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ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर पहुंचे सीएम साय, प्रदेशवासियों के लिए की मंगलकामना

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जापान की राजधानी टोक्यो में ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर का दर्शन किया। सीएम साय ने ट्वीट कर कहा कि आज टोक्यो में ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर दर्शन का अवसर मिला। यह टोक्यो का सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर है, जो शांति और सामर्थ्य का प्रतीक है। मंदिर दर्शन कर छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की खुशहाली और समृद्धि की कामना की, जिससे हमारा राज्य शांति और सामर्थ्य से परिपूर्ण बन सके। बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जापान और दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर गया है। इस यात्रा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करना है। टोक्यो (22–24 अगस्त) में प्रतिनिधिमंडल जापानी उद्योगपतियों, व्यापार संघों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर कनेक्ट सेशंस एवं व्यावसायिक बैठकों में भाग लेगा। इसके बाद ओसाका (25–26 अगस्त) में मुख्यमंत्री साय वर्ल्ड एक्सपो 2025 में शामिल होंगे और छत्तीसगढ़ में निवेश अवसरों पर विभिन्न हितधारकों से चर्चा करेंगे। दौरे का अंतिम चरण सियोल (27–29 अगस्त) में होगा, जहां निवेशक गोलमेज बैठकों, कोरिया की शीर्ष कंपनियों और व्यापार संघों से मुलाकात तथा सेक्टर-विशेष संवाद आयोजित किए जाएंगे। वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पर फोकस ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 में भारत मंडपम अंतर्गत छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत, नवाचार की संस्कृति और उभरते भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों को वैश्विक दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पवेलियन को राज्य की अनूठी पहचान को दर्शाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। इसमें औद्योगिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे प्रमुख फोकस क्षेत्रों को शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी पूरी दुनिया के लिए छत्तीसगढ़ के परिवर्तन और भविष्य की आकांक्षाओं की झलक प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जापान और कोरिया के उद्योगपतियों, व्यापार संघों और वैश्विक निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक साझेदारियां स्थापित करना, नए व्यापारिक चैनल खोलना तथा प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। विकास और निवेश को नई गति विश्व के सबसे बड़े नवाचार और सहयोग प्लेटफार्मों में से एक में भाग लेकर मुख्यमंत्री साय इस अवसर का उपयोग इस्पात, खनन, स्वच्छ ऊर्जा और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए करेंगे। यह मिशन राज्य की सक्रिय पहल को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेशकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाना और आर्थिक विकास के नए अवसरों को खोलना है। मुख्यमंत्री साय के साथ मुख्य सचिव अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव रजत कुमार, सचिव राहुल भगत, सीएसआईडीसी के एमडी विश्वेश कुमार सहित कई अधिकारी इस दौरे में शामिल हैं।

जयपुर-कोटा जाने वालों को झटका, हरियाणा रोडवेज ने बस किराया बढ़ाया 40 रुपए तक

पलवल हरियाणा के यात्रियों को राजस्थान का सफर करने के लिए अब अपनी जेबें ज्यादा ढीली करनी पड़ रही हैं। इसकी वजह है कि राजस्थान परिवहन निगम की ओर से किराए में 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है। ऐसा होने के बाद रोजाना प्रदेश से राजस्थान जाने वाले हजारों लोगों पर इसका असर पड़ रहा है। उन्हें राजस्थान के विभिन्न शहरों में जाने के लिए 10 से लेकर 40 रुपए तक ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। खास बात ये है कि हरियाणा रोडवेज ने किराया नहीं बढ़ाया है, लेकिन जैसे राजस्थान की सीमा में प्रवेश करेंगे तो किराया राजस्थान की बढ़ी हुई दरों के हिसाब से ही देना होगा। बता दें कि हरियाणा का सबसे बड़ा बॉर्डर राजस्थान से लगता है। प्रदेश के महेंद्रगढ़ जिले की 3 ओर की सीमाएं राजस्थान से टच हैं। इसके अलावा भिवानी, हिसार, सिरसा, रेवाड़ी, नूंह, पलवल और गुरुग्राम की सीमा भी राजस्थान से लगती है। इसलिए रोजाना हजारों की संख्या में लोग राजस्थान की ओर सफर करते हैं, जिनमें जयपुर और कोटा जाने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। यहां जानिए हरियाणा के यात्रियों पर कैसे भारी पड़ रही बढ़ोतरी…     राजस्थान में 8 अगस्त से बढ़ गया था किराया: 8 अगस्त को राजस्थान परिवहन निगम की ओर से किराया बढ़ोतरी के आदेश जारी किए थे। हरियाणा रोडवेज की बस में राजस्थान की सीमा तक पहले की तरह किराए दर लागू है। जैसे ही हरियाणा रोडवेज राजस्थान में प्रवेश करेगी, साधारण बस में एक रुपया प्रति किलोमीटर किराया बढ़ जाएगा। वहीं, यात्रियों को राजस्थान से वापस आते समय प्रति किलोमीटर एक रुपए के हिसाब से किराया देना पड़ रहा है। इसके अलावा यात्रियों को राजस्थान रोडवेज की बसों में हरियाणा प्रदेश में प्रति किलोमीटर एक रुपए किराया देना होगा।     लग्जरी बसों के किराए में भी हुई बढ़ोतरी: साधारण बस में पहले प्रति किलोमीटर 85 पैसे किराया जाता था। अब बढ़ाकर प्रति किलोमीटर किराया 95 पैसे कर दिया गया है। एक्सप्रेस बसों का प्रति किलोमीटर किराया 90 पैसे से बढ़ाकर 100 पैसे कर दिया गया है। डीलक्स बस में प्रति किलोमीटर किराया 90 पैसे से बढ़ाकर 110 पैसे कर दिया गया है। नॉन एसी बस में किराया बढ़ाकर 110 से 125 पैसे कर दिया गया है। AC बस का किराया 165 पैसे से बढ़ाकर 180 पैसे प्रति किलोमीटर कर दिया है। AC सुपर लग्जरी बस में प्रति किलोमीटर किराया 190 से 210 पैसे कर दिया गया है।     उदाहरण से जानिए कैसे बढ़ेगा किराया: उदाहरण के लिए पहले नारनौल से राजस्थान के कोटपूतली तक का किराया 60 रुपए था, अब यात्रियों को 61 रुपए देने पड़ रहे। नारनौल से नांगल चौधरी जाते समय किराया 30 रुपए है, लेकिन वापसी पर 30 की बजाय 31 रुपए देना होगा। हरियाणा रोडवेज की बस जैसे ही राजस्थान सीमा में प्रवेश करती है, किराया एक रुपया बढ़ जाता है। कोटपूतली से नारनौल आने वाले यात्रियों को अपने बस स्टैंड तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त एक रुपए का भुगतान करना पड़ रहा। वहीं, नारनौल से कोटपूतली जाते समय यात्रियों को राजस्थान में प्रवेश करते ही एक रुपए अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा।     नारनौल से जयपुर के उदाहरण से समझिए: नारनौल अड्डा इंचार्ज ब्रह्मप्रकाश ने बताया कि नारनौल से जयपुर की दूरी करीब 168 किलोमीटर है। अगर किसी को जयपुर जाना हो तो नारनौल से हरियाणा के बॉर्डर तक 35 किलोमीटर रायपुर तक का किराया 45 रुपए है। इसके बाद राजस्थान में प्रति किलोमीटर 95 पैसे का इजाफा हो जाएगा। ऐसे में बचे हुए 133 किलोमीटर का किराया 95 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से 126 रुपए लगेगा। इसमें टोल टैक्स अलग है। जयपुर, बालाजी और खाटूश्याम जाने वालों के लिए बस का सफर महंगा राजस्थान सरकार की तरफ से साधारण बसों के किराये में 10 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। पहले 85 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया लगता था। बढ़ोतरी होने से अब रेवाड़ी डिपो की बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों को पांच रुपये से लेकर 20 रुपये तक अतिरिक्त किराया देना पड़ेगा। वहीं, खुल्ले पैसे को लेकर परिचालकों की भी परेशानी बढ़ी हुई है। रेवाड़ी जिले से प्रतिदिन जयपुर, सीकर, कोटा, कोटकासिम, खाटूश्याम जी के लिए सैकड़ों यात्रियों का आवागमन होता है। वहीं इन रूटों पर हरियाणा रोडवेज को भी अच्छा राजस्व मिलता है। राजस्थान की सीमा में प्रवेश करते हुए लागू हो जाएगा बढ़ा हुआ किराया राजस्थान सरकार की तरफ से गत आठ अगस्त से बसों के किराये में बढ़ोतरी के आदेश जारी कर दिए गए थे। हरियाणा रोडवेज की बसों में राजस्थान की सीमा तक पहले की तरह ही किराया देना होगा, लेकिन बस जैसे ही राजस्थान की सीमा में प्रवेश करेगी बढ़ा हुआ किराया लागू हो जाएगा। यात्रियों को जहां जयपुर के लिए पहले 195 रुपये देने होते थे, लेकिन अब 215 रुपये किराया देना होगा। इसी प्रकार कोटकासिम, झुंझूनु, सिंघाना, सीकर, खाटूश्याम, कोटा आदि रूटों के लिए भी बढ़े हुए किराये के हिसाब से यात्रियों को भुगतान करना होगा। रेवाड़ी से कोटा के लिए 435 की जगह अब 480, खाटूश्याम के लिए 280 की जगह 300, झुंझूनु रूट पर 160 की जगह 170 रुपये तथा  कोटकासिम रूट पर 24 की जगह 26 रुपये यात्रियों को किराया चुकाने पड़ेगे। जयपुर रूट पर पहले का और वर्तमान किराया स्टाॅप     किराया पहले      किराया अब बहरोड़         55                           60 कोटपूतली     85                         90 पावटा         100                       105 शाहपुरा     125                       135 मनोहपुर     135                      145 चांदवाजी     145                     160 अचरोल     165                      175 जयपुर     195                           215 नोट: किराया रुपये में     पहले किराया राउंड फिगर में था, लेकिन … Read more

Government Job # खेल प्रशिक्षक से लेकर अधिकारी और लिपिक तक, युवाओं के लिए सुनहरा मौका

Sports JOB खेल विभाग में आई 824 पदों पर बंपर बहाली! नौकरियों का ‘नया मैदान’ तैयार Government Job # खेल प्रशिक्षक से लेकर अधिकारी और लिपिक तक, युवाओं के लिए सुनहरा मौका Sports JOB # बिहार में यह अब तक का सबसे बड़ा खेल में बहाली अभियान है शुरू Job Vacancy # बिहार में खेल नौकरियों की बंपर बहाली, 824 पदों पर होगी नियुक्ति Bihar Job vacancy # खेल प्रशिक्षक से लेकर अधिकारी तक, जानिए खेल के किस-किस विभाग में सरकारी नौकरी का मौका! पटना  खेल में नौकरी के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी आ गई है। राज्य सरकार ने खेल विभाग में बंपर बहाली का रास्ता खोल दिया है। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब नवगठित खेल विभाग में 824 पदों पर बहाली होने जा रही है। खेल प्रशिक्षक से लेकर क्रीड़ा सेवा संवर्ग में अधिकारी, खेल लिपिक और अन्य पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। खेल विभाग ने इन नियुक्तियों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) और बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) को सफरिश भेज दी है। ग्राफिक के लिए ::: किस किस पद पर होगी बहाली खेल प्रशिक्षक (Sports Trainer): 379 पद खेल सेवा संवर्ग के अधिकारी: 33 पद निम्नवर्गीय लिपिक: 53 पद राजगीर खेल अकादमी: 81 पद (खेल प्रशिक्षक और लिपिक दोनों) बिहार राज्य खेल प्राधिकार, पटना: 301 पद खेल प्रशिक्षकों के 379 पद होगी सीधी बहाली वो युवा जो खेल विभाग में नौकरी की आस लगाए लंबे समय से बैठे थे और खेल के प्रशिक्षक बनना हैं। अब उनकी लौटरी लगने वाली है। खेल विभाग की ओर बिहार खेल अधीनस्थ सेवा संवर्ग में 380 पद स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 379 पद अभी खाली हैं। इन सभी पदों पर बहाली के लिए खेल विभाग ने BSSC को प्रस्ताव भेज दिया है। जल्‍द ही इन पर सीधी बहाली की जाएगी।  खेल सेवा संवर्ग में होंगे 33 अधिकारी बिहार खेल सेवा संवर्ग में भी 33 अधिकारियों के लिए 44 नए पदों का सृजन किया गया है। इनमें से 11 पद प्रोन्नति के लिए हैं, जबकि 33 पदों पर सीधी भर्ती होगी है। इन पदों पर नियुक्ति के लिए BPSC को अधियाचन भेज दिया गया है। लिपिकीय सेवा संवर्ग का गठन खेल विभाग में लिपिकीय सेवा संवर्ग का भी गठन कर दिया गया है। इसके लिए 80 पदों की स्वीकृति भी मिल गई है। इनमें से 53 रिक्त पद ऐसे हैं जिस पर जल्‍द बहाली होनी है। जिसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राजगीर खेल अकादमी में 81 पदों पर भर्ती निम्नवर्गीय लिपिक के 10 पद और विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों के 48 पद पूरी तरह खाली। वहीं, खेल प्राधिकार में भी 301 पदों पर नियुक्ति होनी है। प्रस्ताव को कार्यकारिणी समिति की मंजूरी मिल चुकी है और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिया गया है। नियुक्ति प्रक्रिया की सिफारिश BTSC को भी सौंप दी गई है। युवाओं के लिए सुनहरा मौका इन बहालियों के साथ ही बिहार में खेलों के क्षेत्र में बड़ा बदलाव तय है। खेल प्रशिक्षकों की तैनाती से गांव-गांव और शहर-शहर में खेल प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलेगा। वहीं, खेल सेवा संवर्ग और प्राधिकार के अधिकारियों की नियुक्ति से खेल प्रशासन को नई गति मिलेगी। बिहार में यह अब तक का सबसे बड़ा खेल बहाली अभियान है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार और राज्य को नई खेल पहचान मिलने वाली है।  खेल प्रेमियों और नौकरी के इच्छुक युवाओं के लिए यह खबर किसी बंपर खुशखबरी से कम नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को वापस छोड़ने पर लगी रोक हटाई, लेकिन खाना हर जगह न देने की शर्त रखी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर होम में स्थायी रूप से रखने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि हम पिछले आदेश में कुछ संशोधन कर रहे हैं. जस्टिस विक्रम नाथ ने आदेश पढ़ते हुए कहा कि हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्ष बनाया है ताकि राष्ट्रीय पॉलिसी पर बात हो सके. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि कुत्तों को वापस छोड़ने पर लगी रोक को हटा दिया है. कोर्ट ने कहा कि रेबीज और खतरनाक कुत्तों को न छोड़ा जाए. अदालत ने ये भी कहा कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया था उन्हें वैक्सिनेट कर वापस छोड़ा जाए. इसके अलावा बीमार और आक्रामक कुत्तों को शेल्टर होम में ही रखा जाएगा. कोर्ट ने कहा कि कहीं भी कुत्तों को खाना न दें इसके लिए हर इलाके में एक तय जगह बने. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर कार्रवाई की जाएगी. कुत्तों को पकड़ने वाली टीम के काम में बाधा डालने वाले व्यक्ति पर 25 हजार और एनजीओ पर 2 लाख जुर्माना लगेगा. कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन शुरू करने का निर्देश दिया. पशु प्रेमी कुत्तों को गोद लेने के लिए एमसीडी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं. ये जिम्मेदारी उनकी होगी कि एक बार गोद लिए गए कुत्तों को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को लेकर नेशनल पॉलिसी बनाई जाएगी. कोर्ट ने आदेश का दायरा बढाते हुए कहा कि अब जो भी निर्देश दिए जाएंगे वो पूरे देश के लिए लागू होगा. सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-NCR के आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का निर्देश पारित किया था, जिसके खिलाफ कई याचिकाएं दायर हईं थी. इंडिया गेट पर पशु प्रेमियों ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कैंडल मार्च भी निकाला था. करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.  आवारा कुत्तों पर क्या फंसा है पेंच? कुत्तों को छोड़ने पर प्रतिबंध स्थगित कर दिया गया है। नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ा जा सकता है, सिवाय उन कुत्तों के जिनमें रेबीज होने का संदेह है या जो आक्रामक व्यवहार दिखा रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता है, उन्हें नसबंदी, कृमिनाशक और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाना चाहिए, जहां से उन्हें उठाया गया था। पूरे देश में लागू होगा यह फैसला अदालत ने मामले का दायरा दिल्ली-एनसीआर से आगे बढ़ाकर पूरे भारत में लागू कर दिया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए उच्च न्यायालयों में लंबित इसी तरह की याचिकाओं को सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करेगा। सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला 11 अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे तुरंत सड़कों से कुत्ते उठाकर शेल्टर होम्स में रखें और शुरुआती तौर पर कम से कम 5000 कुत्तों के लिए आश्रय गृह बनाएं. अदालत ने चेतावनी भी दी थी कि इस काम में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. देशभर में हुआ व्यापक विरोध कोर्ट ने ये आदेश एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पारित किया. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से, खासकर बच्चों में रेबीज के मामले बढ़ रहे हैं. अदालत ने इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को शुरू की थी. हालांकि देशभर में इस आदेश का व्यापक विरोध हुआ और कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से इसे रोकने की अपील की. अब 22 अगस्त को विशेष पीठ इस मामले पर अपना आदेश सुनाएगी.  

विकास का महाकुंभ: PM मोदी ने बिहार को दी 13,000 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

पटना  बिहार के विकास में केंद्र और राज्य की सरकारें यानी डबल इंजन की सरकार पूरी सिद्दत से लगी हुई है। इसी का नतीजा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक 7 बार बिहार आ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यानी शुक्रवार को बिहार पहुंचकर बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शहरी विकास और जल आपूर्ति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 13,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन किया। वहीं इस मौके पर सीएम नीतीश कुमार भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री बक्सर में 6,880 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 660 मेगावाट की बिजली परियोजना समेत कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। वह गंगा नदी पर 1,870 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित 1.86 किलोमीटर लंबे छह लेन वाली औंटा-सिमरिया पुल परियोजना का भी उद्घाटन किया इससे पटना के मोकामा और बेगूसराय के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। अमृत भारत एक्सप्रेस और बौद्ध सर्किट ट्रेन को दिखाई हरी झंडा प्रधानमंत्री दो ट्रेनों – गया और दिल्ली के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस और वैशाली और कोडरमा के बीच बौद्ध सर्किट ट्रेन – को भी हरी झंडी दिखाई। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 12,000 ग्रामीण लाभार्थियों और प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत 4,260 लाभार्थियों को चाबियां सौंपी। होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र का भी किया उद्घाटन  प्रधानमंत्री लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित एनएच-31 के चार लेन वाले बख्तियारपुर-मोकामा खंड का भी उद्घाटन किया, जिससे यातायात की भीड़ कम होगी, यात्रा का समय बचेगा और यात्री एवं माल ढुलाई में वृद्धि होगी। वह मुजफ्फरपुर में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र का भी उद्घाटन किया। इस केंद्र में उन्नत ऑन्कोलॉजी ओपीडी, आईपीडी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक प्रयोगशाला, ब्लड बैंक और 24 बिस्तरों वाली गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) शामिल हैं। इस केंद्र से बिहार और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को उन्नत व किफायती कैंसर देखभाल मिलेगी, जिससे इलाज के लिए दूर-दराज के महानगरों में जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी। शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी किया शिलान्यास प्रधानमंत्री लगभग 1,260 करोड़ रुपये की लागत वाली शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। इनमें औरंगाबाद और जहानाबाद के दाउदनगर में एसटीपी और सीवरेज नेटवर्क, लखीसराय और जमुई के बरहिया में एसटीपी और इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन कार्य शामिल हैं। अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन के अंतर्गत, वह औरंगाबाद, बोधगया और जहानाबाद में जलापूर्ति परियोजनाओं की आधारशिला रखी।    

10 हजार करोड़ की लागत से इंदौर-उज्जैन मेट्रो, डीएमआरसी का प्रेजेंटेशन, कैबिनेट में जाएगा प्रस्ताव

इंदौर/उज्जैन  इंदौर और उज्जैन के लोगों के लिए खुशखबरी है, क्योंकि दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने का जो सपना देखा गया था, वह अब हकीकत में बदलने को तैयार है. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की टीम ने डीपीआर ने प्रस्ताव पेश कर दिया है, जिसमें बताया गया है कि दोनों शहरों के बीच 10 हजार करोड़ की लागत से मेट्रो का काम पूरा किया जाएगा, जिसमें 45 किलोमीटर का ट्रैक बिछाया जाएगा और दोनों शहरों के बीच करीब 11 मेट्रो स्टेशन बनेंगे, जिसमें 4.5 किलोमीटर का ट्रैक उज्जैन शहर में रहेगा जिसे अंडरग्राउंड रखने की बात डीपीआर में कही गई है. वहीं यह भी बताया गया है कि मेट्रो इंदौर के लवकुश चौराहे से शुरू होगी और उज्जैन के रेलवे स्टेशन तक चलाई जाएगी. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलने से दोनों शहरों को बड़ा फायदा होगा.  सिंहस्थ से पहले चलाने की तैयारी  दरअसल, इंदौर-उज्जैन मेट्रो साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ से पहले चलाने की कोशिश की जाएगी, क्योंकि सीएम मोहन यादव ने पिछले दिनों सिंहस्थ तक दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने की मंशा जाहिर की थी. बताया जा रहा है कि इसी प्लान पर काम करते हुए मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की तरफ से डीपीआर बनाया गया है. क्योंकि करीब 1 साल पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की टीम ने इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने के लिए सर्वे किया था, जिसमें सिंहस्थ महाकुंभ से पहले ही मेट्रो चलाने का डीपीआर पेश किया गया है. बताया जा रहा है कि इस दौरान टीम ने इंदौर और उज्जैन जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी विस्तार से बातचीत की है और उसी के बाद दो सप्ताह तक लगातार काम के बाद मेट्रो का डीपीआर पेश किया गया है.  बताया जा रहा है कि अब डीपीआर का प्रस्तुतिकरण जनप्रतिनिधियों और सरकार के पास भी किया जा रहा है. सरकार 2028 सिंहस्थ से पहले ही इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो ट्रैक तैयार करवाने की प्लानिंग पर काम कर रही है. इसके लिए अब जल्द ही एक टीम मोहन सरकार को भी इंदौर-उज्जैन मेट्रो का प्रजेटेंशन देगी और उसी के आधार पर आगे का काम किया जाएगा.  दिल्ली मेट्रो ने दोनों शहरों की फिजिबिलिटी स्टडी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें इसे मेट्रो के लिए अच्छा बताया था। इसके बाद डीपीआर तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट में करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। वहीं, लगभग 45 किमी के ट्रैक में 11 स्टेशन बनेंगे। 4.5 किमी का ट्रैक उज्जैन शहर में अंडर ग्राउंड रखने का प्रस्ताव है। मेट्रो लवकुश नगर से शुरू होकर उज्जैन रेलवे स्टेशन तक जाएगी। सिंहस्थ तक ट्रैक पूरा होने की संभावना नहीं नई प्लानिंग में इंदौर-उज्जैन के बीच करीब 50-51 किमी का कॉरिडोर बनेगा। अफसरों का कहना है कि जल्द डीपीआर तैयार होती है तो भी एक साल में काम शुरू नहीं हो पाएगा। सिंहस्थ तक ट्रैक पूरा होने की संभावना नहीं है। प्लानिंग का प्रेजेंटेशन सीएम के सामने होने के बाद डीपीआर फाइनल होगी। सीएम से प्रेजेंटेशन के लिए समय मांगा है। 10 हजार करोड़ खर्च का अनुमान अफसरों के मुताबिक, स्टेशन पहले लवकुश चौराहा, अरबिंदो हॉस्पिटल, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथ पीपलई, निनौरा, इंजीनियरिंग कॉलेज उज्जैन, नानाखेड़ा व महाकाल पर प्रस्तावित थे। 47-48 किमी में 10 हजार करोड़ खर्च अनुमानित है। इस बीच सीएम ने उज्जैन में आगर रोड पर भी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की बात कही। पौन घंटे में सफर पूरा होगा मेट्रो चलने से इंदौर-उज्जैन के बीच सफर में समय कम लगेगा और महाकाल मंदिर तक पहुंचने में दर्शनार्थियों को आसानी होगी। उज्जैन पहुंचने का समय लगभग आधा रह जाएगा। अभी बस से करीब 2 घंटे तो कार से करीब डेढ़ घंटा लगता है। दोपहिया से लगभग दो घंटे लगते हैं। मेट्रो 45 से 50 मिनट में लवकुश चौराहा से उज्जैन पहुंचेगी। यह 11 स्टेशन बनेंगे डीपीआर में भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथ पिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी, उज्जैन रेलवे स्टेशन पर मेट्रो स्टेशन बनेंगे। उज्जैन में मेट्रो को कहां से अंडरग्राउंड किया जाना है, इस पर निर्णय होना है। इंदौर में मेट्रो पहले से है, दूसरे डिपो की जरूरत नहीं इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित मेट्रो के लिए दिल्ली मेट्रो ने फिजिबिलिटी स्टडी की। इसके बाद डीपीआर का ड्रॉफ्ट बनाया गया। इसमें लागत, स्टेशनों की संख्या तय की गई है। इस प्रोजेक्ट में स्टेशनों की संख्या कम रहेगी। इंदौर-उज्जैन के बीच सड़क मार्ग की दूरी करीब 55Km है। इसके आसपास से ही मेट्रो गुजर सकती है। यह रोड पहले से ही सिक्स लेन किया जा रहा है। वहीं, यहां पर ज्यादा भू-अर्जन भी नहीं करना पड़ेगा। इंदौर-उज्जैन के बीच 11 स्टेशन  डीपीआर के मुताबिक दोनों शहरों के बीच चलने वाली मेट्रो में इंदौर शहर के लिए भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर तक स्टेशन बनेंगे, इसके बाद उज्जैन के लिए पंथ पिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी, उज्जैन रेलवे स्टेशन तक मेट्रो के स्टेशन बनाए जाएंगे. हालांकि उज्जैन में कुछ स्टेशन अंडरग्राउंड बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया है, लेकिन यह स्टेशन कहां बनेंगे यह तय नहीं हुआ है. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो का सफर पौन घंटे में पूरा हो जाएगा. दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने से सबसे ज्यादा आसान बाबा महाकाल के दर्शन होंगे, क्योंकि इससे इंदौर से उज्जैन का सफर आज के हिसाब से आधा रह जाएगा. अभी कार से 2 से ढाई घंटे का समय लग जाता है. लेकिन मेट्रो से आप 45 मिनट में ही उज्जैन पहुंच जाएंगे.   सांवेर के पास रेवती में मांगी जमीन इंदौर में पहले से मेट्रो का संचालन हो रहा है, इसलिए दूसरे डिपो की जरूरत नहीं होगी। इंदौर के लवकुश चौराहे से उज्जैन तक मेट्रो पहुंचेगी। उज्जैन में डिपो के लिए जमीन तलाश की गई। कुल 49.7 एकड़ सरकारी जमीन उज्जैन के आसपास नहीं मिली। इस वजह से सांवेर के पास रेवती में जमीन मांगी गई। देश में कई शहरों में मेट्रो और रैपिड रेल चल रही हैं। दिल्ली मेट्रो सबसे बड़ी प्रणाली है और इसके अलावा रैपिड रेल दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर भी चल रही है। रैपिड रेल गुरुग्राम में भी उपलब्ध है। इसमें सीटिंग व्यवस्था ज्यादा रहेगी, क्योंकि यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा करना … Read more

रायपुर: CM विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रतिनिधिमंडल जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा पर

ग्लोबल आउटरीच मिशन की शुरुआत रायपुर भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (ITPO), भारत सरकार के आमंत्रण पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल आज जापान और दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर रवाना हुआ। इस यात्रा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करना है।  टोक्यो (22–24 अगस्त) में प्रतिनिधिमंडल जापानी उद्योगपतियों, व्यापार संघों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर कनेक्ट सेशंस एवं व्यावसायिक बैठकों में भाग लेगा। इसके बाद ओसाका (25–26 अगस्त) में मुख्यमंत्री साय वर्ल्ड एक्सपो 2025 में शामिल होंगे और छत्तीसगढ़ में निवेश अवसरों पर विभिन्न हितधारकों से चर्चा करेंगे। दौरे का अंतिम चरण सियोल (27–29 अगस्त) में होगा, जहाँ निवेशक गोलमेज बैठकों, कोरिया की शीर्ष कंपनियों और व्यापार संघों से मुलाकात तथा सेक्टर-विशेष संवाद आयोजित किए जाएंगे। वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पर फोकस ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 में भारत मंडपम अंतर्गत छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत, नवाचार की संस्कृति और उभरते भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों को वैश्विक दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पवेलियन को राज्य की अनूठी पहचान को दर्शाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। इसमें औद्योगिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे प्रमुख फोकस क्षेत्रों को शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी पूरी दुनिया के लिए छत्तीसगढ़ के परिवर्तन और भविष्य की आकांक्षाओं की झलक प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जापान और कोरिया के उद्योगपतियों, व्यापार संघों और वैश्विक निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक साझेदारियाँ स्थापित करना, नए व्यापारिक चैनल खोलना तथा प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। विकास और निवेश को नई गति विश्व के सबसे बड़े नवाचार और सहयोग प्लेटफार्मों में से एक में भाग लेकर मुख्यमंत्री साय इस अवसर का उपयोग इस्पात, खनन, स्वच्छ ऊर्जा और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए करेंगे। यह मिशन राज्य की सक्रिय पहल को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेशकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाना और आर्थिक विकास के नए अवसरों को खोलना है।

आलोक शर्मा ने कहा: इंदौर से भोपाल के न्यायिक क्षेत्र को जोड़ना होगा जनता के हित में

भोपाल का न्यायिक क्षेत्राधिकार इंदौर से जोड़ने पर जनता का समय और धन की बर्बादी रूकेगी-आलोक शर्मा  आलोक शर्मा ने कहा: इंदौर से भोपाल के न्यायिक क्षेत्र को जोड़ना होगा जनता के हित में सांसद आलोक शर्मा केन्‍द्रीय कानून मंत्री से भोपाल में हाईकोर्ट बेंच स्‍थापित करने या इंदौर से जोडने को लेकर मिले  भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से मुलाकात कर भोपाल में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग की है। सांसद शर्मा ने केंद्रीय कानून मंत्री को सौंपे पत्र में भोपाल जिले की जनता को अपने न्यायिक प्रकरणों के लिए जबलपुर हाईकोर्ट जाने में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों का जिक्र किया है। सांसद शर्मा ने केंद्रीय मंत्री मेघवाल से आग्रह किया कि यदि हाइकोर्ट बेंच भोपाल लाने में कोई अड़चन है तो भोपाल जिले का न्यायिक क्षेत्राधिकार इंदौर से जोड़ दिया जाए, जिससे जनता को समय और अत्यधिक धन खर्च से राहत मिलेगी। केंद्रीय कानून मंत्री से चर्चा के दौरान सांसद आलोक शर्मा ने बताया कि भोपाल में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने को लेकर लंबे समय से प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन जनता को सस्ता और सुलभ न्याय मिलने के संकल्प को पूरा करने के लिए कोई ठोस प्रयास अब तक नहीं हो सके। जबकि देश में अधिकांश प्रदेशों की राजधानियों में हाइकोर्ट की मुख्य पीठ या बेंच स्थापित है। इंदौर खंडपीठ से जोड़ने का दिया सुझाव सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को सुझाव दिया है कि यदि भोपाल में हाइकोर्ट की बेंच स्थापित करने में कोई अड़चन है तो भोपाल जिले का न्यायिक क्षेत्राधिकार (ज्यूरिडिक्शन) इंदौर से जोड़ दिया जाए। इंदौर की दूरी जबलपुर से कम है। जनता व सरकार के अधिकारी न्यायिक मामलों की सुनवाई के लिए सुबह जाकर शाम तक घर वापिस आ सकते हैं। ऐसे में जनता का समय और पैसे की बर्बादी तो रुकेगी ही साथ ही सरकारी खजाने पर पड़ने वाला अत्यधिक भार भी कम हो जाएगा। सरकारी कर्मचारियों को अपनी पदोन्नति व अन्य प्रकरणों की सुनवाई के लिए जबलपुर जाना-आना करना मुश्किलें पैदा करता है। वकीलों की है पुरानी मांग भोपाल में हाईकोर्ट बेंच लाने के लिए वकील और बार एसोशिएशन भी लंबे समय से प्रयासरत हैं। वर्तमान में भोपाल का न्यायिक क्षेत्र जबलपुर है। भोपाल से जबलपुर जाने आने में लंबा समय और पैसे की बर्वादी होती है। यदि भोपाल का न्यायिक क्षेत्राधिकार इंदौर जोड़ दिया जाए तो भी जनता को काफी राहत मिल जाएगी। वकीलों को भी मामलों में पैरवी के लिए जबलपुर जाने आने में अपना अधिक समय खर्च करना पड़ता है। सांसद शर्मा ने आम जनता, वकील और सरकारी अधिकारियों की व्यवहारिक परेशानियों को तो अपने पत्र में लिखा ही है साथ ही इससे सरकारी खर्चों को रोकने का सुझाव भी दिया है।  जनता का समय और पैसा बचेगा सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल जिले का न्यायिक क्षेत्र इंदौर खंडपीठ से जुड़ने पर जनता का समय और पैसा दोनों बचेंगे। साथ ही सरकार के जनता को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के संकल्प की भी पूर्ति होगी।

रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बालोद जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर सुविधाओं का लिया जायजा

रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा अधिकारियों की बैठक लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं का किया पड़ताल, आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु जरूरी उपाय सुनिश्चित करने के दिए निर्देश जिला चिकित्सालय में 03 विशेषज्ञ चिकित्सक एवं जिले के लिए 04 मेडिकल मोबाईल यूनिट प्रदान करने की दी जानकारी रायपुर प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज बालोद जिले के प्रवास के दौरान जिला चिकित्सालय बालोद का निरीक्षण कर अस्पताल के व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय बालोद के सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लेकर जिले के स्वास्थ्य सुविधाओं का पड़ताल किया।  स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को आम जनता को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु जरूरी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद में निश्चेतना विशेषज्ञ, नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ एवं रेडियोलॉजिस्ट सहित 03 विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा जिले के अनुसूचित क्षेत्रों एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से बालोद जिले के लिए 04 मोबाईल मेडिकल यूनिट शीघ्र प्रदान करने की भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने जिला चिकित्सालय बालोद में भर्ती मरीजों के परिजनों के विश्राम हेतु जिला चिकित्सालय परिसर में अतिरिक्त भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपये प्रदान करने की भी घोषणा की।  इसके अलावा उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेकर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यकतानुसार शव गृहोें के निर्माण के साथ-साथ वहाँ पर फ्रीजर आदि सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने जरूरी मदद उपलब्ध कराने की बात कही। इस मौके पर संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा, डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अनिला भेड़िया, गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर,  सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेएल उइके, मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरके श्रीमाली सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद के निरीक्षण के दौरान पंजीयन कक्ष में पहुँचकर अस्पताल में प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों की औसतन संख्या के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय के ओपीडी कक्ष, आपात चिकित्सा कक्ष के अलावा अस्पताल के विभिन्न कक्षों का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पहुँचकर मरीजों का हाल-चाल जाना। उन्होंने अस्पताल मेें भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य का हालचाल के अलावा उनका इलाज, दवाइयों की समुचित उपलब्धता, समय पर भोजन, नाश्ता आदि सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल के वार्डों एवं स्नानागार की स्थिति एवं समय पर चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पुरूष मेडिकल वार्ड में भर्ती दल्लीराजहरा के मरीज रामप्रसाद एवं बालोद निवासी चेतन प्रकाश से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने मौके पर उपस्थित चिकित्सकों को तलब कर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए निर्देशित भी किया। स्वास्थ्य मंत्री ने महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती ग्राम संबलपुर निवासी बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनका कुशलक्षेम पुछा। उन्होंने मुख्य अस्पताल अधीक्षक को बुजुर्ग महिला की बेहतर इलाज करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने जिला अस्पताल में नर्सिंग के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के उपरांत स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के सभाकक्ष में जिले के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के साथ चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लेकर जिले के चिकित्सा व्यवस्था का पड़ताल किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य अस्पताल अधीक्षक को जिला चिकित्सालय में प्रतिमाह होने वाले प्रसव की संख्या एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं चिकित्सा अधिकारियों के कुल स्वीकृत पद के विरूद्ध वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों की संख्या इसके अलावा उन्होंने अस्पताल में एक्सरे एवं सोनोग्राफी मशीन तथा अन्य चिकित्सीय सुविधा एवं मानवीय संसाधनों की उपलब्धता के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने तथा अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों में अपने कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता एवं ईच्छा शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सीय पेशा को बहुत ही पावन, पुनीत कार्य बताते हुए चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को पूरी निष्ठा, लगन, मनोयोग तथा प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के निर्देश भी दिए।  मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद के अलावा जिले के अन्य चिकित्सालयों में भी उपलब्ध संसाधनों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं कलेक्टर को सूचित कर आवश्यकतानुसार जिला खनिज न्यास निधि के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा। इसके अलावा बड़े स्तर पर संसाधन एवं सुविधा उलपब्ध कराने के लिए उन्हें सूचित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में जायसवाल ने मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जिले में चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी दिया। इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों के मांग पर जिले के दुर्घटनाजन्य पुरूर क्षेत्र में 108  एवं मंगचुवा क्षेत्र में 102 एम्बुलेंस सेवा शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से आम जनता के हित में बालोद जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित की जाएंगी।

सीएम नीतीश ने ‘मुफ्त बिजली-पेंशन-रोजगार’ से सेट किया बिहार का सियासी समीकरण!

'सोशल इंजीनियर' ने सेट किया समीकरण …तो 2025 से 2030 फिर से नीतीश!  सीएम नीतीश ने ‘मुफ्त बिजली-पेंशन-रोजगार’ से सेट किया बिहार का सियासी समीकरण! बिहार की सियासत में नीतीश का तिहरा वार! गरीब, बुजुर्ग और युवाओं को साधने की चली ऐसी चाल!  सीएम नीतीश ने दिखाया सोशल इंजीनियरिंग और वोट मैनेजमेंट का कमाल! एक साथ करोड़ों को दिया फायदा पटना बिहार का राजनीतिक माहौल चरम पर है। चुनावी तैयारियां जोरों पर है। सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी ताकत झोंकी हुई है। कुछ लोगों को भले यह मुगालता हो कि नीतीश कुमार एक्टिव नहीं हैं। ये विपक्षी खेमे के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि वो चुपचाप ऐसे काम कर रहे हैं जो आने वाले विधानसभा चुनावों में गेम चेंजर साबित होगा है। बताते चलें कि कि सीएम नीतीश की चर्चा उन राजनेताओं में होती है, जो चुपचाप बाजी पलटने का हुनर रखते हैं। सोशल सेक्‍टर और वोट बैंक मैनेजमेंट  गौर करने वाली बात ये है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल के दिनों में ऐसी-ऐसी घोषणाएं की हैं, जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीएम नीतीश का सीधा फोकस सोशल सेक्‍टर और वोट बैंक मैनेजमेंट पर है। आइए उन महत्‍वपूर्ण प्‍वांट पर चर्चा करते हैं, जिसके जरिए उन्‍होंने सीधे उस बड़े समूहों साधने की कोशिश की जहां से बिहार की चुनावी जंग में जीत का रास्‍ता गुजरता है।  विपक्ष को दिया राजनीतिक करंट राजनीतिक जानकारों की माने तो सीएम नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में सियासी करंट दे दिया है। 125 यूनिट मुफ्त बिजली देकर सीएम नीतीश कुमार ने राज्य के 1 करोड़ 86 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी है। जिनका मासिक बिल अब पूरी तरह माफ हो गया। गौर से देखा जाए तो बिहार की 90 फीसद आबादी को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। राजनीतिक रूप से देखें तो ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्ग के वोटरों में इसकी सबसे ज्यादा चर्चा है। सर्वे में भी 63 फीसद लोगों ने माना कि यह योजना सत्‍ता की राह आसान बनाएगी।  पेंशन राशि बढ़ाकर ‘संवेदनशील मुख्यमंत्री’ की छवि बीते दो महीनों के दौरान सीएम नीतीश ने सामाजिक सुरक्षा को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि 400 से बढ़ाकर 1100 रुपये कीं। इस घोषणा से उन्‍होंने सीधे तौर पर 1 करोड़ 12 लाख लोग लाभान्वित हुए। इन लाभार्थियों में बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगजन शामिल हैं। यानी वह वर्ग जो चुनाव में वोट डालने में सबसे ज्यादा सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाता है। उसके लिए यह घोषणा राजनीति रूप से अहम माना जा रहा है।  युवाओं को नौकरी और रोजगार का वादा बताते चलें कि नीतीश कुमार अब तक 10 लाख सरकारी नौकरियां और 39 लाख रोजगार उपलब्ध करा चुके हैं। चुनावी माहौल को देखते हुए उन्‍होंने इस लक्ष्‍य को बढ़ा कर इसी साल 12 लाख नौकरी और 50 लाख रोजगार का तय कर दिया। जिस पर काम जारी है। इतना ही नहीं, सीएम नीतीश ने चुनावी दांव खेलते हुए अगले पांच में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का वादा भी कर डाला। नीतीश के इस दांव को काफी अहम माना जा रहा है। गौर करने वाली बात ये है कि सीएम नीतीश के इस मास्‍टर स्‍ट्रोक की चर्चा राजनीतिक गलियारे में भी है। इस वादे ने युवा वोट बैंक और उनके परिवारों को भी अपने साध लिया है। जानकारों का मानन है कि लंबे समय से नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं और उनके परिवार को नीतीश कुमार के विकास कार्यों और औद्योगिक क्षेत्र के विकास के ऐलान से उम्‍मीद जगी है। सर्वे का संकेत, नीतीश फिर पसंदीदा हाल में हुए सी-वोटर सर्वे में भी सीएम नीतीश बढ़त बनाए हुए हैं। इस सर्वे में बिहार की 65 फीसद जनता ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पसंद बताया है। समझने वाली बात ये है कि नीतीश कुमार ने मुफ्त बिजली देकर ग्रामीण और गरीब वर्ग को साधने की कोशिश की। पेंशन में बढ़ोतरी से बुजुर्ग, महिलाओं और दिव्यांगों को अपने पाले में लाने का प्रयास किया, नौकरी और रोजगार के वादे से युवाओं को, मानदेय और पेंशन बढ़ोतरी से सरकारी कर्मी ओर समाजसेवी वर्ग प्रभावित करने वाला दांव खेल दिया है। इन फैसलों से एक साथ एक बड़ा वोट बैंक लाभंवित हुआ है। जिसका चुनावी फायदा मिलना तय माना जा रहा है। माना जा रहा है चुनाव से ठीक पहले किए गए ये फैसले सीएम नीतीश के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकते हैं।