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भूकंप की आफत: पड़ोसी देश में आए झटके, मेघालय में भी हिली ज़मीन

ढाका  भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में रविवार को भूकंप का झटका महसूस किया गया, जिससे देश के मेघालय राज्य तक धरती हिल गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। बांग्लादेश में रविवार को चार तीव्रता का भूकंप का झटका आया है। बांग्लादेश में भूकंप आने के बाद इसके झटके मेघालय में भी महसूस किए गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश से लगती मेघालय की सीमा के पास भारतीय समयानुसार पूर्वाह्न 11.49 बजे भूकंप महसूस किया गया। उन्होंने कहा कि मेघालय में किसी भी तरह के नुकसान या किसी के हताहत होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। वहीं, गुजरात के कच्छ में भी रविवार को भूकंप का झटका महसूस किया गया। यहां 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। आईएसआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भूकंप दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर आया और इसका केंद्र भचाऊ से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। सुबह लगभग छह बजकर 41 मिनट पर भी कच्छ में 2.6 तीव्रता का भूकंप आया था। सुबह आए भूकंप का केंद्र धोलावीरा से 24 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि इसमें जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। कच्छ जिला ‘अत्यधिक जोखिम’ वाले भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है, जहां कम तीव्रता के भूकंप नियमित रूप से आते रहते हैं। कच्छ में वर्ष 2001 में आया भूकंप पिछली दो शताब्दियों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा और दूसरा सबसे विनाशकारी भूकंप था। साल 2001 में आए भूकंप में लगभग 13,800 लोगों की मौत हो गई थी और 1.67 लाख लोग घायल हुए थे।  

भूकंप के तेज झटकों से दहला रूस, रिक्टर स्केल पर 7.8 की तीव्रता दर्ज

मॉस्को  रूस के पूर्वी क्षेत्र कामचटका में शुक्रवार को 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। इस शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि, भूकंप की वजह से अभी तक किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है। भूकंप का केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। मुख्य भूकंप के बाद 6 घंटे तक झटकों का सिलसिला जारी रहा। USGS के आंकड़ों के अनुसार, 30 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिनकी तीव्रता 4.4 से 5.8 के बीच रही। इन झटकों ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी और कई लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में चले गए।। क्षेत्रीय गवर्नर व्लादिमीर सोलोदोव ने कहा कि आपातकालीन टीमें हाई अलर्ट पर हैं। भूकंप के तेज झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल है। सोशल मीडिया पर भूकंप के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें फर्नीचर, कारें, लाइट्स तेजी के साथ हिलते दिखाई दे रहे हैं। आफ्टरशॉक्स के सिलसिले     12:28 AM – 7.8 (मुख्य झटका)     12:38 AM – 5.8     12:56 AM – 5.6     1:33 AM – 5.6     3:07 AM – 5.7     5:52 AM – 5.4 इसके अलावा, दर्जनों झटके 4.4 से 5.4 तीव्रता के बीच रहे। सुनामी का अलर्ट जारी भूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर आवासीय भवनों और सार्वजनिक सुविधाओं का निरीक्षण शुरू कर दिया गया। कई तटीय क्षेत्रों में 0.5 मीटर से 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठने का अनुमान है। अधिकारियों ने निवासियों से तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की है। इससे पहले शनिवार (13 सितंबर) को भी कामचटका में 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी। 7.8 रही भूकंप की तीव्रता अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की मानें तो भूकंप का केंद्र कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट से के पास धरती से करीब 85 किलोमीटर नीचे था. तो वहीं दूसरे भूकंप का केंद्र धरती के नीचे 30 किलोमीटर नीचे था. रूस की स्टेट जियोफिजिकल सर्विस के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 7.8 रही और उसके बाद करीब 5 आफ्टरशॉक लगे. भूकंप के झटकों के तुरंत बाद अमेरिकी मौसम विभाग ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है. इसके साथ ही लोगों से समुद्री तटों से दूर रहने की अपील की है. क्यों कामचटका में आते हैं भूकंप? पेट्रोपावलोव्स्क-कमचाट्स्की दुनिया के सबसे भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में आता है. यहां प्रशांत प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेट आपस में टकराती हैं, जिसके चलते अक्सर भूकंप आते रहते हैं. एक सप्ताह पहले शनिवार को इसी इलाके में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था. हालांकि, तब प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) ने कहा था कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है. लगातार खतरे में कामचटका लगातार आने वाले तेज भूकंप यह दिखाते हैं कि रूस का यह इलाका हमेशा खतरे में रहता है. यहां रहने वाले लोग हर बार नई दहशत के बीच जीते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार नज़र बनाए हुए हैं. इससे पहले बुधवार को भी नेपाल में भूकंप आया था. तब 4 की तीव्रता वाले भूकंप से देश हिला था. भूकंप की गहराई 10 किमी थी. एक हफ्ते में तीसरी बार भूकंप के झटके रूस के कामचटका में पिछले एक महीने के भीतर कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. बीते एक सप्ताह में ये तीसरी बार है कि जब कामचटका की धरती भूकंप के कारण कांपी है. शुक्रवार रात को यहां 2 बार झटके महसूस किए गए हैं. इससे पहले, 29 जुलाई 2025 को कामचटका तट के पास 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था. इसे पिछले एक दशक के सबसे बड़े भूकंपों में गिना गया. इस भूकंप के बाद कई देशों में अलर्ट जारी किया गया था. भूकंप के बाद समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगी थी. हालांकि मौसम विभाग के अलर्ट के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था.

धरती कांपी, मगर हिम्मत न डगमगाई: नर्सों ने नवजातों को सीने से लगाकर बचाई जान

नगांव असम में  शाम 4 बजकर 40 मिनट पर 5.9 रिएक्टर स्किल का भूकंप आया था. भूकंप के दौरान यहां नगांव जिले में अपनी जान की परवाह किए बगैर आदित्य नर्सिंग होम की नर्सें एनआईएसयू (NICU) में बच्चों की रक्षा करती नजर आईं. यह वीडियो सीसीटीवी में कैद हो गया. इस वीडियो की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं. जान की परवाह किए बच्चों की रक्षा करती दिखीं नर्सें 5.9 रिएक्टर स्किल के भूकंप से जब सभी लोग घबराहट के मारे अपनी-अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ रहे थे. ठीक उसी वक्त एक ऐसा नजारा सीसीटीवी में कैद हुआ, जिससे यह साबित होता है कि मानवता अभी भी जीवित है. भूकंप के दौरान असम के नौगांव जिले के नौगांव स्थित आदित्य नर्सिंग होम में दो नर्सों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर NISU केयर वार्ड में मासूमों की रक्षा करतीं दिखीं. हॉस्पिटल मैनेजमेंट की तरफ से यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है. सीसीटीवी वायरल होने के बाद से ही लोगों में उन दोनों नर्सों के लिए सम्मान बढ़ गया. साथ ही लोगों ने दोनों नर्सों को पुरस्कार भी देने की घोषणा कर डाली.  उदलगुरी था भूकंप का केंद्र अधिकारियों ने बताया कि रविवार को पूर्वोत्तर क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया. भूकंप से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि शाम 4.41 बजे आए भूकंप का केंद्र उदलगुरी ज़िले में था. भूकंप की गहराई 5 किलोमीटर थी. भूकंप के दौरान गुवाहाटी में दहशत में लोग अपने घरों से बाहर निकलते देखे गए थे. वहीं, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में भी लोगों ने झटके महसूस किए. अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में भी लोग दहशत में अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलते देखे गए.

रूस में जोरदार भूकंप के झटके, सुनामी की आशंका को लेकर अमेरिका-चीन सतर्क

मॉस्को  रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया है. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 7.1 दर्ज की गई और यह समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में था. वहीं, यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भूकंप की तीव्रता 7.4 और गहराई 39.5 किलोमीटर बताई. आंकड़ों में अंतर के बावजूद, दोनों एजेंसियों ने इसे गहरा और शक्तिशाली भूकंप माना है. भूकंप के बाद पैसिफिक सुनामी वार्निंग सिस्टम ने संभावित सुनामी का अलर्ट जारी किया और कहा कि इस क्षेत्र में खतरा पैदा हो सकता है.  चीन के सुनामी वार्निंग सेंटर ने भी सुबह 10:37 बजे (बीजिंग समयानुसार) सूचना जारी करते हुए कहा कि भूकंप कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में दर्ज किया गया है. केंद्र ने भूकंप की तीव्रता 7.1 और गहराई 15 किलोमीटर बताई. स्थानीय स्तर पर सुनामी का खतरा है. जापान ब्रॉडकास्टर ने जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के हवाले से बताया कि जापान, जो कामचटका के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, ने किसी भी तरह का सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया है. सुनामी की चेतावनी पर लेटेस्ट अपडेट: पूर्वी कामचटका, रूस के पास आए भूकंप के बाद अब सुनामी का कोई खतरा नहीं है. अधिकारियों ने चेतावनी को रद्द कर दिया है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रहने के लिए सामान्य सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. भूकंप की तीव्रता और संभावित प्रभावों का अभी भी मूल्यांकन किया जा रहा है लेकिन फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है. जुलाई में 8.8 तीव्रता का दर्ज किया गया था झटका यह भूकंप उसी क्षेत्र में आया है जहां जुलाई में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली झटका महसूस किया गया था. उस समय जापान, अमेरिका और कई प्रशांत द्वीपीय देशों – जैसे हवाई, चिली और कोस्टा रिका – के लिए सुनामी चेतावनियां जारी की गई थीं. पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है कामचटका  कामचटका प्रायद्वीप भूवैज्ञानिक दृष्टि से बेहद सक्रिय क्षेत्र है और इसे पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा माना जाता है. यहां आए दिन भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं. इस इलाके में बड़े स्तर पर विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं. 1952 के भूकंप से मची थी भारी तबाही साल 1952 में कामचटका को 9.0 तीव्रता के एक भीषण भूकंप ने झकझोर दिया था. यह भूकंप अब तक दर्ज किए गए सबसे ताकतवर भूकंपों में से एक माना जाता है. उस समय भूकंप के झटकों ने भारी तबाही मचाई थी और बड़े स्तर पर सुनामी भी आई थी.

जालालाबाद के पास 10 किमी गहराई पर भूकंप, अफगानिस्तान में तबाही का अंदेशा

जालालाबाद अफगानिस्तान के दक्षिणी-पूर्वी इलाके में रविवार रात भयंकर के भूकंप झटके महसूस हुए. संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रत 6.3 दर्ज की गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप की वजह से 250 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए. अफगानिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस हुए. भूकंप के बाद अभी भी लोग दहशत में हैं. भूकंप रविवार रात 12.47 बजे आया, पहले 6.0 की तीव्रता थी और इसके बाद 6.3 की तीव्रता का झटका लगा. अफगानिस्तान के नांगरहार जन स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता नकीबुल्लाह रहीमी ने बताया कि भूकंप की वजह से नौ लोगों की मौत हुई है. घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. हालांकि इसके बाद जान गंवाने वालों की संख्या काफी बढ़ गई. अब कुल 250 लोगों की जान जा चुकी है. भूकंप को लेकर तालिबान प्रवक्ता ने क्या कहा तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दुख जाहिर किया है. उन्होंने एक्स पोस्ट के जरिए कहा, ''दुर्भाग्य से, आज रात आए भूकंप से हमारे कुछ पूर्वी प्रांतों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. स्थानीय अधिकारी प्रभावित लोगों के बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं. केंद्र और आस-पास के प्रांतों से सहायता दल भी पहुँच रहे हैं.'' USGS ने कहा कि भूकंप का केंद्र नंगरहार प्रांत के जलालाबाद के पास था और इसकी गहराई जमीन की सतह से 8 किलोमीटर नीचे थी. यह भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 11:47 बजे आया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार प्रांत के स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता अजमल दरवैश के अनुसार, पूर्वी प्रांत नंगाहार में नौ लोग मारे गए और 25 अन्य घायल हो गए. गौरतलब है कि अफगानिस्तान में भयानक भूकंप का इतिहास रहा है. 7 अक्टूबर, 2023 को अफगानिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके बाद तेज झटके आए. तालिबान सरकार का अनुमान है कि कम से कम 4,000 लोग मारे गये. वहीं संयुक्त राष्ट्र ने मरने वालों की संख्या लगभग 1,500 कम बताई थी. यह हाल की स्मृति में अफगानिस्तान पर आई सबसे घातक प्राकृतिक आपदा थी. 500 लोगों की मौत अफगान के नांगरहार जन स्वास्थ्य विभाग ने प्रवक्ता नकीबुल्लाह रहीमी ने भी भूकंप की पुष्टि की है। रहीमी का कहना है कि भूकंप के तेज झटकों से कई घर धराशायी हो गए। शुरुआत में 9 लोगों की मौत और 15 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी। मगर, अब 500 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है और कई लोग घायल हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। दिल्ली NCR तक हुआ असर भूकंप का असर दिल्ली एनसीआर तक देखने को मिला। आधी रात को अचानक धरती हिलने से कई लोग अपने घरों से निकालकर बाहर भागे। लोगों में दहशत का माहौल था। हालांकि, अफगानिस्तान की तुलना में दिल्ली एनसीआर में भूकंप के झटके हल्के थे, जिससे कोई जानमाल की हानि नहीं हुई। क्यों आता है भूकंप? बता दें कि हिंदूकुश पर्वतीय क्षेत्र में टैक्टॉनिक गतिविधिया काफी सक्रिय हैं। भारतीय प्लेट और यूरोशियन प्लेट के खिसकने के कारण इस क्षेत्र में अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। इससे पहले 2 अगस्त को भी इस इलाके में 5.5 की तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र जमीन से 87 किलोमीटर नीचे दर्ज किया गया था। वहीं, 6 अगस्त को यहां 4.2 की तीव्रता वाला भूकंप महसूस किया गया था। अफगानिस्तान में इससे पहले भी कई बार भूकंप के झटके महसूस हुए हैं. 28 मई को 4.7 की तीव्रता का भूकंप आया था. हालांकि किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ था. वहीं 16 अप्रैल को 5.9 की तीव्रता का भूकंप आया था. इसके साथ ही भारत, नेपाल और चीन में भी बीते महीनों में भूकंप आ चुका है.  

रूस : कामचटका में तेज़ भूकंप से दहशत, कुरील आइलैंड के पास कंपन, खतरे में तीन जिले

 कामचटका पिछले हफ्ते इसी इलाके में 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, जिसके बाद अमेरिका, रूस और जापान सहित कई देशों में सुनामी की चेतावनियां जारी की थीं. लगातार आ रहे इन भूकंपों से आसपास के देशों में दहशत का माहौल है और विशेषज्ञ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.7 मापी गई रूस के पूर्वी क्षेत्र में स्थित कुरील द्वीप के पास कामचटका क्षेत्र में रविवार को एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.7 मापी गई है. भूकंप के बाद रूस में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है. कई देशों में सुनामी की चेतावनी जारी पिछले सप्ताह इसी क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, जिसके बाद अमेरिका, रूस और जापान सहित कई देशों में सुनामी की चेतावनी जारी की थीं. बार-बार आ रहे भूकंपों से आसपास के देशों में दहशत फैल गई है और विशेषज्ञ हालात पर लगातार निगरानी रख रहे हैं. भूकंप के बाद तीन जिलों में सुनामी की संभावना रूस के आपातकालीन सेवा मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है कि कामचटका प्रायद्वीप में आए भूकंप के बाद तीन जिलों में सुनामी की संभावना है. मंत्रालय ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने और समुद्र तटीय क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है.  

उत्तराखंड फिर कांपा! चमोली में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके

चमोली सुबह की शांति को तोड़ते हुए उत्तराखंड के चमोली जिले में आज तड़के सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 3.3 थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप रात 12:02:44 बजे महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र चमोली से 22 किलोमीटर दूर जोशीमठ के पास बताया जा रहा है। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। हाल के दिनों में भूकंप की लगातार सक्रियता यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में प्रकृति ने अपनी ताकत दिखाई हो। हाल ही में, 8 जुलाई को उत्तरकाशी जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह कंपन दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर महसूस हुआ था। चमोली में आए इस नवीनतम भूकंप ने लोगों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है। अफगानिस्तान में फिर कांपी धरती, 4.6 तीव्रता का भूकंप अफगानिस्तान में शनिवार को भूकंप दो जबरदस्त झटके महसूस किए गए। इाके अलावा म्यांमार में भी भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के एक बयान में कहा गया है कि शनिवार को अफगानिस्तान में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। ताजा भूकंप रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का था। देर रात 2.11 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 125 किमी गहराई में था। इससे पहले अफगानिस्तान में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। राम 01.26 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 190 किमी गहराई में था। इससे पहले राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के एक बयान में कहा गया था कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। 17 जुलाई को भी रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। म्यांमार में 3.7 तीव्रता का भूकंप एनसीएस के मुताबिक, शनिवार को म्यांमार में भी 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप 105 किलोमीटर की गहराई में आया। सुबह 03.26 बजे भूकंप के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले शुक्रवार को म्यांमार में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था। 17 जुलाई को भी 80 किमी की गहराई में भूकंप आया था। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव की वजह से म्यांमार एक उच्च भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से संक्षेपित भूकंप मापदंडों के अनुसार, 1990 से 2019 तक म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल 3.0 से अधिक या उसके बराबर तीव्रता वाली लगभग 140 घटनाएं घटी हैं।

उत्तराखंड फिर कांपा! चमोली में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके

चमोली सुबह की शांति को तोड़ते हुए उत्तराखंड के चमोली जिले में आज तड़के सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 3.3 थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप रात 12:02:44 बजे महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र चमोली से 22 किलोमीटर दूर जोशीमठ के पास बताया जा रहा है। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। हाल के दिनों में भूकंप की लगातार सक्रियता यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में प्रकृति ने अपनी ताकत दिखाई हो। हाल ही में, 8 जुलाई को उत्तरकाशी जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह कंपन दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर महसूस हुआ था। चमोली में आए इस नवीनतम भूकंप ने लोगों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है। अफगानिस्तान में फिर कांपी धरती, 4.6 तीव्रता का भूकंप अफगानिस्तान में शनिवार को भूकंप दो जबरदस्त झटके महसूस किए गए। इाके अलावा म्यांमार में भी भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के एक बयान में कहा गया है कि शनिवार को अफगानिस्तान में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। ताजा भूकंप रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का था। देर रात 2.11 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 125 किमी गहराई में था। इससे पहले अफगानिस्तान में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। राम 01.26 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 190 किमी गहराई में था। इससे पहले राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के एक बयान में कहा गया था कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। 17 जुलाई को भी रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। म्यांमार में 3.7 तीव्रता का भूकंप एनसीएस के मुताबिक, शनिवार को म्यांमार में भी 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप 105 किलोमीटर की गहराई में आया। सुबह 03.26 बजे भूकंप के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले शुक्रवार को म्यांमार में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था। 17 जुलाई को भी 80 किमी की गहराई में भूकंप आया था। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव की वजह से म्यांमार एक उच्च भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से संक्षेपित भूकंप मापदंडों के अनुसार, 1990 से 2019 तक म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल 3.0 से अधिक या उसके बराबर तीव्रता वाली लगभग 140 घटनाएं घटी हैं।

दिल्ली-NCR में तेज भूकंप के झटके, मेट्रो पर भी लग गया था ब्रेक, घरों से बाहर निकले लोग

झज्जर/नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार सुबह बारिश के बीच भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. भूकंप के झटके करीब 10 सेकंड तक महसूस किए गए. भूकंप के झटके सुबह 9.04 बजे महसूस किए गए. ये झटके दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, हिसार और सोनीपत में भी महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र हरियाणा का झज्जर बताया जा रहा है. रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.4 रही. भूकंप के झटकों से डरकर लोग घरों और दफ्तरों से निकलकर बाहर भागे. दिल्ली पुलिस ने बताया कि आज सुबह दिल्ली-एनसीआर में आए भूकंप में अभी तक किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है. हम सभी दिल्लीवासियों की कुशलता की कामना करते हैं. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट कर सभी के सुरक्षित होने की उम्मीद की. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि भूकंप के बाद सभी सुरक्षित होंगे. सभी के लिए प्रार्थना कर रहा हूं. बता दें कि धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं. एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं. रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल 1 से 9 तक होती है. भूकंप की तीव्रता को उसके केंद्र यानी एपिसेंटर से नापा जाता है. यानी उस केंद्र से निकलने वाली ऊर्जा को इसी स्केल पर मापा जाता है. 1 यानी कम तीव्रता की ऊर्जा निकल रही है. 9 यानी सबसे ज्यादा. बेहद भयावह और तबाही वाली लहर. ये दूर जाते-जाते कमजोर होती जाती हैं. अगर रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7 दिखती है तो उसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में तेज झटका होता है. झज्जर था भूकंप का केंद्र, 4.4 दर्ज की गई तीव्रता दिल्ली-NCR में सुबह-सुबह तेज भूकंप के झटके महसूस हुए हैं, जिसके बाद लोग अपने घरों और ऑफिस से बाहर निकल आए. बताया जा रहा है कि भूकंप के झटके दिल्ली, यूपी और हरियाणा के कई इलाकों में महसूस हुए हैं. बताया जा रहा है कि हरियाणा का झज्जर इस भूकंप का एपिक सेंटर था. वहीं, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई है.  नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप के झटके सुबह 9:04 पर महसूस किए गए. ये झटके दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, नोएडा, जयपुर समेत हरियाणा के कई इलाकों में महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र झज्जर में था और लगभग 10 सेकंड के भूकंप से धरती हिलती रही. 4.4 रही तीव्रता रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 रही. भूकंप के झटकों से डरकर लोग घरों और दफ्तरों से निकलकर बाहर भागे. ये भूकंप के झटके हरियाणा के फरीदाबाद, जींद और गुरुग्राम समेत कई शहरों में महसूस हुए.  सिस्मिक जोन 4 में आता है दिल्ली-NCR दिल्ली-NCR सिस्मिक जोन 4 में आता है जो भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील है. हाल के सालों में इस क्षेत्र में कई बार 4.0 से अधिक तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल, विशेष रूप से इंडो-ऑस्ट्रेलियन और यूरेशियन प्लेट्स के टकराव के कारण भूकंप आते हैं. NDRF ने जारी किए दिशा-निर्देश वहीं, भूकंप के बाद राष्ट्रीय आपदा राहत बल (NDRF) ने भूकंप के दौरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपयोगी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन दिशा-निर्देशों को तीन चरणों में बांटा गया है, जिसमें भूकंप से पहले, भूकंप के दौरान और भूकंप के बाद क्या-क्या करना चाहिए. मेट्रो ट्रेन में क्यों लग गया था ब्रेक रिक्टर स्केल पर 4.4 की तीव्रता वाले इस भूकंप का असर इतना था कि दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया। एहतियात के तौर पर मेट्रो ट्रेनों को कुछ मिनटों के लिए रोक दिया गया। भूकंप की वजह से ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग काफी दहशत में आ गए। हरियाणा में झज्जर के के पास सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। इसके झटके दिल्ली-एनसीआर में भी महसूस किए गए। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक पहले से निर्धारित एसओपी के तहत भूकंप की वजह से दिल्ली मेट्रो के पहिये भी थम गए। मेट्रो ट्रेनों को 2-3 मिनट के लिए रोक दिया गया। हालांकि कुछ मिनटों बाद ही स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई। अरशद नाम के एक यात्री ने कहा कि मेट्रो ट्रेन में होने की वजह से उन्हें भूकंप का अहसास नहीं हुआ। लेकिन मेट्रो को कुछ मिनटों के लिए रोक दिया गया था। 9 बजकर 4-5 मिनट पर ट्रेन को रोक दिया गया था। यात्रियों को बाद में पता चला कि भूकंप आने की वजह से ट्रेनों को रोका गया था। दिल्ली-एनसीआर की ऊंची इमारतों में लोगों ने भूकंप के झटके को अधिक महसूस किया। गुरुग्राम की अधिकतर ऊंची इमारतों से लोग बाहर निकल आए। कई लोग दफ्तरों में पहुंच चुके थे तो कई पहुंचने ही वाले थे। रात में तेज बारिश और सुबह आए भूकंप ने लोगों को डरा दिया। गुरुग्राम के अलावा फरीदाबाद, पूरी दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा आदि में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। गनीमत है कि कहीं से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।