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सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा

न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता को सुनिश्चित कर रहे डिजिटल साक्ष्य सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा  बोले एक्सपर्ट, न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अहम, यह तब और बढ़ जाती है जब कोई विटनेस नहीं होता  सीएम योगी के निर्देश पर डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में तैयार किया जा रहा आवश्यक ढांचा   लखनऊ  न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका बहुत अहम होती है। यह भूमिका तब और बढ़ जाती है जब डिजिटल साक्ष्य के आलावा कोई विटनेस नहीं होता है। 26/11 मुंबई हमले के आरोपी कसाब के मामले में इंटरनेट ट्रांस्क्रिप्ट्स का उपयोग दोषसिद्धि में काफी महत्वपूर्ण था। वर्तमान डिजिटल साक्ष्य न केवल न्यायिक मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता को भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ये बातें सेवानिवृत्त जस्टिस तलवंत सिंह ने यूपीएसआईएफएस के डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में कही।   डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया गया सेमिनार में जस्टिस सिंह ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में न्यायपालिका को तकनीकी दृष्टिकोण से मजबूत किया जा रहा है और डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश के न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इसके अलावा सीएम योगी ने प्रदेश के न्यायिक ढांचे को और भी सशक्त बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा की है, ताकि न्यायिक कार्यवाही तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सके। यह सेमिनार इसका प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सुधारों में अपने कदम तेजी से बढ़ा रहा है और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने डिजिटल साक्ष्य को परिभाषित करते हुए कहा कि यह वह सभी डेटा होते हैं, जो डिजिटल रूप में जन्म और एक जगह एकत्रित होते हैं। उन्होंने इसे बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया और कहा कि अब यह लगभग हर जांच का अभिन्न हिस्सा बन गया है। चाहे मामला चोरी, लूट या साइबर अपराध का हो। मेरा मानना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य अभियोजन की ताकत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार से दोषसिद्धि में मदद करते हैं। गवाहों के बयान में वीडियो कांफ्रेंसिंग वैध तरीका बना जस्टिस सिंह ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)के नये नियमों का उल्लेख करते हुए बताया कि यह अधिनियम डिजिटल साक्ष्य की स्वीकृति को आसान बनाता है, जिसमें वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दर्ज मौखिक बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC)की धारा 273 का उदाहरण देते हुए बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग अब एक वैध तरीका बन गया है, जिसके द्वारा गवाहों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं। उन्होंने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड (जैसे स्कैन किए गए पीडीएफ, सीसीटीवी फुटेज) और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे ईमेल, एसएमएस, सर्वर लॉग्स) दो अलग-अलग प्रकार के होते हैं। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 का हवाला देते हुए बताया कि डिजिटल रिकॉर्ड को प्रमाणिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि डिवाइस नियमित रूप से इस्तेमाल में हो, डेटा सामान्य रूप से दर्ज किया गया हो और डिवाइस की कार्यशीलता सही हो।     

योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट

दो माह तैयार हो जाएगा यूपी का पहला एसआईएचएम योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट 48.39 करोड़ रुपये की आ रही लागत, निर्माण कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण टूरिज्म, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए चलेंगे कोर्स योगी सरकार में तेजी से हुआ है हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का विकास दक्ष मानव संसाधन की मांग को पूरा करने में एसआईएचएम की होगी अहम भूमिका गोरखपुर  प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) दो माह में तैयार हो जाएगा। योगी सरकार द्वारा गोरखपुर में 48.39 करोड़ रुपये की लागत से बनवाए जा रहे एसआईएचएम के पहले फेज का 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग द्वारा अगले माह के अंत तक शत प्रतिशत कार्य पूर्ण कराया जाना लक्षित किया गया है।  बीते कुछ सालों में गोरखपुर का टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ा है। यहां कई बड़े ब्रांड के होटल्स, रेस्टोरेंट खुल चुके हैं और कई खुलने की प्रक्रिया में हैं। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कुशल पेशेवरों की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) बनवा रहे हैं। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के कार्यालय के सामने बन रहे एसआईएचएम का निर्माण सितंबर माह तक पूरा हो जाएगा और अगले शैक्षिक सत्र से यहां होटल एंड टूरिज्म मैनजमेंट से जुड़े डिप्लोमा और डिग्री के पाठ्यक्रम संचालित होने लगेंगे।  स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, पर्यटन विभाग का प्रोजेक्ट है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था के रूप में सी एंड डीएस यूनिट-14 द्वारा कराया जा रहा है। इस परियोजना पर निर्माण कार्य 26 सितंबर 2023 को प्रारंभ हुआ था। वर्तमान समय में 38.42 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर 95 प्रतिशत कार्य पूरे कर लिए गए हैं और इसी साल 25 सिंतबर तक कार्य पूर्ण किया जाना है। निर्माण के पहले चरण में दो ब्लॉकों में प्रशासनिक कक्ष, क्लास रूम, कॉमन हाल, किचन के अलावा अंडरग्राउंड पार्किंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, फायर सेफ्टी, पाइपलाइन आदि के कार्य पूर्ण कराए जा रहे हैं। उप निदेशक पर्यटन राजेंद्र प्रसाद यादव मिश्रा बताते हैं कि कि स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट का निर्माण कार्य अगले माह (सितंबर) तक पूरा हो जाएगा, इस समय फिनिशिंग का काम चल रहा है। अगले माह के बाद कभी भी इसका लोकार्पण हो सकता है।  उम्मीद जताई जा रही है कि अगले शैक्षिक सत्र से यहां ग्लोबल डिमांड के अनुरूप होटल, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट के कोर्स शुरू कर दिए जाएंगे। स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में कोर्स शुरू हो जाने के बाद युवाओं को रोजगारपरक पढ़ाई के लिए नए विकल्प मिल जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गोरखपुर में जिस तरह से पर्यटन विकास हो रहा है उससे होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।  दूसरे चरण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल का भी निर्माण शुरू स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के दूसरे चरण के निर्माण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है। दूसरे चरण की परियोजना के निर्माण पर 46.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी। निर्माण कार्य 15 मई से शुरू है। फिलहाल निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति 14 प्रतिशत है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि मई 2027 तक कार्य पूरा करा लिया जाएगा। एसआईएचएम प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 128 रूम का पांच मंजिला ब्वॉयज हॉस्टल और 84 रूम का पांच मंजिला गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है।

तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी

राजस्व महा–अभियान : तीन दिनों में 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियों का हुआ वितरण तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी राजस्व महा-अभियान का बड़ा आंकड़ा: 3 दिन में 23 लाख से अधिक दस्तावेजों का वितरण जमाबंदी पंजी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर  दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर है पूर्णिया पटना   राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे राजस्व महा–अभियान में महज 16 अगस्त से 18 अगस्त तक तीन दिनों में ही बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्यभर में तीन दिनों में अबतक 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियां रैयतों के बीच वितरित की जा चुकी हैं। सर्वाधिक जमाबंदी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर है। वहां कुल जमाबंदी के 24.02 फीसदी जमाबंदी प्रतियों का वितरण किया गया है। दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर पूर्णिया है। जहानाबाद में 14.48 फीसदी, कैमूर में 13.78 फीसदी, नवादा में 13.72 फीसदी एवं पूर्णिया में 11.35 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण तीन दिनों में कर दिया गया है। छठे स्थान पर अररिया है। यहां 11.16 फीसदी वितरण हुआ है। सातवें स्थान पर खगड़िया है। यहां 11.15 फीसदी वितरण हुआ है। आठवें स्थान पर वैशाली है और यहां 10.41 फीसदी जमाबंदी की प्रति का वितरण हो गया है। नौवें स्थान पर गोपालगंज एवं दसवें स्थान पर किशनगंज है। यहां क्रमशः 10.28 फीसदी एवं 9.29 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। बताते चलें कि राज्य के सभी 38 जिलों में कुल जमाबंदी की संख्या 3 करोड़, 59 लाख, 88 हजार 935 है। तीन दिन में सभी जिलों में कुल 23 लाख 08 हजार 574 जमाबंदी प्रति का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। ये कुल जमाबंदी का 6.41 फीसदी है। इस अभियान के तहत गांव–गांव जाकर राजस्व विभाग की टीमें लोगों को उनकी जमीन से जुड़ी जमाबंदी की प्रति उपलब्ध करा रही है। टीम द्वारा जमाबंदी की प्रति के साथ–साथ आवश्यक आवेदन प्रपत्र भी मौके पर  उपलब्ध कराई जा रही है। इस राजस्व महा–अभियान के दौरान जमीन के अभिलेखों की अशुद्धियों का त्वरित सुधार, बंटवारा नामांतरण, उत्तराधिकार   नामांतरण और छूटी हुई   जमाबंदियों को ऑनलाइन करने का काम हो रहा है। इस महा–अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को अपने कागजात में सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है।

3 साल में 22,500 पुलिसकर्मी भर्ती होंगे, CM यादव की घोषणा पर तेज हुई प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पुलिस थानों में खाली पड़े हजारों पद जल्दी भर लिए जायेंगे, सरकार ने इसकी तैयारियां तेज कर दी है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीते 15 अगस्त को घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन साल में ये भर्तियाँ हो जायेंगी इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने भर्तियों के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की भी घोषणा की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के बाद से प्रदेश के युवा उत्साहित हैं, विशेष रूप से उन युवाओं में बहुत उत्साह है जो लंबे समय से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे और खाकी वर्दी पहनने का सपना दिल में संजोये बैठे हैं, उनके सपने जल्दी ही हकीकत में बदलने वाले हैं। सीएम डॉ मोहन यादव ने 15 अगस्त को पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी जानकारी में आया है हमने  7500 पदों पर भर्ती की अनुमति दी है लेकिन अभी भी 20 हजार पद पुलिस विभाग में खाली है, उन्होंने कहा कि हम अगले तीन सालों में सभी खाली पदों को भर देंगे। सीएम ने की पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा  सीएम ने पुलिस के आला अधिकारियों की तरफ देखते हुए कहा कि पहले ये भर्तियाँ कर्मचारी चयन मंडल करता था  जिसमें कई तरह की परेशानियाँ आती थी इसलिए आप इसके लिए बोर्ड बनाइये मैं पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा करता हूँ, जिससे आप अपने हिसाब से भर्ती कर सकेंगे।  इससे पुलिस भर्ती में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। तीन वर्ष तक हर साल होगी 7500 पदों पर भर्ती  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 के लिए पुलिस में स्वीकृत पदों की भर्ती मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल करेगा। वर्ष 2026 से ये भर्तियां पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा ही की जाएंगी। प्रतिवर्ष पुलिस के रिक्त 7500 पदों पर भर्ती की जाएगी और इस प्रकार आगामी 3 वर्ष में पुलिस विभाग के सभी रिक्त 22,500 पद भर दिए जाएंगे। वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात अफसरों के लिए ये घोषणा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस, जेल और नगर सेवा एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियां में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिये जाने की घोषणा भी की है। वीवीआइपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी पात्रता अनुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिये जाने का निर्णण भी लिया गया है।

टीम इंडिया तैयार T20 Asia Cup 2025 के लिए, उपकप्तान और स्टैंडबाय प्लेयर्स हुए घोषित

नई दिल्ली यूएई में 9 सितंबर से टी20 एशिया कप की शुरुआत होनी है और इससे करीब 20 दिन पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। 9 से 28 सितंबर तक दुबई और अबूधाबी में आयोजित होने वाले इस महाद्विपीय टूर्नामेंट के लिए अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली सिलेक्शन कमिटी ने 15 सदस्यीय टीम का चयन किया है, जिसके कप्तान सूर्यकुमार यादव हैं, जबकि उपकप्तान शुभमन गिल हैं। जो कयास शुभमन गिल की टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी को लेकर लगाए जा रहे थे, वह सच हो गए हैं। न सिर्फ उनकी वापसी हुई है, बल्कि उपकप्तान भी उनको बनाया गया है। इंग्लैंड में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में कप्तान और बल्लेबाज के तौर पर उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया था। इसके अलावा इस टेस्ट सीरीज से पहले आईपीएल 2025 में उन्होंने कमाल का खेल दिखाया था। चयनकर्ता संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा वाली जोड़ी पर टिके हुए हैं। दोनों टी20 विश्व कप 2024 के बाद से टीम के लिए ओपनिंग करते हुए आ रहे हैं और भारत को सफलता भी उन्होंने दिलाई है। शुभमन गिल को टीम में जगह मिली है। ऐसे में सवाल ये है कि वे किस पोजिशन पर खेलेंगे। श्रेयस अय्यर अभी भी बाहर मिडिल ऑर्डर बैटर श्रेयस अय्यर को लेकर तमाम रिपोर्ट्स आ रही थीं कि वे एशिया कप की टीम का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन सिलेक्शन कमिटी ने इस टीम का हिस्सा उनको नहीं बनाया है। मध्य क्रम में और फिनिशर के तौर पर अभी भी चयनकर्ता रिंकू सिंह के साथ गए हैं। चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की जानकारी भी दी है कि पांच खिलाड़ी स्टैंडबाय पर हैं। इनमें पेसर प्रसिद्ध कृष्णा, ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर, बल्लेबाज रियान पराग, विकेटकीपर ध्रुव जुरेल और ओपनर यशस्वी जायसवाल का नाम शामिल है। अगर कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो निश्चित तौर पर इनमें से ही सबसे पहले रिप्लेसमेंट का ऐलान होगा। यूएई की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिलेक्टर्स ने स्पिन के विकल्पों पर खासा ध्यान दिया है। स्पिन ऑलराउंडर अक्षर पटेल के अलावा कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती टीम का हिस्सा हैं। तेज गेंदबाजी की बात करें तो जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह के अलावा हर्षित राणा को मौका दिया गया है, जबकि 15 सदस्यीय टीम में पेस ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या भी शामिल हैं। संजू सैमसन के बैकअप विकेटकीपर के तौर पर जितेश शर्मा को टीम में जगह दी गई है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 को ध्यान में रखते हुए टी20 फॉर्मेट में आयोजित होने वाले एशिया कप में भारत ग्रुप ए का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान, यूएई और ओमान की टीम शामिल है। टीम इंडिया को अपना पहला मैच 10 सितंबर को दुबई में यूएई के खिलाफ खेलना है, जबकि इंडिया और पाकिस्तान का मुकाबला इसी मैदान पर रविवार 14 सितंबर को है। वहीं, तीसरा और आखिरी लीग मैच इंडिया का ओमान से है, जो अबू धाबी में 19 सितंबर को है। T20 एशिया कप 2025 के लिए भारत की टीम इस प्रकार है सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, संजू सैमसन (विकेटकीपर), हर्षित राणा और रिंकू सिंह

आयुष मंत्री परमार ने विभाग को स्कॉच अवॉर्ड-2025 पर दी बधाई, टीमवर्क और नवाचार को सराहा

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने, आयुष विभाग को प्रतिष्ठित "स्कॉच अवॉर्ड- 2025" (SKOCH Award-2025) मिलने पर बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। आयुष मंत्री  परमार ने कहा कि "स्कॉच अवॉर्ड- 2025" प्राप्त करना, प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है। यह उपलब्धि टीम भावना, नवाचार और उत्कृष्ट कार्य का परिणाम है, जिससे नागरिकों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो रही हैं। प्रमुख सचिव आयुष  डी.पी. आहूजा ने भी इस उपलब्धि के लिए विभाग को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।  आहूजा ने कहा कि "आयुष ई-मॉनिटरिंग ने पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है तथा राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में आयुष चिकित्सा की सुलभता और गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।" विभागीय अधिकारियों की सतत् निगरानी एवं समन्वय ने विभाग की इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से ई-मॉनिटरिंग सिस्टम के सभी घटकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ, जिससे राज्यभर में आयुष सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आयुष विभाग को यह सम्मान 'आयुष ई-मॉनिटरिंग सिस्टम' परियोजना के सफल क्रियान्वयन एवं उत्कृष्ट परिणामों के लिए प्रदान किया गया है। यह अवार्ड तीन चरणों की विस्तृत प्रस्तुतियों (Presentations) और दो चरणों की सार्वजनिक डिजिटल वोटिंग के बाद प्रदान किया गया, जो इस उपलब्धि की पारदर्शिता और गुणवत्ता को और अधिक प्रमाणित करता है। "स्कॉच अवॉर्ड-2025" वितरण समारोह, 20 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली स्कॉच समिट के दौरान होगा। आयुष ई-मॉनिटरिंग के मुख्य उद्देश्य हैं- प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों और चिकित्सा महाविद्यालयों में OPD (आउट पेशेंट विभाग) में अधिकतम वृद्धि करना, अधिक से अधिक नागरिकों को आयुष सुविधा कवरेज में लाना और लोगों को स्वस्थ एवं रोगमुक्त बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाएं उपलब्ध कराना। आयुष विभाग ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए माह में दो बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) कर सभी आयुष चिकित्सा अधिकारियों एवं आयुष मेडिकल कॉलेजों के साथ अनुभव साझा करना, समस्याओं का समाधान, कठोर निगरानी और मूल्यांकन, हर केंद्र के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा, प्रत्येक आयुष सुविधा की रैंकिंग प्रकाशित करना, प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार कर गुणवत्ता बढ़ाना, आयुष अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना अस्पतालों और कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं का विकास करना जैसे अनेक नवाचार अपनाए हैं।  

महंगाई पर राहत: छत्तीसगढ़ सरकार ने डीए बढ़ाया, अब मिलेगा 55% महंगाई भत्ता

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री ने महंगाई भत्ता (DA) में 2 प्रतिशत की वृद्धि का ऐलान किया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब प्रदेश के कर्मचारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा, जो केंद्र सरकार के बराबर होगा। महंगाई की मार झेल रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई भत्ते में हुई यह वृद्धि सीधे कर्मचारियों की आय को प्रभावित करेगी और त्योहारी सीजन में उनकी जेब थोड़ी और मजबूत होगी। केंद्र के समान लाभ अब राज्य कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में वही लाभ मिलेगा जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिया जा रहा है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों और अधिकारियों में उत्साह का माहौल है।  DA में 2% बढ़ोतरी; अब कुल 55% (केंद्र के समकक्ष) लाभार्थी: सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी एवं पेंशनभोगी लागू होने की तिथि: वित्त विभाग की अधिसूचना के बाद प्रभावी वेतन/पेंशन बिल पर अतिरिक्त वित्तीय भार; सरकार ने इसे बजट प्रावधानों से वहन करने की बात कही सरकार ने महंगाई और लागत-जीवन सूचकांक में हालिया बदलावों को देखते हुए महंगाई भत्ते में 2% की बढ़ोतरी का फैसला लिया है। इस कदम से राज्य के कर्मचारियों का DA अब 55% हो जाएगा, जो केंद्र सरकार के बराबर है। वित्त विभाग जल्द ही औपचारिक अधिसूचना जारी करेगा, जिसके बाद बढ़ा हुआ DA आगामी वेतन और पेंशन भुगतान में समायोजित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय त्योहारी सीज़न से पहले खपत को बढ़ावा देगा और कर्मचारियों की क्रय-शक्ति में सुधार करेगा। साथ ही, पेंशनभोगियों को भी समकक्ष लाभ मिलेगा। मद पहले अब परिवर्तन महंगाई भत्ता (DA) 53% 55% +2%

भोपाल को जल्द मिलेगी मेट्रो की सौगात, सितंबर 2025 से कमर्शियल रन संभव

भोपाल   मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर माह में हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को लंबे इंतजार के बाद भोपाल में मेट्रो की सवारी का मौका मिलेगा। कारपोरेशन का सबसे ज्यादा फोकस इस समय एम्स से डीआरएम तक के स्टेशनों का काम पूरा करने में है। बचे हुए काम के लिए सितंबर 2025 की डेडलाइन तय की गई है। कमर्शियल रन को दो माह से भी कम समय बचा है, ऐसे में यहां टिकटिंग सिस्टम से लेकर यात्रियों के लिए इंफॉर्मेशन सिस्टम, इंटीरियर व बाहरी सौंदर्यीकरण के काम काफी बचे हुए हैं। स्टेशनों को पास के संस्थानों से जोडऩे का काम भी बाकी है। कमिश्नर का निरीक्षण कमर्शियल रन के लिए कमिश्रर मेट्रो रेल सेफ्टी की एनओसी जरूरी है। इसलिए सर्वे व मॉनिटरिंग जारी है। सुरक्षा संबंधी कामों को तय मानकों पर कसा जा रहा है। सोमवार को भी मेट्रो रेल एमडी चैतन्य एस कृष्णा ने मेट्रो के कामों का निरीक्षण कर संबंधितों से काम की स्थिति पर बैठक की। तुर्किए की कंपनी की जगह नया टेंडर जल्द मेट्रो रेल कारपोरेशन ने ऑटोमेटिक टिकट फेयर सिस्टम के लिए तुर्की की कंपनी को दिए काम का ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। टेंडर की शर्तों के अनुसार प्रक्रिया की जा रही है। अभी रद्द करने का लेटर जारी नहीं किया। अफसरों का कहना है कि नए सिरे से टेंडरिंग की जाएगी। कमर्शियल रन में इंदौर की तरह मैन्युअली टिकट सिस्टम से काम चलाया जाएगा। RDSO से मिली हरी झंडी, अब CMRS की तैयारी तेज शहरवासियों के लिए खुशी की खबर है। भोपाल मेट्रो संचालन पूर्व पहले पड़ाव को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है । अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ), रेल मंत्रालय से मेट्रो को प्रमाणीकरण मिल गया है। अब मेट्रो प्रबंधन ने कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की तैयारियों में जुट गया है। भोपाल मेट्रो को आरडीएसओ से मिली हरी झंडी जानकारी के अनुसार आरडीएसओ के प्रमाणीकरण के बाद ही सीएमआरएस की टीम जांचने आती है। जिसके बाद भोपाल में मेट्रो का संचालन शुरू हो पाएगा। इसके मद्देनजर अब दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और प्रोजेक्ट के बचे शेष कामों को टीम के आने से पहले पूरा किया जाएगा। प्रमाणीकरण मिलते ही सोमवार को मेट्रो प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने सुभाष नगर डिपो और एम्स स्टेशन से डीआरएम आफिस मेट्रो स्टेशन तक का निरीक्षण किया। अब सीएमआरएस की तैयारी तेज इस दौरान उन्होंने सीएमआरएस से जुड़ी महत्वपूर्ण साइट्स और कार्यों की स्थिति देखी। स्टेशन में एंट्री-एग्जिट, फुट ओवर ब्रिज, टिकट रूम, स्टेशन कंट्रोल रूम, पम्प रूम, लिफ्ट, एस्केलेटर, फायर एनओसी सहित आंतरिक और बाहरी सुंदरीकरण कार्यों की समीक्षा की गई। एमडी ने सुभाष नगर डिपो का भी मुआयना किया। यहां उन्होंने इन्स्पेक्शन बे लाइन, रिपेयर बे लाइन, टेस्ट ट्रैक, ट्रैक्शन सब-स्टेशन, एडमिन बिल्डिंग के कंट्रोल रूम, प्रमुख सिस्टम रूम्स, रैम्प एरिया, अनलोडिंग-बे और ट्रेनिंग बिल्डिंग जैसी प्रमुख सुविधाओं का जायजा लिया। साथ ही डिपो में ड्रेनेज व्यवस्था, पम्प रूम और फायर एनओसी की स्थिति की भी जानकारी ली। एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को दिए निर्देश निरीक्षण के दौरान एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रायोरिटी कॉरिडोर के तहत ट्रेन परिचालन से जुड़े सभी शेष कार्य जल्द से जल्द पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सीएमआरएस के लिए दस्तावेजीकरण और साइट तैयारियों को तेज गति से निपटाना होगा ताकि समय पर संचालन शुरू किया जा सके। भोपाल मेट्रो के इस कदम से उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले महीनों में राजधानी में मेट्रो परिचालन का सपना हकीकत में बदल सकेगा। इससे यातायात दबाव कम होगा और शहर को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की बड़ी सौगात मिलेगी।

बिहार में लग्जरी पर्यटन की शुरुआत: राजगीर में 2 फाइव स्टार होटल, वैशाली में रिसॉर्ट

पर्यटन उद्योग को नया आयाम : राजगीर में बनेंगे 2 फाइव स्टार होटल, वैशाली में तैयार होगा रिसॉर्ट बिहार में लग्जरी पर्यटन की शुरुआत: राजगीर में 2 फाइव स्टार होटल, वैशाली में रिसॉर्ट बिहार में शुरू होगा लग्जरी पर्यटन का नया दौर! राजगीर-वैशाली में बनेंगे फाइव स्टार होटल पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने वाला बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में कुल 16 एजेंडों पर मुहर लगी, जिनमें राजगीर और वैशाली में फाइव स्टार होटल और रिसॉर्ट बनाने की योजना को स्वीकृति दी गई।  कहां बनेंगे होटल और रिसॉर्ट कैबिनेट की ओर से राजगीर (नालंदा) और वैशाली में होटल और रिसॉर्ट बनाने का प्रस्‍ताव पास किया है। राजगीर में 10 एकड़ भूमि पर दो पांच सितारा होटल और वैशाली में 10 एकड़ भूमि पर एक पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना है। इन परियोजनाओं का निर्माण पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर होगा। इसके तहत जमीन निजी निवेशकों को निर्धारित अवधि के लिए लीज पर दी जाएगी। लीज अवधि समाप्त होने के बाद इनके संचालन और प्रबंधन पर सरकार निर्णय लेगी। पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं में बढ़ोतरी राजगीर और वैशाली बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल हैं। यहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अभी तक इन जिलों में अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले होटल कम होने के कारण पर्यटकों को दिक्कतें होती थीं। नए होटल और रिसॉर्ट बनने से पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और उनकी संख्या में वृद्धि होगी। पर्यटन उद्योग और रोजगार को बढ़ावा # इन परियोजनाओं से बिहार के पर्यटन उद्योग को नई पहचान मिलेगी। # विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। # स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे। # होटल और रिसॉर्ट के आसपास आर्थिक व सामाजिक गतिविधियां तेज होंगी। बिहार का बढ़ता पर्यटन महत्व बताते चलें कि बिहार ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध प्रदेश है। बौद्ध, जैन और हिंदू धर्म से जुड़े कई प्रमुख स्थल यहां हैं। लेकिन उच्च स्तरीय होटलों की कमी पर्यटकों के लिए चुनौती बनी हुई थी। लिहाजा सरकार अब इस कमी को दूर कर बिहार को पर्यटन के मानचित्र पर उभारना चाहती है। जिसका प्रयास सरकार के स्‍तर से भी कर दिया गया है।

38 लाख महिला किसान बदल रहीं बिहार की तस्वीर, खेत से बाजार तक संभाली कमान

अब खेत से बाजार तक महिलाओं का कमाल! सीएम नीतीश ने बदली बिहार की तस्वीर  38 लाख महिला किसान बदल रहीं बिहार की तस्वीर, खेत से बाजार तक संभाली कमान  बिहार की महिलाएं बनीं खेती में ताकत की मिसाल! नीतीश सरकार ने दी आधुनिक तकनीक की उड़ान  अब घर से लेकर खेत तक, महिलाओं के हाथ में कमान! हाथों में ड्रोन और अपने नाम पर कारोबार   61 महिला कंपनियों ने खेती को बनाया व्यापार, किसानों को मिल रहा सही दाम पटना बिहार की मिट्टी अब महिलाओं के हाथों से नई कहानी लिख रही है। कभी अपने घर की चौखट तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज खेत, खलिहान और कारोबार का नेतृत्व संभाल रहीं हैं। इसका श्रेय जाता है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच और उनकी सरकार की उन योजनाओं को, जिन्होंने महिलाओं को खेती-बाड़ी से लेकर कारोबार तक के लिए सशक्त और जिम्‍मेदार बनाया है। 38 लाख महिलाएं बनीं आधुनिक किसान राज्यभर में अब तक 38 लाख से अधिक महिला किसान आधुनिक खेती के तौर-तरीके सीख चुकी हैं। यह बदलाव जीविका योजना और कृषि विभाग की साझेदारी का नतीजा है। अब बिहार के गांव-गांव में खुले 519 कस्टम हायरिंग सेंटर हैं। जहां से महिलाएं ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, थ्रेशर और पावर टिलर जैसी मशीनें किराए पर ले रही हैं। इससे न सिर्फ खेती की लागत घटी है, बल्कि मानव श्रम में कमी आई है और उत्पादन भी दोगुने रफ्तार से बढ़ा है। पशुपालन और नीरा उत्पादन में भी महिलाएं आगे खेती ही नहीं, महिलाएं अब बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन और छोटे डेयरी कारोबार से भी कमाई कर रही हैं। आज 10 लाख से ज्यादा परिवार इनसे जुड़े हैं। बीते साल महिला स्वयं सहायता समूहों ने 1.9 करोड़ लीटर नीरा का उत्पादन और बिक्री की। इससे न सिर्फ गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई बल्कि महिलाओं के लिए स्थायी आमदनी का नया जरिया भी बना। अररिया में तो सीमांचल बकरी उत्पादक कंपनी के तहत करीब 20 हजार परिवार जुड़ भी चुके हैं। बाजार तक महिलाओं की पकड़ खेती में व्यापारिक सोच लाने के लिए अब 61 किसान उत्पादक कंपनियां (FPCs) पूरी तरह महिलाओं के हाथों में हैं। ये कंपनियां खेत से उपज खरीदती हैं, उसका प्रोसेसिंग और पैकेजिंग करती हैं और फिर बाजार ले जाकर बेचती भी हैं। इसका सीधा फायदा महिला किसानों को मिल रहा है। उनकी मेहनत को सही दाम मिल रहा है और घर में भी सम्‍मान मिल रहा है।  शहद से लेकर ड्रोन तक आज बिहार में कुल 11,855 महिलाएं मधुमक्खी पालन कर रही हैं। इनकी मेहनत ने अब तक 3,550 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया है।  इसके अलावा, सरकार की ‘ड्रोन दीदी योजना’ ने महिलाओं के हाथों में टेक्नोलॉजी थमा दी है। इस योजना में महिलाओं को ड्रोन खरीदने पर 80 फीसद यानी 8 लाख रुपये अनुदान मिल रहा है और बाकी राशि जीविका समूह उपलब्ध करा रहे हैं। आने वाले दो साल में देशभर के 14,500 महिला समूहों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। खेत-खलिहान की नई इबारत जैविक खेती, बीज संरक्षण, सब्जी-फल प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों में विविधता, इन सबमें महिलाएं अब बराबर की भागीदार हैं। गांव की चौखट से निकलकर खेतों में ड्रोन उड़ाती महिलाएं इस बदलाव का सबसे बड़ा सबूत हैं। बिहार की बदलती तस्वीर साफ कह रही है।