samacharsecretary.com

निर्वाचन आयोग ने मांगी 400 बसें, HRTC ने रखी शर्त- पहले करें अग्रिम भुगतान

 शिमला  हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। पहले चरण का मतदान 26 मई को होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव में पोलिंग पार्टियों और मत पेटियों को पहुंचाने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) से 400 बसों की मांग की है। एचआरटीसी ने आयोग को स्पष्ट किया है कि बसों की बुकिंग तभी की जाएगी जब 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किया जाएगा। इस संबंध में प्रबंधन ने नियमों का हवाला दिया है। बस बुकिंग पर कितना खर्च आएगा बसों की बुकिंग पर लगभग सात करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। अग्रिम बुकिंग के लिए आयोग ने निगम से साढ़े तीन करोड़ रुपये की मांग की है। आयोग ने निगम को पत्र लिखकर बसों की मांग की है, जिसमें यह भी कहा गया है कि बसें अच्छी स्थिति में होनी चाहिए, ताकि यात्रा के दौरान कोई समस्या न आए। पहले चरण का मतदान 26 मई को होगा, और पोलिंग पार्टियों को 24 और 25 मई को रवाना किया जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद बसें मत पेटियों के साथ वापस लौटेंगी।  लोगों को पेश आ सकती है दिक्कत हालांकि, एचआरटीसी की बसों के चुनावी ड्यूटी पर जाने से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कई रूट बाधित हो सकते हैं, क्योंकि एचआरटीसी के पास पहले से ही बसों की कमी है। अक्सर बसें रूट पर खराब हो जाती हैं, और एक साथ 400 बसों का चुनावी ड्यूटी पर जाना रूट को प्रभावित कर सकता है।  तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव हिमाचल प्रदेश में 31182 पदों के लिए तीन चरणों में पंचायत चुनाव होंगे। कुल 3754 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान, सदस्य, बीडीसी और जिला परिषद के लिए चुनाव होंगे। पहले चरण का मतदान 26 मई को, दूसरे चरण का मतदान 28 मई को और तीसरे चरण का मतदान 30 मई को होगा। मतदान के दिन ही चुनावों की गणना होगी और प्रधान उप प्रधान तथा वार्ड सदस्यों के नतीजे उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे।  तीन नवंबर, 2024 को बदला था नियम एचआरटीसी ने तीन नवंबर, 2024 को नियमों में बदलाव किया था। इसके अनुसार, बसें किसी समारोह, कार्यक्रम या रैली के लिए तभी बुक की जाएंगी जब 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किया जाए। पहले सरकारी कार्यक्रमों और चुनावी रैलियों के लिए बसें बुक की जाती थीं, लेकिन भुगतान नहीं होता था। वित्तीय स्थिति ठीक न होने के बावजूद निगम बसें भेज देता था, लेकिन कई महीनों तक पैसा न आने के कारण निगम को समस्याओं का सामना करना पड़ता था।  

नगर निगम चुनाव: अकाली दल ने जारी की पहली लिस्ट, 44 प्रत्याशियों के नाम घोषित

चंडीगढ़  शिरोमणि अकाली दल ने 26 मई को होने वाले बठिंडा नगर निगम चुनाव के लिए उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर दी है। बुधवार को पार्टी द्वारा जारी इस सूची में कुल 50 वार्डों में से 44 वार्डों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं, जबकि यह भी कहा गया है कि शेष 6 वार्डों के उम्मीदवारों के नाम भी जल्द ही घोषित किए जाएंगे। पार्टी के अनुसार, उम्मीदवारों के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति, जिसमें बठिंडा शहरी हल्का प्रभारी इकबाल सिंह बबली ढिल्लों, शहरी जिला अध्यक्ष सुशील कुमार गोल्डी और इंदरजीत सिंह बरार शामिल थे। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और सांसद हरसिमरत कौर बादल के साथ चर्चा के बाद यह सूची जारी की है। शिरोमणि अकाली दल के शहरी निर्वाचन क्षेत्र के प्रभारी इकबाल सिंह बबली ढिल्लों ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह इस बार भी नगर निगम चुनावों में पार्टी ने सबसे पहले अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पार्टी को पूरा भरोसा है कि पिछले 10 वर्षों से अकाली दल सरकार द्वारा किए गए कार्यों और विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए शहर के निवासी पार्टी को चुनावों में जनादेश देंगे। इस मौके पर, जिला प्रेस सचिव ओम प्रकाश शर्मा ने पहली सूची में शामिल उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की।

निकाय चुनाव को लेकर पंजाब में तैयारियां तेज, रिटर्निंग ऑफिसर दफ्तरों में CCTV से होगी मॉनिटरिंग

 चंडीगढ़ पंजाब में 105 नगर निकायों के लिए उम्मीदवार आज से नामांकन दाखिल कर सकेंगे और साथ ही नामांकन पत्रों का विवरण संबंधित जिलों की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 मई निर्धारित की गई है। प्रदेश के 8 नगर निगमों, 76 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों के आम चुनाव 26 मई को होंगे और 29 को मतगणना के बाद चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे। आयोग के अनुसार उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए शपथ पत्रों सहित नामांकन पत्रों का विवरण संबंधित जिले की सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगा और साथ ही इसका लिंक आयोग की वेबसाइट sec.punjab.gov.in पर भी उपलब्ध रहेगा। साथ ही मतदाता अपने इलाके के उम्मीदवार के संबंध में भी वेबसाइट से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी दलों ने चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  वहीं, नामांकन करने वाला उम्मीदवार अपने साथ अधिकतम 4 लोगों को ही ले जा सकेगा। यह चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इसके बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कोई भी दल कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं होगी। जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी उम्मीदवार को चुनाव अधिकारी के कार्यालय में पहुंचकर आवेदन करना होगा। इसके बाद उनकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। 18 मई को स्क्रूटनी होगी। सभी उम्मीदवारों को उस दिन चुनाव कार्यालय जाने की अनुमति होगी। इस दौरान वे रिटर्निंग अफसर के सामने अपने एतराज रख सकेंगे। यदि किसी उम्मीदवार का फार्म रिजेक्ट होता है तो उसकी जानकारी भी दी जाएगी। 19 मई नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। 105 जगह होंगे निकाय चुनाव आठ नगर निगमों में चुनाव होंगे। इनमें मोहाली, बठिंडा, अबोहर, बरनाला, कपूरथला, मोगा, बटाला और पठानकोट शामिल हैं। इसके अलावा 76 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों में भी चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव के लिए 3977 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। सभी चुनाव शहरी क्षेत्रों में होंगे। 36 लाख वोटर करेंगे मतदान प्रशासन ने शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव करवाने की तैयारी की है। कुल 36,72,932 मतदाता वोट करेंगे। इनमें 18,00,990 पुरुष, 17.73 लाख महिलाएं और 226 अन्य मतदाता शामिल हैं। आज से आचार संहिता भी लागू हो गई है। इस संबंध में सरकार को पत्र भेजा जा रहा है। इसके बाद तबादलों पर रोक लग जाएगी। पार्टी निशान पर लड़ सकेंगे चुनाव राजनीतिक दल पार्टी निशान पर भी चुनाव लड़ सकेंगे। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों को सूचित कर दिया गया है। नामांकन फार्म के साथ एफिडेविट भी जमा करवाना होगा। सारी जानकारी ऑनलाइन अपडेट की जाएगी, ताकि लोग उम्मीदवारों की प्रोफाइल देख सकें। इसके लिए एक अलग लिंक जारी किया जाएगा। निगम चुनाव में 4 लाख तक खर्च की सीमा नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार अधिकतम 4 लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे। नगर काउंसिलों के लिए खर्च सीमा 3.60 लाख, 2.30 लाख और 2 लाख रुपए तय की गई है। वहीं नगर पंचायत चुनाव के लिए 1.40 लाख रुपए खर्च सीमा निर्धारित की गई है। हर बूथ पर तैनात होंगे 5 कर्मचारी निकाय चुनाव के लिए करीब 4 हजार बूथ बनाए गए हैं। चुनावी प्रक्रिया में 36 हजार कर्मचारी शामिल होंगे। पुलिस के साथ पूरा तालमेल रखा गया है। करीब 35,500 पुलिसकर्मी और होमगार्ड जवान तैनात किए जाएंगे। हर बूथ पर पांच कर्मचारी मौजूद रहेंगे। जिलों में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। वीडियोग्राफी से रखी जाएगी नजर पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। रिटर्निंग अफसर के कमरे के अंदर और बाहर कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। नामांकन के दौरान उम्मीदवार के साथ केवल चार लोग ही अंदर जा सकेंगे। रिटर्निंग अफसर के तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है। एडीसी और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीसी को हथियार जमा करवाने के आदेश भी जारी किए गए हैं। 29 मई को आएंगे नतीजे निकाय चुनाव के परिणाम महीने के आखिर में 29 मई को घोषित किए जाएंगे. चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणी अकाली दल ने चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है।  चुनाव में पार्टियों से टिकट लेने के लिए उम्मीदवारों में होड़ मची हुई है. पंजाब के होशियारपुर नगर निगम को लेकर भी राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव न कराने का फैसला लिया है. वोटर लिस्ट को दोबारा से तैयार करने के निर्देश दिए हैं।  बता दें कि वोटर लिस्ट को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई थी. इसको देखते हुए चुनाव आयोग ने समीक्षा की और सही वोटर लिस्ट जारी करने के लिए कहा है. चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। 

2022 नियम उल्लंघन के कारण 3500 अभ्यर्थी 2027 नगर निकाय चुनाव में नहीं लड़ सकेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने के नियमों का पालन नहीं करने पर 2022 का चुनाव लड़ चुके 3500 अभ्यर्थियों को आगामी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग की ओर से ये कार्रवाई लगातार सुनवाई के बाद की गई है। ये वे प्रत्याशी हैं, जो चुनाव खर्च का सही ब्यौरा पेश नहीं कर पाए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर-नवंबर 2026 में प्रस्तावित उपचुनाव के साथ साल 2027 में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां भी शुरु कर गी हैं। 2022 के चुनाव में जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित 30 दिन की अवधि में निर्वाचन व्यय का ब्योरा नहीं दिया था, उन्हें सुनवाई का अंतिम अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए उन्हें आयोग के भोपाल स्थित कार्यालय आने की जरूरत भी नहीं है। NIC ने की ऑनलाइन सुनवाई व्यवस्था आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने संबंधित अभ्यर्थी के जिला मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) से जुड़कर पक्ष रखने की व्यवस्था की है। हर गुरुवार सुनवाई के लिए डेढ़ घंटे निर्धारित किए हैं। अब तक करीब 3,500 अभ्यर्थियों के मामलों का निराकरण कर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया है। इसमें कुछ लोगों को 2 साल तो कुछ को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। यानी इस हिसाब से ये सभी 2027 के जून-जुलाई में होने वाले निकाय चुनाव तक अयोग्यता अवधि पूरी नहीं कर पाएंगे। इसलिए ये चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। खर्च का हिसाब न देने वाले अयोग्य घोषित यही नहीं, जिन नेताओं को 5 साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, वो 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नियम के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों में हर प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च का पाई-पाई का ब्यौरा देना जरूरी होता है। लेकिन, आयोग की जांच में सामने आया कि, इन 3500 अभ्यर्थियों ने या तो खर्च का हिसाब दिया और ना ही ऐसी जानकारी दी, जिसे पूरा और संतोषजनक माना जाए। आयोग ने इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया, लेकिन साक्ष्य पेश न कर पाने के चलते उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। भोपाल के 82 अभ्यर्थी प्रदेशभर की बात करें तो यहां 3500 के आसपास अभ्यार्थी अयोग्य घोषित किए गए हैं। जबकि, इनमें भोपाल के 82 और बैरसिया के 3 अभ्यर्थियों सहित जिला स्तर पर बड़ी सूची तैयार की गई है। बता दें कि, भोपाल में 100 डिफॉल्टरों की लिस्ट बनाई गई थी, इनमें से सिर्फ 12 ने ही स्पष्ट जानकारी आयोग को उपलब्ध कराई है, इसी के चलते अब यही अभ्यार्थी आगे चुनाव लड़ सकेंगे, बाकी 82 को दो और पांच साल तक के लिए बाहर किया गया है। अयोग्यता की अवधि 2 से 5 साल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा झटका उन नेताओं को लगा है, जो आगामी उपचुनावों या अगले स्थानीय चुनावों में फिर से दावेदारी की तैयारी कर रहे थे। अयोग्य घोषित होने के बाद अब ये अभ्यर्थी अयोग्यता की अवधि (2 से 5 वर्ष तक) पूरी होने तक किसी भी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सकेंगे। भोपाल में 82 अभ्यार्थियों पर एक्शन भोपाल के अलग अलग वार्डों में हुई इस कार्रवाई ने क्षेत्र के समीकरण तक बदल दिए हैं। 2 और 5 साल के लिए प्रतिबंधित होने वाले प्रमुख नामों में जिन्हें शामिल किया गया है, वो कुछ इस प्रकार हैं…। -वार्ड-1 से इमाम खां एडवोकेट, बेनी प्रसाद मीना को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड-2 से शेलेंद्र सोनू तोमर जैसे अभ्यर्थियों को 2 साल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। -वार्ड 12 से समीर खान और वसीम खान को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड 19 से ओसाफ अली, आदिल खां और महेंद्र सिंह को अयोग्य घोषित किया गया है। -अन्य दिग्गज: बसंती बाई, हरीश कुशवाह, इमाम हुसैन, रु म्याना रशीद, नंदा परिहार और अंजली यूनानी को भी अयोग्य घोषित किया है। पारदर्शिता से समझौता नहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि, चुनाव में धनबल के उपयोग पर लगाम लगाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने से आगे चुनाव लड़ने वाले ये सुनिश्चित करेंगे कि, अभ्यर्थी चुनाव लड़ने के 30 दिन के भीतर चुनाव खर्च का ब्यौरा देना है।

दक्षिण भारत में उलटफेर: कोलाथुर में हार, CM स्टालिन को झटका, केरल में कांग्रेस (UDF) को मिला बहुमत

तिरुवनंतपुरम/चेन्नई/गुवाहाटी  विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के ताज़ा रुझानों ने देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों, तमिलनाडु और केरलम से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। जहाँ तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन खुद अपनी सीट पर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं केरलम में कांग्रेस गठबंधन (UDF) सत्ता की ओर मजबूती से बढ़ता दिख रहा है। तमिलनाडु : स्टालिन पिछड़े, एक्टर विजय की धमाकेदार एंट्री तमिलनाडु के रुझानों ने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से पीछे चल रहे हैं। शुरुआती रुझानों के अनुसार, सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK करीब 70 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। हालांकि, चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों में TVK 2 सीटों पर, AIADMK 3 और DMK 1 सीट पर आगे दिखाई दे रही है। कुल सीटों के हिसाब से तमिलनाडु में DMK 46 सीटों पर बढ़त के साथ मुकाबला कड़ा करने की कोशिश में है। केरलम : UDF ने मारी बाजी, बाजी पलटते हुए कांग्रेस आगे केरलम में 'सत्ता परिवर्तन' का रिवाज बरकरार रहता दिख रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन को 83 सीटों पर बढ़त हासिल हो गई है, जो बहुमत के आंकड़े से कहीं आगे है। सत्ताधारी LDF फिलहाल 53 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। एग्जिट पोल के अनुमानों के अनुरूप ही यहाँ कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनती दिखाई दे रही है। असम और पुडुचेरी : बीजेपी की मजबूत वापसी उत्तर-पूर्वी राज्य असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी पकड़ मजबूत करती दिख रही है। असम : मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी 69 सीटों पर आगे चल रही है, जिससे सत्ता में वापसी के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। पुडुचेरी : यहाँ भी बीजेपी 22 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे NDA गठबंधन की वापसी तय मानी जा रही है। रुझानों के आने के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। दोपहर तक इन सभी राज्यों की अंतिम तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

बंगाल चुनाव में अहम मुकाबला, कोलकाता, हावड़ा और 24 परगना की 91 सीटें होंगी निर्णायक

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आगामी 4 मई को सामने आ जाएंगे। इससे पहले राज्य में सियासी पारा हाई है। पहले चरण के चुनावों में बंपर वोटिंग के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी को इस बार बंगाल में बदलाव की उम्मीद है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर जीत का दावा कर रही हैं। ऐसे में मतगणना के दिन का बेसब्री से इंतजार है। इतिहास की बात करें तो उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों या जंगलमहल के वनक्षेत्र की सरकार बनाने में बहुत कम भूमिका होती है। यहां आमतौर पर सत्ता का फैसला दक्षिणी बंगाल के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से ही होता है और इस बार भी निगाहें इन्हीं सीटों पर टिकी हैं। उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले इस चुनावी जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। यह दोनों जिले कोलकाता और हावड़ा के साथ तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए यह सत्ता हासिल करने का महत्वपूर्ण रास्ता है। भाजपा सत्तारूढ़ पार्टी के दक्षिणी गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जिसके साथ दो सबसे बड़े जिले, 33 सीट वाला उत्तर 24 परगना और 31 सीट वाला दक्षिण 24 परगना, एक बार फिर बंगाल के चुनाव जीतने की कुंजी साबित होंगे। ये हैं सबसे निर्णायक क्षेत्र कोलकाता की 11 सीट और हावड़ा की 16 सीट के साथ, ये चार जिले बंगाल विधानसभा की 294 सीट में से 91 सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सदन का लगभग एक तिहाई हिस्सा होने के कारण 2026 के चुनावों में सबसे निर्णायक क्षेत्र बन जाते हैं। वहीं उत्तर और दक्षिण 24 परगना उस मुकाबले का केंद्र बने हुए हैं, जिसे बंगाल के राजनेता अक्सर ''बंगाल के उत्तर प्रदेश का चुनावी नक्शा'' कहते हैं। यह वह क्षेत्र है जो राज्य सचिवालय नबान्न में सत्ता बना या बिगाड़ सकता है। प्रेसिडेंसी प्रभाग में कोलकाता, हावड़ा, नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना शामिल है तथा यहां 111 सीट है, जो तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ बना हुआ है। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के मजबूत प्रयासों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने इन 111 में से 96 सीट जीतीं, जबकि भाजपा को केवल 14 और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) को एक सीट ही मिल पाई। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत की और यहां की 21 सीट पर बढ़त हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 90 सीट में आगे रही। TMC-BJP दोनों को उम्मीद तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी गणित बिल्कुल स्पष्ट है। वह अगर इस स्थिति को बरकरार रखती है तो उसका लगातार चौथी बार सत्ता में आने का रास्ता खुला रहेगा। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, “अगर हम उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा को अपने पास बनाए रखते हैं, तो बंगाल हमारे पास रहेगा। ये सिर्फ सीट नहीं हैं, ये ममता बनर्जी की राजनीति का सामाजिक आधार हैं।” जबकि भाजपा इसी भौगोलिक क्षेत्र को सत्ता परिवर्तन का मार्ग मानती है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "उत्तर 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा में पैठ बनाए बिना हमारे लिए सत्ता तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। मतुआ और शरणार्थी वोट के कारण उत्तर 24 परगना ही हमारे लिए सत्ता का प्रवेश द्वार है।"

हरियाणा के पंचकूला में चुनावी माहौल गर्म, नई वार्डबंदी ने नेताओं की बढ़ाई चुनौती

पंचकूला. पंचकूला नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी पारा अब चरम पर पहुंच चुका है। शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सोमवार को जैसे ही चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा, राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर जाएंगे। इस बार मुकाबला सीधा और बेहद दिलचस्प रहने वाला है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से पहले ही दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वार्डबंदी पूरी होने के बाद पंचकूला की राजनीतिक बिसात पूरी तरह बदल चुकी है। कई दिग्गज पार्षदों के लिए अपने पुराने वार्ड से चुनाव लड़ना अब संभव नहीं रहा, जिससे अंदरखाने असंतोष भी देखने को मिल रहा है। कई मौजूदा पार्षदों के वार्ड महिला या एससी/बीसी में आरक्षित हो गए हैं , कुछ वार्ड, जो पहले आरक्षित थे, अब जनरल कैटेगरी में आ गए हैं , पुराने नेताओं को अब नए क्षेत्रों में “जमीन तलाशनी” पड़ रही है। मेयर पद पर भी जबरदस्त घमासान तय सिर्फ पार्षद ही नहीं, मेयर पद को लेकर भी दोनों दलों में जबरदस्त खींचतान है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों के चयन में “सर्वे फार्मूला” अपना रही हैं, ताकि जीत की संभावना अधिकतम की जा सके। 11 वार्ड सामान्य के लिए नगर निगम पंचकूला के कुल 20 वार्डों में से 9 वार्ड महिला, एससी और बीसी कैटेगरी के लिए आरक्षित हैं, जबकि 11 वार्ड सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं, जहां महिला व पुरुष दोनों चुनाव लड़ सकेंगे। कई पुराने पार्षदों की हिल चुकी है सीट वार्ड नंबर 1 से भाजपा पार्षद रहे नरेंद्र लुबाना और वार्ड नंबर 2 से भाजपा के ही सुरेश कुमार वर्मा का वार्ड महिला आरक्षित है। वहीं पहले महिला आरक्षित रहे वार्ड नंबर 3 और 4 अब सामान्य (जनरल) श्रेणी में आ गए हैं। इन दोनों वार्डों से भाजपा की महिला पार्षद रितु गोयल और सोनिया सूद निर्वाचित थीं। सेक्टर 16, 17 और 18 को मिलाकर बना वार्ड नंबर 6 भी सामान्य श्रेणी में आ गया है। वार्ड नंबर 8 को अनुसूचित जाति का आरक्षण समाप्त कर जनरल कैटेगरी में डाल दिया गया है। वार्ड 12 जोकि पहले महिला आरक्षित था, यहां से ओमवती पूनिया जोकि पहले निर्दलीय और भाजपा में हैं, का वार्ड अब ओपन कैटेगरी में आ चुका है। वार्ड नंबर 15, जहां से पहले कांग्रेस के गौतम प्रसाद पार्षद थे, वह इस बार महिला आरक्षित है। वार्ड नंबर 16, जहां भाजपा के राकेश कुमार वाल्मीकि पार्षद थे, अब अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। वार्ड नंबर 17, जहां से कांग्रेस के अक्षयदीप चौधरी पार्षद थे, अब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुका है। वार्ड नंबर 18, कांग्रेस के पूर्व पार्षद संदीप सिंह सोही का वार्ड, अब पिछड़ा वर्ग बी के लिए आरक्षित हो चुका है। जबकि वार्ड नंबर 19, अब कांग्रेस की पूर्व पार्षद परमजीत कौर का वार्ड, पिछड़ा वर्ग ए के लिए और वहीं वार्ड नंबर 20, जहां से कांग्रेस के सलीम खान पार्षद हैं, को जनरल कैटेगरी में ही रखा गया है। जमीनी स्तर पर शुरू हुआ समीकरणों का खेल वार्डों के नए स्वरूप के साथ ही हर क्षेत्र में जातीय, सामाजिक और स्थानीय मुद्दों के आधार पर समीकरण जोड़े जा रहे हैं। – गांव और शहरी क्षेत्रों का मिश्रण कई वार्डों में निर्णायक भूमिका निभाएगा। – सेक्टर बनाम कालोनी का समीकरण भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा। – नए मतदाताओं को साधने के लिए प्रचार की रणनीति बदली जा रही है। पंचकूला नगर निगम के वार्डों का विवरण     वार्ड नंबर 1: सकेतड़ी, भैंसा टिब्बा, एमडीसी सेक्टर-6, सेक्टर-4     वार्ड नंबर 2: एमडीसी सेक्टर-5, सेक्टर-2, 6 (माजरी क्षेत्र)     वार्ड नंबर 3: सेक्टर-7, सेक्टर-8     वार्ड नंबर 4: सेक्टर-9, सेक्टर-10     वार्ड नंबर 5: सेक्टर-15     वार्ड नंबर 6: सेक्टर-16, 17, 18     वार्ड नंबर 7: राजीव कालोनी     वार्ड नंबर 8: इंदिरा कालोनी, बुढनपुर     वार्ड नंबर 9: सेक्टर-19, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2     वार्ड नंबर 10: अभयपुर, सेक्टर-14, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1     वार्ड नंबर 11: सेक्टर-12, 12ए, रैली, रैला गांव     वार्ड नंबर 12: सेक्टर-11, सेक्टर-4, हरिपुर     वार्ड नंबर 13: सेक्टर-4, आधा सेक्टर-21, देवीनगर     वार्ड नंबर 14: महेशपुर, मद्रासी कालोनी, फतेहपुर के पास की सोसायटी, आधा सेक्टर-21     वार्ड नंबर 15: कुंडली, आधा फतेहपुर, आधा सेक्टर-20     वार्ड नंबर 16: चंडी कोटला, बीड़ घग्गर, खड़क मंगौली     वार्ड नंबर 17: आधा खड़ग मंगौली, चैंकी, सेक्टर-23, 24, 25, नग्गल मोगीनंद, नाडा     वार्ड नंबर 18: बाना, मदनपुर, सेक्टर-26, 27, 28     वार्ड नंबर 19: रामगढ़, बिल्ला, जसवंतगढ़, दबकौरी, माणक्या, भानू     वार्ड नंबर 20: कोट, खंगेसरा, टोका, अलीपुर, सुखदर्शनपुर, नग्गल, जलौली, खटौली

चुनाव के दौरान पार्टियों की बढ़ी चिंता, ECI ने चुनावी खर्च का विवरण तय समय में जमा करने का दिया आदेश

नई दिल्ली  विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रमुखों को एक जरूरी याद दिलाई है. आयोग ने दलों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव खत्म होने की तय समय-सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च और उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण जमा कर दें।  चुनाव आयोग ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों के लिए चंदे की सटीक जानकारी देना अनिवार्य है. इसमें उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण भी शामिल होना चाहिए. आयोग ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि दलों द्वारा दी गई जानकारी में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सभी पंजीकृत राष्ट्रीय दलों, राज्य मान्यता प्राप्त दलों और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के अध्यक्षों और महासचिवों को जारी किए गए एक हालिया पत्र में, चुनाव आयोग ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, उसने 2001 में एक प्रारूप तय किया था. इस प्रारूप को समय-समय पर (27 दिसंबर 2001, 22 मार्च 2004, 13 जनवरी 2009, 21 जनवरी 2013 और 15 जनवरी 2022 को) संशोधित किया गया है।  इस प्रारूप के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रत्येक विधानसभा या लोकसभा चुनाव के बाद अपने चुनाव खर्च का विवरण जमा करना अनिवार्य है. यह विवरण चुनाव पूरा होने के 75 से 90 दिनों के भीतर जमा करना होगा।  चुनाव आयोग (ECI) ने कहा है कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों को अपने चुनाव खर्च का विवरण सीधे चुनाव आयोग को सौंपना होगा. वहीं, गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत पार्टियों (RUPPs) को यह विवरण उस राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को देना होगा जहां पार्टी का मुख्यालय स्थित है।  आयोग ने आगे बताया कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के खातों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्देश दिया गया है. इसके अनुसार, पार्टियों को चुनाव खत्म होने के 30 दिनों के भीतर एक 'आंशिक चुनाव खर्च विवरण' जमा करना होगा. इसमें उन सभी दान, चंदे या एकमुश्त भुगतान की जानकारी देनी होगी जो पार्टी ने चुनाव के दौरान अपने उम्मीदवारों को दिए हैं. यह नियम 8 सितंबर, 2015 से प्रभावी है।  चुनाव आयोग ने कहा कि उनके सामने ऐसे कई मामले आए हैं जहां जमा किए गए खातों या बयानों में सही ढंग से मिलान नहीं किया गया था. आयोग ने यह भी नोट किया कि ऐसा लगता है कि उसके निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है।  चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों को दिए गए दान या एकमुश्त राशि का सही-सही विवरण देना अनिवार्य है. यदि राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग/मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी गई जानकारी और उम्मीदवारों द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा किए गए चुनावी खर्च के विवरण (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 के तहत) में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो चुनाव आयोग 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 89(5) के तहत उचित कार्रवाई करेगा।  चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को यह निर्देश भी जारी किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों को इस बारे में सूचित करें।  गौरतलब है कि असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में संपन्न हुए. चुनाव आयोग के अनुसार, असम में अनुमानित 85.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि केरल में 78.03 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में और तमिलनाडु में एक ही चरण में होंगे. पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे व अंतिम चरण के लिए 29 अप्रैल को होगा. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा. चुनाव नतीजे एक साथ 4 मई को जारी होंगे. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को और केरल का 23 मई को समाप्त होगा। वहीं, तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा होगा। 

उत्तर बस्तर कांकेर : नगर पंचायत उप निर्वाचन पखांजूर : निर्वाचक नामावली तैयार करने कार्यक्रम जारी

उत्तर बस्तर कांकेर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर द्वारा नगर पंचायत पखांजूर के उप निर्वाचन को सम्पन्न कराये जाने के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु कार्यक्रम जारी किया गया है। जिसके अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति 09 अप्रैल तक किया जाकर निर्वाचक नामावली की प्रारंभिक प्रारूप तैयार करने हेतु कर्मचारियों का चयन एवं प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पखांजूर, तहसीलदार पखांजूर तथा मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगर पंचायत पखांजूर को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। भारत निर्वाचन आयोग के विधानसभा की अद्यतन निर्वाचक नामावली प्राप्त करने के बाद विधानसभा की निर्वाचक  नामावली को वार्डवार पृथक कर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी तथा प्रचलित परिसीमन के आधार पर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा निर्वाचक नामावली को वार्डवार एवं भागवार मार्किंग की जाएगी। वार्डवार एवं भागवार चिन्हित निर्वाचकों को सॉफ्टवेयर के माध्यम से दर्शित वार्ड के संबंधित भाग के अनुभाग में 10 अप्रैल तक शिफ्ट किया जाएगा तथा 11 अप्रैल तक निर्वाचक नामावली के पीडीएफ तैयार करके जांच कर त्रुटि का सुधार किया जाएगा एवं चेकलिस्ट संशोधन पश्चात प्रारूप निर्वाचक नामावली मुद्रण हेतु जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा और जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा 13 अप्रैल तक निर्वाचक नामावली का मुद्रण कराया जाकर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन एवं दावे तथा आपत्तियां 13 अप्रैल से 20 अप्रैल के दोपहर 03 बजे तक प्राप्त की जाएगी। दावा आपत्ति निपटारे की अंतिम तारीख 23 अप्रैल निर्धारित की गई है। प्ररूप क-1 में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल शुक्रवार निर्धारित की गई है।  रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त     कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पखांजूर को रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा तहसीलदार पखांजूर को सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और अपर कलेक्टर अंतागढ़ को अपील प्राधिकारी के कृत्यों के संपादन के लिए पदाभिहित अधिकारी नियुक्त किया गया है। 

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां, जालंधर में बनेगा कैंप, MP चन्नी और CM मान का चुनावी क़िला

जालंधर जालंधर से सांसद एवं पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने जालंधर के खजूरला गांव में अपना घर बना लिया है। चन्नी ने बताया कि घर में पाठ रखा है।को पाठ के भोग के साथ गृह प्रवेश होगा। चन्नी ने कहा कि चुनाव के वक्त उन्होंने जालंधर के लोगों से वादा किया था कि वह यहीं पर रहेंगे। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी जालंधर के गांव खजूरला का चुनाव किया गया है। ये गांव रोड कनेक्टेड होने के साथ कैंटोनमेंट के पास है। हाईवे से कनेक्ट भी है। जालंधर विधानसभा चुनाव का कैंप बनना शुरू हो गया है। इससे पहले सीएम भगवंत मान ने भी ओल्ड बारादरी में अपना घर लिया है। भाजपा के बड़े नेताओं के पहले से ही जालंधर में घर हैं। चन्नी ने कहा कि लोगों के साथ किया अपना एक और वादा पूरा कर दिया है। चुनाव के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वह सिर्फ वोट लेने नहीं आए, बल्कि जालंधर के पक्के निवासी बनकर यहां के लोगों की सेवा करेंगे। इसी वादे को निभाते हुए उन्होंने जालंधर में अपना नया घर तैयार कर लिया है। जहां अब वह पक्के तौर पर रहेंगे। 5 कनाल में बनाए घर-आफिस में आज पाठ का भोग अपने इस नए घर के बारे में जानकारी देते हुए चन्नी ने बताया कि यह एक बहुत ही साधारण पर सुविधाजनक घर है। इसमें निचली मंजिल पर एक बड़ा ऑफिस बनाया गया है ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को मिलने में कोई दिक्कत न आए। ऊपरी मंजिल पर उनका बेडरूम है। उन्होंने कहा कि पहले वह किराए के फ्लैट में रह रहे थे, जहां आम लोगों का आना-जाना थोड़ा मुश्किल था, पर अब जीटी रोड के नजदीक इस घर में कोई भी आसानी से पहुंच सकता है। पूरे हलके के लोगों को पहुंचना आसान होगा सांसद चन्नी के मुताबिक यह जगह कुदरती तौर पर ऐसी मिल गई है जो जालंधर शहर के साथ-साथ नकोदर, फिल्लौर और गोराया जैसे इलाकों के लोगों के लिए भी बहुत नजदीक पड़ती है। उन्होंने कहा कि जालंधर के लोगों ने उन्हें बहुत मान बख्शा (सम्मान दिया) है, इसलिए वह अब अपना ज्यादातर समय यहां ही बिताएंगे। संसद के सेशन के दिनों को छोड़कर वह बाकी सारा समय जालंधर में ही मौजूद रहेंगे। चन्नी बोले- अब यह घर ही बाहरी कहने वालों को जवाब देगा नए घर में प्रवेश करने के मौके पर उन्होंने धार्मिक मर्यादा का पूरा ख्याल रखा है। उन्होंने बताया कि घर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश करवाया गया है और पाठ के भोग डाले जाएंगे। इस मौके कीर्तन का प्रवाह भी चलेगा। उनकी पत्नी भी जालंधर पहुंच चुकी है और जल्द ही बच्चे भी उनके साथ यहां रहने के लिए आ जाएंगे। विरोधियों द्वारा बाहरी कहे जाने के सवाल पर चन्नी ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब यह घर ही उन सबको जवाब देगा।