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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा धावक अनिमेष कुजूर की ऐतिहासिक उपलब्धि और मल्हार की सांस्कृतिक धरोहर का किया उल्लेख

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और आमजनों के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी का श्रवण किया। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व, प्रेरणा और आत्मविश्वास का क्षण बन गया, क्योंकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय मंच से प्रदेश की प्रतिभा और सांस्कृतिक धरोहर दोनों का उल्लेख कर पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाया है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जब देश का सर्वोच्च नेतृत्व किसी राज्य की उपलब्धियों और प्रतिभाओं का उल्लेख करता है, तो वह केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं होता, बल्कि करोड़ों प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं, परिश्रम और पहचान को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा मिलती है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ आज देश के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों, प्रतिभाओं और प्रेरक जीवन यात्राओं को राष्ट्रीय पहचान देने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आज जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले युवा धावक अनिमेष कुजूर की उपलब्धि का उल्लेख कर प्रदेश के युवाओं को यह संदेश दिया है कि सीमित संसाधन किसी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकते, यदि उसके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत का जुनून हो। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धि को जिस आत्मीयता और प्रेरक शैली में प्रस्तुत किया, वह देश के युवाओं में नई ऊर्जा भरने वाला है। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दोनों खिलाड़ियों से फोन पर संवाद करते हुए उल्लेख किया कि पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा और इसे उन्होंने खेलों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का अद्भुत उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह केवल रिकॉर्ड टूटने की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के आत्मविश्वास, अनुशासन और विश्वस्तरीय सोच की कहानी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजूर ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.15 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए क्वालीफाई कर प्रदेश तथा देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अनिमेष की यात्रा विशेष रूप से प्रेरणादायक है, क्योंकि जशपुर के ग्रामीण परिवेश से निकलकर सैनिक स्कूल अंबिकापुर से शिक्षा प्राप्त करने वाले इस युवा ने सीमित परिस्थितियों में अपनी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचने का सफर तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ की धरती प्रतिभाओं से परिपूर्ण है और उचित अवसर मिलने पर यहां के युवा विश्व पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री और अनिमेष कुजूर के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी की सोच विशेष रूप से प्रेरक है। प्रधानमंत्री से बातचीत में अनिमेष ने बताया कि किस प्रकार कोविड काल के दौरान खेल के प्रति रुचि बढ़ी, साथियों के प्रोत्साहन से एथलेटिक्स में प्रवेश हुआ और कठिन चुनौतियों तथा संदेहों के बावजूद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी विश्वस्तरीय स्प्रिंटिंग में नई पहचान बना सकते हैं और भारतीय युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यह आत्मविश्वास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में खेल भावना का अत्यंत प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि प्रतिस्पर्धा केवल एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए नहीं, बल्कि देश का मान बढ़ाने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कही गई यह बात कि "एक-दूसरे को चुनौती भी देना है, आगे निकलने का प्रयास भी करना है और साथ ही एक-दूसरे की मदद के लिए भी खड़े रहना है” वास्तव में भारत की नई खेल संस्कृति की पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भी इसी सोच के साथ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना और अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक मल्हार में ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत प्राप्त दुर्लभ ताम्र-पट्टिकाओं का उल्लेख किया जाना भी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1400 से 1500 वर्ष पुरानी मानी जा रही ये ताम्र-पट्टिकाएं पांडुवंशी शासनकाल, विशेष रूप से महर्षि बालार्जुन काल से जुड़ी मानी जा रही हैं, जो उस समय की शासन व्यवस्था, संस्कृति, धर्म और सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई यह धरोहर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का सशक्त प्रमाण है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार भारत और छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मल्हार की यह खोज केवल पुरातात्विक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक चेतना और आने वाली पीढ़ियों के ज्ञान-विस्तार से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मंच से ऐसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं, तो इससे विरासत संरक्षण के प्रति समाज में नई जागरूकता और सम्मान की भावना भी विकसित होती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ एपिसोड इस बात का सशक्त उदाहरण है कि नया भारत अपनी प्रतिभा, परिश्रम, खेल भावना, संस्कृति और विरासत – सभी को समान सम्मान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर जशपुर का युवा खिलाड़ी देश को नई गति देने का सपना देख रहा है और दूसरी ओर मल्हार की धरोहर भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कह रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह दोहरी उपलब्धि पूरे प्रदेश में आत्मगौरव, प्रेरणा और नई ऊर्जा का संचार करने वाली है। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन  … Read more

जहरीली हवा और संकरी सुरंगों में फंसे खनिकों की तलाश, दुनिया भर के गोताखोर जुटे

नई दिल्ली  घुप अंधेरा, जहरीली हवा, कीचड़ से भरी सुरंगें और ऐसा पानी जिसमें हाथ तक दिखाई न दे। लाओस के शायसोम्बौन प्रांत की एक खतरनाक गुफा में फंसे खनिकों को बचाने के लिए पिछले 11 दिनों से दुनिया के कई देशों के एक्सपर्ट गोताखोर मौत से मुकाबला कर रहे हैं। यह ऑपरेशन अब 2018 के मशहूर थाईलैंड ‘थाम लुआंग’ गुफा बचाव अभियान से भी ज्यादा जोखिम भरा माना जा रहा है। 21 मई को सोना और अन्य कीमती खनिज तलाशने गए सात ग्रामीण खनिक अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण गुफा में फंस गए। लगातार बारिश से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया और बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह खत्म हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि एक खनिक किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा और उसने प्रशासन को सूचना दी। यही घटना बाकी लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बनी। 'कॉफी' जैसा गंदा पानी और दम घोंटने वाली हवा राहत अभियान में शामिल गोताखोरों के मुताबिक गुफा के भीतर का पानी इतना गंदा था कि दृश्यता लगभग शून्य थी। बचावकर्मियों ने इसे 'कॉफी-कलर्ड वॉटर' यानी कॉफी जैसा गाढ़ा और भूरा पानी बताया। गुफा की कई सुरंगें केवल 60 सेंटीमीटर चौड़ी थीं। तुलना करें तो एक बड़ी पिज्जा का व्यास करीब 50 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में गोताखोरों को ऑक्सीजन सिलेंडर उतारकर शरीर सिकोड़ते हुए अंदर बढ़ना पड़ा। इसके अलावा गुफा के भीतर चमगादड़ों की बीट से पैदा हुई हाइड्रोजन सल्फाइड गैस मौजूद थी, जिससे बेहोशी या दम घुटने का खतरा बना हुआ था। दुनिया भर के एक्सपर्ट जुटे शुरुआत में लाओस और थाईलैंड की टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हुए। टीम में फिनलैंड के मशहूर गुफा गोताखोर मिक्को पासी भी शामिल थे, जिन्होंने 2018 के थाई गुफा बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि पासी ने साफ कहा कि यह मिशन थाईलैंड ऑपरेशन से कहीं ज्यादा खतरनाक है। उनके मुताबिक, यह प्राकृतिक गुफा नहीं बल्कि सालों से हाथों से खोदी गई अस्थिर खदान है। कई हिस्सों में मिट्टी कभी भी ढह सकती थी। संकरी सुरंगों में एक समय पर केवल एक गोताखोर ही निकल सकता था। पांचवें दिन तक सिर्फ सवाल ही सवाल शुरुआती दिनों में सबसे बड़ा सवाल था कि खनिक जीवित भी हैं या नहीं। अगर वे जिंदा हैं तो क्या उन्हें बाहर निकाला जा सकेगा? बचावकर्मियों को यह भी डर था कि जिन लोगों ने कभी डाइविंग उपकरण नहीं देखे, उन्हें ऑक्सीजन रेगुलेटर और सिलेंडर के सहारे बाढ़ भरी सुरंगों से कैसे निकाला जाएगा? गुफा के बाहर परिवारों का जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं और बच्चे लगातार प्रार्थना करते रहे। छठे दिन मिली पहली बड़ी सफलता 27 मई को अभियान में बड़ी सफलता मिली। पांच खनिक गुफा के भीतर प्रवेश द्वार से करीब 300 मीटर दूर एक चट्टान पर बैठे मिले। वे भूखे, कमजोर और डिहाइड्रेटेड थे लेकिन होश में थे। एक खनिक ने कहा कि मां-पिता चिंता मत करो। मैं अभी मजबूत हूं। मैं घर वापस आऊंगा। थाई गोताखोर नोरासेद पलासिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब मदद पहुंच चुकी है। इसके बाद उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स, खाना, पानी और थर्मल कंबल दिए गए। हर सेकंड मौत का खतरा खनिकों को बाहर निकालना सबसे मुश्किल हिस्सा था। गोताखोरों को पूरी तरह अंधे पानी में केवल स्पर्श के सहारे रास्ता तय करना पड़ा। कई जगह ऑक्सीजन टैंक निकालकर शरीर को धक्का देकर सुरंग पार करनी पड़ी। घबराहट और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा। इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफान की चेतावनी भी जारी कर दी थी। डर था कि दोबारा बारिश हुई तो गुफा पूरी तरह डूब सकती है। आखिरकार बाहर निकले चार खनिक पानी लगातार पंप करके बाहर निकाला गया। जलस्तर घटने के बाद चार खनिक खुद बाहर निकलने में सफल रहे। वे कीचड़ से लथपथ थे और बाहर आते ही जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें ऑक्सीजन दी गई और थर्मल फॉइल कंबलों से ढका गया। ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर जोश रिचर्ड्स ने कहा कि मैं अंदर जाने के लिए वेटसूट पहन ही रहा था कि तभी वे खुद बाहर निकल आए। अभी भी दो खनिक लापता अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल के मुताबिक दो खनिक अब भी लापता हैं। जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे शायद गुफा में 500 मीटर और अंदर चले गए थे। थाई रेस्क्यू ग्रुप ‘मेट्टा थाम रेस्क्यू कलासिन’ के प्रमुख केंगकाज बोंगकावोंग ने कहा कि टीम अब और गहराई वाले हिस्से में खोज करेगी, लेकिन वह इलाका बेहद ज्यादा पानी से भरा और बेहद खतरनाक है। थाईलैंड और लाओस मिशन में बड़ा अंतर     लाओस मिशन                          थाईलैंड मिशन (2018)     7 खनिक फंसे                         13 बच्चे और कोच फंसे     5 मिले, 2 अब भी लापता             सभी सुरक्षित निकाले गए     अस्थिर सोने की खदान                प्राकृतिक गुफा     60 सेंटीमीटर तक संकरी सुरंगें       अपेक्षाकृत चौड़े रास्ते     जहरीली गैस का खतरा                गैस का बड़ा खतरा नहीं     आंशिक रूप से खुद बाहर निकले    पूरी तरह गोताखोरों पर निर्भर बचाव     प्रवेश द्वार से 300 मीटर दूर मिले    कई किलोमीटर अंदर फंसे थे दुनिया की नजर इस मिशन पर यह अभियान अब दुनिया के सबसे कठिन और खतरनाक गुफा बचाव अभियानों में गिना जा रहा है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और खतरा दोनों बढ़ रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर उन दो लापता खनिकों पर टिकी है, जिन तक पहुंचना शायद अब तक का सबसे मुश्किल चरण साबित हो सकता है।  

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों का स्वर्णिम कार्यकाल अभिनंदन योग्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के 12 वर्षों के स्वर्णिम कार्यकाल के लिए उनका अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्ग दर्शन में मध्यप्रदेश भी निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश के गठन के बाद यहां सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन हमारी सरकार ने जनहित को सर्वोपरि रखा और पिछले दो साल में ही प्रदेश को 7 नए मेडिकल कॉलेजों की सौगात मिल चुकी है। मध्यप्रदेश में शाजापुर जिले की अपनी एक अलग पहचान रही है। शुजालपुर के सुंदरसी का संबंध पुराने समय में सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ता है। शुजालपुर शाजापुर जिले की सबसे सक्षम और संपन्न तहसील है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, शुजालपुर में आयोजित कॉलेज चलो अभियान और प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया के शुभांरभ के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय तथा आयुष चिकित्सालय का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 388 करोड़ रुपये की लागत से 43 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। इसके साथ ही 70 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक महाविद्यालय, चिकित्सालय और 14 करोड़ 37 लाख की लागत से 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालय का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 4 सांदीपनि विद्यालयों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 122 करोड़ रुपये की लागत से माँ शारदा सांदीपनि विद्यालय, महाराणा प्रताप सांदीपनि विद्यालय, मिहिर भोज सांदीपनि विद्यालय और राजा भोज सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में 14 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 4 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण संपन्न हुआ। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुरू से ही मध्यप्रदेश संभावनाओं का प्रदेश था, लेकिन प्रदेश में 2002-03 तक केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर भूमि ही सिंचित थी। गांवों में किसानों को बिजली नहीं मिलती थी, पानी-बिजली-सड़क, हर व्यवस्था में गढ्ढे थे। हमारी सरकार ने सिंचाई का रकबा बढ़ाया है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम भी दिलवाया है। इसी वर्ष किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा गया। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। हम किसान कल्याण वर्ष की घोषणाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देश में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला जा चुका हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन के माध्यम से प्रदेश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रही है। राज्य के प्रत्येक गरीब, किसान, युवा और महिला सहित सभी वर्गों के जरूरतमंदों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। आज देशभर में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया हैं। यह गर्व का विषय है। आज उज्जैन से लेकर अयोध्या और धार की भोजशाला तक जयकारे गूंज रहे हैं। हमारी सरकार न्यायालय के निर्णय को लागू कराने की प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की गंगा प्रवाहमान है। नए मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज खुल रहे हैं। आगामी ढाई साल में प्रदेश के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए आज का दिन ऐतिहासिक उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि शुजालपुर शिक्षा की स्थली रही है। आज यहां से शाजापुर जिले को स्कूल शिक्षा और आयुष की बड़ी सौगात मिल रही है। शाजापुर को 4 नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया गया है। इनके नाम हमारे महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। प्रदेश में पिछले ढाई साल में 9 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। राज्य में नई सरकार बनने के बाद 11 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उज्जैन में आरंभ होगा शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय मंत्री  परमार ने कहा कि एक शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय उज्जैन में खोला जाएगा। नागरिकों के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज खोले गए हैं। युवाओं को कृषि की पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है। बच्चों को स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, जिसका परिणाम इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में देखने को मिला है। मंत्री  परमार ने शुजालपुर में सड़कों के चौड़ीकरण की आवश्यकता बताई तथा अन्य स्थानीय अपेक्षाओं से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया। मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर को मिलेगा सांसद  महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास के उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन मार्ग का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर और शुजालपुर के आसपास के क्षेत्र को भी मिलेगा। कार्यक्रम में शाजापुर जिले के प्रभारी मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, विधायक  घनश्याम चंद्रवंशी तथा  अरुण भीमावद, जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिसोदिया तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। शुजालपुर के लिये मुख्यमंत्री ने की घोषणाएँ              पुलिस चौकी शुजालपुर से व्हाया भीलखेड़ी, मेहरखेड़ी, कालापीपल का 2 लाइन रोड              शाजापुर बायपास – आष्टा रोड से पचोर रोड – शुजालपुर बायपास              अकोदिया में कॉलेज              गौलाना में बायपास रोड              गौलाना को नगर पंचायत बनायेंगे              शुजालपुर में सुरक्षा कर्मियो के लिए पुलिस आवास              शुजालपुर थाना मण्डी में बल के लिये विभिन्न श्रेणी के 50 बल वृद्धि करने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर में शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से निकलते हुए आम जनता से मिलने के लिए डेढ़ किमी लंबा रोड शो किया। इस अवसर पर अनेक सामाजिक संस्थाओं के द्वारा 50 से अधिक मंचों से मुख्यमंत्री का पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री … Read more

अंतरिम व्यापार समझौते की ओर बढ़े भारत-अमेरिका संबंध, टैरिफ और बाजार पहुंच पर फोकस

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, अब केवल इस डील पर ऑफिशियल मुहर लगनी बाकी है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी 1 जून से नई दिल्ली में चार दिनों तक बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Pact) को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर खास बातचीत भारत की तरफ से इस डील में नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करने वाले हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक में कई अहम विषयों पर बातचीत होगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-     बाजार पहुंच (Market Access)     गैर-शुल्क बाधाएं (Non-Tariff Measures)     सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा     निवेश प्रोत्साहन     आर्थिक सुरक्षा सहयोग     सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक साझेदारी दोनों देश पहले चरण के अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यापक व्यापार समझौते के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा करेंगे। फरवरी में बनी थी ट्रेड डील की रूपरेखा भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तय की थी। इसके तहत दोनों देशों ने चरणबद्ध तरीके से व्यापारिक बाधाएं कम करने और टैरिफ में राहत देने पर सहमति जताई थी। समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए शुल्कों में कटौती करने का आश्वासन दिया था। अमेरिका ने पहले भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाया था, जिसे घटाकर 18% करने की बात कही गई थी। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क को भी हटाने और शेष शुल्क को 18% तक सीमित करने का प्रस्ताव था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला समीकरण अमेरिका की घरेलू राजनीति और टैरिफ नीति में बदलाव के कारण वार्ताओं की दिशा प्रभावित हुई। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को चुनौती देने वाले मामले में फैसला सुनाया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% समान शुल्क लागू करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद फरवरी में प्रस्तावित भारत-अमेरिका वार्ता टल गई थी। ट्रेड डील पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अप्रैल 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन की यात्रा की और बात को आगे बढ़ाया। भारत की ओर से बड़े प्रस्ताव भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर शुल्क घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।     डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGs)     रेड सोरघम (पशु आहार)     ट्री नट्स     ताजे और प्रोसेस्ड फल     सोयाबीन तेल     वाइन और स्पिरिट्स इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने की इच्छा जताई है।     ऊर्जा उत्पाद     विमान और विमान कलपुर्जे     बहुमूल्य धातुएं     प्रौद्योगिकी उत्पाद     कोकिंग कोल विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार का मौजूदा परिदृश्य अमेरिका वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर सामने आया। भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पहुंच गया। अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर रहा। भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 40.89 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सभी देशों पर समान 10% शुल्क लागू किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा का नया माहौल बन गया है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों अपने-अपने हितों के हिसाब से समझौते की शर्तों में बदलाव कर सकते हैं।  

ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: ट्रंप ने सिचुएशन रूम में की अहम बैठक, नई शर्तें भेजीं

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच डील में अभी भी डोनाल्ड ट्रंप हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को सिचुएशन रूम में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ मीटिंग की थी। सूत्रों के मुताबिक यह मीटिंग करीब दो घंटे तक चली थी, लेकिन इसमें क्या हुआ, इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ईरान के साथ डील में कई शर्तों में बदलाव करना चाहते हैं। इसमें, होर्मुज और न्यूक्लियर मटीरियल से जुड़ी शर्तें शामिल हैं। बताया जाता है कि नई शर्तों को वापस ईरान के पास भेज दिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ एक बहुत अच्छे समझौते के करीब पहुंच रहा है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर लौट आएगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहाकि अगर आप जल्दबाजी करेंगे, तो आप कोई अच्छा समझौता नहीं कर पाएंगे। मुझे लगता है कि धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से हम वह पा रहे हैं जो हम चाहते हैं। अगर हमें वह नहीं मिला जो हम चाहते हैं, तो हम इसे एक अलग तरीके से खत्म करेंगे। ईरान का क्या कहना इस बीच, तस्नीम समाचार एजेंसी ने बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने रविवार सुबह देश के क्षेत्रीय जल क्षेत्र के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-1 प्रीडेटर मल्टी-रोल ड्रोन का पता लगाया और उसे मार गिराया। एजेंसी ने आईआरजीसी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि आज सुबह-सवेरे एक अमेरिकी सेना का एमक्यू1 ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में घुस आया था, लेकिन तुरंत उसका पता चल गया और आईआरजीसी के हवाई रक्षा प्रणाली से दागी गयीं मिसाइलों से उसे मार गिराया गया। क्यों आया था अमेरिकी ड्रोन एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण हरकतें करने के इरादे से घुसा था। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरा ल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गये थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किये । फिर अमेरिका और ईरान ने आठ अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की। शांति स्थापित करने को लेकर दोनों देशों ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत की, जो बेनतीजा रही और फिर से दुश्मनी शुरू होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। हालांकि, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी।

भीषण गर्मी पर पीएम मोदी की अपील: पानी पिएं, धूप से बचें और देसी शीतल पेयों को अपनाएं

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मन की बात रेडियो कार्यक्रम में देश के सामने अपनी बातों को रखा। पीएम मोदी ने शुरुआत 134वें एपिसोड की शुरुआत हाल ही में हुए नेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पटीशन से किया। उन्होंने इस दौरान एथलीट गुरिंदरवीर सिंह, अनिमेष कुजूर से बात की। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही झारखंड के रांची में हुए सीनियर एथलेटिक्स कॉम्पटीशन में करीब 800 एथलीट्स ने हिस्सा लिया। इसमें कुल मिलाकर चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे। पीएम ने कहा कि वह इन सभी एथलीट्स को इसके लिए बधाई देना चाहते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने दोनों एथलीट्स से बात की और उनकी जर्नी के बारे में जाना। पीएम ने गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर का जिक्र करते हुए कहा कि हमने संगीत में जुगलबंदी देखी है कि एक चुनौती दे और दूसरी उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले। लेकिन अनिमेष कजूर और गुरिंदरवीर सिंह ने एथलेटिक्स के क्षेत्र में ऐसा करके देश का नाम रोशन किया है। गर्मी को लेकर पीएम की देशवासियों से अपील प्रधानमंत्री मोदी ने देश में पड़ रही भीषण गर्मी को लेकर भी देश वासियों के सामने अपनी पुरानी अपील को दोहराया। उन्होंने कहा, "मेरे प्यारे देशवासियों, इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप, गर्म हवाएं चल रही हैं। ऐसे में मौसम में सभी को अपना ध्यान रखने की जरूरत है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलिए। सरकार ने देश भर के लिए जो गाइडलाइंस दी हैं। उनको भूलिएगा नहीं। पीएम मोदी ने कहा, साथियों हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार हमारी रसोइयों में भी मिल जाता है। आपने देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है। वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है। रसोई का प्रकार भी बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं आम उबलने लगता है और फिर शुरू होता है देशी पेय का दौर… देशी पेय से आप सभी भी परिचित होंगे। उत्तर भारत में आप जाएंगे तो आपको आम पन्न मिलेगा। कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत। पंजाब और हरियाणा में लस्सी मिल जाएगी। बड़े गिलास वाली लस्सी। राजस्थान और गुजरात में छाछ। बिहार झारखंड में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात कही क्या है। पेट भी भरे और ताकत भी दे। इसके बाद पीएम मोदी ने देश के अन्य हिस्सों के प्रमुख शीतल पेय पदार्थों का जिक्र करते हुए उन्हें भारत की एकता का परिचायक बताया। आमों की तमाम किस्मों की दी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में देश में पैदा होने वाली तमाम आम की किस्मों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "साथियों, गर्मी आते ही एक और चर्चा घर में शुरू हो जाती है और वह है आम की। आम, चर्चा का विषय होता ह। भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां गर्मियों में आम की बात न होती हो। हर इलाके में अपना आम और उसका अपना स्वाद होता है। अपनी खुशबू होती है। महाराष्ट्र के कोंकण में हापुस, अलफांसो, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। वैसे, लंगडा आम की खास बात यह होती है कि वह पकने के बाद भी हरे रंग का ही रहता है। बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में जा जाती है। चौसा और मालदा हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण भारत के बंगनपल्ली, तोतापरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा का भी जिक्र किया। नीदरलैंड्स से ताई तांबे की ऐतिहासिक प्लेट्स की बात प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यक्रम हालिया नार्डिक देशों की यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "प्यारे देशवासियों बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड्स जाने का अवसर मिला। वहाँ मैं कई बैठकों में शामिल हुआ। इसी दौरान ऐसा समय भी आया, जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड्स में आयोजित एक विशेष समारोह में चोल काल की प्राचीन ताम्र प्लेट्स भारत को वापस सौंपी गईं। उस कार्यक्रम में नीदरैंड्स के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। इन प्लेट्स को लेकर मुझे देश विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। सभी इनको लेकर खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय के लोग इससे उत्साहित हैं। खगोल विज्ञान में युवाओं की बढ़ रही रुचि प्रधानमंत्री मोदी ने इसके बाद युवाओं की खगोलशास्त्र में बढ़ती रुचि का भी जिक्र किया। उन्होंने जोर दिया कि प्राचीन काल से भी भारत में खगोल शास्त्र को लेकर विशेष दिलचस्पी रही है। अब इस दौर में भी युवा इसी तरफ मुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपने देखा होगा कि पिछले कुछ समय से देश में एस्ट्रोनॉमी क्ल्ब्स तेजी के साथ लोकप्रिय हो रहे हैं। खगोल मण्डल नाम की एक टीम ने 30 घंटेका एक बहुत इनेवेटिव कोर्स लॉन्च किया है।

वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल: SIR से लाखों नाम होंगे वेरिफाई, 3 महीने में आएगी फाइनल लिस्ट

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने SIR के तीसरे फेज का काम शुरू कर दिया है। वोटर ल‍िस्‍ट को अपडेट करने के ल‍िए बूथ लेवल पर वोटरों के वेर‍िफ‍िकेशन की प्रक्र‍िया शुरू कर दी गई है। वोटरों की डिटेल्‍स, प्रूफ करने वाले कागज और वोटर कार्ड जांचने का काम महीनेभर चलेगा। उसके हफ्तेभर बाद वोटर ल‍िस्‍ट का ड्राफ्ट जारी क‍िया जाएगा। यह कच्‍चा ल‍िस्‍ट होगा, इसमें फेरबदल हो सकेगा। जो लोग वोटर वेर‍िफ‍िकेशन में गलती से छूट जाएंगे, उन्‍हें ड्राफ्ट ल‍िस्‍ट से पता चल जाएगा और फ‍िर इसमें अपना नाम जुड़वाने के ल‍िए अपील कर सकेंगे। या फ‍िर कागज सही होने के बावजूद ज‍िन्‍हें वेर‍िफाई नहीं क‍िया जाएगा, वे लोग कंपलेन कर सकेंगे, प्रूफ दे सकेंगे। वोटरों को इसके ल‍िए एक महीने का समय दिया गया है। ऐसे ज‍ितने भी अपील होंगे, क्‍लेम होंगे, सबको दुबारा वेरिफाई क‍िया जाएगा और इसे एक महीने में कर ल‍िया जाएगा। यानी क्‍लेम‍ करने के ल‍िए वोटरों को एक महीने का समय और फ‍िर एक महीना कर्मचार‍ियों को द‍िया जाएगा दुबारा व‍ेर‍िफाई करने के ल‍िए। इसके बाद वोटरों की फाइनल ल‍िस्‍ट जारी कर दी जाएगी। यानी हर राज्‍य में तीन महीना और एक हफ्ता लग जाएगा। क‍िस राज्‍य में कब SIR, कब आएगी नई वोटर ल‍िस्‍ट ? 19 राज्‍यों और केंद्र शास‍ित प्रदेशों में 37.74 करोड़ वोटरों की गहन जांच और सत्‍यापन का काम द‍िसंबर में जाकर खत्‍म होगा। इन सभी राज्‍यों में एकसाथ SIR नहीं होगा, ग्रुप में होगा। 30 मई से ओडिशा और उत्‍तर पूर्व के तीन राज्‍यों स‍िक्किम, मण‍िपुर, म‍िजोरम में SIR शुरू हो चुका है और वहां 6 सितंबर को फाइनल ल‍िस्‍ट आ जाएगी। उत्‍तराखंड में 8 जून को SIR शुरू होगा, 15 स‍ितंबर को फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट आएगी। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हर‍ियाणा और चंडीगढ़ में 15 जून से शुरू होगा, फाइनल ल‍िस्‍ट आएगी 22 स‍ितंबर को। 25 जून से पंजाब और तंलंगाना में होगा, ल‍िस्‍ट आएगी 1 अक्‍टूबर को। द‍िल्‍ली, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, झारखंड और मेघालय में 30 जून से SIR होगा, 7 अक्‍टूबर को फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट आ जाएगी। नागालैंड में 16 अगस्‍त से, त्रिपुरा में 15 स‍ितंबर से SIR होगा। ल‍िस्‍ट आएगी 22 नवंबर और 23 द‍िसंबर को। SIR क्‍या होता है, क्‍यों जरूरी है? सभी लोगों का नाम वोटर ल‍िस्‍ट में होना चाह‍िए और कोई भी छूटना नहीं चाह‍िए। बशर्ते वह सही हो। बस यहीं शुरू हो जाती है स्‍क्रूटनी की ड्यूटी। पात्रता है क‍ि आप वोटर हों। क्‍या सभी लोग वोटर हैं? नहीं। भारत के नागर‍िक हों और कम से कम 18 साल के हों। 18 साल के होते ही आप खुद अप्‍लाई कर वोटर कार्ड बनवा सकते हैं। बस नागर‍िकता प्रूफ करने वाले मान्‍य कागज जमा करने होते हैं। फि‍र अलग से इतने बड़े स्‍तर पर अभियान क्‍यों? आप जहां के वोटर होते हैं उसी लोकेशन पर हमेशा नहीं रहते। आप जब दूसरी जगह श‍िफ्ट हो जाते हैं तो वहां के वोटर बन जाते हैं, वहां के वोटर ल‍िस्‍ट में आपका नाम जुड़ जाता है। पर कानून और न‍ियम होने के बावजूद अक्‍सर होता है क‍ि पुराने ल‍िस्‍ट में भी आपका नाम पड़ा रह जाए। बच्‍चे बड़े होते हैं, वोटर बनते हैं, और वोटर ल‍िस्‍ट में नए नाम जुड़ते चले जाते हैं। पर बुजुर्ग वोटर जब गुजर जाते हैं, या जो लोग असमय चले जाते हैं, उनका नाम भी वोटर ल‍िस्‍ट में पड़ा रह जाता है। ये तो हुए वाज‍िब और व्‍यावहार‍िक कारण। कई लोग जानबूझकर अलग-अलग जगहों के लिए वोटर कार्ड बनवा लेते हैं। क‍िसी पार्टी, नेता को वोट देकर ज‍िताने के चक्‍कर में या आइडेंटिटी कार्ड के ल‍िए। अलग-अलग आइडेंटिटी से सरकारी योजनाओं का ज्‍यादा फायदा लेने के लिए भी ऐसा क‍िया जाता है। एक और बड़ा मामला है, नागर‍िक नहीं हो और वोटर कार्ड बनवा ल‍िया हो। अभी सबसे बड़ा व‍िवाद का प्‍वाइंट यही है। एक से ज्‍यादा वोटर कार्ड और ब‍िना नागर‍िकता के वोटर कार्ड, दोनों कानूनन जुर्म हैं और ये डुप्लिकेट कार्ड की कैटेगरी मे आते हैं। ऐसा भी होता है क‍ि आपने वोटर कार्ड तो बनवा ल‍िया, पर क‍िसी कारण से उस क्षेत्र के वोटर ल‍िस्‍ट में आपका नाम नहीं जुड़ा हो। इस तरह चार कैटेगरी- ऐबसेंट, श‍िफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट के डेटा को अपडेट करना जरूरी हो जाता है और इसी एक्‍सरसाइज को SIR कहते हैं, स्‍पेशल इंटेंसिव र‍िवीजन सुप्रीम कोर्ट ने क्‍यों कहा क‍ि SIR सही है? संव‍िधान और चुनाव से जुड़े कानून चुनाव आयोग को SIR कराने का अध‍िकार देते हैं। क‍िसी क्षेत्र में वोटरोंं का बदलना बहुत सामान्‍य है और यह चुनाव आयोग की ड्यूटी है क‍ि सही वोटरों की पहचान सुन‍िश्‍च‍ित करे। इसके ल‍िए SIR की जो प्रक्र‍िया आयोग ने अपनाई, उस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है। चुनाव आयोग ने SIR को जरूरी बताते हुए कहा था क‍ि पिछले 20 वर्षों में तेजी से हुए शहरीकरण और पलायन के कारण वोटर ल‍िस्‍ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े गए, हटाए गए। एक वोटर का नाम एक से ज्‍यादा ल‍िस्‍ट में आने, दो वोटर कार्ड होने जैसी गड़बड़‍ियां बढ़ गई थी। हालांक‍ि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है क‍ि वोटर ल‍िस्‍ट से नाम कटने या नाम नहीं जुड़ने का यह मतलब नहीं क‍ि वह नागर‍िक नहीं है। चुनाव आयोग क‍िसी को नागर‍िक होने या न होने का सर्टिफ‍िकेट नहीं देता। SIR का इंपैक्‍ट स‍िर्फ वोटर ल‍िस्‍ट तक ही रहेगा। ज‍िनका नाम ल‍िस्‍ट से बाहर हुआ है, उसे आयोग अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दे और सही साबित होने पर उसे दोबारा शाम‍िल करना सुन‍िश्चित करे। बिहार में हुए SIR के ख‍िलाफ दायर केस में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। इससे मौजूदा SIR की प्रक्रि‍या और चुनाव आयोग को बल म‍िला है। जहां SIR, वहां कब हैं चुनाव? 2027 में 7 राज्‍यों में व‍िधानसभा चुनाव होंगे। पंजाब, उत्‍तराखंड, गोवा, मण‍िपुर में मार्च से पहले चुनाव होंगे, मई से पहले उत्‍तर प्रदेश में और द‍िसंबर से पहले गुजरात और ह‍िमाचल प्रदेश में। उत्‍तर प्रदेश में SIR हो चुका है, फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट अप्रैल में आ चुकी है। पंजाब, उत्‍तराखंड, मण‍िपुर में इसी फेज में SIR है। ह‍िमाचल प्रदेश में SIR बाकी है और अभी वाले शेड्यूल में नहीं है। वहां फरवरी 2027 में जनगणना पूरी … Read more

हीटवेव के बीच पीएम मोदी ने दिया स्वास्थ्य मंत्र, बोले- पानी पीते रहें और आम पन्ना-लस्सी का लें आनंद

नई दिल्ली  भारत के विभिन्न हिस्सों में तापमान में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे यथासंभव अधिक से अधिक सावधानियां बरतें। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ' मन की बात ' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में कहा, 'इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और गर्म हवाएं, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें। इस दिशा में सरकार के अलग-अलग विभागों ने जो गाइडलाइन जारी की हैं, वो भी भूलिएगा नहीं।' अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है। आपने भी देखा होगा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं और फिर देसी पेय का दौर शुरू होता है। उन्होंने कहा, 'भारत के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय देश के विभिन्न क्षेत्रों की रीति-रिवाजों और संस्कृतियों में गहराई से रचे-बसे हैं। हर पेय एक अनूठी कहानी कहता है, जो मिलकर भारत की जीवंत विविधता को प्रदर्शित करते हैं और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को सुदृढ़ करते हैं।' प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा, 'देसी पेय से आप भी परिचित हैं। अगर आप उत्तर भारत में जाएंगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत भी। पंजाब-हरियाणा जाइए तो बड़े गिलास वाली लस्सी मिल जाएगी। राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू के शरबत की बात है, जिससे पेट भी भरता है और ताकत भी मिलती है।' इस दौरान पीएम मोदी ने कोंकण और गोवा के कोकम शरबत, दक्षिण भारत के पानकम, सम्बारम और ओडिशा के बेल पना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ पेय नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है। देशवासियों के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए।

75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आया उल्कापिंड, न्यू इंग्लैंड में गूंजी जोरदार सोनिक बूम

 नई दिल्ली  शनिवार दोपहर पूर्वोत्तर अमेरिका के आसमान में एक विशाल उल्कापिंड के फटने से जोरदार धमाका हुआ। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विस्फोट से पैदा हुई सोनिक बूम की ताकत करीब 300 टन टीएनटी के बराबर थी। इस जोरदार आवाज और कंपन ने कई राज्यों के निवासियों को चौंका दिया। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 2:06 बजे हुई। चमकीला उल्कापिंड उत्तर-पूर्वी मैसाचुसेट्स और दक्षिण-पूर्वी न्यू हैम्पशायर के ऊपर आसमान में ही टूटकर बिखर गया। इसके फटने से इतनी तेज आवाज हुई कि पूरे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में गूंज सुनाई दी और कई इलाकों में इमारतें तक हिल गईं। नासा की डिप्टी न्यूज चीफ जेनिफर डोरेन ने कहा कि यह उल्कापिंड फिलहाल सक्रिय किसी भी उल्का बौछार का हिस्सा नहीं था। यह एक प्राकृतिक खगोलीय पिंड था, न कि अंतरिक्ष का कचरा या किसी सैटेलाइट के वापस धरती पर गिरने का मामला। इसके टूटने से करीब 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली, जिससे यह भयंकर आवाज पैदा हुई। 75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार नासा के आंकड़ों के मुताबिक, जब इस उल्कापिंड ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, तब इसकी रफ्तार करीब 1,20,700 किलोमीटर प्रति घंटा थी। जमीन से लगभग 64 किलोमीटर ऊपर आते ही यह भीषण दबाव के कारण टुकड़ों में बंट गया। अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी ने बताया कि यह खगोलीय चट्टान लगभग तीन फीट चौड़ी थी। इसने बोस्टन के उत्तर में, मैसाचुसेट्स और न्यू हैम्पशायर की सीमा के पास वायुमंडल में प्रवेश किया। इस घटना की गवाही देने वाले लोगों की रिपोर्ट दक्षिण में डेलावेयर से लेकर उत्तर में मॉन्ट्रियल तक से मिली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने दिन के उजाले में एक बेहद चमकदार आग का गोला देखने, तेज विस्फोट की आवाज सुनने और जमीन हिलने का दावा किया। आम उल्कापिंडों से काफी बड़ा था आकार अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी के प्रोग्राम मॉनिटर रॉबर्ट लंसफोर्ड ने कहा कि यह घटना आम तौर पर दिखने वाले उल्कापिंडों से बहुत बड़ी थी। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से एक सामान्य फायरबॉल से बड़ा था। लंसफोर्ड के अनुसार, इस बात की संभावना बहुत कम है कि इसका कोई भी हिस्सा जमीन तक पहुंचा हो। उन्होंने कहा कि यह जानने के लिए कि क्या इसका कोई टुकड़ा जमीन पर गिरा, हमें इसके रास्ते और गति की और अधिक जानकारी चाहिए होगी। लेकिन अगर यह पूरी तरह हवा में नहीं जला होगा, तो इसका मलबा समुद्र में गिरा होगा। वैसे, अधिकांश उल्कापिंड जमीन पर पहुंचने से पहले ही जलकर राख हो जाते हैं। सोनिक बूम था वजह विस्फोट की भयानक आवाज के बाद घबराए स्थानीय लोगों ने इमारतों के हिलने की शिकायत पुलिस और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे से की। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कई वीडियो में लगातार दो तेज धमाकों की आवाजें सुनी जा सकती हैं, हालांकि जमीन पर नुकसान या आग लगने का कोई निशान नहीं मिला। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने पुष्टि की कि उन्हें क्षेत्र भर के निवासियों से कई शिकायतें मिली हैं, क्या आपने इसे महसूस किया? हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि कोई भूकंपीय गतिविधि का पता नहीं चला, जिससे भूकंप को इस कंपन का कारण होने की संभावना से इनकार किया जा सकता है। नासा ने भी अंत में दोहराया कि यह महज एक प्राकृतिक अंतरिक्षीय घटना थी।

मिशन वात्सल्य की चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 बनी बच्चों की मजबूत ढाल, संकट में मिल रही तुरंत मदद

मिशन वात्सल्य की चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 बनी संकटग्रस्त बच्चों का सशक्त सुरक्षा कवच 24×7 मुस्तैदी: वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 हजार से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगभग ढाई साल के कार्यकाल में राज्य ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में संवेदनशीलता और गवर्नेंस के एक नये प्रतिमान स्थापित किये है। उनके नेतृत्व में 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' प्रदेश के संकटग्रस्त, शोषित और बेसहारा बच्चों के लिए एक बेहद सशक्त और अभेद्य सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 'मिशन वात्सल्य' योजना में चाइल्ड हेल्पलाइन 24 घंटे कार्य कर रही है। यह हेल्पलाइन प्रदेश में हजारों बच्चों को हिंसा, बाल श्रम और मानव तस्करी के चंगुल से छुड़ाकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित कर रही है। सरकार के इस प्रभावी कदम से न केवल संकट के समय बच्चों को आपातकालीन मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण भी मिल रहा है। इस हेल्पलाइन की व्यापकता और रिस्पॉन्स टाइम में अभूतपूर्व सुधार आया है, जिसका अंदाजा विभागीय आंकड़ों से साफ लगाया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन से रिकॉर्ड 30 हजार 810 संकटग्रस्त बच्चों को सहायता पहुंचाई गई। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी हेल्पलाइन की टीम पूरी मुस्तैदी से डटी हुई है, जहां महज़ 15 मई तक ही 4 हजार 376 बच्चों तक त्वरित मदद पहुंचाई जा चुकी है। अब तक 2 हजार 367 मामलों का पूरी तरह से निराकरण किया जा चुका है, जबकि शेष बचे मामलों में जिला स्तर पर फॉलो-अप कार्रवाई तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति 'मिशन वात्सल्य' के अंतर्गत नए स्वरूप में संचालित इस हेल्पलाइन को और अधिक हाईटेक और चुस्त रिस्पॉन्स सिस्टम से लैस किया गया है। हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स को उनकी गंभीरता के आधार पर 2 हिस्सों में बांटा जाता है। कोई बच्चा किसी गंभीर या तत्काल खतरे में होता है, तो मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति में उस आपातकालीन मामले को तुरंत 'रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम' यानी आरएसएस-112 को ट्रांसफर किया जाता है, जिससे गृह विभाग और पुलिस की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच सके। गैर-आपातकालीन मामलों को संबंधित जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को प्रेषित किया जाता है। इस हेल्पलाइन से प्रदेश के बच्चों को केवल रेस्क्यू ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें समुचित सुरक्षा दी जा रही है। इसमें बच्चों को हिंसा और शोषण से बचाना, उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना, मानसिक एवं सामाजिक परामर्श उपलब्ध कराना, बाल श्रम से मुक्ति और सबसे महत्वपूर्ण—लापता बच्चों का उनके परिवारों से पुनर्मिलन कराना शामिल है। बेघर हुए या मानव तस्करी के शिकार बच्चों के लिए यह हेल्पलाइन एक नई जिंदगी की शुरुआत साबित हो रही है। इन शहरों में दिखा सबसे ज्यादा असर प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और सतना जैसे बड़े जिलों में हेल्पलाइन का नेटवर्क सबसे ज्यादा सक्रिय रहा है और यहां बड़ी संख्या में बच्चों को रेस्क्यू किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि हमारा उद्देश्य केवल आपातकालीन सहायता देना नहीं, बल्कि हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। विभाग ने मध्यप्रदेश के सभी जागरूक नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग और ग्रामीणों से अपील की है कि वे सूबे के बच्चों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं। प्रदेश के किसी भी कोने में यदि कोई बच्चा संकट में, बाल विवाह का शिकार, बाल श्रम करता हुआ या किसी भी प्रकार के शोषण से पीड़ित दिखाई दे, तो मूकदर्शक न बनें। राज्य सरकार की 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' पर तुरंत इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते मध्यप्रदेश के हर मासूम का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल बनाया जा सके।