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मध्यप्रदेश में साइबर क्राइम का कहर: सिर्फ 10% रकम हो पाई होल्ड, 5 साल में 1054 करोड़ की ठगी

भोपाल  मध्यप्रदेश साइबर ठगों के लिए सॉफ्ट टारगेट बन गया है। आंकड़े बताते हैं की पिछले 5 साल में प्रदेश के अंदर 1 हजार करोड़ से ज्यादा की ठगी हुई है। साल 2021 से 13 जुलाई 2025 तक में साइबर ठगों ने नागरिकों से करीब 1054 करोड़ की ठगी की है। ये धोखाधड़ी बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी वेबसाइट्स, सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग जैसे माध्यमों से की गई है। ठगी की राशि में से सिर्फ 10 फीसदी ही पुलिस होल्ड करवा पाई।  जब ठगी की राशि वापस नहीं आने कारण का पता लगाया तो सामने आया कि ठगी किसी और शहर में बैठकर की जाती और जिस अकाउंट में पैसा आता है वो किसी और शहर का रहता है और पैसा किसी तीसरे शहर में निकाला जाता है। ठगी की राशि जिस अकाउंट में जाती थी वो गरीब व्यक्ति का होता। साथ ही फ्रॉड के बाद 2 घंटे का समय गोल्डन पीरियड माना जाता है जिसमें राशि को फ्रीज करने की सबसे अधिक संभावना होती है लेकिन जागरूकता की कमी के चलते पीड़ित इतनी जल्दी पुलिस तक नहीं पहुंच पाते। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताए आंकड़े कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सवाल के जवाब में सीएम डॉ मोहन यादव ने बताया कि 2020 से 2024 तक साइबर क्राइम के मामलों में साल-दर-साल भारी इजाफा हुआ। जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक प्रदेशभर में कुल 2.48 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 579 साइबर ठगी के केस थे। अभी तक सिर्फ 166 मामलों का निपटारा हो सका है। 2022 से जुलाई 2025 तक कुल 3541 साइबर अपराध के केस दर्ज किए गए, जिनमें से 717 का समाधान हो सका, जबकि 1575 केस अभी भी लंबित हैं। सबसे अधिक शिकार युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बनाया गया है। साइबर क्राइम में कई गुना बढ़ोतरी पुलिस की चुनौती: रिकवरी बेहद कम 5 साल में कुल ठगी ₹1054 करोड़ होल्ड की गई राशि ₹105.21 करोड़ (करीब 10%) पीड़ितों को लौटी रकम ₹1.94 करोड़ (लगभग 2%) सायबर फ्रॉड गंभीर समस्या मध्यप्रदेश में बीते पांच सालों में साइबर ठगी ने गंभीर रूप ले लिया है। हालांकि विधानसभा में हैरान करने वाले आंकड़े सामने आने के बाद भाजपा के विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने दावा किया कि सरकार लोगों को जागरूक करने के साथ, नई टेक्नोलॉजी को अपनाकर इन पर अंकुश लगाने का काम कर रही है। हजारों केस अब भी अधूरे एक सिंगल क्लिक और आपका अकाउंट खाली, पैसे डबल होने के लालच कई बार इंसान को मुसीबत में डाल देते हैं अगर सायबर फ्रॉड से बचना है तो आपको जागरूक होना पड़ेगा, पुलिस की कोशिशों के बावजूद रिकवरी की दर बेहद कम है और हजारों केस अब भी अधूरे हैं।

MP कैबिनेट बैठक संपन्न, पेंशन-पीएमयू सेल सहित विकास से जुड़े प्रस्तावों पर लगी मुहर

भोपाल   मध्यप्रदेश में आज कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें कई अहम् प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। जबलपुर में ईएसआईसी अस्पताल के लिए जमीन आवंटन को मंजूरी दिए जाने के साथ ही सौर ऊर्जा और शहरी विकास समिति प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई है। सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा के बाद कई अहम प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। कैबिनेट ने जबलपुर के रांझी तहसील में 100 बिस्तरों वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल के लिए 5 एकड़ जमीन मंजूर करते हुए अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को हरी झंडी दिखाई है। इसके अलावा नवगठित जिला मऊगंज और पांढुर्ना में भाजपा कार्यालय के लिए सरकारी जमीन आवंटित करने का फैसला किया गया है। इससे स्थानीय संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलेगी। ऊर्जा कैबिनेट ने मुरैना में 600 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के बिजली खरीद भुगतान के लिए राज्य सरकार ने गारंटी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह निर्णय राज्य की हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के चौथे चरण को भी कैबिनेट में मंजूरी दी है। इसके तहत विभिन्न शहरों में सड़क, जल, सीवरेज और अन्य नगरीय सुविधाओं को अपग्रेड किया जाएगा। बैठक में पुलिस कर्मियों और पेंशन से जुड़े कुल 7 मामलों पर भी चर्चा की गई है। जिन्हें कैबिनेट ने प्रस्ताव के अनुसार स्वीकृति प्रदान की है। राजधानी भोपाल में सहकारिता आयुक्त और पंजीयन सहकारी संस्थाओं के अधीन PMU के गठन को भी मंजूरी दी गई है। यह फैसला सहकारी संस्थाओं की निगरानी और कार्य क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। विधानसभा परिसर में मंगलवार को हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में सात पुलिस कर्मचारियों और पेंशन संबंधी मामलों पर भी चर्चा के बाद उस पर प्रस्ताव के मुताबिक मंजूरी देने का फैसला किया है। कैबिनेट बैठक में मऊगंज और पांढुर्णा में बीजेपी दफ्तर के लिए सरकारी जमीन दिए जाने के राजस्व विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट में इन प्रस्तावों पर चर्चा कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के चौथे चरण को सरकार ने मंजूरी दी गई है। साथ ही सहकारिता आयुक्त और पंजीयक सहकारी संस्थाएं भोपाल में पीएमयू सेल के गठन को लेकर चर्चा के बाद मंजूरी दी गई। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (श्रम और रोजगार मंत्रालय) भारत सरकार को 100 बिस्तर अस्पताल के लिए जबलपुर जिले के रांझी तहसील स्थित रिछाई गांव में 2.024 हेक्टेयर (पांच एकड़) जमीन देने के राजस्व विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। साथ ही भाजपा जिला कार्यालय के निर्माण के लिए मऊगंज जिला मुख्यालय में सरकारी जमीन के रकबा 29/12 में से 0.100 हेक्टेयर जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। भाजपा के पांढुर्णा जिला कार्यालय के निर्माण के लिए पांढुर्णा में जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इसके साथ कैबिनेट ने मुरैना में 600 मेगावाट कैपिसिटी के सौर ऊर्जा सह ऊर्जा भंडारण परियोजना से उत्पादित व मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कम्पनी लिमिटेड द्वारा खरीदी जाने वाली बिजली के भुगतान के लिए राज्य सरकार की ओर से गारंटी दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

पूर्व CM भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाईकोर्ट जाने का दिया निर्देश

 रायपुर / नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आपराधिक मामलों में राहत पाने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा सीधे उसके पास आने की प्रथा की निंदा की।अदालत ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से की जा रही जांच के सिलसिले में हाई कोर्ट जाने को कहा। 'हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?' ये मामले छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और अन्य केस से संबंधित हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जायमाल्या बागची की पीठ ने पूछा कि प्राथमिकी, गिरफ्तारी और रिमांड तथा मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रविधानों के खिलाफ उनकी याचिकाओं पर शीर्ष अदालत को क्यों विचार करना चाहिए? पीठ ने सवालिया लहजे में पूछा, "याचिकाकर्ता हाई कोर्ट क्यों नहीं गए। वह भी संवैधानिक न्यायालय है और इस मुद्दे पर फैसला सुना सकता है। यही वह समस्या है, जिसका हम सामना कर रहे हैं। हाई कोर्ट इस मुद्दे पर फैसला क्यों नहीं कर सकता, अन्यथा उन अदालतों का क्या फायदा?" शीर्ष अदालत ने ये भी पूछा कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट क्यों नहीं गए, जो खुद भी एक संवैधानिक न्यायालय है और ऐसे मामलों पर फैसला कर सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘हम इसी समस्या को झेल रहे हैं। उच्च न्यायालय इस मामले का फैसला क्यों नहीं कर सकता? अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर उन अदालतों का क्या मतलब है? यह एक नया चलन बन गया है- जैसे ही कोई संपन्न व्यक्ति उच्चतम न्यायालय आता है, हम अपने निर्देशों को बदलने लगते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आम लोगों और उनके साधारण वकीलों के लिए उच्चतम न्यायालयों में कोई जगह नहीं बचेगी।’’ SC क्यों पहुंचे थे पिता-पुत्र? भूपेश बघेल और चैतन्य बघेल ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और पीएमएलए के प्रावधानों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक एम. सिंघवी ने कहा, "गिरफ्तारी का यह सिलसिला पूरे देश में देखा जा रहा है और प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियां टुकड़ों में आरोपपत्र दाखिल कर रही हैं, किसी को भी फंसा रही हैं और सभी को गिरफ्तार कर रही हैं।” ईडी पर क्या-क्या आरोप? पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं चल सकता। लोगों का नाम प्राथमिकी या शुरुआती आरोपपत्रों में नहीं होता, लेकिन अचानक उनके नाम पूरक आरोपपत्र में आ जाते हैं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।’’ बघेल के बेटे की ओर से पेश सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम दो-तीन आरोपपत्रों में नहीं था, लेकिन मार्च में उनके घर पर अचानक छापा मारा गया और बाद में एक पूरक आरोपपत्र में उनका नाम आने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ED SC के फैसले का उल्लंघन कर रहा: सिब्बल सिब्बल ने दलील दी कि ईडी शीर्ष अदालत द्वारा 2022 के फैसले में निर्धारित कानून का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें गिरफ्तारी के उसके अधिकार को बरकरार रखा गया था। कपिल सिब्बल ने कहा कि इसलिए याचिका में पीएमएलए की धारा 50 और 63 की वैधता को चुनौती दी गई है। ये धाराएं अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति को तलब करने, दस्तावेज मंगवाने, जांच के दौरान बयान दर्ज करने और झूठा बयान देने पर सजा देने का अधिकार देती हैं। हाई कोर्ट जाने का आदेश पीठ ने पूछा कि अगर ईडी कानून का पालन नहीं कर रहा था या प्रक्रिया से भटक रहा था, तो क्या कोई इसे अदालत के संज्ञान में लेकर आया या जांच एजेंसियों की कार्रवाई को चुनौती दी। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत पहले भी कह चुकी है कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आगे की जांच केवल अदालत की अनुमति से ही हो सकती है। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसे कई मामले होते हैं जहां कानून वैध होता है, लेकिन उस पर की गई कार्रवाई अवैध हो सकती है।’’ अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे अपने मामले से जुड़े सभी तथ्य उच्च न्यायालय के समक्ष रखें। पीएमएलए की धाराओं 50 और 63 को चुनौती देने के संबंध में पीठ ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस मुद्दे पर नई रिट याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं, और न्यायालय उन पर सुनवाई लंबित मामलों के साथ करेगा। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी और उच्च न्यायालय से कहा कि वह उनकी याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई करे।  

बड़ी खबर: आयुष्मान योजना पर संकट, IMA ने दी 7 अगस्त से सेवाएं रोकने की धमकी

नई दिल्ली  बीजेपी सरकार के शासन वाले हरियाणा में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जो लाखों आयुष्मान कार्डधारकों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 7 अगस्त तक निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो वे आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर देंगे। इस फैसले से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच संकट में पड़ सकती है। आइए जानते हैं इस गंभीर हालात के पीछे की असली वजहें और इसका प्रभाव। आयुष्मान भारत योजना पर संकट क्यों? हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारियों के इलाज में राहत दी है। योजना के तहत कार्डधारकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जो सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में उपलब्ध है। लेकिन अब लगभग 500 करोड़ रुपये के बकाए के कारण निजी अस्पताल इस सेवा को जारी रखने में असमर्थता जता रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने स्पष्ट किया है कि अगर यह बकाया राशि जल्द न चुकाई गई, तो वे योजना के अंतर्गत इलाज देना बंद कर देंगे। मरीजों को हो सकता है बड़ा नुकसान हरियाणा में लगभग 650 निजी अस्पताल इस योजना के अंतर्गत सेवाएं प्रदान करते हैं और 5 लाख से अधिक कार्डधारक इससे लाभान्वित हैं। लेकिन बकाया भुगतान रोकने से अस्पतालों के हाथ-पांव फूल सकते हैं, जिससे कैंसर, हृदय रोग, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। IMA ने सरकार से आयुष्मान योजना के लिए बजट को मौजूदा 800 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये करने की मांग की है, ताकि भविष्य में बकाया भुगतान जैसी समस्या दोबारा न आए। दूसरी ओर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री ने इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए आश्वासन दिया है कि सरकार जल्द से जल्द बकाया राशि का भुगतान करेगी और योजना को बिना बाधा के जारी रखा जाएगा।

चिकित्सा घोटाले में ED की रेड, रायपुर में करोड़ों की संपत्ति पर कसा शिकंजा

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर में चिकित्सा उपकरण एवं री-एजेंट खरीद घोटाले के संबंध में बड़ी कार्रवाई की है। पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत ईडी ने छत्तीसगढ़ में शशांक चोपड़ा, उनके परिवार के सदस्यों, व्यावसायिक संस्थाओं और राज्य के अधिकारियों सहित अन्य सहयोगियों के आवासीय व कार्यालय परिसरों में 30 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक छापेमारी अभियान चलाया। 40 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त इस दौरान 20 स्थानों पर तलाशी ली गई। छापे के दौरान बैंक खातों में जमा राशि, सावधि जमा, डीमैट खातों में शेयर और वाहनों के रूप में 40 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति सामने आई। विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और चल-अचल संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गई हैं। ईडी ने कहा- अभी और खुलासे होंगे ईडी ने इस मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ी जांच के तहत की गई है, जिसमें कई और खुलासे संभावित हैं। 

उत्तराखंड में प्राकृतिक कहर: धराली गांव में बादल फटा, कई घर सैलाब में बहे

 उत्तरकाशी उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने से बड़ा हादसा हुआ है. गंगोत्री धाम और मुखवा के पास स्थित धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से एक नाला उफान पर आ गया. नाले का पानी बहुत तेज़ी से पहाड़ी से निचले इलाकों की तरफ बहकर आया, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं. यह घटना बेहद गंभीर है और इसने स्थानीय लोगों को चिंता में डाल दिया है. नाले के पानी के साथ मलबा भी आया है, जिसमें कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. गंगोत्री धाम के पास है प्रभावित इलाका बादल फटने के बाद नाले में पानी के उफान से पूरे इलाके में दहशत फैल गई, अब इलाके में राहत और बचाव का काम चल रहा है. जिला आपदा प्रबंधन ने हादसे की पुष्टि की है और कहा कि हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि मौके पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भेजा जा रहा है, साथ ही जिला प्रशासन भी रेस्क्यू में लगा हुआ है. हालात इतने विकट हैं कि सेना भी राहत और बचाव कार्य के लिए रवाना हुई है. भटवाड़ी से एसडीआरएफ की टीम भी धराली की ओर रवाना हो गई है. आज सुबह ही उत्तरकाशी जिले की बड़कोट तहसील क्षेत्र के बनाल पट्टी में भारी अतिवृष्टि हुई है. बादल फटते ही पहाड़ से आया सैलाब उत्तरकाशी के धराली गांव में दोपहर बादल फटने के बाद पहाड़ से ढेर सारा मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। इसके चलते कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है। वीडियो में देखने पर पता चलता है कि यह जलजला कितना भयावह था। लोगों ने यह दृश्य देखते चीख-पुकार मचाना शुरू कर दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। लोग वीडियो बनाते वक्त चीख रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव धराली में खीर गंगा नदी में बादल फटने से तबाही आई है। यहां पर विनाशकारी बाढ़ की वजह से करीब 20 होटल और होमस्टे को नुकसान पहुंचा है। कई स्थानीय लोग और मजदूरों के दबे होने की आशंका भी है। गंगोत्री विधायक सुरेश सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया- धराली में खीर गाढ़ के ऊपर बादल फटने से पलय का मंजर है। सूचना पर तत्काल मुख्यमंत्री को सूचना दे दी गई है। जिलाधिकारी को सूचना के साथ ही सेना, पुलिस, एसडीआरएफ की टीम पहुंच गई है। यह बहुत बड़ी दुघटना है। मैं भी देहरादून से घटनास्थल के लिए निकल चुका हूं। भगवान से पाथना है कि इस आपदा की घड़ी से सबको सुरक्षित बचाएं। उत्तराखंड पुलिस ने दी अपडेट उत्तराखंड पुलिस ने अपने एक्स हैंडल से बताया कि उत्तरकाशी,हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस,SDRF,आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। उक्त घटना को देखते हुए सभी नदी से उचित दूरी बनाएं। पुलिस ने सचेत करते हुए स्वयं,बच्चों व मवेशियों को नदी से उचित दूरी पर ले जाने को कहा है। प्रभावित गांव गंगोत्री धाम और गंगाजी के शीतकालीन प्रवास मुखवा के बहुत करीब है. इस इलाके में बादल फटने से लोग घबराए हुए हैं. प्रशासन की तरफ से सभी लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि कोई अनहोनी न हो. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं. इन हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है और घरों को काफी नुकसान पहुंचा है. UP के 17 जिलों में बाढ़, 300+ मकान ढहे, 16 मौतें UP-बिहार में मानसून की बारिश से बाढ़ जैसे हालात हैं। बिहार के मुंगेर, बक्सर, पूर्णिया, भोजपुर, पटना समेत कई जिलों में सैकड़ों गांव डूब गए हैं। बिहार के पूर्णिया में 38 साल बाद रिकॉर्ड बारिश हुई। यहां रविवार से सोमवार तक 270.6mm बारिश हुई। इससे पहले 1987 में 294.9mm बारिश हुई थी। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज, वाराणसी समेत 17 जिलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 343 मकान बारिश के चलते ढह चुके हैं। पिछले 24 घंटे में बाढ़-बारिश से जुड़े हादसों में 16 लोगों की मौत हो गई है। जौनपुर, चंदौली, सुल्तानपुर, कानपुर, पीलीभीत और सोनभद्र में 5 अगस्त, वाराणसी, हमीरपुर और लखीमपुर में 6 अगस्त तक, जबकि प्रयागराज और मिर्जापुर में 7 अगस्त तक स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी गई है। हिमाचल प्रदेश में तेज बारिश से 310 सड़कें बंद हैं। शिमला में सोमवार को बारिश के बाद 3 घरों पर लैंडस्लाइड हो गया। लोगों ने एक दिन पहले ही घर छोड़ा था। कल रात में तेज बारिश के बाद चंडीगढ़-मनाली फोरलेन भी बंद है। उत्तराखंड के हल्द्वानी में नदी में बहने से 3 लोगों की मौत हो गई। केरल में भारी बारिश का रेड अलर्ट मौसम विभाग ने मंगलवार को केरल में भारी बारिश का रेड अलर्ट और हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, पुडुचेरी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनके अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब समेत 19 राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

मध्यप्रदेश में झमाझम बारिश का दौर, कई जिलों में रिकॉर्ड टूटा; ग्वालियर-मुरैना में अलर्ट जारी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में इस समय मानसून की सक्रियता कम हो गई है। फिलहाल प्रदेश में कोई प्रभावी मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं है, जिससे ज्यादातर जिलों में तेज बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि, लोकल वेदर सिस्टम के कारण कुछ इलाकों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। खासकर ग्वालियर-चंबल संभाग में अगले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश की संभावना जताई जा रही है। मध्यप्रदेश में इस मानसूनी सीजन में 28.6 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक सामान्य से 47 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर चुका है। यह कोटे का 77% है। पूर्वी हिस्से में बादल जमकर बरसे हैं। हालांकि, अगले 4 दिन तक प्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव नहीं है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना जिलों में अगले 24 घंटे में भारी बारिश (Heavy Rainfall Alert) हो सकती है। वहीं रीवा और सतना में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात को तेज वर्षा के आसार हैं। अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर जैसे शहरों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की फुहारें पड़ सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय देश के उत्तरी हिस्सों में मानसून की प्रमुख प्रणाली सक्रिय है, जिससे मध्यप्रदेश में इसका असर सीमित हो गया है। इस कारण प्रदेश के कई जिलों में बारिश की तीव्रता कम है। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त के दूसरे सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू होगा, जो आखिरी तक चलेगा। ऐसे में बारिश का कोटा अगस्त में ही पूरा हो जाएगा। हालांकि, अब तक ग्वालियर समेत 9 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है लेकिन इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों की तस्वीर बेहतर नहीं है। मंगलवार को ग्वालियर, मुरैना और भिंड में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। वहीं, भोपाल में सुबह से धूप खिली है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में औसत से 51% और पश्चिमी हिस्से यानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में 43% बारिश अधिक हुई है। सोमवार को दिनभर के दौरान प्रदेश के कुछ शहरों में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई। दतिया में 14 मिमी, खजुराहो में 5 मिमी, नौगांव में 3 मिमी, इंदौर में 1 मिमी, उज्जैन में 0.4 मिमी, रीवा और सतना में 1-1 मिमी और सिवनी में 0.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। कम बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में भी हल्की वृद्धि देखी जा रही है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में तापमान कुछ इस प्रकार रहा-     भोपाल: अधिकतम 31.0°C, न्यूनतम 24.2°C     इंदौर: अधिकतम 30.2°C, न्यूनतम 21.7°C     ग्वालियर: अधिकतम 31.2°C, न्यूनतम 26.4°C     जबलपुर: अधिकतम 32.8°C, न्यूनतम 24.4°C अगले 24 घंटे विशेष रूप से ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन जिलों के नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जिन इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां प्रशासन ने भी निगरानी बढ़ा दी है। एमपी में बाढ़ से 2 माह में 275 मौतें पूरे मध्यप्रदेश की बात करें तो बाढ़ के दौरान हुए हादसों में 275 लोगों की जान जा चुकी है। मानसून की आमद के बाद से जून और जुलाई के ये आंकड़े सरकार ने खुद विधानसभा में बताए हैं। 1657 पशुओं की भी मौत हुई है। बारिश के चलते ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (RRDA) की 254 से अधिक सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। 293 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए जबकि 3 हजार 687 मकानों में आंशिक नुकसान हुआ है। कुल 3980 मकानों को नुकसान पहुंचा है। पिछले सप्ताह बने थे बाढ़ के हालात पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा नदी ने विकराल रूप ले लिया था। खेत-मंदिर और पुल डूब गए थे। वहीं, डैम ओवरफ्लो हो गए थे। उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के उफान पर आने से चित्रकूट में कई दुकानों में पानी भर गया था। गुना में सबसे ज्यादा 45 इंच पानी गिरा इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। निवाड़ी में 45.1 इंच, मंडला-टीकमगढ़ में 44 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है।  

बिजली उपभोक्ताओं को झटका, हाफ बिल योजना अब सिर्फ 100 यूनिट तक

रायपुर   राज्य सरकार द्वारा हाफ बिजली बिल योजना के अंतर्गत दी जाने वाली छूट की सीमा में युक्तियुक्त संशोधन किया गया है। अब प्रतिमाह दी जाने वाली 400 यूनिट की छूट के स्थान पर 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर 50 प्रतिशत रियायत दी जाएगी। वर्तमान में राज्य के 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 31 लाख परिवार (करीब 70%) ऐसे हैं जिनकी खपत 100 यूनिट प्रतिमाह से अधिक नहीं है। अतएव हाफ बिजली बिल की छूट सीमा के इस पुनरीक्षण के बावजूद इन 31 लाख जरूरतमंद सामान्य एवं कमजोर वर्ग के उपभोक्ता परिवारों को योजना का लाभ पहले की ही तरह मिलता रहेगा। प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता परिवार हाफ बिजली योजना से पूर्ववत लाभान्वित होते रहेंगे। इन 31 लाख परिवारों में 15 लाख बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्ववत हाफ बिजली बिल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इन परिवारों को 30 यूनिट तक की मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत पहले की तरह प्राप्त होती रहेगी, साथ ही वे हॉफ बिजली बिल योजना के अन्य सभी लाभों से भी यथावत् लाभान्वित रहेंगे।  राज्य सरकार गरीब परिवारों को बिजली खर्च में राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को गति दे रही है, जिसके अंतर्गत 3 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट की स्थापना पर केंद्र सरकार से ₹78,000/- तथा राज्य सरकार से ₹30,000/- की कुल ₹1,08,000/- तक की सब्सिडी दी जा रही है। 2 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 75% (₹90,000/-) का अनुदान उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ता प्रतिमाह 200 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन कर सकते हैं। यह उत्पादन वर्तमान में हॉफ बिजली बिल योजना से मिलने वाली अधिकतम छूट (400 यूनिट पर 200 यूनिट की छूट) से भी अधिक है। 400 यूनिट तक औसत खपत करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली बिल आमतौर पर ₹1000/- से अधिक होता है, जो सोलर प्लांट की स्थापना के बाद लगभग शून्य हो जाएगा। इस प्रकार के उपभोक्ता हॉफ बिजली बिल योजना से “मुफ्त बिजली बिल” योजना की ओर अग्रसर होंगे, और दीर्घकालिक बचत प्राप्त करेंगे। उपभोक्ता स्वयं की छत पर उत्पादित बिजली के अतिरिक्त शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर प्राप्त कर सकेंगे अतिरिक्त आय रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने वाले उपभोक्ता अपनी छत पर उत्पादित बिजली का उपयोग करने के साथ-साथ शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के अंतर्गत 25 प्रतिशत शेष लागत उपभोक्ता स्वयं वहन कर सकते हैं, या फिर बैंक से न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इस ऋण की मासिक किस्त लगभग ₹800/- होगी, जो कि वर्तमान में 400 यूनिट पर देय औसत बिजली बिल ₹1000/- से भी कम है। इस प्रकार, उपभोक्ता अपने मासिक बिजली बिल को कम करते हुए भविष्य में आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादक बन सकते हैं। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार का यह निर्णय गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को राहत देने, तथा उन्हें ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त और दूरदर्शी प्रयास है। यह योजना राज्य को स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक बचत के पथ पर अग्रसर करेगी।

रेप केस में कांग्रेस विधायक पर दोबारा जांच के निर्देश, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त आदेश

अटेर  भिंड के अटेर से कांग्रेस विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के खिलाफ दर्ज रेप केस की जांच एक बार फिर शुरू होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए जांच की निगरानी भोपाल रेंज के डीआईजी स्तर के अधिकारी को सौंपी है. बता दें कि ये मामला 2018 का है. इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति कई बार गरमा चुकी है. अब ये मामला एक बार फिर तूल पकड़ चुका है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत कटारे की गिरफ्तारी पर रोक को बरकरार रखा. लेकिन ये राहत उन्हें तभी मिलेगी, जब वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मध्य प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें हाईकोर्ट के 2 दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. बता दें कि हेमंत कटारे मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यदेव कटारे के बेटे हैं. एक-दूसरे पर दर्ज कराई थी FIR यह मामला वर्ष 2018 का है, जब भोपाल में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही 21 वर्षीय छात्रा ने विधायक हेमंत कटारे पर रेप और अपहरण के गंभीर आरोप लगाए थे. छात्रा की शिकायत पर भोपाल के महिला थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. दूसरी ओर, हेमंत कटारे ने इसे भी राजनीतिक साजिश बताते हुए छात्रा पर ब्लैकमेलिंग और करोड़ों की फिरौती मांगने का आरोप लगाया था. कटारे की शिकायत पर छात्रा को गिरफ्तार भी किया गया था. छात्रा की आत्महत्या से मामला और उलझा छात्रा ने जेल से छूटने के बाद कटारे और पुलिस पर मिलकर उसे झूठे आरोप में फंसाने की बात मीडिया से कही थी. उसने कटारे यौन शोषण के आरोप लगाए थे. मामला तब और जटिल हो गया जब 2019 में छात्रा ने प्रयागराज में आत्महत्या कर ली. इस घटना ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया था. वहीं, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस प्रकरण में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर फिर से जांच की मांग की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अब यह मामला फिर चर्चा में आ गया है. भिंड जिले के अटेर से कांग्रेस विधायक और विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के खिलाफ रेप केस की जांच फिर से शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हेमंत कटारे के खिलाफ दर्ज मामले की जांच भोपाल रेंज के डीआईजी की निगरानी में कराने का आदेश दिया है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच की निगरानी DIG स्तर के अधिकारी करेंगे। हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि फिलहाल हेमंत कटारे की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी, बशर्ते वे जांच में पूरा सहयोग करें। सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मध्यप्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें हाईकोर्ट के 2 दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू, एएजी अमित शर्मा और अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे। वहीं, हेमंत कटारे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गगन गुप्ता ने पक्ष रखा। जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की निगरानी डीआईजी भोपाल करेंगे, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक हेमंत कटारे की गिरफ्तारी नहीं की जाए, यदि वे जांच में पूरा सहयोग करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चार सप्ताह में जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। भूपेंद्र सिंह बोले- कांग्रेस विधायक पर रेप केस में रिपोर्ट बदली पूर्व परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने उप नेता प्रतिपक्ष और अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे पर दर्ज रेप केस में एफएसएल रिपोर्ट बदले जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेटर लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। 

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने दुनिया को कहा अलविदा, दिल्ली के अस्पताल में हुआ निधन

नई दिल्ली पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है। उनका लंबे समय दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वह जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों में गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले सत्यपाल मलिक समाजवादी विचारधारा से निकले नेता थे। एक सांसद से लेकर गवर्नर तक का सफर तय करने वाले सत्यपाल मलिक आखिरी कुछ सालों में भाजपा से जुड़े थे और कई राज्यों में गवर्नर के तौर पर सेवाएं दीं। हालांकि बीते कुछ सालों से वह सरकार के खिलाफ मुखर थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया था। सत्यपाल मलिक के एक्स अकाउंट से भी उनकी मौत की जानकारी दी गई। इसी एक्स अकाउंट पर आखिरी बार उनके निजी सहायक ने 9 जुलाई को बताया था कि उनकी हालत गंभीर है। खुद को चौधरी चरण सिंह का शिष्य बताने वाले सत्यपाल मलिक किसान आंदोलन के समर्थन में मुखर हुए थे और सरकार की तीखी निंदा की थी। यही नहीं उन्होंने किसान आंदोलन के समर्थन में कई राज्यों में दौरे किए थे और सरकार से अपील की थी कि वह तीन विवादित बिलों को वापस ले ले। पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधे हमला बोलने के कारण भी वह काफी चर्चा में थे। पांच साल में कुल 5 राज्यों के गवर्नर रहे थे सत्यपाल मलिक वह 2017 से 2022 के दौरान बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर और मेघालय तक कुल 5 राज्यों में गवर्नर रहे। 1970 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 1974 में बागपत से विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल से उतरे थे और जीत हासिल की थी। उन्हें जम्मू-कश्मीर में गवर्नर के कार्यकाल के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनके ही दौर में राज्य से आर्टिकल 370 हटा था और सूबे का पुनर्गठन करके लद्दाख को अलग एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। हालांकि इसी कार्यकाल को लेकर वह विवादों में भी रहे। खुद पर चार्जशीट दाखिल होने पर जताई थी हैरानी उन्होंने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर करप्शन का आरोप लगाया था और फिर इसी केस में उनके खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट पर अस्पताल से ही सत्यपाल मलिक ने ऐतराज जताया था और कहा था कि आखिर यह क्या हो रहा है। जिस शख्स ने करप्शन का आरोप लगाया था, उसके ही खिलाफ जांच शुरू कर दी गई और अब चार्जशीट दाखिल की गई है। सत्यपाल मलिक ने लोकसभा चुनाव 2024 में भी सरकार का मुखर विरोध किया था और विपक्ष के समर्थन में वोट देने की अपील की थी।