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मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए समन्वित प्रयास करें: मंत्री कुशवाह

चिंतन शिविर संपन्न मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना हम सब का दायित्व मैदानी अमले के सुझावों को योजनाओं के क्रियान्वयन में किया जाएगा शामिल भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायन सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी अधिकारी-कर्मचारी समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। विभाग के मैदानी अमले की योजनाओं और कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर उतारने में भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए, योजनाओं को लागू करने के साथ नीति निर्माण में उनके सुझाव को कैसे शामिल किया जा सकता है इस विषय पर विस्तृत विचार विमर्श के लिये सामाजिक न्याय विभाग द्वारा विभागीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग मानवीय संवेदनाओ से जुड़ा विभाग है। इसके माध्यम से हम कमजोर और असहाय लोगों की सहायता कर सकते है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन की सेवा ईश्वर सेवा से कम नहीं है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुँचे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि विभागीय योजनाओं के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाई जाए, जिससे अधिक से अधिक पात्र हितग्राही लाभान्वित हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चिंतन शिविर में विभागीय कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि जिलों में लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए। साथ ही, हितग्राहियों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन एवं वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए विभाग सतत प्रयासरत है। अधिकारियों को सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए जनसमस्याओं का संवेदनशीलता एवं प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। वृद्धजनों के लिए वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे चिंतन शिविर में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने विभाग की आगामी एक वर्ष की कार्ययोजना के महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शासकीय और अशासकीय योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी ऑडिट ऐप के माध्यम से नियमित जांच की जाएगी, अटल अभ्युदय योजना के अंतर्गत वृद्धजनों के लिए वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही, प्रत्येक जिले में ट्रांसजेंडर जिला बोर्ड तथा भिक्षावृत्ति की निगरानी के लिये जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। नए जिलों में डीडीआरसी (जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र), नशामुक्ति केंद्र एवं वृद्धाश्रम स्थापित करने की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2027 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेशभर में विशेष नशामुक्ति अभियान चलाया जाएगा तथा नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग्स डिमांड के अंतर्गत प्रत्येक जिले में विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों को वन स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित करने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण कृष्ण गोपाल तिवारी ने कहा कि योजनाओं के जमीनीस्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी विभागीय अमले पर है उनकी कार्यक्षमता और संवेदनशीलता से ही विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति संभव होगी। उन्होंने अमले से अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। चिंतन शिविर में आये जिले के अधिकारियों के 5 समूह गठित कर नशामुक्त भारत, वृद्धाश्रम व अन्य संस्थाओं के संचालन, भिक्षुक गृह और ट्रांसजेंडर से संबंधित योजना के संचालन, शासकीय और अशासकीय संस्थाओं से संचालन और गुणवत्ता नियंत्रण तथा दिव्यांगजन पुर्नवास केन्द्र तथा निराश्रित निधि के उपयोग और प्रक्रिया विषय पर सुझाव मांगे गये। शिविर में प्रदेश के सभी जिलों से आए अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर कार्य करते समय आने वाली समस्याओं, चुनौतियों एवं अनुभवों को साझा किया। शिविर का उद्देश्य प्रक्रियात्मक जटिलताओं, संसाधनों की कमी तथा समन्वय संबंधी मुद्दों को समझकर उनके समाधान के लिये व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करना रहा, जिससे योजनाओं का लाभ सुगमता एवं समयबद्ध तरीके से पात्र हितग्राहियों तक पहुँच सुनिश्चित की जा सकेगा। चिंतन शिविर में निःशक्त जन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया, प्रदेश संयोजक दिव्यांगजन कल्याण प्रकोष्ठ संदीप रजक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

‘अब सिस्टम बदलने का वक्त’: Bhagwant Mann का बड़ा बयान, मुफ्त सुविधाएं रहेंगी जारी

चंडीगढ़. देश की राजनीति में भगवंत मान एक मात्र एसे मुख्यमंत्री हैं जो स्टेज से लेकर स्टेट तक को लीड कर रहे हैं। बतौर कलाकार मुख्यमंत्री भगवंत मान की ताकत ‘पोलटिकल सटायर’ हुआ करती थी। जो राजनीतिक सिस्टम पर चोट करती थी। 2022 में भगवंत मान मुख्यमंत्री बने तो उनके हाथों में हरा कलम आ गया। बतौर कलाकार मैं अपने शब्दों से सिस्टम पर चोट करता था। लोगों ने हाथों में हरा कलम जब से थमाया है। तब से मैं सिस्टम को बदल रहा हूं। ताकि सिस्टम में सुधार हो। विचार मंच के दौरान ‘चुनौतियां और राह’ पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि 70 साल का घाटा चार वर्षों में पूरा नहीं किया जा सकता। आम आदमी पार्टी ने भले ही चुनाव में लोगों से किए गए गारंटियों को पूरा कर दिया हो लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इस दौरान उन्होंने न अपने निजी जीवन से लेकर पंजाब के राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर खुल कर विचार रखे। गरीबों को मिलने वाली मुफ्त योजना जारी रहेगी मु्ख्यमंत्री ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट फ्री बिजली का वायदा किया तो कहा गया कि ‘रेवड़ियां’ बांट रहे हैं। उन्होंने कहा ‘फिर 15 लाख का पापड़ पहले किसने बेचा था। अब कह रहे हैं कि जुमला था। नेताओं का तो टोल भी फ्री है और गाड़ी भी। तेल भी फ्री हैं जो टेलीफोन का बिल भी। जब गरीबों को बिजली, राशन, ईलाज, बस सफर मिलता हैं तो इन नेताओं को दर्द क्यों होता है। गरीब आदमी भले ही डायरेक्ट टैक्स नहीं देता लेकिन इन डायरेक्ट टैक्स तो देता ही है। गरीब आदमी के चाय से लेकर रात को सोते समय चलने वाले पंखे पर भी टैक्स है।’ उन्होंने कहा कि अंबानियों का जब कर्जा माफ हो जाता हैं तो गरीबों को सहूलियत क्यों नहीं दिया जा सकता है। यह योजनाएं बंद नहीं होगी। क्योंकि जब आम लोगों को यह भरोसा हो जाए कि उसके द्वारा दिए जाने वाला इन-डायरेक्ट का लाभ उन्हें ही मिलेगा तो उन्हें टैक्स देने का दुख नहीं होता। फसली विविधिकरण संभव नहीं, धान होगा तो पराली भी होगी किसानों को पारंपरिक खेती से मुक्ति दिलवाने के उठ रहे सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञापन देने मात्र से फसली चक्र नहीं टूटने वाला है। इसके लिए किसानों को बदली हुई फसल का मूल्य देना होगा। दीवारों पर हमने बहुत लिखा कि ‘हम दो हमारे दो’ तो इससे क्या जनसंख्या नियंत्रित हो गई। पराली में लगने वाली आग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि असली कारण को समझना ही होगा। अक्टूबर-नवंबर में दशहरा-दीपावली और दशहरा एक साथ आते हैं। किसान धान की पराली में इसलिए आग लगाता हैं क्योंकि उसे 10 से 12 दिन के भीतर गेहूं की फसल लगानी होती है। जब पंजाब 185 लाख मिट्रिक टन धान सेंट्रल पूल में देता हैं तो पंजाब बहुत अच्छा लेकिन इसके साथ पराली भी तो होगी। जब किसान पराली जलाते हैं तो कहा जाता हैं कि किसानों पर पर्चा दर्ज कर दो। 10 दिन से किसान अन्नदाता से अपराधी बन जाता है दस दिन पहले जो किसान अन्नदाता होता हैं 10 दिन बाद ही वह अपराधी बन जाता है। किसानों को पराली संभालने का इंसेंटिव देना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलती भी नहीं हैं कि दिल्ली में हंगामा शुरू हो जाता है। एनजीटी के सेवानिवृत्त जज ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब को यूं ही बदनाम किया जाता है। पंजाब के धुएं से दिल्ली को असर नहीं पड़ता। लेकिन जज साहब ने यह बात तब कहीं जब वह सेवानिवृत्त हो गए। सर्विंग में होते हुए उन्होंने यह बात नहीं कहीं। मुख्यमंत्री ने मार्डन खेती पर विशेष जोर दिया। पंजाब के छात्र जमीन पर नहीं बैठते मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। स्कूल आफ एमिनेंस तो बने ही हैं साथ ही पंजाब का अब कोई भी ऐसा स्कूल नहीं हैं जहां पर बच्चे जमीन पर पढ़ते हो। कोई स्कूल ऐसा नहीं हैं जो बिना चाहरदिवारी के हो। स्कूलों में लैब बने हैं और सकरारी स्कूल के बच्चे जेईई और नीट की परीक्षा पास कर रहे हैं। यह वहीं स्कूल जहां दो-तीन साल पहले तक बच्चों को जेईई और नीट के बारे में पता तक नहीं था। ड्रग्स को लेकर पंजाब बदनाम किया जा रहा ड्रग्स के मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, बदनाम तो पंजाब को किसा जाता हैं लेकिन 3000 किलों ड्रग्स मुंद्रा पोर्ट से पकड़ी जाती है। पंजाब सरकार ड्रग्स के खिलाफ मुहीम चला रही है। वहीं, नए इनोवेशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब प्रति दिन 15 मौतें सड़कों पर हो रही थी। लोग इसे कुदरती आपदा मानते थे लेकिन यह मानवीय आपदा थी। मुख्यमंत्री ने कहा जब मैंने सड़क सुरक्षा फोर्स का गठन किया तो सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आई। आज प्रति वर्ष 2600 कीमती जानें बचाई जा रही है।

सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के लिए 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति

किसानों को ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के भूअर्जन पर मिलेगा बाजार दर का 4 गुना मुआवजा सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के लिए 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति इन्दौख-रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 157 करोड़ 14 लाख रूपये की स्वीकृति छिन्दवाडा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिए 969 करोड़ रूपये के विशेष पुनर्वास पैकेज की स्वीकृति लोक निर्माण अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 2,190 करोड़ 44 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदेश में उन्नत चिकित्सा सेवाओं के लिए 5,479 करोड़ रूपये की स्वीकृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में परिजन आवास की स्थापना की स्वीकृति छठवें राज्य वित्त आयोग के कार्यों के संपादन के लिए 15 पदों के सृजन की स्वीकृति "मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम" के लिए 24 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कृषि भूमि के भूअर्जन पर गुणन कारक (मल्टीफिकेशन फैक्टर) को दोगुना करते हुए 2.0 कर दिया गया है। इससे अब अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा किसानों को दोगुना के स्थान पर बाजार दर से 4 गुना प्राप्त होगा। यह निर्णय संपूर्ण प्रदेश की ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के अधिग्रहण पर लागू होगा। मंत्रि-परिषद ने नगरीय सीमा में मुआवजा गुणन कारक को यथावत एक रखा गया है। मंत्रि-परिषद ने इसके साथ सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के कार्यों के लिए लगभग 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति भी दी है। भू-अर्जन पर बाजार दर का 4 गुना मुआवजा मिलने से किसानों को होगा जबरदस्त फायदा मंत्रि-परिषद ने किसानों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ' मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम 2015 ' के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गुणन कारक (Multiplication Factor) को बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है, जिससे किसानों को अब उनकी कृषि भूमि का बाजार दर से 4 गुना मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस निर्णय से सिंचाई परियोजनाओं, सड़क, पुल, रेलवे और बांध निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को अधिक राशि मिल सकेगी। इससे न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि भूमि देने वाले किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में मंत्री तुलसीराम सिलावट, राकेश सिंह और चेतन्य कुमार काश्यप की उप-समिति ने अनुशंसा की थीं। उप-समिति ने अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के साथ ही विभिन्न् किसान संगठन क्रेडाई,सीआईआई और फिक्की से चर्चा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की थी। सरकार के इस पारदर्शी और किसान-हितैषी निर्णय से प्रदेश के हजारों परिवारों को सीधा लाभ पहुँचेगा। इन्दौख-रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 157 करोड़ 14 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा उज्जैन जिले की इन्दौख- रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की लागत राशि 157 करोड़ 14 लाख रूपये, सैंच्य क्षेत्र 10,800 हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना से झारड़ा तहसील के 35 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ होगा। छिन्दवाड़ा सिंचाई काम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिए 969 करोड़ रूपये के विशेष पुनर्वास पैकेज की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा छिन्दवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिये स्वीकृत राशि 840 करोड़ 80 लाख रूपये के स्थान पर लगभग 969 करोड़ रूपये का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृति किया गया है। यह विशेष पैकेज त्वरित क्रियान्वयन व विस्थापितों के अपेक्षित सहयोग के लिए केन-बेतवा अन्तर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के समकक्ष प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। छिन्दवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना के अंतर्गत छिन्दवाड़ा जिले में संगम 1 बाँध, संगम 2 बाँध, रामघाट बांध एवं पांढुर्णा जिले में बेलेंसिग रिजर्वायर (पांढुर्णा) इस प्रकार कुल 4 बांध प्रस्तावित है, जिससे छिन्दवाड़ा एवं पांढुर्णा जिलों के 1,90,500 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी । परियोजना से छिन्दवाड़ा जिले के 369 एवं पांढुर्णा जिले के 259 ग्राम इस प्रकार कुल 628 ग्राम लाभान्वित होंगे। लोक निर्माण अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार म..प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़कों का निर्माण को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखे जाने और संचालन के लिए 7 हजार 212 करोड़ रूपये, ग्रामीण सडकों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के कार्य की निरंतरता के लिए 6 हजार 150 करोड रूपये, पुलों और सड़कों के उन्नयन के लिए 1 हजार 87 करोड़ रूपये, भवनों के मरम्मत और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 765 करोड़ रूपये और वृहद पुलों का निर्माण की योजना को सोलहवें वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031) तक में निरंतर रखे जाने और संचालन के लिए 9 हजार 950 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 2,191 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत ग्राम क्षेत्रों में शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 वीं एवं कक्षा 9 वी में अध्ययनरत विद्यार्थियों को साइकिल प्रदाय करने से संबंधित निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखने के लिए 990 करोड़ रूपये और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं के वेतन भत्ते, कार्यालयीन व्यय एवं संस्थानों का सृदृढ़ीकरण से संबंधित 8 योजनाओं के संचालन के लिए 1,200 करोड़ 44 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना मध्यप्रदेश में वर्ष 2004-05 से संचालित की जा रही है। निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना अंतर्गत निर्धारित मापदण्ड अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत् विद्यार्थी जो कि शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 वीं एवं कक्षा 9 वी में अध्ययनरत् है, तथा वह जिस ग्राम का निवासी है उस ग्राम में शासकीय माध्यमिक / हाईस्कूल संचालित नहीं है तथा वह अध्ययन के लिए किसी अन्य ग्राम या शहर के शासकीय स्कूल में … Read more

क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 को हरी झंडी, Haryana के सीएम सैनी बोले- विपक्ष महिला विरोधी

गुरुग्राम. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में गुरुग्राम में हरियाणा कैबिनेट की बैठक की। लोकसभा में नारी वंदन अधिनियम गिरने के विरुद्ध भाजपा सरकार विधानसभा में विपक्ष के विरोध में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। हरियाणा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाया गया है। सीएम नायब सैनी ने कहा कि हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 विधानसभा के स्पेशल सत्र में लाया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा के कॉमन कैडर के ग्रुप डी कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए जरूरी नियम बनाने पर भी सहमति बनी है। अगर कॉमन कैडर ग्रुप डी कर्मचारियों ने 5 साल से ज्यादा की सर्विस पूरी की तो वे क्लर्क के पद पर प्रमोशन के लिए एलिजिबल होंगे। हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस बिल 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है। ड्राफ्ट बिल में क्लर्क के पद के लिए ग्रुप डी से प्रमोशन के कोटे को 20% से 30% करने का प्रावधान किया गया। साथ ही 5% एक्स ग्रेशिया पद रखने की अनिवार्यता भी नियमों में शामिल की गई। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि 16 व 17 अप्रैल को संसद में जो कुछ हुआ उसने विपक्षी दलों का असली चेहरा देश के सामने उजागर किया। विपक्षी दलों का असली चरित्र महिला विरोधी और सत्ता का लोभी है। यह दिन देश के इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज हुआ। विपक्षी दलों ने महिलाओं को केवल वोट बैंक समझा लेकिन निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी से वंचित रखा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं की भागीदारी कोई दया नहीं, उनका अधिकार है। विपक्ष ने परिसीमन के नाम पर झूठ और भ्रम फैलाया और कहा के इससे कुछ राज्यों को नुकसान होगा। गृहमंत्री ने तथ्यों के साथ स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। आने वाले समय में महिलाएं अपने वोट की ताकत से महिला विरोधी दलों को करारा जवाब देंगी।

खाद्य मंत्री राजपूत ने किया अपील: पीएनजी पाइपलाइन वाले क्षेत्र में कनेक्शन जरूर लें

जिस क्षेत्र में पीएनजी पाइपलाइन है, वहां इसका कनेक्शन जरूर लें : खाद्य मंत्री राजपूत पीएनजी नेटवर्क का हो रहा तेजी से विस्तार भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि वर्तमान मिडिल ईस्‍ट संघर्ष से उत्‍पन्‍न परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्‍तार कर, ऐसे स्‍थानों पर जहां पर सीजीडी संस्‍था की पाईलाईन मौजूद है, घरेलू, व्‍यावयिक एवं औद्योगिक उपभोक्‍ताओं को एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। इस संबंध में जिला स्‍तर पर जिला प्रशासन, खाद्य विभाग, नगरीय निकाय, ऑयल कंपनी एवं सीजीडी संस्‍थाओं के अधिकारियों द्वारा सतत रूप से कैंम्‍पों का आयोजन कर पीएनजी के लाभ एवं पीएनजी कनेक्‍श्‍न प्राप्‍त करने की प्रक्रिया से आम जनता को अवगत कराया जा रहा है। जहाँ पर पीएनजी की पाइपलाइन है यदि वहाँ के उपभोक्ता ने पीएनजी कलेक्शन नहीं लिया तो उनको जून के बाद एलपीजी का सिलेंडर प्राप्त नहीं होगा। इसलिए ऐसे उपभोक्ताओं को जिनके घर के पास से पीएनजी की पाइप लाइन जा रही है, उनको पीएनजी का कनेक्शन लेना अनिवार्य है। मंत्री राजपूत ने गैस उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि जिस क्षेत्र में पीएनजी की पाइप लाइन है, वहां पीएनजी कनेक्शन जरूर लें। यह एलपीजी से ज्यादा सस्ती और सुरक्षित है। पीएनजी का मतलब पाइप्ड नेचुरल गैस (Piped Natural Gas) है। यह मुख्य रूप से मीथेन (CH4) से बनी एक प्राकृतिक गैस है, जो पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों और उद्योगों तक पहुंचाई जाती है। यह सिलेंडर (एलपीजी) का एक सुरक्षित, सुविधाजनक और स्वच्छ विकल्प है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से कुकिंग के लिए किया जाता है। पीएनजी के लाभ एक हरा ईंधन – मीथेन में कार्बन और हाइड्रोजन का अनुपात सबसे कम है, जो पीएनजी को सबसे स्वच्छ ईंधनों में से एक बनाता है। भारत में पीएनजी के घरेलू भंडार बहुत अधिक हैं, इसलिए एलपीजी की तुलना में पीएनजी का उत्पादन और आपूर्ति भू-राजनीतिक उथल-पुथल से कम प्रभावित होती है। एलपीजी प्राप्‍त करने के लिये उपभोक्ताओं को ऑयल कंपनी में बार-बार सिलेण्‍डर बुक कराना पड़ता है, जबकि पीएनजी में कुकिंग गैस 24×7 सुलभ रूप से उपलब्ध होती है। एलपीजी की अपेक्षाकृत पीएनजी कम दर पर उपलब्‍ध है। पीएनजी के उपभोक्‍ता को उसके द्वारा वास्‍तविक उपयोग की गई, मात्रा का ही भुगतान करना होता है, जबकि एलपीजी के संबंध में पूरा सिलेंडर बुक करके प्राप्‍त किया जाता है। पीएनजी पर पकाए गए भोजन का पोषण मूल्य बेहतर होता है, क्योंकि एलपीजी की तुलना में पीएनजी से निकलने वाली गर्मी की तीव्रता कम होती है। मौजूदा एलपीजी स्टोव को बहुत कम खर्च पर पीएनजी के उपयोग के लिए बदला जा सकता है। क्या PNG सुरक्षित है पीएनजी बिल्कुल सुरक्षित है, क्योंकि नेचुरल गैस (पीएनजी) हवा से हल्की होती है। रिसाव की स्थिति में, गैस ऊपर उठ जाएगी और पर्याप्त वेंटिलेशन के साथ आसपास की हवा में फैल जाएगी। पीएनजी कनेक्शन कैसे प्राप्त करें पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें। केवायसी दस्तावेज के रूप में पहचान और स्वामित्व प्रमाण/मकान मालिक की एनओसी लायें कण्‍ट्रोल रूम सीजीडी संस्‍थाओं को घरेलू एवं व्‍यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्‍शन प्राप्‍त करने के लिये सीजीडी संस्‍थाओं के कन्‍ट्रोल रूम नं. निम्‍नानुसार हैं। i. अवंतिका गैस लिमिटेड इंदौर, उज्‍जैन, ग्‍वालियर (9424098887) ii. गैल गैस लिमिटेड देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) iii. नवेरिया गैस लिमिटेड धार (07292-223311) iv. थिंक गैस भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107) v. आईओसीएल गुना (9425991090), मउगंज, रीवा(9424836488), अशोकनगर(9425119522), मुरैना(7223982333) vi. बीपीसीएल मैहर, सतना, शहडोल(9424738607), सीधी, सिंगरौली(9424341954) vii. गुजरात गैस लि. रतलाम (7412230292) प्रदेश के उन शहरों में जिन स्‍थानों से पाईपलाईन गई है, उस पाईपलाईन के आस-पास के घरेलू एवं व्‍यावसायिक उपभोक्‍ता पीएनजी कनेक्‍शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्रदेश के अन्‍य जिलों में पाईपलाईन का विस्‍तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्‍शन प्रदाय किये जा सकेंगे। 

भोपाल में गैस एजेंसी पर कार्रवाई की तैयारी, खाद्य विभाग ने एडीएम को सौंपा रिपोर्ट, एक एजेंसी रिटायर्ड अफसर की

भोपाल  राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियों से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां खाद्य विभाग की जांच में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद की बीएस एचपी गैस एजेंसी में सिलेंडर स्टॉक, सप्लाई और बिलिंग में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंप दी गई है, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हजारों गैस सिलेंडर गायब पाए गए हैं और उपभोक्ताओं को बिना डिलीवरी के ही ‘डिलीवर्ड’ दिखाया गया। अधिकारियों के अनुसार यह मामला बड़े स्तर की वित्तीय अनियमितता और उपभोक्ता ठगी से जुड़ा हो सकता है। भोपाल के जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद स्थित बीएस एचपी गैस एजेंसियों की जांच पूरी हो गई है। इसके बाद खाद्य विभाग ने जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंपी है। दो में से एक एजेंसी खाद्य विभाग के ही रिटायर्ड अफसर और उनके रिश्तेदार की है। बता दें कि एजेंसियों में गैस सिलेंडर की सप्लाई की शिकायत मिली थी। इसके बाद फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने टीम से जांच करवाई थी। जांच में सामने आया कि करीब 36 हजार वर्गफीट क्षेत्र में दोनों एजेंसियों के साझा गोदाम बने हैं। दोनों एजेंसियां का रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी से कनेक्शन जांच में एजेंसियां रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके रिश्तेदारों की होना सामने आया है। फूड कंट्रोलर जादौन ने बताया कि जांच रिपोर्ट  को कलेक्टर को सौंपी। आगे की कार्रवाई कलेक्टर द्वारा की जाएगी। स्टॉक जांच में सबसे बड़ी गड़बड़ी फीनिक्स एजेंसी में मिली। यहां 350 घरेलू, 350 कमर्शियल, और 2 हजार 5 किलोग्राम वाले छोटू सिलेंडर गायब थे। बीएस एजेंसी के गोदाम में भी 254 भरे सिलेंडर गायब मिले। यहां कमर्शियल सिलेंडरों के स्टॉक में भी गड़बड़ी सामने आई। जांच में एजेंसियां रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके रिश्तेदारों की होना सामने आया है। मुख्य विवरण जांच में सामने आया कि फीनिक्स एजेंसी से 350 घरेलू, 350 कमर्शियल और करीब 2 हजार छोटे सिलेंडर गायब हैं। वहीं बीएस एजेंसी के गोदाम से भी 254 भरे सिलेंडर कम पाए गए।रिपोर्ट्स के अनुसार कई उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन गैस बुकिंग की, लेकिन उन्हें सिलेंडर कभी नहीं मिला। इसके बावजूद सिस्टम में डिलीवरी पूरी दिखा दी गई। जांच में यह भी पाया गया कि ऐसे सिलेंडर ज्यादा कीमत लेकर अन्य ग्राहकों को बेच दिए गए। मिड हेडिंग: फर्जी बिलिंग का खेल जांच में फर्जी बिलिंग और अतिरिक्त वसूली का मामला भी सामने आया है।एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से होम डिलीवरी चार्ज लेने के बावजूद उन्हें खुद आकर सिलेंडर लेने पर मजबूर किया गया।बताया गया कि ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर हर महीने लाखों रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी। इसके अलावा 238 रुपए का फर्जी ‘सुरक्षा निरीक्षण शुल्क’ लेकर करीब 10 लाख रुपए तक की वसूली का मामला भी उजागर हुआ है। खाद्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गैस सिलेंडर की सप्लाई में गड़बड़ी हो रही है। इसके बाद फूड कंट्रोलर ने टीम गठित कर जांच शुरू कराई।जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों एजेंसियों का साझा गोदाम करीब 36 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बना है और संचालन में पारदर्शिता की कमी है। एक एजेंसी रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी बताई जा रही है। मिड हेडिंग: सप्लाई में हेरफेर ट्रांसपोर्ट और सप्लाई सिस्टम में भी गड़बड़ी मिली है।रिपोर्ट के अनुसार गैस सिलेंडर लेकर आने वाले ट्रक तय समय से कई घंटे देरी से पहुंचे, जिससे बीच में हेरफेर की आशंका जताई गई है।इसके अलावा एजेंसी द्वारा बताए गए 9 डिलीवरी वाहनों में से केवल 5 ही सक्रिय पाए गए, जिससे वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक बयान अधिकारियों के अनुसार यह मामला गंभीर है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।सूत्रों के मुताबिक 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी गई है और जल्द ही FIR दर्ज हो सकती है।जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा। प्रभाव / विश्लेषण इस मामले ने शहर के हजारों गैस उपभोक्ताओं को प्रभावित किया है।बिना डिलीवरी के भुगतान, फर्जी बिलिंग और अवैध वसूली जैसी गतिविधियों से लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला गैस वितरण प्रणाली में निगरानी की कमी को उजागर करता है और इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं। प्रशासन अब इस मामले में सख्त कार्रवाई के मूड में है।FIR दर्ज होने के बाद संबंधित एजेंसियों के संचालकों पर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने की संभावना है। आने वाले दिनों में अन्य गैस एजेंसियों की भी जांच तेज हो सकती है, ताकि इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।  सिलेंडर बुक हुए, लेकिन ग्राहकों तक पहुंचे ही नहीं जांच में सामने आया कि गैस एजेंसियों के संचालकों ने बड़ी संख्या में सिलेंडरों का हेरफेर किया है। जिन्होंने ऑनलाइन गैस सिलेंडर बुक कराए थे, एजेंसियों की ओर से उन उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं पहुंचाए। जब उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचे तो पता चला कि उनको सिलेंडर की डिलीवरी हो गई है, जबकि उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचे ही नहीं थे। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सिलेंडर अधिक पैसे लेकर किसी और को दिए गए। एजेंसियों के गोदाउन में स्टॉक के अनुसार भी सिलेंडर नहीं पाए गए। इतना नहीं शहर इन एजेंसियों की अलावा अन्य एजेंसियों व अवैध परिवहन, अवैध रिफिलिंग करने वालों की भी जांच रिपोर्ट एडीएम को दी गई है। 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। ऐसे में इन एजेंसियों के संचालकों व अवैध गैस सिलेंडरों का परिवहन व रिफिलिंग करने वालों पर जुर्माना व एफआईआर तक कार्रवाई हो सकती है। एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुमोदन पर एडीएम संबंधित गैस कंपनियों को एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव जल्द भेजा सकता है। 238 रुपए का फर्जी सुरक्षा चार्ज, 10 लाख की वसूली उजागर जेके रोड स्थित मीनाल रेसिडेंसी की मेसर्स फिनिक्स एचपीसीएल गैस एजेंसी में 10 तरह की गड़बड़ियां मिली हैं। जानिए क्या हैं वो 10 प्रकार की गड़बड़ियां, इनके जरिए कैसे … Read more

केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही महादेव का जयकारा, दर्शनार्थियों पर हुई पुष्प वर्षा

रुद्रप्रयाग केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही पूरा धाम हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। इसी के साथ केदारनाथ यात्रा का शुभारंभ हो गया। कपाटोद्घाटन के सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने। बाबा केदार के धाम को को करीब 51 कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहले ही धाम पहुंच चुके थे और कपाट खुलने के इस अद्भुत क्षण साक्षी बने। बाबा के कपाट खुलने से हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई।विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार प्रातः शुभ मुहूर्त में ठीक 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसी के साथ केदारनाथ यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। इस दौरान हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और पूरा धाम भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। प्रातः लगभग 4 बजे से ही धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए थे। पंचमुखी डोली की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान की डोली को मंदिर प्रांगण में लाया गया, जहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत कपाट खोलने की तैयारियां पूरी की गईं।ठीक 8 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही सर्वप्रथम भगवान की पंचमुखी डोली को गर्भगृह में प्रवेश कराया गया और सभी धार्मिक औपचारिकताओं के पश्चात भगवान केदारनाथ विधिवत विराजमान हुए। कपाट खुलने के दौरान हेलीकॉप्टर से मंदिर पर भव्य पुष्प वर्षा की गई, जिसने श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था को और भी बढ़ा दिया।इस भव्य आयोजन के साथ ही बाबा केदार के दर्शन के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का सिलसिला शुरू हो गया है।श्रद्धा, आस्था और भक्ति के इस अद्भुत संगम ने पूरे केदारनाथ धाम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।  

एमपी के एक जिले में जल संकट बढ़ा, 15 जुलाई तक अभावग्रस्त घोषित, कलेक्टर ने जारी किया सख्त आदेश

छतरपुर  एमपी के छतरपुर जिले में इस वर्ष औसत से कम वर्षा के चलते आने वाले ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत पूरे जिले… छतरपुर (राजेश चौरसिया): एमपी के छतरपुर जिले में इस वर्ष औसत से कम वर्षा के चलते आने वाले ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत पूरे जिले को 15 जुलाई 2026 तक के लिए जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। पेयजल स्रोतों का सीमित उपयोग जरूरी जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के पेयजल स्रोतों का उपयोग सिंचाई या व्यावसायिक कार्यों में नहीं कर सकेगा। प्रशासन का उद्देश्य आम जनता के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। 150 मीटर दायरे में नए नलकूप पर प्रतिबंध हैंडपंप या ट्यूबवेल के 150 मीटर की परिधि में नए हैंडपंप या ट्यूबवेल का खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा निस्तारी तालाबों के पानी का उपयोग भी सिंचाई और व्यावसायिक कार्यों के लिए नहीं किया जा सकेगा। विशेष अनुमति के बाद ही होगा नलकूप खनन शासकीय कार्यों को छोड़कर अन्य सभी नलकूपों के खनन पर रोक लगा दी गई है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की लिखित अनुमति मिलने पर ही नलकूप खोदे जा सकेंगे। उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रशासन सतर्क जिला प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय संभावित जल संकट को देखते हुए लिया गया है, ताकि गर्मी के दौरान आम लोगों को पेयजल की कमी का सामना न करना पड़े। 150 मीटर के दायरे में नहीं खुदेंगे नए हैंडपंप-ट्यूबवेल प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिले में नए नलकूपों के खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। अब किसी भी मौजूदा हैंडपंप या ट्यूबवेल के 150 मीटर के दायरे में नया हैंडपंप या ट्यूबवेल नहीं खोदा जा सकेगा। शासकीय कार्यों के लिए नलकूप खनन को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। हालांकि, आम लोगों को विशेष परिस्थितियों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की लिखित अनुमति प्राप्त होने पर ही नलकूप खोदने की परमिशन मिल सकेगी। निस्तारी तालाबों के पानी से सिंचाई और व्यापार पर बैन प्रशासन का मुख्य उद्देश्य भीषण गर्मी के मौसम में आम जनता के लिए पेयजल की कमी को दूर करना है। इसके लिए तय किया गया है कि अब जिले में कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के पेयजल स्रोतों का उपयोग खेतों की सिंचाई या व्यावसायिक कार्यों के लिए नहीं कर सकेगा। इसके अतिरिक्त, निस्तारी तालाबों के पानी का उपयोग भी सिंचाई और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए पूरी तरह से वर्जित रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन आदेशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हरा सोना संग्राहकों के लिए बड़ी राहत, आय बढ़ाने की दिशा में 920 करोड़ रुपए का संभावित भुगतान

हरा सोना संग्राहकों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम, 920 करोड़ रुपए का होगा संभावित भुगतान लगभग 920 करोड़ रुपए का होगा संभावित भुगतान तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में जुड़े 13 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवार रायपुर छत्तीसगढ़ और अन्य वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है, जो आदिवासियों और वनवासियों की आजीविका का मुख्य साधन है। हाल के नीतिगत बदलावों और सरकारी पहलों के कारण इन संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है।           वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा लघु वनोपज संग्राहकों, विशेषकर आदिवासी समुदाय की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए कर दी गई है, जिसका सीधा लाभ लाखों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के अंतर्गत 902 प्राथमिक समितियों में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष लगभग 15 लाख से अधिक मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का अनुमान है। एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां होती हैं और प्रत्येक गड्डी में 50 पत्ते शामिल रहते हैं।  लगभग 11 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण होने की संभावना           बस्तर संभाग के 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों में करीब 4 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अन्य 21 यूनियनों की 868 समितियों में लगभग 11 लाख मानक बोरा संग्रहण होने की संभावना है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। बस्तर संभाग में वर्ष 2025 के 3.90 लाख परिवारों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4.04 लाख हो गई है। इस साल अब तक 14 हाजर 57 नए परिवार इस कार्य से जुड़े हैं। 10 नए फड़ और बेहतर तैयारी         नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ों की स्थापना की गई है, जहां 2100 से अधिक मानक बोरा संग्रहण का अनुमान है। इसके अलावा सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं। पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाधाओं के कारण 351 फड़ों में संग्रहण नहीं हो सका था, लेकिन इस वर्ष सभी फड़ों में कार्य शुरू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। सुगम संचालन और पारदर्शी भुगतान         संग्रहण कार्य को सुचारू बनाने के लिए संग्राहक कार्ड, बोरा, सुतली, गोदाम और परिवहन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही तेन्दूपत्ता के भंडारण का बीमा भी कराया जा रहा है। संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी। 920 करोड़ रुपये का संभावित भुगतान        इस वर्ष निर्धारित दर के अनुसार संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। तेन्दूपत्ता संग्रहण को लेकर सरकार की यह पहल न केवल वनवासियों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

गडकरी ने पेश किया नया विजन: 100% इथेनॉल पेट्रोल से चलेगी कारें, कंपनियों को होंगे बड़े चैलेंज

नई दिल्ली देश के अंदर अब E20 यानी 20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल मिलने लगा है। सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को धीरे-धीरे करके बढ़ाएगी। हालांकि, अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत से पेट्रोल में "100% इथेनॉल ब्लेंडिंग" की तरफ बढ़ने का एक अपील की है। उन्होंने इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में बोलते हुए कहा कि ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना अब सिर्फ एक पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है। गडकरी का ये बयान ऐसे समय में आया हैं जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पश्चिम एशिया में चल रहे लंबे संघर्ष से जूझ रहे हैं, जिसने पारंपरिक तेल सप्लाई चेन को काफी हद तक बाधित कर दिया है। साथ ही, आयात बिलों को बढ़ा दिया है। उनके इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन के आयात पर भारत की भारी निर्भरता है। वर्तमान में देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 87% आयात के जरिए पूरा करता है, जिससे सरकारी खजाने से सालाना लगभग 22 लाख करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाना गडकरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे "संकट" ने इस व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिससे भारत के लिए अपने ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इंटरनेशनल कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से अलग करना जरूरी हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि 100% इथेनॉल (E100) मॉडल की तरफ बढ़कर (जैसा ब्राजील में सफलतापूर्वक लागू किया गया है) भारत अपने विशाल कृषि अधिशेष का लाभ उठा सकता है। यह बदलाव न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि किसानों को "अन्नदाता" से "ऊर्जादाता" में बदलकर उन्हें सीधा आर्थिक बढ़ावा भी देगा। ICE इंजन में बदलाव की जरूरत भारत ने पिछले तीन सालों में अपने बायोफ्यूल प्रोग्राम में तेजी से प्रगति की है। 1 अप्रैल, 2026 को पूरे देश में E20 (20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) को लागू करने के बाद, सरकार अब अगले लक्ष्य की ओर देख रही है। जहां E20 का उपयोग मौजूदा इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) में मामूली बदलावों के साथ किया जा सकता है। वहीं E100 या E85 की ओर बढ़ने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFVs) की तरफ एक मजबूत बदलाव की आवश्यकता है। गडकरी ने बताया कि आने वाले CAFE III (कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता) स्टैंडर्ड, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले हैं, ये इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए प्रोत्साहन देंगे। बताया जा रहा है कि E85 फ्यूल के लिए एक मसौदा अधिसूचना पहले से ही अंतिम चरण में है, जो इस बात का संकेत है कि हाी ब्लेंडिंग स्तरों के लिए बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। अल्टरनेटिव फ्यूल को बढ़ावा गडकरी ने साफ किया कि जहां एक तरफ सरकार अल्टरनेटिव फ्यूल को बढ़ावा दे रही है। वहीं, ग्राहकों को इस बदलाव के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके बजाय, ध्यान टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट की क्वालिटी को बेहतर बनाने पर होगा, ताकि ग्रीन गाड़ियां ज्यादा आकर्षक लगें। मैन्युफैक्चरर्स के लिए चुनौती ऐसे इंजन बनाने में है जो ज्यादा इथेनॉल कंसंट्रेशन को संभाल सकें, क्योंकि यह आम पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा कोरोसिव होता है। ग्रीन हाइड्रोजन में भी संभावनाएं इथेनॉल के अलावा, गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाओं को भी "फ्यूचर फ्यूल" के तौर पर खास तौर पर बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर प्रोडक्शन लागत को घटाकर लगभग $1 प्रति किलोग्राम तक लाया जा सके, तो यह भारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर में क्रांति ला सकता है। हालांकि, अभी के लिए, इथेनॉल ही "जहरीले" फॉसिल फ्यूल का सबसे ज्यादा मुमकिन और तुरंत मिलने वाला ऑप्शन बना हुआ है। यह एक ऐसा सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पेश करता है जो खेती के कचरे को भारत के भविष्य की तरक्की के लिए ईंधन में बदल देता है।