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व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने और नए मौके तलाशने कनाडा का ट्रेड मिशन भारत आएगा

नई दिल्ली   कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत से एक ट्रेड मिशन  6 फरवरी, 2026 तक भारत आएगा। इसका मकसद दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते मार्केट में से एक में कमर्शियल संबंधों को मजबूत करना और साझेदारी के नए मौके तलाशना है। बता दें, कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत के साथ इसके तनाव में कड़वाहट देखने को मिली थी। हालांकि, वर्तमान पीएम मार्क कार्नी के शासन में भारत-कनाडा के संबंधों में सुधार देखने को मिल रहा है। कनाडा भारत के साथ अपने बिगड़े हुए संबंधों को सुधारने की पहल कर रहा है। कनाडाई ट्रेड मिशन का भारत आना उन्हीं पहलों में से एक है। इस मिशन को अपॉर्चुनिटीज न्यू ब्रंसविक (ओएनबी) का समर्थन है और यह उस व्यापार पर फोकस करेगा जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विविधता लाना चाहते हैं, भारत में विस्तार करना चाहते हैं और नई कमर्शियल और सप्लाई-चेन साझेदारी विकसित करना चाहते हैं। लक्षित बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग, मार्केट ब्रीफिंग और ऑन-द-ग्राउंड समर्थन के जरिए हिस्सा लेने वाली कंपनियों को संभावित खरीदारों, साझेदारों और निर्णय लेने वालों तक सीधी पहुंच मिलेगी। यह मिशन भारतीय बाजार के लिए न्यू ब्रंसविक की लंबे समय की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और प्रांत की इन-मार्केट उपस्थिति को बढ़ाता है। इससे कंपनियों को स्थानीय व्यापार के माहौल में आगे बढ़ने और विकास के अवसर पहचानने में मदद मिलती है। यह ओएनबी के मार्च 2025 के भारत के व्यापार मिशन की सफलता पर भी आधारित है। इसमें व्यापार संबंधों को गहरा करने, निर्यात बढ़ोतरी को समर्थन करने और न्यू ब्रंसविक को व्यापार और निवेश के लिए एक कॉम्पिटिटिव और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर स्थापित करने पर लगातार केंद्रित किया गया है। ल्यूक रैंडल, अपॉर्चुनिटीज एनबी और आर्थिक विकास और छोटे बिजनेस के लिए जिम्मेदार मंत्री हैं। वह इस मिशन को लीड करेंगे। रैंडल ने कहा, “वैश्विक व्यापार ऑर्डर तेजी से बदल रहे हैं, और न्यू ब्रंसविक भारत जैसे खास मार्केट के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत कर रहा है। हमारा प्रांत भारत में आर्थिक अवसरों को पहचानने वाला अकेला नहीं है, बल्कि हम इन-मार्केट टीम वाला अकेला अटलांटिक प्रांत हैं और इसके नतीजे में हमने मजबूत साझेदारी बनाई हैं जो नए अवसरों के दरवाजे खोल रही हैं जो लंबे समय की विकास, विविधता और रेसिलिएंस का समर्थन करती हैं।” इस मिशन में चार न्यू ब्रंसविक कंपनियां और एक एकेडमिक इंस्टिट्यूशन शामिल हैं, जो एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-फूड, एडटेक, एजुकेशनल और प्रोफेशनल सेवाएं और एकेडमिक रिसर्च जैसे खास सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हैं। अपॉर्चुनिटीज एनबी, कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत के लिए लीड बिजनेस डेवलपमेंट एजेंसी है। यह स्थानीय व्यापार का समर्थन करता है और आर्थिक और जॉब ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर से नया निवेश आकर्षित करता है।

अलगाववाद का दांव उल्टा पड़ा? खालिस्तान पर नरमी अब कनाडा के लिए बन रही सिरदर्द

ओटावा कनाडा-अमेरिका तनाव के बीच यह कहना गलत नहीं होगा कि नियति का पहिया घूमकर वापस वहीं आ गया है। जिस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की आड़ में कनाडा भारत के अलगाववादी तत्वों (खालिस्तान समर्थकों) को पनाह देता रहा है आज वही तर्क उसके अपने सबसे महत्वपूर्ण प्रांत अल्बर्टा के अलगाववादी दे रहे हैं। भारत अक्सर कहता रहा है कि अलगाववाद को हवा देना एक दोधारी तलवार है। दरअसल कनाडा का तेल समृद्ध प्रांत अल्बर्टा देश से अलग होने की मांग कर रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व 'अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट' (APP) नामक समूह कर रहा है। अब इस आग में घी डालने का काम किया है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने।   विवाद की मुख्य वजह- बागियों के साथ गुप्त बैठकें और अरबों का कर्ज सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट के नेताओं ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। इसके प्रतिनिधियों ने पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी विदेश विभाग के साथ कम से कम तीन बैठकें की हैं। फरवरी 2026 में एक और महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें अमेरिकी वित्त विभाग के शामिल होने की खबर है। अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट ने अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर की ऋण सुविधा मांगी है ताकि आजादी के पहले दिन से ही अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके। कनाडा के लिए क्या है अल्बर्टा का महत्व? अल्बर्टा कनाडा का सबसे अमीर प्रांत है और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कनाडा के कुल प्रमाणित तेल भंडार का 90% और वर्तमान उत्पादन का 80% हिस्सा इसी प्रांत से आता है। अलगाववादी समूह का तर्क है कि वे केंद्र सरकार की ऊर्जा नीतियों और भारी टैक्स से परेशान हैं। वे ब्रिटिश कोलंबिया और ओटावा की मंजूरी के बिना अमेरिका के माध्यम से नए पाइपलाइन रास्ते बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं। क्या रही अब तक की कूटनीतिक प्रतिक्रिया? इस खबर के बाहर आते ही कनाडा के भीतर गुस्से की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी हर बातचीत में इस बात को मजबूती से रखते हैं। हालांकि, उन्होंने इन बैठकों को सीधे तौर पर राजद्रोह कहने से परहेज किया, ताकि तनाव और न बढ़े। ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर (मुख्यमंत्री) डेविड ईबी ने इसे राजद्रोह करार दिया है। ओंटारियो के सीएम डग फोर्ड ने इसे अनैतिक बताते हुए अल्बर्टा की वर्तमान प्रीमियर डेनियल स्मिथ से इस आंदोलन की निंदा करने को कहा है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इसे सामान्य मुलाकात बताया है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा अल्बर्टा को एक स्वाभाविक भागीदार कहना ओटावा के लिए चिंता का विषय बन गया है। अमेरिका में 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' यानी ट्रंप समर्थक इस स्थिति का मजा ले रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स तो मजाक में कनाडा के प्रांतों के अमेरिका में विलय की खुलकर बात कर रहे हैं। कनाडा के प्रमुख अखबारों में क्या लिखा? अखबारों ने इसे कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक वेक-अप कॉल बताया है। द ग्लोब एंड मेल के संपादकीय में तर्क दिया गया है कि विदेशी ताकतों (विशेषकर अमेरिका के MAGA गुट) का समर्थन अलगाववाद की आग में घी डालने जैसा है। ओटावा को अल्बर्टा की वास्तविक आर्थिक शिकायतों को दूर करना होगा, वरना बाहरी हस्तक्षेप की गुंजाइश बनी रहेगी। नेशनल पोस्ट अखबार का झुकाव अक्सर कंजर्वेटिव विचारों की ओर रहता है, लेकिन इसने भी विदेशी सहायता मांगने की निंदा की है। इसने $500 बिलियन की क्रेडिट लाइन की मांग को हास्यास्पद और अवास्तविक बताया गया है। अखबार के मुताबिक, अल्बर्टा का मुद्दा पूरी तरह से घरेलू है और इसमें वाशिंगटन को शामिल करना कनाडा के संघीय ढांचे के साथ खिलवाड़ है। दूसरों के मामलों में डबल स्टैंडर्ड अपनाता रहा है कनाडा कनाडा ने हमेशा भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों को सिख डायस्पोरा की चिंता बताकर नजरअंदाज किया। लेकिन जब बात अल्बर्टा की आई, तो ओटावा की भाषा रातों-रात बदल गई। भारत जब कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर चिंता जताता था, तो ओटावा इसे 'घरेलू राजनीति' कहता था। लेकिन अब जब अल्बर्टा के नेता अमेरिका जाकर मदद मांग रहे हैं, तो कनाडा के नेता इसे राजद्रोह और विदेशी हस्तक्षेप करार दे रहे हैं। खालिस्तानी उग्रवाद पर नरम रहने वाले कनाडाई राजनेता अब अल्बर्टा के अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट को देश की एकता के लिए खतरा बता रहे हैं। जिस तरह खालिस्तानी समर्थक कनाडा की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करते हैं, वैसे ही अल्बर्टा के अलगाववादी अब अमेरिकी धरती का इस्तेमाल कनाडा के खिलाफ वित्तीय सहायता और मान्यता प्राप्त करने के लिए कर रहे हैं। अल्बर्टा का अलग होना कनाडा के लिए आर्थिक आत्महत्या जैसा होगा, क्योंकि कनाडा की तेल संपदा का केंद्र यही प्रांत है। 

कनाडा से बड़ी खुशखबरी: नागरिकता कानून में ऐतिहासिक बदलाव, भारतवंशियों को मिलेगा फायदा

कनाडा  कनाडा ने अपने नागरिकता नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे विदेश में पैदा हुए या गोद लिए गए बच्चों को कनाडाई नागरिकता का मार्ग खुल गया है। 15 दिसंबर से बिल C-3 लागू हो गया है, जिससे नागरिकता के अधिकार में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। यह कदम उन परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है जिनके सदस्य विदेश में रहते हैं या पैदा हुए हैं। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय निवास कर रहा है, इसलिए यह नया नियम भारतीय मूल के नागरिकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है, खासकर उन बच्चों के लिए जिनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हैं लेकिन वे खुद विदेश में पैदा हुए हैं। नए नियम से क्या बदला अब कनाडाई नागरिक माता-पिता विदेश में पैदा हुए या गोद लिए बच्चों को नागरिकता दे सकते हैं, बशर्ते कि माता-पिता ने बच्चे के जन्म या गोद लेने से पहले कम से कम तीन साल (1095 दिन) कनाडा में शारीरिक रूप से निवास किया हो। यह परिवर्तन नागरिकता के प्रति देश के दृष्टिकोण को अधिक उदार और आधुनिक बनाता है। अब पहली पीढ़ी के बाहर भी नागरिकता की पात्रता का विस्तार किया गया है।   बिल C-3 क्यों जरूरी? कनाडा में 2009 में लागू “फर्स्ट-जनरेशन लिमिट” के नियम ने विदेशी जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित कर दिया था, भले ही उनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हों। यह नीति कई वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का विषय रही है। दिसंबर 2023 में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इस सीमा के मुख्य हिस्सों को असंवैधानिक बताया था। अदालत ने कहा कि यह नियम उन नागरिक परिवारों के लिए गलत नतीजे दे रहा है जो कनाडा के बाहर बच्चे का जन्म या गोद लेने के बाद नागरिकता चाहते हैं। इसके बाद संघीय सरकार ने अपील न करने का फैसला किया और बिल C-3 को लागू कर व्यापक सुधार किया। भारतीय समुदाय पर असर कनाडा में भारतीय मूल की एक बड़ी आबादी रहती है। कई ऐसे बच्चे हैं जिनका जन्म विदेश में हुआ लेकिन उनके माता-पिता की पहचान कनाडाई नागरिक के रूप में है। इस नए नियम से वे अब नागरिकता के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे और उन्हें कई अधिकार मिलेंगे जो पहले प्रतिबंधित थे।

ब्रैम्पटन हादसा: मकान में आग लगने से तीन पंजाबियों की दर्दनाक मौत, तीसरी मंजिल से कूदे कई लोग

वैंकूवर  कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में बानस वे (Banis Way) स्थित एक किराये के घर में गुरुवार देर रात लगी भीषण आग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि गर्भवती महिला समेत चार लोगों ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक और घायल सभी एक ही पंजाबी मूल के परिवार के बताये जा रहे हैं। परिवार के दो सदस्य अभी भी लापता हैं। आग में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके इस घर का मालिक भी पंजाब का रहने वाला बताया जा रहा है। अग्निशमन विभाग को रात करीब ढाई बजे आग लगने की सूचना मिली। जब फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची, तो घर की ऊपरी मंजिल पूरी तरह आग की चपेट में थी। अधिकारियों ने तुरंत आसपास के घर खाली करवाए और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। मलबे से एक बच्चे सहित दो लोगों के शव बरामद हुए। गर्भवती महिला व एक 5 वर्षीय बच्चे सहित चार अन्य लोग तीसरी मंजिल की खिड़की से कूदकर बाहर निकले, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। अग्निशमन कर्मी शुक्रवार शाम तक भी मलबे में तलाश अभियान चलाते रहे, ताकि लापता दो परिजनों का पता लगाया जा सके। आग से जुड़े हुए जड़वा (सेमी-डिटैच्ड) घर को भी भारी नुकसान हुआ है। ब्रैम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन ने जानकारी दी कि घर के विदेशी मालिक ने वर्ष 2020 में इसमें सब-यूनिट बनाने के लिए आवेदन किया था। निरीक्षण के लिए अधिकारी कई बार पहुंचे, लेकिन भीतर रहने वाले लोगों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह घर करीब छह वर्ष पहले भारत में रहने वाले व्यक्ति ने एक रियल्टर के माध्यम से खरीदा था और कभी स्वयं यहां नहीं आया। घर की देखभाल और किराये की जिम्मेदारी उसने ब्रैम्पटन में रहने वाले एक परिचित को सौंप रखी थी। पड़ोसियों ने बताया कि पीड़ित परिवार मालिक के बारे में पूछने पर जानकारी देने से बचता था। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। जांच एजेंसियां विदेशी मालिक के संपर्क सूत्रों की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार घर का मालिक पंजाब सरकार का एक अधिकारी है। ओंटारियो के मुख्यमंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। पीड़ित परिवार की आधिकारिक पहचान अभी जारी नहीं की गई है। स्थानीय समुदाय इस त्रासदी से स्तब्ध है और जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है।

कनाडा में गैंगवार की आहट, तीन जगहों पर गोलीबारी – बिश्नोई गैंग ने किया कबूल

ओटावा कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी का दावा किया है. कनाडा में रविवार देर रात तीन अलग-अलग जगहों पर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर ली है. गैंग की तरफ से किए गए पोस्ट में लिखा गया है कि "2 नंबर के धंधे" यानी अवैध कारोबार करने वालों से वसूली की जाती है, मेहनत करने वालों से नहीं. बिश्नोई गैंग की तरफ से पुर्तगाल में रहने वाले फतेह पुर्तगाल ने इन घटनाओं की जिम्मेदारी ली. उसने सोशल मीडिया पर फायरिंग का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एक शूटर अत्याधुनिक हथियार से फायरिंग करता नजर आ रहा है. वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. कनाडाई पुलिस ने फिलहाल घटनास्थलों को सील कर जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, फायरिंग में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पुलिस ने इसे संगठित अपराध से जुड़ी बड़ी साजिश के तौर पर देखा है. गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कनाडा की सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकी संगठन घोषित किया था. इसके बाद से ही गैंग सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर अपनी "मौजूदगी" दिखाने की कोशिश कर रहा है. सोशल मीडिया पर बिश्नोई गैंग ने क्या दावा किया? सोशल मीडिया पर खुद को 'फतेह पुर्तगाल बताने वाले शख्स ने पोस्ट में बताया कि जिन तीन जगहों पर फायरिंग हुई वे हैं – Theshi Enterprise (1254, 110 Ave), House No. 2817 (144 St) और 13049, 76 Ave Unit No.104. दावा करने वाले व्यक्ति ने कहा कि ये सभी स्थान 'नवी तेसी' नामक व्यक्ति के स्वामित्व में हैं, जिसने कथित रूप से "लॉरेंस बिश्नोई गैंग" का नाम लेकर कलाकारों से अवैध वसूली की थी. गैंग के लोगों को परेशान किए जाने का दावा पोस्ट में लिखा गया कि, "हम मेहनत करने वालों से दुश्मनी नहीं रखते, लेकिन जो लोग हमारे लोगों को परेशान करते हैं या गलत तरीके से पैसा वसूलते हैं, हम उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं." उसने यह भी चेतावनी दी कि "अगर किसी ने गलत खबर फैलाई, तो उससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी."

कनाडा की धरती से अजित डोभाल के नाम धमकी, इंतजार जारी

कनाडा कनाडा में गिरफ्तार हुआ खालिस्तानी आतंकवादी इंदरजीत सिंह गोसाल जेल से बाहर आ चुका है। खबर है कि बाहर आते ही उसने भारत को धमकी दी है। इसके अलावा SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को चेतावनी दी है। गोसाल और 2 अन्य को 19 सितंबर को हथियारों से जुड़े अपराध में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, गोसाल जेल से बाहर आ गया है। जेल से बाहर आते ही उसने पन्नू को समर्थन देने की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, गोसाल ने वीडियो में कहा, 'भारत, मैं बाहर आ गया हूं। गुरपतवंत सिंह पन्नू को समर्थन देने और 23 नवंबर 2025 को खालिस्तान रेफरेंडम आयोजित करने के लिए। दिल्ली बनेगा खालिस्तान।' रिपोर्ट के मुताबिक पन्नू ने कहा, 'अजित डोभाल, तुम क्यों कनाडा, अमेरिका या किसी यूरोपीय देश में नहीं जाते और गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की कोशिश करते। डोभाल, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।' भारतीय सैनिकों को भड़काया हाल ही में NIA यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने अमेरिका में रहने वाले पन्नू के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रध्वज फहराने से रोकने के लिए इनाम की पेशकश करने और 'भारत के खिलाफ सिखों में असंतोष फैलाने' का आरोप शामिल है। FIR के अनुसार, पन्नू ने 10 अगस्त को पाकिस्तान के लाहौर प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम के दौरान ईनाम की घोषणा की थी। वॉशिंगटन से एक वीडियो संबोधन में पन्नू ने उन सिख सैनिकों को 11 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी, जो मोदी को दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराने से रोकेंगे। FIR में यह भी कहा गया है कि इस कार्यक्रम में पन्नू ने एक नए खालिस्तान के मानचित्र का अनावरण किया और कहा कि पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश खालिस्तान में शामिल होंगे। पन्नू ने दावा किया था कि SFJ ने भारत के खिलाफ लड़ने के लिए एक शहीद जत्था बनाया है।  

F-35 फाइटर जेट की बिक्री पर अमेरिका का बड़ा कदम, कनाडा को लेकर कड़ा रुख

न्यूयॉर्क कनाडा और अमेरिका के बीच रक्षा सौदे को लेकर तनाव बढ़ गया है. कनाडा अपने 88 F-35 फाइटर जेट्स खरीदने के प्लान की समीक्षा कर रहा है. 22 सितंबर तक फैसला आने की उम्मीद है. अगर कनाडा इस डील को रद्द करता है, तो अमेरिका ने गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है. कनाडा स्वीडिश ग्रिपेन जेट को विकल्प के रूप में देख रहा है, लेकिन अमेरिका दो अलग-अलग फाइटर फ्लीट चलाने के खिलाफ है. यही विमान अमेरिका भारत को भी बेंचना चाहता है. लेकिन अभी तक भारत ने इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.   F-35 डील क्या है और कनाडा क्यों कर रहा है समीक्षा? F-35 अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा बनाया गया एक एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट है. यह पांचवीं पीढ़ी का विमान है, जो रडार से बचने की क्षमता रखता है. आधुनिक हथियारों से लैस है. कनाडा ने 2010 के दशक में 88 ऐसे जेट्स खरीदने का फैसला किया था, जिसकी अनुमानित लागत 19 बिलियन कनाडाई डॉलर (करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये) है. यह सौदा कनाडा की पुरानी CF-18 फाइटर जेट्स को बदलने के लिए था. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल सरकार ने इस साल मार्च में इस डील की समीक्षा शुरू की. कारण ये है कि F-35 प्रोग्राम में देरी और लागत में बढ़ोतरी हो रही है. अमेरिकी सरकारी संगठन GAO (गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस) ने 3 सितंबर 2025 को रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि F-35 प्रोजेक्ट में और देरी और खर्च बढ़ रहा है. कनाडा के तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर (अब प्रधानमंत्री) मार्क कार्नी ने समीक्षा का आदेश दिया, ताकि यह देखा जा सके कि क्या यह सौदा देश के हित में है. कनाडा की सेना ने अगस्त 2025 में सिफारिश की कि F-35 ही खरीदना चाहिए, लेकिन सरकार अभी फैसला ले रही है. अमेरिका ने साफ कह दिया है कि अगर कनाडा F-35 डील रद्द करता है, तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा ने मई 2025 में CTV को इंटरव्यू में कहा कि यह कनाडा-अमेरिका के संयुक्त NORAD (नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड) गठबंधन को खतरा पहुंचा सकता है. NORAD दोनों देशों की हवाई रक्षा के लिए है. इसके लिए दोनों को एक ही तरह के विमान उड़ाने चाहिए. होकस्ट्रा ने कहा कि अगर कनाडा एक विमान उड़ाएगा और हम दूसरा, तो वे एक-दूसरे के साथ बदलाव योग्य नहीं रहेंगे. अगस्त 2025 में होकस्ट्रा ने पॉडकास्टर जैस्मिन लेन को बताया कि कनाडा दो फाइटर प्रोग्राम नहीं चला सकता. होकस्टा ने कहा कि आपको फैसला करना चाहिए कि F-35 चाहिए या कोई और. लेकिन दोनों नहीं चला सकते. अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि F-35 डील रद्द करने से कनाडा को स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और ट्रेनिंग में दिक्कत होगी. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते भी प्रभावित हो सकते हैं.  डिफेंस इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने कनाडा को चेतावनी दी है कि यह सौदा रद्द करने से रक्षा सहयोग कमजोर हो जाएगा. ग्रिपेन: कनाडा का विकल्प क्यों? कनाडा स्वीडन की कंपनी साब द्वारा बनाए गए ग्रिपेन (JAS 39 Gripen) जेट को वैकल्पिक विकल्प के रूप में देख रहा है. ग्रिपेन एक हल्का, सस्ता और बहुमुखी फाइटर जेट है, जो F-35 से कम खर्चीला है. कनाडा को लगता है कि इससे पैसे बचेंगे और घरेलू उद्योग को फायदा होगा. लेकिन अमेरिका इसका विरोध कर रहा है, क्योंकि ग्रिपेन F-35 जितना उन्नत नहीं है और NORAD में एकरूपता बिगड़ जाएगी. कनाडा पहले से ही पुराने F-18 जेट्स चला रहा है. दो अलग फ्लीट चलाना महंगा और जटिल होगा. कनाडा का फाइटर जेट प्रोग्राम कनाडा की वायुसेना को नई फाइटर जेट्स की सख्त जरूरत है. पुराने CF-18 जेट्स 1980 के दशक के हैं और अब खराब हो रहे हैं. 2010 में कनाडा ने F-35 चुना लेकिन लागत और देरी की शिकायतें बढ़ीं. 2022 में कनाडा ने औपचारिक रूप से F-35 के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, लेकिन अब समीक्षा हो रही है. यह विवाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है, खासकर ट्रेड और डिफेंस में. दुनिया में F-35 प्रोग्राम एफ-35 कार्यक्रम में वर्तमान में 17 देश भाग ले रहे हैं. अब तक, 1870 से अधिक पायलटों और 13,500 रखरखाव कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है. एफ-35 बेड़े ने 602,000 से अधिक संचयी उड़ान घंटों को पार कर लिया है. क्रैश होने का खतरा  दुनिया का सबसे खतरनाक स्टेल्थ फाइटर जेट F-35 कई बार क्रैश हो चुका है. एक विमान गिरने पर अमेरिका को करीब 832 करोड़ रुपए का नुकसान होता. यह अमेरिका का सबसे महंगे जेट प्रोग्राम का विमान था. पिछले साल न्यू मेक्सिको के अल्बुकर्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ करते ही अमेरिकी एयरफोर्स का F-35 लाइटनिंग-2 स्टेल्थ फाइटर जेट क्रैश हो गया.  इससे पहले साउथ कैरोलिना में ऐसा ही एक फाइटर जेट लापता हो गया था. जो बाद में एक घर के पीछे क्रैश मिला. इसका मलबा साउथ कैरोलिना के ज्वाइंट बेस चार्ल्सटन से 96 KM दूर विलियम्सबर्ग काउंटी में मिला.