samacharsecretary.com

शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत

 रायपुर पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चतैन्य बघेल को बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. ईडी और ईओडब्ल्यू के मामलों में सुनवाई के बाद चैतन्य की जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई है. लगभग 168 दिनों के बाद वे जेल से बाहर आएंगे. 29,800 पन्नों का अंतिम चालान पेश छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED ने 26 दिसंबर को कोर्ट में लगभग 29 हजार 800 से अधिक पन्नों का अंतिम चालान पेश किया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 82 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है. ED ने चैतन्य बघेल को जन्मदिन के दिन किया था गिरफ्तार ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था. शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई. क्या है शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है. ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है. दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है. ED ने अपनी जांच में पाया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था. अब तक इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी शराब घोटाला मामले में अब तक कई बड़े नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, सौम्य चौरसिया शामिल हैं. इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है.

शराब घोटाले में बड़ा खुलासा: चैतन्य बघेल को करोड़ों की रकम, जांच एजेंसियों ने दाखिल किया आठवां चालान

 रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शराब घोटाला मामले में प्रदेश के पूर्व सीएम भूपेश  बघेल के बेट चैतन्य बघेल ने आबकारी विभाग में वसूली के लिए एक बड़ा सिंडिकेट खड़ा किया था। आर्थिक आपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से आज सोमवार को स्पेशल कोर्ट रायपुर में पेश किये गये 8वें चालान में आरोप लगाया गया है कि चैतन्य बघेल को घोटाले की रकम से 200 से 250 करोड़ रुपये मिले हैं। इतना ही नहीं चालान में यह भी दावा किया गया है कि चैतन्य के सिंडिकेट को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिला था। वे प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर उन्हें उनके हिसाब से काम करने के लिए निर्देश देते थे। इस वजह से लंबे समय तक यह घोटाला फलता-फूलता रहा। अभी तक घोटाला 3074 करोड़ रुपये का सामने आया है, लेकिन जांच और अन्य सबूत बता रहे हैं कि यह घोटाला 3500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हैं। चैतन्य को तीन हजार करोड़ से ज्यादा के कथित घोटाले में आरोपी बनाया ईओडब्ल्यू और एसीबी ने दावा करते हुए बताया कि करीब 3,800 पन्नों चार्जशीट में चैतन्य बघेल को तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले में आरोपी बनाया गया है। इस मामले में अब तक कुल आठ चार्जशीट पेश किये जा चुके हैं। नई चार्जशीट में पहले से गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ जांच की मौजूदा स्थिति रिपोर्ट दिया गया है। वहीं हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों से डिजिटल साक्ष्य रिपोर्ट भी शामिल हैं। यह दस्तावेज आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ चल रही जांच की प्रगति की भी रूपरेखा बताता है। सिंडिकेट को देते थे निर्देश चार्जशीट का हवाला देते हुए बताया गया है कि चैतन्य बघेल ने अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी और निरंजन दास जैसे अधिकारियों के बीच समन्वयक के रूप में काम किया, जो प्रशासनिक स्तर पर सिंडिकेट के हितों के अनुसार काम करते थे और नेटवर्क के जमीनी स्तर के संचालकों जैसे अनवर ढेबर, अरविंद सिंह और विकास अग्रवाल (सभी सह-आरोपी) को निर्देश जारी करते थे। घोटाले की रकम को किया ट्रांसफर और मैनेज चार्जशीट में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल ने अपने भरोसेमंद सहयोगियों के माध्यम से व्यवसायी अनवर ढेबर की टीम की ओर से वसूली गई घोटाले की रकम को ऊपर तक पहुंचाया गया। उसने शराब व्यवसायी त्रिलोक सिंह ढिल्लों की विभिन्न फर्मों के माध्यम से अपने हिस्से की रकम प्राप्त की। इसे बैंकिंग चैनलों के माध्यम से अपनी पारिवारिक फर्मों में ट्रांसफर किया और रियल एस्टेट परियोजनाओं में इसका इस्तेमाल किया। इसके अलावा चार्जशीट में दावा किया गया है कि उसने अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और सहयोगियों के ज़रिए बैंकिंग चैनलों से घोटाले से मिले पैसे की बड़ी रकम ली और इन्वेस्ट किया। शराब घोटाले में शामिल रकम करीब 3,074 करोड़ रुपये होने का अनुमान जांच एजेंसी ने कहा कहा कि "सबूतों से पता चलता है कि चैतन्य ने ऊंचे लेवल पर अपराध की कमाई को मैनेज करने के साथ-साथ अपने हिस्से के तौर पर लगभग 200 करोड़ रुपये से 250 करोड़ रुपये लिए। सिंडिकेट को दी गई हाई-लेवल सुरक्षा, पॉलिसी/एडमिनिस्ट्रेटिव दखल और प्रभाव के कारण यह अपराध लंबे समय तक चलता रहा। जांच से पता चलता है कि शराब घोटाले में शामिल रकम लगभग 3,074 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। हालांकि आगे की जांच से पता चला है कि कथित घोटाले से अपराध की कुल कमाई तीन हजार पांच करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। जांच एजेंसी ने बताया कि कई आरोपियों के खिलाफ अभी जांच जारी है। सरकारी खजाने को पहुंचा नुकसान केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि कथित घोटाले से सरकारी खजाने को काफी नुकसान पहुंचा है। इस घोटाले से एक शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबें भर गईं। यह घोटाला साल 2019 और 2022 के बीच हुआ। उस दौरान छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार की सरकार थी और चैतन्य बघेल के पिता भूपेश बघेल सीएम थे। दूसरी ओर ईडी की ओर से पहले दायर चार्जशीट के अनुसार, चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से मिले एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की "अपराध की कमाई" को "हैंडल" किया था। 18 जुलाई को हुई थी चैतन्य की गिरफ्तारी बता दें कि चैतन्य बघेल फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें 18 जुलाई 2025 को ईडी ने शराब घोटाले के आरोप में भिलाई स्थित निवास से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में ईडी ने 16 दिसंबर को पूछताछ के बाद सौम्या चौरसिया को भी गिरफ्तार किया था। 19 दिसंबर को कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

ED कोर्ट का आदेश: चैतन्य को नहीं मिली जमानत, इन्वेस्टिगेशन प्रभावित होने की चिंता

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय के कोर्ट में 24 अक्टूबर को सुनवाई हुई थी. जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था.  ईडी कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया. एक बार फिर से चैतन्य बघेल को बेल नहीं मिल पाई. चैतन्य बघेल पिछले 100 दिनों से रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को भिलाई के निवास से गिरफ्तार किया था. चैतन्य बघेल को नहीं मिली जमानत: प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडेय ने बताया कि "प्रवर्तन निदेशालय अपनी जांच कर रहा था और यह जांच मुख्य रूप से शराब घोटाला से जुड़े हुए मामले में हो रहा था. जांच के दौरान ऐसे प्रमाण मिले जिसमें ऐसा लगा कि शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल की मुख्य भूमिका रही है. प्रत्यक्ष रूप से चैतन्य बघेल इससे लाभ लेने के साथ बहुत सारा पैसा का हैंडलिंग भी किया है. हैंडलिंग करने वाले पैसा लगभग 1000 करोड़ के आसपास है. शराब घोटाला के लगभग 20 करोड़ के लगभग लाभ चैतन्य बघेल ने लिया है. इसी भूमिका को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था. 24 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया गया । ED की स्पेशल कोर्ट ने कहा कि चैतन्य बघेल की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। चैतन्य बघेल ने इससे पहले हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी, लेकिन किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिल सकी। 17 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को वैध बताया था, जिसके बाद यह याचिका विशेष अदालत में दायर की गई थी। चैतन्य बघेल मनी लॉन्ड्रिंग केस में 101 दिन से जेल में बंद है। चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले- ED दरअसल, शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया। ED के मुताबिक चैतन्य बघेल ने ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया है। साथ ही सिंडिकेट के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई है। ED ने चैतन्य बघेल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में जुलाई में गिरफ्तार किया था। बर्थडे के दिन चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी चैतन्य के वकीलों ने अदालत में इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि 18 जुलाई को ईडी ने उनके भिलाई स्थित घर से जन्मदिन के दिन उन्हें गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार, कुल घोटाले में करीब 1,000 करोड़ रुपए को विभिन्न चैनलों के जरिए सफेद किया गया है। चैतन्य के प्रोजेक्ट में 13-15 करोड़ इन्वेस्ट ED ने अपनी जांच में पाया कि, चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने रिकॉर्ड जब्त किए थे। प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि, बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया। फर्जी फ्लैट खरीदी के जरिए पैसों की हेराफेरी ED ने अपनी जांच में पाया है कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए। ढिल्लन ने ये फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे लेकिन पेमेंट त्रिलोक ढिल्लो ने खुद दिया। ED ने जब ढिल्लन के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कर्मचारियों ने बताया कि, ये फ्लैट की खरीदी उन्हीं के नाम पर हुई, लेकिन पैसे ढिल्लो ने दिए। ये सारा ट्रांजेक्शन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ। ED ने कहा कि ब्लैक को लीगल करने के लिए यह एक पूर्व-योजना के तहत किया गया लेन-देन था। इसका मकसद पैसे को छिपाकर चैतन्य बघेल तक पहुंचाना था।

चैतन्य बघेल ने जेल में मनाई दिवाली, बेटे से न मिल पाने पर भावुक हुए भूपेश बघेल

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दीपावली के अवसर पर अपने बेटे चैतन्य बघेल से मिलने की अनुमति न मिलने पर भावुक हो गए। चैतन्य बघेल शराब घोटाले के आरोप में जेल में बंद हैं और उन्हें जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी मिलने की इजाजत नहीं मिली। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक द्वेष और अमानवीय कृत्य बताते हुए भाजपा सरकार को घेरा है। शराब घोटाले में जेल में बंद बेटा दीपावली के शुभ अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने बेटे चैतन्य बघेल से मुलाकात की अनुमति न मिलने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। चैतन्य बघेल शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद हैं और इस दीपावली पर वे अपने पिता से मिल नहीं सके। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने एक भावुक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। मोदी और शाह की कृपा से… उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि, 'दो दशक पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बाबूजी को जेल भेजा था। लेकिन दीपावली के दिन उनसे मिलने की छूट मिल गई थी। पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कृपा से बेटा जेल में है। आज दीपावली है पर मुझे उससे मिलने की अनुमति नहीं है। बहरहाल, सबको दीपावली की शुभकामनाएं।' बीजेपी पर तीखा हमला इस ट्वीट के बाद कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने इसे एक पिता की वेदना करार दिया और आरोप लगाया कि चैतन्य बघेल को फर्जी मामलों में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक द्वेष के चलते दीपावली जैसे पवित्र दिन पर भी उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया गया, जिसे उन्होंने अमानवीय कृत्य बताया। ऐसी भावना अस्वीकार कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, 'आज हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार के दिन भूपेश बघेल को अपने परिवार से मिलने से रोका गया। छत्तीसगढ़ की जनता इस तरह की भावना को स्वीकार नहीं करती है। भारतीय जनता पार्टी ने बदले की इंतहा को पार कर दिया है।' पिता की वेदना बता कर हमला कांग्रेस ने इस पूरे मामले को 'एक पिता की वेदना' बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर मिलीभगत का आरोप लगाया। उनका कहना है कि चैतन्य बघेल को 'फर्जी मुकदमों' के तहत गिरफ्तार किया गया है और दीपावली के दिन मिलने से रोकना जनता की भावनाओं के विपरीत है। क्या है पूरा मामला यह उल्लेखनीय है कि चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। ईडी का दावा है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 2,500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में उनका नाम शामिल है और वे इसमें लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अवैध प्रबंधन में संलिप्त थे। उनके खिलाफ दाखिल की गई जमानत याचिका को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हाल ही में खारिज कर दिया था। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है और इसे भाजपा सरकार की बदले की कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है। वहीं, भाजपा की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।  

ईडी गिरफ्तारी पर चुनौती: चैतन्य बघेल की याचिका हाईकोर्ट ने ठुकराई

बिलासपुर ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली चैतन्य बघेल की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में यह निर्णय लिया गया है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद 24 सिंतबर को फैसला सुरक्षित रखा गया था. याचिका में ईडी की कार्रवाई को असंवैधानिक और नियम विरुद्ध बताया गया था. ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई। ईडी की जांच में पता चला है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले के 16.70 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया है। इस पैसे का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया, जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया। पहले से गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे ईडी ने शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।

EOW की विशेष अदालत का फैसला — चैतन्य बघेल को शराब घोटाले में नहीं मिली जमानत

रायपुर छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की जमानत याचिका राजधानी रायपुर में EOW (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) की विशेष अदालत में खारिज कर दी गई है। इससे पहले बीते सोमवार को ही चैतन्य बघेल को विशेष अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने सुनवाई के बाद उनकी जमानत याचिका अस्वीकृत कर दी और उन्हें 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। बता दें कि EOW की ओर से चैतन्य बघेल को 14 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और मामले में गहन अनुसंधान किया जा रहा है। ED-EOW 90 दिनों में जांच पूरी करेगी। ED ने चैतन्य बघेल को जन्मदिन के दिन किया था गिरफ्तार ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई। चैतन्य को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले ईडी की जांच में पता चला है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले के 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया है। इस पैसे का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया, जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया। पहले से गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे ईडी ने शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।

भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को झटका, HC ने खारिज की EOW ऐक्शन के खिलाफ याचिका

रायपुर छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में आरोपी बनाए गए चैतन्य बघेल ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की कार्रवाई को गलत करार देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सोमवार को भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य की याचिका को छूट (लिबर्टी) के साथ खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि चैतन्य बघेल को राहत चाहिए तो वे फ्रेश आवेदन पेश करें, जिसमें केवल अपने मामले से संबंधित प्रार्थना हो। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। वहीं एन. हरिहरन और हर्षवर्धन परगानिया ने चैतन्य बघेल की ओर से पैरवी की। याचिका EOW की जांच रिपोर्ट की वैधता को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। इससे पहले ED की कस्टोडियल रिमांड समाप्त होने के बाद शनिवार 23 अगस्त को चैतन्य बघेल को कोर्ट में पेश किया गया था। जहां सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें तीसरी बार 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था। अब इस मामले में 6 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। ईडी की कार्रवाई को लेकर भूपेश बघेल पहले सुप्रीम कोर्ट गए थे, जहां से उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी गई थी। 21 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से प्रेस नोट में बताया गया था कि ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। ईडी ने कथित शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई कथित घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंची। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में ED की ओर से उनकी गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका लगाई थी। याचिका में चैतन्य ने कहा था कि उनकी हिरासत गैरकानूनी है और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा था। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई जिस पर 26 अगस्त तक ईडी से जवाब मांगा गया है।