हैं उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें: बृजेश पाठक महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य नारी अधिकारों का हनन करने के बाद खुशियां मनाना दर्शाता है कांग्रेस व सपा की मानसिकता: अरुण सिंह विपक्ष मोदी-विरोध में इतना अंधा हो गया कि हर अच्छी पहल का विरोध कर रहा है: पंकज चौधरी लखनऊ  नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के षड्यंत्र के विरोध में मंगलवार को लखनऊ में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यसभा सांसद अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी समेत हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभी ने एक सुर में कहा कि 17 अप्रैल को संसद में यह बिल पास होने वाला था, लेकिन कांग्रेस और सपा ने न सिर्फ इसका विरोध किया, बल्कि मतदान में इसे गिराने के बाद तालियां बजाकर खुशी मनाई। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया और कहा कि 2027 के चुनाव में इन दलों को महिला आक्रोश का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने तो यहां तक कहा कि इंडी एलाइंस अब एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हो चुका है। बिल के विरोध का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि आज प्रदेश की महिला शक्ति सड़कों पर है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की दुरभि संधि और संकीर्ण मानसिकता के कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में रोकने का काम किया गया है। आज उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें सड़क पर निकलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का बैंड बजाने का काम कर रही हैं। इन पार्टियों को आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार जब-जब प्रदेश में होती है, गुंडे-बदमाश खुलेआम बहन-बेटियों को परेशान करने का काम करते हैं। इसीलिए नारे लगते हैं, 'देख सपाई-बिटिया घबराई'। वक्त है कि सब एकजुट होकर सपा व कांग्रेस को महिला शक्ति का अहसास कराएं। मां दुर्गा, मां काली, मां सरस्वती बनकर विपक्षियों को सबक सिखाएं। महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे: केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ होना है। 2027 में बिना महिलाओं के कोई चुनाव जीत सकता है क्या? अगर महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को आने वाले चुनाव में कोई वोट नहीं मिलेगा। इसके लिए तैयार हो जाइए। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि हम हिम्मत नहीं हारेंगे। हम महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे। इसी संकल्प के साथ हमें यहां से जन आक्रोश मार्च निकालना है। सपा व कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेंगे राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि 17 अप्रैल के दिन देशभर की महिलाओं के मन में एक आकांक्षा थी कि आज जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर निर्णय होगा, तो वह हमारे पक्ष में होगा। वे उत्सव मनाएंगी, खुशियां मनाएंगी और यह दिन देश के इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। लेकिन कांग्रेस व सपा ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन का विरोध किया और उसके विरुद्ध मतदान किया। उन्होंने सिर्फ विरोध ही नहीं किया, बल्कि नारी अधिकारों का हनन करने के बाद तालियां भी बजाईं और खुशियां भी जाहिर कीं। यह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मानसिकता को दर्शाता है। उसी के कारण पूरे देश में जन आक्रोश है। इसीलिए इतनी बड़ी संख्या में आप लोग यहां एकत्र हुए हैं, यह बताने के लिए कि सपा व कांग्रेस को हम कभी माफ नहीं करेंगे। 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाई पंकज चौधरी ने कहा कि नारी का उत्थान व सम्मान, भाजपा की यही पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तीकरण के लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश की माताओं और बहनों को नेतृत्व का अधिकार देना था। ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं चुनाव लड़ सकें और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद सपा और कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। कुछ लोगों ने कहा कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत में भेद पैदा हो जाएगा। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं का आरक्षण भी होना चाहिए। हमारे नेताओं ने सदन में इन सभी आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया। विपक्षी दल जहां एक तरफ महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ नकाब और वोट बैंक के चक्कर में उन्होंने 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक महिलाओं के नाम पर 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाने का काम किया है।

नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को गिराने पर विपक्ष के खिलाफ भड़कीं महिलाएं

नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक गिराने वाले विपक्ष पर भड़कीं महिलाएं विपक्षी दलों पर महिलाओं का हक छीनने का आरोप लगाया क्या सिर्फ डिम्पल यादव को संसद जाने का हक है: बेबी रानी मौर्य लखनऊ  संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक गिरने के बाद उत्तर देश भर में विरोध देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश की महिलाएं भी इसे नारी विरोधी बता रहीं हैं। यह विधेयक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से जुड़ा था, ऐसे में विपक्ष पर महिलाओं का हक मारने का आरोप लग रहा है। विपक्षी दलों ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक को पारित नहीं होने दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में राजनीति से लेकर तमाम क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने इसे विपक्ष की चुनावी हार की शुरुआत बताया। भाजपा महिला नेताओं का कहना है कि सपा-कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष केवल अपने घर की महिलाओं को ही लोकसभा और विधानसभा में देखना चाहता है। ये सभी परिवारवाद से ग्रस्त हैं और विपक्ष को आगामी चुनावों में आधी आबादी का हक छीनने का नुकसान उठाना पड़ेगा। महिला नेताओं के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की महिलाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से विपक्ष घबराया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से आजादी मिली। कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी का महिला विरोधी चेहरा सामने आ गया है। आखिर अखिलेश यादव महिलाओं को संसद में क्यों नहीं देखना चाहते? क्या सिर्फ यादव परिवार की डिम्पल यादव को ही संसद में जाने का अधिकार है? क्या ये अधिकार देश और उत्तर प्रदेश की आम महिलाओं को नहीं मिलना चाहिए? बेबी रानी मौर्या, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार आज देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं, देश के कई उच्च पदों पर महिलाएं काम कर रहीं हैं और देश के विकास में अपना योगदान दे रहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के हित में जितना काम किया है, उतना इतिहास में कभी नहीं हुआ। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी निंदनीय कुप्रथा से आजादी मिली। अब जब देश की संसद में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी को सुनिश्चित करने का वक्ता आया तो विपक्ष ने अपना महिला विरोधी चेहरा दिखा दिया। विजय लक्ष्मी गौतम, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी ने जिस भारत का सपना देखा है और जिस पर वे लगातार काम कर रहे हैं, उसमे अड़ंगा लगाना जैसे विपक्ष का मूल व्यवहार बन गया है। समाजवादी पार्टी मुख्यमंत्री योगी की महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं से वैसे ही घबराई हुई है और ऐसे में अगर महिलाओं को आरक्षण मिलता है तो प्रधानमंत्री ने जिस सशक्त भारत का सपना देखा है, वह पूरा होता। इसे विपक्ष और अखिलेश यादव पूरा होते देखना नहीं चाहते। रजनी तिवारी, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार एक महिला के सशक्त होने से सिर्फ परिवार ही सशक्त नहीं होता बल्कि समाज सशक्त होता है, उसका चौमुखी विकास होता है। देश की संसद में महिलाओं का योगदान बढ़ेगा तो देश के विकास को अतुलनीय रफ्तार मिलेगी, ये भला अखिलेश यादव और विपक्ष को कैसे स्वीकार होगा? फिर इनके परिवारवाद का क्या होगा? इसीलिए ये लोग विरोध कर रहे हैं। अदिति सिंह, विधायक, भाजपा

BJP का बड़ा प्रदर्शन, महिला आरक्षण पर सड़क पर उतरी पार्टी; CM ने विपक्ष को नारी अपमान याद दिलाया

भोपाल   लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के विरोध में मध्य प्रदेश में सियासी माहौल गरमा गया है। अब इसकी गूंज सड़कों तक पहुंच गई है। राजधानी भोपाल में सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा की ओर से ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसमें भाग लेकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की। भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू हुई पदयात्रा रोशनपुरा चौराहे की ओर बढ़ी। इसमें छह विशेष रथ भी शामिल किए गए थे। महिलाओं के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस यात्रा में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पद यात्रा भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से लोक भवन होते हुए रोशनपुरा चौराहे पहुंची। यहां मुख्यमंत्री ने काले गुब्बारे उड़ाकर इसका समापन किया। इससे पहले हुई सभा में मुख्यमंत्री यादव ने कहा- नारी सब भूल सकती है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के अधिकार का बिल गिरने पर खुशियां मनाईं। जश्न मनाया। हम बहनों के अधिकार को कुचलने के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे।     मुख्यमंत्री ने कहा- प्रियंका गांधी बड़ी-बड़ी बातें करती थीं कि मैं नारी हूं, लड़ सकती हूं। लेकिन वह बड़ी-बड़ी बातें कहां गईं, जब आपने बहनों के अधिकारों को फांसी देने का काम किया। राहुल गांधी के पिताजी ने भी 40 साल पहले तीन तलाक लागू कर बहनों के अधिकारों पर डाका डाला था। यही कांग्रेस का अतीत है।     बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा- जब मौका लगे, तब बहनें अपना आक्रोश दिखाएं। कांग्रेस के नेताओं से पूछे कि बहनों को अपमानित करने का अधिकार आपको किसने दिया? कांग्रेसियों के घर जाकर पूछें कि जो बहन आपके घर की शोभा बढ़ाती है, जिस मां ने आपको जन्म दिया, उनके सपनों को चूर-चूर करने का हक किसने दिया?     बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने कहा- कांग्रेस के नेताओं ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम गिराकर जश्न मनाया, यह महिलाओं के अपमान का प्रतीक था। मातृ शक्ति इस अपमान का जवाब देगी। अब याचना नहीं, रण होगा।     पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह, अपनी बेटी अंजलि सिंह के साथ जन आक्रोश महिला पदयात्रा में शामिल हुई। उन्होंने कहा- आजादी के इतने सालों बाद भी हमें अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है। राहुल गांधी को शर्म आना चाहिए कि उन्होंने बहनों का साथ नहीं दिया।     मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा- कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं को हक देने का विरोध किया है। हम सड़कों पर उतरकर उसका विरोध कर रहे हैं।     सागर लोकसभा सीट से सांसद लता वानखेड़े ने कहा- ये केवल बिल नहीं, बल्कि महिलाओं के पंचायत से पार्लियामेंट तक पहुंचने का दरवाजा था, जिसे कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने बंद कर दिया। विपक्ष को महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो मंच पर महिलाओं की बात करके बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं। लेकिन इनकी सोच है कि महिलाएं सिर्फ भीड़ का हिस्सा रहें। तालियां बजाएं, नेतृत्व न करें। क्या है पूरा मामला? 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव था। लेकिन इसे पास कराने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिल पाया। इसी के विरोध में भाजपा ने इस मुद्दे को जन आंदोलन बनाने की रणनीति शुरू कर दी है। भाजपा का आरोप – महिलाओं के अधिकारों पर चोट प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस और विपक्ष पर महिलाओं के सपनों को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम हो रहा था, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि अब यह सवाल घर-घर तक पहुंचाया जाएगा कि महिलाओं के अधिकारों को रोकने का जिम्मेदार कौन है। सीएम मोहन यादव का सख्त संदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक पार्टी की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की है। उन्होंने कहा कि नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती। महिलाओं के अधिकारों के लिए सरकार ने पूरी कोशिश की, लेकिन बहुमत नहीं मिल सका। सीएम ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने देश की आधी आबादी के अधिकारों का सम्मान नहीं किया। सच सामने लाया जाएगा – भाजपा नेता कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। नगरीय निकायों में निंदा प्रस्ताव पारित कराने और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने की बात कही गई। नेताओं ने कहा कि विपक्ष के खिलाफ जनता के बीच जाकर सच सामने लाया जाएगा। महिला मोर्चा का ऐलान – अब याचना नहीं, रण होगा भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि विधेयक गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है और अब देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी। आंदोलन को देशभर में ले जाने की तैयारी भाजपा महिला मोर्चा इस पदयात्रा को एक बड़े आंदोलन की शुरुआत मान रही है। नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में इसे प्रदेश से बाहर देशभर में ले जाया जाएगा, ताकि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके।

बीजेपी अध्यक्ष ने शोकाकुल मां की मदद की, 1800 किमी दूर नेपाल तक पहुंचाई बेटे की पार्थिव देह

बैतूल मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में एक मार्मिक घटना घटी। यहां नेपाल के एक युवक की ट्रेन से गिरने से मौत हो गई। युवा बेटे के यूं अचानक दम तोड़ देने से मां का तो कलेजा फट पड़ा। वे मृत बेटे को नेपाल ले जाकर वहीं अंतिम संस्कार करना चाहती थीं पर इतने पैसे ही नहीं थे। स्थानीय विधायक और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने शोकाकुल मां की यह इच्छा तुरंत पूरी कर दी। बीजेपी अध्यक्ष ने एंबुलैंस से युवक की पार्थिव देह नेपाल भेजने की व्यवस्था की ​और इसका पूरा खर्च खुद वहन किया। नेपाल के परिवार के साथ 16 अप्रैल को यह दुखद हादसा हुआ था। वहां के रमेश दमाई दुर्घटना का शिकार हो गए। नेपाल के कंचनपुर जिले के भीमदत्त के रहनेवाले रमेश अपने परिवार सहित यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान बैतूल जिले के गंज थाना क्षेत्र में वे चलती ट्रेन से गिर गए। बाजपुर- मलकापुर के पास गिरे रमेश दमाई की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ से टूट पड़ा। परिवार के पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वे युवक का शव नेपाल ले जा सकें कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 29 वर्षीय रमेश दमाई के अंतिम संस्कार का सवाल उठा। दुखद घटना के बाद परिवार पहले से ही शोकग्रस्त था, ऐसे में स्थानीय लोगों ने अंतिम संस्कार बैतूल में ही करने का सुझाव दिया लेकिन मृतक की मां इसपर सहमत नहीं थीं। वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार अपने देश यानि नेपाल में ही करना चाहती थीं। हालांकि इसमें बड़ी अड़चन थी। परिवार के पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वे युवक का शव नेपाल ले जा सकें। आर्थिक तंगी के कारण रमेश दमाई के पार्थिव शरीर को उनके देश ले जाना संभव नहीं हो पा रहा था। एक सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल को इसकी सूचना मिली। शोकाकुल मां की सहायता के लिए वे तुरंत आगे आए। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विधायक हेमंत खंडेलवाल ने मां की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए उनके बेटे की पार्थिव देह को बैतूल से नेपाल तक पहुंचाने की व्यवस्था कर दी। कंचननगर तक पार्थिव देह को सुरक्षित पहुंचाने का पूरा खर्च बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विधायक हेमंत खंडेलवाल ने ही उठाया स्वर्गीय रमेश दमाई की पार्थिव देह को एंबुलेंस से नेपाल पहुंचाने का निर्णय लिया गया। शनिवार शाम एंबुलेंस शव लेकर नेपाल के लिए रवाना हुई। बैतूल से लगभग 1800 किलोमीटर दूर नेपाल के कंचननगर तक पार्थिव देह को सुरक्षित पहुंचाने का पूरा खर्च बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विधायक हेमंत खंडेलवाल ने ही उठाया। उनकी इस पहल को मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनुपम उदाहरण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है विधायक हेमंत खंडेलवाल द्वारा विजय सेवा न्यास के माध्यम से बैतूल में 'शांति वाहन' सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत जरूरतमंद परिवारों को पार्थिव देह घर तक पहुंचाने की नि:शुल्क सुविधा दी जाती है। जिले में यह सेवा लंबे समय से निरंतर जारी है।

BJP चुनावी मोड में, MP की 70 कमजोर सीटों पर मंत्रियों की तैनाती, रणनीति में बड़ा बदलाव

भोपाल मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी अभी से सक्रिय हो गई है। पार्टी ने साल 2026 में ही खुद की मजबूती और मैदानी रणनीती के लिए काम करना शुरु कर दिया है।दरअसल विधानसभा की सभी 230 सीटें जीतने का लक्ष्य तय करके भाजपा ने मिशन 2028 के लिए रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत भाजपा कमजोर सीटों पर सबसे अधिक फोकस करने वाली है।  रणनीति के तहत करीब 70 सीटों को चिह्नित करके भाजपा ने जहां संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ा दिया है, वहीं यहां मंत्रियों को भी मैदान में उतारने की फैसला भाजपा ने कर लिया है। कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी मंत्रियों पर जानकारी के मुताबिक पार्टी की रणनीति कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की है और इसके लिए मंत्रियों को जिम्मा सौंप दिया है। मंत्रियों को लगातार वहां पर रात बिताने के साथ ही बैठकें करने का निर्देश दिया गया है।साथ ही  हार के कारणों को तलाशने का भी जिम्मा सौंपा गया है। भाजपा इस काम में निकाय और त्रि स्तरीय पंचायती राज चुनावों से पहले ही जुट गई है। इस काम के लिए भाजपा ने प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग प्रभारी एवं जिला प्रभारियों को टाइम लाइन थमा दी गई है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जनता व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने की बात कही गई है।  पार्टी की  नई गाइडलाइन के तहत प्रदेशाध्यक्ष से लेकर दिग्गज नेताओं को महीने भर का शैड्यूल समझा दिया गया है। बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। वहीं अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।भाजपा की नई रणनीति को लेकर पार्टी मुख्यालय में संभाग और जिला प्रभारियों की बैठक में टारगेट सेट किए गए हैं। लिहाजा इस लक्ष्य की प्राप्ति को हासिल करने के लिए सबको सामूहिक जिम्मेदारी और धरातल पर काम करने के लिए कहा गया है।

प्रदेश भाजपा में नए बदलाव, बैठकों और दौरों के लिए सख्त समयसीमा, पार्टी करेगी टिफिन मीटिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश में बीजेपी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए पहली बार बैठकों और प्रवास के लिए सख्त टाइमलाइन तय की है। अब प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर तक हर कार्यकर्ता को महीने भर की गतिविधियों का स्पष्ट शेड्यूल मिलेगा। पहले 10 दिन: दौरे और जिला बैठकें नई कार्ययोजना के तहत प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और वरिष्ठ नेता महीने के शुरुआती 10 दिनों में मैदानी दौरों और जिला स्तरीय बैठकों पर फोकस करेंगे। इसका उद्देश्य संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। पहला सप्ताह: मंडल स्तर पर फोकस (1–7 तारीख) महीने के पहले सप्ताह में मंडल स्तर की बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि मंडल और वार्ड स्तर तक समन्वय मजबूत हो सके। दूसरा सप्ताह: जिला स्तर की बैठकें (7–10 तारीख) दूसरे चरण में जिला मुख्यालयों पर बैठकें होंगी। संभाग प्रभारी, जिला प्रभारी और जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में योजनाओं की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी। तीसरा सप्ताह: प्रदेश बैठकें और प्रवास (11–20 तारीख) महीने के मध्य में प्रदेश स्तरीय बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के प्रवास का आयोजन होगा। 15 से 20 तारीख के बीच महत्वपूर्ण बैठकें होंगी, जबकि मोर्चा अध्यक्ष अलग-अलग संभागों का दौरा कर जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे। चौथा सप्ताह: मंडल और शक्ति केंद्र बैठकें (21–25 तारीख) इस दौरान मंडल अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रभारी और बूथ अध्यक्षों की बैठकें होंगी। इनमें ‘मन की बात’ कार्यक्रम और बूथ स्तर की रणनीति तय की जाएगी। प्रदेश स्तरीय बैठक और वरिष्ठ नेताओं के दौरे महीने के बीच का समय अब प्रदेश स्तरीय बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के दौरे के लिए रखा गया है। हर महीने 15 से 20 तारीख के बीच प्रदेश पदाधिकारी, संभाग प्रभारी और जिला प्रभारी की अहम बैठकें होंगी। इसी दौरान 11 से 20 तारीख के बीच मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष अलग-अलग संभागों का दौरा करेंगे। यह तय किया गया है कि, सभी मोर्चा अध्यक्ष एक ही जगह पर न रुककर अलग-अलग इलाकों में जाकर संगठन के कामों की समीक्षा करेंगे। मन की बात कार्यक्रम महीने के चौथे हफ्ते में अब विशेष इकाइयों और शक्ति केंद्रों पर ध्यान दिया जाएगा। 21 से 25 तारीख के बीच मंडल अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रभारी और बूथ अध्यक्षों की बैठकें होंगी। इस दौरान खास तौर पर अगले रविवार को होने वाले पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम और बूथ समिति की बैठक का एजेंडा तय किया जाएगा। ये बैठकें हर महीने दो महीने के रोटेशन के आधार पर 50% मंडलों में आयोजित की जाएंगी। अंतिम सप्ताह (23 से 30 तारीख): टिफिन बैठक महीने के अंतिम चरण में कार्यकर्ताओं के बीच आपसी सामंजस्य और एकता बढ़ाने के लिए अनोखी ‘टिफिन बैठक’ का आयोजन किया जाएगा। शक्ति केंद्र टोली की बैठक के बाद 23 से 30 तारीख के बीच यह बैठक अनिवार्य रूप से होगी। इसके साथ ही, महीने के आखिरी रविवार को बूथ स्तर पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें बूथ की 11 सदस्यीय टीम के साथ स्थानीय वरिष्ठ कार्यकर्ता और प्रमुख मतदाताओं को भी शामिल किया जाएगा।