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कांग्रेस और इनेलो तैयार, हरियाणा विधानसभा में कल से शुरू होगा मानसून सत्र

चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा के शुक्रवार को दोपहर दो बजे से आरंभ होने वाले मानसून सत्र में हंगामा होने के पूरे आसार हैं। कांग्रेस व इनेलो विधायक जहां सरकार को राज्य की कानून व्यवस्था पर घेरने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं हरियाणा सरकार ने सत्र से पहले ही भिवानी के लोहारू की मनीषा के शव का अंतिम संस्कार करवाकर विपक्ष के मुद्दे को छीनने की कोशिश की है। विपक्षी विधायकों द्वारा राज्य में अपहरण, हत्या और लूटमारी समेत विभिन्न आपराधिक वारदातों को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा कराने के लिए विधानसभा सचिवालय को ‘काम रोको प्रस्ताव’ दिया जा चुका है। सरकार भी कानून व्यवस्था की स्थिति पर विपक्ष को जवाब देने के लिए तैयार नजर आ रही है। हरियाणा के नये राज्यपाल प्रो. अशीम घोष के संबोधन से मानसून सत्र की शुरुआत होगी। पिछले 10 माह में यह चौथा सत्र होगा, जिसमें कांग्रेस बिना विधायक दल के नेता के नजर आएगी। कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद संभावना जताई जा रही थी कि मानसून सत्र से पहले कांग्रेस अपनी पार्टी के विधायक दल के नेता का नाम घोषित कर सकती है, लेकिन बृहस्पतिवार शाम तक भी कांग्रेस की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई। हालांकि विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही बिना घोषणा के विपक्ष के नेता की भूमिका में होते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पिछले बजट सेशन में कह चुके हैं कि हमारी नजर में हुड्डा ही विपक्ष के नेता हैं। संवैधानिक पदों पर होने वाली नियुक्तियों पर निर्णय लेने के लिए आयोजित बैठकों में हुड्डा ही कांग्रेस की ओर से शामिल होते रहे हैं। विधानसभा का मानसून सत्र कितने दिन चलेगा, यह शुक्रवार को सुबह 11 बजे होने वाली बिजनेस एडवाइजर कमेटी की बैठक में तय किया जाएगा, लेकिन विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अस्थाई कार्यक्रम के मुताबिक सत्र 26 अगस्त तक चलने की संभावना है। पूरे सत्र में तीन दिन सदन की कार्यवाही चलेगी। 23 और 24 अगस्त को अवकाश रहेगा, जबकि 25 व 26 अगस्त को सदन की कार्यवाही का संचालन होगा। छोटा होने के बाद भी यह सत्र काफी प्रभावी और हंगामेदार रहने के आसार हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सदन में बड़ा गतिरोध देखने को मिल सकता है। हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से कानून व्यवस्था की स्थिति पर दिए गए काम रोको प्रस्ताव पर हंगामा होने की संभावना है। विधानसभा स्पीकर हरविन्द्र कल्याण यदि शुक्रवार को ही इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार नहीं करते तो कांग्रेस पहले दिन ही वाकआउट कर सकती है। भिवानी की शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध मौत के अलावा व्यापारियों से मांगी जा रही फिरौती, विधायकों को मिल रही धमकियां और हत्या की कई वारदातों को कांग्रेस विधानसभा में मुद्दा बनाने वाली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार की शाम को भाजपा विधायक दल की अहम बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें विपक्ष के हर हमले का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा की गई है। मानसून सत्र में उठाए जाने वाले सवालों के जवाब को लेकर मुख्यमंत्री नायब सैनी शुक्रवार को 12 बजे विधानसभा के कमेटी हाल में मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में उन सभी प्रश्नों पर चर्चा होगी, जो शुक्रवार के प्रश्नकाल में लगाए गए हैं। मानसून सत्र की शुरूआत से पहले मुख्यमंत्री रोजाना ही मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे ताकि उनमें प्रश्नों के साथ-साथ दूसरे प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सके। जलभराव से नुकसान का मुद्दा गूंजेगा साइबर सिटी गुरुग्राम, फरीदाबाद व जींद समेत कई शहरों में मानसून में जलभराव की वजह से जो हालत हुई है, विपक्ष विधानसभा में उसे भी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। सीएम के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर एक सप्ताह तक गुरुग्राम में रहकर वहां जल निकासी समेत विभिन्न समस्याओं के समाधान की रूपरेखा तैयार करवाकर आए हैं।  

मुख्यमंत्री यादव ने कहा- हर घर तक सतत जल आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

नल से जल पहुंचाने में मध्यप्रदेश ने हासिल की 70 प्रतिशत से अधिक सफलता मार्च-2027 तक हर ग्रामीण परिवार तक पहुंचेगा जल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता केवल हर घर तक नल से जल पहुँचाने की ही नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पेयजल सुविधा आने वाले वर्षों तक सतत और गुणवत्तापूर्ण रूप में उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नलजल योजनाओं के संचालन और संधारण की नीति को इस प्रकार तैयार किया जाय, जिससे हर गांव में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था बने और किसी भी परिवार को पानी के लिए कठिनाई न उठानी पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में ग्रामीण नल-जल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण नीति के प्रारूप पर हुई बैठक में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन योजनाओं को निर्माण कार्य तक ही सीमित न रखकर संचालन और रखरखाव की ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे आने वाले वर्षों में भी योजनाएँ पूरी क्षमता से कार्य करती रहें। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए, जिससे ग्रामीण अपने स्तर पर भी योजनाओं की देखरेख कर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ किए गए जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। बैठक में निर्णय लिया गया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा तैयार किये गये "ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति" को सक्षम स्वीकृति उपरांत 03 वर्षों के लिये लागू किया जाये। इस नीति के लागू होने से समूह जलप्रदाय योजनाओं की भांति एकल ग्राम नलजल योजनाओं का सुचारू एवं दीर्घकालिक संचालन हो सकेगा। इस नीति के अनुसार ग्रामीण नलजल योजनाओं का संचालन, संधारण एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जायेगा। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि प्रदेश में अगस्त 2019 तक जहाँ केवल 12.11 प्रतिशत अंतर्गत 13 लाख 53 हजार ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल मिल रहा था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 78 लाख 64 हजार से अधिक हो गई है। इस प्रकार 70.41 प्रतिशत ग्रामीण परिवार नल से जल सुविधा से जुड़ चुके हैं। कुल 1 करोड़ 11 लाख 69 हजार परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। जल जीवन मिशन का कार्य वर्ष 2027 तक पूर्ण कर लिया जायेगा। समूह नलजल की 147 इसी प्रकार कुल योजनाओं में से अब तक 52 योजनाएँ पूर्ण की जा चुकी हैं जिनसे 4 हजार 285 ग्रामों में जलापूर्ति की जा रही है। शेष 95 योजनाएँ प्रगति पर हैं। प्रमुख सचिव श्री नरहरि द्वारा प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित हो रही नलजल योजनाओं के दीर्घकालिक एवं प्रभावी संचालन हेतु विभाग द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित विभिन्न स्तरों पर विचार विमर्श उपरांत तैयार की गई "ग्रामीण नलजल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नीति" की विस्तार से जानकारी दी गई। इस नीति के प्रावधानों के अनुसार ग्रामीण नलजल योजना का संचालन पूर्व की भांति संबंधित ग्राम पंचायत के द्वारा किये जाने तथा ग्राम पंचायतों को योजना के संचालन में सहयोग देने हेतु तथा योजना संचालन की व्यवस्था को सदृढ करने के उददेश्य से योजना के संधारण से संबंधित कार्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से किये जाने की जानकारी दी गई। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव, वित्त श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रबंध संचालक जल निगम श्री के. वी.एस. चौधरी कोलसानी भी उपस्थित थे।  

सीएम हेल्पलाइन पर आयुष्मान योजना को लेकर लगातार मिल रही शिकायतें

भोपाल  केंद्र सरकार ने गरीब, जरूरतमंदों के लिए निश्शुल्क स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत योजना शुरू की है। जिसमें हर प्रति वर्ष पांच लाख रूपये तक का उपचार करवाया जा सकता है। लेकिन निजी अस्पतालों ने योजना के नाम पर अवैध वसूली शुरू कर दी है। हाल ही में कनाड़िया क्षेत्र के फिनिक्स अस्पताल से शिकायत मिली है, जांच में आयुष्मान कार्ड धारक मरीज से राशि लेना पाया गया है। लेकिन इस तरह राशि वसूलने का खेल सिर्फ फिनिक्स अस्पताल में ही नहीं बल्कि शहर के कई निजी अस्पतालों में चल रहा है।   सीएम हेल्पलाइन पर हर माह करीब 10 शिकायतें आयुष्मान कार्ड धारकों द्वारा वसूली, इलाज नहीं मिलने, लंबे समय तक भर्ती रखने आदि की आती है। यानि हर वर्ष 100 से अधिक शिकायतें होती है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच के लिए भी अस्पतालों में जाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक इंदौर में 68 निजी अस्पताल और 35 शासकीय अस्पताल जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल है। यहां आयुष्मान योजना के अंतर्गत मरीजों का उपचार होता है। मरीजों को स्वस्थ होने के बाद भी नहीं करते डिस्चार्ज शहर के निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के अंतर्गत सबसे अधिक शिकायत इस संबंध में आती है कि मरीजों को स्वस्थ होने के बाद भी यह डिस्चार्ज नहीं करते हैं। छोटी बीमारी में भी उपचार के लिए मरीजों को लंबे समय तक भर्ती रखा जाता है। ताकि मोटा बिल बनाकर राशि ले सकें। लेकिन इस संबंध में कभी बड़ी कार्रवाई होते हुए नजर नहीं आती है। निजी अस्पतालों पर हो चुकी कार्रवाई इससे पहले भी मरीजों से राशि वसूलने, मरीजों को जबरन भर्ती करने सहित आयुष्मान से जुड़ी अन्य गड़बड़ी सामने आ चुकी है। यह गड़बड़ी शहर के बड़े निजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सामने आई थी। जिसकी भोपाल से आई टीम ने जांच की थी और कार्रवाई भी हुई थी।     इंदौर के 68 निजी अस्पतालों आयुष्मान योजना से इलाज।     शहर के 35 शासकीय अस्पताल, प्राथमिक केंद्रों पर योजना से इलाज।     अस्पतालों में आयुष्मान के अप्रुवल के लिए परेशान होते हैं मरीज। 

नई बस सेवा: यूपी से बिहार के लिए अब रोजाना सीधी यात्रा, जानें ठहराव वाले शहर

लखनऊ आलमबाग बस टर्मिनल से मुजफ्फरपुर की बस सेवा शुरू होने के बाद अब वाराणसी से गया के लिए विशेष बस सेवा का संचालन होगा। सरकार ने पितृपक्ष के दौरान पिंडदान व तर्पण के लिए गया बिहार जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बस शुरू कर रही है। बस सप्ताह में सातों दिन चलेगी। इनमें यात्रियों की सुरक्षा व सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा गया है। परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया, बस सेवा से पितृपक्ष में लोग गया आसानी से पहुंच सकेंगे। वाराणसी (कैंट) से संचालित बस चंदौली-सासाराम-औरंगाबाद-शेरघाटी-गया (बिहार) तक के लिए चलेगी। रूट के अन्य यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। वाराणसी स्टेशन से रात्रि आठ बजे चलकर बस गया, बिहार सुबह चार बजे पहुंचेगी। वाराणसी से बिहार तक का 465 रुपये निर्धारित किया गया है। परिवहन मंत्री ने बताया, इस बस के संचालन से निजी वाहनों पर श्रद्धालुओं की निर्भरता कम होगी, जो कि उनके खर्च और समय को भी बचाएगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितृपक्ष में गया जाते हैं। उनकी सुविधा को देखते हुए परिवहन निगम ने मंथन किया। यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस बस संचालन को नियमित करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने व श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने का प्रयास कर रही है। हरियाणा के लिए भी अंतरराज्यीय बस सेवा अंतरराज्यीय बस संचालन के तहत सारनाथ वाराणसी से बोधगया बिहार के लिए भी बस सेवा संचालित होगी। लखनऊ से मुजफ्फरपुर के लिए व मेरठ से सोनीपत (हरियाणा) के लिए भी बसों का संचालन शुरू किया गया है। लखनऊ (आलमबाग बस टर्मिनल) से मुजफ्फरपुर का किराया 862 रुपये निर्धारित किया गया है। बस सेवा लखनऊ से रात्रि दो बजे चलकर बाराबंकी, अयोध्या, गोरखपुर, तुमकुही, गोपालगंज होते हुए अगले दिन सुबह चार बजे मुजफ्फरपुर पहुंचती है। मेरठ से सोनीपत के लिए चलने वाली बसें दिन में तीन फेरे लगाएंगी। यह बस बड़ौत डिपो से सुबह 06ः30 बजे, 10ः50 बजे व 15ः50 बजें चलकर सोनीपत जाएगी। यात्रियों को आवागमन में आ रही परेशानियों को देखते हुए परिवहन निगम ने सोनीपत (हरियाणा) के लिए बस संचालन शुरू करने का निर्णय लिया है।

भारतीय वायुसेना में 97 Tejas MK-1A, जानें कितना बड़ा होगा जेट बेड़ा और भविष्य की रणनीति

नई दिल्ली भारत ने हाल ही में 97 LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) तेजस मार्क 1A फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कीमत करीब 62,000 करोड़ रुपये है. यह डील मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे भारतीय वायुसेना (IAF) का फाइटर जेट बेड़ा न केवल बड़ा होगा, बल्कि आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से लैस भी होगा.  वर्तमान में भारतीय वायुसेना का बेड़ा भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 31 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है. प्रत्येक स्क्वाड्रन में औसतन 18 जेट्स होते हैं, यानी कुल मिलाकर IAF के पास करीब 558 फाइटर जेट्स हैं. इनमें शामिल हैं…     सुखोई Su-30 MKI: 265 जेट्स (भारत में निर्मित, रूस से लाइसेंस प्राप्त)     मिग-21: 36 जेट्स (2025 में रिटायर होने वाले)     मिग-29: 65 जेट्स     मिराज 2000: 44 जेट्स     राफेल: 36 जेट्स     जगुआर: 130 जेट्स     तेजस मार्क 1: 31 जेट्स (2 स्क्वाड्रन) हालांकि, पुराने मिग-21, मिग-23 और मिग-27 के रिटायर होने से स्क्वाड्रन की संख्या घटी है. सितंबर 2025 में आखिरी दो मिग-21 स्क्वाड्रन (नंबर 3 और 23) रिटायर हो जाएंगे, जिससे स्क्वाड्रन की संख्या 29 तक कम हो जाएगी. 97 LCA मार्क 1A का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A जेट्स की खरीद के साथ, IAF का तेजस बेड़ा काफी मजबूत होगा. वर्तमान में IAF के पास…     40 तेजस मार्क 1 जेट्स हैं (2 स्क्वाड्रन: नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’)     83 LCA मार्क 1A का ऑर्डर पहले से दिया जा चुका है (2021 में, 48000 करोड़ रुपये की डील). नई डील के साथ, 97 और LCA मार्क 1A जेट्स जुड़ने से कुल 180 LCA मार्क 1A और 40 मार्क 1 जेट्स होंगे, यानी 220 तेजस जेट्स. यह IAF के बेड़े का एक बड़ा हिस्सा होगा. ये जेट्स पुराने मिग-21 की जगह लेंगे और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने में मदद करेंगे. LCA मार्क 1A में 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री है. यह उन्नत AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सुइट और अस्त्र मिसाइल जैसी तकनीकों से लैस है. यह 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले करने में सक्षम है.  IAF का बेड़ा कितना बड़ा होगा? 97 LCA मार्क 1A के शामिल होने के बाद, IAF का बेड़ा 220 तेजस (मार्क 1 और मार्क 1A) के साथ-साथ अन्य जेट्स (Su-30 MKI, राफेल, मिग-29, मिराज, और जगुआर) को मिलाकर करीब 600-620 फाइटर जेट्स का होगा. यह 33-34 स्क्वाड्रन के बराबर होगा. हालांकि, यह अभी भी 42 स्क्वाड्रन के लक्ष्य से कम है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 2025 के अंत तक 12 LCA मार्क 1A जेट्स और 2029 तक 83 जेट्स की पूरी डिलीवरी का वादा किया है. 97 नए जेट्स की डिलीवरी 10 साल में पूरी होगी, यानी 2035 तक. भविष्य की योजनाएं: 60 स्क्वाड्रन का लक्ष्य IAF ने 2047 तक अपने बेड़े को 60 स्क्वाड्रन (लगभग 1,080-1,200 जेट्स) तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य भारत के दो मोर्चों—पाकिस्तान और चीन—से बढ़ते खतरों को देखते हुए जरूरी है. चीन के पास 1,900 से अधिक फाइटर जेट्स हैं, जिनमें पांचवीं पीढ़ी के J-20 शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान अपने JF-17 बेड़े को अपग्रेड कर रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए IAF की योजनाएं हैं… LCA मार्क 2: यह तेजस का उन्नत संस्करण है, जो GE F414 इंजन से लैस होगा और 6,500 किलो पेलोड ले जा सकता है. IAF ने 120-200 LCA मार्क 2 जेट्स का ऑर्डर देने की योजना बनाई है. इसका पहला प्रोटोटाइप 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में उड़ेगा. 2029 से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होगा. यह मिग-29, मिराज 2000 और जगुआर की जगह लेगा. एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA): यह भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा, जिसे 2035 तक शामिल करने की योजना है. IAF 200 AMCA जेट्स (मार्क 1 और मार्क 2) खरीदना चाहता है, जो हवा में श्रेष्ठता और गहरे हमलों के लिए होंगे. इसमें स्टील्थ, सुपरक्रूज और उन्नत सेंसर होंगे. मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA): IAF 114 नए फाइटर जेट्स खरीदने की योजना बना रहा है, जिसमें राफेल, F-15EX, F/A-18 सुपर हॉर्नेट, टाइफून और Su-35 जैसे विकल्प हैं. यह डील स्क्वाड्रन की कमी को जल्दी पूरा करने के लिए है. Su-30 MKI अपग्रेड: IAF अपने 260 Su-30 MKI जेट्स को अपग्रेड करेगा, जिसमें स्वदेशी उत्तम AESA रडार, डिजिटल कॉकपिट और नया मिशन कंप्यूटर शामिल होगा. इसमें 78% स्वदेशी सामग्री होगी. मानवरहित विमान (UAV): IAF 2030 तक 30-50 ड्रोन (छोटे, मध्यम, और बड़े) खरीदेगा, जैसे DRDO घातक और ALFA-S स्वार्म ड्रोन, जो नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए होंगे. चुनौतियां और समाधान उत्पादन में देरी: तेजस मार्क 1A की डिलीवरी में देरी हुई, क्योंकि GE F404 इंजन की आपूर्ति में रुकावट आई. मार्च 2025 तक पहला जेट मिलने की उम्मीद है. HAL 2025 में 12 जेट्स देगा. स्वदेशी इंजन: तेजस अभी अमेरिकी GE F404 इंजन पर निर्भर है. भारत का कावेरी इंजन प्रोजेक्ट चल रहा है, लेकिन अभी परिपक्व नहीं है. HAL और GE अब F414 इंजन का भारत में सह-उत्पादन करेंगे. निजी क्षेत्र की भागीदारी: सरकार ने एक समिति बनाई है, जो निजी क्षेत्र को तेजस और AMCA के उत्पादन में शामिल करने की योजना बना रही है. इससे उत्पादन तेज होगा और लागत कम होगी. मेक इन इंडिया का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A की डील मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी. इन जेट्स में 65% स्वदेशी सामग्री है. मार्क 2 में यह 70% तक होगी. यह छोटे और मध्यम उद्यमों को रोजगार देगा और भारत को एयरोस्पेस में आत्मनिर्भर बनाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस के ट्रेनर वेरिएंट में उड़ान भरी और इसकी तारीफ की, जिससे स्वदेशी तकनीक में भरोसा बढ़ा.  

आरिफ मसूद कॉलेज विवाद: जांच के लिए एसआईटी बनाई गई, संजीव शमी होंगे प्रमुख

भोपाल  भोपाल की मध्य विधानसभा से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के कॉलेज की मान्यता के मामले में डीजीपी कैलाश मकवाना ने तीन सदस्यीय जांच दल (SIT)  गठित किया है। यह जांच दल फर्जी दस्तावेजों के जरिए कॉलेज की मान्यता के मामले में जांच करेगा। हाई कोर्ट की डबल बेंच के निर्देश के बाद डीजपी कैलाश मकवाना ने SIT का गठन संजीव शमी एडीजी (टेलीकॉम) के नेतृत्व मे किया गया है जिसमें डी. कल्याण चक्रवर्ती डीआईजी छिंदवाड़ा रेंज और  निमिशा पांडे एआईजी (प्रशिक्षण) पीएचक्यू भोपाल को शामिल किया गया है। एडीजी संजीव शमी के नेतृत्व मे बनाई गई SIT जाली दस्तावेजों के माध्यम से विधायक आरिफ मसूद के इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता के मामले की जांच करेगी। बता दें हाईकोर्ट ने प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने और  डीजीपी कैलाश मकवाना को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद पुलिस ने विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। साथ ही अब डीजीपी ने हाईकोर्ट के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय SIT का नेतृत्व एडीजी कम्युनिकेशन संजीव शमी करेंगे।   दो बार फर्जी सेल डीड का इस्तेमाल आरोप है कि अमन एजुकेशन सोसाइटी के सचिव रहते हुए आरिफ मसूद ने कॉलेज की मान्यता के लिए दो बार फर्जी सेल डीड जमा की थी। यह दस्तावेज़ साल 2004 और 2005 के बीच पेश किए गए थे। करीब 20 साल तक इस फर्जीवाड़े की जांच नहीं हुई और आखिरकार सब-रजिस्टार परी बाजार, भोपाल की रिपोर्ट के बाद मामला उजागर हुआ। 

हाईकोर्ट में होगी CM योगी बायोपिक की प्रीव्यू, जज तय करेंगे रिलीज का निर्णय

मुंबई  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित फिल्म ‘अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी’ को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने खुद फिल्म देखने का फैसला किया है. कोर्ट इस सप्ताह के अंत मे फिल्म देखेगी और सोमवार को आदेश सुनाएगी. बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह फिल्म ‘अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी’ को देखने के बाद ही फिल्म निर्माताओं द्वारा दायर याचिका पर फैसला करेगा, जिसमें सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा फिल्म को प्रमाणित करने से इनकार करने को चुनौती दी गई है. यह फिल्म ‘द मोंक हू बिकेम चीफ मिनिस्टर’ किताब से प्रेरित है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित बताई जा रही है. जज ने सीबीएफसी से क्या कहा? जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने गुरुवार को फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे फिल्म की एक प्रति कोर्ट में जमा करें, जिसमें CBFC द्वारा चिह्नित किए गए दृश्यों या हिस्सों को स्पष्ट रूप से अंकित किया गया हो. फिल्म जिस किताब पर आधारित है, उसकी एक प्रति पहले ही कोर्ट को सौंपी जा चुकी है. 7 अगस्त के एक पूर्व आदेश में कोर्ट ने CBFC को निर्देश दिया था कि वे फिल्म देखें और 11 अगस्त तक अपनी आपत्तियों को फिल्म निर्माताओं के साथ साझा करें ताकि वे आवश्यक बदलाव कर सकें. सेंसर बोर्ड को क्या दिक्कत? CBFC की एग्जामिनिंग कमेटी ने 11 अगस्त को 29 आपत्तियां लिस्ट की गई थीं. हालांकि फिल्म निर्माताओं ने 12 अगस्त तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी या कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं किया. इसलिए CBFC की रिवाइजिंग कमेटी ने फिल्म देखने का निर्णय लिया. रिवाइजिंग कमेटी ने पहले की 8 आपत्तियों को हटा दिया, लेकिन अंततः 17 अगस्त को प्रमाणन को अस्वीकार कर दिया. सोमवार (18 अगस्त) को फिल्म निर्माताओं ने अपनी याचिका में संशोधन करने की अनुमति मांगी ताकि रिवाइजिंग कमेटी के अस्वीकार आदेश को चुनौती दी जा सके. कोर्ट ने फिर आज यानी गुरुवार को सुनवाई के लिए मामला तय किया. पहले यह तय करने के लिए कि संशोधित याचिका स्वीकार्य है या नहीं यह देखते हुए कि सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत एक अपील तंत्र उपलब्ध है. सेंसर बोर्ड का क्या है कहना? CBFC की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभय खंडेपरकर ने कोर्ट को बताया कि बोर्ड ने पूरी प्रक्रिया के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया है और फिल्म निर्माताओं के पास अभी भी सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत हाई कोर्ट में अपील करने का उपाय है. हालांकि, फिल्म निर्माताओं ने तर्क दिया कि याचिका इस कोर्ट के समक्ष स्वीकार्य है. उनके लिए पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवि कदम ने तर्क दिया कि CBFC रिवाइजिंग कमेटी का अस्वीकार न केवल फिल्म निर्माता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि CBFC ने उन्हें फिल्म रिलीज से पहले एक निजी व्यक्ति (योगी आदित्यनाथ) से NOC प्राप्त करने का निर्देश देकर अपने अधिकार क्षेत्र से परे कार्य किया है. कोर्ट ने इस मामले में सेंसर बोर्ड से क्या कहा? फिल्म निर्माताओं के वकील ने दलील दी कि वे एक निजी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के संरक्षक नहीं हैं. कोर्ट ने भी देखा कि भले ही एक वैकल्पिक उपाय मौजूद हो, कोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र को खारिज नहीं किया जा सकता. इसने मामले के प्रबंधन और शुरुआत से ही प्राकृतिक न्याय को बनाए रखने में विफल रहने के लिए CBFC की कड़ी आलोचना की. कोर्ट ने कहा कि आपको यह शुरुआत में ही करना चाहिए था… आपने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन कब किया? यह एक अभ्यास है जो आपको हर फिल्म के लिए करना चाहिए था… आप इसे करने में विफल रहे हैं. मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी.

त्यौहारी सीजन से पहले सरकार ने दी आम जनता को राहत, 12% और 28% वाले GST स्लैब खत्म

नई दिल्ली  महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को बड़ी राहत देने की तैयारी है। जीएसटी स्लैब की संख्या घटाकर दो यानी 5% और 18% कर दी जाएगी।12% और 28% वाले स्लैब को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। बता दें कि आज 21 अगस्त 2025 को हुई बैठक में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) ने केंद्र सरकार का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसमें मौजूदा चार GST स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को केवल दो—5% और 18% में बदलने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव में 12% और 28% स्लैब को पूरी तरह से समाप्त करने की सिफारिश की गई है। बता दें कि इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। 12% स्लैब में आने वाले अधिकतर सामान और सेवाएं 5% में आ जाएंगी, जबकि 28% स्लैब की लगभग 90% वस्तुएं और सेवाएं 18% में आ जाएंगी। केवल तंबाकू, पान मसाला जैसे सिन गुड्स पर ऊंची दरें जारी रहेंगी। जीएसटी मीटिंग में ऐलान संभव केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मंत्रिसमूह की बैठक में बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, "हमने भारत सरकार के 12% और 28% के जीएसटी स्लैब को खत्म करने के दो प्रस्तावों का समर्थन किया है।" सम्राट चौधरी ने कहा कि सभी ने केंद्र द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सुझाव दिए। कुछ राज्यों की टिप्पणियां भी थीं। इसे जीएसटी काउंसिल को भेज दिया गया है। अब आगे का फैसला काउंसिल करेगी। केंद्र सरकार द्वारा 2 स्लैब समाप्त करने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया और उसका समर्थन किया गया। हमने केंद्र सरकार द्वारा 12% और 28% के जीएसटी स्लैब को समाप्त करने के दो प्रस्तावों का समर्थन किया है।" क्या होगा सस्ता – जानिए 12% स्लैब से 5% स्लैब में आने वाले सामान 12% वाले टैक्स स्लैब को खत्म करके उन्हें 5% में लाने का मतलब है कि इन पर लगने वाला टैक्स लगभग 7% कम हो जाएगा। इससे ये चीजें सस्ती हो जाएंगी- • कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स (₹1,000 से ऊपर के कपड़े भी अब सस्ते हो सकते हैं) • जूते-चप्पल • प्रिंटिंग और स्टेशनरी आइटम्स • काफी सारे प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स • होम अप्लायंसेज की कुछ कैटेगरी (जिन पर 12% लगता था) इस बदलाव का सीधा असर मध्यम वर्ग और आम उपभोक्ता पर पड़ेगा क्योंकि रोजाना इस्तेमाल वाली कई चीजें इस श्रेणी में आती हैं। 2. 28% स्लैब से 18% स्लैब में आने वाले सामान 28% स्लैब की लगभग 90% चीज़ों को 18% में लाने का मतलब है कि इनकी कीमत पर टैक्स का बोझ 10% कम हो जाएगा। इससे निम्न चीज़ें सस्ती हो सकती हैं- • टू-व्हीलर और कारें (खासकर छोटे वाहन और एंट्री-लेवल मॉडल) • सीमेंट और बिल्डिंग मटेरियल (हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा फायदा) • कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, टीवी आदि • कुछ पैकेज्ड फूड और बेवरेजेस • पेंट्स और वार्निश इससे न केवल उपभोक्ता को राहत मिलेगी बल्कि रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री में भी तेजी आ सकती है।  

मध्य प्रदेश में अगले 24 घंटे अहम, 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर से मानसून सक्रिय हो गया है। मानसून की सक्रियता की वजह से कई जिलों में झमाझम बारिश हो रही है। राजधानी भोपाल में भी सुबह से बादल छाए हुए हैं। साथ ही रात में बारिश भी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश में एक मजबूत सिस्टम सक्रिय है। गुरुवार को मौसम विभाग ने प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 2 से 4 इंच तक बारिश यहां हो सकती है।मप्र में अब तक औसत 32.4 इंच बारिश हो चुकी है, जो मानसूनी कोटे की 87 प्रतिशत है। प्रदेश से एक मानसून ट्रफ के गुजरने के चलते बुधवार को भी बारिश का दौर रहा। कई जिलों में पानी गिरा। वहीं, गुरुवार को कुल 12 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। इन 12 जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग ने गुरुवार को 12 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। यहां ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। नर्मदापुरम में तवा डैम के 13 गेटों में से 7 गेट आज भी खुले हुए हैं। कल बुधवार सुबह 6:30 बजे से डैम के 5 गेट खोले गए थे। उसके बाद 2 और गेट खोल दिए गए। रतलाम में केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना सीजन में तीसरी बार बह निकला। मंदिर परिसर में पानी ही पानी हो गया। डिंडौरी और शिवपुरी में भी सुबह से बारिश हो रही है। इससे पहले बुधवार को रतलाम, दमोह में भारी बारिश हुई। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर-उज्जैन समेत 30 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। जिन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान बारिश होने की संभावना है, उनमें नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर जिले शामिल हैं। यहां ढाई से साढ़े 4 इंच पानी गिर सकता है। 21 अगस्त को भारी बारिश का यलो अलर्ट मौसम विभाग की मानें तो, 21 अगस्त को एमपी के नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर में भारी बारिश(Heavy Rain) का यलो अलर्ट जारी किया है। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिश का अलर्ट है। 22 और 23 अगस्त को भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक, 22 अगस्त को एमपी के नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, गुनी, शिवपुरी, श्योपुर, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिशHeavy Rain) का यलो अलर्ट है। वहीं 23 अगस्त को ग्वालियर मुरैना, श्योपुर, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश(Heavy Rain) का यलो अलर्ट जारी किया गया है। क्यों हो रही तेज बारिश? मौसम विभाग ने बताया कि इस समय मानसून ट्रफ बैतूल और मंडला से गुजर रही है. इसके अलावा, दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम का असर भी प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है. यही वजह है कि लगातार तेज बारिश का दौर जारी है. यहां हल्की बारिश की संभावना इसके अलावा, मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी हल्की बारिश होने की संभावना है। मध्य प्रदेश में अब तक औसत 32.4 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 87 प्रतिशत अधिक है। मौसम विभाग ने 22 और 23 अगस्त को भी कई जिलों में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। रतलाम में सबसे अधिक बारिश वहीं, बुधवार को रतलाम में 3 इंच बारिश हुई। प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश का दौर जारी रहा। रतलाम में 9 घंटे में लगभग 3 इंच बारिश हुई, जिससे सड़कों पर पानी भर गया। दमोह में ढाई इंच बारिश दर्ज की गई। इसी तरह इंदौर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, भोपाल, नरसिंहपुर, उज्जैन, बैतूल, टीकमगढ़, छतरपुर, रायसेन, नर्मदापुरम, शाजापुर, आगर-मालवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, रीवा, सागर, सतना, सीधी, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, राजगढ़, विदिशा, देवास में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, बैतूल और मंडला से एक मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही, दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी बने हुए हैं। इस वजह से प्रदेश में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है। एमपी में झमाझम बारिश से हाल बेहाल, प्रदेश में अब तक 32.4 इंच बारिश दर्ज मौसम विभाग ने 22 और 23 अगस्त को भी प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है. राजधानी भोपाल में भी बुधवार को झमाझम बारिश देखने को मिली थी, जिससे निचली बस्तियों में पानी भर गया और जगह-जगह ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई. प्रदेश में अब तक 32.4 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है. यह सामान्य औसत से करीब 87% है. अगर आने वाले दिनों में इसी तरह बारिश होती रही तो जल्दी ही प्रदेश का बारिश का पूरा कोटा पूरा हो जाएगा.

चार प्‍वाइंट में समझिए सीएम नीतीश ने जेपी आंदोलनकारियों की पेंशन दोगुनी कर कैसे बनाई मजबूत छवि

लोकतंत्र रक्षक’ की छवि मजबूत करने में जुटे नीतीश, जानिए क्या है पूरी स्ट्रैटजी चार प्‍वाइंट में समझिए सीएम नीतीश ने जेपी आंदोलनकारियों की पेंशन दोगुनी कर कैसे बनाई मजबूत छवि चुनाव से पहले नीतीश का बड़ा दांव! जेपी सेनानियों की पेंशन दोगुनी, विपक्ष पर दबाव पटना आपातकाल को 50 साल पूरे होने के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा राजनीतिक दांव चला है। उन्होंने जयप्रकाश नारायण आंदोलन से जुड़े सेनानियों की पेंशन राशि को दोगुना कर दी है। अब एक माह से छह माह तक जेल में रहे आंदोलनकारियों को 15 हजार और छह माह से अधिक समय तक जेल में रहे सेनानियों को 30 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी।  सामाजिक असर भी डालेगा ये फैसला  इस फैसले पर कैबिनेट की ओर से मंजूर कर लिया गया है। साथ ही इसे 1 अगस्त से लागू कर भी दिया गया। इतना ही नहीं, यदि किसी सेनानी का निधन हो जाता है तो उनकी पत्नी/पति या आश्रित को भी यह पेंशन मिलती रहेगी। यानी यह योजना केवल आंदोलनकारियों तक सीमित नहीं बल्कि उनके परिवार तक असर डालेगी। समझिए राजनीतिक मायने गौर करने वाली बात ये है कि बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दो महीने के भीतर आचार संहिता भी लग जाएगी। ऐसे में सीएम नीतीश कुमार लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं, जो उन्‍हें सीधे राजनीतिक लाभ पहुंचाने वाला हो। जो ऐसे में यह फैसला भी सीधे-सीधे राजनीतिक लाभ पहुंचाने वाला माना जा रहा है। 1 जेपी सेनानियों का सीधा वोट बैंक  बिहार में करीब साढ़े तीन हजार की संख्या में जेपी आंदोलनकारी हैं। इसके अलावा उनके परिवार वाले आज भी मौजूद हैं। उनके सम्मान और पेंशन राशि को दोगुना करना नीतीश को इस वर्ग का अटूट समर्थन दिला सकता है। 2 ‘लोकतंत्र रक्षक’ छवि का मजबूत होना  नीतीश कुमार खुद जेपी आंदोलन की उपज हैं। ऐसे में यह कदम उन्हें लोकतंत्र के सच्चे रक्षक और जेपी की विरासत को आगे बढ़ाने वाले नेता के रूप में प्रोजेक्ट करता है। यह उनकी साख को पुराने वोटरों और नए युवाओं दोनों में मजबूत करता है। 3 भाजपा और कांग्रेस पर दबाव आपातकाल की याद दिलाकर नीतीश कुमार अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को घेरने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। वहीं, भले ही प्रदेश में बीजेपी ओर जेडीयू के गठबंधन वाली सरकार है। मगर, भाजपा के सामने यह चुनौती होगी कि वह नीतीश की इस ‘जेपी कार्ड’ को कैसे काटे! ये अलग बात है कि भाजपा भी जेपी आंदोलन को अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि मानती रही है। लेकिन महत्‍वपूर्ण बात ये है कि जेपी आंदोलन से जुड़े क्रांतिकारियों का पेंशन दोगुना कर नीतीश कुमार ने आंदोलन का क्रेडिट और अपनी जन नायक नेता के रूप में तो जरूर मजबूत की है। 4 वरिष्ठ नागरिकों और पारिवारिक वोटरों पर असर  चूंकि इस पेंशन योजना का लाभ आश्रितों को भी मिलेगा, इसका असर हजारों परिवारों तक होगा। जो सिर्फ एक वर्ग नहीं, बल्कि उनके पूरे सामाजिक-परिवारिक दायरे में नीतीश के लिए सकारात्मक माहौल भी बनाएगा। चुनावी मास्टरस्ट्रोक! नई ऊंचाई पर काबिज हुए नीतीश विशेषज्ञ मानते हैं कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसा फैसला लेना महज एक ‘वेलफेयर स्टेप’ नहीं है, बल्कि यह एक सोचा-समझा राजनीतिक कदम है। यह न सिर्फ जेपी सेनानियों बल्कि पूरे राज्य में "लोकतंत्र के रक्षक" की भावना को जगाने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे नीतीश कुमार विपक्ष के मुकाबले एक नैतिक ऊंचाई पर खड़े दिखेंगे। जेपी सेनानियों की पेंशन दोगुनी कर नीतीश कुमार ने जहां लोकतंत्र के सिपाहियों का मान बढ़ाया है, वहीं इस कदम से चुनावी समीकरण भी उनके पक्ष में जाते नजर आ रहे हैं।