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मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने किया शिवपुरी के ग्राम पचावली में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण

सरकार का पहला कर्त्तव्य है नागरिकों की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सभी प्रभावितों को शीघ्र प्रदान किया जायगा मुआवजा : केंद्रीय मंत्री सिंधिया मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने किया शिवपुरी के ग्राम पचावली में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण प्रभावितों को सहायता राशि वितरित शिवपुरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को शिवपुरी जिले के ग्राम पचावली पहुंचकर हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित स्‍थानीय नागरिकों को मकान क्षति तथा खाद्यान्न के लिए सहायता राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री ने ग्राम पचावली में ग्रामवासियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन, कोलारस विधायक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व विधायक प्रहलाद भारती, जनप्रतिनिधि, कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी, पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनहानि, पशुहानि अथवा फसल क्षति जैसी हर स्थिति में सरकार पीड़ितों के साथ है। प्रभावित परिवार को राहत राशि सीधे उनके खाते में प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे बाढ़ प्रभावितों के दुख-दर्द जानने आए हैं। सरकार हर हाल में प्रभावित परिवारों के साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का पहला कर्तव्य हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अतिवर्षा से उत्पन्न परिस्थितियाँ हमारे लिए परीक्षा की घड़ी हैं। जनता के सहयोग और प्रशासन के समर्पण से स्थिति पर नियंत्रण पाया गया है। उन्‍होंने कहा कि अतिवृष्टि एवं बाढ़ग्रस्‍त क्षेत्रों में राहत कार्य निरंतर जारी रहेंगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। शासन-प्रशासन पूरी मुस्‍तैदी के साथ राहत कार्यों में लगा है। उन्‍होंने बाढ़ प्रभावितों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि चिंता न करें, दुख की घड़ी में सरकार आपके साथ है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि हम सुख-दुख के हर क्षण प्रभावितों के साथ हैं। संकट की घड़ी में हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार औसत वर्षा से कहीं अधिक वर्षा हुई है, जिसके कारण सिंध नदी में उफान आया और पचावली सहित 32 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि ग्वालियर से दो हेलीकॉप्टर राहत कार्य के लिए भेजे गए थे। मौसम प्रतिकूल होने के कारण वे प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाए। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राहत दलों के संयुक्त प्रयासों से प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। लगभग 400 लोगों की जान बचाई गई और प्रभावितों को तत्काल आर्थिक सहायता दी गई। उन्होंने कहा कि मक्का एवं सोयाबीन की फसल को व्यापक क्षति हुई है, जिसकी भरपाई के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावितों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए।  

आर्थिक मोर्चे पर भारत का कमाल, 110 अरब डॉलर से अमेरिका-चीन की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली भारत में सेमीकंडक्‍टर का उपयोग बड़े स्तर पर होता है और अब भारत कंजम्‍प्‍शन के अलावा, मैन्‍युफैक्‍चरिंग भी करने लगा है. भारत में तेजी से चिप (India Semiconductor Market) बनाने का काम हो रहा है, जिस कारण सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री ग्रो कर रही है. घरेलू च‍िप मार्केट 2023 में 38 अरब डॉलर तक था और वित्त वर्ष 2024-25 में 45 से 50 अरब डॉलर था, जो 2030 तक 100 से 110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.  अगर भारत यह टारगेट हासिल कर लेता है तो वह US चीन की कैटेगरी में शामिल हो जाएगा, जिनकी सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्रीज ट्रिलियन डॉलर की हैं. 2023 में चीन का सेमीकंडक्‍टर मार्केट 177.8 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 32 फीसदी हिस्‍सा है. वहीं मैन्‍युफैक्चरिंग की बात करें तो यह 16 से 18% उत्‍पादन करता है. अमेरिका का चिप मार्केट साल 2023 में 130 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 25 फीसदी है, लेकिन US 12 फीसदी ही उत्‍पादन करता है.  भारत उभरता हुआ चिप मार्केट  भारत का साल 2024 में कुल सेमीकंडक्‍टर मार्केट 45 अरब डॉलर था, जो कुल ग्‍लोबल मार्केट में 1 फीसदी उत्‍पादन करता है. हालांकि भारत का चिप मार्केट 16% ग्रोथ से बढ़ रहा है यानी 2030 तक इसकी ग्‍लोबल मार्केट में 6.21 फीसदी तक की हिस्‍सेदारी होगी. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत ग्‍लोबल सेमीकंडक्‍टर मार्केट में एक उभरता हुआ देश है.  इस वजह से बढ़ रहा सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन  एक ऑफिशियल स्‍टेटमेंट के मुताबिक, इस ग्रोथ को 76000 करोड़ रुपये के खर्च से शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम जैसी सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन बढ़ रहा है. इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (ICET) जैसे ग्‍लोबल सहयोग ने इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी को और बढ़ाया है.  फॉक्‍सकॉन और एचसीएल का ज्‍वाइंट वेंचर  देश का चिप निर्माण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर धीरे-धीरे साइज बदल रहा है. मई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सेमीकंडक्‍टर मिशन के तहत एक सेमीकंडक्‍टर निर्माण सुविधा को मंजूरी दी, जो HCL और फॉक्‍सकॉन के बीच एक ज्‍वाइंट वेंचर है. यह प्‍लांट मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार और PC जैसे उपकरणों के लिए डिस्‍प्‍ले ड्राइवर चिप्‍स का निर्माण करेगा. इस प्‍लांट को 20 हजार वेफर मंथली की क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है. इससे मंथली 36 मिलियन चिप्‍स का उत्‍पादन होने की उम्‍मीद है.  भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन भी इसी वर्ष शुरू होने वाला है और पांच मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट अभी बन रही हैं. भारत सिर्फ एक मार्केट ही नहीं, बल्कि एक उत्‍पादन सेंटर के तौर पर भी महत्‍वपूर्ण ग्‍लोबल हिस्‍सेदारी हासिल करने के लिए भी तैयार है. 

रक्षाबंधन गिफ्ट: लाड़ली बहनों के खाते में इस दिन आएंगे ₹1500

भोपाल   मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की अगस्त महीने में आने वाली 27वीं किस्त की तारीख का ऐलान हो गया है। मध्य प्रदेश की लाडली बहनों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पहले कहा जा रहा था कि रक्षाबंधन से पहले खाते में 250 रुपये आएंगे। अब राज्य सरकार की ओर से ऐलान हो गया कि मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 27वीं किस्त के रूप में एक साथ 1500 रुपये खाते में आएंगे। राज्य सरकार के मुताबिक 7 अगस्त को राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ से लाडली बहना योजना की 27वीं किस्त के 1250 रुपये और रक्षाबंधन शगुन के 250 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। रक्षाबंधन से पहले मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए यह बड़ी सौगात है। आमतौर पर लाडली बहना योजना की किस्त 10 तारीख के बाद आती है, लेकिन इस बार सरकार ने रक्षाबंधन को खास बनाते हुए 7 अगस्त को ही 1.27 करोड़ महिलाओं के खाते में पूरे 1500 रुपये भेजने का फैसला कर लिया है। पहले कहा जा रहा था कि पैसा दो किस्तों में आएगा। 9 अगस्त को रक्षाबंधन से पहले 250 रुपये का शगुन मिलेगा। इसके बाद 1250 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। भाई दूज से हर महीने मिलेंगे 1500 हालांकि अब वो दिन दूर नहीं है, जब खाते में हर महीने 1500 रुपये आना शुरू हो जाएंगे। अगले महीने सितंबर में आने वाली लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त के रूप में 1250 रुपये मिलेंगे। हालांकि अक्टूबर यानी महज सिर्फ एक महीने के बाद से ही हर महीने खाते में 1500 रुपये आने शुरू हो जाएंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि हर साल लाडली बहनों को मिलने वाली राशि को बढ़ाया जाएगा और साल 2028 तक लाभार्थियों के खाते में 3000 रुपये आने शुरू हो जाएंगे लाडली बहनों को किस्त के अलावा मिल सकते हैं 5000 मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना के अलावा राज्य सरकार ने एक और योजना शुरू की है। इसके तहत मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की लाभार्थियों को अलग से 5000 रुपये मिल सकते हैं। जो लाभार्थी महिलाएं फैक्टरी या मिल में नौकरी करेंगी, उन्हें सरकार की ओर से 5000 रुपये अलग से दिए जाएंगे। सीएम मोहन योदव ने अपने एक बयान में कहा कि रक्षाबंधन पर 1 करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1500 रुपये की किस्त भेजे जाएंगे. इससे पहले लाड़ली बहना योजना के तहत राज्य की लाभार्थी महिलाओं को योजना की 26वीं किस्त 12 जुलाई 2025 को जारी की गई थी. उज्जैन के नलवा गांव में आयोजित ‘लाड़ली बहना सम्मेलन’ में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1543.16 करोड़ रुपये की राशि सीधे 1.27 करोड़ बहनों के बैंक खातों में ट्रांसफर की थी. जुलाई की इस किस्त में हर पात्र महिला को 1250 रुपये की मासिक सहायता दी गई थी, जो योजना की नियमित मंथली पेमेंट का हिस्सा है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने 56.74 लाख वृद्ध, विधवा, दिव्यांग और अन्य पात्र नागरिकों को 340 करोड़ रुपये की राशि पेंशन के रूप में ट्रांसफर की थी. रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए 30 लाख से अधिक उज्ज्वला योजना लाभार्थी बहनों को 46.34 करोड़ रुपये की राशि रिफिलिंग के लिए सीधे खातों में दी गई थी. क्या है लाड़ली बहना योजना? शुरुआत: जून 2023 में, महिलाओं की आर्थिक मदद और सम्मान बढ़ाने के लिए लाभार्थी: 21 से 60 वर्ष की विवाहित, तलाकशुदा या विधवा महिलाएं वर्तमान लाभ: मंथली 1250 रुपये नई घोषणा: अक्टूबर से मंथली 1500 रुपये सहायता राशि इस बार: 9 अगस्त को 1250 रुपये और 250 रुपये का रक्षाबंधन शगुन यह योजना क्यों है खास? 'लाड़ली बहना योजना' केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. हर महीने की राशि से महिलाएं अपने छोटे-छोटे फैसले खुद ले सकती हैं, परिवार में उनकी भागीदारी बढ़ती है और आत्मसम्मान भी.  

AI क्रांति या तबाही? विशेषज्ञ बोले– आने वाले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां जाएंगी

 नई दिल्ली दशकों पहले कंप्यूटर के आने पर जैसी हलचल मची थी, वैसी ही स्थिति अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर देखी जा रही है। कोई इसे लेकर आशंकित है कि नौकरियां चली जाएंगी तो कुछ लोगों को लगता है कि इससे तमाम काम आसान और पारदर्शी होंगे। इस बीच भारतीय अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला ने बड़ा अनुमान जाहिर किया है। उनका कहना है कि अगले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। निखिल कामथ के साथ पॉडकास्ट में विनोद खोसला ने कहा इन नौकरियों में लगे लोगों का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से होने लगेगा। यही नहीं उन्होंने छात्रों को भी जागरूक करते हुए कहा कि भविष्य के छात्रों को स्पेशलिस्ट बनने की बजाय जनरलिस्ट बनना होगा यानी उन्हें तमाम चीजों की जानकारी रखनी होगी। विनोद खोसला ने उम्मीद भरी एक बात भी की। उन्होंने कहा कि भले ही मौजूदा तमाम नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि कुछ अवसर भी इससे पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर भी पैदा होंगे, जिनके बारे में आज हम सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि ऐसी बहुत सी शानदार नौकरियां हैं, जिन्हें इंसान कर रहे हैं। उन कामों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किया जाएगा। ऐसी करीब 80 पर्सेंट नौकरियां होंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2040 तक बहुत सी चीजें बदल जाएंगी। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे होंगे कि कई काम तो खत्म ही हो जाएंगे। यदि कोई उन्हें करना चाहेगा तो वह उनका शौक होगा, लेकिन जरूरत नहीं होगी। विनोद खोसला का यह अनुमान ऐसे समय में आया है, जब दिग्गज टेक कंपनियों में छटनी का दौर है। इन कंपनियों का कहना है कि वे वर्कफोर्स का पुनर्गठन कर रही हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि चीजें बदल रही हैं। हाल ही में देश की सबसे बड़ी टेक कंपनी कही जाने वाली टीसीएस ने 12 हजार कर्मचारियों की छटनी का ऐलान किया है। इसके अलावा नीतियों में भी कुछ बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे भविष्य में भी नौकरियों पर तलवार रहेगी।

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की तलाश जारी, रणनीति और गठजोड़ में उलझा समीकरण

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने जैसे ही उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा की है, वैसे ही विपक्षी INDIA अलायंस की चिंता बढ़ गई है। विपक्षी खेमे के लिए इस पद पर उम्मीदवार के लिए चेहरे की तलाश भी कठिन चुनौती बन गई है क्योंकि विपक्षी दलों को पता है कि संसद के दोनों सदनों में संख्या बल के आधार पर उनकी स्थिति बहुत कमजोर है। बावजूद इसके विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत और वैचारिक चेहरे को उम्मीदवार के रूप में उतारने की कोशिश कर सकता है, ताकि वह देश को राजनीतिक संदेश दे सके कि वह सत्तारूढ़ भाजपा और उसके उम्मीदवार से दो-दो हाथ करने को तैयार है और उसकी विचारधारा से मुकाबला करने के लिए एकजुट खड़ा है। चूंकि संसद के दोनों सदनों के सदस्य ही उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं और वहां विपक्षी सांसदों की संख्या कम है। इसलिए इंडिया अलायंस उपराष्ट्रपति चुनाव का इस्तेमाल पिछड़े और अल्पसंख्यकों, किसानों, बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज सहित हाशिए पर पड़े वर्गों को लामबंद करने और उनके बीच स्पष्ट संदेश देने की कोशिश करेगा। इसीलिए विपक्ष एक ऐसे वैचारिक चेहरे को साझा उम्मीदवार के तौर पर तलाश कर रहा है, जो उसके इस राजनीतिक संदेश को फैला सके। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने बुलाई बैठक बता दें कि इंडिया अलायंस की गुरुवार (7 अगस्त) को एक अहम बैठक होने वाली है, जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव और राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा उठने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव के संभावित उम्मीदवार पर भी चर्चा होने की संभावना है। राहुल दे सकते हैं प्रजेंटेशन TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में नेता विपक्ष राहुल गांधी मतदाता सूचियों पर कांग्रेस की तरफ से की गई एक रिसर्च पर प्रजेंटेशन दे सकते हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने उस रिसर्च के बारे में कहा था कि उनके हाथ एटम बम लगा है। राहुल ने कहा है कि इससे बिना किसी संदेह के यह साबित होता है कि भाजपा की मदद के लिए मतादाता सूची के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। दरअसल, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद का चुनाव होना है। पिछले महीने जस्टिस शेखर यादव और जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर नोटिस को स्वीकार करने के अपने फैसले पर सरकार के साथ कथित टकराव के बाद धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का चुनाव समय से पहले हो गया है।

डिफेंस डील में नया मोड़: भारत ने टेका भरोसा कोरियन KF-21 फाइटर जेट पर?

नई दिल्ली दक्षिण कोरिया का KF-21 Boramae मेटियोर मिसाइल के साथ एक शक्तिशाली जेट बनकर उभर रहा है. भारत इसके लिए रुचि दिखाकर सही दिशा में कदम बढ़ा रहा है, खासकर जब चीन और पाकिस्तान जैसे खतरे बढ़ रहे हैं. यह जेट न सिर्फ हवा में ताकत देगा, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाएगा. हालांकि, डील को फाइनल करने में समय और बातचीत लगेगी, लेकिन यह भविष्य की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है. KF-21 Boramae क्या है? KF-21 Boramae दक्षिण कोरिया का एक नया मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीस ने बनाया है. इसे पहली बार 2021 में दुनिया के सामने पेश किया गया था. अभी इसके ट्रायल चल रहे हैं. इसे 2026 में दक्षिण कोरिया की वायुसेना में शामिल करने की योजना है. यह जेट हल्का और स्टील्थ फीचर्स वाला है, यानी यह दुश्मन की रडार से बच सकता है. इसका मकसद पुराने जेट्स को बदलना और हवा में ताकत बढ़ाना है. KF-21 की खूबियां यह जेट कई लाजवाब खूबियों से लैस है…     गति और दूरी: 2200 किमी/घंटा की रफ्तार से 1000 किमी तक उड़ सकता है.     आकार: 55.5 फीट लंबा, 15.5 फीट ऊंचा और टेकऑफ वजन 25,600 किलोग्राम.     पायलट: इसे 1 या 2 पायलट चला सकते हैं- 1 लड़ाई के लिए, 2 ट्रेनिंग के लिए.     तोप: 20 मिमी की वल्कन तोप, जो एक मिनट में 480 गोलियां दाग सकती है.     हथियार: 10 जगहें (हार्ड प्वाइंट्स) हैं, जहां 5 एयर-टू-एयर (मेटियोर, साइडविंडर) और 5 एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, एंटी-शिप मिसाइलें या बम लगाए जा सकते हैं. भारत क्यों दिलचस्पी ले रहा है? भारत की वायुसेना को नए जेट्स की सख्त जरूरत है, क्योंकि पुराने MiG-21 और जगुआर अब पुराने पड़ गए हैं. MRFA डील के तहत भारत 100 से ज्यादा नए जेट्स लेना चाहता है. अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 जेट्स महंगे हैं. इन पर निर्भरता बढ़ रही है. वहीं, KF-21 सस्ता (लगभग 87-110 मिलियन डॉलर प्रति जेट) और आधुनिक है.     मेक इन इंडिया: भारत इसे अपने यहां बनाना चाहता है, जिसमें अपनी तकनीक (जैसे रडार) जोड़ सकता है.     चीन का खतरा: भारत-चीन सीमा विवाद को देखते हुए यह जेट रणनीति में मददगार होगा.     कम खर्च: यह राफेल या F-35 से सस्ता है, जो भारत के बजट के लिए अच्छा है. क्या दिक्कतें हो सकती हैं?     ट्रायल: KF-21 अभी टेस्टिंग में है. 2026 तक तैयार नहीं होगा.     तकनीक: दक्षिण कोरिया को भारत के साथ तकनीक शेयर करनी होगी.     दुश्मन की नाराजगी: चीन और उत्तर कोरिया इस डील को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान सकते हैं.  

दो दिन बाद आ सकती है बड़ी खुशखबरी, रेपो रेट घटाने पर विचार कर सकता है RBI

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो चुकी है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा कर रहे हैं. पिछली तीन बैठकों में रिजर्व बैंक पहले ही रेपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर चुका है, जिससे फिलहाल रेपो रेट 5.50 प्रतिशत पर है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करेगा या उन्हें स्थिर रखेगा. बैठक के नतीजे 6 अगस्त को घोषित किए जाएंगे. रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना अर्थशास्त्रियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत ब्याज दर में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती का मजबूत कारण है. अमेरिका के टैरिफ के चलते भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है और इससे समग्र आर्थिक गतिविधियों में मंदी आ सकती है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और अपेक्षाकृत कम मुद्रास्फीति को देखते हुए आरबीआई अगस्त की बैठक में 25 बीपीएस की कटौती कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम त्योहारी सीजन से पहले ऋण प्रवाह को तेज कर सकता है और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकता है. अब तक हो चुकी है तीन बार कटौती, क्या फिर घटेगा ब्याज? RBI ने पहले ही लगातार तीन बार रेपो रेट में कटौती की है, जिससे कुल 100 बेसिस प्वाइंट यानी 1% की कमी हो चुकी है. फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर है. यही वो दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं. इसी के आधार पर लोन और EMI पर ब्याज तय होता है. कुछ जानकारों का मानना है कि RBI अब रुक सकता है और इस बार रेपो रेट को स्थिर रख सकता है. उनका कहना है कि जून में महंगाई दर यानी रिटेल इंफ्लेशन 2.1% रही, जो काफी कम है. ऐसे में RBI पहले की गई कटौतियों का असर देखने के लिए कुछ समय ले सकता है. कुछ एक्सपर्ट्स को है और कटौती की उम्मीद हालांकि कई जानकार ये भी कह रहे हैं कि मौजूदा हालात में RBI एक और 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25% की कटौती कर सकता है. ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ और ग्लोबल अनिश्चितता से GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है. ऐसे में RBI एक आखिरी कटौती कर सकता है ताकि ग्रोथ को सपोर्ट मिले. Crisil के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी का भी यही मानना है कि ग्रोथ पर खतरा फिलहाल महंगाई से बड़ा है, इसलिए RBI 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है. SBI की रिपोर्ट में भी  रेपो रेट घटने की उम्मीद SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर RBI अब कटौती करता है, तो इसका फायदा सीधे फेस्टिव सीजन में मिलेगा. बैंक का मानना है कि पहले ही त्योहारों का सीजन आ रहा है और अगर रेपो रेट घटती है, तो क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन की डिमांड बढ़ सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि RBI को देर नहीं करनी चाहिए, वरना सही समय निकल सकता है. CareEdge Ratings का कहना है कि RBI पहले ही रेपो रेट में कटौती कर चुका है और अब कुछ समय तक उसका असर देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब तक ग्रोथ में कोई बड़ी गिरावट न दिखे, तब तक और कटौती नहीं होगी. Bank of Baroda के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि जून की महंगाई दर या अमेरिका की टैरिफ नीति से अब पॉलिसी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. RBI पहले ही इस डेटा को ध्यान में रख चुका है. इसलिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन टोन यानी बयान में सतर्कता रहेगी. महंगाई पर काबू, तेल की कीमत और टैरिफ से चिंता रिजर्व बैंक को सरकार ने 4% महंगाई का टारगेट दिया है जिसमें 2% ऊपर-नीचे की छूट है. जून में महंगाई 2.1% रही है जो इस दायरे में बहुत कम है. लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ अभी भी चिंता का कारण हैं. EMI घटेगी या नहीं? RBI की MPC मीटिंग काफी अहम है. कुछ एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि एक और छोटी कटौती होगी, जिससे होम लोन सस्ता हो सकता है. वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि फिलहाल RBI इंतजार करेगा. अब देखना यह है कि 6 अगस्त को RBI कौन सा रास्ता अपनाता है . अगर आप भी होम लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से EMI भर रहे हैं, तो RBI की इस मीटिंग पर नजर जरूर रखें. समय पर नीतिगत कदम की जरूरत रिपोर्ट के अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब भी त्योहारी सीजन जल्दी आता है और उससे पहले ब्याज दरों में कटौती होती है, तो क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) में तेज़ उछाल देखने को मिला है. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि केंद्रीय बैंक को सही समय पर कदम उठाना चाहिए, ताकि नीतिगत खिड़की का लाभ उठाया जा सके. मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में बदलाव संभव CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे जा सकती है. इसके चलते आरबीआई इस वित्तीय वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को नीचे कर सकता है. जीडीपी अनुमान बरकरार, बाहरी दबावों पर नजर CareEdge ने कहा है कि वे वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर के पूर्वानुमान पर कायम हैं, लेकिन अमेरिका और अन्य देशों से आने वाले बाहरी दबावों की बारीकी से निगरानी की आवश्यकता है.

मुंबई में पक्षियों को दाना खिलाना अपराध! 51 कबूतरखाने बंद, 100 लोग चालान के शिकंजे में

मुंबई महाराष्ट्र सरकार के निर्देश और बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने दादर कबूतरखाना में कबूतरों को दाना डालने पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है. बीएमसी ने 2 अगस्त को दादर कबूतरखाना के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसे प्लास्टिक की बड़ी तिरपालों से ढक दिया. यह प्रतिबंध गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के कारण लागू किया गया है, क्योंकि कबूतरों की बीट (मल) से सांस संबंधी बीमारियां और संक्रमण होने की संभावना होती है, विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में. बीएमसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को लागू करते हुए दादर कबूतरखाना में बने अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया और कबूतरों को खिलाने के लिए रखे गए अनाज को जब्त कर लिया गया. कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लागू होने के बाद से बीएमसी ने दादर कबूतरखाना में 100 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया है. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बीएमसी को प्रतिबंध का उल्लंघन कर कबूतरों को दाना डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और आपराधिक शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया है, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा बार-बार आदेश का उल्लंघन पर संभावित गिरफ्तारी भी शामिल है. बीएमसी को इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस का भी सहयोग मिला है और उन जगहों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जहां लोग कबूतरों को दाना डालते हैं. कबूतरों को दाना डालने के पीछे सांस्कृतिक और धार्मिक आधारों का हवाला देकर स्थानीय लोग बीएमसी के एक्शन का विरोध कर रहे हैं. हालांकि, बीएमसी का कहना है कि वह हाई कोर्ट के आदेश पर जन स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता दे रही है.  दादर निवासी नीलेश त्रेवाडिया ने कहा कि बीएमसी को इस तरह के प्रतिबंध के परिणामों पर भी ध्यान देना चाहिए. यह प्रतिबंध दादर सहित मुंबई के सभी प्रमुख कबूतरखानों पर लागू है और हाई कोर्ट ने बीएमसी से इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो रही है. मुंबई में 51 कबूतरखाने हैं, जिनमें दादर कबूतरखाना जैसे प्रतिष्ठित स्थल भी शामिल हैं. मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मुंबई के म्युनिसिपल कमिश्नर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पक्षी प्रेमियों, जैन साधुओं और नागरिकों द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं को ध्यान में रखा जाए. बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए उन्होंने बीएमसी से कोई बीच का रास्ता निकालने का आग्रह किया है. मुंबई में पिजन फीडिंग की सदियों पुरानी प्रथा मुंबई में लोगों द्वारा कबूतरों को दाना डालना सदियों से चली आ रही एक प्रथा है, जो कई बार विवादों का कारण भी बना है. भारतीय संस्कृति में कबूतरों को दाना डालना पुण्य का कार्य माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि इससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. कहा जाता है कि कबूतरों को भोजन कराने से मृत पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और पितृ-पीड़ा से मुक्ति मिलती है. विशेष रूप से अमावस्या के दिन कबूतरों को दाना डालना शुभ माना जाता है. कुछ संस्कृतियों में यह भी मान्यता है कि कबूतरों को सांसारिकता और आध्यात्म के बीच संदेशवाहक के रूप में देखा जाता है, उन्हें भोजन कराने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और ईश्वर के साथ बेहतर संबंध बनता है. जैन धर्म में, कबूतरों को दाना डालना जीव दया या जीवों के प्रति करुणा का एक रूप है, जो जैन परंपरा के प्रमुख सिद्धांतों में से एक है. जैन मंदिर और ट्रस्ट कबूतरखाना संचालित करते हैं. जैन धर्म के अनुयायी इन स्थानों पर नियमित रूप से कबूतरों को दाना डालने जाते हैं. दादर कबूतरखाना को भी एक जैन मंदिर द्वारा स्थापित किया गया था. मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने का इतिहास मुंबई में गुजराती और जैन व्यापारियों की बड़ी संख्या के कारण शहरभर में कबूतरखाने मिल जाते हैं. इस कारण मुंबई में कड़ी संख्या में कबूतर देखे जा सकते हैं. एडवर्ड हैमिल्टन ऐटकेन ने 1909 में अपनी किताब 'द कॉमन बर्ड्स ऑफ बॉम्बे' में शहर में कबूतरों की बड़ी आबादी के कारणों पर विस्तार से बताते हुए लिखा, 'वे दो चीजों से बंबई की ओर आकर्षित होते हैं: उनके रहने के लिए यहां इमारतों की कोई कमी नहीं है और हिंदू अनाज व्यापारियों की उदारता के कारण उन्हें भोजन की कमी नहीं होती.' बॉम्बे नगरपालिका ने 1944 में दादर स्थित जैन मंदिर को एक पत्र लिखकर पक्षियों के भोजन के लिए एक ट्रैफिक आइलैंड के निर्माण की अनुमति दी. यह पत्र जैन मंदिर द्वारा भेजे गए उस पत्र के जवाब में जारी किया गया था जिसमें मंदिर के पास झुंड में रहने वाले और कारों से कुचले जाने के खतरे में रहने वाले कबूतरों की सुरक्षा के लिए एक बाड़ा बनाने की अनुमति मांगी गई थी. ट्रैफिक आइलैंड सड़क पर एक उठा हुआ या चिह्नित क्षेत्र होता है जिसका उपयोग यातायात को नियंत्रित करने, पैदल यात्रियों को सुरक्षित स्थान प्रदान करने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए किया जाता है. ऐसे स्ट्रक्चर चौराहों पर या सड़कों के बीच में बनाए जाते हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सके और पैदल चलने वालों को सड़क पार करने के लिए सुरक्षित स्थान मिल सके.  मुंबई में कबूतरों की बीट से स्वास्थ्य जोखिम तत्कालीन बॉम्बे में कबूतरों को दाना डालना व्यापक रूप से स्वीकार्य था. लेकिन 90 के दशक के मध्य में इस पर चिंताएं उभरने लगीं, जब मेडिकल स्टडीज में कबूतरों की बीट को सांस संबंधी बीमारियों से जोड़ा गया. इसके बाद, मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने से संबंधित शिकायतें बढ़ने लगीं, नागरिकों ने कबूतरों की अधिक संख्या के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं की शिकायत की. 2013 में, 30 जून को ग्रांट रोड पर कबूतरखाना के पास एक कबूतर के अचानक सामने आने से बीएमसी के एक इंजीनियर की मोटरसाइकिल से गिरकर मौत हो गई थी. घटना के बाद स्थानीय पार्षद ने दाना बेचने वालों को सड़क से हटा दिया. दो दिन बाद, तत्कालीन बीएमसी लॉ कमिटी के चेयरमैन मकरंद नार्वेकर ने कबूतरखानों को कम भीड़-भाड़ वाले इलाकों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा. हालांकि, इस प्रस्ताव … Read more

IAS अधिकारियों के हुए तबादले, पदस्थापना आदेश जारी, देखें लिस्ट

भोपाल. मध्य प्रदेश शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों (IAS Transfer) के तबादला आदेश जारी किये हैं, सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किये हैं। GAD MP द्वारा जारी तबादला आदेश में 5 अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है वहीं तीन IAS अधिकारियों से अतिरिक्त प्रभाव वापस लिया है और अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। इन IAS अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव  राज्य शासन ने मंत्रालय में पदस्थ पदस्थापना की प्रतीक्षा कर रहे सीनियर IAS अधिकारी मनीष सिंह को प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की जिम्मेदारी दी है इसके अलावा उन्हें प्रमुख सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग (अतिरिक्त प्रभार) सौंपा है। शासन ने पदस्थापना की प्रतीक्षा कर रहीं IAS जी व्ही रश्मि को सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी दी है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश में प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश बीज एवं फार्म विकास निगम तथा उप सचिव, , किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग (अतिरिक्त प्रभार) अनुराग सक्सेना को अपर प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, भोपाल पदस्थ किया है। IAS अभिलाष मिश्रा को राज्य शासन ने अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम, इन्दौर के पद से ट्रांसफर करते हुए आयुक्त नगर पालिक निगम उज्जैन पदस्थ किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी श्रीमती अर्चना सोलंकी मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासन), मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, भोपाल की पदस्थापना में बदलाव करते हुए शासन ने उप सचिव, “कार्मिक”, सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी दी है।