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CG में अर्नब का प्रभाव होगा कम, मौसम विभाग ने कई जिलों में जारी किया बारिश का अलर्ट

रायपुर. बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में पिछले दो दिन मौसम का मिजाज बदला रहा. अर्नब का बचा हुआ हिस्सा अब दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिण ओडिशा पर अवदाब के रूप से एक्टुव है. मौसम विभाग ने इस ताकतवर सिस्टम के कमजोर होकर लो प्रेशर एरिया में बदलने की संभावना जताई है. इससे बारिश की गतिविधि में कमी आ सकती है. प्रदेश में गुरुवार को अर्नब के असर से अधिकतर इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई. वहीं एक-दो स्थानों पर जमकर बादल बरसे. सबसे अधिक अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री दुर्ग में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 18 डिग्री पेंड्रा रोड में दर्ज किया गया. रायपुरवालों सावधान! आज भी बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार आज रायपुर सहित प्रदेश में अनेक स्थानों पर बारिश होने की संभावना है. उत्तर छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात हो सकता है. रायपुर में आज आसमान सामान्यतः मेघमय रहेगा. एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. शहर का अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. इन इलाकों में हुई बारिश वर्षा के मुख्य आंकड़ों के अनुसार, सुकमा, कोंटा, नेरहरपुर और पिथौरा में 7 सेमी बारिश दर्ज की गई. वहीं तोकापाल, दोरनापाल, बड़ेराजपुर, केशकाल, छिंदगढ़, कांकेर, कुकरेल, बलरामपुर, नगरी, बसना, सरोना, कटेकल्याण, बेलरगांव, राजिम, कुसमी, धमतरी, अमलीपदर, प्रेमनगर, देवभोग, मैनपुर, फरसगांव, गादीरास और बागबाहरा में 5 से 6 सेमी वर्षा हुई. इसके अलावा माकड़ी, चारामा, सरायपाली, राजनांदगांव, पलारी, पेंड्रा रोड, मुकडेगा, करपावंड, लोहांडीगुड़ा, गुरुर, नानगुर, पथरिया, रायपुर, धनोरा, बलौदा, अर्जुन्दा, हसौद, छुरा और गरियाबंद में 4 सेमी बारिश दर्ज की गई. कुछ अन्य स्थानों पर इससे कम वर्षा हुई. कमजोर होगा अर्नब मौसम विभाग के अनुसार, अवदाब करीब 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है. गुरुवार सुबह 8.30 बजे इसका केंद्र जगदलपुर से लगभग 40 किमी उत्तर-उत्तर-पश्चिम में था. अवदाब के आगे भी उत्तर दिशा में बढ़ने और 30 अक्टूबर सुबह तक कमजोर होकर उत्तरी छत्तीसगढ़ व उससे लगे उत्तर-पश्चिम ओडिशा के ऊपर स्पष्ट कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है.

कोर एवं बफर के सभी पर्यटन जोन सामान्य रूप से संचालित, किसी भी गेट को बंद नहीं किया गया

चक्रवात अरनब के प्रभाव से सुहावना हुआ मौसम, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्रबंधन सतर्क कोर एवं बफर के सभी पर्यटन जोन सामान्य रूप से संचालित, किसी भी गेट को बंद नहीं किया गया वन्यप्राणियों की सुरक्षा, वृक्षों के गिरने और निचले क्षेत्रों में जलभराव की निगरानी के निर्देश  उमरिया बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात अरनब के प्रभाव से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व सहित उमरिया एवं शहडोल जिले में मौसम सुहावना बना हुआ है। क्षेत्र में हल्की से मध्यम असामयिक वर्षा के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल रही हैं। मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा सतर्कता बरती जा रही है तथा प्रत्येक परिस्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। चक्रवात अरनब ने 28 अक्टूबर की रात्रि लगभग एक बजे आंध्र प्रदेश के बापटला से विशाखापत्तनम के बीच नरसापुर एवं यनम के निकट समुद्र तट पर प्रवेश किया। इस दौरान हवाओं की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक रही। तटीय क्षेत्रों में प्रभाव डालने के बाद चक्रवात के अवशेष के रूप में नम हवाएं मध्य भारत की ओर बढ़ी हैं, जिसके प्रभाव से पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, अब तक वन्यप्राणियों की हानि, वृक्ष गिरने अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। वर्तमान में स्थिति सामान्य एवं नियंत्रण में है। सभी पर्यटन जोन सामान्य रूप से संचालित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला, मगधी, खितौली सहित कोर एवं बफर क्षेत्र के सभी पर्यटन जोन सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। मौसम के कारण किसी भी पर्यटन गेट को बंद नहीं किया गया है। पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यप्राणियों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन द्वारा आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। टाइगर रिजर्व के सभी मैदानी अमले को सतर्क रहने, नियमित गश्ती जारी रखने तथा निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। चक्रवात से उत्पन्न परिस्थितियों की समीक्षा के लिए क्षेत्र संचालक एवं अन्य अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों का दौरा भी किया गया। पर्यटन वाहनों को हुड लगाने के निर्देश आगामी दिनों में वर्षा बढ़ने की संभावना को देखते हुए सभी पर्यटन वाहनों को हुड अथवा कवर का उपयोग करने के लिए सूचित किया गया है, ताकि वर्षा के दौरान पर्यटकों को असुविधा न हो। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन मौसम की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखे हुए है तथा वन्यप्राणियों की सुरक्षा, पर्यटन गतिविधियों के सुचारु संचालन और मैदानी व्यवस्था को लेकर सतर्क है। क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व द्वारा सभी संबंधित अमले को आवश्यक सावधानियां बरतने और परिस्थितियों के अनुरूप तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

Cyclone Arnab: गंजम जिले में बाढ़ से बिगड़े हालात, 300 गांव प्रभावित; खराब मौसम बना बचाव अभियान में बाधा

भुवनेश्वर  ओडिशा में चक्रवात अर्नब के कारण भारी बारिश हो रही है. इससे गंजम जिले में करीब 300 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं. इन गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राज्य सरकार हवाई मदद लेने की तैयारी कर रही है. इसके लिए सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय से बात कर रही है. हालांकि, लगातार बारिश और आसमान में नीचे तक छाए बादलों के कारण हेलिकॉप्टर से लोगों को निकालने में दिक्कत आ सकती है. राज्य के मुख्य सचिव अनु गर्ग ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को यह जानकारी दी।  गंजाम जिले में पिछले तीन दिनों से भारी बारिश हो रही है. इससे रुषिकुल्या नदी का पानी बढ़ गया है. नदी का पानी आसपास के गांवों और कस्बों में भर गया है. हालात को देखते हुए NDRF और ओडिशा की बचाव टीमें लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं।  गंजाम जिले में करीब 300 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं. इससे इन गांवों में रहने वाले लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. राज्य सरकार अब लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से निकालने की तैयारी कर रही है. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से बातचीत की जा रही है।  मुख्य सचिव अनु गर्ग के मुताबिक, खराब मौसम के कारण लोगों को हेलिकॉप्टर से निकालने में देरी हो सकती है. लगातार बारिश और नीचे तक छाए बादलों की वजह से हेलिकॉप्टर उड़ाने में परेशानी आ सकती है. ऐसे में मौसम को देखते हुए बचाव अभियान चलाया जाएगा।  सोरड़ा में बाढ़ का ज्यादा असर गंजम जिले के सोरड़ा इलाके में बाढ़ का ज्यादा असर पड़ा है. अधिकारियों के मुताबिक, रुषिकुल्या नदी का पानी बढ़ने से आसपास के गांवों और कस्बों में पानी भर गया है. पिछले तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ा है।  नदी का पानी गांवों में भरने से लोगों की आवाजाही पर असर पड़ा है. कई गांव पानी से घिरे होने के कारण बचाव टीमों को वहां पहुंचने में मुश्किल हो रही है. प्रशासन इन इलाकों पर नजर रख रहा है और लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहा है।  अस्का में खतरे के निशान के करीब नदी गंजम जिले के अस्का इलाके में भी रुषिकुल्या नदी का पानी खतरे के निशान के करीब बह रहा है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है. अगर बारिश जारी रहती है, तो इन इलाकों में परेशानी और बढ़ सकती है. इसलिए प्रशासन नदी के जलस्तर और बारिश पर नजर रख रहा है. बचाव टीमें बाढ़ में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।  खराब मौसम से बचाव अभियान में दिक्कत प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना है. इसके लिए NDRF और ओडिशा की बचाव टीमें काम कर रही हैं. जिन गांवों तक सड़क के रास्ते पहुंचना मुश्किल है, वहां लोगों को निकालने के लिए हेलिकॉप्टर की मदद लेने की तैयारी है।  हालांकि, लगातार बारिश और बादलों के कारण हवाई बचाव अभियान में परेशानी आ सकती है. ऐसे में प्रशासन को मौसम के हिसाब से आगे की योजना बनानी होगी. फिलहाल गंजम जिले में बाढ़ से घिरे गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और उन्हें मदद पहुंचाना सबसे जरूरी है। 

महाचक्रवात ‘अर्नब’ से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में बदलेगा मौसम, IMD ने जारी की चेतावनी

राजनांदगांव. महाचक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ मंगलवार देर रात करीब 2 बजे आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। तूफान के दौरान 125 से 135 kmph की रफ्तार से हवाएं चलीं। जबकि झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गए। चक्रवात अर्नब के कारण आंध्रप्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश हो रही है। महाचक्रवात ‘अर्नब’ ने आंध्रप्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में जमकर कोहराम मचाया है। आंध्र प्रदेश के कई जिलों में घरों की छतें उखड़ गईं, पेड़ गिरे और निचले इलाकों में समुद्री पानी घुस गया। लैंडफॉल के बाद चक्रवात ‘अर्नब’ अब और खतरनाक हो गया है। भारी बारिश के साथ ही यह छत्तीसगढ़ और एमपी से लेकर बिहार-झारखंड में तबाही मचाने के लिए आगे बढ़ गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। चक्रवात अर्नब का असर आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक सीमित नहीं रहेगा। मौसम विभाग ने तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट जारी किया है। छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी, स्कूल-कॉलेज बंद भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के मुताबिक चक्रवात ‘अर्नब’ का असर छत्तीसगढ़ में व्य़ापक रूप से देखने को मिलेगा। इस दौरान 28 और 29 अक्टूबर को मध्यम से लेकर तेज बारिश हो सकती है।  इसके साथ ही तेज हवाएं चलने, आंधी-तूफान आने और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 50 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ‘अर्नब’ के छत्तीसगढ़ में संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है। प्रदेश में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका के बीच प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार दंतेवाड़ा, बीजापुर, बालोद, कांकेर और राजनांदगांव जिलों में कलेक्टरों के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारियों ने बुधवार, 28 अक्टूबर को स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए धमतरी जिले में भी बुधवार को सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। बालोद जिले में भी चक्रवाती तूफान और अतिवृष्टि की आशंका को देखते हुए बुधवार को सभी शासकीय, अशासकीय एवं अनुदान प्राप्त प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मध्य प्रदेश के 31 जिलों में अलर्ट बंगाल की खाड़ी से उठे गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर अब मध्य प्रदेश के मौसम पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग (IMD) भोपाल ने राज्य के 31 जिलों में अलर्ट जारी किया है, जहां आगामी कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा और कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, चक्रवात के प्रभाव से अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। खासतौर पर सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। झारखंड में 28 और 29 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश चक्रवाती तूफान अर्णब का असर झारखंड के मौसम पर भी पड़ने लगा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में 28 और 29 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान कुछ जिलों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को वज्रपात और खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।28 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिमी, दक्षिणी और आसपास के मध्य भागों में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, वज्रपात और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। दक्षिणी और आसपास के मध्य झारखंड में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 29 अक्टूबर को भी कई हिस्सों में तेज हवाओं और वज्रपात का खतरा बना रहेगा। पूर्वी और आसपास के मध्य झारखंड में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और चतरा समेत कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। बिहार में भी दिखेगा असर गाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अर्नब ने बिहार के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के मुताबिक इस चक्रवात के प्रभाव से राज्यभर में मौसम का कड़ा रुख देखने को मिलेगा। 28 अक्टूबर से शुरू हुआ बारिश, तेज हवा और वज्रपात का यह सिलसिला आगामी दिनों तक जारी रहने की आशंका है। विशेष तौर पर 29 और 30 अक्टूबर को इसका प्रभाव सबसे ज्यादा खतरनाक रहने वाला है। ​मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार, बिहार में 28 अक्टूबर से लेकर 1 नवंबर तक लगातार बारिश होने की पूरी संभावना है। इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में 40 से लेकर 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम का सबसे खराब दौर 29 और 30 अक्टूबर को देखने को मिलेगा, जब कुछ विशेष इलाकों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही कई स्थानों पर आकाशीय बिजली यानी वज्रपात का भी भयंकर खतरा मंडरा रहा है।

ओडिशा में चक्रवात अर्नब का असर तेज, भारी बारिश की आशंका; छत्तीसगढ़ और झारखंड तक मौसम विभाग की चेतावनी

नई दिल्ली भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि चक्रवात 'अर्नब' पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है। इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और 28 अक्टूबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश और यनम के तटों (बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के पास) को पार करने की संभावना है। 27 और 28 अक्टूबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में; 28 अक्टूबर को ओडिशा में; 28 और 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में; तथा 29 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। ओडिशा में कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। चक्रवात अर्नब से तेज बारिश  चक्रवात अर्नब से कई राज्यों में तेज बारिश का दौर शुरू हो चुका है. विशाखापत्तनम, श्रीकाकुलम, विजयनगरम में आंधी तूफान के साथ तेज बारिश हो रही है. वहीं आंध्र प्रदेश और ओडिशा के अलावा अब तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में भी बारिश का अलर्ट है. यहां भी कई जिलों में मौसम बदलना शुरू हो गया है. तूफान कल दोपहर तक आंध्र और ओडिशा के तटों से टकराएगा. ऐसे में यहां प्रशासन की तरफ से टीमों को तैनात किया गया है।  चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश में भारी बारिश  चक्रवात अर्नब के असर की वजह से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में सुबह से ही भारी बारिश हो रही है. मौसम विभाग के मुताबिक अगले 3 घंटों के दौरान आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली, श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम और विजयनगरम जिलों में कई जगहों पर बारिश होने की संभावना है. इस दौरान 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 70 किमी प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती हैं. पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है. फिलहाल यह चक्रवात विशाखापत्तनम से लगभग 300 किमी, काकीनाडा से 360 किमी, मछलीपट्टनम से 460 किमी और बापटला से 530 किमी दूर स्थित है. इसके कल सुबह तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यनम के पास तट को पार करने की संभावना है. आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन का कहना है कि आज और कल पूरे आंध्र प्रदेश में व्यापक बारिश होने की उम्मीद है।  आंध्र प्रदेश और ओडिशा में अलर्ट  तूफान अर्नब का सबसे ज्यादा असर आंध प्रदेश और ओडिशा में दिख रहा है. विशेषकर विशाखापत्तनम और यानम इलाके को अलर्ट पर रखा गया है. यहां मछली पकड़ने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है. ओड़िशा के दक्षिणी इलाके में सुबह से ही घने बादल हैं और यहां भारी बारिश की संभावना है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आज तटीय इलाकों में 70 से 95 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं. कल दोपहर तक तूफान अर्नब आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों से टकरा जाएगा. जिससे यहां भारी से भारी बारिश होने की संभावना है।  इन राज्यों में बारिश की संभावना     आंध्र प्रदेश     ओडिशा     तमिलनाडु     तेलंगाना     कर्नाटक     केरल     पश्चिम बंगाल भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 27 अक्तूबर के दिन चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का ही असर दिखेगा. दक्षिण भारतीय राज्यों से यह पश्चिम की तरफ बढ़ेगा. ऐसे में कोलकाता समेत दक्षिण पश्चिम बंगाल के कई जिलों में गरज-चमक के साथ लगातार बौछारें गिर रही हैं, वहीं झारखंड और रांची में भी इस चक्रवात के प्रभाव से आसमान में बादल छाए हुए हैं और देर शाम तक तेज हवाओं के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना बनी हुई है. छत्तीसगढ़ में भी सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर जैसे इलाकों में आज तेज बारिश होने की पूरी संभावना है. मौसम विभाग ने इन राज्यों में भी रेड अलर्ट जारी किया है।  दिल्ली-एनसीआर में बदल रहा मौसम दिल्ली-एनसीआर में भी पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर दिखना शुरू हो गया है. पिछले दिनों ही बारिश की वजह से मौसम साफ हुआ है, जिससे वायु गुणवत्ता स्तर में भी सुधार आया है. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम में आज शाम से तापमान में और गिरावट होने की संभावना है, जिससे अगले 3 से 4 दिनों में यहां ठंड का असर और तेज हो जाएगा. आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं के चलने से सुबह और रात के समय में हल्की सिहरन महसूस हो रही है, जिससे अब रात में कूलर बंद हो चुके हैं, क्योंकि यहां कंबलों की जरुरत पड़नी शुरू हो गई है।  अगले 2 दिन का मौसम     आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी है.      कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल, असम में बारिश का यलो अलर्ट है.      उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 2 दिनों तक बर्फबारी जारी रहेगी.      दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी.  पहाड़ों पर बर्फबारी का अलर्ट  मौसम विभाग ने पहाड़ों पर बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे पहाड़ी दर्रों फिर से तेज बर्फबारी हो सकती है. केदारनाथ में रात का तापमान माइनस 8 डिग्री तक चला गया है. अगले एक हफ्ते में मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर भारत के राज्यों में 4 से 5 डिग्री तापमान में गिरावट आएगी, जिसकी वजह से नवंबर की शुरुआत में ठंड का अच्छा असर दिखना शुरू हो जाएगा।  

28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकरा सकता है चक्रवात, झारखंड में जलजमाव और बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट

 रांची  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान अर्णब लगातार शक्तिशाली होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान पश्चिम-मध्य और उससे लगे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित है। इसके अगले दो दिनों में और अधिक तीव्र होने की आशंका है। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और उससे लगे दक्षिण ओडिशा तटों के लिए चक्रवात चेतावनी का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्णब पिछले छह घंटों के दौरान लगभग 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा है। सोमवार सुबह 11:30 बजे यह 15.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 88.2 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास स्थित था। 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान आगे उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा। इसके 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न तक आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यनम के निकट पहुंचने की बहुत अधिक संभावना है। इस दौरान अधिकतम निरंतर हवा की गति 115 से 125 किमी प्रति घंटे रह सकती है। हवा के झोंकों की रफ्तार 140 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। तट से टकराने के समय तूफान अति प्रचंड चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रह सकता है। समुद्र में बनी रहेगी खतरनाक स्थिति तूफान की स्थिति पर मौसम विभाग लगातार नजर रख रहा है। इसके प्रभाव से समुद्र में तेज हवाएं और ऊंची लहरें उठने की आशंका है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करें तथा सतर्क रहें। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से दिनांक 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक लगातार वर्षा होने की संभावना है। इसके कारण रांची में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जिसको लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है। शहर के निचले इलाकों एवं सड़कों पर जलजमाव की संभावना है। कच्चे मकान, झुग्गी-झोपड़ियां तथा कमजोर मकानों को आंशिक या भारी नुकसान पहुंच सकता है। नदियां एवं बड़े नाले उफान पर आ सकते हैं। निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है। खेतों में पानी जमा होने से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने की संभावना भी व्यक्त की गई है। उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे स्थिति पर निरंतर नजर बनाए रखें तथा आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देश – आपदा प्रबंधन, राजस्व, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य, विद्युत, जल संसाधन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी 28 से 30 अक्टूबर तक लगातार निगरानी रखें। – निचले क्षेत्रों, जलजमाव प्रवण क्षेत्रों, नदियों एवं बड़े नालों की नियमित मानिटरिंग की जाए। – सड़कों, नालियों एवं जल निकासी व्यवस्था को साफ रखा जाए। – कच्चे मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों एवं कमजोर संरचनाओं वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। – खेतों में जलजमाव की स्थिति से फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को उचित सलाह दी जाए। आम नागरिकों से अपील – निचले क्षेत्रों एवं जलजमाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक विशेष सावधानी बरतें। – अनावश्यक बाहर न निकलें। – कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार आवश्यक सावधानी अपनाएं तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। – नदियों, नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों के निकट न जाएं। – किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। ये दिए गए सुरक्षा के दिशा निर्देश – वर्षा और आंधी के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की भारी आशंका है। गरज-चमक शुरू होने पर तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित स्थान पर शरण लें। – तेज हवाओं के कारण पुराने पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स गिर सकते हैं। अपनी गाड़ियों को इनके नीचे पार्क न करें। – शहर के निचले शहरी क्षेत्रों में भारी वर्षा से पानी भर सकता है। जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से बचें। – घरों में बिजली के उतार-चढ़ाव या शार्ट सर्किट से बचने के लिए आंधी-तूफान के समय मुख्य स्विच बंद कर दें और कीमती इलेक्ट्रानिक सामानों के प्लग निकाल दें। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करें तथा सतर्क रहें। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।  

डीप डिप्रेशन तट के करीब, विशाखापट्टनम-गोपालपुर के बीच लैंडफॉल के आसार

 नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम हिस्से में स्थित डीप डिप्रेशन अब तटीय इलाकों के बहुत नजदीक पहुंच चुका है. 23 सितंबर 2026 को सुबह 5:30 बजे भारतीय समय के अनुसार यह सिस्टम अक्षांश 18.0 डिग्री उत्तर और देशांतर 84.7 डिग्री पूर्व के पास केंद्रित था।  यह आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम से करीब 70 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण पूर्व में, ओडिशा के गोपालपुर से 150 KM दक्षिण में, पुरी से 230 KM दक्षिण-पश्चिम में और विशाखापट्टनम से 150 KM पूर्व-उत्तर पूर्व में स्थित था. पिछले छह घंटों में यह पश्चिम दिशा में 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ा है।  मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 23 सितंबर की रात तक उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों को पार कर सकता है. संभावित क्रॉसिंग क्षेत्र विशाखापट्टनम और गोपालपुर के बीच है और यह कलिंगपट्टनम के करीब से गुजर सकता है. डीप डिप्रेशन की स्थिति में ही तट पार करने की संभावना है. इससे तटीय जिलों में भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्री लहरों का खतरा बढ़ गया है।  सिस्टम की वर्तमान स्थिति और गति डीप डिप्रेशन बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया बना हुआ था. पिछले कुछ दिनों में यह लगातार तेज होता रहा और अब तट के बेहद करीब आ गया है. सुबह की स्थिति में यह कलिंगपट्टनम से महज 70 किलोमीटर दूर था जो दर्शाता है कि लैंडफॉल का समय निकट है. पश्चिम दिशा में इसकी गति 12 किलोमीटर प्रति घंटे रही है।  आगे पश्चिम-उत्तर पश्चिम मार्ग अपनाने से यह आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से ओडिशा की ओर बढ़ेगा. इतने करीब आने से स्थानीय प्रभाव तेजी से महसूस होने लगेंगे. तटीय क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे और बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है. समुद्र उग्र हो सकता है इसलिए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है. निचले इलाकों में जलभराव की आशंका है।  उत्तर आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम, श्रीकाकुलम और आसपास के जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. दक्षिण ओडिशा के गंजाम, पुरी और गोपालपुर क्षेत्रों में भी यही स्थिति रहने वाली है. तेज हवाएं पेड़ों को उखाड़ने और बिजली व्यवस्था को प्रभावित करने में सक्षम हैं. नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है जिससे बाढ़ का खतरा पैदा होगा. शहरों में जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।  प्रशासन ने तटीय जिलों में अलर्ट जारी रखा है. लोगों को ऊंचे स्थानों पर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है. स्कूल और ऑफिस प्रभावित हो सकते हैं. किसानों को फसलों की सुरक्षा के उपाय करने को कहा गया है. राहत सामग्री और आपात टीमें तैयार रखी गई हैं।  तैयारी और आगे की निगरानी डीप डिप्रेशन के तट पार करने के बाद इसका प्रभाव आंतरिक क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है. तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है. सिस्टम के कमजोर पड़ने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है. मौसम विभाग नियमित बुलेटिन जारी कर रहा है. स्थानीय प्रशासन राहत शिविर और मेडिकल टीमें सक्रिय रखे हुए है।  इस तरह के सिस्टम मानसून के अंतिम चरण में आम हैं लेकिन तट के इतने करीब आकर तीव्र रहना चुनौती पैदा करता है. भारी बारिश से भूस्खलन का खतरा पहाड़ी इलाकों में बढ़ सकता है. बिजली कटौती और संचार बाधित होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए बैकअप व्यवस्था जरूरी है।  लोगों को शांत रहकर आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए. सोशल मीडिया पर अफवाहों से बचना बेहतर होगा. मौसम विभाग की वेबसाइट या ऐप से सही जानकारी लें. डीप डिप्रेशन के गुजरने के बाद भी कुछ दिनों तक मौसम अस्थिर रह सकता है. जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतें. प्रशासन और नागरिकों के सहयोग से नुकसान को कम किया जा सकता है. सभी को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि सिस्टम रात तक तट पार कर सकता है। 

मौसम का डबल अटैक! 24 घंटे में 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश, IMD ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली चिलचिलाती धूप और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से पुरा देश बेहाल है. मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में उठे एक शक्तिशाली चक्रवाती बवंडर का हाई अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, इस दोहरे मौसमी सिस्टम के कारण देश के 20 से अधिक राज्यों में अगले कुछ दिनों तक विनाशकारी आंधी, आसमानी बिजली और भीषण ओलावृष्टि के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू होने वाला है।  मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैल चुकी है. अगले कुछ ही दिनों में मानसून केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और लक्षद्वीप के बचे हुए सभी हिस्सों को अपनी चपेट में ले लेगा. इन इलाकों में मानसून की इस भारी सक्रियता के कारण लगातार घने बादल बन रहे हैं और कई तटीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। चक्रवाती बवंडर के कारण कर्नाटक में तेज बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने राज्य में अगले चार दिनों के लिए भारी बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया है. राजधानी बेंगलुरु सहित राज्य के करीब 25 जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है. विभाग ने चेतावनी दी है कि 1 जून से 3 जून के बीच राज्य के 19 से अधिक जिलों में लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी क्योंकि हवाओं की गति बेहद खतरनाक हो सकती है।  तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के क्षेत्रों में बंगाल की खाड़ी के इस बवंडर का सीधा और सबसे खतरनाक असर देखने को मिल रहा है. इन इलाकों में गरज-चमक के साथ ऐसी तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाएगी. इस चक्रवाती सिस्टम के कारण समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं, जिसे देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी है। उत्तर प्रदेश में 24 से 48 घंटों में मौसम रौद्र रूप दिखाने वाला है. वेस्ट यूपी और पूर्वांचल दोनों ही हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार बारिश होने की आशंका है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने की चेतावनी दी गई है. कम से कम 32 से 40 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।  सोमवार को बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इस चक्रवाती बवंडर का व्यापक असर दिखेगा. इन सभी राज्यों में भारी बारिश के साथ-साथ भयंकर गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है. ओडिशा और झारखंड के कुछ हिस्सों में अचानक आने वाले तीव्र आंधी-तूफान (Thundersqualls) को लेकर प्रशासन ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. लोगों को पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सलाह दी है। देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों यानी कि एनसीआर क्षेत्र में सोमवार को पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी के सिस्टम के असर दिखेगा. दिनभर बादल छाए रह सकते हैं. दिल्ली के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी, जिससे पिछले कई दिनों से जारी उमस और भीषण गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।  पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिजाज इस समय सबसे ज्यादा डरावना बना हुआ है, खासकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में. उत्तराखंड के अधिकांश पहाड़ी जिलों में घने बादलों की आवाजाही के साथ भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है. इसके अलावा, मौसम विभाग ने दोनों राज्यों के कई हिस्सों में भारी ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी दी है, जिसका सीधा असर चारधाम यात्रा मार्ग पर चल रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर पड़ सकता है। सेवेन सिस्टर्स राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैण्ड, और सिक्किम) में अगले एक हफ्ते तक लगातार मूसलाधार बारिश का सिलसिला चलने वाला है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है. लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों वाले क्षेत्रों में भूस्खलन (Landslide) होने और निचले इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बनने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।  जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू होगा, लेकिन सबसे खतरनाक चेतावनी राजस्थान के लिए है. राजस्थान के कई जिलों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की विनाशकारी रफ्तार से धूल भरी आंधी (Dust Storm) और चक्रवाती तूफान आने का अलर्ट है. धूल के इस गुबार के कारण विजिबिलिटी पूरी तरह समाप्त हो सकती है। आईएमडी ने लोगों से अपील की है कि आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के दौरान वे रूप से घरों के अंदर ही रहें. जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें. किसानों को अपनी तैयार फसलों को ओलावृष्टि और भारी बारिश से बचाने के उचित उपाय करने की सलाह दी गई है. मवेशियों को खुले स्थानों के बजाय सुरक्षित शेड में रखने के निर्देश दिए गए हैं।