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CM मोहन यादव की सख्त चेतावनी: कलेक्टरों को लगाई फटकार, कहा- जिम्मेदारी निभाओ

भोपाल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल में खाद वितरण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कलेक्टरों को फटकार लगाई। कहा कि इस बार पिछले साल से अधिक खाद उपलब्ध हुआ है। फिर भी समस्या खड़ी हो रही है। वितरण व्यवस्था का प्रबंधन करने का दायित्व कलेक्टरों का है। यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो इसका मतलब यह हुआ कि जिला चलाना नहीं आता है। यदि जिला नहीं चला पा रहा है तो बता दें, हम दूसरी व्यवस्था करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दमोह और जबलपुर में किए गए नवाचार को देखें, जब वे कर सकते हैं तो फिर बाकी जिले क्यों नहीं। सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ है और उन्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।   कई जिलों में परेशान हो रहे किसान रीवा, पन्ना, अशोक नगर सहित कई जिलों में किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। ऐसे ही प्रदर्शन के दौरान रीवा में पुलिस ने बल प्रयोग भी किया था। इन स्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बुधवार को समीक्षा की, जिसमें सभी कलेक्टर वर्चुअली जुड़े। इस दौरान उन्होंने अव्यवस्था की सूचनाओं पर नाराजगी जताई। कलेक्टरों को निर्देश-खाद की उपलब्धता की समीक्षा करें उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि जानकारी जनप्रतिनिधियों से भी साझा करें, ताकि किसानों को वास्तविक स्थिति पता रहे। खाद वितरण केंद्रों का आकस्मिक सत्यापन और निगरानी करें। अतिरिक्त विक्रय केंद्र की आवश्यकता है, तो तत्काल आरंभ करें। 53 एफआईआर और 88 लाईसेंस निरस्त बैठक में बताया गया कि उर्वरक की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अवैध परिवहन और नकली उर्वरक आदि से संबंधित प्रकरणों पर कार्रवाई करते हुए 53 एफआईआर दर्ज की गईं। 88 लाइसेंस निरस्त और 102 निलंबित किए गए। 406 विक्रय प्रतिबंधित किए गए। 43 हजार टन अधिक यूरिया दिया बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि खाद की कमी नहीं है। मक्का का क्षेत्र बढ़ने के बावजूद दो सितंबर तक 15 लाख 46 हजार टन यूरिया विक्रय किया जा चुका है। यह पिछले साल 15.3 लाख टन था। इस प्रकार देखें तो 43 हजार टन अधिक यूरिया किसानों को उपलब्ध कराया जा चुका है। यही स्थिति डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी को लेकर है। पिछले साल अब तक 29.14 लाख टन खाद बेचा गया था, जो इस बार 30.20 लाख टन हो चुका है। 1.82 लाख टन यूरिया, 1.74 लाख टन डीएपी, 2.19 लाख टन एनपीके और 3.84 लाख टन एसएसपी भंडारित है। दमोह और जबलपुर की व्यवस्था बनी माडल-बैठक में दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर ने बताया कि खाद वितरण व्यवस्था में हमने किसान संगठनों को सहभागी बनाया है। टोकन तहसील कार्यालय से बांटे जा रहे हैं और वितरण विक्रय केंद्रों से किया जा रहा है। जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने बताया कि किसानों को टोकन फोन काल पर दिए जा रहे हैं। खाद वितरण केंद्रों पर डिस्पले बोर्ड लगाए हैं और नंबर प्रदर्शित होने पर खाद दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जिले की परिस्थितियों को देखते हुए इस माडल पर विचार करने के निर्देश दिए।

CM विष्णुदेव साय का संकल्प: हर नागरिक को मिले विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ और कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल तेलंगाना के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर बस्तर में शुरू होगा 200 करोड़ की लागत से 240 बिस्तरों का हाई-टेक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, अब मरीजों को इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा रायपुर और बिलासपुर रायपुर, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ और कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल तेलंगाना के बीच लाइसेंस समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह अनुबंध प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के अंतर्गत किया गया है। इस अवसर पर वन एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, आयुक्त स्वास्थ्य डॉ. प्रियंका शुक्ला, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के अधिकारी जयदीप दास गुप्ता एवं श्रीनिवास राव तथा कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल हैदराबाद के अध्यक्ष डॉ. गुरुनाथ रेड्डी, डॉ. रघुनाथ रेड्डी और के.वी. रेड्डी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आदिवासी अंचलों सहित प्रदेश के हर नागरिक तक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचे। उन्होंने कहा कि आठ वर्ष पूर्व इस अस्पताल के निर्माण की शुरुआत की गई थी और आज जब छत्तीसगढ़ अपनी रजत जयंती मना रहा है, तब इस एमओयू का होना ऐतिहासिक महत्व रखता है। गणेश महोत्सव के पावन अवसर पर हुआ यह समझौता प्रदेशवासियों के लिए शुभ संकेत है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बस्तर क्षेत्र के लोग लंबे समय से उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रहे हैं, किंतु अब यह अस्पताल उनके लिए वरदान साबित होगा। विशेषकर नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों के लिए यह जीवनरक्षक सिद्ध होगा। पहले घायल जवानों को एयर एंबुलेंस से रायपुर भेजना पड़ता था, अब जगदलपुर में ही उन्हें अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध होगा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि हर नागरिक को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें। बस्तर अंचल में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना राज्य और क्षेत्रवासियों के लिए गर्व की बात है। पहले ये सेवाएँ केवल रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में उपलब्ध थीं, लेकिन अब बस्तर के लोग भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगा। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने जानकारी दी कि इस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निर्माण पर 200 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसमें से 120 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 80 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने वहन किए हैं। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) ने भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि यह अस्पताल 11 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और अत्याधुनिक मशीनों एवं उपकरणों से सुसज्जित है। यह 10 मंजिला अस्पताल 240 बिस्तरों की क्षमता वाला होगा। इसमें हृदय रोग (कार्डियोलॉजी), किडनी रोग (नेफ्रोलॉजी), मस्तिष्क रोग एवं न्यूरो सर्जरी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसे विभाग संचालित होंगे। ओपीडी, आईसीयू और आपातकालीन सेवाओं सहित गहन चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधाएँ यहाँ उपलब्ध होंगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सरकारी दर पर उपचार प्रदान करेगी। सरकारी दर पर उपलब्ध इन सेवाओं का लाभ न केवल बस्तर संभाग बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देशभर के मरीज उठा सकेंगे। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक पहल को प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया। इससे बस्तर अंचल के लाखों लोगों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा और बड़े शहरों पर उनकी निर्भरता कम होगी। यह अस्पताल न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के मरीजों के लिए नई आशा और जीवनदायी सुविधा साबित होगा।

युवा नौकरी पाने वाले नहीं, रोजगार प्रदान करने वाले बनें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में आरंभ होंगे रोजगारपरक पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों को मिलेगी बस सुविधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवा नौकरी पाने वाले नहीं, रोजगार प्रदान करने वाले बनें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में आईटी रिसोर्स सेंटर, एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट और कन्या छात्रावास का किया भूमिपूजन पीएम-उषा परियोजना अंतर्गत होगा निर्माण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा के बदलते दौर में सभी विश्वविद्यालयों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के बेहतर भविष्य की संभावनाओं के लिए दुनिया में मिसाल कायम कर रहे हैं। वे दिन गए जब भारत किसी बड़े देश के पीछे चलकर पहचान बनाता था। हमें गर्व है कि आज भारत किसी पर निर्भर नहीं है। भारत के बदलते समय का विश्वविद्यालय के छात्र पूरा उपयोग करें। हमारे युवा बेहतर तकनीक का उपयोग करते हुए देश को आगे ले जाने का सपना देखें और उसे पूरा करने के लिए परिश्रम करें। राज्य सरकार विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ है। हमारे युवा नौकरी पाने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें। सरकार हर संभव सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय की पढ़ाई शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में सभी नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम आरंभ करने और विद्यार्थियों को आवागमन के लिए नि:शुल्क बस सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय परिसर में 55 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले आईटी रिसोर्स सेंटर, स्टूडियो, कन्वेंशन हॉल और इंक्यूबेशन सेंटर तथा एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट व कन्या छात्रावास का भूमिपूजन कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम उषा परियोजना के भूमिपूजन और दीक्षारंभ कार्यक्रम में गणपति बप्पा मोरया के जयघोष एवं सरस्वती माता को नमन करते हुए अपना संबोधन आरंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के सभी क्षेत्रों को विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। भोपाल में मेट्रो की शुरुआत होने वाली है। इसके साथ भोपाल के पास मेट्रो और अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण के लिए बीईएमएल की इकाई का भूमि-पूजन हो चुका है। भारतीय रेल के हाईस्पीड कोच भी इस कारखाने में बनाए जाएंगे। भोपाल को पर्यटन के क्षेत्र में भी एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। अब बड़ी झील में कश्मीर की तर्ज पर शिकारे चलाए जाएंगे। भोपाल से इंदौर, जबलपुर और रीवा के लिए नए ग्रीन फील्ड हाइवे तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पीएम मित्रा का निर्माण हो रहा है। हमारे किसानों द्वारा उत्पादित कपास की मांग दुनिया में है। प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें। प्रदेश में रेडीमेड गारमेंट के नए उद्योग शुरू हों, इसके लिए दिल्ली में निवेशकों और उद्योग घरानों को आज चर्चा के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। भविष्य में मध्यप्रदेश के युवा फैशन डिजाइनिंग और रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री में अग्रणी बनें, इसके लिए राज्य सरकार निश्चित कार्ययोजना बना रही है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में बदलाव का बीड़ा उठाया है। पूर्व में उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने जिस विजन से कार्य किया, उसके सुखद परिणाम अब सामने आने लगे हैं। राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित हैं। प्रदेश में गरीब और पिछड़े छात्रों के लिए सर्व सुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज बनाए जा रहे हैं। भविष्य में शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार ने दो बड़े निर्णय किए हैं। इसके अंतर्गत अब डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देना और प्रदेश के चिन्हित विश्वविद्यालयों में देश की विभिन्न भाषाओं को क्रेडिट के माध्यम से पाठ्यक्रम में शामिल कर पढ़ाया जाना शामिल है। प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में होने जा रही यह अभिनव पहल पूरे देश को संदेश देने का कार्य करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दोनों नवाचारों के लिए हमें निरंतर प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया। हृदय प्रदेश, मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सभी क्षेत्रों में नवाचार करते हुए देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने भोपाल में संचालित विकास गतिविधियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। कुलगुरु प्रो. एसके जैन ने बताया कि बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय को 100 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। इस अवसर पर वर्ष 2025-26 के नए विद्यार्थियों का दीक्षांत समारोह भी हो रहा है। कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, कुलगुरु प्रो. एस.के जैन सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं। उल्लेखनीय है कि पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) का उद्देश्य उच्च शिक्षा की उत्कृष्टता में सुधार लाना है। इस योजना में राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें प्रदेश के 38 विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों के लिए 565 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्राप्त हुई है। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के लिए 100 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत 55 करोड़ रूपए की लागत के कार्य होंगे।  

वंचित और गरीबों के लिए मददगार बनें, राज्यपाल पटेल ने दी प्रेरक सलाह

अपने अनुभव और प्रयासों से वंचित और गरीबों की मदद करें : राज्यपाल पटेल राज्यपाल से केन्द्रीय सचिवालयीन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने की भेंट भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में कार्यरत अधिकारी अपने अनुभव को जनकल्याण के कार्यों में लगाए। हमेशा प्रयास करें कि आमजन की समस्याएं दूर हो। उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिले। ग़रीब, वंचित और जरूरतमंदों की मदद ही सच्ची जनसेवा है। यह पुण्य का काम है। राज्यपाल पटेल सचिवालय प्रशिक्षण तथा प्रबंधन संस्थान द्वारा आयोजित 89वें ई-मिड-कैरियर प्रशिक्षण के तहत केंद्रीय सचिवालयीन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी, वरिष्ठ अवर सचिवों को संबोधित कर रहे थे। राजभवन के वेंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मूल मंत्र से ही विकसित भारत का निर्माण होगा। हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार की अनेक जन कल्याणकारी योजनाएं हर वर्ग तक पहुँच रही है। पीएम जनमन योजना और धरती आबा जैसे विशेष कार्यक्रमों से जनजाति कल्याण की दिशा में अभूतपूर्व कार्यों हो रहे हैं। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनकल्याणकारी राज्य के लिए सचिवालयीन अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका विशिष्ट होती है। सरकारी नौकरी व्यवसाय मात्र नहीं है, वंचितों के जीवन में खुशहाली लाकर समाज और देश का सुखद भविष्य बनाने की प्रतिबद्ध सेवा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि आप जब भी दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में जाए तो ग़रीब, वंचित और ज़रूरतमंदों की समस्याओं को देखे, समझे और आत्मीयता से सुने। सरकारी धन का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करें और इसके ख़र्च में मितव्ययिता का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारी समय-समय पर विकास कार्यों की प्रभावी मॉनीटरिंग भी सुनिश्चित करें। राज्यपाल पटेल का संयुक्त निदेशक और कोर्स डॉयरेक्टर दीपक कुमार बिष्ट ने पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। बिष्ट ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षु अधिकारियों की ओर से सुनील कुमार ने प्रशिक्षण अनुभवों को साझा किया। विनोद बिहारी सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।  

इंदौर के MY अस्पताल में चूहों का कहर, दूसरे नवजात की भी हुई मृत्यु

इंदौर  इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल के NICU में चूहों के काटने से दोनों बच्‍चो की मौत हो गई है. ये दोनों बच्‍चे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे. अब इस पूरे मामले में बड़ा एक्शन हुआ है. MY हॉस्पिटल में हुई नवजात बच्ची की मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल को नोटिस भेजा है. नोटिस भेज कर MY हॉस्पिटल के सुपरिंटेंडेंट और महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन से इस पूरे मामले को लेकर जवाब मांगा है. राज्य मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल प्रबंधन से साफ पूछा कि आखिर नवजात बच्चे की मौत कैसे हुई? बच्चों को चूहों ने कैसे कुतरा? इस गंभीर लापरवाही का जिम्मेदार कौन-कौन है? चूहे पीडियाट्रिक सर्जिकल वार्ड (NICU) तक कैसे पहुंच गए? 3 दिन के नवजात बच्चे की मौत रैट बाइट का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. 3 दिन के नवजात बच्ची की मौत पर मानवाधिकार भी सख्त है. अब अस्पताल प्रबंधन को इस पूरे मामले को लेकर 1 महीने में अपना जवाब देना होगा. सुरक्षा पर उठे सवाल अस्पताल सूत्रों की मानें तो NICU में लंबे समय से चूहे घूम रहे थे, लेकिन किसी ने रोकथाम नहीं की. रविवार को एक नवजात के हाथ पर चोट आई और सोमवार को दूसरी घटना हुई. दोनों मामलों के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने फौरन पेस्ट कंट्रोल और सुरक्षा के लिए कदम उठाए. मेडिकल कॉलेज के डीन ने मामले में ड्यूटी पर तैनात नर्स को निलंबित कर दिया. इसके साथ ही HOD और एमवाय अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. नर्सिंग अधीक्षक को भी हटाया गया है और पांच डॉक्टरों की टीम मामले की जांच करेगी. अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया कि मरीजों के परिजन वार्ड में खाने-पीने का सामान ले आते हैं, जिससे चूहों की संख्या बढ़ रही है. उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले लगभग पांच सालों में अस्पताल में कोई बड़ा पेस्ट कंट्रोल नहीं हुआ था. इस मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डीन को नोटिस दिया है। मामला सामने ने पर दो नर्सिंग अधिकारियों ने डीन ने निलंबित कर दिया था। इससे नर्सिंग स्टाॅफ में नाराजगी है। उनका कहना है कि अस्पताल में ठीक से सफाई न होने से चूहे अस्पताल में घूमते है। चूहों की संख्या पर नियंत्रण करने के लिए पेस्ट कंट्रोल कंपनी का स्टाॅफ भी तैनात रहता है। यदि वह ठीक से काम करें तो चूहे अस्पताल में नजर नहीं आएंगे। परिसर में बना रखे है चूहों ने बिल एमवाय अस्पताल के परिसर में चूहों के सैकड़ों बिल है। कई चूहे तो आधा एक किलो के है। वे अस्पताल के वार्डों में नहीं बल्कि आईसीयू, एनआईसीयू में भी नजर आते है। कई बार वायर भी काट देते है। उधर एमवाय अस्पताल में नवजातों को चूहों के कुतरने के मामले में मानव अधिकार आयोग ने अस्पताल अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए है। उन्हें जल्दी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। उधर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना पर कहा है कि अस्पताल में चूहों के मानव अंगों को कुतरने का मामला नया नहीं है। कई बार घटनाएं छुपाई जाती है। भाजपा के 22 साल का असली चेहरा इस तरह की घटनाएं है। प्लेग के समय चलाया था अभियान 30 साल पहले सूरत में प्लेग फैलने के मामला सामने आया था तो इंदौर के एमवाय अस्पताल को भी चूहों से मुक्त करने का अभियान चलाया गया था। पेस्ट कंट्रोल कंपनियों ने हजारों की संख्या में चूहों का सफाया किया था, लेकिन अब फिर चूहों की बढ़ती संख्या परेशानी की वजह बन गई है।

जिला प्रशासन, उर्वरक उपलब्धता और वितरण के संबंध में किसान संगठनों से निरंतर सम्पर्क और संवाद बनाए रखें- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जिलों में उर्वरक वितरण में अव्यवस्था के लिए कलेक्टर होगें उत्तरदायी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिला प्रशासन, उर्वरक उपलब्धता और वितरण के संबंध में किसान संगठनों से निरंतर सम्पर्क और संवाद बनाए रखें उर्वरक वितरण व्यवस्था की हो सघन मॉनीटरिंग और अनुचित गतिविधियों पर करें कठोर कार्यवाही अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत के लिए हो तत्काल कार्यवाही जनहानि और पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलब्ध कराई जाए राज्य शासन हर स्थिति में किसानों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की अतिवृष्टि तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों और जिलों में उर्वरक वितरण व्यवस्था की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिलों में उर्वरक वितरण के संबंध में जिला प्रशासन आवश्यक व्यवस्था बनाए। उपलब्ध उर्वरक की उचित वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से निरंतर संवाद और संपर्क में रहे। उर्वरक वितरण की व्यवस्था में किसान संगठन के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाए। जिलों में यदि उर्वरक वितरण को लेकर अव्यवस्था होती है तो उसके लिए जिला कलेक्टर उत्तरदायी होंगे। राज्य सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों और जिलों में उर्वरक वितरण की स्थिति की बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना सहित अधिकारी उपस्थित थे। सभी जिले के कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारी वर्चुअली जुड़े। किसानों को जिले में उपलब्ध उर्वरक की वास्तविक स्थिति से निरंतर करावाये अवगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में उर्वरक उपलब्धता की सघन समीक्षा की जाए। साथ ही जिले में उपलब्ध उर्वरक के स्टॉक की जानकारी जनप्रतिनिधियों से भी साझा करें, इससे किसानों को जिले में उर्वरक उपलब्धता की वास्तविक स्थिति से अवगत कराने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन डबल लॉक, पैक्स और निजी विक्रय केंद्रों का आकस्मिक सत्यापन और उनकी मॉनिटरिंग अनिवार्य रूप से करें। अतिरिक्त विक्रय केन्द्र की आवश्यकता होने पर उनका संचालन तत्काल आरंभ किया जाए। कृषि, सहकारी बैंक, विपणन संघ के अधिकारी निरंतर सम्पर्क में रहें। उर्वरक से संबंधित अवैध गतिविधियों के लिए हुईं 53 एफ.आई.आर और 88 लायसेंस किए निरस्त बैठक में खरीफ 2025 के लिए यूरिया, डी.ए.पी, एन.पी.के, एस.एस.पी, एम.ओ.पी तथा डी.ए.पी + एन.पी.के की उपलब्धता, ट्रांजिट की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही नेनो एवं जैविक उर्वरक वितरण कार्यक्रम के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बताया गया कि उर्वरक की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अवैध परिवहन और नकली उर्वरक आदि से संबंधित प्रकरणों पर कार्यवाही करते हुए 53 एफ.आई.आर दर्ज की गई और 88 लायसेंस निरस्ती, 102 लायसेंस निलंबन सहित 406 विक्रय प्रतिबंधित की कार्यवाही की गई। उर्वरक की बेहतर वितरण व्यवस्था में हुए नवाचारों का करें अनुसरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उर्वरक वितरण व्यवस्था के संबंध में धार, दमोह, जबलपुर और रीवा जिले के कलेक्टरों से चर्चा की। दमोह कलेक्टर ने बताया कि किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से सतत् सम्पर्क और संवाद सुनिश्चित करते हुए वितरण व्यवस्था में उनका सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही टोकन वितरण और उर्वरक वितरण को अलग-अलग किया गया है। टोकन तहसील कार्यालय से बांटे जा रहे हैं और वितरण विक्रय केन्द्रों से किया जा रहा है। जबलपुर कलेक्टर ने बताया कि किसानों के लिए टोकन वितरण की व्यवस्था फोन कॉल द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। उर्वरक वितरण केन्द्रों पर डिस्पले बोर्ड लगाए गए हैं। बोर्ड न पर टोकन नंबर प्रदर्शित कर उर्वरक वितरण किया जा रहा है। डिस्पले बोर्ड पर जिले में उपलब्ध उर्वरकों की मात्रा भी प्रदर्शित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य जिलों को भी इस प्रकार के नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति में सजग और सक्रिय रहे पुलिस प्रशासन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जिन-जिन क्षेत्रों में भी अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को क्षति हुई है, वहां राहत के लिए तत्काल कार्रवाई आरंभ की जाए। साथ ही जनहानि और पशु हानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलबध कराई जाए। बाढ़ के दौरान अस्थाई कैम्प व्यवस्था, राशन वितरण, भोजन वितरण आदि की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामग्री सभी संभावित स्थानों पर उपलब्ध हो। आगामी दिनों में भी भारी वर्षा की संभावना है। सभी जिलों में पुलिस प्रशासन सक्रिय और सजग रहते हुए पुल-पुलिया में बैरिकेटिंग और बाढ़ की स्थि‍ति में पुल क्रास न करने की चेतावनी की व्यवस्था जैसी सभी आवश्यक सावधानियां सुनिश्चित करें। प्रदेश में दर्ज की गई औसत से 21 प्रतिशत अधिक वर्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1 जून से 2 सितम्बर तक 971.5 एमएम अर्थात् 38.24 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जो औसत से 21 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 21 जिलों में भिण्ड, छतरपुर, श्योपुर, ग्वालियर, नीमच, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, अलीराजपुर, सिंगरौली, राजगढ़, मण्डला, सीधी, टीकमगढ़, गुना, नरसिंहपुर, दतिया, रतलाम, उमरिया, रायसेन और सिवनी में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। सर्वाधिक वर्षा गुना, मण्डला, श्योपुर, रायसेन और अशोकनगर में दर्ज हुई। प्रदेश के प्रमुख बांधों में जलभराव की स्थित की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। प्रभावित 17,500 कृषकों के लिए 20 करोड़ रूपए से अधिक की राहत राशि स्वीकृत बैठक में बताया गया कि बाढ़ और अतिवृष्टि में कुल 394 जनहानि हुई और 5 हजार से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए। बाढ़ से 1814 पशुहानि भी दर्ज की गई। शिवपुरी, बुरहानपुर, दमोह, अशोकनगर, धार, छतरपुर, रायसेन, उमरिया, बड़वानी, मंडला और कटनी जिलों का कुल 12 हजार हेक्टेयर रकबा अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित हुआ है। प्रभावित 17 हजार 500 कृषकों के लिए 20 करोड़ रूपए से अधिक की राहत राशि स्वीकृत की गई है। 

अमेरिका की टैरिफ नीति पर Moody’s ने दी चेतावनी, आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ा

वाशिंगटन  एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ बम फोड़कर हुए बड़े-बड़े दावे करते हुए धौंस दिखा रहे हैं, तो वहीं ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने उन्हें बड़ा झटका दिया है. अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में मूडीज ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका गंभीर मंदी की कगार पर पहुंच गया है और यूएस इकोनॉमी का एक तिहाई हिस्सा पहले से ही संकट से जूझ रहा है. ये चेतावनी ट्रंप ही नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए एक बुरी खबर है.  मूडीज का ट्रंप को बड़ा अलर्ट मूडीज एनालिटिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि राज्य-स्तरीय आंकड़े इस ओर इशारा कर रहे हैं, कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी के कगार पर है. उन्होंने विश्लेषण के आधार पर कहा कि हालात ये हैं कि अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद (यूएस जीडीपी) का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बनाने वाले राज्य या तो मंदी की चपेट में हैं या मंदी के हाई रिस्क में पहुंच चुके हैं.  अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जीडीपी ग्रोथ रेट और महंगाई के आंकड़ों को भले ही आर्थिक सफलता का प्रमाण बता रहे हैं और टैरिफ के पॉजिटिव असर के दावे कर रहे हैं, लेकिन मूडीज के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका एक और मंदी के मुहाने पर खड़ा है, जिससे भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.  मंदी के खतरे में राज्य, नौकरियां खत्म  रिपोर्ट में जैंडी के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका की जीडीपी का एक तिहाई हिस्सा जिन राज्यों के आता है, वो मंदी से गुजर रहे हैं या मंदी के खतरे में हैं. वहीं एक तिहाई राज्यों की ग्रोथ स्थिर दिख रही है, जबकि बचे हुए एक तिहाई राज्यों में ही वृद्धि दर्ज की जा रही है. मार्क जैंडी के मुताबिक, सरकारी नौकरियों में कटौती के कारण संकट बढ़ता नजर आ रहा है. उन्होंने कहा है कि उत्तर-पूर्व, मध्य-पश्चिम और वाशिंगटन डीसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर दिखा है, जहां नौकरियों कम हो रही हैं. ट्रंप के शपथ ग्रहण के बाद जनवरी से मई तक वाशिंगटन डीसी में 22,100 सरकारी नौकरियां खत्म की गई हैं. विनिर्माण पीएमआई में गिरावट  हाल ही में आई रॉयटर्स की रिपोर्ट भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी के खतरे से जुड़े कुछ संकेत शेयर किए गए. इसमें बताया गया कि अगस्त 2025 में अमेरिका का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई घटकर 48.7 पर आ गया है और कारखानों की स्थिति 'US Great Recession' के समय से भी बदहाल बताई जा रही है.  रिपोर्ट के मुताबिक, जहां अमेरिका दुनियाभर के देशों पर टैरिफ अटैक कर रहा है, तो वहीं अगस्त में अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र में लगातार छठे महीने तेज गिरावट दर्ज की गई है. इसकी वजह बताते हुए कहा गया है कि देश के कारखाने ट्रंप प्रशासन के आयात शुल्कों के दुष्प्रभावों से जूझ रहे हैं. यानी साफ है कि टैरिफ फायदे की जगह नुकसान पहुंचाने वाला साबित हो रहा है. मैन्युफैक्चरर्स ने टैरिफ टेंशन के बीच मौजूदा कारोबारी माहौल को महामंदी से भी बदतर करार दिया है.  आंकड़ों को दरकिनार कर रहे ट्रंप इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (आईएसएम) के सर्वे का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ मैन्युफैक्चरर ने ये साफ किया है कि अत्यधिक आयात शुल्कों के कारण अमेरिका में वस्तुओं का निर्माण अब मुश्किल होता जा रहा है.  जबकि दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम संकेतों और आंकड़ों के बावजूद अपने ट्रेड पॉलिसी का बचाव कर रहे है और टैरिफ के देश के हित में उठाया गया कदम बताते हुए इसे लंबे समय से गिरते अमेरिकी औद्योगिक आधार को पुनर्जीवित करने के लिए जरूरी बताते नजर आ रहे हैं. 

CAA : केंद्र ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय, अल्पसंख्यक नागरिकों की भारत में रहने की अवधि बढ़ी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों को बड़ी राहत दी है. गृह मंत्रालय ने एक आदेश में कहा कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के वे लोग, जो 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए हैं, उन्हें पासपोर्ट या अन्य ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स के बिना भी देश में रहने की अनुमति दी जाएगी. यह आदेश इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्टर, 2025 के तहत जारी किया गया है. इसके तहत उन लोगों को राहत मिलेगी जो मान्य पासपोर्ट और वीजा के बिना भारत में आए या जिनके डॉक्यूमेंट्स की वैधता खत्म हो चुकी है. गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि ऐसे लोग जो धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय से भारत आए और 31 दिसंबर 2024 तक देश में दाखिल हुए, उन्हें पासपोर्ट और वीजा रखने के नियम से छूट दी जाएगी. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अल्पसंख्यकों के पासपोर्ट नियमों में बदलाव किया गया है। गृह मंत्रालय ने आदेश जारी करते हुए कहा कि 31 दिसंबर 2024 से पहले इन तीन देशों से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को पासपोर्ट दिखाने की जरूरत नहीं है। वो बिना पासपोर्ट के भी देश में रह सकते हैं। यह आदेश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए 6 अल्पसंख्यकों – हिंदू, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों पर लागू होगा। अगर यह लोग 21 दिसंबर 2024 से पहले भारत में आए हैं, तो ये बिना पासपोर्ट के यहां रह सके हैं। नेपाल-भूटान के नागरिकों पर भी लागू होगा नियम गृह मंत्रालय ने  Immigration and Foreigners (Exemption) Order 2025 जारी किया है। इस आदेश के अनुसार, 1959 से 30 मई 2003 तक नेपाल, भूटान और तिब्बत से भारत आए लोगों को विदेशी रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के पास अपना नाम रजिस्टर करवाना होगा, जिसके बाद वो भी बिना पासपोर्ट के भारत में रह सकते हैं। हालांकि, चीन, मकाउ, हांगकांग और पाकिस्तान से भारत आने वाले नेपाली और भूटानी नागरिकों पर यह नियम लागू नहीं होंगे। गौरतलब है कि सीएए, पिछले साल लागू हुआ था. इसके तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों – हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई – को, अगर वे 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके हैं, तो भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. कई लोग 2014 के बाद भी धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए थे. इनमें खासतौर पर पाकिस्तान से आए हिंदुओं की संख्या अधिक है. ऐसे लोगों के लिए यह आदेश बड़ी राहत लेकर आया है क्योंकि अब उन्हें देश में रहने के लिए पासपोर्ट या वीजा की वैधता दिखाने की जरूरत नहीं होगी. गृह मंत्रालय ने आदेश में क्या कहा?     31 दिसंबर 2024 तक भारत आए अल्पसंख्यक समुदायों को पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी.     चाहे वे लोग बिना डॉक्यूमेंट्स आए हों या वैध डॉक्यूमेंट्स लेकर आए हों जिनकी अब वैधता समाप्त हो चुकी है.     यह छूट विशेष रूप से उन लोगों को दी गई है जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. क्यों अहम है यह फैसला? यह कदम हजारों लोगों की चिंता दूर करेगा, खासकर पाकिस्तान से आने वाले हिंदू परिवारों को राहत मिलेगी. अब वे देश में बिना किसी कानूनी डर के रह सकेंगे. हालांकि, नागरिकता का अधिकार फिलहाल CAA के प्रावधानों के अनुसार 2014 तक आने वालों को ही मिलेगा, लेकिन 2014 के बाद आए लोगों के लिए यह आदेश भारत में रहने को लेकर एक बड़ी सुरक्षा कवच साबित होगा.

मुख्यधारा में वापसी: 33 लाख इनामी 20 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, महिलाओं की भी बड़ी भूमिका

सुकमा छत्तीसगढ़ के सुकमा में 33 लाख के ईनामी नक्सली समेत कुल 20 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है. सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 9 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल हैं, जिनमें  1 एसीएम,  4 पार्टी सदस्य और 15 अग्र संगठन सदस्य हैं. इनमें से एक PLGA बटालियन (माओवादी संगठन) की सक्रीय हार्डकोर महिला नक्सली थी. इन सभी ने आज सुकमा पुलिस के पास जाकर आत्मसमर्पण किया है. बता दें, सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्चिंग ऑपरेशन के चलते नक्सलियों पर भारी दबाव बढ़ा है. इसके साथ ही सरकार द्वारा आत्मसमर्पिण करने वाले नक्सलियों के लिए चलाए जा रहे पुनर्वास नीति और नियद नेल्ला नार योजना से प्रभावित हो कर नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा को चुना है. आत्मसमर्पित में से 2 नक्सलियों पर ₹08-08 लाख के ईनाम घोषित थे. 1 नक्सली पर ₹05 लाख घोषित थे. 4 नक्सलियों पर ₹02-02 लाख और अन्य 4 नक्सलियों पर ₹01-01 लाख घोषित थे. इस तरह आज कुल ₹33 लाख ईनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है.

रायपुर में त्योहारों पर सख्ती, CCTV से निगरानी और एक्स्ट्रा फोर्स तैनात, DJ-पटाखे बैन

रायपुर   रायपुर में गणेश विसर्जन और ईद मिलाद-उन-नबी पर जिला प्रशासन ने डीजे और पटाखों पर बैन लगा दिया है। शांति समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक में बताया गया कि चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती होगी। साथ ही हुड़दंगियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  एडीएम उमाशंकर बंदे और एएसपी लखन पटले ने समाज प्रमुखों से बातचीत करते हुए कहा कि, लोग परंपराओं और उत्साह के साथ त्योहार मनाएं, लेकिन शांति और भाईचारा बनाए रखना सबसे अहम है। एएसपी ट्रैफिक प्रशांत शुक्ला और अन्य विभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। शांति भंग करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की मौजूदगी में बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया। ईद मिलाद-उन-नबी पर भी जिला प्रशासन ने DJ और पटाखों पर बैन लगा दिया है। ईद मिलाद-उन-नबी 4 या 5 सितंबर को मनाई जाएगी। शांति समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। एडीएम उमाशंकर बंदे और एएसपी लखन पटले ने समाज प्रमुखों से बातचीत करते हुए कहा कि लोग परंपराओं और उत्साह के साथ त्योहार मनाएं इस दौरान शांति और भाईचारा बनाए रखना सबसे अहम है। एएसपी ट्रैफिक प्रशांत शुक्ला और अन्य विभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। DJ और पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध एएसपी लखन पटले ने कहा कि जुलूस के दौरान समय का विशेष ध्यान रखा जाएगा। डीजे का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस बार जुलूस में पटाखों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रूट तय किए गए हैं। हुड़दंगियों पर होगी सख्त कार्रवाई पुलिस ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान हुड़दंग और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। जिले के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में शांति समिति और स्थानीय नागरिकों के साथ बैठक करें। यह बैठक न केवल थानों में बल्कि मोहल्लों, कॉलोनियों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी ली जाए। जिले के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में शांति समिति और स्थानीय नागरिकों के साथ बैठकें करें। यह बैठकें न केवल थानों में बल्कि मोहल्लों, कॉलोनियों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी ली जा जाए। त्योहारों के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर सभी चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। पुलिस बल हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा। इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी जाएगी। ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान हुड़दंग और शांति भंग करने की अधिकारियों ने कहा कि गणेश विसर्जन और ईद-ए-मिलाद दोनों पर्व सौहार्दपूर्ण माहौल में भाईचारे के साथ मनाए जाएं। त्योहारों में शांति और ख़ुशी का माहौल बनाये रखना हर समुदाय की जिम्मेदारी है. हर चौक-चौराहे पर अतिरिक्त बल तैनात त्योहारों के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर सभी चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। पुलिस बल हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा। इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। अधिकारियों ने कहा कि गणेश विसर्जन और ईद-ए-मिलाद दोनों पर्व सौहार्दपूर्ण माहौल में भाईचारे के साथ मनाए जाएं। त्योहारों की खुशी में शांति और सुरक्षा का ध्यान रखना सभी की जिम्मेदारी है।