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रायपुर में कैंसर अस्पताल का होगा उन्नयन, सीएम साय ने जनता को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात दी

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कैंसर अस्पताल का होगा उन्नयन, जनता को मिलेगी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा की सौगात रायपुर में कैंसर अस्पताल का होगा उन्नयन, सीएम साय ने जनता को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात दी कैंसर अस्पताल की बिल्डिंग बनेगी जी प्लस टू (G+2) से जी प्लस सिक्स (G+6)- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विस्तार के लिए लगभग रु. 39.36 करोड़ की पुनरीक्षित राशि स्वीकृत  रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ नई ऊंचाइयों की तरफ अग्रसर हैं। इसी क्रम में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित कैंसर अस्पताल की जी प्लस टू (ग्राउंड फ्लोर प्लस दो मंजिल) बिल्डिंग का विस्तार होकर जी प्लस सिक्स (ग्राउंड फ्लोर प्लस छः मंजिल) में उन्नयन होने जा रहा है।  स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि इन परियोजना के लिए लगभग 39.36 करोड़ रूपए की पुनरीक्षित राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने एक बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कार्य को जल्द गति दी जाए। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार यह बिल्डिंग सिर्फ किसी भवन या निर्माण कार्य का विस्तार नहीं बल्कि प्रदेश की जनता के लिए उम्मीद की नई किरण है। कैंसर अस्पताल के जी प्लस सिक्स के विस्तार के साथ राज्य की जनता को भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार प्रकट करते हुए कहा है कि यह कदम छत्तीसगढ़ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में अग्रसर होगा।

PF बैलेंस चेक करना हुआ आसान, 99% लोग नहीं जानते ये तरीका

नई दिल्ली अगर आपकी तनख्वा से PF कटता है, तो जाहिर तौर पर आप जानना भी चाहते होंगे कि आपके PF अकाउंट का बैलेंस क्या है? इसके लिए अगर आप EPFO की साइट पर जाकर, लॉग इन करके पासबुक चेक करते हैं, तो जान लें कि यही काम फोन का एक बटन दबाते ही हो सकता है। दरअसल कई बार तकनीकी या किन्हीं अन्य वजहों से आपके PF खाते में सैलरी से कटी रकम पहुंच नहीं पाती। ऐसे में समय रहते यह चेक करना बेहद जरूरी हो जाता है कि आपके PF का अकाउंट में तनख्वा से कटने वाली रकम पहुंच रही है या नहीं। इस नंबर को सेव कर लें आप अपने फोन का एक बटन दबाकर भी अपने PF बैलेंस का पता लगा सकते हैं। इसके लिए आपको 9966044425 इस नंबर को सेव करना होगा। इस नबंर पर अपने फोन से मिस कॉल देने के बाद आपको एक SMS प्राप्त होगा। इस SMS में आपको आपके PF बैलेंस की डिटेल मिल जाएगी। ध्यान रखें कि इस नंबर पर कॉल करने के बाद कॉल आपको नहीं काटना है। दरअसल आपके कॉल करने के बाद दो बार बेल बजने के बाद कॉल खुद ब खुद कट जाएगी। इसके बाद आपको अपने PF अकाउंट बैलेंस की जानकारी के साथ एक SMS मिल जाएगा। SMS से भी मिलेगा बैलेंस अगर किसी वजह से आप कॉल की जगह SMS भेज कर अपने PF अकाउंट बैलेंस की जानकारी पाना चाहते हैं, तो आप ऐसा भी कर सकते हैं। एक सेट फॉर्मेंट में SMS भेज कर भी आप अपने PF अकाउंट बैलेंस की डिटेल्स प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको 7738299899 इस नंबर को फोन में सेव कर लेना चाहिए। EPFO की वेबसाइट के मुताबिक आपको अपने फोन की मैसेज ऐप में जाकर एक नया मैसेज क्रिएट करना होगा। उस मैसेज में आपको “EPFOHO UAN No.” लिख कर उसे 7738299899 पर भेज देना होगा। कुछ देर बाद आपको एक SMS के तौर पर अपने PF अकाउंट बैलेंस की सारी डिटेल मिल जाएगी। इस मैसेज को भेजते हुए याद रखें कि EPFOHO लिखने के बाद आपको एक स्पेस देना होगा और उसके बाद अपना UAN नंबर लिखना होगा। ध्यान देने वाली बात अगर आप मिस कॉल के जरिए अपना PF बैलेंस पता करना चाह रहे हैं, तो आपके UAN में बैंक खाता नंबर, आधार या PAN में से कोई भी एक चीज लिंक होनी चाहिए। इसके अलावा आपका मोबाइल नंबर यूनिफाइड पोर्टल पर UAN के साथ एक्टिवेट होना चाहिए। साथ ही आपके UAN के साथ बैंक खाता नंबर, आधार या PAN में से कम से कम एक KYC डॉक्यूमेंट लिंक होना जरूरी है। अगर आप SMS भेजकर अपना PF बैलेंस पता करना चाहते हैं, तो बता दें कि यह सर्विस10 भाषाओं में उपलब्ध है। अगर आप अंग्रेजी के अलावा किसी और भाषा में SMS प्राप्त करना चाहते हैं, तो UAN के बाद उस भाषा के पहले तीन अक्षर जोड़ने होंगे। उदाहरण के लिए, तेलुगु में जानकारी पाने के लिए "EPFOHO UAN TEL" भेजना होगा। इस तरह आप आसानी से अपने PF अकाउंट बैलेंस के बारे में जान सकते हैं।

बच्चे समलैंगिक हों तो भारतीयों की क्या प्रतिक्रिया? कई देशों में सर्वे में मिली जानकारी

 नई दिल्ली थाइलैंड में इसी साल समलैंगिक संबंधों को मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा भारत में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है, लेकिन शादी को परमिशन देने को लेकर बहस जारी है। भले ही भारत में समलैंगिक संबंध अपराध के दायरे से बाहर हैं, लेकिन समाज में इसे लेकर बहस जारी है। एक बड़ा वर्ग इसे लेकर असहज है। इस बीच एक दिलचस्प सर्वे अमेरिकी रिसर्च संस्था प्यू ने किया है। प्यू रिसर्च के सर्वे में भारत समेत 15 देशों के लोगों से पूछा गया था कि यदि उनके बच्चे समलैंगिक हो जाते हैं तो वे कैसा अनुभव करेंगे। इसे सहजता से स्वीकार करेंगे या फिर ऐतराज होगा। इस सर्वे में शामिल भारतीयों से जब ऐसा ही सवाल पूछा गया तो 56 फीसदी ने कहा कि उन्हें परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि उनके बच्चे समलैंगिक संबंधों की ओर आकर्षित होते हैं या ऐसा करते हैं तो यह उन्हें पसंद नहीं है और उन्हें परेशानी होगी। इसके अलावा 9 फीसदी लोगों ने कहा कि वे ना तो पसंद करेंगे और ना ही असहज होंगे। इसके अलावा 16 पर्सेंट लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने कहा कि उन्हें कोई समस्या नहीं होगा। वहीं 19 फीसदी लोगों ने कोई जवाब देने से ही इनकार कर दिया। प्यू रिसर्च की तरफ से जिन 15 देशों में यह सर्वे किया गया है, उनमें से ज्यादा मध्यम आय वर्ग वाले हैं। इनमें इंडोनेशिया, तुर्की, बांग्लादेश, साउथ अफ्रीका, ब्राजील और अर्जेंटीना शामिल हैं। बच्चों के समलैंगिक संबंधों का सबसे प्रबल विरोध करने वाले देशों में घाना है। यहां के 95 फीसदी लोगों ने कहा कि बच्चों का समलैंगिक होना वह पसंद नहीं करेंगे। वहीं इंडोनेशिया में ऐसे 94 फीसदी लोग हैं, जो बच्चों का गे या लेस्बियन होना एकदम पसंद नहीं करते। नाइजीरिया में ऐसे लोगों की संख्या 91 फीसदी है तो वहीं तुर्की में 87 पर्सेंट लोग इसके खिलाफ हैं। अहम तथ्य यह है कि ज्यादातर मुस्लिम बहुल देशों की बड़ी आबादी समलैंगिक संबंधों को एकदम पसंद नहीं करती और वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे इसकी ओर बढ़ें। केन्या में 87 फीसदी और बांग्लादेश में 60 फीसदी लोग बच्चों के ऐसे संबंधों में जाने के खिलाफ हैं। पेरू में 59 फीसदी और समलैंगिक शादियों को मान्यता देने वाले थाइलैंड में ऐसे लोगों की संख्या 57 पर्सेंट ही है। इसके अलावा साउथ अफ्रीका में ऐसे 56 फीसदी लोग हैं। अर्जेंटीना में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जो बच्चों के समलैंगिक संबंधों में जाने को लेकर असहज नहीं हैं। अर्जेंटीना के 32 फीसदी लोगों ने ही कहा कि वे बच्चों के समलैंगिक संबंधों में जाने के खिलाफ हैं। ब्राजील में ऐसे लोगों की संख्या 38 फीसदी है, जबकि मेक्सिको में 45 फीसदी हैं।

शिवराज सरकार की सख्ती: खराब फसलों के बाद HPM कंपनी का लाइसेंस रद्द और बिक्री पर रोक

भोपाल  किसानों की शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों पर राजस्थान की HPM केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। राजस्थान सरकार ने कंपनी का लाइसेंस रद्द करते हुए उसके सभी कीटनाशक उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। कंपनी के जांच सैंपल फैल होने केबाद उसके खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की गई है।  मध्यप्रदेश में फसलें हुई खराब  HPM केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड कंपनी राजस्थान में रजिस्टर्ड थी और देश के कई राज्यों में कीटनाशक सप्लाई करती थी। जांच में सैंपल घटिया पाए जाने के बाद कंपनी पर एफआईआर दर्ज की गई। किसानों की शिकायतों में यह भी सामने आया कि HPM कंपनी के कीटनाशक उपयोग से मध्यप्रदेश के विदिशा, होशंगाबाद, हरदा, सीहोर सहित कई जिलों में सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई थी। शिवराज ने खेत में लिया था जायजा विदिशा जिले के खेत में खराब हुई सोयाबीन फसल का जायजा स्वयं केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिया था। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया था कि किसानों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कंपनी के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। राजस्थान सरकार की इस कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिली है। कृषि मंत्रालय ने साफ किया है कि भविष्य में भी किसी भी कंपनी द्वारा मिलावटी या घटिया कीटनाशक और खाद बनाने पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।  मध्यप्रदेश के कई जिलों में फसल खराब मंत्री ने जानकारी दी कि कंपनी के कीटनाशक से मध्यप्रदेश के कई जिलों में सोयाबीन की फसल खराब हो गई थी। उन्होंने बताया कि विदिशा स्थित खेत में खराब फसल का खुद केन्द्रीय मंत्री शिवराज ने जायजा लिया था। किरोड़ी लाल ने कहा कि कंपनी के सभी कीटनाशक उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक विदिशा स्थित खेत में खराब फसल का खुद केन्द्रीय मंत्री शिवराज ने लिया था जायजा। कंपनी के सभी कीटनाशक उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है। किरोड़ी की हुई थी जेपी नड्डा से मुलाकात इससे पहले मंत्री मीणा ने बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमानक खाद, बीज और कृषि दवाइयों से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों के तहत अमानक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, लेकिन किसानों के नुकसान की भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है। अमानक उत्पाद न केवल फसलों को नष्ट करते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर पहले भी केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर कठोर कानून बनाने की मांग की थी। 29 मई से चल रहा है अभियान बताते चलें कि राजस्थान में 29 मई से नकली और अमानक खाद, बीज और कीटनाशकों के खिलाफ विशेष अभियान चल रहा है। इस अभियान के तहत कई कंपनियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को ठगने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

MP में 31 अगस्त को रिटायर होंगे मुख्य सचिव अनुराग जैन, नए CS के नामों पर मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में वल्लभ भवन में यह सवाल तैरने लगा है कि अगला मुख्य सचिव कौन होगा। अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिलेगा या फिर नए चेहरे को मौकान मिलेगा। इनसे पहले रहे दो मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिल चुका है। वहीं, कुछ सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम भी इस रेस में आगे हैं।वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन(Anurag Jain) 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अगले मुख्य सचिव के लिए कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल मध्यप्रदेश के अगले सीएस को लेकर संस्पेंस बरकरार है। बता दें कि, प्रदेश सरकार ने अनुराग जैन के एक्सटेंशन का प्रस्ताव अब तक केंद्र सरकार को नहीं भेजा है। यदि सीएस अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो प्रशासनिक मुखिया के इस पद के लिए तीन अफसरों के नाम सबसे आगे है। इनमें 1990 बैच के आईएएस अफसर डॉ. राजेश राजौरा, 1991 बैच के आईएएस अफसर अशोक बर्णवाल और 1990 बैच की आईएएस अफसर अलका उपाध्याय का नाम शामिल है। इन कारणों से मिल सकता है एक्सटेंशन मुख्य सचिव को लेकर दो संभावनाएं हैं। पहली, अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल जाए। दूसरी, उन्हें एक्सटेंशन न मिले। अगर उन्हें एक्सटेंशन मिलता है, तो इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, केंद्र में बैठे अफसरों और नीति निर्धारकों से उनके अच्छे संबंध हैं। दूसरा, उन्हें वित्त प्रबंधन का अच्छा जानकार माना जाता है। तीसरा, उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और नई पॉलिसी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। सेवा विस्तार या मप्र को मिलेगा नया सीएस मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन का सेवा विस्तार होगा या फिर प्रदेश को नया सीएस मिलेगा, यह लगभग पहले से तय है। केवल खुलासा होना बाकी है। 13 दिन बाद यानी 31 अगस्त को या उसके एक-दो दिन पहले होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएस जैन का इस दिन कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यदि सेवा विस्तार मिलता है या प्रदेश को नए सीएस देने की बारी आई दोनों ही परिस्थितियों में दोपहर से शाम तक आदेश उसी दिन आ सकते हैं। ये लोग हैं प्रबल दावेदार वहीं, अगर अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है, तो वरिष्ठता के हिसाब से अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा इस पद के प्रबल दावेदार होंगे। लेकिन अपर मुख्य सचिव वन व पर्यावरण अशोक बर्णवाल और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ अलका उपाध्याय भी इस रेस में शामिल हैं। राजेश राजौरा हैं सबसे वरिष्ठ इसके साथ ही अनुराग जैन के रिटायर होने के बाद डॉ. राजेश राजौरा सबसे वरिष्ठ आईएएस अफसर होंगे। डॉ. राजौरा मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव रह चुके हैं। वह मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र उज्जैन संभाग के प्रभारी भी हैं।अशोक बर्णवाल भले ही डॉ. राजौरा से एक बैच जूनियर हैं, लेकिन उन्हें मुख्य सचिव बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। बर्णवाल भी निर्विवादित हैं। उनकी छवि तेजतर्रार अधिकारी की है। महिला आईएएस अफसर भी रेस में अलका उपाध्याय भी मुख्य सचिव पद की दौड़ में हैं। वे 1990 बैच में डॉ. राजौरा के बाद वरिष्ठता में दूसरे नंबर पर हैं। पिछले दो महीने में जिस तरह से उन्होंने मध्य प्रदेश के दौरों को लेकर दिलचस्पी दिखाई है, इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे सीएस पद के लिए सक्रिय हैं। अगर अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है, तो वे विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष बन सकते हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों से मध्य प्रदेश में मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिलता रहा है। ऐसे में इस बार भी संभावना है कि अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल सकता है। सेवा विस्तार संभावना के ये भी कारण पूर्व सीएस इकबाल सिंह बैंस हो या फिर वीरा राणा, इन्हें सेवा विस्तार मिलता रहा है। इनसे पहले के सीएस ने न्यूनतम दो-दो वर्ष तक सेवाएं दी हैं। अनुभव, प्रशासनिक पकड़, केंद्र से कई मामलों में समन्वय में जैन किसी से पीछे नहीं है। हालांकि उनके काम का आकलन किन आधारों पर होता है, यह सबसे अहम होगा। 1. दिल्ली की चली तो अनुराग जैन को सेवा विस्तार तय: माना जा रहा है कि यदि केंद्र ने ठान लिया तो मुख्य सचिव अनुराग जैन को सेवा विस्तार मिलना तय है। इसकी वजह उनके पास बेहतर प्रशासनिक अनुभव, केंद्र व पीएमओ में रही अहम जिमेदारियां और उन्हें ठीक ढंग से पूरा करना बताया जा है। 2. प्रदेश की चली तो मिल सकता है नया मुख्य सचिव: सूत्रों की मानें तो यदि मप्र के टॉप लीडर की बात मानी जाती है तो मध्यप्रदेश को नया मुख्य सचिव मिल सकता है। जिसकी वजह उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ की तैयारी के अलावा अगला विधानसभा चुनाव समेत कई वजह बताई जा रही है। डॉ. राजेश राजौरा प्रबल दावेदार जानकारी के मुताबिक, अगर सीएस अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो 1990 बैच के आईएएस अफसर डॉ. राजेश राजौरा(Dr Rajesh Rajoura) इस पद के प्रबल दावेदार होंगे। डॉ. राजेश राजौरा मुख्यमंत्री के अपर सचिव रह चुके हैं। साथ ही ये सीएम मोहन के गृह क्षेत्र उज्जैन संभाग के प्रभारी भी रह चुके हैं। डॉ. राजौरा कृषि, गृह, उद्योग, उद्यानिकी और परिवहन विभाग संभाल चुके हैं। साथ ही ये झाबुआ में एडिशनल कलेक्टर और धार, बालाघाट उज्जैन और इंदौर में कलेक्टर रह चुके हैं। रेस में अशोक बर्णवाल मध्यप्रदेश के अगले मुख्य सचिव(Next Chief Secretary of MP) के रेस में अशोक बर्णवाल का नाम भी शामिल है। अशोक बर्णवाल(Ashok Barnwal) की छवि एक तेजतर्रार अधिकारी की है। बर्णवाल वन, मुख्यमंत्री कार्यालय, खाद्य प्रसंस्करण विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग संभाल चुके हैं। अशोक बर्णवाल गुना, देवास और शहडोल में कलेक्टर भी रहे हैं। बर्णवाल शिवराज सरकार के कार्यकाल में सीएमओ संभाल चुके हैं। दावेदारों की लिस्ट में अलका उपाध्याय ग्रामीण विकास मंत्रालय में अपर सचिव, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी में महानिदेशक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में सीईओ और जन क्रिया एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी उन्नति परिषद की महानिदेशक रह चुकी अलका उपाध्याय(Alka Upadhyay) भी मध्यप्रदेश के अगले मुख्य सचिव पद की दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं। अलका उपाध्याय शाजापुर में एडिशनल कलेक्टर का पदभार संभाल चुकी हैं। साथ ही दतिया, शाजापुर और खरगोन जिले की … Read more

मध्य प्रदेश : घोषणा के 6 साल बाद भी कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारी 6 साल बाद भी आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना का इंतजार कर रहे हैं। यह योजना 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के शासनकाल में घोषित की गई थी, लेकिन आज तक यह योजना कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाई है। तीन मुख्यमंत्रियों (कमलनाथ, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव) के पास यह योजना फाइल के रूप में पहुंची, लेकिन कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिला। मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।  मध्य प्रदेश के 6 लाख से अधिक कर्मचारी अब भी आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना के लाभ लेने के लिए इंतजार कर रहे हैं। दरअसल 2019 में कमलनाथ सरकार ने इसकी घोषणा की थी। लेकिन अब तक यह जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया। वर्ष 2019 से लेकर अब तक तीन अलग-अलग मुख्यमंत्री की टेबल तक इसकी फाइलें पहुंची है।      मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 9 फरवरी 2024 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति का उद्देश्य शासकीय कर्मचारी, कार्यकर्ता और संविदा कर्मचारियों को आयुष्मान भारत निरामयम प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल करने का निर्णय लेना था। यह कमेटी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 4 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक के निर्णय के आधार पर गठित की गई थी, जिसमें शासकीय कर्मचारियों को सालाना 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ देने की स्वीकृति दी गई थी। हालांकि, अब तक इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। योजना तैयार करने पर काम जारी  कमेटी में शामिल अधिकारियों की सूची में मुख्य सचिव के अलावा अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव हैं, और अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, प्रमुख सचिव वित्त विभाग, जो पहले प्रमुख सचिव थे, अब अपर मुख्य सचिव के पद पर हैं। कमेटी में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग शामिल हैं। इसके अलावा कमेटी में सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत निरामयम मध्यप्रदेश भी शामिल हैं। कमलनाथ ने बनाई थी कैशलेस इलाज की योजना यह योजना 6 साल पहले 2019 में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में कैबिनेट बैठक में मंजूर की गई थी। उस समय यह योजना 1 अप्रैल से लागू होने वाली थी और प्रदेश के सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने वाला था। इसके साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया था। योजना के तहत साधारण बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जानी थी। इस स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में शासकीय कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग और नगर सैनिक के अलावा राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा यह योजना निगम मंडलों में काम करने वाले कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवा के कर्मचारियों के लिए विकल्प के तौर पर रखा गया है।  योजना से एमपी सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय भार इस बीमा योजना के लागू होने से एमपी सरकार पर 756.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार होने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेश के कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा का लाभ देने की बात की थी। हालांकि, कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, इसके चलते मामले में देरी आई।  तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बावजूद प्रदेश के कर्मचारियों को अब तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी अन्य राज्यों में लागू आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा की तरह 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब तक किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया है। कर्मचारी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी इस सुविधा से वंचित हैं। अभी इस व्यवस्था पर हो रहा है काम वर्तमान में कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था कुछ इस प्रकार है। जब कर्मचारी इलाज कराते हैं, तो उन्हें खर्च की हुई राशि का रिम्बर्समेंट कराने के लिए अपने विभाग में आवेदन करना होता है। इसके लिए पहले डॉक्टर, मेडिकल बोर्ड या डायरेक्टर हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन से मंजूरी प्राप्त करनी होती है। अगर कर्मचारी अस्तपताल में भर्ती होकर इलाज कराते हैं, तो ऐसे में उन्हें 5 लाख रुपये तक के क्लेम की मंजूरी संभागीय स्तर के सरकारी अस्पताल के डीन की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से जाती है। यदि क्लेम 5 लाख से अधिक और 20 लाख रुपये तक होता है, तो इस मामले में संचालक स्वास्थ्य सेवाओं की अध्यक्षता में बनी कमेटी रिम्बर्समेंट को मंजूरी देती है। यदि कर्मचारी भर्ती नहीं होते, तो वे या उनके परिजन बाह्य रोगी के रूप में इलाज कराते हैं। इसका मतलब है कि अस्पताल में दिखाया जाता है और फिर लौट आते हैं। इस स्थिति में एक साल में अधिकतम 20 हजार रुपये का रिम्बर्समेंट होता है। यदि इलाज निरंतर चल रहा हो, तो तीन माह में 8000 रुपये से अधिक का रिम्बर्समेंट नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी होती है।

ई-वॉलेट्स के जरिए पैसा जुटा रहा जैश, हमलों से बचने को बदल रहा रणनीति

लाहौर  ऑपरेशन सिंदूर के तहत मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में कई आतंकी लॉन्च पैड तबाह किए थे. इन ठिकानों का इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) कर रहे थे. इस बीच खुफिया रिपोर्टों के आधार पर IANS ने खुलासा किया है कि जैश-ए-मोहम्मद अब अपने नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की तैयारी कर रहा है. संगठन पूरे पाकिस्तान में 313 नए मरकज बनाने की योजना पर काम कर रहा है. ये ठिकाने नए आतंकियों को ट्रेनिंग देने और सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के काम आएंगे. साथ ही ये ठिकाने जैश प्रमुख मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए भी सुरक्षित अड्डे होंगे. इस नेटवर्क को खड़ा करने के लिए जैश ने 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस धन उगाही अभियान का नेतृत्व जैश प्रमुख मसूद अजहर और उसका भाई तल्हा अल सैफ कर रहे हैं. संगठन ने ऑनलाइन धन इकट्ठा करने के लिए ईजीपैसा और सदापे जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की योजना बनाई है. इसके अलावा जैश के कमांडर मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज के दौरान भी चंदा इकट्ठा कर रहे हैं. चंदे को गाजा में मानवीय सहायता के नाम पर दिखाया जा रहा है, जबकि असल में इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए हो रहा है. जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी ब्लैंक दान रसीद सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ब्लैंक दान रसीद की एक कॉपी भी मिली. जांच में इस बात के सबूत मिले कि जमा किए जा रहे 3.94 अरब पाकिस्तानी रुपये कई पाकिस्तानी डिजिटल वॉलेट में जा रहे हैं. ऐसा ही एक सदापे खाता मसूद अजहर के भाई, तल्हा अल सैफ (तल्हा गुलजार) के नाम पर है, जो पाकिस्तानी मोबाइल नंबर +92 3025xxxx56 से जुड़ा है. यह नंबर जैश-ए-मोहम्मद के हरिपुर जिले के कमांडर आफ़ताब अहमद के नाम पर रजिस्ट्रड है, जिसके CNIC नंबर 133020376995 पर हरिपुर के खाला बट्ट टाउनशिप में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप का पता दर्ज है. भारत के लिए क्या मायने रखता है यह पुनर्गठन जैश-ए-मोहम्मद की यह गतिविधि भारत के लिए नई चुनौती है. संगठन की कोशिश है कि ऑपरेशन सिंदूर से हुए नुकसान की भरपाई करके फिर से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाए. नए शिविरों का जाल फैलाने से कश्मीर घाटी में आतंक फैलाने की साजिश तेज हो सकती है. भारत के सुरक्षा तंत्र को इस पुनर्गठन पर करीबी निगरानी रखने की जरूरत है. 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. जैश का बहावलपुर स्थित मुख्यालय और कई ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे. पाकिस्तान में बनाएगा 313 नए मरकज, मांग रहा चंदा ऑपरेशन सिंदूर के कई महीने बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) अपने तबाह हुए प्रशिक्षण शिविरों और ठिकानों के नेटवर्क को फिर से पुनर्जीवित तकरने की तैयारी में लग गया है। अपने आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने एक बड़ा धन उगाही अभियान शुरू किया है। इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में इसके बारे में जानकारी दी है। मई में आपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर स्थित मुख्यालय और आतंकी लॉन्च पैड को नेस्तनाबूद कर दिया था। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में 9 आतंकी लॉन्च पैड को तबाह किया था। ये लॉन्च पैड जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। यह अभियान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए चलाया गया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। 313 नए शिविर स्थापित करने की योजना  खुफिया जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी स्थिति सुधारने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। संगठन ने कथित तौर पर पूरे पाकिस्तान में 313 नए 'मरकज' स्थापित करने की योजना बनाई है, जिनका इस्तेमाल आतंकियों को ट्रेनिंग और उन्हें ठिकाने देने के लिए किया जाएगा। इसके लिए 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। पकड़े जाने से बचने के लिए ऑनलाइन चंदा इन ठिकानों में नए आतंकियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र चलाने के साथ ही जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में काम करने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि धन उगाही अभियान का नेतृत्व मसूद अजहर अपने भाई तल्हा अल सैफ के साथ मिलकर कर रहा है। पकड़े जाने से बचने के लिए जैश ने ईजीपैसा और सदापे जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की योजना बनाई है। ऑनलाइन पैसा इकठ्ठा करने के अलावा जैश के कमांडर शुक्रवार की नमाज के दौरान मस्जिदों में भी चंदा इकठ्ठा कर रहे हैं। इसे गाजा में मानवीय सहायता के लिए दिए जाने के लिए दिखा रहे हैं।

बिहार और बंगाल के लिए PM मोदी की बड़ी घोषणाएँ, पुल और मेट्रो परियोजनाएँ शामिल

औंटा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 22 अगस्त को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे. वह सुबह गया में लगभग 13,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री दो नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर जनता को संबोधित करेंगे. इसके बाद, मोदी गंगा नदी पर बने औंटा–सिमरिया पुल परियोजना का उद्घाटन करेंगे. लगभग 1,870 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 6 लेन पुल की लंबाई 1.86 किलोमीटर है, जबकि एप्रोच रोड सहित कुल लंबाई 8.15 किलोमीटर है. यह पुल मोकामा और बेगूसराय को जोड़ेगा और उत्तर व दक्षिण बिहार के बीच आवागमन को तेज़ और सुगम बनाएगा. कई जिलों के बीच दूरी 100 किलोमीटर तक घट जाएगी और सफर का समय लगभग डेढ़ घंटे तक कम होगा. 34 मीटर चौड़ा यह एशिया का सबसे चौड़ा पुल है, जिसे 18 मज़बूत पिलरों पर बनाया गया है. गेमचेंजर साबित होगा पुल पुल के दोनों छोर पर आधुनिक रोटरी और हरियाली से युक्त पार्क विकसित किए गए हैं. निर्माण के दौरान Push Box Method, Gabbion Wall और PVD जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पुल की मजबूती और लोडिंग कैपेसिटी बढ़ाई जा सके. यह पुल न केवल बिहार बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों के उद्योग और व्यापार के लिए भी गेमचेंजर साबित होगा. प्रधानमंत्री द्वारा 2015 में घोषित विशेष पैकेज के तहत यह पुल तैयार किया गया है. 2017 में मोदी ने इसकी आधारशिला रखी थी और अब इसका उद्घाटन होने जा रहा है. प्रधानमंत्री बिहार में बक्सर थर्मल पावर प्लांट (6,880 करोड़ रुपये), मुजफ्फरपुर कैंसर अस्पताल, मुंगेर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (520 करोड़ रुपये) और 1,260 करोड़ रुपये की शहरी परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे. इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हज़ारों लाभार्थियों को घर सौंपे जाएंगे. कोलकाता में करोड़ों की परियोनाओं का उद्घाटन शाम को प्रधानमंत्री कोलकाता पहुंचेंगे और लगभग 5,200 करोड़ रुपये की मेट्रो और अन्य विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. वे खुद मेट्रो की सवारी भी करेंगे. नई मेट्रो सेवाएं कोलकाता में यात्रा समय घटाएंगी और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मज़बूती देंगी. साथ ही, वे 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाले 7.2 किमी लंबे कोना एक्सप्रेसवे की आधारशिला भी रखेंगे. यह हावड़ा और कोलकाता के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा.

सिंहस्थ : 2028 के लिए घाट निर्माण, शिप्रा शुद्धिकरण, बैराज निर्माण कार्यों की भी हुई समीक्षा

आने वाले 3 वर्ष में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार 100 लाख हेक्टेयर तक करें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सिंचाई क्षेत्र का निरंतर विस्तार आवश्यक है। इसके लिए जल संसाधन विभाग और सभी संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्य करें। वर्तमान में शासकीय स्रोतों से प्रदेश में सिंचाई प्रतिशत 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे शीघ्र ही दोगुना करने का लक्ष्य ध्यान में रखकर कार्य किया जाए जिससे आने वाले 3 वर्ष में प्रदेश में 100 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार हो जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ ही उद्योग क्षेत्र में पानी देने, पेयजल प्रबंध और ऊर्जा उत्पादन में जल का उपयोग जल संसाधन विभाग के स्रोतों से हो रहा है। सिंचाई के 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य के अनुसार जल संसाधनों के समुचित उपयोग को पूरी प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न परियोजनाओं से बढ़ रहे सिंचाई क्षेत्र की जानकारी भी प्राप्त की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किए हैं लाभकारी प्रावधान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं जैसे केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, संशोधित पार्वती-काली-सिंध चंबल लिंक परियोजना को अति उपयोगी बताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश के लगभग आधे जिलों की तस्वीर बदल जाएगी। राज्य के अंदर भी नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा में कार्य प्रारंभ कर लाभ प्राप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों को जोड़ने का स्वप्न भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल ने देखा जिसे प्रधानमंत्री श्री मोदी साकार कर हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा ऐसी परियोजनाओं के लिए 90% राशि देने का लाभकारी प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशा के अनुसार राज्यों की ऐसी पहल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के कार्य जैसे-जैसे क्रियान्वित होंगे, सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा, साथ ही खुशहाली भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संसाधन विभाग की ओर से राज्य के अंदर नदी जोड़ो प्रकल्पों की संभावनाओं का सर्वेक्षण और अध्ययन कर प्रतिवेदन तैयार किया जाए। केन्द्र सरकार को ऐसे प्रस्ताव भेजकर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सिंहस्थ : 2028 के कार्यों की समीक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान शिप्रा शुद्धिकरण, नदी एवं जल निकायों के विकास और घाट निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्तमान में शिप्रा पर लगभग 30 किलोमीटर लंबाई में घाट निर्माण का कार्य हो रहा है, यह सभी कार्य वर्ष 2027 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। घाटों के निर्माण से सिंहस्थ के दौरान एक दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकेंगे। शिप्रा नदी पर बैराज निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। सिंचाई क्षेत्र में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि बैठक में बताया गया कि रबी 2023-24 में प्रदेश में सिंचित रकबा 44.56 लाख हेक्टेयर था जो रबी 2025-26 में बढ़कर 52.06 हो गया है। इस तरह बीते डेढ़ वर्ष में प्रदेश के सिंचाई क्षेत्र में 7.50 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसमें जल संसाधन विभाग द्वारा 2.39 और नर्मदा घाटी विकास विभाग 5.11 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने में सफलता प्राप्त की गई है। बताया गया कि प्रदेश में आगामी पांच वर्ष में 200 करोड़ से अधिक लागत की 38 सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, जिसके फलस्वरूप 17 लाख 33 हजार 791 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा। इस वर्ष 2 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षेत्र बढ़ेगा, जो मोहनपुरा बांयीतट परियोजना जिला राजगढ़, चंदेरी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जिला अशोकनगर, पंचमनगर सिंचाई परियोजना जिला दमोह एवं सागर, त्योंथर बहाव योजना जिला रीवा और घोघरी मध्यम परियोजना जिला बैतूल के माध्यम से संभव होगा। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास डॉ. राजेश राजौरा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

हिंदू लड़की के साथ युवक की भयावह हरकतें, बेटा होने पर करवाया खतना

इंदौर हिंदू युवती को धोखाधड़ीपूर्वक प्रेम जाल में फंसा कर मुस्लिम बनाने की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। तुकोगंज पुलिस ने हाई प्रोफाइल परिवार की महिला की शिकायत पर मुंबई के युसूफ खान और गुलबानू खान के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पीड़िता ने बच्चे की जबरदस्ती खतना कराने, मांस खिलाने और अश्लील वीडियो बनाकर धमकाने के आरोप लगाए हैं। 40 दिन बाद ही करवा दिया बच्चे का खतना पीड़िता ने रिश्ता खत्म कर अलग होने का फैसला किया, मगर युसूफ ने कहा वह उसको खोना नहीं चाहता है। उसने आश्वस्त किया कि वह जैन धर्म के मुताबिक रह सकेगी। साल 2011 में पीड़िता ने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद युसूफ और उसकी बहन गुलबानू का व्यवहार बदल गया। उसने 40 दिन बाद ही बच्चे का खतना करवा दिया। उसने कहा कि बेटे की परवरिश मुस्लिम रिवाज से होगी। उसकी तालीम भी मुस्लिम संस्थान में होगी। दोनों ने सिद्ध विनायक मंदिर में की थी शादी साउथ तुकोगंज की पाश कालोनी में रहने वाली 40 वर्षीय महिला से आरोपी युसूफ खान की साल 2004 में दोस्ती हुई थी। महिला एडवरटाइजिंग का काम करती है। उस वक्त युसूफ ने रोमी (हिंदू) नाम बताया और पीड़िता से बातचीत करने लगा। दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और 2004 में ही मुंबई के सिद्ध विनायक मंदिर में राजी से शादी कर ली। 2005 में पीड़िता एक टीवी चैनल से जुड़ गई। इसी दौरान पता चला रोमी बता कर साथ रहने वाला व्यक्ति मुस्लिम है।   गुलबानू ने पीड़िता को भी धमकाया और कहा तुम भी मुस्लिम बन जाओ। वरना युसूफ के साथ तुम्हारा रिश्ता हराम माना जाएगा। युसूफ और गुलबानू ने जबरदस्ती मांस पकाने और खाने का दबाव बनाया। युसूफ ने उसके साथ मारपीट भी की। इसी दौरान मालिश करने वाले व्यक्ति को बुलाया और उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया। उसने महिला के साथ बिताए निजी पलों का वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया। वह वीडियो बहुप्रसारित कर मुस्लिम धर्म स्वीकारने का दबाव बनाने लगा। पिछले साल महिला कार्यक्रम के बहाने इंदौर आई और स्वजन को घटना के बारे में बताया। बुधवार रात वह स्वजन के साथ थाने आई और युसूफ और गुलबानू निवासी मलाड़ बरिहान मुंबई के खिलाफ केस दर्ज करवाया।