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भीषण गर्मी और ‘लेंदी’ पेपर ने बढ़ाई मुश्किलें, UPSC परीक्षा में परीक्षार्थियों के छूटे पसीने

ग्वालियर. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) नई दिल्ली की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 रविवार को ग्वालियर शहर के 21 परीक्षा केंद्रों में आयोजित हुई। अभ्यर्थियों की थ्री लेयर चेकिंग के बाद प्रवेश दिया गया। जूते पहनकर परीक्षा देने पहुंचे कई छात्रों को रोका गया और बाहर ही उतरवाए गए। ऐसे में वे 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी से तपती जमीन में नंगे पैर कक्ष तक पहुंचे। समय से 30 मिनट पहले परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश बंद कर दिया गया था। छात्र एवं छात्राओं के अनुसार पेपर में लेंदी प्रश्न पूछे गए थे, जिस कारण से टाइम मैनेजमेंट में कमी आई। ओवरऑल छात्रों का पहला पेपर माडरेट रहा। परीक्षा कक्ष में विद्यार्थी गर्मी से रहे बेहाल प्रारंभिक परीक्षा परीक्षा दो सत्रों में आयोजित होगी, जिसका पहला सत्र सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक कम्प्लीट हो चुका है। इस दौरान छात्राें को गर्मी ने भी बहुत परेशान किया। परीक्षा कक्ष में लगे पंखे भी जवाब दे गए। कुछ संस्थानों में पसीने से तर बरत होकर विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। अब दूसरा पेपर दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक होगा। सुरक्षा की दृष्टि से परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए हैं। पहले पेपर से दुखी छात्र दूसरे पेपर की तैयारी के लिए सड़क किनारे पेड़ की छांव में करते नजर आए। इन केंद्रों पर हुई परीक्षा वीआरजी कालेज, एमएलबी कालेज, साइंस कालेज, बीएड कालेज, केआरजी कालेज, पद्मा स्कूल, गजराराजा स्कूल, गवर्नमेंट एसएस स्कूल टकसाल, पावनबीसी स्कूल, कालपी ब्रिज स्कूल, पालीटेक्निक कालेज, गोरखी स्कूल, गवर्नमेंट कन्या विद्यालय शिंदे की छावनी, गवर्नमेंट हायर सेकंडरी स्कूल मामा का बाजार, गवर्नमेंट हिंदी विद्यापीठ, एमएलबी स्कूल मुरार, उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक एक, जीवाजी राव स्कूल, महाराजा मानसिंह कालेज। छात्रों ने कहा… बदले पैटर्न से हुई परेशानी: पेपर का इस बार पैटर्न बदला हुआ था, जो कि टफ था। सवाल लेंदी थे, जिन्हें समझने में दिक्कत आई। समय प्रबंधन की कमी रही, जिस कारण से कुछ प्रश्न छूट गए। -दुष्यंत कुमार, महोबा चौथी बार कर रही प्रयास: मैंने चौथा अटेम्प्ट दिया है। इस बार का पेपर मुझे टफ लगा। मैं पहले तीन बार मेंस तक पहुंच चुकी हूं, लेकिन साक्षात्कार में नहीं हो सका। इस बार सिलेक्शन के लिए प्रयासरत हूं। – निधि बरैया, सिथौली यह मेरा पहला अटेम्प्ट है: मुझे पेपर माडरेट लगा। सवालों को घुमाकर पूछा गया था, जिससे कई सवाल छूट गए। यह मेरा पहला अटेम्प्ट है, इसलिए मुझे ज्यादा चिंता नहीं है। अागे और अच्छा करूंगा। – सचिन द्विवेदी, मुरार पुलिस में हूं, सपना आइएएस बनना: मैं पुलिस में हूं, शिवपुरी में सेवाए दे रहा हूं। मैं अपने सीनियर्स से बहुत प्रभावित हूं। उनकी तरह ही मैं आइएएस, आइपीएस बनना चाहता हूं, इसलिए नौकरी के साथ तैयारी कर रहा हूं। – आदित्य तिवारी, दतिया गर्मी से परेशान हुए: परीक्षा के खौफ के साथ ही गर्मी ने बहुत परेशान किया। कक्ष में पंखों की स्थिति सही नहीं थी। इसलिए एक तरफ पसीना पोछते रहे और दूसरी तरफ प्रश्न पत्र हल करते रहे। – ललित सूर्यवंशी, ग्वालियर

उप मुख्यमंत्री अरुण साव कार्यशाला में वर्चुअली हुए शामिल, फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

रायपुर. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। इसी क्रम में मुंगेली जिले को करीब 65 लाख रुपये लागत की आधुनिक सुविधाओं से लैस मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्राप्त हुई है। इस वैन के तकनीकी उपयोग और अपराध अनुसंधान में इसकी भूमिका से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अवगत कराने मुंगेली कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘कलेक्टर जनदर्शन सभाकक्ष’ में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से इसमें वर्चुअली शामिल हुए। उन्होने हरी झंडी दिखाकर मोबाइल फॉरेंसिक वैन को जिले में सेवा हेतु रवाना किया। अपराध अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला में ऑनलाइन जुड़े उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुंगेली जिले को मिली यह अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगी। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह वैन पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा देगी, जिससे अपराध अनुसंधान में तेजी आएगी और साक्ष्य संकलन अधिक प्रभावी होगा। तकनीकी क्षमता का उठाएं पूरा लाभ बिलासपुर रेंज के आईजी श्री रामगोपाल गर्ग ने कहा कि मोबाइल फॉरेंसिक वैन की तकनीकी क्षमताएं आपराधिक मामलों के त्वरित एवं वैज्ञानिक निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुंगेली पुलिस इस सुविधा का बेहतर उपयोग कर अपराधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। निष्पक्ष न्याय में बड़ी भूमिका निभाएगी वैन मुंगेली एसएसपी श्री भोजराम पटेल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में सभी नागरिकों के लिए न्याय समान है। उन्होंने कहा कि न्याय भेद नहीं करता और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और सटीक जांच में बड़ी मददगार साबित होगी। आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी कार्यशाला में तकनीकी सत्र में फॉरेंसिक एक्सपर्ट सुश्री ज्योत्सना लकड़ा ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और जवानों को वैन में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया, साक्ष्य सुरक्षित रखने में बरती जाने वाली सावधानियों तथा मौके पर ही प्राथमिक फॉरेंसिक जांच करने के तरीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही बताया कि अदालत में साक्ष्यों की वैधता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से जांच और दस्तावेजीकरण अत्यंत आवश्यक है। प्रधानमंत्री की बचत अपील का दिखा असर कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘बचत’ संबंधी अपील को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने अनावश्यक खर्च से बचते हुए ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की। कार्यशाला में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, उप पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, बार काउंसिल के अध्यक्ष राजमन सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर सिंह छाबड़ा सहित जिले के विभिन्न थाना प्रभारी, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।

यूरेनियम और न्यूक्लियर प्रोग्राम बना बड़ा मुद्दा, ईरान-यूएस पीस डील पर बातचीत जारी

नई दिल्ली   ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच अब संभावित पीस डील की रूपरेखा सामने आने लगी है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने दावा किया है कि वॉशिंगटन ने तेहरान के सामने पांच बड़ी शर्तें रखी हैं, जिन पर समझौते की कोशिश चल रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ईरान में शांति समझौते पर बातचीत लगभग तय हो गई है और इसका जल्द ही ऐलान किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के ड्राफ्ट में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के संवर्धित यूरेनियम का है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने 400 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करे. यही यूरेनियम लंबे समय से पश्चिमी देशों की चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अहम माना जाता है. दूसरी बड़ी शर्त ईरान के न्यूक्लियर ढांचे को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान सिर्फ एक न्यूक्लियर फैसिलिटी को चालू रखे, जबकि बाकी गतिविधियों पर रोक लगे. इसके अलावा अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि वह युद्ध में हुए नुकसान की कोई भरपाई या मुआवजा नहीं देगा. क्या ईरान को मिलेगा फ्रीज फंड? फार्स न्यूज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने फिलहाल ईरान की विदेशों में जमा फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने से इनकार कर दिया है. वहीं अलग-अलग मोर्चों पर सीजफायर को भी बातचीत की प्रगति से जोड़ा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में एक अहम सुरक्षा क्लॉज भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान या उसके सहयोगी गुटों पर हमला नहीं करेंगे. इसके बदले ईरान भी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोई प्रीएम्प्टिव यानी पहले हमला नहीं करेगा. हालांकि इन दावों पर अभी तक न तो अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही ईरान ने खुलकर पुष्टि की है. जंग खत्म करने के लिए ईरान की भी रखी पांच शर्तें ईरान ने भी इससे पहले दूसरे दौर की बातचीत के लिए अपनी पांच शर्तें रखी थीं. इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, खासकर लेबनान में संघर्ष रोकना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां वापस करना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल था. अमेरिका-ईरान जंग की टाइमलाइन ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ था. इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद करीब 40 दिन तक संघर्ष चला. बाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस्लामाबाद में बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच कई ड्राफ्ट प्रस्ताव एक्सचेंज हुए.

दिल्ली में भारत-अमेरिका रणनीतिक बातचीत, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा

नई दिल्ली  भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के बीच में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए मार्को रुबियो और डॉ. जयशंकर ने सुबह की द्विपक्षीय बैठक के बाद आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की रूपरेखा साझा की. इस कूटनीतिक मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापक रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करना तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी समझ को मजबूत करना था. दोनों नेताओं ने कल अमेरिकी विदेश मंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आज अपनी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया, खाड़ी देशों के घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक संकटों पर गहन रणनीतिक बातचीत की है. दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नवीनीकृत करने के साथ-साथ एक व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए हैं. विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके बीच आज सुबह द्विपक्षीय वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है. दोनों नेता इस चर्चा के बीच में हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद लंच पर शेष मुद्दों को पूरा करने के लिए वापस वार्ता की मेज पर लौटेंगे. हालांकि, ये सचिव रुबियो की पहली भारत यात्रा है, लेकिन वे अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही एक-दूसरे के साथ नियमित संपर्क में बने हुए हैं. विदेश मंत्री ने उठाया वीजा का मुद्दा बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत के वैध यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही हैं चुनौतियों को भी उठाया. इसके जवाब में रुबियो ने कहा कि सबसे पहले, मैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के योगदान को स्वीकार करता हूं. भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. हम चाहते हैं कि ये संख्या बढ़ती रहे… जो बदलाव अभी हो रहे हैं या अमेरिका में हमारी प्रवासन सिस्टम का आधुनिकीकरण, ये कदम केवल भारतीय को टारगेट नहीं करता, बल्कि ये नियम पूरे वर्ल्ड के लिए है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है. USA में घुसपैठ कर चुके हैं 20 मिलियन लोग उन्होंने कहा कि हम आधुनिकीकरण के दौर में हैं. अमेरिका में प्रवासन संकट रहा है. ये भारत की वजह से नहीं है, लेकिन व्यापक रूप से, पिछले कुछ वर्षों में 20 मिलियन से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ा है… एक देश के रूप में आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है. मेरा मानना ​​है कि अमेरिका आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे स्वागत करने वाला देश है. हर साल लगभग दस लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. 'क्यूबा से आए थे मेरे माता-पिता' अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुलासा करते हुए बताया कि मेरे माता-पिता 1956 में क्यूबा से स्थायी निवासी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में आए थे. इस प्रक्रिया ने हमें समृद्ध किया है, लेकिन ये एक ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जो हर युग में मॉर्डन वक्त की वास्तविकताओं के हिसाब हो. हम ऐसा कर रहे हैं और ये बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में उस सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है, जिसके द्वारा हम ये तय करते हैं कि हमारे देश में कितने लोग आते हैं, कौन आता है, कब आता है. जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को एंट्री देने के सिस्टम में कोई बदलाव करते हैं तो एक बदलाव (संक्रमणकालीन) का दौर होता है जो कुछ मतभेद और कठिनाइयां पैदा करता है… ये कदम केवल भारत को टारगेट नहीं करता, ये एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है. लेकिन हम एक बदलाव के दौर में हैं और इस रास्ते में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही, लेकिन हमें लगता है कि अंततः हमारा उद्देश्य एक बेहतर सिस्टम, एक अधिक कुशल प्रणाली होगी, जो पहले की प्रणाली से बेहतर काम करेगी और साथ ही अधिक टिकाऊ भी होगी. रुबियो ने की भारत की तारीफ इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए इस यात्रा को अपने लिए एक बड़ा सम्मान कहा. उन्होंने रणनीतिक साझेदारी को परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के कई अन्य देशों के साथ अलग-अलग या क्षेत्रीय मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन एक 'रणनीतिक साझेदारी' इन सब से बहुत अलग और कहीं अधिक व्यापक होती है. ये तब होती है जब दो देशों के हित पूरी तरह एक दिशा में संरेखित होते हैं. मार्को रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की चौड़ाई और दायरा ही ये साबित करता है कि भारत अमेरिका का कितना महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार है. उन्होंने कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है. भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि दोनों देशों के नेता सीधे तौर पर अपनी जनता और मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं. मेक इन इंडिया पर जोर साथ ही रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नया जीवन दिया है और व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर साइन किए हैं. उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों ने भारत के 'मेक इन इंडिया' दृष्टिकोण को ध्यान में रखने और हाल के वैश्विक संघर्षों से सीखे गए कड़े सबकों को शामिल करने के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की है. आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री … Read more

USCIS मेमो का असर: स्टूडेंट और H-1B आवेदकों को देना होगा इरादे बदलने का स्पष्ट जवाब

नई दिल्ली  अमेरिका की US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एक नई पॉलिसी मेमो की घोषणा की है, जिसके तहत देश में ग्रीन कार्ड चाहने वाले विदेशियों को अब अमेरिका की बजाय अपने देश से ही आवेदन करना होगा। इस घोषणा में, USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा, "यह पॉलिसी हमारे इमिग्रेशन सिस्टम को वैसे काम करने देती है, जैसा कि कानून का मकसद है, न कि इसमें मौजूद कमियों का फायदा उठाने को बढ़ावा देती है।" उन्होंने कहा कि जब विदेशी अपने देश से आवेदन करते हैं, तो उन लोगों को ढूंढने और निकालने की जरूरत कम हो जाती है, जो रेजिडेंसी (रहने की अनुमति) न मिलने पर छिपकर अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से रहने लगते हैं। एजेंसी ने एक बयान में कहा, "छात्र, अस्थायी कर्मचारी या टूरिस्ट वीजा पर आने वाले गैर-प्रवासी थोड़े समय के लिए और किसी खास मकसद से अमेरिका आते हैं। सिस्टम यही है कि जब उनका दौरा खत्म हो जाए तो वे वापस चले जाएं। उनका यह दौरा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला कदम नहीं बनना चाहिए।" USCIS के नए मेमो का आपकी वर्कफोर्स के लिए क्या मतलब है? 21 मई, 2026 को USCIS ने अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे ग्रीन कार्ड आवेदनों की समीक्षा करते समय अधिक सख्त मानक लागू करें, जो USA के भीतर रहकर रहकर अप्लाई किए गए हैं। अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि U.S. में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना एक राहत का एक 'असाधारण' रूप है और इसे वीजा जारी करने की 'नियमित कांसुलर प्रक्रिया' की जगह लेने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। इस मेमो का मतलब है कि अमेरिका में काम करने वाले वो विदेशी नागरिक अपने वीजा का मकसद पूरा होने के बाद USA छोड़ देंगे, जिनके पास F-1 OPT/STEM OPT वीजा है। इस तरह का वीजा'नॉन-डुअल इंटेंट' (दोहरे इरादे वाला नहीं) माना जाता है। वहीं, वे लोग जिन्हें वीजा से छूट (जैसे, ESTA) मिली हुई है, उन्हें U.S. के बाहर किसी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' के लिए आवेदन करना होगा। ऐसा उन्हें तभी नहीं करना होगा, जब वे कोई 'असाधारण परिस्थिति' दिखा सकें। हालांकि, इस मेमो में 'असाधारण परिस्थिति' को परिभाषित नहीं किया गया है। Memo में क्या कहा गया है? USCIS के पास हमेशा से ग्रीन कार्ड के आवेदन को अस्वीकार करने का कानूनी अधिकार रहा है, भले ही आवेदक सभी शर्तों को पूरा करता हो। यानी यह अधिकार 'विवेक' (discretion) पर आधारित होता है। यह मेमो इस बात की पुष्टि करता है कि इस अधिकार का प्रयोग अब और भी अधिक सोच-समझकर और सख्ती से किया जाना चाहिए। अधिकारियों को मूल्यांकन करने के लिए नकारात्मक कारकों की सूची आप्रवासन कानूनों का उल्लंघन, या किसी भी आप्रवासन दर्जे (status) की शर्तों का उल्लंघन  किसी भी सरकारी एजेंसी के साथ धोखाधड़ी या झूठी गवाही के वर्तमान या पिछले मामले देश में प्रवेश करने के बाद किया गया कोई भी ऐसा आचरण, जो उस वीजा के मूल उद्देश्य के अनुरूप न हों शुरुआत में की गई उम्मीद के अनुसार देश छोड़कर न जाना। मेमो में इसे "इस विश्लेषण के लिए अत्यंत प्रासंगिक" बताया गया है। इन कारकों को सख्त बनाने के लिए, मेमो ने एक बहुत ऊंचा मानक (high bar) तय किया है। आवेदकों को 'असामान्य या असाधारण' कारकों को दिखाना होगा, जिसमें पारिवारिक संबंध और नैतिक चरित्र शामिल हैं। इसका अर्थ यह है कि सकारात्मक कारक इतने मजबूत होने चाहिए कि वे इस तथ्य पर भारी पड़ सकें कि आवेदक ने विदेश से आवेदन करने के बजाय U.S. में ही रुककर आवेदन करने का विकल्प चुना। मेमो के लहजे को देखते हुए, यह उम्मीद की जा सकती है कि USCIS इस नियम को काफी सख्ती से लागू करेगा। आपकी वर्कफोर्स के लिए इसका क्या मतलब है? कर्मचारी से ज्यादा HR को करना होगा काम   HR और मोबिलिटी टीमों के लिए इसका मतलब ये हुआ कि ग्रीन कार्ड फाइलिंग में आपके कर्मचारियों से ज्यादा आपको मेहनत की जरूरत होगी। इसके लिए इमिग्रेशन वकीलों को पहले से ही ऐसी फाइलें तैयार करनी चाहिए, जो आवेदक के U.S. से जुड़ाव, उनके नियमों के पालन के रिकॉर्ड और उनके मामले को आगे क्यों बढ़ाया जाना चाहिए? इन बातों को दस्तावेजों में दर्ज करती हों। हालांकि जांच-पड़ताल का स्तर बदल गया है। अब फाइलिंग को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। वकीलों को अब हर I-485 आवेदन के लिए एक मजबूत तर्क देना होगा कि इस व्यक्ति को U.S. से बाहर जाने के बजाय, U.S. के अंदर से ही अपने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? जिन लोगों के पास'नॉन-डुअल इंटेंट' वीजा है, उन्हें ज्यादा डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ेगी। मेमो में अधिकारियों से कुछ बातों पर विचार करने को कहा गया है, जिनमें पारिवारिक जुड़ाव, इमिग्रेशन की स्थिति और इतिहास, आवेदक का नैतिक चरित्र शामिल हैं। इनमें से हर बात को सबूतों के साथ साबित करना होगा। H-1B और L-1 कर्मचारी इसका मतलब है कि भले ही H-1B और L-1 कर्मचारी लंबे समय से U.S. के भीतर अपनी स्थिति में बदलाव (adjustment of status) के लिए आवेदन कर पा रहे हैं, लेकिन अब वे यह नहीं मान सकते कि यह रास्ता अपने आप और सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही पूरा हो जाएगा। अधिकारियों को ऐसे ठोस तर्क चाहिए, जिनसे यह साबित हो सके कि आवेदक U.S. में अपनी स्थिति में बदलाव के हकदार क्यों हैं। इन तर्कों में टैक्स का इतिहास, पारिवारिक परिस्थितियां, करियर में प्रगति, और U.S. में उनकी जड़ों से जुड़े अन्य सबूत शामिल हो सकते हैं। उदाहरण से समझिए एक F-1 OPT कर्मचारी कंप्यूटर साइंस में PhD पूरी करता है, एक टेक कंपनी में अपना STEM OPT पूरा करता है और यह तर्क देते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करता है कि उसका काम 'राष्ट्रीय हित' में है। मेरिट के आधार पर यह एक मजबूत मामला है, सिवाय इसके कि सालों पहले उसने एक दूतावास अधिकारी से कहा था कि उसकी योजना अपने देश वापस लौटने की है। इस मेमो के तहत, अधिकारी अब यह पूछ सकते हैं कि उन्होंने असल में U.S. में ही रुकने का फ़ैसला कब किया और वे … Read more

ट्रंप बोले- डील भी हो सकती है, तबाही भी! ईरान समझौते पर अमेरिका का बड़ा संकेत

नई दिल्ली अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। चार दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे रुबियो ने कहा कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को ईरान मुद्दे पर 'अच्छी खबर' मिल सकती है। रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रुबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद अगले कुछ घंटों में दुनिया को कुछ अच्छी खबर मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित शांति समझौता होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव को समाप्त करेगा। बता दें कि ईरान ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के जवाब में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया था। रुबियो ने जोर देकर कहा कि यह समझौता उस प्रक्रिया की शुरुआत करेगा जिसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां किसी को भी ईरानी परमाणु हथियारों से डरने या चिंता करने की जरूरत न पड़े। ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए ईरान की कार्रवाई की निंदा की। रुबियो ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को नुकसान पहुंचाने की धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। शनिवार को ट्रंप ने क्या कहा था? इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि वह ईरान के नवीनतम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और रविवार तक युद्ध फिर से शुरू करने के बारे में फैसला करेंगे। ट्रंप ने 'एक्सियोस' से बात करते हुए कहा था कि इस बात की ''पूरी तरह से 50/50'' संभावना है कि वह कोई 'अच्छा' सौदा कर पाएंगे या फिर उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे। वहीं, ट्रंप ने रविवार सुबह दावा किया कि इजरायल और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ईरान के साथ शांति समझौते पर 'काफी हद तक' बातचीत हो चुकी है। तीन महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह अहम प्रगति मानी जा रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि औपचारिक घोषणा से पहले समझौते के अंतिम विवरण पर चर्चा जारी है। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग से हुई बातचीत को 'बहुत अच्छी' बताया। ट्रंप ने इस वार्ता को 'शांति से संबंधित समझौता ज्ञापन' करार दिया। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखेगा फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान केवल गुजरने वाले जहाजों की संख्या को युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाने की अनुमति देने को तैयार हुआ है, लेकिन इसका मतलब 'मुक्त आवागमन की पूर्ण बहाली' नहीं है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप के पोस्ट को 'प्रचार' बताया। आईआरजीसी ने कहा कि समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। आईआरजीसी के बयान में कहा गया है कि ट्रंप ने पहले परमाणु कार्यक्रम को किसी भी समझौते की मुख्य शर्त बताया था, लेकिन ईरान की ओर से इस पर कोई सहमति नहीं बनी है। इस स्तर पर परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा भी नहीं हुई है।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन से बस्तर पुलिस होगी हाईटेक, अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

जगदलपुर. बस्तर संभाग में अपराध जांच को तकनीकी मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. जगदलपुर में मोबाइल फॉरेंसिक वेन का शुभारंभ किया गया. यह अत्याधुनिक वेन घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में पुलिस की मदद करेगी. अधिकारियों का कहना है कि इससे जांच प्रक्रिया और तेज व सटीक बनेगी. कार्यक्रम में पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. फॉरेंसिक विशेषज्ञ अब मौके पर ही डिजिटल और तकनीकी जांच कर सकेंगे. इस सुविधा से साइबर और आपराधिक मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव होगी. पुलिस का दावा है कि आधुनिक तकनीक से अपराधियों तक पहुंच आसान होगी. वेन में जांच से जुड़े अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं. बस्तर संभाग में पहली बार इस तरह की मोबाइल सुविधा उपलब्ध हुई है. अधिकारियों ने इसे न्याय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया. इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की जांच में भी तेजी आने की उम्मीद है. पुलिस विभाग अब तकनीक आधारित जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी में है.

हरिमंदिर साहिब को उड़ाने की धमकी से मचा हड़कंप, आरोपी सौरव बिस्वास पर कसा शिकंजा

अमृतसर. पश्चिम बंगाल के सौरव बिस्वास की गिरफ्तारी की सूचना अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (इंटरपोल) को देने जा रही है। पता चला है कि आरोपित ने पाकिस्तान और बंगलादेश में क्रिप्टो करंसी के जरिए कुछ लोगों को भुगतान किया है। यह भुगतान किस डील के बदले में किया गया इसकी जांच करवाई जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि ई-मेल के जरिए धमकियां देने वाला आरोपित सौरव बिस्वास के खिलाफ उक्त दो देशों के साथ-साथ अन्य देशों को भी वांछित हो सकता है। फिलहाल जांच मुकम्मल होने के बाद उसे फताहपुर जेल भेज दिया गया है। साइबर सेल के अधिकारी ने बताया कि केस में नए पहलू सामने आने पर आरोपित को दोबारा कोर्ट के जरिए प्रोडक्शन वारंट पर जेल से गिरफ्तार किया जा सकता है। बता दें सौरव बिस्वास ने छह महीने पहले से अब तक श्री हरिमंदिर साहिब को बम से उड़ने की 40 के करीब धमकियां ई-मेल भेज कर की थी। इसके अलावा आरोपित ने श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, स्कूल, बस अड्डा, श्री दुर्ग्याणा मंदिर, रेलवे स्टेशन सहित देश के कई हिस्सों में ई-मेल भेजकर महत्वपूर्ण स्थलों को बम से उड़ाने की धमकियां दी थीं। पुलिस ने लंबी जांच पड़ताल के बाद सौरव बिस्वास को गिरफ्तार कर लिया। इसके कब्जे से तीन सौ से ज्यादा ई मेल आइडी और उनके पासवर्ड बरामद किए हैं। यह सभी उसने पैसे देकर विभिन्न लोगों से खरीदे थे और इसके जरिए फिर धमकियों का सिलसिला शुरु हुआ था। आरोपित के कब्जे से मिले तीन सीपीयू, पांच हार्ड डिस्क, तीन मोबाइल, एक इंटरनेट राउटर, 15 हाट मेल अकाउंट बरामद किए थे।

लू से मचा हाहाकार: तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 67 से ज्यादा लोगों की जान गई

हैदराबाद  तेलंगाना राज्य में गर्मी लोगों पर भारी पड़ रही है. शनिवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हीटस्ट्रोक से 51 लोगों की मौत हो गई. सबसे ज़्यादा मौतें वारंगल जिले में हुईं, जहां 23 लोगों की मौत हुई. संयुक्त करीमनगर जिले में 11, खम्मम में सात, आदिलाबाद में पांच और नलगोंडा में पांच लोगों की जान चली गई. उनमें से एक की मौत सरस्वती अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान हीटस्ट्रोक से हुई. वहीं शुक्रवार को तेज गर्मी की वजह से 34 लोगों की मौत हो गई. राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने ऐलान किया कि मरने वालों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. तेज़ गर्मी और लू को देखते हुए, मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने सचिवालय में इमरजेंसी रिव्यू किया. उन्होंने बताया कि जिन मंडलों और गांवों में सबसे ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया जाता है, उनकी पहचान की जानी चाहिए और वहां के लोगों को पहले से चेतावनी दी जानी चाहिए और जागरूकता फैलाई जानी चाहिए. मंत्री ने आदेश दिया कि बस स्टैंड, बाजार, मुख्य सड़कों, उन इलाकों में जहां मजदूर ज़्यादा काम करते हैं और जहां लोग ज़्यादा आते-जाते हैं, वहां ठंडा पीने का पानी, छाछ और ओआरएस पैकेट उपलब्ध कराए जाने चाहिए. जीवों की रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी: उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को खुद हीटवेव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और गांव और मंडल लेवल के सभी स्टाफ को फील्ड लेवल पर रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि सनस्ट्रोक के लक्षण दिखते ही इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को इलाज के लिए तैयार रहना चाहिए. मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि लोगों के साथ-साथ जीवों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है और उन्होंने पानी की टंकियों और मिट्टी के बर्तनों के जरिए पक्षियों और जानवरों को पीने का पानी देने की अपील की. तेलंगाना के 15 जिलों में 45 डिग्री से ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया. सबसे ज़्यादा 46.3 डिग्री तापमान कोठागुडेम जिले में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम 39.8 डिग्री तापमान नारायणपेट जिले में रिकॉर्ड किया गया. आंध्र प्रदेश में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश में तेज गर्मी की वजह से, अकेले शनिवार को अलग-अलग इलाकों में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें से बारह मौतें एनटीआर, कृष्णा और गुंटूर जिलों में हुईं. मचावरम मंडल (पलनाडु ज़िला) के वेमावरम गांव के जल्ला कोंडालू (54), केथनकोंडा के पठान नागुलमीरा (32), कोटिकलापुडी की मेका निर्मला (50), कांचीकाचेरला के मोहम्मद अबिदुन्निसा (26) और मेडिकोंडुरु मंडल (गुंटूर ज़िला) के सिरिपुरम के कडियाला बलैया (94) की मौत हीटस्ट्रोक की वजह से हुई. वहीं विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस स्टेशन पर हीटस्ट्रोक की वजह से तीन यात्रियों की मौत हो गई. इसी तरह सत्यनारायणपुरम पुलिस स्टेशन के इलाके में एक अनजान व्यक्ति (60) की मौत हो गई, जबकि पेनामलुरु मंडल (कृष्णा ज़िला) के चोडावरम में एक भिखारी (45) की मौत हो गई. वारंगल के वी. नरसय्या (50) की विजयवाड़ा के ओल्ड टाउन इलाके में राजकुमारी थिएटर के पास हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. मुटलुरु, वट्टीचेरुकुरु मंडल (गुंटूर जिला) में, पदावला बसवैया (86) तेज़ गर्मी के कारण बीमार पड़ गए और बाद में उनकी मौत हो गई. आखिर में, पिडुगुराल्ला शहर (पलनाडु जिला) में डोंडेती वेंकटरावम्मा (80) और केबीपी अग्रहारम, रविकामथम मंडल (अनकापल्ली जिला) में दिव्यांग गडिगोयिला सत्यनारायण (28) की भी हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. एलुरु जिले के पेडावेगी मंडल के पेडावेगी निवासी मारगानी श्रीनिवास राव (60) और उसी मंडल के कोप्पाका निवासी चल्लारी रत्नाला राव (55) की मौत हो गई.

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप की चेतावनी, 24 घंटे में हो सकता है बड़ा फैसला

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और संभवतः अगले एक दिन में रविवार तक यह फैसला कर लेंगे कि युद्ध फिर से शुरू करना है या नहीं। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios को बताया कि इस बात की पूरी 50/50 संभावना है कि वह कोई अच्छा समझौता कर पाएंगे या फिर उन्हें पूरी तरह तबाह कर देंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह तेहरान के प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मिलेंगे। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, जो अभी ओहायो में हैं, संभवतः इस बैठक में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन लौटेंगे। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर शांति समझौते की बारीकियों पर वार्ताकारों से चर्चा करने के लिए तेहरान में थे। वहीं, दिल्ली में, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, "कुछ प्रगति हुई है, कुछ काम आगे बढ़ा है। अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, तब भी कुछ काम चल रहा है। इस बात की संभावना है कि, चाहे आज बाद में हो, कल (रविवार को), या कुछ दिनों में, हमारे पास कहने के लिए कुछ हो सकता है।" रूबियो भारत की चार-दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाए, ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकते। होर्मुज स्ट्रेट बिना किसी टोल के खुला रहना चाहिए और तेहरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंप देना चाहिए। ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि वह केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेंगे जिसमें यूरेनियम संवर्धन और ईरान के मौजूदा भंडार के भविष्य जैसे मुद्दे शामिल हों। अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने और 30 दिनों तक और अधिक गहन बातचीत करने की प्रतिबद्धता जताने वाले एक इरादा पत्र पर बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि इन दो में से एक चीज होगी। या तो मैं उन पर अब तक का सबसे जोरदार हमला करूंगा, या फिर हम एक ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा होगा।" ट्रंप की यह टिप्पणी पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के ईरान दौरे के संपन्न होने के तुरंत बाद आई है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के इस्लामाबाद के बढ़ते प्रयासों के बीच मुनीर ने वरिष्ठ इरानी अधिकारियों के साथ गहन बैठकें की थीं। पाकिस्तान ने बाद में कहा कि इन वार्ताओं से कोई अंतिम समझौता तो नहीं हुआ है, लेकिन एक अंतिम सहमति की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है। ट्रंप ने संकेत दिया कि किसी भी अंतिम समझौते में यूरेनियम संवर्धन और ईरान के मौजूदा परमाणु भंडार के भविष्य जैसे प्रमुख मुद्दों का समाधान होना आवश्यक होगा। ये विषय वार्ताओं में सबसे कठिन बाधाओं में से बने हुए हैं। हालांकि, वार्ताओं से परिचित राजनयिकों का कहना है कि वर्तमान में अमेरिका और इरान के बीच चर्चा के तहत चल रहे अंतरिम 'आशय पत्र' के तहत इन मुद्दों के पूरी तरह से सुलझने की संभावना कम है। इसके बजाय, प्रस्तावित रूपरेखा सक्रिय संघर्ष को समाप्त करने और एक व्यापक समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से आगे की वार्ताओं के लिए 30 दिनों की अवधि स्थापित करने पर केंद्रित होगी। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि दो में से एक बात होगी। या तो मैं उन पर अब तक का सबसे भीषण हमला करूंगा, या फिर हम एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो अच्छा होगा।" उन्होंने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस बात को लेकर चिंतित थे कि अमेरिका अंततः ईरान के लिए बहुत अधिक अनुकूल शर्तों पर सहमत हो सकता है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इजराइली नेता इस बात को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हैं कि यह वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ रही है।