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हरियाणा के पंचकूला में चुनावी माहौल गर्म, नई वार्डबंदी ने नेताओं की बढ़ाई चुनौती

पंचकूला. पंचकूला नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी पारा अब चरम पर पहुंच चुका है। शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सोमवार को जैसे ही चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा, राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर जाएंगे। इस बार मुकाबला सीधा और बेहद दिलचस्प रहने वाला है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से पहले ही दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वार्डबंदी पूरी होने के बाद पंचकूला की राजनीतिक बिसात पूरी तरह बदल चुकी है। कई दिग्गज पार्षदों के लिए अपने पुराने वार्ड से चुनाव लड़ना अब संभव नहीं रहा, जिससे अंदरखाने असंतोष भी देखने को मिल रहा है। कई मौजूदा पार्षदों के वार्ड महिला या एससी/बीसी में आरक्षित हो गए हैं , कुछ वार्ड, जो पहले आरक्षित थे, अब जनरल कैटेगरी में आ गए हैं , पुराने नेताओं को अब नए क्षेत्रों में “जमीन तलाशनी” पड़ रही है। मेयर पद पर भी जबरदस्त घमासान तय सिर्फ पार्षद ही नहीं, मेयर पद को लेकर भी दोनों दलों में जबरदस्त खींचतान है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों के चयन में “सर्वे फार्मूला” अपना रही हैं, ताकि जीत की संभावना अधिकतम की जा सके। 11 वार्ड सामान्य के लिए नगर निगम पंचकूला के कुल 20 वार्डों में से 9 वार्ड महिला, एससी और बीसी कैटेगरी के लिए आरक्षित हैं, जबकि 11 वार्ड सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं, जहां महिला व पुरुष दोनों चुनाव लड़ सकेंगे। कई पुराने पार्षदों की हिल चुकी है सीट वार्ड नंबर 1 से भाजपा पार्षद रहे नरेंद्र लुबाना और वार्ड नंबर 2 से भाजपा के ही सुरेश कुमार वर्मा का वार्ड महिला आरक्षित है। वहीं पहले महिला आरक्षित रहे वार्ड नंबर 3 और 4 अब सामान्य (जनरल) श्रेणी में आ गए हैं। इन दोनों वार्डों से भाजपा की महिला पार्षद रितु गोयल और सोनिया सूद निर्वाचित थीं। सेक्टर 16, 17 और 18 को मिलाकर बना वार्ड नंबर 6 भी सामान्य श्रेणी में आ गया है। वार्ड नंबर 8 को अनुसूचित जाति का आरक्षण समाप्त कर जनरल कैटेगरी में डाल दिया गया है। वार्ड 12 जोकि पहले महिला आरक्षित था, यहां से ओमवती पूनिया जोकि पहले निर्दलीय और भाजपा में हैं, का वार्ड अब ओपन कैटेगरी में आ चुका है। वार्ड नंबर 15, जहां से पहले कांग्रेस के गौतम प्रसाद पार्षद थे, वह इस बार महिला आरक्षित है। वार्ड नंबर 16, जहां भाजपा के राकेश कुमार वाल्मीकि पार्षद थे, अब अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। वार्ड नंबर 17, जहां से कांग्रेस के अक्षयदीप चौधरी पार्षद थे, अब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुका है। वार्ड नंबर 18, कांग्रेस के पूर्व पार्षद संदीप सिंह सोही का वार्ड, अब पिछड़ा वर्ग बी के लिए आरक्षित हो चुका है। जबकि वार्ड नंबर 19, अब कांग्रेस की पूर्व पार्षद परमजीत कौर का वार्ड, पिछड़ा वर्ग ए के लिए और वहीं वार्ड नंबर 20, जहां से कांग्रेस के सलीम खान पार्षद हैं, को जनरल कैटेगरी में ही रखा गया है। जमीनी स्तर पर शुरू हुआ समीकरणों का खेल वार्डों के नए स्वरूप के साथ ही हर क्षेत्र में जातीय, सामाजिक और स्थानीय मुद्दों के आधार पर समीकरण जोड़े जा रहे हैं। – गांव और शहरी क्षेत्रों का मिश्रण कई वार्डों में निर्णायक भूमिका निभाएगा। – सेक्टर बनाम कालोनी का समीकरण भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा। – नए मतदाताओं को साधने के लिए प्रचार की रणनीति बदली जा रही है। पंचकूला नगर निगम के वार्डों का विवरण     वार्ड नंबर 1: सकेतड़ी, भैंसा टिब्बा, एमडीसी सेक्टर-6, सेक्टर-4     वार्ड नंबर 2: एमडीसी सेक्टर-5, सेक्टर-2, 6 (माजरी क्षेत्र)     वार्ड नंबर 3: सेक्टर-7, सेक्टर-8     वार्ड नंबर 4: सेक्टर-9, सेक्टर-10     वार्ड नंबर 5: सेक्टर-15     वार्ड नंबर 6: सेक्टर-16, 17, 18     वार्ड नंबर 7: राजीव कालोनी     वार्ड नंबर 8: इंदिरा कालोनी, बुढनपुर     वार्ड नंबर 9: सेक्टर-19, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2     वार्ड नंबर 10: अभयपुर, सेक्टर-14, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1     वार्ड नंबर 11: सेक्टर-12, 12ए, रैली, रैला गांव     वार्ड नंबर 12: सेक्टर-11, सेक्टर-4, हरिपुर     वार्ड नंबर 13: सेक्टर-4, आधा सेक्टर-21, देवीनगर     वार्ड नंबर 14: महेशपुर, मद्रासी कालोनी, फतेहपुर के पास की सोसायटी, आधा सेक्टर-21     वार्ड नंबर 15: कुंडली, आधा फतेहपुर, आधा सेक्टर-20     वार्ड नंबर 16: चंडी कोटला, बीड़ घग्गर, खड़क मंगौली     वार्ड नंबर 17: आधा खड़ग मंगौली, चैंकी, सेक्टर-23, 24, 25, नग्गल मोगीनंद, नाडा     वार्ड नंबर 18: बाना, मदनपुर, सेक्टर-26, 27, 28     वार्ड नंबर 19: रामगढ़, बिल्ला, जसवंतगढ़, दबकौरी, माणक्या, भानू     वार्ड नंबर 20: कोट, खंगेसरा, टोका, अलीपुर, सुखदर्शनपुर, नग्गल, जलौली, खटौली

चुनाव के दौरान पार्टियों की बढ़ी चिंता, ECI ने चुनावी खर्च का विवरण तय समय में जमा करने का दिया आदेश

नई दिल्ली  विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रमुखों को एक जरूरी याद दिलाई है. आयोग ने दलों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव खत्म होने की तय समय-सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च और उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण जमा कर दें।  चुनाव आयोग ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों के लिए चंदे की सटीक जानकारी देना अनिवार्य है. इसमें उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण भी शामिल होना चाहिए. आयोग ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि दलों द्वारा दी गई जानकारी में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सभी पंजीकृत राष्ट्रीय दलों, राज्य मान्यता प्राप्त दलों और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के अध्यक्षों और महासचिवों को जारी किए गए एक हालिया पत्र में, चुनाव आयोग ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, उसने 2001 में एक प्रारूप तय किया था. इस प्रारूप को समय-समय पर (27 दिसंबर 2001, 22 मार्च 2004, 13 जनवरी 2009, 21 जनवरी 2013 और 15 जनवरी 2022 को) संशोधित किया गया है।  इस प्रारूप के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रत्येक विधानसभा या लोकसभा चुनाव के बाद अपने चुनाव खर्च का विवरण जमा करना अनिवार्य है. यह विवरण चुनाव पूरा होने के 75 से 90 दिनों के भीतर जमा करना होगा।  चुनाव आयोग (ECI) ने कहा है कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों को अपने चुनाव खर्च का विवरण सीधे चुनाव आयोग को सौंपना होगा. वहीं, गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत पार्टियों (RUPPs) को यह विवरण उस राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को देना होगा जहां पार्टी का मुख्यालय स्थित है।  आयोग ने आगे बताया कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के खातों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्देश दिया गया है. इसके अनुसार, पार्टियों को चुनाव खत्म होने के 30 दिनों के भीतर एक 'आंशिक चुनाव खर्च विवरण' जमा करना होगा. इसमें उन सभी दान, चंदे या एकमुश्त भुगतान की जानकारी देनी होगी जो पार्टी ने चुनाव के दौरान अपने उम्मीदवारों को दिए हैं. यह नियम 8 सितंबर, 2015 से प्रभावी है।  चुनाव आयोग ने कहा कि उनके सामने ऐसे कई मामले आए हैं जहां जमा किए गए खातों या बयानों में सही ढंग से मिलान नहीं किया गया था. आयोग ने यह भी नोट किया कि ऐसा लगता है कि उसके निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है।  चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों को दिए गए दान या एकमुश्त राशि का सही-सही विवरण देना अनिवार्य है. यदि राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग/मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी गई जानकारी और उम्मीदवारों द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा किए गए चुनावी खर्च के विवरण (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 के तहत) में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो चुनाव आयोग 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 89(5) के तहत उचित कार्रवाई करेगा।  चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को यह निर्देश भी जारी किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों को इस बारे में सूचित करें।  गौरतलब है कि असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में संपन्न हुए. चुनाव आयोग के अनुसार, असम में अनुमानित 85.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि केरल में 78.03 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में और तमिलनाडु में एक ही चरण में होंगे. पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे व अंतिम चरण के लिए 29 अप्रैल को होगा. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा. चुनाव नतीजे एक साथ 4 मई को जारी होंगे. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को और केरल का 23 मई को समाप्त होगा। वहीं, तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा होगा। 

उत्तर बस्तर कांकेर : नगर पंचायत उप निर्वाचन पखांजूर : निर्वाचक नामावली तैयार करने कार्यक्रम जारी

उत्तर बस्तर कांकेर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर द्वारा नगर पंचायत पखांजूर के उप निर्वाचन को सम्पन्न कराये जाने के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु कार्यक्रम जारी किया गया है। जिसके अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति 09 अप्रैल तक किया जाकर निर्वाचक नामावली की प्रारंभिक प्रारूप तैयार करने हेतु कर्मचारियों का चयन एवं प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पखांजूर, तहसीलदार पखांजूर तथा मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगर पंचायत पखांजूर को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। भारत निर्वाचन आयोग के विधानसभा की अद्यतन निर्वाचक नामावली प्राप्त करने के बाद विधानसभा की निर्वाचक  नामावली को वार्डवार पृथक कर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी तथा प्रचलित परिसीमन के आधार पर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा निर्वाचक नामावली को वार्डवार एवं भागवार मार्किंग की जाएगी। वार्डवार एवं भागवार चिन्हित निर्वाचकों को सॉफ्टवेयर के माध्यम से दर्शित वार्ड के संबंधित भाग के अनुभाग में 10 अप्रैल तक शिफ्ट किया जाएगा तथा 11 अप्रैल तक निर्वाचक नामावली के पीडीएफ तैयार करके जांच कर त्रुटि का सुधार किया जाएगा एवं चेकलिस्ट संशोधन पश्चात प्रारूप निर्वाचक नामावली मुद्रण हेतु जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा और जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा 13 अप्रैल तक निर्वाचक नामावली का मुद्रण कराया जाकर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन एवं दावे तथा आपत्तियां 13 अप्रैल से 20 अप्रैल के दोपहर 03 बजे तक प्राप्त की जाएगी। दावा आपत्ति निपटारे की अंतिम तारीख 23 अप्रैल निर्धारित की गई है। प्ररूप क-1 में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल शुक्रवार निर्धारित की गई है।  रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त     कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पखांजूर को रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा तहसीलदार पखांजूर को सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और अपर कलेक्टर अंतागढ़ को अपील प्राधिकारी के कृत्यों के संपादन के लिए पदाभिहित अधिकारी नियुक्त किया गया है। 

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां, जालंधर में बनेगा कैंप, MP चन्नी और CM मान का चुनावी क़िला

जालंधर जालंधर से सांसद एवं पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने जालंधर के खजूरला गांव में अपना घर बना लिया है। चन्नी ने बताया कि घर में पाठ रखा है।को पाठ के भोग के साथ गृह प्रवेश होगा। चन्नी ने कहा कि चुनाव के वक्त उन्होंने जालंधर के लोगों से वादा किया था कि वह यहीं पर रहेंगे। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी जालंधर के गांव खजूरला का चुनाव किया गया है। ये गांव रोड कनेक्टेड होने के साथ कैंटोनमेंट के पास है। हाईवे से कनेक्ट भी है। जालंधर विधानसभा चुनाव का कैंप बनना शुरू हो गया है। इससे पहले सीएम भगवंत मान ने भी ओल्ड बारादरी में अपना घर लिया है। भाजपा के बड़े नेताओं के पहले से ही जालंधर में घर हैं। चन्नी ने कहा कि लोगों के साथ किया अपना एक और वादा पूरा कर दिया है। चुनाव के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वह सिर्फ वोट लेने नहीं आए, बल्कि जालंधर के पक्के निवासी बनकर यहां के लोगों की सेवा करेंगे। इसी वादे को निभाते हुए उन्होंने जालंधर में अपना नया घर तैयार कर लिया है। जहां अब वह पक्के तौर पर रहेंगे। 5 कनाल में बनाए घर-आफिस में आज पाठ का भोग अपने इस नए घर के बारे में जानकारी देते हुए चन्नी ने बताया कि यह एक बहुत ही साधारण पर सुविधाजनक घर है। इसमें निचली मंजिल पर एक बड़ा ऑफिस बनाया गया है ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को मिलने में कोई दिक्कत न आए। ऊपरी मंजिल पर उनका बेडरूम है। उन्होंने कहा कि पहले वह किराए के फ्लैट में रह रहे थे, जहां आम लोगों का आना-जाना थोड़ा मुश्किल था, पर अब जीटी रोड के नजदीक इस घर में कोई भी आसानी से पहुंच सकता है। पूरे हलके के लोगों को पहुंचना आसान होगा सांसद चन्नी के मुताबिक यह जगह कुदरती तौर पर ऐसी मिल गई है जो जालंधर शहर के साथ-साथ नकोदर, फिल्लौर और गोराया जैसे इलाकों के लोगों के लिए भी बहुत नजदीक पड़ती है। उन्होंने कहा कि जालंधर के लोगों ने उन्हें बहुत मान बख्शा (सम्मान दिया) है, इसलिए वह अब अपना ज्यादातर समय यहां ही बिताएंगे। संसद के सेशन के दिनों को छोड़कर वह बाकी सारा समय जालंधर में ही मौजूद रहेंगे। चन्नी बोले- अब यह घर ही बाहरी कहने वालों को जवाब देगा नए घर में प्रवेश करने के मौके पर उन्होंने धार्मिक मर्यादा का पूरा ख्याल रखा है। उन्होंने बताया कि घर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश करवाया गया है और पाठ के भोग डाले जाएंगे। इस मौके कीर्तन का प्रवाह भी चलेगा। उनकी पत्नी भी जालंधर पहुंच चुकी है और जल्द ही बच्चे भी उनके साथ यहां रहने के लिए आ जाएंगे। विरोधियों द्वारा बाहरी कहे जाने के सवाल पर चन्नी ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब यह घर ही उन सबको जवाब देगा।  

राज्यसभा चुनाव में NDA ने जीते 22 सीटें, कांग्रेस को मिली 6 सीटें, नफा-नुकसान का विश्लेषण

 नई दिल्ली बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के आगे विपक्षी की सारी कोशिश बेकार साबित हुईं. बीजेपी ने ऐसी रणनीति बनाई कि बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ हाथ मिलान भी काम नहीं आ सका तो ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी की जोड़ी भी कोई कमाल नहीं कर सकी। तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है. बीजेपी ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें जीत सकती है. राज्यसभा के ये नतीजे सोमवार को हुए चुनाव के है, लेकिन फाइनल आंकड़ा अलग है। देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले ही निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए और उसके बाद नतीजे आए हैं. इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं। 37 राज्यसभा सीटों का फाइनल नतीजा अप्रैल-2026 में खाली होने वाली 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो गए हैं और अब फाइनल नतीजे भी आ गए. 37 राज्यसभा सीटों में 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्यों का चुन लिया गया था, जिसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी. अब सोमवार को हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए, जिसमें एनडीए 9 और विपक्ष दो सीटें जीती है. इस तरह से चुनाव का फाइनल स्कोर देखें तो एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं। राज्यसभा चुनाव में एनडीए को मिली 22 सीटों में देखें तो 13 सीटें बीजेपी ने जीती हैं जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. जेडीयू ने 2, शिंद की शिवसेना एक, अजित पवार की एनसीपी एक, पीएमके एक, AIADMK एक, यूपीपीएल एक, आरएलएसएम एक और एक सीट पर बीजेपी के समर्पित निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती है। वहीं, विपक्ष को मिली 15 राज्यशभा सीटों के पार्टी के लिहाज से देखें तो कांग्रेस को 6 सीटें टीएमसी को 4 सीटें, डीएमके को 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है। राज्यसभा में किसे नफा और किसे नुकसान राज्यसभा चुनाव पहले और नतीजे आने के बाद देखते हैं तो एनडीए को 10 सीटों का फायदा हुआ और विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, लेकिन अब बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर के 15 रह गई हैं। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े देखें तो बीजेपी के पास 9 सीटें थी, जो अब बढ़कर 13 हो गई हैं. जेडीयू ने अपनी दोनो सीटों को बरकरार रखा है.  इसके अलावा AIADMK, ने अपनी एक सीट, पीएमके ने भी अपनी एक सीट तो आरएलएसएम ने अपनी-अपनी एक-एक सीट को बचाए रखा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में थी, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास थी, जो बढ़कर अब 6 हो गई हैं. इस तरह कांग्रेस को दो सीटों का फायदा मिला है. टीएमसी ने अपनी 4 सीटें बरकार रखी हैं. डीएमके 4 सीटों से घटकर 3 पर रह गई है। आरजेडी के पास 2 सीटें थी, जो अब घटकर जीरो हो गई है. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास थी, लेकिन उन्हें एक सीट भी नहीं मिली. इसके चार सीटें अन्य दलों के पास थी, जिसमें दो सीटें बीजेडी के पास थी, जिसमें से एक सीट ही उसे मिल सकी. बीआरएस ने अपनी एकलौती सीट भी गंवा दी। राज्यवार राज्यसभा चुनाव के नतीजे क्या रहे? महाराष्ट्र से 7 राज्यसभा सीटों में बीजेपी को चार, एनसीपी और शिवसेना को एक-एक सीट मिली है. इसके अलावा एक सीट पर विपक्ष से शरद पवार चुने गए हैं.  बीजेपी को दो सीट का फायदा तो कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी को एक सीट का घाटा हुआ. अजित पवार और शिंदे को एक-एक सीट का लाभ मिला। तमिलनाडु की  छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव में डीएमके को एक सीट का नुकसान तो कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला है. AIADMK और पीएमके अपनी एक-एक सीट बचाने में कामयाब रहीं. पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में टीएमसी अपनी चार सीटें बचाए रखा तो बीजेपी को एक सीट का लाभ और लेफ्ट को नुकसान हुआ। बिहार की पांच राज्यसभ सीटों में जेडीयू ने अपनी दोनों सीटें बचाए रखा तो आरजेडी को 2 सीट का नुकसान. बीजेपी को दो सीट का लाभ हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट बचा लिया है.  ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में बीजेपी अपनी दोनों सीटें बचाए रख लिया तो बीजेडी को एक सीट का नुकसान हुआ है.  इसके अलावा एक सीट बीजेपी ने अपने समर्थन से निर्दलीय को जिता लिया. असम की तीन राज्यसभा सीटों में बीजेपी अपनी दोनों सीटें बचा ली है तो असम गढ़ परिषद के पास एक सीट का नुकसान हुआ। छत्तीसगढ़ में बीजेपी को एक सीट का फायदा तो कांग्रेस को एक सीट का नुकसान हुआ. तेलंगाना की दोनों सीटें कांग्रेस जीत ली है, उसे एक सीट का लाभ मिला है तो बीआरएस को एक सीट का नुकसान. हरियाणा की दो सीटों में बीजेपी और कांग्रेस एक-एक सीट जीती हैं, लेकि बीजेपी को एक सीट का नुकसान हुआ है.  हिमाचल में कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला तो बीजेपी को नुकसान। 

बारामती उपचुनाव में सुप्रिया सुले ने सुनेत्रा पवार को दिया वॉकओवर, भाभी के खिलाफ नहीं उतरे उम्मीदवार

मुंबई  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहाकि उनकी पार्टी आगामी बारामती विधानसभा उपचुनाव में डिप्टी सीएम और राकांपा नेता सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। निर्वाचन आयोग ने रविवार को घोषणा की कि पुणे के बारामती और अहिल्यानगर के राहुरी में उपचुनाव 23 अप्रैल को होंगे। बारामती और राहुरी उपचुनाव क्रमश: पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के कारण जरूरी हो गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के बारामती से उपचुनाव लड़ने की संभावना है। चुनाव पर क्या कहा सुले ने दिल्ली में पत्रकारों से कहाकि मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राकांपा (शप) बारामती उपचुनाव नहीं लड़ेगी। हम सुनेत्रा वहिनी (भाभी) के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। राहुरी सीट के संबंध में (विपक्षी) महा विकास आघाडी (एमवीए) के सहयोगी इस सीट पर विचार-विमर्श करेंगे और अगले कुछ दिनों में निर्णय लिया जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा था कि बारामती और राहुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव आम सहमति से निर्विरोध कराए जाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर मुकाबला होता है तो भाजपा इसके लिए तैयार है। साल 2024 के आम चुनावों में राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार की बेटी सुले ने अपने चचेरे भाई अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराकर बारामती लोकसभा सीट बरकरार रखी थी, जो पहली बार चुनाव लड़ रही थीं। बाद में सुनेत्रा पवार राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। इस साल 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती हवाई पट्टी के पास एक विमान दुर्घटना में उनके पति अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री और राकांपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अजित पवार की मौत की हो जांच अजित पवार के विमान दुर्घटना की जांच के संबंध में सुले ने कहाकि वे इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच एलपीजी की स्थिति के बारे में सुले ने कहा कि केंद्र को एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और सभी को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने कहाकि होटल उद्योग सहित व्यवसायों को भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बारामती की सांसद ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की भी मांग की। सुले ने कहाकि मुझे आश्चर्य हो रहा है कि राज्य और केंद्र सरकार एलपीजी संकट को स्वीकार क्यों नहीं कर रही हैं। इसे दबाने की कोशिशें क्यों की जा रही हैं? इस संकट से निपटने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए।

पांच राज्यों में चुनाव का ऐलान, बंगाल में दो फेज तो चार राज्यों में एक फेज में वोटिंग

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल, असम समेत पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो गई है। पश्चिम बंगाल में दो चरण में मतदान होंगे, जबकि तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी और केरल में सभी सीटों पर एक ही फेज में वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों के नतीजों का ऐलान चार मई को होगा। बंगाल में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि दूसरे फेज में 29 अप्रैल को मतदान होगा। असम, केरल और पुडुचेरी की सभी सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि तमिलनाडु की सभी विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पांच राज्यों में कुल 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे और कुल विधानसभा सीटें 824 हैं। इन राज्यों में चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न करवाने के लिए चुनाव आयोग 25 लाख कर्मचारियों की तैनाती करेगा। इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया था और चुनावी तैयारियों का जायजा लिया था। आयोग ने इन राज्यों में राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया है। किस राज्य में कब होगा मतदान पश्चिम बंगाल-दो फेज- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल- चार मई रिजल्ट तमिलनाडु- एक फेज- 23 अप्रैल- चार मई रिजल्ट असम- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट केरल- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट पुडुचेरी- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधु और विवेक जोशी भी उपस्थित थे। ज्ञानेश कुमार ने कहा, "आयोग प्रत्येक मतदाता का मतदान केंद्र पर स्वागत करने के लिए तैयार है। हम खासकर पहली बार वोट डालने वाले और युवा मतदाताओं से अपील करते हैं कि वे अपने मताधिकार का उत्साह, आत्म सम्मान और विवेक के साथ प्रयोग कर लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।" 17.4 करोड़ वोटर्स डालेंगे वोट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पांच राज्यों में 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे। इन सभी राज्यों को मिलाकर कुल 824 विधानसभा सीटें हैं। 2.19 लाख पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। सीईसी के अनुसार, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में प्रति पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की औसत संख्या 750-900 है। उन्होंने मतदाताओं के बारे में ब्योरा देते हुए बताया कि अंतिम सूची के अनुसार असम में लगभग 2.25 करोड़, केरल में 2.7 करोड़, पुडुचेरी में 9.44 लाख, तमिलनाडु में 5.67 करोड़ मतदाता होंगे। और पश्चिम बंगाल में, 28 फरवरी को जारी अंतिम सूची में 6.44 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, माननीय न्यायाधीशों के निर्णय के बाद जो भी पूरक सूची आएगी, उसे भी इसमें जोड़ दिया जाएगा।" किस राज्य में कब खत्म हो रहा कार्यकाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC) ने कहा, ''असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मतदाता। पिछले कुछ दिनों के दौरान, आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए चुनाव वाले सभी राज्यों का दौरा किया। इन दौरों के दौरान, आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनके सुझाव प्राप्त किए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, एसपी, आईजी, डीआईजी और सभी प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से भी मुलाकात की। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, मुख्य सचिवों और डीजीपी के साथ भी बैठकें कीं।" असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल विधानसभा का 23 मई को, तमिलनाडु विधानसभा का 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का सात मई को तथा पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है। इन तारीखों से पहले ही यहां नई विधानसभा का गठन होना है।  

असम चुनाव 2026 के लिए AAP ने घोषित की 14 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, देखें पूरी सूची

गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक बिसात अब बिछनी शुरू हो गई है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज अपने 14 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। चुनाव आयोग भी आज शाम असम और पश्चिम बंगास समेत 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान करने जा रहा है। बता दें कि, 126 विधानसभा सीटों वाली असम विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 20 मई 2026 तक है। इससे पहले वहां नई विधानसभा का गठन किया जाना है। दिल्ली और पंजाब के बाद अब आम आदमी पार्टी ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में अपनी ताकत झोंकने का फैसला किया है। असम राज्य प्रभारी राजेश शर्मा के हस्ताक्षर के साथ पार्टी द्वारा आधिकारिक तौर पर आज जारी की गई इस पहली लिस्ट में 'आप' ने 14 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। सेंट्रल गुवाहाटी से अनुरूपा डेकाराजा को मिला टिकट 'आप' ने अपनी इस पहली लिस्ट में असम की विभिन्न महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों को कवर किया है। पार्टी ने सेंट्रल गुवाहाटी जैसी शहरी सीट से लेकर सिबसागर, नादुआर और टीटाबार जैसी ग्रामीण और अर्ध-शहरी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। सेंट्रल गुवाहाटी से अनुरूपा डेकाराजा को टिकट दिया गया है, जो एक महत्वपूर्ण मुकाबला माना जा रहा है। देखें 14 उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट आम आदमी पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, इन क्षेत्रों से ये उम्मीदवार मैदान में होंगे: 1. नओबोइचा (75): अच्युत दास 2. डेरगांव (104): पुलिन गोगोई 3. गोहपुर (72): जरबोम कुतुम 4. सेंट्रल गुवाहाटी (36): अनुरूपा डेकाराजा 5. खुमटाई (106): आशीष हजारिका 6. सिबसागर (96): तपन गोगोई 7. रोनगांदी (74): टिकेंद्र थापा 8. चेंगा (23): जाहिदु इस्लाम खान 9. नादुआर (69): रंजीत बोड़ो 10. टीटाबार (102): पल्लव सैकिया 11. ईस्ट गोलपाड़ा (14): जिन्ना अमीर हुसैन 12. राहा (61): बरुण विकास दास 13. बोकाजन (108): रेणुका तिमुंगपी 14. बिस्वनाथ (70): अनंत गोगोई क्या है 'आप' की रणनीति? ऐसा माना जा रहा है कि इतनी जल्दी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करके 'आप' ने असम में सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने के संकेत दे दिए हैं। 'आप' असम में भी दिल्ली और पंजाब मॉडल (शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली) के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जल्द जारी हो सकती है दूसरी लिस्ट आम आदमी पार्टी आने वाले हफ्तों में जल्द ही दूसरी लिस्ट भी जारी कर सकती है। असम की जनता के बीच पैठ बनाने के लिए पार्टी अब इन 14 क्षेत्रों में सघन जनसंपर्क अभियान शुरू करेगी।

बंगाल सहित 5 राज्यों में चुनावी तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग करेगा घोषणा

नई दिल्ली असम, पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान आज हो सकता है. चुनाव आयोग ने आज शाम 4 बजे विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है. इस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पांच राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई, केरल का 23 मई, तमिलनाडु का 10 मई, पश्चिम बंगाल का 7 मई और पुडुचेरी का 15 जून को खत्म हो रहा है. यानी 7 मई से पहले-पहले पांचों राज्यों में चुनाव खत्म हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी राज्यों का किया दौरा पिछले कुछ हफ्तों में चुनाव आयोग की टीम ने इन सभी राज्यों का दौरा किया था. फरवरी में असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी, 6-7 मार्च को केरल और 9-10 मार्च को पश्चिम बंगाल में तैयारियों का जायजा लिया गया. इन दौरों में राजनीतिक दलों, पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से मीटिंग हुई. आयोग ने हिंसा रोकने, मतदाता सूची सुधारने, EVM-VVPAT की जांच और CAPF तैनाती पर खास फोकस किया. मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, यह ऐलान आज ही होगा क्योंकि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के खिलाफ अपील की आखिरी तारीख 15 मार्च (आज) है और बाकी राज्यों में यह समयसीमा पहले ही खत्म हो चुकी है. राज्यों का कार्यकाल कब खत्म हो रहा है?     पश्चिम बंगाल: 7 मई 2026     तमिलनाडु: 10 मई 2026     असम: 20 मई 2026     केरल: 23 मई 2026     पुडुचेरी: 15 जून 2026   पिछली बार क्या रहे थे नतीजे?     असम: 126 सीटों के लिए पिछली बार तीन चरणों में चुनाव हुए थे. एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं. लगातार दूसरी बार असम में बीजेपी की सरकार बनी थी।     पश्चिम बंगाल: राज्य की 294 सीटों के लिए पिछली बार 8 चरणों में चुनाव हुए थे. टीएमसी ने 215 और बीजेपी ने 77 सीटें जीती थीं. ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी थीं।     तमिलनाडु: 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में वोट डाले गए थे।  डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं. अन्नाद्रमुक ने 66 और बीजेपी ने 5 सीटें जीती थीं. एमके स्टालिन सीएम बने थे।     केरल: 140 सीटों के लिए एक ही चरण में वोटिंग हुई थी. एलडीएफ ने 99 और यूडीएफ ने 41 सीटें जीती थीं. पिनराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।     पुडुचेरी: 30 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में वोट पड़े थे. एनडीए ने 16 और यूपीए ने 9 सीटें जीती थीं. एनडीए के एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे।  

बस्तर में पंचायत और जगदलपुर में पार्षद चुनाव की बन रही फोटोयुक्त मतदाता सूची

बस्तर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पड़े पंचायत पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में खाली पंच पदों के लिए उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत जगदलपुर, बस्तर, बकावंड, लोहंडीगुड़ा, तोकापाल और दरभा विकासखंडों में कुल 22 पदों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया के लिए 1 अप्रैल 2026 को संदर्भ तिथि मानते हुए नई फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार की जा रही है। प्रशासन द्वारा मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। बता दें कि पहले चरण की शुरुआत 23 मार्च से होगी, जिसमें रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति और आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके बाद विधानसभा की मतदाता सूची से वार्डवार आंकड़ों को अलग कर सॉफ्टवेयर की मदद से त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जाएगी। प्रशासन के अनुसार 13 अप्रैल को प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें नागरिक 20 अप्रैल तक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निराकरण 27 अप्रैल तक किया जाएगा। इसके बाद 5 मई को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराई जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पदों को जल्द भरा जा सके। जगदलपुर नगर निगम के वार्ड 16 में पार्षद पद के लिए उपचुनाव, चुनावी प्रक्रिया शुरू जगदलपुर. नगर निगम के वार्ड क्रमांक 16 इंदिरा गांधी वार्ड में रिक्त पार्षद पद को भरने के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। इसके साथ ही निर्वाचन शाखा ने फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मतदाता सूची के लिए 1 अप्रैल 2026 को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है। प्रशासन ने चुनावी प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा करने की कार्ययोजना बनाई है। पहले चरण में 23 मार्च तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति और कर्मचारियों का चयन किया जाएगा। इसके बाद मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रारंभिक मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद नागरिकों को अपने नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन कराने का अवसर दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इधर, स्थानीय स्तर पर निर्वाचन से जुड़े अधिकारी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। वहीं वार्ड में उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ने लगी है और संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।