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नितिन गडकरी करेंगे लोकार्पण, प्रदेश को मिला देश का सबसे बड़ा केबल स्टे ब्रिज

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर का एक नए फ्लाई ओवर की सौगात मिलने जा रही है. करीब 1100 करोड़ की लागत से बना 7 किमी लंबा यह फ्लाई ओवर प्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाई ओवर है. साथ ही इसमें रेल मार्ग के ऊपर बना देश का सबसे लंबा सिंगल स्पान केबल स्टे ब्रिज भी बना है, जिसकी लंबाई 192 मीटर है. इसमें 3 बो स्ट्रिंग ब्रिज बनाए गए हैं, जिसमें दो रानीताल और एक बलदेवबाग में बनाया गया है, जो पूरी तरह स्टील से निर्मित है. इसकी लंबाई करीब 70 मीटर होगी. अभी मदनमहल से दमोह नाका तक जाने में वाहन को लगभग 40 से 45 मिनट लगते हैं, लेकिन फ्लाई ओवर से गुजरने के बाद यह दूरी सिर्फ 6 से 8 मिनट में तय हो जाएगी. यह फ्लाई ओवर न केवल जबलपुर के यातायात को व्यवस्थित करेगा, बल्कि जबलपुर के महानगरीय स्वरूप के लिए मील का पत्थर साबित होगा.  प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर और देश के सबसे बड़े केबल स्टे ब्रिज को शुक्रवार को जनता के लिए खोला जाएगा। फ्लाईओवर की घोषणा से लेकर उसके लोकार्पण तक छह साल का लंबा समय लगा। निर्माण के दौरान कानूनी अड़चनें, भ्रष्टाचार के आरोप और राजनीतिक श्रेय की होड़ जैसी कई समस्याएं सामने आईं। दमोह नाका–मदन महल फ्लाईओवर की लंबाई लगभग आठ किलोमीटर है। इस पर मदन महल स्टेशन के ऊपर देश का सबसे बड़ा केबल स्टे ब्रिज बनाया गया है। फ्लाईओवर शुरू होने से लोगों को जाम से राहत मिलेगी और 40 मिनट का सफर अब सिर्फ 10 मिनट में तय किया जा सकेगा। इस फ्लाई ओवर के नीचे पर्यावरण संरक्षण के लिए लगभग 50 हजार पौधों का रोपण किया गया है. साथ ही फ्लाई ओवर के नीचे ही बास्केटबल कोर्ट, ओपन जिम, बच्चों के लिए पार्क बनाए गए हैं. पूरे फ्लाई ओवर में 10 स्थानों पर दिशा सूचक बोर्ड लगाए गए हैं.  मध्यप्रदेश के सबसे बड़े फ्लाई ओवर 'मदनमहल से दमोह नाका' का लोकार्पण केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुखयमंत्री मोहन यादव शनिवार 23 अगस्त को करेंगे.   7 Km लंबा MP का सबसे बड़ा फ्लाईओवर. MP के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि 2014 में केंद्र में बीजेपी सरकार बनने के बाद सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मध्यप्रदेश आए थे। उनसे फ्लाई ओवर निर्माण की मांग रखी गई और गडकरी ने तत्काल इसकी स्वीकृति देते हुए इस फ्लाई ओवर का निर्माण सीआरएफ से कराने का आदेश जारी किया. फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू होने और पूर्ण होने तक कई तरह की अड़चनें सामने आईं, उनके निराकरण की दिशा में कार्य किया गया, आज यह फ्लाई ओवर बनकर तैयार है.   केंद्रीय मंत्री गडकरी करेंगे उद्घाटन इस फ्लाईओवर का उद्घाटन आगामी 23 अगस्त को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे। फ्लाईओवर का भूमि पूजन भी नितिन गडकरी ने 22 फरवरी 2019 को किया था। उन्होंने ही वर्ष 2016 में इस फ्लाईओवर की मंजूरी प्रदान की थी। इसकी प्रारंभिक लागत ₹758 करोड़ थी, जो निर्माण कार्य पूरा होते-होते बढ़कर ₹1,053 करोड़ तक पहुंच गई। तीन साल में होना था तैयार फ्लाईओवर का निर्माण कार्य तीन साल में पूरा होना था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें दोगुना समय यानी छह साल लग गए। इस दौरान फ्लाईओवर की लंबाई भी एक किलोमीटर बढ़ा दी गई। हाईकोर्ट में पहुंचा मामला फ्लाईओवर के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आधा सैकड़ा से अधिक याचिकाएं दायर की गईं थीं। इनमें कहा गया था कि बिना मुआवज़ा दिए मनमाने ढंग से ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके अलावा मास्टर प्लान से अधिक चौड़ाई किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी। राजनीतिक श्रेय को लेकर आरोप फ्लाईओवर के एक हिस्से महानद्दा से मदन महल तक का शुभारंभ सितंबर 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया था। विधानसभा चुनाव के दो माह पूर्व अधूरे फ्लाईओवर का उद्घाटन करने पर कांग्रेस ने भाजपा पर "विकास कार्यों में श्रेय की राजनीति" करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा, जून में कांग्रेस नेता पूर्ण निर्माण के बावजूद उद्घाटन न किए जाने पर खुद फ्लाईओवर का उद्घाटन करने पहुंच गए थे। इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन व बल प्रयोग करना पड़ा था। भ्रष्टाचार के लगे आरोप उद्घाटन से पूर्व फ्लाईओवर में दरारें दिखने पर निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। इसके बाद पीडब्ल्यूडी के अपर प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने 9 जनवरी 2025 को फ्लाईओवर का निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया था कि फ्लाईओवर के स्ट्रक्चर और डिजाइन में कोई कमी नहीं है। एक्सपेंशन जॉइंट में जो गैप आया है, वह मौसम में तापमान के अंतर (30 से 40 डिग्री) के कारण है। इससे 10 से 40 मिमी तक का एक्सपेंशन गैप बनता है। यह केवल ऊपरी सतह पर होता है, जबकि अंदर स्टील और सीमेंट की मजबूत परत मौजूद है। गैप को भरने के लिए तकनीकी टीम का सहयोग लिया जाएगा। टीम यह जांचेगी कि दरारों से पानी तो नहीं जा रहा या अन्य कोई समस्या तो नहीं है। दरारों को थीनेल, डामर और थर्मल पेंट से भरा जाएगा, ताकि वाहन चालकों को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा, रोटरी के पास पत्थर इसलिए लगाए गए हैं ताकि तेज गति में आने वाले वाहन फिसलें नहीं। समय के साथ ये पत्थर ठीक से सेट हो जाएंगे।  

500 मेगावाट यूनिट ठप, एमपी में बिजली संकट की चिंता; मरम्मत में लगेंगे दो साल

 उमरिया बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र एक बार फिर तकनीकी संकट में फंस गया है। केंद्र की सबसे बड़ी 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट रोटर की गंभीर खराबी के कारण बंद पड़ी है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि रोटर की मरम्मत में करीब दो साल का समय लग सकता है। इसका सीधा असर प्रदेश की बिजली आपूर्ति पर पड़ेगा। ठेकेदारों से गारंटी नहीं सूत्र बताते हैं कि रोटर मरम्मत का काम जिस कंपनी को सौंपा गया है, उसने साफ कहा है कि मरम्मत के बाद रोटर कितने समय तक चलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। यानी करोड़ों का खर्च और लंबा इंतजार करने के बाद भी यूनिट का भविष्य अनिश्चित ही रहेगा। इतना ही नहीं, री-मेंटेनेंस की अवधि में भी इस यूनिट को केवल आंशिक लोड पर चलाने की बात सामने आई है। पहले भी खराब हो चुकी हैं यूनिटें यह पहला मौका नहीं है, जब केंद्र की यूनिटें तकनीकी खामी के कारण लंबे समय तक ठप हुई हों। कुछ समय पहले यहां की 210 मेगावाट क्षमता वाली एक नंबर यूनिट करीब 11 महीने बंद रही। मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वह बार-बार उत्पादन बंद करती रही। इससे केंद्र की रखरखाव व्यवस्था और तकनीकी प्रबंधन पर सवाल खड़े होते रहे हैं। अभियंता और ठेकेदारों की मिलीभगत के आरोप केंद्र के मुख्य अभियंता एच. के. त्रिपाठी पर आरोप लग रहे हैं कि वे ठेकेदारों के भरोसे यूनिटों के संचालन का काम कर रहे हैं और तकनीकी खामियों पर सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहे। यूनिटों का मेंटेनेंस अक्सर सिर्फ कागजों में दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि करोड़ों खर्च करने के बावजूद उत्पादन स्थिर नहीं हो पाता। बताया जाता है कि क्वालिटी कंट्रोल और तकनीकी जांच में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। बिजली उत्पादन पर बड़ा असर प्रदेश की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा इस केंद्र से पूरा होता है। अगर 500 मेगावाट यूनिट लंबे समय तक बंद रही तो उत्पादन में भारी कमी आएगी। नतीजतन उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही सरकार को निजी कंपनियों से महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी, जिसका अप्रत्यक्ष बोझ आम जनता पर पड़ेगा। जवाबदेही तय करना जरूरी केंद्र का इतिहास बताता है कि यहां की यूनिटें बार-बार तकनीकी खामी और खराब प्रबंधन की वजह से ठप होती रही हैं। सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिल रहा, तो आखिर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती। क्या यह केवल ठेकेदारों की गलती है या अभियंताओं की लापरवाही भी उतनी ही जिम्मेदार है? सख्त कार्रवाई की मांग विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक मरम्मत कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच और अभियंताओं से लेकर ठेकेदारों तक की जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक यह केंद्र प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर बोझ बना रहेगा। अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में बार-बार उत्पादन बंद होने की समस्या न दोहराई जाए।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 25 अगस्त को गुजरात के दौरे पर, 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की रेल परियोजनाओं की देंगे सौगात

नई दिल्ली/गांधीनगर,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 25 अगस्त को गुजरात के दौरे पर रहेंगे, जहां वे 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न रेलवे परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह परियोजनाएं विशेष रूप से उत्तर गुजरात के महेसाणा, पाटन, बनासकांठा, गांधीनगर और अहमदाबाद जिलों को लाभान्वित करेंगी। यह रेलवे परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स दक्षता और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय योगदान देंगी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रेलवे की जो परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की जाएंगी उनमें 537 करोड़ रुपए की लागत से तैयार महेसाणा–पालनपुर रेल लाइन (65 किमी) का दोहरीकरण, 347 करोड़ रुपए की लागत से कलोल-कड़ी-कटोसन रोड रेल लाइन (37 किमी) का गेज कन्वर्जन और 520 करोड़ रुपए की लागत से बेचराजी-रणुंज रेल लाइन (40 किमी) का गेज कन्वर्जन शामिल है। ये रेलवे परियोजनाएं विशेष रूप से उत्तर गुजरात के महेसाणा, बनासकांठा और पाटण जिले को ब्रॉडगेज लाइन के माध्यम से सहज, सुरक्षित और निर्बाध संपर्क प्रदान करेंगी। इससे दैनिक यात्रियों, पर्यटकों और व्यवसायों के लिए आवागमन अधिक सरल और तेज होगा। साथ ही, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। अतिरिक्त लाइन क्षमता के कारण अहमदाबाद-दिल्ली मार्ग पर तेज गति से ट्रेनों का संचालन संभव होगा। इससे अधिक यात्री ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा और मालगाड़ियों की गति एवं दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। इस प्रकार यह परियोजनाएं गुजरात की आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेंगी। बेचराजी-रणुंज रेल लाइन का गेज कन्वर्जन नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान फॉर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के अनुरूप किया गया है। इसका उद्देश्य लॉजिस्टिक लागत को कम करना और गुजरात राज्य की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिंग में और बेहतर सुधार लाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहल उत्तर गुजरात की सामाजिक-आर्थिक प्रगति को और गति प्रदान करेगी। साथ ही, भारत के लॉजिस्टिक्स और रेलवे क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी कटोसन रोड और साबरमती के बीच यात्री ट्रेन सेवा कड़ी से एवं बेचराजी से कार-लोडेड मालगाड़ी सेवा का भी शुभारंभ करेंगे। कटोसन-साबरमती रोड नई ट्रेन सेवा न केवल पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच को आसान बनाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी। इसी तरह, बेचराजी से शुरू होने वाली कार-लोडेड मालगाड़ी राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों को मजबूत कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इन दोनों रेल सेवाओं से क्षेत्र को पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और उच्च गति वाला परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी बल्कि क्षेत्रीय औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ये सभी रेलवे परियोजनाएं विकसित गुजरात से विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करेंगी।  

केंद्रीय मंत्री गडकरी और CM डॉ. यादव करेंगे जबलपुर में 1052 करोड़ के फ्लाईओवर का उद्घाटन

यातायात होगा सुगम और मिलेगी नई रफ्तार भोपाल  केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 अगस्त, शनिवार को जबलपुर नगर को प्रदेश के सबसे बड़े और अत्याधुनिक फ्लाईओवर की सौगात देंगे। यह फ्लाईओवर जबलपुर शहर को नए यातायात स्वरूप में महानगरीय पहचान देगा। जबलपुर में 1052 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 6.855 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर न केवल मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर है, बल्कि इसमें कई ऐसी विशेषताएं भी शामिल हैं जो इसे विशिष्ट पहचान देती हैं। इस फ्लाईओवर का सबसे बड़ा तकनीकी आकर्षण रेल मार्ग के ऊपर निर्मित 192 मीटर लंबा सिंगल स्पान केबल स्टे ब्रिज है। इस परियोजना में कुल 3 बो-स्ट्रिंग ब्रिज भी शामिल किए गए हैं। इनमें से दो पुल रानीताल क्षेत्र में और एक पुल बलदेवबाग क्षेत्र में बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि ये सभी पुल पूरी तरह स्टील से निर्मित हैं और प्रत्येक की लंबाई लगभग 70 मीटर है। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों से निर्मित यह संरचना न केवल जबलपुर बल्कि पूरे देश के लिए एक अद्वितीय और प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करती है।” यातायात की दृष्टि से यह फ्लाईओवर क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। जहां पहले मदनमहल से दमोह नाका तक पहुँचने में 40 से 45 मिनट का समय लगता था, अब फ्लाईओवर शुरू होने के बाद यह दूरी मात्र 6 से 8 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि शहर में प्रदूषण का स्तर भी घटेगा। व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, नागरिकों की दैनिक जीवनशैली सरल होगी और जबलपुर एक नए यातायात मॉडल के रूप में देश के अन्य शहरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेगा। यह परियोजना जबलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के बीच आधुनिकता का संगम प्रस्तुत करती है। यह शहर की पहचान को महानगरीय स्वरूप देने में सहायक होगी।री स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के लिए बेहतर आवागमन और जीवनशैली सुनिश्चित करेगी।  

PM-CM से जुड़े नए बिल पर बोले अमित शाह, केजरीवाल पर भी की कटाक्ष

तिरुवनंतपुरम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इन दिनों केरल के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के उस बिल का भी जिक्र किया जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन से ज्यादा हिरासत में रहते हैं तो पद से हटा दिए जाएंगे. अमित शाह ने एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि  दिल्ली के (पूर्व) मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी सरकार चला रहे थे, अगर जेल जाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया होता, तो आज इस बिल की जरूरत ही नहीं होती. अमित शाह ने कहा कि क्या देश की जनता चाहती है कि कोई भी मुख्यमंत्री जेल में रहकर सरकार चलाए? अब ये लोग (विपक्षी दल) कहते हैं कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान पहले क्यों नहीं हुआ? अरे, जब संविधान बना था, तब ऐसे निर्लज्ज लोगों की कल्पना ही नहीं की गई थी कि जेल जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं देंगे. साथ ही कहा कि ये बिल किसी पार्टी के लिए नहीं है, ये बिल भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर भी लागू होगा और प्रधानमंत्री पर भी लागू ​होगा.  केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि 70 साल पहले एक ऐसी घटना हुई थी, जिसमें कई मंत्री और मुख्यमंत्री जेल गए थे और जेल जाने से पहले सबने इस्तीफा दे दिया था. लेकिन कुछ समय पहले एक घटना हुई, जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी सरकार चला रहे थे. तो सवाल उठता है कि संविधान बदलना चाहिए या नहीं बदलना चाहिए? लोकतंत्र में नैतिकता का स्तर बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की है. बिल में क्या प्रावधान है? केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक बिल पेश किया है, इस पर काफी विवाद हो रहा है. प्रस्तावित बिल में लिखा है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पर ऐसी धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा सज़ा का प्रावधान है, तो ऐसी स्थिति में गिरफ्तार होने के 31वें दिन उन्हें अपना पद छोड़ना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करेंगे. तो गिरफ्तारी के 31वें दिन खुद-ब-खुद इस पद से उन्हें हटा दिया जाएगा. ऐसी स्थिति में भारत के राष्ट्रपति देश के प्रधानमंत्री की सलाह पर उस केन्द्रीय मंत्री को उसकी गिरफ्तारी के 31वें दिन तक उसके पद से हटा सकते हैं. अगर किसी वजह से देश का प्रधानमंत्री इस पर कोई फैसला नहीं लेता और वो केन्द्रीय मंत्री को बचाने की कोशिश करते हैं, तो ऐसी स्थिति में वो केन्द्रीय मंत्री अपनी गिरफ्तारी के 31वें दिन खुद इस पद से हट जाएगा और उनसे सारी ज़िम्मेदारी वापस ले ली जाएगी. इसी तरह अगर प्रधानमंत्री को किसी आपराधिक मुकदमे में गिरफ्तार किया जाता है, तो प्रधानमंत्री को भी गिरफ्तारी के 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करते तो वो भी खुद-ब-खुद इस पद से हटा दिए जाएंगे. यहां दोनों मामलों में छूट ये होगी कि कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी चाहे तो वो उस नेता को फिर से प्रधानमंत्री या केन्द्रीय मंत्री चुन सकती है.  इसी तरह के प्रावधान राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों पर भी लागू होंगे, जिसके लिए अनुच्छेद 164 में एक नया भाग जोड़ा जाएगा. इसके तहत राज्य सरकार में कोई मंत्री गिरफ्तार होता है तो राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर 31वें दिन तक उस मंत्री को उसके पद से हटा सकते हैं और अगर खुद मुख्यमंत्री ही गिरफ्तार हो जाएं तो उन्हें भी 30 दिनों तक जेल में रहने के बाद 31वें दिन इस पद से हटा दिया जाएगा या उन्हें भी इससे पहले इस्तीफा देना होगा.  

रेलवे की खुशखबरी: त्योहारों में बढ़ेंगी ट्रेनें, यात्रियों को मिलेगा 20% छूट

पंजाब  ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए बेहद ही खास खबर सामने आई है। दीवाली और छठ के त्योहारों पर लोग हमेशा ट्रेनों का सफर करते हैं। इसी के चलते रेल यात्रियों की सुविधा को देखते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, दीवाली और छठ के त्योहारों पर बिहार के यात्रियों की सुविधा के लिए 12 हजार से अधिक विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।  बिहार के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद मंत्रालय ने नई ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है। इसके साथ ही कई अन्य योजनाओं और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया जा रहा है आम वर्ग के यात्रियों के लिए 4 नई अमृत भारत ट्रेनें शुरू की जाएंगी, जो दिल्ली-गया, सहारसा-अमृतसर, छपरा-दिल्ली और मुजफ्फरपुर-हैदराबाद रूट पर चलेंगी। इसके अलावा, पूर्णिया और पटना के बीच जल्द ही एक वंदे भारत ट्रेन शुरू की जाएगी, जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ होगा।  रेल मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने बौद्ध धर्म से जुड़े स्थलों तक पहुंच बढ़ाने के लिए नालंदा और राजगीर तक एक बौद्ध सर्किट ट्रेन चलाने की योजना बनाई है। रेलवे बोर्ड की नई पायलट योजना के तहत यात्रियों को 13 से 26 अक्टूबर 2025 के बीच रवाना होने और 17 नवंबर से 1 दिसंबर 2025 के बीच वापसी की यात्रा करने पर टिकट किराए में 20% की छूट मिलेगी।  

मेट्रो ट्रैक का ट्रॉली टेस्ट, अफसरों ने लिया जायजा; MD ने बारिश में भी काम रोकने से किया इनकार

इंदौर इंदौर में मेट्रो ट्रेन के 17 किलोमीटर हिस्से का काम पूरा करने पर मेट्रो रेल कार्पोरेशन का फोकस है, ताकि यहां तक मेट्रो का संचालन किया जा सके। अभी जिस सात किलोमीटर हिस्से में मेट्रो चल रही है, वहां यात्री नहीं मिल पा रहे है। शुक्रवार को मेट्रो रेल कार्पोरेशन के एमडी एस कृष्ण चैतन्य ने 11 किलोमीटर हिस्से का ट्राॅली रन कर जायजा लिया। उन्होंने अफसरों से कहा कि बारिश के दौरान भी मेट्रो के काम की गति कम नहीं होना चाहिए। छह माह के भीतर हमे मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन रेडिसन चौराहे तक करना है। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन के बचे काम भी पूरे कर लिए जाए। दौरे में उन्होंने विजय नगर, मेघदूत गार्डन, बापट चौराहा, चंद्रगुप्त मोर्य प्रतिमा चौराह के स्टेशनों के काम देखे। इसके अलावा गांधी नगर डिपो का भी निरीक्षण किया। वहां ट्रेनों के रखरखावल तकनीकी सेटअप, कंट्रोल रुम की जानकारी ली और जरुरत के हिसाब से स्टाॅफ बढ़ाने के लिए भी कहा। निरीक्षण के बाद उन्होंने अफसरों व ठेेकेदार एजेसिंयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए। इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो के लिए बनेगी डीपीआर इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो के लिए हुए सर्वे की रिपोर्ट अफसरों के सामने प्रस्तुत की गई। 45 किलोमीटर के रुट के निर्माण पर दस हजार करोड़ का खर्च आएगा। अब इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होगी। इसे लेकर हुई बैठक में बताया गया कि इस रुट पर 11 स्टेशन बनेंगे और उज्जैन में चार किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड बनेगा। मुख्यमंत्री चाहते है कि सिंहस्थ से पहले मेट्रो का निर्माण हो जाएगा, लेकिन तीन साल में काम संभव नहीं है,क्योकि अभी डीपीआर बनने में ही छह माह से अधिक का समय लग जाएगा।  

जो-जो कंपनियां टीम इंडिया की जर्सी पर थीं, अब वही हो रही हैं हटाई गई

मुंबई  भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर जगह पाना किसी भी कंपनी के लिए गर्व और प्रतिष्ठा की बात होती है. मगर अजीब इत्तेफाक ये है कि 21वीं सदी में जिन कंपनियों ने टीम इंडिया की जर्सी की मुख्य स्पॉनशरशिप हासिल की, वे किसी कानूनी या वित्तीय विवाद में फंसीं. साथ ही वो कंपनी अर्श से फर्श पर भी आई. अब इसमें नया नाम ड्रीम11 (Dream11) का जुड़ चुका है. ऑनलाइन गेमिंग बिल के संसद से पारित होने के बाद ड्रीम11 भी अपना बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी कर रहा है. बता दें कि 21 अगस्त (गुरुवार) को प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 राज्यसभा से पास हो गया था. लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका था, ऐसे में अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ये बिल कानून का रूप ले लेगा. इस बिल में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी गेमिंग ऐप जिसमें पैसे का लेन-देन होता हो, उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा. इसमें किस्मत आधारित और स्किल आधारित गेम भी शामिल हैं. चूंकि ड्रीम11 भी स्किल-बेस्ड कैटेगरी में आता है. ऐसे में बिल के कानून बनते ही ड्रीम11 के मौजूदा ऑपरेशन्स भारत में पूरी तरह बंद हो जाएंगे. ड्रीम11 से पहले  बायजू, ओप्पो, स्टार इंडिया और सहारा ने बीसीसीआई के साथ करार किया था, लेकिन इन सभी का सफर मुश्किलों भरा रहा… सहारा (2001-2013): पहले बात सहारा की करते हैं, भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर सबसे लंबे समय तक अगर किसी ब्रांड का नाम जुड़ा रहा, तो वह था सहारा ग्रुप का. 12 सालों तक सहारा भारतीय टीम की जर्सी का मुख्य स्पॉन्सर रहा. इस दौरान भारतीय टीम 2003 के वर्ल्ड कप फाइनल में हारी, वहीं टी20 वर्ल्ड 2007 और वनडे वर्ल्ड कप 2011 की वो विजेता बनी. टीम इंडिया के साथ इतनी लंबी साझेदारी के बावजूद सहारा का कारोबार धीरे-धीरे डगमगाने लगा. सहारा ग्रुप ने अपने दो हाउसिंग बॉन्ड्स के जरिए निवेशकों से लगभग 24,000 करोड़ रुपये जुटाए थे. हालांकि SEBI (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) का मानना था कि यह पैसा गलत तरीके से और नियमों का उल्लंघन करते हुए जुटाया गया. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को यह पूरा पैसा निवेशकों को वापस करने का आदेश देते हुए इसे SEBI के पास जमा करने के लिए कहा. सहारा ने कोर्ट के आदेशों का पालन ठीक से नहीं किया. 2014 में ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय को गिरफ्तार कर लिया गया. 2023 में सुब्रत रॉय का निधन हो गया, मगर अभी तक निवेशकों को पैसों की वापसी की प्रक्रिया जारी है. स्टार इंडिया (2014–2017): सहारा के बाद भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने स्टार इंडिया (Star India) के साथ डील किया. 2014-17 का वो दौर विराट कोहली और रोहित शर्मा के लिए काफी खास था और उन्होंने इस पीरियड में रनों का अंबार लगाया. हालांकि इसी बीच स्टार इंडिया की मुश्किलें बढ़ती गईं. वॉल्ट डिज्नी के स्वामित्व वाले स्टार पर मार्केट डॉमिनेंस के दुरुपयोग का आरोप लगा. आगे चलकर इस कंपनी की पकड़ कमजोर होती गई और इसे जियो के साथ मर्जर करना पड़ा. ओप्पो (2017–2020): चीनी कंपनी ओप्पो (Oppo) ने बीसीसीआई के साथ 1079 करोड़ रुपये का भारी-भरकम सौदा किया, जो पांच सालों के लिए था. हालांकि ओप्पो को उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं हुआ और स्पॉन्सरशिप का खर्च कंपनी को भारी पड़ने लगा. इस दौरान Nokia और InterDigital के साथ पेटेंट विवादों ने कंपनी की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं. नतीजा ये हुआ कि ओप्पो ने ये करार बीच में ही तोड़ दिया. बायजू (2020-22): साल 2020 में भारतीय टीम की जर्सी के मुख्य स्पॉन्सर के तौर पर ओप्पो की जगह बायजू (BYJU'S) ने ली. लेकिन जल्द ही कंपनी अर्श से फर्श पर आ गई. इसकी वेल्यू 2022 तक 22 अरब डॉलर डॉलर थी, जो बाद में शून्य हो गई. कंपनी के पास बीसीसीआई को भुगतान करने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे. BCCI ने 158 करोड़ रुपये की वसूली के लिए NCLT (राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण) का दरवाजा खटखटाया था. ड्रीम11 (2023 से अब तक): फिर ड्रीम11 ने साल 2023 में 3 सालों के लिए भारतीय टीम की किट के लिए स्पॉन्सरशिप राइट्स हासिल किए. बीसीसीआई के साथ ड्रीम 11 की ये डील 358 करोड़ रुपये में हुई थी. शुरुआत में इसे एक बेहतरीन डील माना गया क्योंकि ड्रीम11 फैंटेसी गेम खेलने वाले यूजर्स के बीच बेहद पॉपुलर हो चुका था और क्रिकेट से उसका सीधा कनेक्शन भी था.  2021–22 में ड्रीम11 पर 1200 करोड़ रुपये की GST टैक्स चोरी का आरोप लगा. इस विवाद ने ड्रीम11 की छवि और भरोसे पर गहरा असर डाला. अब नया ऑनलाइन गेमिंग बिल इसके बिजनेस मॉडल पर सीधा प्रहार है. इससे न सिर्फ कंपनी की कमाई पर असर पड़ेगा, बल्कि टीम इंडिया की जर्सी से इसका नाम भी हट सकता है. देखा जाए तो ड्रीम11 की मौजूदा वैल्यू करीब 8 अरब डॉलर है और यह भारत की 3.8 बिलियन डॉलर की गेमिंग इंडस्ट्री में सबसे बड़ा खिलाड़ी है. लेकिन अगर यह मॉडल बंद होता है, तो कंपनी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खो देगी. फिर बीसीसीआई के साथ की गई 358 करोड़ रुपये की डील को निभाना मुश्किल होगा. बीसीसीआई के इन स्पॉनशर्स की कहानी कुछ वैसी ही है जैसे बॉलीवुड के सुपरस्टार्स की. पहले शाहरुख, सलमान, आमिर की फिल्म लगभग हिट हो जाती थी. लेकिन अब उनकी कई फिल्में फ्लॉप हुईं. जैसे- ठग्स ऑफ हिंदोस्तान, लाल सिंह चड्ढा, ट्यूबलाइट, किसी का भाई किसी की जान. सुपरस्टार होने से लोकप्रियता मिलती है, लेकिन हमेशा सफलता की गारंटी नहीं रहती. ठीक ऐसा ही जर्सी स्पॉन्सर्स के साथ हुआ है. नाम मिलता है, पहचान मिलती है, लेकिन अक्सर नतीजा खास नहीं होता है. BCCI के लिए आगे बड़ा चैलेंज ये होगा कि उसे ऐसा ब्रांड मिले, जो प्रेशर और पब्लिसिटी को झेल पाए.

जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं में गौरव पथ, स्मार्ट क्लासरूम, ईवी स्टेशन व डिजिटल सेवाएँ विकसित होंगी: मुख्यमंत्री

बेहतरीन नगरीय अवस्थापना का मानक बनेंगी जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाएँ: मुख्यमंत्री जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं में गौरव पथ, स्मार्ट क्लासरूम, ईवी स्टेशन व डिजिटल सेवाएँ विकसित होंगी: मुख्यमंत्री हब-एंड-स्पोक मॉडल से नगर पालिकाओं को जोड़कर मिलेगी आधुनिक निगरानी व सुरक्षा: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने की नगर विकास विभाग की समीक्षा, कहा सभी नगरीय निकायों के हो अपना भवन मुख्यमंत्री का निर्देश, नगर निगम कर बकाये की विसंगतियों पर अभियान चलाकर कराएं त्वरित समाधान लखनऊ-कानपुर रुट पर शीघ्र बढ़ेंगी 200 इलेक्ट्रिक बसें, अन्य नगरों में 650 बसें खरीदने की योजना बोले मुख्यमंत्री, इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहन के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार हो नगर निगमों की वित्तीय स्वीकृति सीमा 20 साल बाद बढ़ाई जाएगी, मुख्यमंत्री ने दिए तत्काल निर्णय के निर्देश लखनऊ में बनेगा अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज व खेल परिसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला मुख्यालयों वाली नगर पालिकाओं को स्मार्ट और विकसित नगर पालिका के रूप में विकसित करने की योजना का क्रियान्वयन प्रारम्भ करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को नगर विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट-विकसित नगर पालिका योजना का उद्देश्य जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं को आधुनिक, आत्मनिर्भर और नागरिक-केंद्रित स्वरूप में विकसित करना है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस पर यथाशीघ्र कार्य प्रारंभ किया जाए। अधिकारियों ने अवगत कराया कि योजना के अंतर्गत नगर पालिकाओं में गौरव पथ, पिंक टॉयलेट, शहरी सुविधा केंद्र, स्मार्ट क्लासरूम व आंगनबाड़ी, थीम आधारित पार्क, ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण, जलाशयों का पुनर्जीवन, ईवी चार्जिंग स्टेशन, ग्रीन क्रेमेटोरियम और डिजिटल सेवाओं जैसी आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए उत्सव भवन, सामुदायिक केंद्र और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ आधारित ढाँचे भी स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना को हब-एंड-स्पोक मॉडल पर लागू किया जा सकता है। उदाहरणस्वरूप, लखनऊ और गोरखपुर स्थित एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से समीपवर्ती जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं को जोड़ा जा सकता है। इससे नगर पालिकाओं को सुरक्षा, निगरानी और शिकायत निवारण जैसी सेवाओं में आधुनिकता मिलेगी तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक नगर पालिका में परियोजनाओं का चयन स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर किया जाए और वित्तीय संसाधनों का आवंटन नगर निकायों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के अनुसार किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि नगर निकायों को 4 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव है, जो उनकी जनसंख्या और कार्यदक्षता पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं को विकसित-स्मार्ट स्वरूप देने से न केवल आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी, बल्कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी सेवाएँ भी मिलेंगी। बैठक में लखनऊ और कानपुर में 200 इलेक्ट्रिक बसों को नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मोड पर संचालित करने तथा अन्य नगरों में 650 बसों की प्रत्यक्ष खरीद का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और इसके लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी शीघ्र तैयार किया जाए। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में मुख्यमंत्री ने सभी नगर निगमों में निवासियों के विविध कर बकाये में विसंगतियों के तत्काल समाधान पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अभियान चलाकर लोगों से आपत्तियां आमंत्रित की जाएं और समाधान शिविर लगाकर नागरिकों की समस्याओं का यथोचित व संतुष्टिपरक समाधान कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नगर निकायों के पास अपना भवन होना चाहिए। बैठक में नगर निकायों की वित्तीय स्वीकृति सीमाओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि बीते लगभग 20 वर्षों से इन सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 74वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप नगर निकायों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि नगर आयुक्त, महापौर, कार्यकारिणी समिति तथा नगर निगम बोर्ड की वित्तीय स्वीकृति सीमाओं का तत्काल विस्तार किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने लखनऊ में शहीद चंद्रशेखर आज़ाद अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज एवं बहुउद्देश्यीय खेल परिसर की स्थापना के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को पीपीपी मोड पर प्राथमिकता के साथ प्रारम्भ किया जाए, जिससे प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हों।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पेश हुई जुलाई माह की आईजीआरएस रिपोर्ट

गौतमबुद्धनगर और श्रावस्ती आईजीआरएस संतुष्ट फीडबैक में सबसे आगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पेश हुई जुलाई माह की आईजीआरएस रिपोर्ट जनसुनवाई में जनता की संतुष्टि पर योगी सरकार का फोकस, अफसरों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जनसुनवाई प्रणाली (IGRS) को बेहतर और पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जुलाई माह की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि पुलिस कमिश्नर, एसएसपी और एसपी स्तर पर गौतमबुद्धनगर ने सबसे अधिक संतुष्ट फीडबैक हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जबकि जिलाधिकारी स्तर पर श्रावस्ती जिले ने बाजी मारी। पुलिस स्तर पर टॉप-5 गौतमबुद्धनगर 98.72 प्रतिशत संतुष्ट फीडबैक के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद पीलीभीत (98.23%), बलिया (96.04%), बस्ती (95.43%) और श्रावस्ती (95.14%) का स्थान रहा। इन जिलों ने शिकायतों के समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण में बेहतर कार्य किया है। जिलाधिकारी स्तर पर टॉप-5 जिलाधिकारी स्तर पर श्रावस्ती जिला 90.2 प्रतिशत संतुष्ट फीडबैक के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद शाहजहांपुर (89.08%), बलरामपुर (83.44%), हमीरपुर (82.15%) और बरेली (80.11%) रहे। इन जिलों में डीएम स्तर पर की गई कार्यवाही से शिकायतकर्ताओं को संतुष्टि मिली है। मुख्यमंत्री योगी का सख्त संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायत जिस अधिकारी से संबंधित हो, उसकी जांच उसी अधिकारी को न दी जाए। शिकायतों की जांच उच्चाधिकारियों से कराना अनिवार्य किया जाए ताकि न्याय और पारदर्शिता बनी रहे। सीएम योगी ने यह भी कहा कि यदि स्पेशल क्लोज अनुचित पाया जाता है तो प्रस्तावित करने वाले अधिकारी/कर्मचारी पर विभागीय कार्यवाही की जाए। जिलास्तर पर एडीएम/अतिरिक्त मजिस्ट्रेट, एएसपी, डीसीपी या अन्य वरिष्ठ अधिकारी को नामित किया जाए, जो स्पेशल क्लोज करने से पहले शिकायतकर्ता से वार्ता कर उसे संतुष्ट करने का प्रयास करे। योगी सरकार की प्राथमिकता – पारदर्शी और जवाबदेह शासन मुख्यमंत्री ने दोहराया कि जनसुनवाई प्रणाली को जनता और सरकार के बीच सीधा संवाद बनाने के लिए सशक्त किया जा रहा है। शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर जनता का भरोसा बढ़ा है।