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नियमों की अनदेखी कर आउटसोर्स भर्ती? MP की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत वित्तीय वर्ष 2024–25 एवं 2025–26 में प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में कुल 18,653 पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्तियां की जानी हैं। इन नियुक्तियों को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमों का खुलेआम उल्लंघन आरोप है कि निजी एजेंसियों के जरिए की जा रही भर्तियों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और धनबल के सहारे प्रक्रियाओं को प्रभावित किया जा रहा है। मप्र संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि कई स्थानों पर तय मापदंडों और पारदर्शी चयन प्रक्रिया को नजरअंदाज कर नियुक्तियां की जा रही हैं। योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं इससे योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पा रहा है और पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहे हैं। यदि इन नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ होगा। मौजूदा व्यवस्था में पूंजी और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जबकि आम युवाओं और जरूरतमंद अभ्यर्थियों को दरकिनार किया जा रहा है।

टीपू-अकबर से ‘ग्रेट’ हटाने पर सियासी घमासान, CM हिमंता का बयान सुर्खियों में

  एनसीईआरटी ने इतिहास के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। एनसीईआरटी ने बादशाह अकबर और टीपू सुल्तान  जैसे महत्वपूर्ण मुगल शासकों  के सामने से महान (ग्रेट) शब्द को हटा दिया है। यह फैसला लंबे समय से चल रही उस बहस को आगे बढ़ाता है, जिसमें भारतीय इतिहास को सही और संतुलित नजरिए से दिखाने की मांग की जा रही थी। एनसीईआरटी के इस फैसले का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेता सुनील आंबेकर और असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने स्वागत किया है। वहीं एनसीईआरटी के इस फैसले का विपक्ष ने विरोध किया है। हालांकि अभी ये सिर्फ दावा किया जा रहा है। एनसीईआरटी ने फिलहाल इसपर कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी खुशी जताते हुए कहा कि बहुत अच्छा हुआ है… मैंने अभी देखा नहीं है कि ऐसा हुआ। लेकिन अगर ये काम कर दिया गया है तो NCERT को मेरी ओर से धन्यवाद। आगे वह बोले- “टीपू-इपू को मारो एकदम, जहाँ भेजना है उधर भेज दो। समुद्र में फेंक दो। वहीं RSS नेता सुनील आंबेकर ने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले साल से लागू होंगे। इन बदलावों से नई पीढ़ी को इतिहास की पूरी सच्चाई बताने में मदद मिलेगी। RSS नेता ने साफ किया कि किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति को किताबों से पूरी तरह हटाया नहीं गया है। इसके बजाय उनके अच्छे और बुरे.. यानी सकारात्मक और क्रूर, दोनों कामों का सही मूल्यांकन पेश किया गया है।   इतिहास की किताबों में सकारात्मक बदलाव RSS नेता सुनील आंबेकर के दावे के अनुसार, NCERT की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से अब मुगल शासक अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम के साथ जुड़े ‘महान’ जैसे विशेषण हटा दिए गए हैं। यह फैसला इस विचार पर आधारित है कि किसी भी शासक को ‘महान’ कहने से पहले उसके सभी तरह के कामों और भारतीय समाज पर पड़े उनके प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए। किस क्लास की किताबों में हुआ बदलाव? दावा किया गया है कि NCERT ने कुल 15 कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में से 11 कक्षाओं की किताबों में ये सकारात्मक बदलाव लागू कर दिए हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले शैक्षणिक वर्ष से पूरी तरह से लागू किए जाएंगे। यह बदलाव धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। इससे छात्रों और शिक्षकों को नए सिलेबस के साथ तालमेल बिठाने में आसानी होगी।

‘मुझे तो 10-10 थप्पड़ मारते थे’ — SDM छोटूलाल पर पत्नी पूनम के गंभीर आरोप से मचा हड़कंप

भीलवाड़ा भीलवाड़ा सीएनजी पंप विवाद में निलंबित आरएएस अधिकारी छोटूलाल शर्मा का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। एक ओर जहां शर्मा ने अपनी पत्नी दीपिका व्यास के साथ सामने आकर खुद को निर्दोष बताया था, वहीं अब उनकी पहली पत्नी पूनम जखोड़िया भी खुलकर सामने आई हैं और कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पूनम ने न केवल घरेलू हिंसा की बात कही है, बल्कि यह भी दावा किया है कि दोनों के बीच तलाक की प्रक्रिया अभी न्यायालय में लंबित है।   ‘मैं आज भी उनके नाम का सिंदूर भरती हूं’ पिलानी निवासी पूनम जखोड़िया ने कहा कि वह आज भी छोटूलाल शर्मा के नाम का सिंदूर भरती हैं और उन्हें अपना पति मानती हैं। उन्होंने बताया कि जब शर्मा संघर्ष के दौर में थे, तब उन्होंने गरीबी में पढ़-लिखकर परिवार को संभाला और हर मुश्किल में उनका साथ दिया। लेकिन जैसे ही छोटूलाल आरएएस अधिकारी बने, उनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया। पूनम ने भावुक होकर कहा कि गरीबी के दिनों में मैंने बच्चों को पालने के लिए खुद मेहनत की, लेकिन आरएएस बनते ही उनका दिमाग फिर गया। अब वह मुझे और बच्चों को नजरअंदाज करते हैं।   ‘मुझे थप्पड़ मारते थे, बच्चे डर से कुर्सियों के पीछे छिप जाते थे’ पूनम जखोड़िया ने अपने बयान में दावा किया कि छोटूलाल शर्मा का स्वभाव हिंसक था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि उन्होंने पंप वाले को एक थप्पड़ मारा, लेकिन मुझे तो 10-10 थप्पड़ मारते थे। बच्चे डर के मारे बिस्तर और कुर्सियों के पीछे छिप जाते थे।   पूनम ने आगे बताया कि उन्होंने 2022 में भी छोटूलाल शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि शर्मा उन्हें धमकाते थे और कहते थे कि मैं आरएएस हूं, कानून और पुलिस मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। उनका दावा है कि कई बार पुलिसकर्मी खुद उनके घर के बाहर खड़े रहते थे और शर्मा को सलाम करते थे। इस वजह से वह लंबे समय तक शिकायत करने से डरती रहीं।

अंबेडकर प्रतिमा विवाद के बीच ग्वालियर में हाई अलर्ट, हर मोड़ पर चौकसी

ग्वालियर ग्वालियर में चल रहे अंबेडकर प्रतिमा विवाद के बाद बढ़े तनाव के बीच 15 अक्टूबर को अंबेडकर समर्थकों ने एक बड़े आंदोलन चेतावनी दी थी। इस चेतावनी को देखते हुए बुधवार को पुलिस ने भी कमर कस ली है। चप्पे-चप्पे और हर आने-जाने वाले पर पुलिस की नजर है। इन हालातों के बीच आंदोलन करने वाले कुछ संगठन बैकफुट पर चले गए हैं, लेकिन पुलिस अब भी दो अप्रैल के दंगों को लेकर एहतियाद बरत रही है। पूरा ग्वालियर पुलिस ने छावनी में बदल दिया। इस दौरान कलेक्टर ने आदेश देकर धारा 163 भी लागू की हुई है। छह महीने पहले शुरू हुआ था विवाद ग्वालियर में 6 महीने पहले एक विवाद शुरू हुआ था। ये विवाद ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर हुआ था। वकीलों का एक पक्ष चाहता था कि, हाई कोर्ट परिसर में प्रतिमा लगायी जाए, लेकिन वहीं बार काउंसिल अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष समेत वकीलों का एक धड़ा इसके विरोध में था। नतीजा हाई कोर्ट परसर में हंगामा हुआ और प्रतिमा विवाद बढ़ गया। आपत्तिजनक टिप्पणी ने भड़काई थी आग इस विवाद की आग यहाँ खत्म नहीं हुई, बल्कि इसमें राजनैतिक और सामाजिक संगठनों की एंट्री हो गई। प्रतिमा लगाने के पक्षकार और विरोधी दोनों ही पक्षों में टिप्पणियाँ और शिकायतों का दौर शुरू हो गया। इसी बीच बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एड अनिल मिश्रा ने डॉ भीमराव अंबेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। इस टिप्पणी ने आग में घी का काम किया और अंबेडकर समर्थकों और आजाद समाज पार्टी भीम आर्मी समते संगठनों ने 15 अक्टूबर को एक बड़े प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। जिसके चलते आज पूरा ग्वालियर छावनी में तब्दील है। 4 हजार पुलिसकर्मियों ने संभाला मोर्चा, सोशल मीडिया पर भी नज़र कोई भी अप्रिय घटना ना हो इसके लिए पूरे ग्वालियर में 3 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी चप्पे चप्पे पर तैनात हैं। ग्वालियर के अलावा बाहर से भी 800 सुरक्षाकर्मियों का अतिरिक्त बल ग्वालियर में बुलाया गया है। सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है। इसके साथ ही लगातार सोशल मीडिया पर हो रही पोस्ट पर भी नजर रखी जा रही है। अब तक 500 से अधिक भड़काऊ पोस्ट को हटवाया जा चुका है और सौ से अधिक लीगों को इस तरह की पोस्ट के लिए नोटिस भी दिया चुका है। सीएसपी बोली- हालात नियंत्रण में ग्वालियर सीएसपी हिना खानन से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि हालत पूरी तरह नियंत्रण में हैं। पुलिस कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। आम जन को किसी तरह की परेशानी ना हो और उनको आम दिनचर्या पर किसी तरह का प्रभाव ना पड़े ये प्रयास कर रहे हैं और लोगों से भी सहयोग की अपील है। शहर की सीमाओं पर भी नाकेबंदी बहरहाल पुलिस ने शहर की सीमाओं से लेकर बाजार और मुख्य स्थानों पर तैनात है। शिवपुरी, मुरैना, झाँसी और भिंड सभी हाईवे सीमाओं पर नाकेबंदी की अगायी है और आने जाने वालों की जाँच की जा रही है।  

घर वापसी की धमकी और गंगाजल-गौमूत्र का ज़िक्र: गरबा आयोजन में लगा भड़काऊ पोस्टर

भोपाल  मध्य प्रदेश में नवरात्रि से पहले गरबा उत्सवों को लेकर सनातनी संगठनों का सख्त रुख देखने को मिल रहा है. राजधानी भोपाल में श्रीकृष्ण सेवा समिति ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर चेतावनी जारी की है. कमेटी ने पंडालों पर पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लिखा है कि गैर-हिंदू यदि गरबा में आएंगे तो उनकी 'घर वापसी' कराई जाएगी.  पोस्टर पर जूते-चप्पल, लट्ठ की फोटो के साथ 'जिहादियों की उचित व्यवस्था की जाएगी' का संदेश दिया गया है. कमेटी के कार्यकर्ता हाथों में लट्ठ लेकर पंडालों पर तैनात रहेंगे. श्रीकृष्ण सेवा समिति के अध्यक्ष गोपाल ठाकुर ने कहा, "हम गरबा देखने आने वालों को गंगाजल पिलाएंगे और गौमूत्र छिड़केंगे." पूछने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ता आत्मरक्षा के लिए लट्ठ लेकर नजर रखेंगे. हाथों में लट्ठ लेकर तैनात रहेंगे समिति के कार्यकर्ता. उधर, गरबा पंडालों पर मुस्लिम लोगों की एंट्री को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जिस तरह सनातन हिंदू विचारधारा के लोग हज यात्रा में नहीं जाते, उसी तरह उनके लोगों को भी गरबा में नहीं आना चाहिए. उन्होंने गरबा के मुख्य दरवाजे पर गोमूत्र रखने की सलाह भी दी.