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भारत का दिल है मध्यप्रदेश, हम निवेशकों के दिल में जगह बनाने आए हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश है निवेशकों का भरोसेमंद साथी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत का दिल है मध्यप्रदेश, हम निवेशकों के दिल में जगह बनाने आए हैं दुबई से हमारा सहज स्वाभाविक संबंध, मध्यप्रदेश अवसरों की सौगात लिए साथ खड़ा है दुबई में एआईएम कांग्रेस में हुआ इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन : मध्यप्रदेश सत्र भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दुबई से हमारे सहज और स्वाभाविक संबंध हैं। हम दुबई के भरोसेमंद साथी हैं और संभावनाओं और अवसरों की सौगात लेकर दुबई के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अतुल्य भारत का दिल है और हम दुबई के सभी निवेशकों के दिल में जगह बनाने आए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बेहद पारदर्शी और निवेशक अनुकूल हैं। हमारी नीति, नीयत, नेतृत्व और पूरी सरकार निवेशकों के स्वागत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि निवेशक बिना किसी संकोच के मध्यप्रदेश में निवेश करें। हमारी सरकार आपको कभी भी निराश नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) प्रवास के दूसरे दिन दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर में हो रही एआईएम कांग्रेस-2026 के दौरान विशेष रूप से आयोजित 'इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन : मध्यप्रदेश' सत्र को संबोधित कर रहे थे। सत्र में यूएई के फॉरेन ट्रेड मिनिस्टर डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी, यूएई में भारत के उच्चायुक्त डॉ. दीपक मित्तल सहित बड़ी संख्या में देश-विदेश के उद्योगपति, इन्वेस्टर्स और इंडस्ट्री पार्टनर उपस्थित थे। सत्र के दौरान मध्यप्रदेश में हो रही औद्योगिक प्रगति, यहां की खूबियों, निवेश अवसरों और अनंत संभावनाओं पर केंद्रित एक ऑडियो-वीडियो फिल्म (एवी) का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुबई वैश्विक निवेश और नवाचार का केंद्र है। मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है कि आज वैश्विक साझेदारी, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग, मजबूत और समृद्ध भविष्य का साझा रोडमैप एआईएम कांग्रेस के इस बड़े प्लेटफॉर्म पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश देश-विदेश के सभी निवेशकों को दीर्घकालिक और विश्वस्तरीय साझेदारी के लिए नये अवसर उपलब्ध करा रहा है। भारत के सभी राज्यों में विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के बीच मध्यप्रदेश उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो अपनी पारदर्शी नीतियों और आकर्षक योजनाओं के आधार पर औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। दुनिया में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए गंतव्यों की तलाश चल रही है। ऐसे समय में मध्यप्रदेश निवेशकों और उद्योग समूहों को सभी सुगम अवसर उपलब्ध करा रहा है। नीति, नीयत और निवेश में मध्यप्रदेश ने निवेशकों का दिल जीता है। मध्यप्रदेश, देश का वह प्रदेश है, जिसने निवेशकों को आगे बढ़ने के लिए अवसर वर्तमान के सभी सेक्टर्स में अवसर उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रचुर प्राकृतिक और कुशल मानव संसाधन हैं। मध्यप्रदेश ने अपनी उद्योग अनुकूल नीतियों, तेजी से विकसित हो रही औद्योगिक अधोसंरचनाओं और दिनों-दिन बढ़ती अर्थव्यवस्था से देश में अपना एक अलग ही स्थान बनाया है। मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी अन्य राज्यों से बेहतर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का हृदय प्रदेश है, जिसकी कनेक्टिविटी देश के सभी राज्यों से बेहतर है। मध्यप्रदेश 24 घंटे माल परिवहन की सुविधा प्रदान करता है। एक्सपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए राज्य सदैव अनुकूल है। देश में प्रमुख औद्योगिक केंद्र और बाजार तक पहुंच है, दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर, रेल नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर आदि सुविधाओं के कारण मध्यप्रदेश का विशेष स्थान बना है। कृषि, उद्योग, सेवाएं, नई औद्योगिक आधारित अर्थव्यवस्थाओं का केंद्र है। मध्यप्रदेश भारत के अग्रणी कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है। जहां की उत्पादकता, अनुकूलता, फूड प्रोसेसिंग के आधार पर हमें वैश्विक खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर सबसे तेजी से उभरता क्षेत्र है। इस सेक्टर में मध्यप्रदेश अब केवल प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ा उद्योग हमारी समृद्ध औद्योगिक विरासत और आधुनिक औद्योगिक क्षमता का अनूठा संगम बन गया है। चंदेरी, महेश्वरी आदि वस्त्रों के लेकर आधुनिक वस्त्र निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर अवसर हैं। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फॉर्मास्यूटिकल और एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग हमारे राज्य को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीथमपुर, मंडीदीप जैसे औद्योगिक केंद्र राष्ट्रीय कंपनियों के पसंदीदा केंद्र बने हुए हैं। पारम्परिक उद्योगों सहित आज मध्यप्रदेश की नई पीढ़ी को भी आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए आगे बढ़कर भविष्य के व्यापार-व्यवसाय करने के लिए तैयार हैं। दूरसंचार निर्माण, डिजिटल मैन्यूफैक्चरिंग, ऑप्टिकल फाइबर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के हिसाब से हम मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं। हम जानते है कि निवेश सिर्फ संसाधन और अवसरों को देखने से ही नहीं आता, इसके लिए भरोसे की भी जरूरत होती है। मध्यप्रदेश निवेशकों का वो भरोसेमंद साथी है, जहां नीतियां सरल और पारदर्शी हैं, पर्याप्त संसाधन हैं और आपके उद्योगों-कारखानों के लिए आधुनिक संरचनाएं भी उपलब्ध हैं। हमारी सरकार निवेशकों के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश कृषि, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल्स, फॉर्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, रिन्युएबल एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और व्यापार की अपार संभावनाओं वाला राज्य है। राज्य को सभी क्षेत्रों में आगे लाकर यहां निवेश बढ़ाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत भविष्य की संभावनाओं वाला देश बन रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के कालखंड में भारत सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्था वाला देश बना है, दुबई और अन्य सभी खाड़ी देशों से हमारे अच्छे संबंध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संवाद सत्र के आयोजन के लिए यूएई ऑफिशियल्स के प्रयासों की सराहना की। म.प्र. में भरपूर है प्राकृतिक संसाधन और स्किल्ड मैन पॉवर : डॉ. थानी यूएई के फॉरेन ट्रेड मिनिस्टर डॉ. थानी ने कहा कि जुलाई 2025 में यूएई और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार और व्यवसाय में सहयोग बढ़ाने पर अहम चर्चा हुई थी। भारत अर्थव्यवस्था की दृष्टि से हमारा एक पुराना और महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। पिछले साल भारत और यूएई का द्विपक्षीय तेल व्यापार 100 बिलियन डॉलर रहा। दोनों देश मिलकर द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके साथ निवेश और नागरिकों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बना रहे … Read more

CM यादव की तातारस्तान के प्रमुख रुस्तम मिन्निखानोव से मुलाकात, MP-रूस के बीच सहयोग को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तातारस्तान के प्रमुख एच.ई. रुस्तम मिन्निखानोव से की मुलाकात दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में मुख्यमंत्री ने की शिरकत मध्यप्रदेश और रूसी गणराज्य तातारस्तान के बीच B2B और G2G सहयोग को मिलेगा नया आयाम एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी में संयुक्त निवेश पर बनी सहमति तातारस्तान ने मध्यप्रदेश प्रतिनिधिमंडल को टाइम: रूस–भारत फोरम में सहभागिता के लिये किया आमंत्रित आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-27 के लिए दिया आमंत्रण भोपाल  दुबई विजिट- दूसरा दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने रूसी गणराज्य तातारस्तान के प्रमुख (रईस) महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश और तातारस्तान के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को प्रगाढ़ करना, सेक्टर-विशिष्ट रणनीतिक साझेदारियों की पहचान करना तथा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 (GIS) में तातारस्तान की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव को मध्यप्रदेश की समृद्ध औद्योगिक क्षमताओं और निवेश अनुकूल वातावरण से अवगत कराते हुए आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सम्मिलित होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। तातारस्तान के प्रमुख ने इस निमंत्रण का स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि वे एक सशक्त निवेशक प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ समिट में भाग लेंगे तथा राज्य में निवेश की ठोस संभावनाओं को आगे बढ़ाएंगे। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, कृषि एवं इनोवेशन-आधारित आधुनिक तकनीकों में सहयोग पर विस्तृत विमर्श हुआ। भारत और तातारस्तान के प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश के साथ बीटूबी और जीटूजी स्तर पर दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। तातारस्तान की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और राज्य के व्यापारिक प्रतिनिधियों को “टाइम: रूस–भारत” फोरम तथा संबंधित प्रदर्शनी में सहभागिता के लिये आमंत्रित किया गया। बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय बिजनेस मिशन आयोजित करने, संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को धरातल पर उतारने और त्वरित समन्वय के लिए अधिकृत नोडल ऑफिसर्स को नामित करने पर भी सहमति व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी से की वन-टू-वन मीटिंग मध्यप्रदेश में निवेश के लिए किया आमंत्रित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी के साथ उच्च स्तरीय वन-टू-वन बैठक की। बैठक में दोनों पक्षों के बीच भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (India-UAE CEPA) के तहत गैर-तेल व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला और सीमा-पार निवेश को गति देने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। मध्यप्रदेश को यूएई निवेशकों के पसंदीदा गंतव्य के रूप में किया पेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश के निवेश अवसरों और आदर्श निवेश गंतव्य की विशेषताओं से अवगत कराया, जिनमें रणनीतिक केंद्रीय अवस्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, उपलब्ध औद्योगिक भूमि और स्थापित अवसंरचना को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख बाजारों तक सीधी और सुगम पहुंच प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों और सिंगल विंडो सुविधा का उल्लेख करते हुए यूएई निवेशकों को समयबद्ध राज्य-स्तरीय सहायता का पूर्ण भरोसा दिलाया। प्राथमिकता वाले सेक्टर्स और खाद्य प्रसंस्करण में साझेदारी का आह्वान बैठक में मध्यप्रदेश में निवेश के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई, जिनमें विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, नवकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्मार्ट विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूड पार्क, मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर, कोल्ड चेन, हरित ऊर्जा और निर्यात प्लेटफॉर्म्स के विकास में यूएई की सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए दिया न्योता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाले आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण दिया। यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री ने इस आमंत्रण को स्वीकारते हुए आश्वस्त किया कि वे यूएई के प्रमुख निवेशकों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ सहभागिता करेंगे। अगला कदम: 3 माह में समीक्षा और नोडल ऑफिसर की नियुक्ति द्विपक्षीय संबंधों और औद्योगिक साझेदारी को व्यावहारिक रूप देने के लिए 5 से 10 क्रियान्वयन-तैयार परियोजनाओं की पहचान करने और संयुक्त समीक्षा व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति बनी। इसके तहत 'मध्यप्रदेश-यूएई इन्वेस्टमेंट राउंड टेबल' का आयोजन किया जाएगा तथा चयनित परियोजनाओं के लिए समर्पित नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जिनकी पहली प्रगति समीक्षा तीन माह के भीतर सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व बैंक के उपाध्यक्ष से की उच्च स्तरीय बैठक प्रदेश में एआई परियोजनाओं के लिए फंडिंग पर हुआ संवाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'एआईएम कांग्रेस-2026' सम्मेलन के दौरान विश्व बैंक के डिजिटल एवं एआई (Digital and AI) मामलों के वाइस प्रेसिडेंट सांगबु किम तथा उनकी टीम के साथ बैठक की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच मध्यप्रदेश में डिजिटल और तकनीकी विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद में विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार की नीतियों के तहत संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल गवर्नेंस से संबंधित परियोजनाओं में फंडिंग और वित्तीय सहयोग देने में रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में उभरती तकनीकों, नवाचार और निवेश के अनुकूल वातावरण की जानकारी साझा करते हुए राज्य के विकास में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री निवेश की संभावनाओं पर हुई बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दुबई स्थित अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्रालय में यूएई कैबिनेट सदस्य एवं अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एचई अल मर्री को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' (GIS) में सहभागिता के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने आश्वस्त किया कि होटल एवं हॉस्पिटैलिटी इंवेस्टमेंट के क्षेत्र में संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए दुबई से एक विशेष निवेश प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मध्यप्रदेश का दौरा करेगा। प्रमुख क्षेत्रों में निवेश और नीतिगत सहयोग पर गहन विमर्श उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान दोनों पक्षों … Read more

‘शादी के बाद सहमति की जरूरत नहीं?’ 12 साल पुरानी याचिका से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मैरिटल रेप का मुद्दा

नई दिल्ली करीब 12 साल पहले एक शादीशुदा महिला अदालत पहुंची. उसका आरोप था कि उसका पति उसकी इच्छा के खिलाफ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता है. लेकिन जब उसने न्याय की मांग की तो उसके सामने एक कानूनी दीवार खड़ी हो गई. कानून कह रहा था कि अगर ऐसा काम पति ने अपनी पत्नी के साथ किया है, तो उसे बलात्कार (Rape) नहीं माना जाएगा. यहीं से शुरू हुई बहस दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की नई तारीख तय करने से फिलहाल इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि पहले केंद्र सरकार का पक्ष रिकॉर्ड पर आने दें. लेकिन कोर्ट की अगली तारीख आने से पहले बड़ा सवाल यह है कि आखिर Marital Rape पर बहस खत्म क्यों नहीं हो रही? क्यों यह मुद्दा हर कुछ साल बाद फिर देश के सामने खड़ा हो जाता है?  दिल्ली हाईकोर्ट के जजों का फैसला भी बंटा था इन सवालों का जवाब जानने से पहले एक चौंकाने वाला तथ्य समझिए भारत में अगर कोई पुरुष किसी महिला की इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह बलात्कार हो सकता है. लेकिन यदि वही महिला उसकी पत्नी है, तो भारतीय कानून में लंबे समय से एक अपवाद (Exception) मौजूद रहा है. यही "Marital Rape Exception" है, जिस पर पूरी लड़ाई टिकी हुई है. याचिकाकर्ताओं का सवाल है कि "अगर सहमति ही रेप और सेक्स के बीच का फर्क है, तो शादी के बाद सहमति की अहमियत कैसे खत्म हो सकती है?" इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जज भी एक राय नहीं बना पाए.  मार्च 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर विभाजित फैसला दिया. एक जज ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद संविधान के खिलाफ है. लेकिन दूसरे जज इससे सहमत नहीं थे।  जाहिर है कि अदालत के भीतर भी मतभेद था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. यहीं से साफ हो गया कि यह केवल कानून का मसला नहीं, बल्कि समाज और संविधान के बीच टकरा रहे दो विचारों का सवाल है. जो Marital Rape को अपराध बनाने की मांग कर रहे हैं, वे क्या कहते हैं? पक्ष में लोग ये तर्क देते हैं     शादी किसी महिला की शारीरिक स्वायत्तता खत्म नहीं करती.     संविधान सभी महिलाओं को समान सुरक्षा देता है.     सहमति (Consent) हर रिश्ते में जरूरी है.     पत्नी को कानून में कम सुरक्षा देना समानता के अधिकार के खिलाफ है. और विरोध करने वाले क्या कहते हैं?     दूसरा पक्ष कई चिंताएं उठाता है:     विवाह संस्था पर असर पड़ सकता है.     झूठे मामलों की आशंका बढ़ सकती है.     पति-पत्नी के निजी विवाद आपराधिक मुकदमों में बदल सकते हैं. 29 फीसदी महिलाएं हुई हैं शिकार भारत में Marital Rape के अलग अपराध का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, इसलिए NCRB के पास इसका सीधा डेटा मौजूद नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शादीशुदा महिलाओं के खिलाफ यौन या शारीरिक हिंसा का कोई अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट बताती है कि 18 से 49 वर्ष की आयु की करीब 29 फीसदी विवाहित महिलाओं ने अपने जीवन में कभी न कभी पति द्वारा शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा झेलने की बात कही. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिन महिलाओं ने यौन हिंसा की शिकायत की, उनमें अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं बल्कि उनका अपना पति था. यही आंकड़े बताते हैं कि Marital Rape पर बहस अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे वर्षों से मौजूद एक सामाजिक वास्तविकता है, जिस पर अब कानूनी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।  दूसरी तरफ कानून की किताब में ऐसे मामलों को अलग अपराध की श्रेणी नहीं मिली हुई है. यही विरोधाभास इस पूरी बहस का केंद्र है. सुप्रीम कोर्ट के सामने भी मूल प्रश्न यही है कि अगर किसी महिला की सहमति के बिना सेक्स अपराध हो सकता है, तो क्या विवाह उस सहमति को स्थायी रूप से मान लेने का आधार बन सकता है? घर की चारदीवारी के भीतर भी होती है हिंसा अगर NCRB के व्यापक आंकड़ों को देखें तो भी एक तस्वीर सामने आती है. महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में हर साल सबसे बड़ी हिस्सेदारी 'पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता' (IPC 498A) से जुड़े मामलों की रहती है।  दूसरे शब्दों में कहें तो महिलाओं के लिए खतरा हमेशा सुनसान सड़क या किसी अजनबी से नहीं जुड़ा होता, कई बार वह उसी व्यक्ति से जुड़ा होता है जिसके साथ वह अपना जीवन साझा कर रही होती है।  यही वजह है कि Marital Rape की बहस केवल कानून की व्याख्या तक सीमित नहीं रह जाती. यह बहस उस बुनियादी प्रश्न में बदल जाती है कि भारतीय समाज विवाह को कैसे देखता है. यह भारतीय समाज की उस सोच से जुड़ा है जहां शादी को कभी अधिकार, कभी जिम्मेदारी और कभी पवित्र संस्था के रूप में देखा जाता है. लेकिन नई पीढ़ी एक अलग सवाल पूछ रही है कि "क्या किसी भी रिश्ते में, चाहे वह शादी ही क्यों न हो, सहमति से बड़ा कुछ हो सकता है?" शायद इसी सवाल का जवाब आने वाले वर्षों में भारत के कानून और समाज दोनों को तलाशना होगा। 

सब्जी-चाय वालों पर मंडराया QR बंद होने का खतरा! 15 सितंबर तक Re-KYC जरूरी, लाखों छोटे कारोबारी परेशान

नई दिल्ली भारत में डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की दुकान हो, सब्जी मंडी हो या गली-मोहल्ले की किराना दुकान, हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान आम बात है. लेकिन अब एक ऐसी डेडलाइन सामने आई है, जिसने लाखों छोटे कारोबारियों और उनके ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है।  RBI के नियमों के तहत मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. उद्योग जगत का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का सत्यापन तय समय तक पूरा नहीं हो पाया, तो उनके QR कोड आधारित भुगतान प्रभावित हो सकते हैं।  क्या है पूरा मामला? रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार मर्चेंट्स को समय-समय पर अपनी KYC जानकारी अपडेट करनी होती है. मौजूदा समयसीमा के तहत 15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी करना जरूरी है. पेमेंट एग्रीगेटर और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि लाखों छोटे कारोबारियों का सत्यापन अभी बाकी है. इसी वजह से इंडस्ट्री ने RBI से समयसीमा बढ़ाने की मांग भी की है।  आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है? अगर किसी दुकानदार की री-केवाईसी समय पर पूरी नहीं होती और उसका QR कोड प्रभावित होता है, तो ग्राहकों को भुगतान में परेशानी हो सकती है. मान लीजिए आप सब्जी खरीदने पहुंचे और दुकानदार का QR कोड काम नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में UPI से भुगतान संभव नहीं होगा. तब आपको नकद भुगतान करना पड़ सकता है या फिर सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने जैसे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं. हालांकि इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं वाले इलाकों में परेशानी ज्यादा दिखाई दे सकती है।  कितने कारोबारी हो सकते हैं प्रभावित? इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है. करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता इस डेडलाइन से प्रभावित हो सकते हैं. वहीं लगभग 10 लाख छोटे कारोबारियों को जोखिम के दायरे में माना जा रहा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि तय समय तक करीब 80 फीसदी वेरिफिकेशन ही पूरा हो पाएगा. यही वजह है कि पेमेंट कंपनियां RBI से अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही हैं।  क्या रुक जाएगा डिजिटल पेमेंट सिस्टम? इस पूरे मामले को लेकर सबसे जरूरी बात है कि इससे देश का डिजिटल पेमेंट सिस्टम बंद नहीं होने वाला है. भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और बड़े कारोबारियों के भुगतान सिस्टम सामान्य रूप से चलते रहेंगे. चिंता मुख्य रूप से उन छोटे व्यापारियों को लेकर है, जिनका कारोबार QR कोड आधारित भुगतान पर काफी हद तक निर्भर है. अगर ऐसे कारोबारियों के QR कोड प्रभावित होते हैं, तो उनकी बिक्री और ग्राहकों की सुविधा दोनों पर असर पड़ सकता है।  क्या ग्राहकों को कैश रखना चाहिए? फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. इंडस्ट्री लगातार समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही है और बाजार की नजर RBI के अगले कदम पर टिकी हुई है. हालांकि एहतियात के तौर पर अगर आप छोटे बाजारों, मंडियों या रेहड़ी-पटरी वाले इलाकों में खरीदारी करते हैं, तो कुछ नकद राशि साथ रखना उपयोगी हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि RBI 15 सितंबर की समयसीमा को बरकरार रखता है या फिर इंडस्ट्री को कुछ और राहत देता है. लाखों छोटे कारोबारियों की नजर फिलहाल इसी फैसले पर टिकी हुई है। 

बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में आजमाएगी BJP? तावड़े ने मिशन-2027 के लिए कसी कमर

   लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान मिशन-2027 के लिए पार्टी के रणनीतिक खाके यानी ब्लूप्रिंट की नींव रखी. बिना किसी भारी तामझाम और सादगी के साथ लखनऊ पहुंचे तावड़े ने जीत की हैट्रिक लगाने के लिए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने से लेकर नैरेटिव सेट करने तक कई अहम दिशा-निर्देश दिए।  बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को परखा. इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उप-मुख्यमंत्रियों से मुलाकात और बातचीत भी की. इसके अलावा संगठन के लोगों के साथ मंथन कर सारा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।  विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए टारगेट दिया. उन्होंने कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा, कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए और उसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएं. इसके साथ ही उन्होंने सभी जातियों को साधने का मंत्र भी दिया और कहा कि संख्या चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन कोई जाति छूट न जाए, हमें सबको जोड़ना होगा।  यूपी फतह का खाका खींच गए तावड़े बिहार चुनावों में एनडीए के चुनावी प्रबंधन और तालमेल के सफल फार्मूले को यूपी की जमीन पर उतारने का काम तावड़े ने शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के बीजेपी प्रभारी बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 2027 का विधानसभा चुनाव मजबूत संगठन के बलबूते और पीएम मोदी व सीएम योगी के नाम और काम पर लड़ने के संकेत दिएच इस तरह सरकार और संगठन दोनों के साथ समन्वय बनाकर 2027 के चुनाव में उतरने का खाका खींच गए।  विनोद तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद दिनभर पार्टी दफ्तर में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने प्रदेश के महामंत्रियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक की. बीजेपी संगठन के नेताओं से मुलाकात के दौरान विनोद तावड़े ने साफ कहा कि बूथ की मजबूती ही 2027 के चुनाव की जीत का आधार बनेगी।  तावड़े ने पदाधिकारियों से कहा कि वे हर बूथ के अनुसार कार्ययोजना बनाएं. किस बूथ पर जीत की क्या स्थिति है, इसकी ठीक से समीक्षा करें. इसके अलावा जहां कमी नजर आए, उसे दुरुस्त करें. इस तरह हारी हुई बूथों को चिह्नित करते हुए वहां पार्टी को मजबूत करने के निर्देश भी दिए।  सपा के पीडीए का काउंटर प्लान तैयार अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की काट के लिए तावड़े ने 'परफॉर्मेटिव नैरेटिव' पेश किया. उन्होंने सपा के पीडीए पर तंज कसते हुए इसे 'पराया धन अपना' करार दिया और जमीन पर अवैध कब्जे तथा महिला सुरक्षा (स्त्रीधन) जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को घेरने का संकेत दिया. इसके साथ ही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का खाका भी खींचा।  तावड़े ने कहा कि हमें सभी वर्गों का साथ चाहिए, ऐसी कोई भी जाति न हो जो अछूती रह जाए. यूपी बड़ा प्रदेश है और हर क्षेत्र में अलग-अलग जातियों का प्रभाव है. यदि किसी जाति के वोटरों की संख्या कम है, तो भी हमें उसे छोड़ना नहीं है, उनसे संपर्क करके उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास करना है. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष की तैयारी पर नजर रखकर अपनी रणनीति बनाने की नसीहत दी।  विपक्ष के प्रत्याशी का तोड़ तलाशने का टास्क बीजेपी प्रभारी ने कहा कि विपक्षी तैयारियों पर हमें पूरी नजर रखनी होगी. विपक्ष का कोई नेता या प्रत्याशी मजबूत है, तो उसकी मजबूती का आधार पता करना होगा और फिर उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करके मजबूत होना होगा. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के मजबूत प्रत्याशियों पर खास नजर रखने और उनका तोड़ निकालने के लिए कहा है. इसका यह संदेश भी है कि यदि विपक्ष के मजबूत प्रत्याशी को अपने पाले में लाकर जीत मिलती है, तो आखिर में यह भी एक विकल्प हो सकता है।  बीजेपी संगठन को निर्देश दिए गए कि 2022 के चुनाव में गंवाई गई 57 सीटों और एनडीए की हारी हुई 130 सीटों की गहन समीक्षा की जाए और बूथ स्तर पर शक्ति केंद्रों में युवाओं को जोड़ा जाए. इस तरह से विनोद तावड़े 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की हैट्रिक लगाने ही नहीं, बल्कि बिहार की तरह क्लीन स्वीप करने का प्लान बना रहे हैं।  वीआईपी कल्चर से दूरी बनाकर दिया संदेश बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद विनोद तावड़े ने उत्तर प्रदेश आने से पहले ही साफ कर दिया था कि उनके स्वागत की एक भी होर्डिंग शहर में नहीं लगनी चाहिए और न ही उनका नाम दिखाई देना चाहिए. ऐसे में जिन लोगों ने विनोद तावड़े के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाए थे, उन्हें रातों-रात उन्हीं लोगों ने हटा लिया।  अब विनोद तावड़े ने नया मंत्र दिया और पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लखनऊ में समय बिताने के बजाय अपने-अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्रों में जाएं, रात को वहीं प्रवास करें और स्वागत-सत्कार के चक्कर में न पड़ें. मार्च 2027 तक, यानी विधानसभा चुनाव होने तक सभी पदाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और चुनावी अभियानों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।  संगठन-सरकार के साथ मजबूत समन्वय प्रदेश प्रभारी तावड़े ने भाजपा के सभी प्रदेश मोर्चों के अध्यक्षों से भी संवाद किया. इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यसमिति बनाएं. सूत्रों के अनुसार हफ्तेभर के अंदर कार्यकारिणी गठित करने के लिए उन्होंने कहा है. यह भी कहा गया कि जब कार्यकारिणी गठित हो जाए, तो उन्हें आगे का टारगेट दिया जाएगा जिसे पूरा करने के लिए सभी को मिलकर जुटना होगा।  तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार उन्होंने सरकार के कामकाज की जानकारी ली और कल्याणकारी योजनाओं पर बात की. सरकार और संगठन में समन्वय के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।  सीएम के साथ बैठक में संगठन के सहयोग से सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और विकास को मुद्दा बनाने पर सहमति बनी. इससे पहले उन्होंने शनिवार … Read more

छत्तीसगढ़ से जुड़ेंगे 3 बड़े राज्य, रायपुर-रांची दूरी होगी महज 7 घंटे; बिलासपुर समेत कई शहरों को फायदा

रायपुर  रायपुर से रांची और धनबाद तक का सफर अब आसान होने वाला है. क्योंकि छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बन रहा रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के बीच गेंमचेंचर होने वाला है. इसके बनने के बाद रायपुर से रांची का सफर महज 7 घंटे में पूरा हो जाएगा. जबकि रायपुर से धनबाद का सफर भी 8 से 9 घंटे के बीच में पूरा हो जाएगा. इस हाईवे के बनने से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों से और तेज हो जाएगी. 707 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का काम अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के लिहाज से यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है. क्योंकि इससे न केवल पश्चिम की तरफ रोड कनेक्टिविटी मजबूत होगी. बल्कि ईधन और समय की भी अच्छी बचत होनी शुरू हो जाएगी।  रायपुर से रांची 7 घंटे में  रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर (EC-07) के बनने के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और झारखंड की राजधानी रांची के बीच सफर आसान हो जाएगा. अभी दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में 13 से 14 घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि टू-लेन रास्तों से होकर जाना पड़ता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर 7 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. वहीं दोनों शहरों के बीच 30 किलोमीटर तक का फर्क आएगा।  रायपुर से धनबाद का सफर 9 घंटे में  छत्तीसगढ़ और झारखंड के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से रायपुर और धनबाद की दूरी में भी बड़ा अंतर आएगा. अभी दोनों शहरों के सफर में 14 से 16 घंटे का समय लगता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच का सफर 8 से 9 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे पुराने घुमावदार रास्तों के बजाय कई जगह बिल्कुल नया और सीधा रास्ता बना देगा. रायपुर से धनबाद के बीच बनकर तैयार होने वाला है यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक्सेस-कंट्रोल्ड से लेस होगा. जिससे यहां 100 किलोमीटर रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेगी।  छत्तीसगढ़ की तीन राज्यों तक कनेक्टिविटी     छत्तीसगढ़: रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर तक जाएगा.      झारखंड: गुमला, रांची, बोकारो और धनबाद तक जाएगा.     यहां से आगे का यह सफर छत्तीसगढ़ को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी कनेक्ट कर देगा. छत्तीसगढ़ में 384 किलोमीटर का हिस्सा  रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे का 384 किलोमीटर का हिस्सा छत्तीसगढ़ में बनाया जा रहा है. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की तरफ से प्रेस रिलीज जारी करके बताया गया कि NHAI ने पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक NH-43 पर इस प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया है. यह राजमार्ग सीधे तौर पर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक केंद्रों को झारखंड के धनबाद से जोड़ देगा. रायपुर से बिलासपुर के बीच का पुराना मार्ग 6-लेन के ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो रहा है. जबकि बिलासपुर से आगे धनबाद तक यह पूरी तरह से एक नया रूट होगा. यह टोटल 104.25 किलोमीटर लंबा रूट है।  ट्रैफिक का दवाब नहीं होगा  इस एक्सप्रेसवे की खास बात यह है कि रास्ते में पड़ने वाले बड़े शहरों जैसे रायपुर, कोरबा, जशपुर, गुमला, रांची, बोकारो के बाहर से बायपास और ओवरब्रिज दिए गए हैं. जिससे शहर के अंदर का लोकल ट्रैफिक और जाम सफर को धीमा नहीं करेगा. इस पूरे रूट पर 382 से अधिक स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं. जिसमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर्स और जंगली जानवरों को पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर अंडरपास शामिल हैं. जिससे ट्रैफिक का दवाब कम रहेगा।  2027 तक शुरू करने की तैयारी फिलहाल एनएचएआई की तरफ से छत्तीसगढ़ और झारखंड में अलग-अलग चरणों में इसका काम शुरू हो चुका है. एक्सप्रेसवे का ज्यादातर हिस्सा 2026 के दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जबकि 2027 तक इसे शुरू करने की तैयारी है. यह एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद लॉजिस्टिक्स लागत को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देगा. जिससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी हो जाएगी। 

जंग के लिए ‘पोर्न टैक्स’! यूक्रेन में एडल्ट इंडस्ट्री को कानूनी बनाने का प्रस्ताव, जुटेंगे करोड़ों डॉलर

कीव  रूस के खिलाफ जंग लड़ रहे यूक्रेन में पोर्नोग्राफी को कानूनी रूप से वैध बनाने का प्रस्ताव सामने आया है. यूक्रेनी सांसद यारोस्लाव जेलेजनियाक के समर्थन वाला एक बिल एडल्ट एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को कानूनी अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है. जेलेजनियाक यूक्रेनी संसद की वित्त समिति के अध्यक्ष हैं।  वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेजनियाक का अनुमान है कि पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने से सरकार को टैक्स के रूप में करीब 25 मिलियन डॉलर यानी 2.5 करोड़ डॉलर की आमदनी हो सकती है. उनका कहना है कि यह रकम युद्ध के लिए करीब 30 हजार ड्रोन खरीदने के लिए पर्याप्त हो सकती है।  अभी पोर्नोग्राफी है गैरकानूनी यूक्रेन में फिलहाल पोर्नोग्राफी बनाना, रखना या उसका वितरण करना गैरकानूनी है. इसके लिए सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद एडल्ट कंटेंट इंडस्ट्री लगातार बढ़ी है और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की मदद से इसका कारोबार चलता रहा है।  अब टैक्स अधिकारियों ने एडल्ट कंटेंट क्रिएटर्स से टैक्स वसूलने की कोशिश शुरू की है. लेकिन यहां एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है. जो क्रिएटर्स अपनी कमाई घोषित करते हैं, वे खुद ऐसी गतिविधियों की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं, जो कानून के तहत अपराध हैं। जेलेजनियाक ने इसे 'ट्रेजिकॉमिक' स्थिति बताया. उनके मुताबिक, महिलाओं के सामने या तो टैक्स न देने पर आपराधिक कार्रवाई का खतरा है या टैक्स देने पर पोर्नोग्राफी कानून के तहत कार्रवाई का।  OnlyFans से करोड़ों की कमाई रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म की पैरेंट कंपनी फेनिक्स इंटरनेशनल के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2023 में 7,900 यूक्रेनियों ने OnlyFans के जरिए 131 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाए।  टैक्स अधिकारियों की कार्रवाई के बाद कुछ क्रिएटर्स को टैक्स चोरी और अवैध एडल्ट कंटेंट बनाने के आरोपों में नोटिस भी मिले. OnlyFans क्रिएटर स्वितलाना ड्वोर्निकोवा ने दावा किया कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा और 20 हजार डॉलर नकद के साथ लैपटॉप और हार्ड ड्राइव जब्त किए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने केस खत्म करने के बदले रिश्वत की पेशकश की, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।  राष्ट्रपति जेलेंस्की की वेबसाइट पर पहुंचा मामला टैक्स वकील लेसिया मिखालेंको ने कहा कि युद्ध के दौरान क्रिएटर्स पर मुकदमा चलाना सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं है. वहीं ड्वोर्निकोवा ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वेबसाइट पर याचिका दायर कर खुद को 'ईमानदार टैक्सपेयर' बताया. उनका दावा था कि उन्होंने करीब 9 लाख डॉलर टैक्स दिया है।  रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका को एक हफ्ते में 25 हजार से ज्यादा हस्ताक्षर मिले. इसके बाद जेलेंस्की ने कहा कि संसद जेलेजनियाक के पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने के प्रस्ताव पर विचार करेगी. बिल जुलाई में संसद की पहली रीडिंग पास कर चुका है और अब दूसरी रीडिंग का इंतजार है।   

MP में 12 और सड़कों पर टोल की तैयारी, बढ़ेगा सफर का खर्च; सरकार को सालाना 3 हजार करोड़ की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में आने वाले समय में सड़क से सफर करना महंगा हो सकता है। राज्य सरकार सड़कों से होने वाली आय बढ़ाने के लिए टोल व्यवस्था का विस्तार करने की तैयारी में है। कम से कम 12 और सड़कों को टोल के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य सड़कों को भी भविष्य में इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। फिलहाल प्रदेश में मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) की अलग-अलग योजनाओं के तहत 93 सड़कों पर 139 टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं। विभाग का मानना है कि नई सड़कों को टोल व्यवस्था से जोड़कर सरकार की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। अभी 400 करोड़, लक्ष्य 3 हजार करोड़ तक पीडब्ल्यूडी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के टोल से सालाना करीब 4 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। इसके मुकाबले पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी की टोल से कमाई करीब 400 करोड़ रुपये सालाना है। इसी अंतर को देखते हुए विभाग अगले 10 से 15 साल में टोल से होने वाली आय को बढ़ाकर 2 हजार से 3 हजार करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचाना चाहता है। इसके लिए नई सड़कों का निर्माण टोल आधारित मॉडल पर करने पर जोर दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार टोल आधारित नई सड़कों से विभाग की आय बढ़ेगी। इससे सड़क क्षेत्र में निवेश के साथ राज्य के राजस्व में भी विभाग का योगदान बढ़ाया जा सकेगा।  निजी कंपनियों के बजाय सरकार के पास आएगा टोल सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी अब हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी एचएएम को ज्यादा बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य यह भी है कि सड़क बनने के बाद टोल से मिलने वाली राशि सरकार के पास आए। बीओटी मॉडल में सड़क बनाने वाली निजी कंपनी निवेश करती है और तय अवधि तक टोल से अपनी लागत और मुनाफा वसूलती है। वहीं एचएएम में सड़क निर्माण की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत राशि निजी कंपनी लगाती है। इस मॉडल में सड़क बनने के बाद टोल वसूली पीडब्ल्यूडी के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। यही वजह है कि विभाग नई परियोजनाओं के लिए एचएएम मॉडल को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है।  एमपीआरडीसी के टोल आधारित सड़क प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक हाल में कुछ सड़कों को एचएएम के तहत मंजूरी दी गई है। इनमें सिवनी-बालाघाट, विदिशा-भोपाल और दमोह-कटनी सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इन सड़कों पर टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है। इसके अलावा आने वाले समय में एचएएम के तहत और सड़क परियोजनाएं मंजूर किए जाने की तैयारी है।  वाहन चालकों पर बढ़ेगा खर्च नई सड़कों को टोल नेटवर्क में शामिल किए जाने का सीधा असर वाहन चालकों पर पड़ेगा। इन सड़कों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को निर्धारित शुल्क देना होगा। सरकार जहां इसे सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय का जरिया मान रही है, वहीं यात्रियों और माल परिवहन करने वाले वाहनों के लिए यात्रा की लागत बढ़ने की संभावना है। नई सड़कों पर टोल लागू होने से पहले शुल्क की दर और वसूली की व्यवस्था तय की जाएगी। 

दिवाली-छठ की ट्रेन टिकट बुकिंग शुरू, स्पेशल ट्रेनों का भी ऐलान; कंफर्म सीट के लिए करें जल्दी

नई दिल्ली दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों के लिए अहम खबर है. भारतीय रेलवे में दिवाली की यात्रा के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो गई है. देशभर में इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी. रेलवे के एडवांस रिजर्वेशन सिस्टम के तहत यात्री अपनी यात्रा की तारीख के आधार पर 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर सकते हैं. यदि आपको कन्फर्म सीट चाहिए, तो रिजर्वेशन जल्द करना होगा।  रेलवे की एडवांस रिजर्वेशन विंडो सुबह 8 बजे खुलती है. हालांकि, टिकट बुकिंग यात्रा की तारीख पर निर्भर करती है. यात्रियों को यात्रा की तारीख को छोड़कर 60 दिन पहले तक रिजर्वेशन की सुविधा मिलती है. दिवाली के आसपास दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दूसरे राज्यों के लिए जाने वाली ट्रेनों में भारी मांग रहती है. इसलिए लोकप्रिय ट्रेनों में सीटें तेजी से भर सकती हैं।  इन रूट्स पर होता है ट्रैफिक प्रेशर त्योहारी सीजन में दिल्ली-पटना, पटना-अहमदाबाद, पटना-उधना, मुंबई-पटना, हावड़ा-पटना, बेंगलुरु-पटना, फिरोजपुर-पटना, वाराणसी-दिल्ली, कानपुर-दिल्ली, लुधियाना-सुपौल, लुधियाना-पटना, चेन्नई-पटना, हैदराबाद-पटना और दिल्ली-गोरखपुर जैसे रूट पर यात्रियों का दबाव ज्यादा रहता है. इन रूट्स पर यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को रिजर्वेशन विंडो खुलने के साथ ही सीट की उपलब्धता चेक कर लेनी चाहिए।  रेलवे ने चलाईं फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए नॉर्दर्न रेलवे ने कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है. ये ट्रेनें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र और अन्य प्रमुख शहरों के बीच अतिरिक्त कनेक्टिविटी देंगी. इनमें वाराणसी-दिल्ली, अयोध्या कैंट-आनंद विहार, चंडीगढ़-पटना, फिरोजपुर कैंट-पटना और आनंद विहार-पाटलिपुत्र जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं।  क्र. ट्रेन नंबर ट्रेन रूट ट्रिप/फेरे 1 09189/09190 मुंबई सेंट्रल-कटिहार-मुंबई सेंट्रल 77 अतिरिक्त ट्रिप 2 04127/04128 कानपुर सेंट्रल-गुवाहाटी-कानपुर सेंट्रल 14 अतिरिक्त ट्रिप 3 05736/05735 कटिहार-अमृतसर-कटिहार 12 अतिरिक्त ट्रिप 4 05932/05931 डिब्रूगढ़-कोलकाता-डिब्रूगढ़ 13 अतिरिक्त ट्रिप 5 04209/04210 वाराणसी-नई दिल्ली-वाराणसी 50 ट्रिप 6 04213/04214 अयोध्या कैंट-आनंद विहार टर्मिनल-अयोध्या कैंट 36 ट्रिप 7 04512/04511 चंडीगढ़-पटना जंक्शन-चंडीगढ़ 18 ट्रिप 8 04616/04615 फिरोजपुर कैंट-पटना जंक्शन-फिरोजपुर कैंट 16 ट्रिप 9 04008/04007 आनंद विहार टर्मिनल-जोगबनी-आनंद विहार टर्मिनल 10 ट्रिप 10 04028/04027 आनंद विहार टर्मिनल-मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनल 26 ट्रिप 11 04010/04009 दिल्ली जंक्शन-सीतामढ़ी-दिल्ली जंक्शन 12 ट्रिप 12 02456/02455 नई दिल्ली-कानपुर सेंट्रल-नई दिल्ली 98 ट्रिप 13 02563/02564 बरौनी-नई दिल्ली-बरौनी स्पेशल — 14 02569/02570 दरभंगा-नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल — 15 04014/04013 आनंद विहार टर्मिनल-लौकाहा बाजार-आनंद विहार टर्मिनल 150 ट्रिप 16 04002/04001 हजरत निजामुद्दीन-दादर-हजरत निजामुद्दीन 14 ट्रिप 17 04227/04228 वाराणसी-चंडीगढ़-वाराणसी 36 ट्रिप 18 02458/02457 आनंद विहार टर्मिनल-कानपुर सेंट्रल-आनंद विहार टर्मिनल 72 ट्रिप 19 04314/04313 योग नगरी ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर-योग नगरी ऋषिकेश 18 ट्रिप 20 04096/04095 आनंद विहार टर्मिनल-पाटलिपुत्र-आनंद विहार टर्मिनल 120 ट्रिप   टिकट बुक करते समय इन बातों का रखें ध्यान दिवाली के दौरान लोकप्रिय ट्रेनों में टिकट तेजी से भर सकते हैं. इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख पहले से तय करके रिजर्वेशन विंडो खुलते ही उपलब्धता चेक करनी चाहिए।  टिकट बुक करते समय ट्रेन नंबर, यात्रा की तारीख, बोर्डिंग स्टेशन और ​गंतव्य स्टेशन की जानकारी ध्यान से जांचना जरूरी है. यात्रा से पहले ट्रेन का शेड्यूल और सीट की उपलब्धता भी चेक कर लें।  रेलवे से जुड़ी सेवाओं, शिकायतों और यात्रा संबंधी जानकारी के लिए यात्री रेलमदद हेल्पलाइन 139 पर संपर्क कर सकते हैं या NTES ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।  दिवाली के दौरान नियमित ट्रेनों में सीट नहीं मिलने पर नॉर्दर्न रेलवे की ओर से घोषित ये फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें यात्रियों के लिए अतिरिक्त विकल्प साबित हो सकती हैं।  कंफर्म टिकट के लिए अपनाएं ये आसान ट्रिक्स कंफर्म टिकट के लिए मास्टर लिस्ट बनाएं. टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही IRCTC के टिकट बुकिंग App में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ की जानकारी (Master List) सेव कर लें. समय से पहले लॉगिन करें. सुबह 8 बजे बुकिंग शुरू होने से 5 मिनट पहले लॉगिन कर लें. तेजी से पेमेंट के लिए IRCTC Wallet का प्रयोग करें। 

स्वच्छ वायु प्रबंधन में मध्यप्रदेश का स्वर्णिम प्रदर्शन: इंदौर द्वितीय, जबलपुर तृतीय और भोपाल चौथे स्थान पर, वार्ड श्रेणी में भोपाल का वार्ड-60 अलंकृत

भोपाल  पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी की दिशा में मध्यप्रदेश ने स्वर्णिम उपलब्धि अर्जित की है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में देश के शीर्ष पाँच स्वच्छ वायु शहरों में प्रदेश के तीन प्रमुख नगरों ने अनुपम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय पटल पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में 10 लाख से अधिक आबादी वाली श्रेणी में इंदौर एवं जबलपुर तथा वार्ड स्तरीय श्रेणी में भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार द्वारा प्रदान किया गया। दस लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले महानगरों की प्रतिस्पर्धा में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। इस वर्ग में इंदौर ने संपूर्ण देश में द्वितीय, जबलपुर ने तृतीय तथा राजधानी भोपाल ने चतुर्थ स्थान अर्जित कर स्वच्छ वायु प्रबंधन में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इसी श्रेणी में ग्वालियर ने 39वाँ स्थान प्राप्त किया। वहीं, 3 से 10 लाख जनसंख्या वर्ग में उज्जैन ने 16वाँ और सागर ने 21वाँ स्थान प्राप्त किया, जबकि 3 लाख से कम जनसंख्या श्रेणी में देवास ने 7वाँ स्थान हासिल किया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संचालित इस सर्वेक्षण में देश के 130 प्रमुख शहरों के मध्य निर्धारित मापदंडों पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए रैंकिंग जारी की जाती है। इंदौर एवं जबलपुर की अनुकरणीय उपलब्धियां स्वच्छता के क्षेत्र में निरंतर नवमानक स्थापित करने वाले इंदौर नगर ने धूल नियंत्रण, मैकेनाइज्ड सड़क सफाई, हरित क्षेत्र के विस्तार तथा नागरिक सहभागिता के बल पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। समारोह में इंदौर नगर निगम की ओर से महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल एवं एमआईसी सदस्य श्री अश्विनी शुक्ला ने यह सम्मान ग्रहण किया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण एवं सुनियोजित पर्यावरण संरक्षण कार्यों के दम पर तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले जबलपुर नगर निगम की ओर से महापौर श्री जगत बहादुर सिंह 'अन्नू', आयुक्त श्री राम प्रसाद अहिरवार, श्री कमलेश श्रीवास्तव, श्री संभव अयाची एवं श्री जी.एस. मरावी ने पुरस्कार प्राप्त किया। भोपाल के वार्ड क्रमांक-60 को मिला राष्ट्रीय गौरव वार्ड स्तरीय वायु गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार और नवाचारों के लिए भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से सराहा गया। स्थानीय स्तर पर हरित पहल, सघन पौधारोपण तथा नागरिक जागरूकता के प्रभावी प्रयासों के लिए अपर आयुक्त श्री अमन मिश्रा एवं एमआईसी सदस्य श्री आर. के. सिंह बघेल ने यह प्रतिष्ठित सम्मान स्वीकार किया। सतत् विकास और दूरदर्शी नेतृत्व की सुखद परिणति यह राष्ट्रीय गौरव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत' के पावन संकल्प तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में संचालित पर्यावरण संरक्षण अभियानों का फलश्रम है। प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा धूल नियंत्रण, जल छिड़काव, खुले में कचरा जलाने पर रोकथाम, निर्माण स्थलों की निगरानी एवं व्यापक जनचेतना के जो प्रयास किए गए हैं, आज उन्हीं की परिणति स्वरूप मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय वायु संरक्षण पटल पर यह सफलता अर्जित की है।