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अनुकंपा के आधार पर नौकरी: नीतीश कुमार ने 5353 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

पटना  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित 'संवाद' में अनुकंपा के आधार पर माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 4835 विद्यालय लिपिक एवं 518 विद्यालय परिचारी के पदों पर चयनित कुल 5353 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सांकेतिक रूप से मणि कुमारी,अमित गौरव, दिव्या राज, किरण कुमारी गुप्ता एवं तूबा अशरफ को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नवनियुक्त कर्मियों को मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं है। मुझे विश्वास है कि सभी नवनियुक्त कर्मी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2006 से शिक्षा विभाग के अन्तर्गत मृत शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर नियोजन ईकाई के माध्यम से शिक्षक के पद पर नियोजन हेतु प्रावधान किया गया। मृत शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के आश्रितों की योग्यता शिक्षक के पद हेतु नहीं रहने के कारण वर्ष 2020 में नियोजन ईकाई के माध्यम से विद्यालय लिपिक एवं विद्यालय परिचारी के नियत वेतन पर अनुकम्पा के आधार पर नियोजन इकाई के माध्यम से वर्ष 2024 तक नियोजन किया गया। वर्तमान में राज्य सरकार ने शिक्षकों की तरह अनुकम्पा पर नियुक्ति हेतु विद्यालय लिपिक एवं विद्यालय परिचारी का पद जो राज्य कर्मी के श्रेणी में आते हैं, नियुक्ति हेतु प्रावधान किया गया है। अनुकम्पा पर नियुक्त होने वाले विद्यालय लिपिक एवं विद्यालय परिचारी का वेतन एवं सेवाशर्त बेहतर हुआ है। आज पूरे राज्य में 4835 विद्यालय लिपिक एवं 518 विद्यालय परिचारी अर्थात् कुल 5353 आश्रितों की नियुक्ति की गई है। पटना जिले में 212 विद्यालय लिपिक एवं 28 विद्यालय परिचारी की नियुक्ति की गई है। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ ने मुख्यमंत्री को पुस्तक भेंटकर स्वागत किया।

विपक्ष ने उतारा उम्मीदवार, उपराष्ट्रपति चुनाव में सुदर्शन-राधाकृष्णन आमने-सामने

नई दिल्‍ली उपराष्‍ट्रपति पद के लिए विपक्ष ने अपने उम्‍मीदवार का ऐलान कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के उपराष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार होंगे. कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ये जानकारी दी. बी सुदर्शन रेड्डी  भारत के सबसे सम्मानित कानूनविदों में शामिल हैं. वह सुप्रीम कोर्ट के जज भी रहे हैं , इसके अलावा गुवाहाटी और आंध्र उच्च न्यायालय के भी जज रहे हैं.  कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने बताया कि गठबंधन ने सर्वसम्मति से बी सुदर्शन रेड्डी का नाम तय किया है. उनका मुकाबला एनडीए गठबंधन के सीपी राधाकृष्णन से होगा.  बी सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के प्रताप रेड्डी के अधीन सिविल और संवैधानिक मामलों पर प्रैक्टिस शुरू की थी. 8 अगस्त 1988 को रेड्डी को हाई कोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया और वह केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील बने. इंडिया गठबंधन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर सुदर्शन रेड्डी के नाम का ऐलान किया. कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि सभी पार्टियों ने सहमति से उनके नाम को फाइनल किया है. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने बताया कि आम आदमी पार्टी भी सुदर्शन रेड्डी के नाम से सहमत है. डीएमके, टीएमसी… सभी की मांग पूरी हुई विपक्ष का कहना है, "वो (एनडीए) संघ से जुड़े व्यक्ति को लाए हैं, हम सुप्रीम कोर्ट से आए व्यक्ति को सामने ला रहे हैं." यह नाम विपक्ष की तमाम शर्तों पर खरा उतरता है – दक्षिण भारत से उम्मीदवार जिसे डीएमके चाहती थी, और राजनीति से बाहर का चेहरा जिसकी मांग टीएमसी ने उठाई थी. टीएमसी का कहना था कि ऐसे शख्स को उम्मीदवार बनाया जाए जो नॉन-पॉलिटिकल हों. वहीं डीएमके चीफ और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने तमिलनाडु से किसी चेहरे को उम्मीदवार बनाने की मांग की थी. INDIA गठबंधन के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी कौन हैं? बी सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को हुआ था. वे भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं. सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में एक कृषि परिवार में हुआ. शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी से 1971 में लॉ पास किया. अपने करियर की शुरुआत रेड्डी ने सिविल और संवैधानिक मामलों की प्रैक्टिस से की और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट के. प्रताप रेड्डी के साथ काम किया. इसके बाद 8 अगस्त 1988 को उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में गवर्नमेंट प्लीडर नियुक्त किया गया और वे केंद्र सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसल बने. गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे सुदर्शन रेड्डी 1993 में वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लीगल एडवाइजर भी रहे. न्यायिक करियर में आगे बढ़ते हुए रेड्डी 2 मई 1993 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एडिशनल जज नियुक्त किए गए. इसके बाद 5 दिसंबर 2005 को वे गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. सुदर्शन रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया और वे 8 जुलाई 2011 को रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद मार्च 2013 में उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला, हालांकि अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया था. जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी का करियर      जस्टिस रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को भारत के सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था.      वह 8 जुलाई 2011 को इस पद से सेवानिवृत्त हुए.      बी सुदर्शन रेड्डी को 5 दिसंबर 2005 को गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था.      रेड्डी का जन्म 1946 में भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के तत्कालीन इब्राहिमपटनम तालुका के अकुला मायलाराम गांव में एक कृषक परिवार में हुआ था.     बी सुदर्शन रेड्डी ने हैदराबाद में शिक्षा प्राप्त की और 1971 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की.      बी सुदर्शन रेड्डी ने मार्च 2013 में पहले गोवा लोकायुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया और अक्टूबर 2013 में निजी कारणों से पद से इस्तीफा दे दिया. 8 जुलाई 1946 को जन्‍मे बी सुदर्शन रेड्डी गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं.  सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में हुआ. बी सुदर्शन रेड्डी ने शुरुआती पढ़ाई के बाद हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी से 1971 में लॉ में ग्रेजुएशन की थी. 1993 में बी सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लीगल एडवाइजर भी रहे हैं. बी सुदर्शन रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया था और वे 8 जुलाई 2011 को रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद मार्च 2013 में उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला. हालांकि अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया था.

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने को MGNREGA-जीविका दीदी हाट बैठक आयोजित

MGNREGA एवं जीविका दीदी हाट कन्वर्जेन्स विषय पर बैठक आयोजित  ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने को MGNREGA-जीविका दीदी हाट बैठक आयोजित MGNREGA व जीविका दीदी हाट कन्वर्जेन्स पर बैठक, ग्रामीण आजीविका बढ़ाने पर जोर पटना बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में  “MGNREGA एवं जीविका दीदी हाट कन्वर्जेन्स” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता MGNREGA कमिश्नर सह अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका, आई.ए.एस. श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा ने की। बैठक में INFUSION (Microsave Consulting, ISB) के प्रतिनिधियों, जीविका  तथा MGNREGA विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण, आजीविका संवर्धन एवं पोषण-सुरक्षित बाजार तंत्र के विकास हेतु ‘जीविका दिदी हाट’ मॉडल को बढ़ावा देना था। इसमें यह विचार किया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के अंतर्गत विभिन्न जिलों में निर्मित ग्रामीण हाटों को किस प्रकार ‘जीविका दीदी हाट’ के अनुरूप विकसित किया जा सकता है। साथ ही इन हाटों को SHG (स्वयं सहायता समूह) आधारित महिला उद्यमिता केंद्र के रूप में पुनःस्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका), ग्रामीण विकास विभाग की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। जीविका के अंतर्गत अब तक लाखों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है। ये महिलाएं विभिन्न उद्यमों जैसे कि कृषि, पशुपालन, बुनाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, और सेवा क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ‘जीविका दीदी हाट’ इसी श्रृंखला में एक अभिनव पहल है, जिसमें SHG की महिलाओं द्वारा संचालित ग्रामीण बाजारों को एक मंच प्रदान किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य न केवल महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना है, बल्कि ग्रामीण समुदाय को पौष्टिक, सुरक्षित और स्थानीय रूप से उत्पादित खाद्य सामग्री सुलभ कराना भी है। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैठक के दौरान यह तय किया गया कि राज्य के विभिन्न जिलों में MGNREGA के तहत निर्मित हाट स्थलों की पहचान कर उन्हें आवश्यक ढांचागत सुविधाओं जैसे शेड, जल एवं स्वच्छता व्यवस्था, स्टॉल्स, बैठने की व्यवस्था आदि से सुसज्जित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जीविका की महिलाएं इन हाटों का संचालन करेंगी, जिनके लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण, कौशल विकास, उद्यम प्रबंधन और ब्रांडिंग से संबंधित सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। INFUSION की विशेषज्ञ टीम तकनीकी मार्गदर्शन के रूप में सहयोग करेगी। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि 'दीदी हाट कन्वर्जेन्स’ के तहत न केवल हाटों का स्वरूप बदलेगा बल्कि यह एक सतत जीविकोपार्जन मॉडल के रूप में भी कार्य करेगा। यह पहल महिलाओं को अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही, यह ग्रामीण उपभोक्ताओं को ताजे, जैविक और स्थानीय उत्पाद खरीदने का एक सुरक्षित और सुलभ प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा। श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा ने कहा कि, “इस पहल के माध्यम से हम दो प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों – MGNREGA और जीविका – के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर रहे हैं। इससे न केवल हाटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी यह एक मील का पत्थर साबित होगा।” बैठक में संभावित स्थलों की प्राथमिक सूची तैयार करने, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ जिलों में कार्य आरंभ करने, और एक व्यापक कार्ययोजना निर्माण के लिए एक समन्वय समिति के गठन का निर्णय लिया गया। यह समिति संबंधित विभागों के साथ मिलकर समयबद्ध ढंग से पहल को धरातल पर उतारने के लिए जिम्मेदार होगी। यह पहल ‘सशक्त महिला, समृद्ध गांव’ की भावना को साकार करती है और बिहार को आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर करने के लिए एक सशक्त माध्यम बनेगी। ग्रामीण विकास के इस नवाचार में महिला सहभागिता, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और सामुदायिक स्वामित्व जैसे मूल्यों का समावेश है, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति की दिशा में भी सहायक सिद्ध होंगे।

TMC ने INDIA ब्लॉक से दूरी बनाई, उपराष्ट्रपति चुनाव में रखी ये मांग

कलकत्ता उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर NDA और विपक्षी INDIA गठबंधन के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है. एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी पार्टियों के बीच अब भी आखिरी सहमति नहीं बन पाई है. सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मानना है कि INDIA गठबंधन का उम्मीदवार तमिलनाडु से नहीं होना चाहिए, और साथ ही ममता बनर्जी की पार्टी ने उम्मीदवार को लेकर अपनी मंशा भी जाहिर की है. टीएमसी चाहती है कि विपक्ष एक नॉन-पॉलिटिकल उम्मीदवार उतारे, जो बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत कर सके. टीएमसी का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ पद की लड़ाई नहीं बल्कि संविधान और "आइडिया ऑफ इंडिया" को बचाने की जंग है. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से निकलते समय बताया था कि "कल (मंगलवार) दोपहर 12.30 बजे मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर INDIA गठबंधन की बैठक होगी." उन्होंने भरोसा जताया कि विपक्ष शाम तक एक मजबूत उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर देगा. एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को बनाया है अपना उम्मीदवार दूसरी तरफ, एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर लंबा और प्रभावशाली रहा है. वह 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. इससे पहले फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक उन्होंने झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया. इस दौरान उन्हें राष्ट्रपति की तरफ से तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था. राधाकृष्णन तमिलनाडु से आने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं और सार्वजनिक जीवन में उनका अनुभव चार दशकों से भी अधिक का है. वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और कोयंबटूर से संसद पहुंचे थे. 2004 से 2007 तक उन्होंने तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई. उनकी पहचान आरएसएस विचारधारा से जुड़ी हुई है. सितंबर में होंगे उपराष्ट्रपति चुनाव उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होना है. यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद कराया जा रहा है. अब देखना यह होगा कि INDIA गठबंधन किस उम्मीदवार को मैदान में उतारकर एनडीए के मुकाबले में खड़ा करता है.

मध्यप्रदेश की नदियाँ हैं भारत की संस्कृति की धारा, मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश की नदियाँ भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश है नदियों का मायका भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत का हृदय मध्यप्रदेश, यहां के अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य और अथाह, अविरल जल राशि के लिए समूचे विश्व में जाना जाता है। मध्यप्रदेश में बहने वाली नदियां भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक हैं, जिनके किनारे सदियों से हमारी शाश्वत सभ्यता फल फूल रही है। यहाँ की पहचान केवल प्राचीन धरोहरों, मंदिरों, किलों और जनजातीय संस्कृति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की छोटी-बड़ी 750-800 नदियों से भी है।प्रदेश की इस समृद्ध जल राशि के कारण ही मध्यप्रदेश को ‘नदियों का मायका’ कहा जाता है। मध्यप्रदेश से उद्गमित छोटी-बड़ी नदियाँ, गंगा, नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, माही और महानदी जैसे विशाल नदी प्रवाह तंत्रों में समाहित होकर पूरे भारत की जीवन-रेखा बनाती हैं। मध्यप्रदेश की नदियाँ केवल भौतिक जल स्रोत नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक भी हैं। नदियों के किनारे प्राचीन नगरों, धार्मिक स्थलों और व्यापारिक मार्गों का विकास हुआ। क्षिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन प्राचीन समय से ही खगोल विज्ञान और श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लंग के कारण धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। प्राचीन उज्जयिनी सिंहस्थ ‘कुंभ’ समागम का तीर्थ क्षेत्र भी है। नर्मदा नदी के तट पर बसे महेश्वर और ओंकारेश्वर शहर शैव परंपरा के प्रमुख तीर्थ-स्थल हैं। ओंकारेश्वर 12 ज्योर्तिलिंगों में एक है। बेतवा नदी के तट औऱ प्रवाह क्षेत्र के ओरछा, सांची और विदिशा मध्यकालीन भारत की सांस्कृतिक यशोगाथा के प्रतीक होने के साथ ही बौद्ध संस्कृति के उदयावसान के साक्षी भी रहे हैं। मध्यप्रदेश का अधिकांश भूभाग विंध्य और सतपुड़ा की पहाड़ियों से आच्छादित है। यही कारण है कि यह अनेक महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है। नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ हैं, जबकि सोन, क्षिप्रा, चंबल, बेतवा उत्तर और पूर्व की ओर बहकर अपनी अथाह जलराशि के साथ गंगा-यमुना में समाहित हो जाती हैं। माही, वैंगंगा, तवा जैसी नदियाँ भी अलग-अलग बेसिन को जल-पोषित करती हैं। इस भौगोलिक विविधता ने ही प्रदेश को नदी समृद्ध राज्य के रूप में प्रतिष्ठा दी है। पुण्य सलिला मां नर्मदा का दूसरा नाम रेवा भी है।भगवान शिव की पुत्री मानी जाने वाली रेवा मध्यप्रदेश और गुजरात दोनों की जीवन रेखा है। मान्यता है कि मां नर्मदा के दर्शन मात्र से ‘गंगा स्नान’ का पुण्य मिलता है। श्रद्धालुओं के लिए 3000 किमी से अधिक लंबी नर्मदा परिक्रमा जीवन का सबसे बड़ा तप माना जाता है। मां नर्मदा अमरकंटक से जन्म लेकर लेकर जबलपुर में धुआंधार जलप्रपात बनाती हुई गुजरात को अभिसिंचित कर लगभग 1312 किलोमीटर की यात्रा तय कर अरब सागर की खंभात की खाड़ी में विराम पाती हैं। महाभारत काल में चंबल नदी का नाम चर्मणवती था। यह भगवान परशुराम के जन्म-स्थल जानापाव से निकली। यह राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा बनाती है। जानापाव से निकलकर चंबल नदी मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित ‘पंचनदा’ संगम पर यमुना में परिमित जलराशि के साथ समाहित हो जाती है। बेतवा (वेत्रवती)  को मध्यप्रदेश की गंगा भी कहा जाता है। इसके तट पर राम राजा का ऐतिहासिक शहर ओरछा बसा है। विदिशा और सांची जैसे नगरों को भी इसने पोषित किया है। विंध्यांचल पर्वत से निकल कर लगभग 590 किलोमीटर दूरी तय कर यमुना नदी में जा मिलती है।  मोझदायिनी क्षिप्रा नदी के तट पर प्राचीन उज्जयिनी शहर बसा है। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर और सिंहस्थ कुम्भ समागम का यह तीर्थ क्षेत्र विश्वविख्यात है। क्षिप्रा को भी मालवा की गंगा कहा जाता है। क्षिप्रा नदी इंदौर जिले में उज्जैनी-मुंडला गांव के ककड़ी-बड़ली नामक स्थान से निकल कर लगभग 195 किलोमीटर की यात्रा के बाद चंबल नदी में मिल जाती है। रामायण और महाभारत में सोन नदी का उल्लेख मिलता है। इसे पुरुष वाचक ‘नद’ की संज्ञा भी दी गई है। महर्षि वाल्मीकि ने इसे सुभद्र कहा है। यह नदी प्रदेश में शहडोल और रीवा के क्षेत्रों को सींचती हुई बिहार में प्रवेश कर लगभग 784 किलोमीटर लंबी यात्रा के बाद पतितपावनी गंगा से संगम करती है। ताप्ती नदी सतपुड़ा की पहाड़ियों से निकलकर गुजरात तक जाती है और लगभग 724 किलोमीटर की दूरी तय कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। माही नदी की विशेषता है कि यह कर्क रेखा को दो बार पार करती है। माही नदी भी मध्यप्रदेश से गुजरात तक 583 किलोमीटर की यात्रा कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। मध्यप्रदेश से उद्गम पाने वाली अन्य प्रमुख नदियों में वैंनगंगा गोंडवाना क्षेत्र की जीवनरेखा है। तवा नर्मदा की सहायक नदी है, जिस पर मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा बाँध बना है। कालीसिंध, पार्वती, केन, शक्कर, जोहिला  स्थानीय कृषि और वन्य जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। मध्यप्रदेश की नदियों पर अनेक सिंचाई एवं जलविद्युत परियोजनाएँ बनी हैं, जिनसे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। चंबल-पार्वती-कालीसिंध रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों के साझा महत्व की परियोजना है। केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए समृद्धि की गंगोत्री मानी जा रही है। ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्च परियोजना मध्यप्रदेश के बुरहानपुर एवं खंडवा और महाराष्ट्र के अकोला, अमरावती और बुलढाणा ज़िलों के भू-जल संकट और अनियमित वर्षा की समस्या का स्थायी समाधान मानी जा रही है। बाणसागर परियोजना सोन नदी पर बनी है। इससे शहडोल, रीवा और सीधी जिलों को लाभ पहुंच रहा है। तवा परियोजना नर्मदा की सहायक तवा पर निर्मित है। इससे होशंगाबाद क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल की पूर्ति हो रही है। गांधीसागर परियोजना चंबल नदी पर बनाई गई है। इससे  जलविद्युत बनाई जा रही है, साथ ही बड़े क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। ओंकारेश्वर एवं बरगी परियोजना नर्मदा नदी पर निर्मित है। यह प्रदेश की ऊर्जा और जल आपूर्ति के प्रमुख आधारों में से एक है।

मुख्यमंत्री साय ने दी भिलाईवासियों को मिली 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर : स्टेट कैपिटल रीजन से तेजी से होगा विकास, नागरिक सुविधाओं में आएगा नया आयाम : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने दी भिलाईवासियों को मिली 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री साय ने भिलाई नगर निगम कार्यालय भवन के लिए 20 करोड़ की घोषणा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन से रायपुर, दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव सहित पूरे अंचल को   लाभ मिलेगा। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और नगरीय सुविधाओं का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के चुनाव में जारी अटल विश्वास पत्र के सभी वादों को एक-एक कर पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय आज भिलाई में नगर पालिक निगम क्षेत्र के लिए 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भिलाई नगर पालिक निगम के नए कार्यालय भवन के लिए 20 करोड़ रुपये की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार भरपूर सहयोग दे रही है। नगरीय सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। पूरे राज्य में प्रशासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ नागरिकों को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र शुरू हो चुके हैं। अगले छह महीनों में 5 हजार और पंचायतों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। 24 अप्रैल 2026, पंचायती राज दिवस पर छत्तीसगढ़ की सभी ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने बीते 20 महीनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया है। किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान सुनिश्चित किया गया है। महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है, जिससे 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के अंतर्गत भूमिहीन कृषि मजदूरों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 22 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या यात्रा कर चुके हैं। उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने कहा कि प्रदेश में सरकार गठन के बाद पिछले एक वर्ष में सभी नगरीय निकायों के विकास के लिए सात हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। नगरोत्थान योजना के तहत नगरीय निकायों में योजनाबद्ध और सुनियोजित विकास के लिए राशि दी जा रही है। विगत 18 माह में अकेले नगर पालिक निगम भिलाई को विकास कार्यों के लिए 470 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश के सात नगरीय निकायों को पहली बार राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वहीं 20 हजार से कम जनसंख्या वाले शहरों में छत्तीसगढ़ के 58 शहर पुरस्कृत हुए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पार्षद श्रीमती स्मृति दोड़के को स्वच्छता वार्ड के लिए शील्ड प्रदान की। प्रधानमंत्री आवास योजना के 9 हितग्राहियों को गृह प्रवेश प्रमाणपत्र, पीएम सूर्य घर योजना के तीन हितग्राहियों को प्रमाणपत्र, दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर प्रदान की गईं। महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों के लिए राशि के चेक तथा वूमेन फॉर ट्री योजना के तहत राधारानी महिला स्व-सहायता समूह को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम को वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन और नगर निगम के महापौर नीरज पाल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक ललित चन्द्राकर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू और पूर्व विधायक लाभचंद बाफना सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

श्रीमद्भागवत गीता को मिलेगा विश्वविद्यालयों में स्थान, छात्रों को तीन क्रेडिट अंक

भोपाल युवाओं के मन में नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना के लिए मध्य प्रदेश सरकार श्रीमदभागवत गीता की ओर मुड़ी है। तय हुआ है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्नातक स्तर की कक्षाओं में नियमित तौर पर श्रीमदभागवत गीता पढ़ाई जाएगी। इसकी कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी और इसके लिए विद्यार्थियों को तीन क्रेडिट अंक दिए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा में ही इस पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है। 18 अध्यायों को पांच भागों में विभाजित किया इसके तहत गीता के 18 अध्यायों को पांच भागों में विभाजित कर पाठ्यक्रम तय किया गया है। इन्हें 45 घंटों में पूरा किया जाना है। इन कक्षाओं को सप्ताह में पांच दिन चलाया जाएगा। कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी और विद्यार्थियों को यह सुविधा होगी कि अपने सुविधा के अनुसार कक्षा का समय और भाषा चुन लें। यह पाठ्यक्रम हिंदी, अंग्रेजी सहित 13 भाषाओं में उपलब्ध होगा। पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थी को क्रेडिट अंक दिए जाएंगे।   पाठ्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं और महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों के पंजीयन का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय के स्वयं पोर्टल पर यह पंजीयन 31 अगस्त तक होना है। सभी विश्वविद्यालयों औैर महाविद्यालयों से इस पाठ्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है ताकि इसकी निगरानी भी उच्च स्तर से की जा सके। मुख्यमंत्री ने दिया था विचार श्रीकृष्ण पाथेय योजना के क्रियान्वयन को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बैठक की थी। इसमें मुख्यमंत्री का ही विचार था कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान होने वाली प्रतियोगिताओं को विस्तार दिया जाए। अब केवल प्रतियोगिता की जगह विद्यार्थियों को आनलाइन ही गीता पढ़ाई भी जाए ताकि नई पीढ़ी में उस ज्ञान का विस्तार हो। स्वयं पोर्टल पर ऐसे पाठ्यक्रम भी – किशोर स्वास्थ्य – अपना आहार – प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा प्रबंधन – परिचयात्मक नीतिशास्त्र – योग शिक्षक प्रशिक्षण (इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए भी क्रेडिट अंक निर्धारित हैं) अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा ने कहा नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर है। इसी में श्रीमदभागवत गीता का अध्ययन शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और भारतीय चिंतन परंपरा के प्रति समझ बढ़ेगी।  

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस MLA आरिफ मसूद पर फर्जीवाड़े की FIR 3 दिन में दर्ज करने का निर्देश दिया

भोपाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं. यह मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता के लिए फर्जी सेल डीड जमा करने से जुड़ा है. अदालत ने शुरुआती रूप से इसे धोखाधड़ी (IPC की धारा 420, 467, 468) का मामला माना है. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ तीन दिन के अंदर एफआईआर दर्ज की जाए. विधायक आरिफ मसूद का भोपाल में इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज संचालित हो रहा है जिसमें कई गड़बड़ी मिली थी। इस पर उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी मान्यता रद्द कर दी थी। छात्रहित को देखते हुए कॉलेज को कंटिन्यू कर दिया गया पर यहां नए प्रवेश पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई। 3 दिन में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश विधायक आरिफ मसूद के इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने सख्त रूप दिखाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इतने सालों तक कोई भी कॉलेज ऐसे हाल में बिना राजनीतिक संरक्षण के नहीं चल सकता है। मामले में हाईकोर्ट ने विधायक आरिफ मसूद पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने भोपाल कमिश्नर को 3 दिन में एफआईआर दर्ज कर इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही जांच की निगरानी के लिए पुलिस महानिदेशक को SIT (विशेष जांच दल) गठित करने का आदेश भी दिया गया है. यह टीम 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. इस मामले में लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों पर भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा. यह मामला शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के बाद सामने आया. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फर्जी सेल डीड के आधार पर पिछले 20 साल से चल रहे कॉलेज मामले में कड़ा रुख दिखाया है. कोर्ट ने कॉलेज में नए एडमिशन पर भी रोक लगा दी है. नए सत्र के एडमिशन पर रोक वहीं, इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को देखते हुए कहा कि फिलहाल आरिफ मसूद का कॉलेज जारी रखा जाएगा। हालांकि, हाई कोर्ट ने नए सत्र के लिए एडमिशन देने पर रोक लगा दी है। वहीं, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद हाई कोर्ट के स्पेशल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। हो सकता है 20 साल से चल रहा हो ये फर्जीवाड़ा- कोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधर की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। जज ने हैरानी जताते हुए कहा कि संभव नहीं है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के चलते इस तरह से 20 सालों से फर्जीवाड़ा चल रहा हो। कांग्रेस विधायक ने फर्जी सेल डीड दी हाई कोर्ट ने कहा कि आरिफ मसूद के राजनीतिक कनेक्शन ऐसे हैं कि साल 2004 में आरिफ मसूद ने फर्जी सेल डीड दी। उसके बाद भी सरकार ने आरिफ मसूद को दोबारा सेल डीड जमा करने के निर्देश दिए लेकिन दोबारा जमा की गई सेल डीड को 20 साल तक किसी ने भी जांचने की हिम्मत नहीं जुटाई। हाई कोर्ट ने कहा है कि मामले में न केवल आरिफ के खिलाफ कार्रवाई हो बल्कि उन अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होना चाहिए, जिनकी इस पूरे मामले में भूमिका है। रद्द कर दी गई थी मान्यता दरअसल, भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अमन एजुकेशन द्वारा संचालित कॉलेज की पिछले दिनों मान्यता रद्द कर दी गई थी। उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके पहले कॉलेज को अंतरिम मान्यता मिली थी, लेकिन कॉलेज की ओर से जरूरी कागजात और शर्तें पूरी नहीं करने पर विभाग ने मान्यता रद्द कर दी थी। कांग्रेस विधायक मसूद पर आरोप है कि उन्होंने संस्था के फर्जी दस्तावेज लगाकर कॉलेज की मान्यता ली थी जिसमें संबंधित अधिकारियों की भी नीली भगत के आरोप लगे थे। क्या था पूरा मामला? 9 जून को राज्य सरकार ने भोपाल के इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता को रद्द कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ विधायक आरिफ मसूद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. सुनवाई के दौरान अदालत ने कॉलेज की जमीन और मान्यता से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे. हाईकोर्ट में जो डाक्यूमेंट पेश किए गए उनकी जांच में खुलासा हुआ कि 2 अगस्त 1999 को अमन एजुकेशन सोसायटी की तरफ से समिट की गई पहली सेल डीड फर्जी थी. इसके बाद में पेश की गई दूसरी सेल डीड भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाई गई. कोर्ट ने कहा कि इतने सालों तक जाली दस्तावेजों के सहारे कॉलेज का संचालन प्रशासनिक और राजनीतिक समर्थन के बिना संभव नहीं था.  

दो-पहिया वाहन खरीदने वालों के लिए खुशखबरी: सरकार देगी बड़ा गिफ्ट, कीमतों में आएगी भारी गिरावट

नई दिल्ली  दोपहिया वाहन अब होंगे सस्ते! सरकार दिवाली तक बाइकों और स्कूटर्स पर GST दर घटाकर सिर्फ 18% करने जा रही है। इससे ग्राहकों को सस्ती गाड़ियां मिलेंगी और कंपनियों की बिक्री भी बढ़ेगी। यह फैसला ऑटो सेक्टर और आम जनता दोनों के लिए फायदेमंद होगा। बाइक और स्कूटर खरीदना अब और आसान हो सकता है। सरकार दिवाली तक टू-व्हीलर पर लगने वाला GST घटाकर 28-31% से केवल 18% करने की तैयारी कर रही है। इससे कीमतों में भारी गिरावट आएगी और आम जनता को जेब पर राहत का बड़ा तोहफा मिलेगा। दिवाली से पहले सरकार का बड़ा तोहफा भारत में दोपहिया वाहन आम आदमी के जीवन का अहम हिस्सा हैं। रोजाना ऑफिस, कॉलेज, स्कूल या छोटे-मोटे कामों के लिए लोग बाइकों और स्कूटर्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बढ़ती कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही थीं। अब सरकार दिवाली तक जनता को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, टू-व्हीलर पर लगने वाला GST घटाकर 28-31% से सीधे 18% किया जा सकता है। वर्तमान स्थिति फिलहाल पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर पर 28% GST लगता है। वहीं 350cc से ज्यादा इंजन वाली बाइकों पर 3% अतिरिक्त सेस लगता है, जिससे कुल टैक्स 31% हो जाता है। इस वजह से बाइक और स्कूटर की कीमतें काफी बढ़ जाती हैं और आम लोगों को इसे खरीदना महंगा पड़ता है। नया बदलाव क्या होगा? सरकार GST 2.0 के तहत पूरे टैक्स ढांचे को सरल बनाने की तैयारी कर रही है। मौजूदा 12% और 28% वाली दरें खत्म कर दी जाएंगी और सिर्फ दो टैक्स स्लैब रह जाएंगे। इनमें पहला होगा 5% (जरूरी सामान के लिए) और दूसरा होगा 18% (स्टैंडर्ड गुड्स के लिए)। यानी टू-व्हीलर पर सीधा 18% GST लागू होगा। क्यों जरूरी है यह कदम? दोपहिया वाहन भारत में सिर्फ सुविधा का साधन नहीं, बल्कि जरूरत हैं। गांवों और छोटे शहरों में यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। लंबे समय से ऑटोमोबाइल सेक्टर सरकार से मांग कर रहा था कि टू-व्हीलर को "लक्जरी आइटम" की बजाय "जरूरी साधन" माना जाए। SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) ने कई बार सुझाव दिया था कि टू-व्हीलर पर GST दर को घटाकर 18% किया जाए। हीरो मोटोकॉर्प और होंडा जैसी बड़ी कंपनियों ने भी यह मांग उठाई थी। ग्राहकों को फायदा अगर यह फैसला लागू होता है, तो आम ग्राहकों को सबसे बड़ा फायदा होगा। बाइक और स्कूटर की कीमतें घट जाएंगी, जिससे मिडिल क्लास और ग्रामीण ग्राहकों के लिए गाड़ियां खरीदना आसान हो जाएगा। साथ ही, किश्तों पर भी कम बोझ पड़ेगा, जिससे ज्यादा लोग नई बाइक लेने के लिए प्रेरित होंगे। कंपनियों को लाभ कंपनियों के लिए भी यह कदम बेहद सकारात्मक साबित होगा। कम कीमतों के चलते बिक्री में बंपर उछाल आएगा। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में, जहां अब तक महंगाई की वजह से लोग बाइक लेने से कतराते थे, वहां खरीदारी बढ़ जाएगी। इससे ऑटो सेक्टर में नई जान आएगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था पर असर बिक्री बढ़ने से बाजार में कैश फ्लो बढ़ेगा। इससे सरकार को भी अप्रत्यक्ष करों के जरिए राजस्व मिलेगा। जब कंपनियों की बिक्री बढ़ेगी तो उत्पादन भी बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह अर्थव्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक संकेत होगा। ग्रामीण भारत को सबसे बड़ा लाभ भारत की आधी से ज्यादा आबादी गांवों में रहती है और वहां दोपहिया वाहन सबसे भरोसेमंद साधन हैं। स्कूल, कॉलेज, खेत और बाजार जाने के लिए लोग स्कूटर और बाइक पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर कीमतें कम होंगी तो ग्रामीण बाजार में बिक्री तेजी से बढ़ेगी। दिवाली पर डबल गिफ्ट अगर यह बदलाव दिवाली तक लागू हो गया, तो यह ग्राहकों के लिए डबल गिफ्ट साबित होगा। एक तरफ त्योहार पर नई बाइक खरीदने का मौका मिलेगा और दूसरी ओर जेब पर बोझ भी कम होगा। ऑटो कंपनियां भी दिवाली सेल्स के दौरान स्पेशल ऑफर और डिस्काउंट देती हैं। ऐसे में ग्राहकों को अतिरिक्त फायदा मिलेगा। चुनौतियां भी मौजूद हालांकि, सरकार को टैक्स दर घटाने से राजस्व में कमी का डर भी है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बिक्री बढ़ने से यह घाटा पूरा हो जाएगा। साथ ही, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार को पेट्रोल वाहनों पर टैक्स घटाकर बैलेंस बनाने की जरूरत है।  

उज्जैन : राजसी सवारी मार्ग पर पालकी पर की गई हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा

उज्जैन नगर भ्रमण पर निकले राजाधिराज बाबा महाकाल राजसी सवारी मार्ग पर पालकी पर की गई हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा राजसी सवारी मार्ग पर उमड़ा देश के कोने-कोने से आये भक्तों का जनसैलाब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभामंडपम् में भगवान चंद्रमोलेश्वर का किया पूजन-अर्चन राजसी सवारी में त्रिनेत्रधारी भगवान श्रीमहाकाल के दर्शन कर भाव-विभोर हुए भक्तजन मुख्यमंत्री ने सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ बजाकर रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर का किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को उज्जैन में निकली राजाधिराज बाबा महाकाल की राजसी सवारी के अवसर पर देश एवं प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रदेशवासियों के कल्याण और मंगलमय जीवन की कामना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशभर में श्रावण मास में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक महादेव की सवारियां निकलती हैं। लेकिन उत्तर और दक्षिण परम्पराओं के अनुसार भादवा (भाद्रपद) के दो सोमवार तक भी बाबा महाकाल की सवारी निकलती है। आज उज्जैन में बाबा महाकाल ने आखिरी (राजसी) सवारी कर नगर भ्रमण किया और अपनी प्रजा (जनता) के हाल-चाल जाने। बाबा ने अपने राजाधिराज स्वरुप में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बाबा की भव्य राजसी सवारी के लिए सभी व्यवस्थाएं की गईं और धूमधाम से सवारी की अगवानी की गई। बाबा की सवारी सहित सवारी पथ पर पुष्पवर्षा भी की गई। इस वर्ष विजयादशमी पर्व पर बाबा महाकाल एक बार फिर सवारी के साथ जनदर्शन के लिए पधारेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से कामना करते हुए कहा कि बाबा का शुभाशीष प्रदेशवासियों पर हमेशा बना रहे। कृपावंत भगवान महाकाल सबका कल्याण करें, सबके दुःख हर लें। भगवान महाकालेश्वर की इस वर्ष की श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में सोमवार,18 अगस्त को सायं 4 बजे राजसी सवारी धूमधाम से निकाली गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभामंडपम में भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन किया। रजत पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर भगवान अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले तो सम्पूर्ण उज्जयिनी भगवान महाकालेश्वर की जय-जयकार से गुंजायमान हो गई। चारों दिशाओं में भगवान श्रीमहाकाल की भक्ति में लीन भक्तों के नेत्र त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की एक झलक पाकर भाव-विभोर हो उठे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने सवारी निकलने के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप में भगवान चन्द्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन विधिवत रूप से किया। सभा मंडप में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, विधायक महेश परमार, महापौर मुकेश टटवाल, सभापति श्रीमती कलावती यादव ने भी भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया और आरती में सम्मिलित हुए। पूजन के बाद निर्धारित समय पर भगवान महाकाल की पालकी को नगर भ्रमण के लिये रवाना किया गया। पूजन-अर्चन पुजारी पं. घनश्याम शर्मा व अन्य पुजारियों द्वारा सम्पन्न करवाया गया। इस अवसर पर सभा मंडप में पूजन-अर्चन के दौरान संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंशानुरुप सवारी के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई। रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुंचे असंख्य श्रद्धालुओं ने भगवान महाकालेश्वर का स्वागत-वन्दन किया। सशस्त्र पुलिस बल के जवानों तथा प्रदेश के विभिन्न बटालियनों के जवानों द्वारा सवारी को सलामी दी गई। पालकी के आगे घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान आदि की टुकडियां मार्च पास्ट करते हुए चल रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सवारी में शामिल हुए और सवारी मार्ग पर उन्होंने ड़मरु और झांझ बजाया। राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर की सवारी में असंख्य श्रध्दालुओं ने सवारी मार्ग पर ड़मरु, झांझ-मंजीरे बजाकर अवंतिकानाथ भगवान महाकालेश्वर की जय जयकार की। भगवान श्रीमहाकाल ने भक्तों को छह रूपों में दिये दर्शन राजसी सवारी में भगवान महाकालेश्वर ने छह विभिन्न स्वरूपों में अपनें भक्तों को दर्शन दिये। भगवान श्रीमहाकाल की राजसी सवारी में रजत पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद एवं षष्ठम् सवारी में सप्तधान मुखारविंद के रूपों में भक्तों को दर्शन दिए। भगवान श्रीमहाकालेश्वर की सवारी परम्परागत मार्गों से होती हुई रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान महाकाल का क्षिप्रा के जल से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। पूजन-अर्चन पं. घनश्याम शर्मा और अन्य पुजारियों के द्वारा सम्पन्न कराया गया। पूजन के दौरान प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मुकेश टटवाल,वैभव यादव सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 70 भजन मण्डलियां सवारी में हुई शामिल श्रीमहाकालेश्वर भगवान की प्रमुख राजसी सवारी के चल समारोह में सबसे आगे श्रीमहाकालेश्वर मंदिर का प्रचार वाहन चला। उसके बाद यातायात पुलिस, तोपची, भगवान महाकालेश्वर का रजत ध्वज, घुडसवार, विशेष सशस्त्र बल सलामी गार्ड, स्काउट / गाइड सदस्य, सेवा समिति बैंड के बाद उज्जैन के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से परंपरागत रूप से सवारी सम्मिलित होने वाली 70 भजन मंडलियां चल समारोह में प्रभु का गुणगान करते हुए शामिल हुई। साथ ही नगर के साधु-संत व गणमान्य नागरिक, पुलिस बैंड, नगर सेना के सलामी गार्ड की टुकड़ी, महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी व पुरोहितगण सवारी के साथ रहे। उनके बाद महाकालेश्वर भगवान (चंद्रमौलेश्वर) की प्रमुख पालकी, भारत बैंड, रथ पर गरुड़ पर विराजित शिव-तांडव, रमेश बैंड, नंदी रथ पर उमा महेश स्वरुप, गणेश बैंड, रथ पर होल्कर स्टेट मुखारविंद, आर.के. बैंड, रथ पर सप्तधान मुखारविंद के पश्चात राजकमल म्युजिकल ग्रुप बैंड व मनमहेश स्वरुप हाथी पर विराजित रहे। चलित रथ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने करे दर्शन भगवान श्रीमहाकालेश्वर की सवारी के सुगमतापूर्वक दर्शन के लिये चलित रथ की व्यवस्था की गई। जिसके दोनों ओर एलईडी के माध्यम से सवारी का लाईव प्रसारण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को भगवान के सहज दर्शन का लाभ मिला। साथ ही उज्जैन के अन्य स्थानों फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्तअखाड़ा आदि क्षेत्रों में भी सवारी का लाइव प्रसारण किया गया। सवारी में जनजातीय एवं लोक नृत्य कलाकारों ने दीं आकर्षक प्रस्तुतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप बाबा श्रीमहाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए जनजातीय कलाकारों के दल ने महाकालेश्वर भगवान की राजसी सवारी में सहभागिता की। इसमें लामूलाल धुर्वे अनूपपुर के नेतृत्व में ढुलिया जनजातीय गुदुमबाजा नृत्‍य, भुवनेश्वर से अभिजीत दास नेतृत्व में श्रृंगारी लोक नृत्‍य, सुमित … Read more