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BRICS समिट के लिए भारत पहुंचेंगे शी जिनपिंग, 7 साल बाद होगा चीन के राष्ट्रपति का दौरा

 नई दिल्ली चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं. बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय यानी MFA की ओर से आज उनके भारत दौरे का आधिकारिक ऐलान किए जाने की उम्मीद है. राष्ट्रपति शी का शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंच सकते हैं. शाम करीब छह बजे भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात हो सकती है।  BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है. यह बैठक भारत-चीन रिश्तों के लिहाज से अहम मानी जा रही है।  खास बात यह है कि मोदी और शी जिनपिंग की भारतीय जमीन पर करीब 7 साल बाद पहली द्विपक्षीय मुलाकात होगी. यह बैठक गलवान झड़पों के बाद भी दोनों नेताओं की भारत में पहली द्विपक्षीय बैठक होगी।  भारत में 12-13 सितंबर को होगा BRICS समिट भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसकी थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखी गई है।  सम्मेलन में सदस्य और पार्टनर देशों के नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ BRICS के बीच राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय और लोगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. 2026 में BRICS की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं।  NSG कमांडो समेत 25000 जवान होंगे तैनात; जानें 11 बड़े सुरक्षा इंतजाम  18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली को अभेद्य सुरक्षा घेरे में तब्दील किया जा रहा है। इस सम्मेलन में शिरकत करने 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि आ रहे हैं। इनमें दो नाम बेहद अहम माने जा रहे हैं- पहला, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और दूसरा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। इनके आने की भी संभावना है। तीन दिवसीय BRICS समिट 11 सितंबर से शुरू होगा। सुरक्षा व्यवस्था का स्तर 2023 में हुए G20 शिखर सम्मेलन के करीब रखा जा रहा है। दिल्ली पुलिस की सुरक्षा यूनिट ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर व्यापक सुरक्षा प्लान तैयार किया है। करीब 25000 जवानों को तैनात किया जाएगा। इसमें 100 से अधिक NSG कमांडो भी शामिल होंगे। एंटी-ड्रोन सिस्टम और लगातार मॉक ड्रिल के जरिए दिल्ली में जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।आइए जानते हैं BRICS समिट के लिए दिल्ली में किए जा रहे 11 बड़े सुरक्षा इंतजाम…     25000 जवान संभालेंगे सुरक्षा की कमान BRICS समिट के दौरान दिल्ली में करीब 25000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है। दिल्ली पुलिस के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होंगे।     100 से ज्यादा NSG कमांडो तैनात VVIP सुरक्षा को देखते हुए 100 से अधिक NSG कमांडो भी तैनात किए जा रहे हैं। भारत मंडपम समेत संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार खतरे का आकलन करेंगी।     आसमान पर एंटी-ड्रोन सिस्टम से नजर समिट के दौरान ड्रोन और अन्य फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स से हर हवा में मौजूद खतरों पर निगरानी की जाएगी। संभावित खतरे को देखते हुए एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जाएंगे।     भारत मंडपम से होटलों तक हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर समिट का मुख्य आयोजन स्थल भारत मंडपम होगा। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और मेहमानों के ठहरने वाले होटलों से भारत मंडपम तक के पूरे रूट को हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर के तौर पर तैयार किया जा रहा है। करीब 30 DCP रैंक के अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।     10 होटलों पर विशेष सुरक्षा विदेशी मेहमानों और प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े 10 होटल सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होंगे। इन होटलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।     VVIP काफिलों की बार-बार मॉक ड्रिल सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए दिल्ली पुलिस, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियां लगातार मॉक ड्रिल कर रही हैं। VVIP मोटरकेड की आवाजाही का 12 प्रमुख स्थानों पर अभ्यास किया जा रहा है, ताकि वास्तविक मूवमेंट के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।     22 डायवर्जन पॉइंट, 4800 ट्रैफिक पुलिसकर्मी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के काफिलों की आवाजाही के दौरान ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। करीब 4,800 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। VVIP मूवमेंट के दौरान आम लोगों को ट्रैफिक संबंधी दिक्कतों से बचाने के लिए रूट डायवर्जन किए जाएंगे।     मोटरकेड की गाड़ियों में GPS VVIP काफिले में शामिल वाहनों को GPS से लैस किया जा रहा है। इससे सुरक्षा एजेंसियां मोटरकेड में शामिल वाहनों की स्थिति को रियल टाइम में मॉनिटर कर सकेंगी। एयरपोर्ट, होटल और भारत मंडपम के बीच होने वाली आवाजाही पर विशेष नजर रहेगी।     एंटी-सैबोटाज और बम निरोधक दस्ते सक्रिय भारत मंडपम, होटल और VVIP रूट पर एंटी-सैबोटाज टीम तथा बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड सुरक्षा जांच कर रहे हैं। संवेदनशील स्थानों की जांच और संदिग्ध वस्तुओं या गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें तैनात रहेंगी।     दिल्ली ही नहीं, पड़ोसी राज्यों तक सुरक्षा ग्रिड BRICS की सुरक्षा व्यवस्था को दिल्ली की सीमाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। दिल्ली पुलिस हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ की पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के साथ काम कर रही है। संदिग्ध लोगों और वाहनों की जांच, सीमा पर निगरानी और खुफिया सूचनाओं को तेजी से साझा करने के लिए साझा सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है।     खाकी वर्दी में दिखेंगे CAPF जवान BRICS ड्यूटी में लगाए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। BSF, ITBP और CRPF समेत CAPF के जवानों को खाकी वर्दी पहनने की सलाह दी गई है। पुतिन और शी जिनपिंग जैसे हाई-प्रोफाइल नेताओं के संभावित दौरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए जमीन, सड़क और आसमान- तीनों स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही हैं। आखिरी बार अक्टूबर 2019 में शी जिनपिंग आए थे भारत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा 11-12 अक्टूबर 2019 को हुई … Read more

डॉलर को चुनौती दे रहा BRICS, 90% व्यापार अब सदस्य देशों की अपनी करेंसी में; क्या बदल रही है ग्लोबल इकॉनमी?

 नई दिल्ली रूस ने BRICS में भारत की अध्यक्षता और उसके दौरान हुए नतीजों की तारीफ की है. रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस के 90 फीसदी भुगतान नेशनल करेंसी यानी संबंधित देशों की अपनी मुद्रा में हो रहे हैं।  पेस्कोव ने कहा कि इसका मकसद डीडॉलराइजेशन नहीं है, बल्कि भुगतान के तरीकों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश अपनी नेशनल करेंसी का इस्तेमाल विदेश नीति के एक टूल के तौर पर कर रहे हैं।  BRICS में बढ़ रहा सहयोग पेस्कोव ने कहा कि BRICS में सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम हो रहा है, जिनमें मानवीय सहयोग और आर्थिक सहयोग शामिल हैं. उन्होंने कहा कि रूस BRICS की सदस्यता का विस्तार करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।  इसके साथ ही BRICS सुरक्षा के मोर्चे पर भी सहयोग का मैकेनिज्म विकसित कर रहा है. इसमें ड्रग्स और नशीले पदार्थों से निपटने के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग शामिल है. BRICS देशों के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है।  भारत को बताया रणनीतिक साझेदार भारत को लेकर पेस्कोव ने कहा कि भारत रूस का रणनीतिक साझेदार है और दोनों देश अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत के साथ भी ज्यादातर भुगतान नेशनल करेंसी में किए जा रहे हैं।  यूक्रेन जंग को लेकर पेस्कोव ने कहा कि रूस इसे रोकने की कोशिश कर रहा है और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है. उन्होंने 2014 की घटनाओं का जिक्र करते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों पर रूस को हटाने के लिए तख्तापलट की साजिश का आरोप लगाया।  पेस्कोव ने कहा कि रूस शांति के लिए भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करता है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जंग खत्म कराने की कोशिशों का भी स्वागत किया. हालांकि, पेस्कोव ने आरोप लगाया कि कुछ यूरोपीय देश यूक्रेन को रूस की रणनीतिक हार के लिए उकसा रहे हैं. उन्होंने कहा कि रूस ऐसा होने नहीं देगा। 

BRICS समिट के लिए सजेगी दिल्ली, 12 सितंबर से भारत मंडपम में जुटेंगे वैश्विक नेता

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है. ब्रिक्स की अध्यक्षता इस साल भारत कर रहा है और अध्यक्ष के नाते इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी भी भारत की है. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होना है।  इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ ही कई अन्य कद्दावर भी नई दिल्ली में होंगे. इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली आ सकते हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत आ सकते हैं।  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें शामिल होने भारत आ सकते हैं. विदेश मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे. साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों और कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों को भी आउटरीच के तहत इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है।  नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब संगठन के 20 साल पूरे हो रहे हैं. ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अनौपचारिक तौर पर ब्रिक समूह की नींव रखी थी. हालांकि, इसकी औपचारिक स्थापना साल 2009 में हुई थी।  तब 16 जून को रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में ब्रिक समूह का औपचारिक गठन किया गया था. ब्रिक का पहला शिखर सम्मेलन भी तभी हुआ था. ब्रिक का पहला शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में ही हुआ था. साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी इस समूह में शामिल हो गया और इसके बाद ब्रिक संगठन ब्रिक्स हो गया था।  ब्रिक्स में इस समय भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ ही मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया सदस्य देश हैं. साझेदार देशों की भी एक अलग कैटेगरी है. इस कैटेगरी में 10 देश शामिल हैं। 

BRICS समिट में जिनपिंग की मौजूदगी तय, बांग्लादेशी PM का दौरा रद्द; सुरक्षा तैयारियां तेज

नई दिल्ली  भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं। जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है। बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है। तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

Delhi Holiday: BRICS समिट के कारण 11 सितंबर को सरकारी कार्यालयों में अवकाश, जानें क्या-क्या रहेगा बंद

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में होने जा रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. इस फैसले से दिल्ली के लोगों को लगातार तीन दिनों का लंबा वीकेंड मिलने की संभावना है. सरकार का कहना है कि सम्मेलन के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।  सभी सरकारी कार्यालयों में रहेगा अवकाश दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (को-ऑर्डिनेशन ब्रांच) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सभी सरकारी कार्यालयों, स्वायत्त निकायों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 11 सितंबर को अवकाश घोषित किया है. इस दिन इन संस्थानों में नियमित कामकाज नहीं होगा।  BRICS सम्मेलन के कारण लिया गया निर्णय सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि BRICS शिखर सम्मेलन के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए यह अवकाश घोषित किया गया है. सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।  ऐसे में राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक तैयारियों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सम्मेलन के दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. सुरक्षा एजेंसियां बड़े स्तर पर तैनात रहेंगी और कुछ मार्गों पर विशेष प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं. इस वजह से आम लोगों को यात्रा की योजना पहले से बनाकर चलने की सलाह दी जा रही है। 

विदेशी प्रतिनिधियों ने देखा इंदौर का ऐतिहासिक वैभव, BRICS सम्मेलन के दौरान होलकर इतिहास से हुए रूबरू

इंदौर  इंदौर में चल रहे ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भाग लेने आए अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों के लिए बुधवार की सुबह कुछ खास थी। उनके लिए एक बार फिर शहर के ऐतिहासिक स्थलों का इतिहास जीवंत किया गया। राजवाड़ा पैलेस में पुराने समय में लगने वाले दरबार की तरह हरकारों की गूंज सुनाई दी और शास्त्रीय संगीत की स्वर-लहरियां गूंजीं।  ब्रिक्स सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उनके लिए सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। पहले यह वॉक बोलिया सरकार छत्री से होना थी, लेकिन उसके बजाय मेहमान साढ़े छह बजे सीधे राजवाड़ा पहुंचे। यहां उनके लिए गोल मेज लगाई गई थी। गोपाल मंदिर की सुंदरता देख मेहमान हुए मुग्ध इतिहासकार जफर अंसारी ने इंदौर की महारानी देवी अहिल्या के शासनकाल के अलावा होलकरकाल से जुड़े इतिहास के तथ्य बताए। राजवाड़ा में जब दरबार लगता था, तब दूसरे राज्यों के राजाओं को किस तरह हरकारा देकर सम्मानित किया जाता था, इसकी प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद राजवाड़ा पर संगीत और नृत्य की प्रस्तुति भी कलाकारों ने दी। इसके बाद मेहमान गोपाल मंदिर पहुंचे और पहली मंजिल पर लकड़ी के नक्काशीदार भवनों को निहारा। लिया इंदौरी व्यंजनों का स्वाद हेरिटेज वॉक में शामिल मेहमानों के लिए इंदौरी नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। स्टॉल पर रखे गए पोहे, जलेबी के साथ मेहमानों ने चाय-कॉफी का लुत्फ भी लिया। करीब डेढ़ घंटे तक हेरिटेज वॉक में शामिल होने के बाद मेहमान होटल के लिए रवाना हो गए। चखे आम, लोक नृत्यों पर थिरके मेहमान हेरिटेज वाॅक के बाद विदेशी मेहमान ग्रामीण हाट पहुंचे। यहां उन्होंने जैविक खेती के उत्पादों को देखा और स्टाॅल पर आमों का स्वाद भी चखा। इंडोनेशिया से आई रीना सुप्रिहाती ने आदिवासी गीत पर नृत्य भी किया।

BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा इंदौर, कृषि क्षेत्र के मुद्दों पर जुटेंगे 20 देशों के प्रतिनिधि

इंदौर  मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक बेहद बड़े और प्रतिष्ठित आयोजन का मुख्य केंद्र बनने जा रही है। जी-20 शिखर सम्मेलन और प्रवासी भारतीय दिवस की शानदार सफलता के बाद अब इस साफ-सुथरे शहर को 'ब्रिक्स' (BRICS) देशों की बेहद महत्वपूर्ण कृषि बैठक की मेजबानी करने का गौरव मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय समागम में भारत सहित दुनिया के 11 प्रमुख सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और केंद्रीय मंत्री शामिल होने जा रहे हैं। आपको बता दें कि यह आयोजन इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि ब्रिक्स देशों के पास पूरी दुनिया की करीब 42 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि मौजूद है। ऐसे में यह शक्तिशाली समूह खेती-किसानी से जुड़ी वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श करेगा। सोमवार से ही विदेशी मेहमानों और राजनयिकों का इंदौर आगमन शुरू हो जाएगा। बैठक के साथ-साथ इन विदेशी प्रतिनिधियों को मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से रूबरू कराने की भी विशेष तैयारी की गई है। इसके तहत उनके भ्रमण कार्यक्रम में इंदौर के मशहूर खान-पान केंद्र 'छप्पन दुकान', ऐतिहासिक 'राजवाड़ा पैलेस' और पारंपरिक 'ग्रामीण हाट-बाजार' जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थलों को शामिल किया गया है। यह महा-मंथन एक ऐसे नाजुक समय में होने जा रहा है जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज), वैश्विक खाद्य संकट और तेजी से बढ़ती आबादी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच पर पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए कृषि उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर व सीमित उपयोग पर जो भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे, वे आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि रणनीतियों और नीतियों को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। तकनीक, डिजिटल खेती और किसानों की आय पर रहेगा मुख्य फोकस आगामीआज 9 जून से शुरू होने जा रही ब्रिक्स कृषि कार्य समूह (AWG) की इस तीन दिवसीय बैठक में कई तकनीकी और नीतिगत विषयों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना, बदलते मौसम का फसलों पर पड़ने वाला असर, कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का विस्तार और किसानों की आर्थिक स्थिति व आय को मजबूत करने के उपाय इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल रहेंगे। बदलते दौर को देखते हुए इस बैठक में पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक विषयों पर विशेष मंथन किया जाएगा। इसके तहत डिजिटल कृषि (डिजिटल एग्रीकल्चर), प्रिसिजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा आधारित फसल प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर बात होगी। वैज्ञानिक और नीति-निर्धारक यह साझा रणनीति तैयार करेंगे कि किस तरह इन तकनीकों के दम पर कम से कम संसाधनों, कम पानी और कम लागत में अधिक से अधिक पैदावार हासिल की जा सके। इसके अलावा, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान के बीच खेती को टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और घाटे से उबारकर लाभकारी बनाने के लिए सभी सदस्य देश अपने-अपने सफल अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। ब्रिक्स समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएं  1. खाद्य सुरक्षा, पोषण-किसानों की आजीविका 2. कृषि व्यापार और आपसी सहयोग 3. जलवायु अनुकूल और सतत कृषि 4. नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी  42 फीसदी खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा- ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ यह विश्व के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बन गया है। वैश्विक नजरिए से यह समूह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की लगभग 42 फीसदी कृषि भूमि, 68  प्रतिशत कृषि और करीब 42 फीसदी खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास है। अधिकारियों ने अब तक आठ बैठकें की संवाददाताओं से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी हर नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । भारत की अध्यक्षता में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 सत्रों में 8 सफल बैठकें होंगी। चार वर्गों पर मुख्य फोकस छोटे और सीमांत किसान हमारी हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे। कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषयों-खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी को सशक्त बनाने पर विशेष काम किया जा रहा है। भारत पहले भी तीन सम्मेलनों की अध्यक्षता कर चुका इस मंच पर होने वाला सहयोग पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है । भारत इससे पहले भी साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है, जिसके दौरान 2016 में 'ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच' जैसी बड़ी पहल शुरू की गई थी। 'हमारी नीति में छोटे जोत वाले किसान' शिवराज सिंह चौहान ने कहा अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी प्रत्येक नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इस बार इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत … Read more

जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक काशी में आयोजित होने जा रही

वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक 4 और 5 जून को    जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक काशी में आयोजित होने जा रही योगी सरकार में वैश्विक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है उत्तर प्रदेश   ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक से वैश्विक मंच पर चमकेगी काशी की कला और संस्कृति बैठक के दौरान काशी के विश्व प्रसिद्ध जीआई टैग एवं ओडीओपी उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी लगेगी  इस बैठक में देश-विदेश के वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक विशेषज्ञ एवं विशिष्ट प्रतिनिधि भाग लेंगे वाराणसी,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र एवं विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद अब 4 और 5 जून को वाराणसी में ब्रिक्स (BRICS) संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक आयोजित होने जा रही है। 4 -5 जून को ताज होटल में प्रस्तावित इस बैठक में देश-विदेश के वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक विशेषज्ञ एवं विशिष्ट प्रतिनिधि भाग लेंगे।  योगी सरकार में उत्तर प्रदेश आज वैश्विक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन विकास, स्थानीय उत्पादों के संवर्धन और रोजगार सृजन के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है कि काशी को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। बैठक के दौरान काशी के विश्व प्रसिद्ध जीआई टैग एवं ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में वाराणसी की समृद्ध शिल्प परंपरा के 6 शिल्पियों के 6 विशिष्ट उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। ये सभी उत्पाद काशी की सदियों पुरानी कला, शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। प्रदर्शनी के माध्यम से विदेशी प्रतिनिधियों को न केवल इन उत्पादों की विशिष्टता से परिचित कराया जाएगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों के संरक्षण, विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की हैं। इन प्रयासों से हजारों शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को नई पहचान एवं रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। काशी के हस्तशिल्प उत्पाद आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों में अपनी विशेष पहचान बना रहे हैं। ब्रिक्स के सदस्य देश   ब्राजील ,चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान,रूस, सऊदी अरब ,दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ।  प्रदर्शित होने वाले प्रस्तावित जीआई और ओडीओपी उत्पादों के नाम वुडेन लेकर वेयर एंड टॉयज बनारस गुलाबी मीनाकारी क्राफ़्ट  बनारस ब्रोकेड एण्ड साड़ी वाराणसी सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क वाराणसी वुडेन लेकर वेयर एंड टॉयज बनारस मेटल रिपोजी क्राफ्ट बनारस ग्लास बीड्स   ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय कलाकारों और उद्यमियों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है। विदेशी प्रतिनिधियों के समक्ष सीधे अपने उत्पादों का प्रदर्शन होने से निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और काशी के पारंपरिक शिल्प को नई वैश्विक पहचान प्राप्त होगी।     पद्मश्री रजनीकांत  जीआई ,विशेषज्ञ  अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से बड़ा मंच मिलता है, ब्रिक्स में हैंडीक्राफ्ट के प्रदर्शन से शिल्पियों के हाथ के हुनर को लोकल से ग्लोबल मार्केट  मिलेगा।   रामेश्वर सिंह  नेशनल अवार्डी  वाराणसी वुडेन लेकर एंड टॉयज  मोदी जी और योगी जी खुद जीआई एवं ओडीओपी उत्पादों के ब्रांड अंबेसडर हैं। जिन्होंने प्रदेश के हस्तशिल्प को नई पहचान देते हुए  प्राचीन मरती हुई कला को जीवित कर दिया है। इस प्रदर्शनी से वाराणसी के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का प्रचार प्रसार होगा, देश-विदेश से आए विशिष्ट मेहमान काशी की इस कला से परिचित होंगे और हैंडीक्राफ्ट की बारीकियों को जानेंगे। इस मंच से ऑर्डर मिलेंगे की संभावनाएं बढ़ेंगी। कुञ्ज बिहारी  नेशनल अवार्डी, गुलाबी मीनाकारी  देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर रखने का मौका मिल रहा है, ऐसे अवसर देश की विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मौका देते हैं।  दुर्गा प्रसाद पटेल  आर्टिजन ग्लास बिड्स

BRICS सम्मेलन में भारत का ग्लोबल दम, मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजरें

नई दिल्ली दुनिया बहुत जल्द दिल्ली की धमक देखने वाली है. भारत में ब्रिक्स के मंच से नया वर्ल्ड ऑर्डर दिखेगा. पश्चिम एशिया तनाव के बीच एक ही मंच पर दुनिया की सबसे मजबूत तिकड़ी दिखेगी. जी हां, हम बात कर रहे हैं पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की. सितंबर महीने में ब्रिक्स समिट होने वाली है. यह ब्रिक्स समिट नई दिल्ली में होगी. इस ब्रिक्स समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो फिर दुनिया को ब्रिक्स के मंच से नया मैसेज जाएगा. ब्रिक्स के मंच से एक नया गठजोड़ आकार लेगा।  रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा कन्फर्म है. खुद रूसी साइड ने भी इसकी घोषणा कि है कि पुतिन सितंबर में ब्रिक्स समिट में शामिल होंगे. अब तक शी जिनपिंग को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं है. हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस का दावा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में शामिल होंगे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं।  शी जिनपिंग आएंगे भारत! सूत्रों की मानें तो रूस और चीन की ओर से नई दिल्ली को सूचित किया गया है कि उनके नेता इस सम्मेलन में आने की संभावना है. रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने व्लादिमीर पुतिन की ब्रिक्स समिट में उपस्थिति की पुष्टि की है. वह 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी SCO सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है।  क्यों अहम है जिनपिंग का भारत दौरा अगर शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट में आते हैं तो यह बड़ी खबर होगी. दुनिया के लिए भी एक मैसेज होगा. अमेरिका के कान खड़े हो जाएंगे. वैसे भी डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स से बहुत जलते हैं. वह ब्रिक्स को मजबूत होता नहीं देखना चाहते. वह ब्रिक्स की ताकत से डरते हैं. वह ब्रिक्स को लेकर काफी जहर उगल चुके हैं. ऐसे में अगर ब्रिक्स के मंच से पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की तिकड़ी दिखती है तो पूरी दुनिया में खलबली मचेगी।  अब सुधरने लगे रिश्ते वैसे भी चीन और भारत के जिस तरह से रिश्ते उठा-पटक वाले रहे हैं, ऐसे में शी जिनपिंग का ब्रिक्स समिट में शामिल होना, बड़ी बात होगी. सबसे अधिक चर्चा जिनपिंग के भारत दौरे की ही होगी. शी जिनपिंग का अक्टूबर 2019 के बाद भारत का पहला दौरा होगा. 2019 में जब वह भारत आए थे, तब वह चेन्नई के पास मामल्लापुरम में पीएम मोदी से मिले थे. हालांकि, भारत और चीन के बीच रिश्ते अप्रैल-मई 2020 में सीमा पर गतिरोध शुरू होने के बाद बिगड़ गए थे. गलवान संघर्ष ने दोनों देशों के बीच दूरी और बढ़ा दी. हालांकि, संबंधों को स्थिर करने की प्रक्रिया अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान हुई थी. तब पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उसी समय दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की वापसी पूरी करने का फैसला किया था।  भारत-चीन रिश्तों में सुधार     पिछले डेढ़ साल में भारत और चीन ने संबंधों को स्थिर करने में काफी प्रगति की है. इसमें सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा जारी करना, चीनी कंपनियों पर लगी पाबंदियों में ढील और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली शामिल है।      हालांकि, एलएसी पर अभी भी 50,000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं. सैनिकों की वापसी और तनाव कम करने की प्रक्रिया अब भी जारी है।      पिछले हफ्ते ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी. उसी में चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे की पटकथा लिखी गई है।   

ब्रिक्स समिट में मतभेद, 60 एजेंडों पर सहमति लेकिन ईरान मुद्दे पर विवाद

नई दिल्ली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेश मंत्रियों के बीच ईरान के मसले को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन सकी। ऐसी स्थिति में साझा बयान जारी नहीं किया गया। इसकी बजाय एक आउटकम स्टेटमेंट ही जारी किया गया है। जानकारी मिली है कि ईरान के मसले पर भले ही ब्रिक्स देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन सकी, लेकिन कुल 60 एजेंडों पर सभी ने विचार साझा किए। सभी देशों के इन एजेंडों पर एक जैसे विचार रहे। इन एजेंडों में ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट ऐक्शन, फाइनेंशियल कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रियों की इस समिट में ईरान के मसले को लेकर मतभेद हो गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिक्स देशों से मांग की कि वे बयान में ईरान और इजरायल के हमलों की निंदा करें। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों ने ईरान पर जो हमले किए, वह गलत थे और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ थे। लेकिन ज्यादातर इस पर सहमत नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि भारत समेत ज्यादातर देश चाहते थे कि ईरान के साथ ही अमेरिका और इजरायल के साथ भी संतुलन बनाकर रखा जाए। इसी को लेकर मीटिंग में मतभेद पैदा हो गए और अंत में साझा बयान जारी न करने पर ही सहमति बनी। गुरुवार को इस समिट की शुरुआत हुई थी। अपने शुरुआती भाषण में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोले जाने की वकालत की थी। उनका कहना था कि समुद्र में संचालन सुरक्षित और निरंतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जंग में अंतरराष्ट्रीय सीमा के तहत आने वाले समुद्री क्षेत्र में किसी तरह की बंदी नहीं होनी चाहिए। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपील करते हुए कहा कि आप सभी अमेरिका और इजरायल की ओर से हमारे ऊपर हमले की निंदा करें। इस पर सहमति ही नहीं बन पाई। कुछ देश इसके लिए तैयार थे, लेकिन कुछ मुल्कों ने इस पर सहमति नहीं जताई। जयशंकर और अराघची के बीच समिट से इतर क्या हुई बात ब्रिक्स समिट के इतर जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के बीच बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने इजराय और ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर बात की। वहीं जयशंकर ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही होने देने की मांग की। एस. जयशंकर ने कहा कि हमने दोनों देशों के हितों को लेकर बात की। हमारी इस बात को लेकर सहमति है कि जरूरी मुद्दों को बातचीत से हल किया जाए। हमारी क्षेत्रीय स्थिरता और हालातों को लेकर भी बात हुई।