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लैलूंगा में खुलेगा पंजीयन कार्यालय, वित्त मंत्री चौधरी ने की घोषणा

रायपुर : पूरी प्रतिबद्धता के साथ छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए कर रहे कार्य-वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने लैलूंगा में किया 2.72 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन लैलूंगा में खुलेगा पंजीयन कार्यालय, वित्त मंत्री चौधरी ने की घोषणा जयदयाल सिंघानिया फाउंडेशन के सहयोग से निर्मित कन्या प्राथमिक शाला भवन का हुआ लोकार्पण रायपुर वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने आज रायगढ़ जिले के नगर पंचायत लैलूंगा में 2 करोड़ 72 लाख रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने जयदयाल सिंघानिया फाउंडेशन के सहयोग से नवनिर्मित सेठ जयदयाल कन्या प्राथमिक शाला भवन का लोकार्पण किया, साथ ही स्कूल परिसर में सेठ जयदयाल सिंघानिया की प्रतिमा का अनावरण भी किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करते हुए वित्त मंत्री चौधरी ने स्कूल के छात्रों को ड्रेस, पाठ्य सामग्री व श्रीफल का वितरण किया। कार्यक्रम में वित्त मंत्री चौधरी ने लैलूंगा में पंजीयन कार्यालय खोलने की महत्वपूर्ण घोषणा की। जिससे यहां के लोगों को जमीन रजिस्ट्री के लिए दूर जाने की जरूरत नही पड़ेगी और स्थानीय स्तर पर ही काम होने से समय व ऊर्जा की बचत होगी।           वित्तमंत्री चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ओपी सिंघानिया का लैलूंगा की मिट्टी से गहरा नाता है। वे इसी अंचल में जन्मे, पले-बढ़े और आज देश-प्रदेश में एक प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है। इस क्षेत्र के लिए उनका योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने नवनिर्मित सेठ जयदयाल कन्या प्राथमिक शाला भवन के निर्माण को अत्यंत सुंदर और प्रेरणादायक बताते हुए सिंघानिया फाउंडेशन को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पूरी प्रतिबद्धता और पारदर्शिता के साथ छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने सरकार बनते ही दो साल के बकाया बोनस राशि वितरण किया। धान खरीदी की मात्रा 21 क्विंटल प्रति एकड़ और 3100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान स्वीकृत किए गए, जिनमें से अधिकतर आवास मात्र डेढ़ साल में पूर्ण कर लिए गए। 70 लाख माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना का प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित किया गया है। श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए  श्रीरामलला दर्शन योजना प्रारंभ की गई है, ताकि अयोध्या धाम के दर्शन का सौभाग्य आम जन को मिल सके।           वित्त मंत्री चौधरी ने लैलूंगा में विकास के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि यहां जल्द ही पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया जाएगा। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, ऑक्सीजन जोन, मुक्तिधाम और बायपास सड़क निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति दी जाएगी। विद्यालय के उन्नयन के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा, ताकि यहां के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर वातावरण मिल सके। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें। जब लैलूंगा का एक बेटा देश प्रदेश का ख्यातनाम सीए बन सकता है, तो यहां का हर बच्चा ऊंचाइयों को छू सकता है। हम सबका संकल्प है कि इस अंचल को समृद्ध बनाएंगे और पूरे छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य की श्रेणी में अग्रणी बनाएंगे।             पूर्व मंत्री सत्यानंद राठिया  एवं नगर पंचायत अध्यक्ष कपिल सिंघानिया ने वित्त मंत्री चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सदैव आमजन के सुख-दुख में सहभागी रहते हैं। जल आवर्धन योजना जैसे रुके हुए कार्यों को पुनरू प्रारंभ कराकर उन्होंने जनता के प्रति अपनी संवेदनशीलता दर्शाई है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार ने कहा कि शासन की मंशा अनुरूप लैलूंगा क्षेत्र में सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। ग्रामीणों की सुविधाओं को दृष्टिगत रखते हुए योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है ताकि आमजन को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आगे भी क्षेत्र की जनता की आवश्यकताओं और मांगों को प्राथमिकता देते हुए नए विकास कार्य स्वीकृत कराए जाएंगे। जनसुविधाओं को सुलभ और सशक्त बनाने की दिशा में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। सिदार ने क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।  कार्यक्रम में आईएनएच न्यूज के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी, जनपद अध्यक्ष श्रीमती ज्योति भगत, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शांता भगत व गोपाल अग्रवाल, जनपद उपाध्यक्ष मनोज अग्रवाल, नगर पंचायत उपाध्यक्ष कृष्णा जायसवाल, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक व स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इन कार्यों का किया लोकार्पण व भूमिपूजन वित्त मंत्री चौधरी ने कार्यक्रम में 50 लाख रुपए की लागत से सेठ जयदयाल कन्या प्राथमिक शाला भवन और 42.28 लाख रुपए की लागत से इंद्रप्रस्थ मिनी स्टेडियम में सीटिंग व्यवस्था का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने 40 लाख रुपए से इंद्रप्रस्थ मिनी स्टेडियम उन्नयन, 20 लाख रुपए की लागत से बास्केटबॉल कोर्ट निर्माण, 5 लाख रुपए की लागत से पेंशनर भवन के पास स्नानागार, शौचालय व कक्ष निर्माण और 1.14 करोड़ से अधिक लागत से बी.टी. रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। साथ ही, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, ऑक्सीजोन, मुक्तिधाम, बायपास सड़क और अन्य विकास कार्यों को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब आगे क्या, कब और कैसे …कांग्रेस हमलावर; टाइमिंग पर उठाए सवाल

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने इस्तीफे में धनखड़ ने लिखा कि वे "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने" के लिए यह फैसला ले रहे हैं। उनके इस अचानक फैसले से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। धनखड़ का इस्तीफा संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन आ गया। फिलहाल उनके उत्तराधिकारी की दौड़ शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं। आगामी दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है। धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए चुनाव ‘‘जल्द से जल्द’’ कराना होगा। संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव, रिक्ति होने के बाद "यथाशीघ्र" आयोजित किया जाएगा। रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति "अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक" पद धारण करने का हकदार होगा। भाजपा के पास कई बड़े नेता कतार में भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है। राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है। धनखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। धनखड़ के पूर्ववर्ती एम वेंकैया नायडू थे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में थे। पार्टी ने 2017 में उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना था। नायडू भाजपा के अध्यक्ष भी रहे। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है। मानसून सत्र के पहले दिन एक्टिव दिखे इंडिया टुडे की सीनियर रिपोर्टर मौसमी सिंह बताती हैं कि मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ पूरी सक्रियता से संसद में दिखे. संसद में उन्होंने कई मीटिंग भी ली. 21 जुलाई की शाम 6 बजे उन्होंने विपक्ष के सांसदों से मुलाकात भी की. इस दौरान उन्होंने खराब स्वास्थ्य का कोई जिक्र नहीं किया था. लेकिन 3 घंटे बाद ही उनका इस्तीफा हो गया. 23 जुलाई को जयपुर दौरा तय था जगदीप धनखड़ का ये फैसला इसलिए भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि उनके आगे के कार्यक्रम भी प्रस्तावित थे. 23 जुलाई को उनको जयपुर जाना था. वहां उपराष्ट्रपति रियल एस्टेट डेवलपर्स संघ के साथ संवाद करने वाले थे. उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से इस कार्यक्रम को लेकर प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी. विपक्ष टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है जगदीप धनखड़ के खिलाफ महाभियोग लाने वाला विपक्ष भी उनके अचानक इस्तीफे से हैरान हैं. विपक्षी नेताओं ने इसको लेकर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस कदम को रहस्यमयी बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,  कार्यकाल और विवादों से भरा रहा सफर जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक था। अपने कार्यकाल के दौरान उनका विपक्ष से कई बार टकराव हुआ और उनके खिलाफ पहली बार महाभियोग प्रस्ताव लाया गया जिसे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था। मार्च 2025 में AIIMS दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी और वे कुछ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। हालांकि वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे, पर उनकी तबीयत को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही। एक सियासी तूफान आकार ले रहा था ऊपर से सामान्य दिखने वाले राजनीतिक गतिविधियों के ठीक पीछे एक सियासी तूफान आकार ले रहा था. सोमवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के विपक्षी सदस्यों के नोटिस को स्वीकार कर लिया. यह लगभग उसी समय (दोपहर 2 बजे) हुआ जब यह खबर आई कि निचले सदन में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 100 से ज़्यादा सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. लगभग 4:07 बजे राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महाभियोग प्रस्ताव पर 63 विपक्षी सांसदों से नोटिस मिलने की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने उस प्रक्रिया की याद दिलाई जब किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर दोनों सदनों में नोटिस दिए जाते हैं.  धनखड़ ने प्रक्रिया का विवरण दिया और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से यह पुष्टि करने के लिए भी कहा कि क्या निचले सदन में नोटिस दिया गया है. फिर उन्होंने एक संयुक्त समिति के गठन और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की बात कही. इस तरह पता चलता है कि उन्होंने अपने अंतिम संबोधन और उपस्थिति में भी उन्होंने अपने स्वास्थ्य या इस्तीफा देने के किसी अन्य इरादे की ओर कोई इशारा नहीं किया.  राजनाथ सिंह के घर क्या हो रहा था? शाम को संसद में राजनाथ सिंह के कार्यालय के बाहर भी काफी हलचल रही और बैठकें भी खूब हुईं. सूत्रों का कहना है कि भाजपा सांसद राजनाथ के कार्यालय में घुसे और बिना कुछ बोले ही बाहर निकल गए. एक भाजपा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे कोरे कागज पर दस्तखत करवाए जा रहे थे. हालांकि विपक्षी सांसद इस बात को लेकर उत्साहित थे और उन्हें विश्वास था कि महाभियोग प्रस्ताव सबसे पहले राज्यसभा में लाया जाएगा क्योंकि राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति भी होते हैं और प्रोटोकॉल के अनुसार सरकार में स्पीकर से पद में बड़े होते हैं. धनखड़ के इस्तीफे के बाद असमंजस में कांग्रेस राज्यसभा के पिछले कुछ सत्र धनखड़ के लिए एक कठिन परीक्षा थी, क्योंकि उन्होंने सहयोग किया और दोनों पक्षों की नाराज़गी झेली. विपक्षी सदस्यों ने धनखड़ पर पक्षपात करने का आरोप लगाया, उन्होंने चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इस मामले में उपसभापति ने फैसला सुनाया और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया. अब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस असमंजस में दिख रही है. इंडिया ब्लॉक के सदस्यों … Read more

मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई

पालकी में भगवान चन्द्रमोलेश्वर व मनमहेश हाथी पर विराजित होकर भक्तों का कुशल-क्षेम लेने उज्जैन नगर भ्रमण पर निकले मुख्यमंत्री डॉ. यादव डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पूरे सवारी मार्ग पर चले पैदल मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई अलग-अलग स्थानों पर 8 जनजातीय दलों के द्वारा दी गई प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में हुए शामिल उज्जैन  श्रावण माह का दूसरा सोमवार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में शामिल हुए। भगवान महाकालेश्वर पालकी में चन्द्रमोलेश्वर के रूप में तथा हाथी पर मनमहेश के स्वरूप में विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देने और अपनी प्रजा का कुशल-मंगल जानने नगर भ्रमण पर निकले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सवारी निकलने के पूर्व सभा मंडप में पालकी का पूजन-अर्चन किया। सर्वप्रथम भगवान महाकालेश्वर भगवान का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन कर आरती की गई। भगवान श्रीमहाकाल की सवारी धूमधाम से निकाली गई जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर 08 जनजातीय दलों के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संपूर्ण सवारी मार्ग पर बाबा महाकाल की आराधना और भजन-कीर्तन करते हुए नंगे पांव चले। इस दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालुहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, संजय अग्रवाल आदि ने भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए। भगवान महाकालेश्वर की दूसरी सवारी के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव पूरे सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पैदल चले। स्कूली विदयार्थियों द्वारा घोष वादन किया गया और श्रध्दालुओं के भोले शंभु भोलेनाथ के जयकारों से संपूर्ण उज्जैन नगरी गुंजायमान हुई। एम्बुलेन्स को निकलने के लिए जगह दी सवारी के दौरान रोगी को ले जा रही एम्बुलेन्स को सवारी मार्ग के बीच से निकलने के लिए श्रध्दालुओं द्वारा ढाबा रोड व कमरी मार्ग पर रास्ता प्रदान किया गया। सम्पूर्ण सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के उद्घोष के साथ पुष्प वर्षा की।   महाकाल के चन्द्रमोलेश्वर स्वरूप को गार्ड ऑफ ऑनर भगवान चन्द्रमोलेश्वर पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में सवार चन्द्रमोलेश्वर भगवान को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दिया गया। सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के घोष के साथ अवन्तिका नगरी के राजाधिराज पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमोलेश्वर व हाथी पर आरूढ़ भगवान मनमहेश पर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर सवारी में पुलिस बैंड की प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरुप 350 पुलिस के जवानों द्वारा पुलिस बैंड के माध्यम से नम: शिवाय ॐ नमः शिवाय, हर हर शंभू देवा महादेवा, मेरे घर राम आए है, देवा हो देवा गणपति देवा, ॐ जय शिव ओमकारा ,सत्यम शिवम सुन्दरम आदि शिवभजनों की सु-मधुर धुनों की प्रस्तुतियां दी गई जिस पर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर झूमे। बाबा महाकाल की एक झलक के लिए असंख्य श्रद्धालु हुए आतुर भगवान श्रीमहाकाल की सवारी के दौरान पूरी उज्जैन नगरी शिवमय हो गई। महाकालेश्वर भगवान की सवारी में हजारों भक्त झांझ, मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। साथ ही उज्जैन के बाहर से आये हुए भक्तगण भी बाबा की एक झलक पाने के लिए उत्सुक थे। महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान चन्द्रमोलेश्वर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा माँ क्षिप्रा के जल से अभिषेक पूजन किया गया। रामघाट के दूसरी तरफ दत्त अखाडा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। साथ ही कलाकार सुलक्ष्मी तलरेजा के द्वारा भगवान शिव पर आधारित भजन प्रस्तुत किए गए। भगवान महाकालेश्वर की पालकी के रामघाट पहुंचने पर शंखनाद और भगवान महाकालेश्वर की आरती की गई। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने यहां भगवान महाकालेश्वर का पूजन अर्चन कर प्रदेश की सुख समृद्धि और विकास की कामना की। पूजन – अर्चन के उपरांत भगवान महाकाल की सवारी रामघाट से रामानुज कोट ,  मोढ की धर्मशाला, कार्तिकचौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। जहाँ परंपरानुसार सिंधिया स्टेट की ओर से गोपाल मंदिर के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित चन्द्रमोलेश्वर का पूजन किया गया। सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। जहाँ पुनः आरती उपरांत सवारी का विश्राम हुआ। 8 जनजातीय कलाकारों के दल ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप बाबा महाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए 08 जनजातीय कलाकारों के दल ने महाकालेश्वर भगवान की दूसरी सवारी में सहभागिता की। जनजातीय दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर कला संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। छवीलदास भावली के नेतृत्व में नासिक महाराष्ट्र के जनजातीय सौगी मुखोटा नृत्य एवं अजय कुमार के नेतृत्व में हरियाणा का लोकनृत्य हरियाणवी घुमर के दल ने महाकालेश्वर मंदिर परिसर व शहनाई द्वार के पास अपने साथियों के साथ प्रस्तुति दी। खेमराज के नेतृत्व में राजस्थान का गैर-घूमरा जनजातीय नृत्य व रवि अहिरवार के नेतृत्व में मध्यप्रदेश छतरपुर के बरेदी लोकनृत्य की कोट मोहल्ला चौराहे पर प्रस्तुति दी गई। अज्जू सिसोदिया के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में झाबुआ का भगोरिया नृत्य एवं बनेसिंह भाई के नेतृत्व में गुजरात जनजातीय राठ नृत्य दल ने रामानुजकोट पर अपनी संस्कृति व कला का प्रदर्शन लोकनृत्य के माध्यम से किया। माँ क्षिप्रा के तट रामघाट पर उडीसा के लोकनृत्य शंख ध्वनि सुनील कुमार साहू के नेतृत्व में व छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य लोकपंथी का दिनेश कुमार जागड़े के नेतृत्व में दलों ने महाकालेश्वर भगवान के सवारी के आगमन पर प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। चलित रथ में लगी एलईडी से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए सवारी के आगे और पीछे एलईडी लगे 2 रथ चले, जिस पर सवारी के लाइव प्रसारण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सुगमता पूर्वक दर्शन किए। 

सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका! MP में 825 पद खाली, महिला उम्मीदवारों को विशेष आरक्षण

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही 825 पदों पर विशेष पुलिस की भर्ती करने जा रही है. चयनित जवानों को मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिले में पदस्थ किया जाएगा. इनको शुरुआत में 25 हजार रुपए महीने का मानदेय दिया जाएगा. इसकी अधिसूचना मध्य प्रदेश शासन ने जारी कर दी है. इच्छुक अभ्यर्थी 7 अगस्त 2025 तक इस परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं. महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिलों के लिए चलाए जा रहे विशेष पुलिस भर्ती में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा. यानि 825 में से 309 महिलाओं का चयन किया जाएगा. इसके साथ ही 15 प्रतिशत पद होमगार्ड सैनिक और 10 प्रतिशत पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित होगा. 5वीं-8वीं पास भी कर सकते हैं आवेदन विशेष पुलिस भर्ती में एसटी वर्ग के लिए न्यूनतम योग्यता 5वीं पास और अन्य वर्गों के लिए 8वीं पास रखी गई है. सबसे पहले अभ्यर्थियों का शरीरिक परीक्षण होगा. इसके बाद साक्षात्कार लिया जाएगा. इस साक्षात्कार में संबंधित नक्सल प्रभावित गांव और आसपास की जानकारियों से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे. फिर मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन होगा. एसपी ऑफिस से होगा अनुबंध नियुक्ति के लिए जो भी अभ्यर्थी पात्र होंगे, उनका संबंधित जिले के एसपी ऑफिस के साथ अनुबंध किया जाएगा. इन्हें शुरूआत में 25 हजार रुपए वेतन मिलेगा. हर 6 महीने में इन जवानों की समीक्षा की जाएगी. यदि जवान का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहता है, तो इन्हें सेवामुक्त किया जा सकेगा. वहीं यदि ये एसपी या उच्च अधिकारियों द्वारा दिए गए दायित्वों का निर्वहन करते हैं, तो इनकी सेवा विस्तार की जा सकेगी. 3 महीने दिया जाएगा प्रशिक्षण डीआईजी चयन, पीएचक्यू वीरेंद्र सिंह ने बताया कि "चयनित जवानों को इंदौर और हॉकफोर्स बालाघाट के साथ ही संबंधित जिलों की पुलिस लाइन में 3 महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. नियुक्ति अवधि के बाद संतुष्टिजनक ड्यूटी निभाने पर एक-एक वर्ष करके तीन वर्ष के लिए सेवा अवधि बढ़ाई जा सकेगी. हालांकि इसके बाद डीजीपी के आदेश पर 3 साल का और सेवा विस्तार किया जा सकता है." परिजनों को मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का लाभ विशेष पुलिस भर्ती में केवल बालाघाट के बैहर, बिरसा, परसवाड़ा, लांजी और किरनापुर अलावा मंडला के बिछिया, मवई और डिंडौरी जिले के बजाग, समनापुर और करंजिया विकासखंड़ो के 595 गांवों के मूल निवासी ही इसमें शामिल हो सकेंगे. भर्ती की आरक्षण तालिका भी जिलों की आबादी के अनुसार बनाई गई. खास बात यह है कि कर्तव्य निवर्हन के दौरान यदि किसी जवान की मृत्यु होती है, तो उसके परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ भी मिलेगा. सबसे अधिक बालाघाट में होगी भर्ती वीरेंद्र सिंह ने बताया कि "825 में से 755 जवानों की नियुक्ति बालाघाट जिले में की जाएगी. यहां 302 ओपेन, 264 महिला, 113 होम गार्ड और 76 पदों पर भूतपूर्व सैनिकों को आरक्षण मिलेगा. वहीं मंडला में 102 पदों पर भर्ती होगी. इसमें 40 पद ओपेन, 10 भूतपूर्व सैनिक, 16 होमगार्ड और 36 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा डिंडौरी जिले में 25 पदों पर भर्ती होगी. जिसमें 10 ओपेन, 2 भूतपूर्व सैनिक, 4 होमगार्ड और 9 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.

सरकारी भर्तियों में बड़ा सुधार, एक परीक्षा से खुलेंगे कई विभागों के द्वार

भोपाल  सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें एक ही पद के लिए बार-बार परीक्षाएं नहीं देनी होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने नई भर्ती प्रणाली को लेकर प्रारूप तैयार किया है। यह प्रस्ताव मुख्य सचिव अनुराग जैन के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंजूरी ली जाएगी। इस प्रस्ताव के अमल में आने से न केवल परीक्षार्थियों का समय और धन बचेगा, बल्कि भर्ती प्रणाली भी अधिक दक्ष और पारदर्शी बनेगी। यह बदलाव खासतौर पर युवाओं के लिए बड़ा राहत भरा साबित होगा। भर्ती प्रक्रिया में ये होंगे अहम बदलाव  नए प्रस्ताव के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) केवल 6 प्रकार की परीक्षाएं आयोजित करेगा, जिसमें प्रशासनिक सेवा और वन सेवा शामिल होंगी। MPESB (पूर्व में व्यापमं) 5 प्रमुख श्रेणियों की परीक्षाएं आयोजित करेगा, जिसमें इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, स्नातक एवं परास्नातक डिग्रीधारकों के लिए परीक्षाएं होंगी। एक मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर नियुक्तियां होंगी। उम्मीदवारों को आवेदन के समय विभागों के वैकल्पिक नाम भरने होंगे, जिससे चयन के बाद विभाग बदलने की समस्या नहीं रहेगी। परीक्षार्थियों को क्या होगा लाभ  अब हर पद के लिए अलग-अलग परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। परीक्षा शुल्क की बचत होगी। चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होगी। परीक्षा परिणामों को लेकर होने वाले विवाद भी कम होंगे। वर्तमान में पीएससी सालभर में 25 और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ( MPESB) करीब 30 प्रकार की परीक्षाएं आयोजित करता है, जिससे अभ्यर्थियों को बार-बार आवेदन और परीक्षा देने की परेशानी होती है। नई नीति के लागू होते ही यह दोहराव खत्म होगा।  चार प्रमुख श्रेणियों में परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी है स्नातक स्तरीय परीक्षा- सभी ग्रुप-सी के पदों के लिए हायर सेकेंडरी स्तरीय परीक्षा- 12वीं पास योगयता पर आधारित पदों के लिए तकनीकी पदों के लिए परीक्षा- इंजीनियरिंग,आइटीआइ आदि तकनीकी योग्यता वाले पद शिक्षक पात्रता परीक्षा- उच्च माध्यमिक,माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक पदों के लिए आवेदन के समय करेंगे अभ्यर्थी करेंगे च्वाइस फिलिंग विभिन्न विभागों की एक जैसी भर्ती के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा होगी, लेकिन पेपर एक जैसा तैयार किया जाएगा। अभ्यर्थियों को आवेदन करते समय च्वाइस फिलिंग करनी होगी कि वे किसी पद के लिए आवेदन किया है और परीक्षा दी है।उसके हिसाब से मेरिट सूची तैयार होगी। इस बदलाव से लाभ एक ही परीक्षा से अनेक विभागों में चयन की संभावना। विभिन्न विभागों के लिए बार-बार आवेदन और परीक्षा की जरूरत नहीं। अभ्यर्थियों का समय, पैसा और मानसिक तनाव कम होगा। भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जल्द होगी। मेरिट के आधार पर निष्पक्ष नियुक्तियां संभव होंगी। साल 2025 की आगामी ये परीक्षाएं प्रस्तावित हैं आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा-अगस्त 2025 प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-अगस्त-सिंतबर 2025 समूह-02 उपसमूह-03 -अक्टूबर 2025 समूह-01 उपसमूह-02 -अक्टूबर 2025 संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग-सितंबर 2025 समूह-02 उपसमूह-04-नवंबर 2025 क्षेत्ररक्षक,जेल प्रहरी परीक्षा-नवंबर 2025 समूह-03 उपयंत्री-जनवरी 2026 आइटीआई में प्रशिक्षण अधिकारियों के पदों की चयन परीक्षा-फरवरी 2026 समूह-02 उपसमूह02 -मार्च 2026 सूबेदार,शीघ्रलेखक,सहायक उप निरीक्षक चयन परीक्षा-अप्रैल 2026 पुलिस आरक्षक जीडी भर्ती परीक्षा -अप्रैल 2026 सहायक उप निरीक्षक (कंप्यूटर) एवं प्रधान आरक्षक (कंप्यूटर) भर्ती परीक्षा- मई 2026 ईएसबी का क्या कहना है? ईएसबी के संचालक साकेत मालवीय ने कहा कि एक ही ग्रुप की एक जैसे समकक्ष पदों के लिए चार परीक्षाएं कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब साल भर में करीब 30 परीक्षाओं के बदले चार परीक्षाएं होंगी। अगर शासन से मंजूरी मिलती है तो इसे लागू किया जाएगा। पीएससी से केवल राज्य प्रशासनिक परीक्षाएं नए बदलावों के तहत एमपीपीएससी अब केवल राज्य प्रशासनिक सेवा, वन सेवा, इंजीनियरिंग, शिक्षा और कृषि सेवा जैसी प्रमुख परीक्षाएं आयोजित करेगा। एमपीईएसबी द्वारा स्नातक, 12वीं और पीजी स्तरीय पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। अब तक की व्यवस्था एमपीपीएससी(Government Jobs Rules Change) सालभर में 25 तो ईएसबी 30 परीक्षाएं आयोजित करता था। अब पीएससी से 6 तो एमपीईएसबी 5 होंगी। बदलाव के ये फायदे     बार-बार परीक्षा देने की जरूरत नहीं।     परीक्षा शुल्क में कमी आएगी।     एक परीक्षा से विभिन्न में चयन संभव।     आवेदन के समय इच्छित विभाग चुनेंगे।     एकीकृत मेरिट सूची बनेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सौगात: प्रदेश के बच्चों को 4.30 लाख साइकिलों का वितरण

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग इस वर्ष नि:शुल्क साइकिल प्रदाय योजना में 4 लाख 30 हजार बच्चों को नि:शुल्क साइकिल का वितरण करेगा। साइकिल वितरण की शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरू पूर्णिमा महोत्सव में भोपाल के शासकीय कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय के सर्व सुविधा युक्त भवन के लोकार्पण समारोह से की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 50 बच्चों को नि:शुल्क साइकिलें वितरित की। प्रदेश में अब तक एक लाख से अधिक बच्चों को उनकी पात्रतानुसार नि:शुल्क साइकिल का वितरण किया जा चुका है। नि:शुल्क साइकिल प्रदाय योजना में ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत विद्यार्थी जो कि शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 और 9 में अध्ययनरत हैं, वह जिस ग्राम का निवासी है उस ग्राम में शासकीय माध्यमिक या हाई स्कूल संचालित नहीं है और उसे अपने विद्यालय तक पहुचंने के लिये 2 किलोमीटर या इससे अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है, उन बच्चों कक्षा 6 या 9 में प्रथम प्रवेश पर एक बार नि:शुल्क साइकिल दिये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कन्या छात्रावास में पढ़ने वाली छात्राएं, जिनकी शाला छात्रावास से 2 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर है उन्हें भी इस योजना में नि:शुल्क साइकिल प्रदाय की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पहले सभी पात्र विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरण के निर्देश दिये हैं। संचालनालय स्तर पर नि:शुल्क साइकिल वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है। कक्षा 6 में पढ़ने वाले बच्चों को 18 इंच और कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले बच्चों को 20 इंच की साइकिल वितरित की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को साइकिल वितरण के पहले उनके उचित भंडारण के संबंध में भी निर्देश दिये गये हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष विभागीय योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को उचित समय पर दिये जाने के संबंध में कार्ययोजना तैयार की है।

UPI में बड़ा अपडेट! NPCI की नई गाइडलाइन से ट्रांजैक्शन होंगे और आसान

नई दिल्ली अगर आप UPI का यूज करते हैं तो आपके लिए गुड न्‍यूज है. यूपीआई के माध्‍यम से ओवरड्रॉफ्ट फैसिलिटी को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इसके तहत क्रेडिट लाइन को डायरेक्‍ट UPI से जोड़ा जाएगा. जिसके बाद आप अपने लोन अकाउंट से पैसा UPI के जरिए आसानी से निकाल पाएंगे. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 10 जुलाई 2025 को एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें प्री-अप्रूव क्रेडिट लाइंस को UPI से लिंक के लिए नए गाइडलाइन जारी किए गए हैं.  सर्कुलर में कहा गया है कि अगले महीने यानी अगस्‍तर से बैंक की प्री-अप्रूव्‍ड क्रेडिट लाइन की रकम का यूज आप UPI से डायरेक्‍ट कर पाएंगे. अबतक सिर्फ सामान खरीदने की अनुमति दी गई थी. अब UPI के जरिए क्रेडिट लाइन की रकम से न सिर्फ दुकानों पर पेमेंट किए जा सकेंगे, बल्कि कैश निकालने, किसी को पैसे भेजने से लेकर छोटे दुकानदारों को पेमेंट करने का भी फीचर दिया जाएगा.  पहले यह नियम अलग था. UPI पर क्रेडिट लाइन के जरिए सिर्फ दुकानों पर ही पेमेंट किया जा सकता था, लेकिन अब लोन ओवरड्रफ्ट को यूपीआई से लिंक करने के बाद यूज किया जा सकता है.  लोन अकाउंट UPI से होगा डायरेक्‍ट लिंक  नए नियम के तहत अब UPI यूजर्स फिक्‍स डिपॉजिट, शेयर, बॉन्‍ड, प्रॉपर्टी, गोल्‍ड या फिर पर्सनल और बिजनेस लोन ओवरड्रॉफ्ट को UPI से लिंक करके यूज कर सकेंगे. सरल शब्‍दों में कहें तो अब आप Paytm, PhonePe, Google Pay जैसे थर्ड पार्टी UPI ऐप्‍स से सीधा लोन अकाउंट से पेमेंट कर सकेंगे.  अगले महीने से ये सर्विस NPCI ने सभी यूपीआई बैंक सदस्‍यों और क्रेडिट लाइन सुविधा देने वालों को निर्देश दिया है कि यह सुविधा 31 अगस्‍त 2025 तक लागू करना है. ऐसे में यूपीआई यूज करने वाले करोड़ों यूजर्स को इसका लाभ मिलेगा.  क्‍या होता है क्रेडिट लाइन  आपको बता दें कि क्रेडिट लाइन एक तरह का लोन होता है, जिसे बैंक या कोई भी वित्तीय संस्‍था यूजर्स की इनकम और क्रेडिट स्‍कोर के आधार पर अप्रूव करता है. बैंक की ओर से अप्रूव क्रेडिट लाइन अकाउंट को आप UPI से लिंक कर सकते हैं और इसका इस्‍तेमाल कर सकते हैं. 

विमान हादसा: अहमदाबाद प्लेन क्रैश में इन 5 बातों से खुलेगी अमेरिका की पोल

नई दिल्ली अहमदाबाद प्लेन क्रैश मामले में अभी अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आई है। मगर, अमेरिका समेत कई देशों के मीडिया ने यह खबर चलाई थी कि अहमदाबाद-लंदन एयर इंडिया ड्रीमलाइनर विमान हादसे का कारण पायलटों में से किसी एक ने जानबूझकर ईंधन की आपूर्ति बंद कर दी थी। उन्होंने इंजन के स्विच को रन' से 'कटऑफ' पर कर दिया था। इससे इंजन को ईंधन मिलना बंद हो गया और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अब इस मामले में एक एविएशन एक्सपर्ट ने अपनी राय दी है और कहा है कि मैथेमैटिकली ये संभव ही नहीं है। भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट रहे अहसान खालिद ने कहा कि मीडिया को बिना किसी सबूत के अटकलें नहीं लगानी चाहिए। माना जा रहा है कि अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार और मीडिया एयर इंडिया के उस विमान को बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग को बचाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, यह भी जानेंगे कि इस मामले में जांच अब किन बिंदुओं पर केंद्रित हो गई है। जान-बूझकर फ्यूल स्विच बंद करने की बात गलत विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) 12 जून को हुए इस हादसे की जांच कर रहा है। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों सहित कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। AAIB ने हाल ही में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। वह यह है कि ईंधन स्विच एक सेकंड के भीतर बदले गए थे। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है कि यह जानबूझकर किया गया था। हालांकि, पायलट रह चुके कैप्टन एहसान खालिद इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत दुखद है। हमें उन सभी लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए जिन्होंने इस हादसे में अपनी जान गंवाई। हमें AAIB की जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए ताकि दुर्घटना का असली कारण पता चल सके। विमान में दो तरह के स्विच होते हैं, यह जान लीजिए एयर इंडिया ड्रीमलाइनर 787-8 टेक-ऑफ के 32 सेकंड बाद एक मेडिकल कॉलेज के परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में दो तरह के स्विच होते हैं। इसमें एक रन स्विच होता है, जो इंजन को चालू रखता है। वहीं, दूसरा कटऑफ स्विच होता है, जिसके दबाते ही इंजन बंद हो जाता है। विमान ने हासिल कर ली थी 100 नॉटिकल मील की स्पीड AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, विमान ने 08:08:42 UTC पर अपनी अधिकतम गति 180 समुद्री मील (knots) यानी करीब 185 किलोमीटर प्रति घंटे हासिल कर ली थी।। इसके बाद, इंजन 1 और 2 के लिए ईंधन कटऑफ स्विच एक सेकंड के अंतराल में रन से कटऑफ स्थिति में चले गए। इंजन 1 का ईंधन स्विच 08:08:52 UTC पर कटऑफ से रन पर वापस लाया गया। वहीं, इंजन 2 का स्विच 08:08:56 पर वापस लाया गया। रन से कट ऑफ में दोनों स्विच बदले, यह संभव नहीं रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि एक पायलट ने दूसरे पायलट से पूछा कि उसने इंजन क्यों बंद कर दिया। इसके जवाब में दूसरे पायलट ने कहा कि उसने ऐसा नहीं किया। एक न्यूज चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए एक्सपर्ट खालिद ने कहा-मैं एक नया गणितीय आकलन पेश करना चाहता हूं जो उन कहानियों को गलत साबित करता है जो चल रही हैं। 42 सेकंड के टाइमस्टैम्प पर ईंधन स्विच एक सेकंड के भीतर 'रन' से 'कट-ऑफ' में बदल गए। इसका मतलब है कि एक सेकंड के भीतर दोनों स्विच को बंद कर दिए गए। यह असंभव है। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट की कहानी झूठी निकली एक्सपर्ट खालिद ने कहा-फिर कहानी यह है कि दूसरे पायलट ने यह देखा और पूछा-आपने इंजन क्यों बंद कर दिया?' अगर यह सच है, तो मुझे लगता है कि इस कहानी को बताने वाले को अब यह बताना होगा कि उस व्यक्ति ने इस स्विच को वापस चालू करने के लिए 10 सेकंड तक इंतजार क्यों किया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में भी यह नहीं कहा गया है कि दोनों पायलट खुद को मारना चाहते थे। अटकलों की बात छोड़ें, तकनीकी खामी से बंद हुए इंजन खालिद ने बताया कि मुझे लगता है कि एक इलेक्ट्रिकल सिग्नल ने विमान के फ्यूल को बंद कर दिया था। स्विच को उस समय नहीं बदला गया था। शायद उन्हें बाद में तब बदला गया जब पायलट इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश कर रहे थे ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। मगर, उसे वे रोक नहीं पाए। कैप्टन खालिद का मानना है कि पायलटों ने जानबूझकर इंजन बंद नहीं किए थे। किसी तकनीकी खराबी के कारण इंजन बंद हो गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को बिना किसी सबूत के अटकलें नहीं लगानी चाहिए। हादसे की असली वजह के लिए ये 5 ब्लाइंड स्पॉट्स फ्यूल स्विच के कटऑफ की कमांड: फ्यूल रन या कटऑफ के लिए थ्रॉटल कंट्रोल बॉक्स यूनिट का डुप्लीकेट टेस्ट कराया जा सकता है, ताकि पता चले कि कटऑफ कमांड इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी का नतीजा थी या इसमें पायलटों का कोई दोष था। पायलटों की आखिरी बातचीत की टाइमलाइन: एक पायलट ने पूछा था कि आपने फ्यूल क्यों बंद किया? दूसरे ने कहा-मैंने नहीं किया। इसे समझने के लिए CVR (कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर), FDR (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) की टाइमलाइन समान होना जरूरी है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में स्विच की आवाज है या नहीं: फ्यूल कंट्रोल स्विच घुमाने पर एक क्लिकिंग की आवाज आती है, जो CVR के एरिया माइक में दर्ज हो जाती है। अगर आवाज रिकॉर्ड नहीं हुई, तो इससे पता चलता है कि यह मैनुअली नहीं किया गया है। FAA की एडवाइजरी का पालन हुआ था या नहीं: फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने 2018 में फ्यूल स्विच लॉकिंग मैकेनिज्म पर एडवाइजरी दी थी। जांच एजेंसी ने मेंटेनेंस रिकॉर्ड्स, सर्विस बुलेटिन लॉग्स, डीजीसीए से क्लीयरेंस कॉपी मांगी है। इसे नजरअंदाज करना गंभीर संचालन लापरवाही में आएगा। इंजन के वॉल्व खुलने-बंद करने की जांच: किस सेंसर ने क्या संकेत दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट में इसका कोई जिक्र नहीं है। बतया जा रहा है कि एएआईबी ने जीई व बोइंग से इन चैनलों का रॉ डेटा मांगा है। यह भी जांचा जाएगा कि 32 सेकेंड में किसी इंजन को फिर से स्टार्ट किया … Read more

भारत की रणनीतिक तैयारी: दौलत बेग ओल्डी तक पहुंचने वाला गुप्त मार्ग लगभग तैयार

दौलत बेग ओल्डी 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए तनाव के बाद से भारत अपनी सीमा पर बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत कर रहा है. खासकर लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (DBO) जैसे रणनीतिक इलाकों तक पहुंच को और सुरक्षित करने के लिए भारत एक नई 130 किलोमीटर लंबी सड़क बना रहा है. ये सड़क ससोमा–सासेर ला–सासेर ब्रांग्सा–गपशान–डीबीओ के रास्ते से होकर गुजरती है. इसे बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) बना रहा है. ये नई सड़क न सिर्फ तेज और सुरक्षित है, बल्कि ये चीनी सेना की नजरों से भी बची रहेगी. आइए, समझते हैं कि ये सड़क क्यों इतनी खास है?   क्या है दौलत बेग ओल्डी (DBO) और क्यों है ये इतना जरूरी? दौलत बेग ओल्डी (DBO) भारत का सबसे उत्तरी सैन्य ठिकाना है, जो लद्दाख में कराकोरम पास के पास और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर है. ये इलाका सब-सेक्टर नॉर्थ (SSN) का हिस्सा है, जिसमें डेपसांग मैदान और सियाचिन ग्लेशियर जैसे रणनीतिक क्षेत्र आते हैं. DBO में दुनिया का सबसे ऊंचा हवाई पट्टी (एयरस्ट्रिप) है, जो 16614 फीट की ऊंचाई पर है. इसकी मदद से भारतीय सेना को हथियार, रसद और सैनिकों को हवाई रास्ते से पहुंचाने में आसानी होती है.  लेकिन DBO तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता अभी तक दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) सड़क था, जो 255 किलोमीटर लंबी है. ये सड़क LAC के बहुत करीब से गुजरती है, जिसकी वजह से ये चीनी सेना (PLA) की निगरानी में रहती है. गलवान घाटी में 2020 के तनाव का एक बड़ा कारण यही DSDBO सड़क थी, क्योंकि चीन को भारत की इस सड़क से अपनी स्थिति पर खतरा महसूस हुआ. इसीलिए भारत ने एक नई वैकल्पिक सड़क बनाने का फैसला किया, जो न सिर्फ सुरक्षित हो, बल्कि तेज भी हो. नई सड़क: ससोमा से DBO तक का रास्ता ये नई 130 किलोमीटर लंबी सड़क ससोमा से शुरू होती है, जो नुब्रा घाटी में सियाचिन बेस कैंप के पास है. ये सड़क सासेर ला (17,660 फीट), सासेर ब्रांग्सा, गपशान और फिर DBO तक जाती है. इसकी खास बातें हैं…     दूरी और समय में कमी: अभी DBO तक पहुंचने में लेह से 322 KM का रास्ता तय करना पड़ता है, जिसमें लगभग 2 दिन लगते हैं. नई सड़क दूरी को 79 KM कम करके 243 KM कर देगी और यात्रा का समय 11-12 घंटे तक सिमट जाएगा.     चीन की नजरों से बचाव: DSDBO सड़क LAC के बहुत करीब है. चीनी सेना इसे आसानी से देख सकती है. नई सड़क का रास्ता ऐसा है कि ये ज्यादातर हिस्सों में चीनी निगरानी से बचा रहेगा, जिससे सैनिकों और हथियारों की आवाजाही सुरक्षित होगी.     भारी हथियारों की ढुलाई: BRO ने इस सड़क पर 9 पुल बनाए हैं, जिन्हें पहले 40 टन वजन सहने के लिए बनाया गया था. अब इन्हें 70 टन की क्षमता तक अपग्रेड किया जा रहा है. इसका मतलब है कि भारी तोपें, जैसे बोफोर्स और टैंक आसानी से DBO तक पहुंच सकेंगे. बोफोर्स तोपों का इस सड़क पर सफल परीक्षण भी हो चुका है.     सियाचिन से सीधी पहुंच: ये सड़क ससोमा से शुरू होती है, जो सियाचिन बेस कैंप के पास है. इससे सियाचिन से DBO तक सीधे सैनिक और हथियार भेजे जा सकेंगे, बिना लेह जाए. कैसे बन रही है ये सड़क? इस सड़क को बनाना कोई आसान काम नहीं है. 17,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर, जहां ऑक्सीजन की कमी और भारी बर्फबारी आम बात है. BRO के 2000 मजदूर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा गया है…     प्रोजेक्ट विजयक: ससोमा से सासेर ब्रांग्सा तक का हिस्सा, जिसका बजट 300 करोड़ रुपये है. ये हिस्सा पूरी तरह बन चुका है.     प्रोजेक्ट हिमांक: सासेर ब्रांग्सा से DBO तक का हिस्सा, जिसका बजट 200 करोड़ रुपये है. इस हिस्से का 70% काम पूरा हो चुका है. बाकी नवंबर 2026 तक खत्म हो जाएगा. सबसे मुश्किल हिस्सा है सासेर ला पास और श्योक नदी के पास का इलाका. यहां ग्लेशियरों और खड़ी चट्टानों के बीच सड़क बनाना एक बड़ा चैलेंज है. इसके लिए BRO जियोसेल जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, जो सड़क को मौसम और भारी वजन के लिए मजबूत बनाती हैं. श्योक नदी पर 345 मीटर लंबा एक पुल भी बन रहा है, जिसमें सात खंभों का इस्तेमाल हो रहा है. ऑक्सीजन कैफे और अन्य चुनौतियां इतनी ऊंचाई पर काम करना आसान नहीं. सासेर ला जैसे इलाकों में ऑक्सीजन की कमी से मजदूरों को सांस लेने में दिक्कत होती है. बर्फबारी की वजह से साल में सिर्फ 5-6 महीने ही काम हो सकता है. BRO ने मजदूरों की सुरक्षा और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन कैफे बनाए हैं. ये छोटे-छोटे स्टेशन हैं, जहां मजदूरों को ऑक्सीजन दी जाती है ताकि वो एल्टीट्यूड सिकनेस से बच सकें. इसके अलावा, सासेर ला में एक 8 किलोमीटर लंबा टनल बनाने की योजना भी है. इसका डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुका है. इस साल काम शुरू हो सकता है. ये टनल 2028 तक बनकर तैयार हो सकता है, जिससे सर्दियों में भी DBO तक पहुंच आसान हो जाएगी. क्यों जरूरी है ये सड़क? 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें दोनों तरफ के सैनिक मारे गए थे. इस तनाव का एक बड़ा कारण था DSDBO सड़क, जो LAC के इतने करीब है कि चीनी सेना इसे आसानी से निशाना बना सकती है. गलवान घाटी और डेपसांग जैसे इलाकों में चीन की PLA ने सड़कें और ठिकाने बनाए हैं, जो भारत के लिए खतरा हैं. नई सड़क के बनने से कई फायदे होंगे…     सुरक्षा: ये सड़क चीनी सेना की नजरों से दूर है, जिससे सैनिकों और हथियारों की आवाजाही गुप्त रहेगी.     तेजी: लेह से DBO तक का समय आधा हो जाएगा, जिससे सैनिक और रसद तेजी से पहुंच सकेंगे.     भारी हथियार: 70 टन की क्षमता वाले पुलों की वजह से टैंक और बोफोर्स जैसे भारी हथियार आसानी से DBO तक पहुंच सकेंगे.     सियाचिन और डेपसांग की सुरक्षा: … Read more

युवाओं के लिए खुशखबरी! योगी सरकार की नई योजना से बड़ी कंपनियों में मिलेगा रोजगार

लखनऊ  यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने रोजगार के लिए एक नया प्लान बनाया है. जीरो पावर्टी अभियान के अंतर्गत योगी सरकार ने एक ऐसी योजना का खाका तैयार किया है जो न सिर्फ ट्रेनिंग देगी, बल्कि कई बड़ी नामी कंपनियों में सीधे नौकरियों से जोड़ेगी.  इस अभियान की शुरुआत के पहले चरण में 300 गरीब परिवारों के मुखियाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर की जाएगी. जिससे उन्हें 18,400 रुपए प्रति महीने सैलरी  वाली नौकरियों से जोड़ा जा सकेगा. खास बात यह है कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन लोगों को नौकरी के लिए परेशान नहीं होना होगा. एक न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक कंपनियां खुद इन लोगों तक पहुंचेंगी. राज्य सरकार उन्हें सीधे टॉप कंपनियों में प्लेस कराएगी. इनमें होटल ताज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एल एंड टी लिमिटेड, अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक यह देश में पहली बार है जब कोई सरकार प्रत्यक्ष रूप से गरीबों को कॉर्पोरेट सेक्टर से जोड़ने जा रही है. अब काबिलियत होगी पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि गरीबों को सिर्फ राहत की जरूरत नहीं, बल्कि अवसरों की जरूरत है. उन्हें अगर अवसर मिलें तो कोई भी परिवार आत्मनिर्भर बन सकता है. सरकार की सोच है कि दया नहीं, अवसर दें.  ताकि कमजोर वर्ग खुद पर गर्व कर सके. कौशल विकास विभाग के जिम्मे होगी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को इस अभियान की कमान सौंपी गई है. मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अनुसार, पहले चरण में 300 परिवारों को चिन्हित कर लिया गया है. इसके बाद अभियान को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा. इसके लिए एक हज़ार से अधिक ट्रेनिंग पार्टनर प्रदेश भर में चयनित किए जा रहे हैं जो व्यावसायिक प्रशिक्षण की प्रक्रिया में भाग लेंगे. नौकरी के लिए हर पहलू पर तैयारी यह योजना पारंपरिक प्रशिक्षण से एकदम अलग होगी. यहां केवल तकनीकी जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा. 360 डिग्री मॉडल के तहत जिन क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा उनमें हॉस्पिटैलिटी, बुनियादी अंग्रेजी व संवाद कौशल, कस्टमर डीलिंग, कार्यालय और शौचालय की सफाई, गेस्ट अटेंडेंट, हाउसकीपिंग के काम है. ट्रेनिंग इस तरह तैयार की गई है कि सभी प्राइवेट सेक्टर की जरूरतों के अनुरूप ढल सकें और उन्हें काम मिलने में कोई बाधा न हो. 18,400 मासिक वेतन की न्यूनतम गारंटी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चयनित और प्रशिक्षित परिवार प्रमुख को कम से कम ₹18,400 मासिक वेतन मिलेगा. यह राशि उन्हें सिर्फ नौकरी देने के नाम पर नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन देने की नीयत से तय की गई है. उद्योग जगत ने बढ़ाया हाथ अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को न केवल देशभर के बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जगत का भी समर्थन मिला है. अब तक 40 से अधिक बड़ी कंपनियों ने इन प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी देने की इच्छा जताई है.  मुख्य सचिव ने स्पष्ट करते हुए कहा, हम लोगों को हक़ दे रहे हैं काम करने का, आत्मनिर्भर बनने का. यह योजना किसी भी दृष्टि से दया या रियायत नहीं है, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम है. विकास का हिस्सा बनेगा हर नागरिक मुख्य सचिव  ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा कहते हैं  कि जब तक समाज का सबसे पिछड़ा व्यक्ति आगे नहीं बढ़ता, विकास अधूरा रहता है. इस योजना में भी वही दर्शन झलकता है. यह नारा अब नीतियों में तब्दील हो चुका है.