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मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द, राज्यसभा की तीनों सीटों पर BJP उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत लगभग तय

भोपाल मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस (Congress) की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है, कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन पत्र मंगलवार को जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द कर दिया. इसके साथ ही प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है. मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की जीत लगभग तय मानी जा रही है. भाजपा के अन्य दो उम्मीदवार राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल भी बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंचेंगे।  राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने नटराजन का नामांकन इस आधार पर निरस्त किया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी. मामला 2025 का बताया जा रहा है, जिसमें हैदराबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक पूर्व पार्षद की निजी शिकायत पर मीनाक्षी नटराजन को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया था. नटराजन वर्तमान में तेलंगाना की कांग्रेस प्रभारी भी हैं।  साढ़े चार घंटे की सुनवाई के बाद फैसला भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई थी. केवट ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अदालत से जारी नोटिस की जानकारी अपने हलफनामे में नहीं दी, इसलिए उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए. करीब साढ़े चार घंटे की सुनवाई और इंतजार के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति स्वीकार करते हुए नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया।  कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया कांग्रेस ने इस फैसले को असंवैधानिक, अवैध और लोकतंत्र पर हमला बताया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी महिला सम्मान और महिला आरक्षण की बात तो करती है, लेकिन मध्य प्रदेश में जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने भाजपा की वास्तविक सोच को देश और दुनिया के सामने उजागर कर दिया है. महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के नाम पर केवल राजनीतिक दिखावा किया जा रहा है।  उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर और निर्वाचन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. पटवारी ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी को निष्पक्षता और कानून के दायरे में काम करना चाहिए था, लेकिन जिस तरह की भूमिका सामने आई है, उससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा, 'आज मध्य प्रदेश में हुई घटना पूरे देश के लिए एक काला अध्याय है. इसके विरोध में कल मध्य प्रदेश कांग्रेस का हर नेता और हर कार्यकर्ता चुनाव आयोग और भाजपा द्वारा किए गए इस लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ भूख हड़ताल करेगा।  नेता प्रतिपक्ष का भाजपा पर आरोप नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा को शुरू से मालूम था कि कांग्रेस के पास राज्यसभा चुनाव में 62 विधायकों का समर्थन है. इसके बावजूद कांग्रेस विधायकों के टूटने की अफवाहें फैलाई गईं और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई. सिंघार ने कहा, 'जब यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस विधायक एकजुट हैं, तब नामांकन प्रक्रिया को लेकर आपत्तियों और अन्य प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया।  मीनाक्षी नटराजन ने भी फैसले को लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर विषय बताया. उन्होंने कहा, 'जब सदन में पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी से हमें समझ में आने लगा था कि वे लोकतंत्र और संविधान का गला घोंटने की राजनीति कर रहे हैं. जो बात पहले वोट चोरी तक सीमित थी, वह अब सीट चोरी तक पहुंच गई है।  मीनाक्षी नटराजन ने क्या कहा? नटराजन ने कहा कि जब भाजपा को यह महसूस हुआ कि कांग्रेस विधायक एकजुट हैं और सदन विभाजित नहीं है, तब एक कानूनी नोटिस का सहारा लिया गया. उन्होंने कहा, 'हमारे दोनों अधिवक्ताओं ने अपने तर्क प्रस्तुत किए, लेकिन उन्हें सुना नहीं गया और फैसला सुना दिया गया. इससे उनकी मंशा पूरी तरह स्पष्ट हो गई है. यह केवल एक उम्मीदवार के नामांकन का मामला नहीं है, बल्कि देश में लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा एक गंभीर विषय है।  कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने का आदेश कानून और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है. उनके अनुसार, हैदराबाद न्यायालय द्वारा जारी नोटिस BNSS की धारा 223 के अंतर्गत था, जो केवल सुनवाई का अवसर प्रदान करने की प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो किसी अपराध का संज्ञान लिया गया था, न कोई समन जारी हुआ था और न ही नटराजन को किसी आपराधिक प्रकरण में आरोपी घोषित किया गया था।  कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी पार्टी? गुप्ता ने कहा, 'धारा 223 स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी प्रकरण में न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लेने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर उसका पक्ष सुना जाएगा. ऐसे में इसे आपराधिक प्रकरण मानना ही विधि सम्मत नहीं है.' उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की ओर से विस्तृत लिखित जवाब, न्यायिक निर्णयों और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया था, लेकिन उन तर्कों पर विचार किए बिना आदेश पारित कर दिया गया।  गुप्ता ने कहा, 'आदेश में हमारे प्रमुख कानूनी तर्कों का उल्लेख तक नहीं है. इसलिए हमारा मानना है कि यह एक नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर है, जो तथ्यों और कानून के समुचित परीक्षण के बिना पारित किया गया है. हम इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देंगे और न्यायपालिका के समक्ष सभी तथ्य रखेंगे हमें विश्वास है कि कानून और न्याय की जीत होगी।  नामांकन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया ने नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि नामांकन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे. दस विधायकों के हस्ताक्षर, शपथ पत्र, रसीद और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज पूरी तरह प्रस्तुत किए गए थे. अधिकारियों द्वारा दी गई चेकलिस्ट में भी स्पष्ट रूप से दर्ज था कि सभी दस्तावेज सही हैं और कोई कमी नहीं है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मंगलवार की कार्यवाही के दौरान जब कांग्रेस नेता दोपहर करीब दो बजे पहुंचे, तब वहां सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोहित आर्य मौजूद थे।  धनोपिया ने कहा, 'हमने यह प्रश्न उठाया कि वे किस हैसियत से … Read more

चुनाव से पहले सियासी हलचल, क्या कैप्टन की घर वापसी बदल देगी पंजाब का राजनीतिक समीकरण?

चंडीगढ़ पंजाब की सियासत इस समय एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. शिरोमणि अकाली दल के भीतर मचे घमासान और भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संघर्ष के बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पटियाला के महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक बार फिर कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं. दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि पंजाब की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पुरानी पार्टी का हाथ थाम सकते हैं. हालांकि, इस खबर के बीच शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात हुई है. कैप्टन सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के लोकसभा सांसद अमर सिंह के एक बयान ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।  चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की संभावना पर बेहद सधा हुआ और गंभीर बयान दिया. उन्होंने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बेहद वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की है और पार्टी सहित सरकार में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. हम उनके सामने काफी जूनियर हैं. इसलिए, अगर उनकी वापसी या इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चा की आवश्यकता है, तो उसे सीधे हमारा शीर्ष नेतृत्व ही हैंडल करेगा.” सांसद अमर सिंह का यह बयान साफ इशारा करता है कि कैप्टन की वापसी की फाइल अब सीधे दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंच चुकी है।  पंजाब विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर? अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी औपचारिक रूप से हो जाती है, तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की पूरी बिसात ही बदल जाएगी. साल 2022 के चुनाव से ठीक पहले जिस तरह अपमानजनक ढंग से कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था और उसके बाद कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी, उस गलती को सुधारने का मौका अब पार्टी के पास होगा।  हिंदू और सिख वोट बैंक का अनूठा समन्वय कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के इकलौते ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी पकड़ सिखों के साथ-साथ राज्य के शहरी हिंदू मतदाताओं पर भी समान रूप से मजबूत है।  जमीनी कैडर में नया जोश: नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य प्रांतीय नेताओं की आपसी कलह के कारण जो पारंपरिक कांग्रेस कार्यकर्ता आज घर बैठा है या उदासीन है, कैप्टन का नाम सामने आते ही वह दोबारा सड़कों पर सक्रिय हो जाएगा।  राष्ट्रवाद और पंजाब की सुरक्षा का नैरेटिव: सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब में सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कैप्टन की फौजी पृष्ठभूमि और राष्ट्रवाद की मुखर छवि कांग्रेस को अकाली दल और भाजपा के मुकाबले एक मजबूत बढ़त दिलाएगी।  क्या पंजाब में ‘आप’ को टक्कर सिर्फ कांग्रेस ही देगी? वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के सामने मुख्य चुनौती पेश करने के मामले में कांग्रेस सबसे आगे खड़ी दिख रही है. अकाली दल इस समय गंभीर आंतरिक कलह और नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है, जबकि भाजपा अभी भी शहरी इलाकों से निकलकर पंजाब के ग्रामीण और किसान बहुल क्षेत्रों में अपनी मजबूत पैठ नहीं बना पाई है. राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, ‘पंजाब की जनता पारंपरिक रूप से एक मजबूत और स्थापित चेहरे को पसंद करती है. पिछले चुनाव में आप को एक बड़े विकल्प के रूप में मौका मिला था, लेकिन एंटी-इंकंबेंसी और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घिरी सरकार के सामने विपक्ष का स्पेस पूरी तरह खाली है. कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस में आते ही यह लड़ाई सीधे तौर पर आप बनाम कांग्रेस के द्विपक्षीय मुकाबले में तब्दील हो जाएगी, जहां कांग्रेस का पलड़ा बेहद भारी हो सकता है।  पंजाब का इतिहास गवाह है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को जब-जब राजनीतिक रूप से कमतर आंका गया, उन्होंने उतनी ही मजबूती से वापसी की है. भले ही उनकी उम्र इस समय एक फैक्टर हो, लेकिन पंजाब की जनता के बीच उनकी राजनीतिक साख और प्रशासनिक अनुभव का कोई सानी नहीं है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली में बैठी कांग्रेस की टॉप लीडरशिप पंजाब के प्रांतीय नेताओं के विरोध को दरकिनार कर कैप्टन की घर वापसी पर कब अंतिम मुहर लगाती है. इस फैसले पर ही पंजाब की भावी सत्ता का भविष्य निर्भर करेगा। 

क्यों अहम है मालवा की 69 सीटों की लड़ाई? पंजाब की राजनीति का सबसे बड़ा रणक्षेत्र

अमृतसर  पंजाब की सियासत में सबसे अहम क्षेत्र है मालवा, केवल इसलिए नहीं कि कुल 117 विधानसभा सीटों में से 69 इसी क्षेत्र में हैं बल्कि इसलिए भी कि इस इलाके से उठी सियासी लहर पूरे पंजाब में सियासत के रुख को बदल देती है। राजनीति हो या किसानी आंदोलन यहां के नेता और बाशिंदों ने बखूबी अपना दम दिखाया है। कद्दावर नेताओं के साथ-साथ बड़ी किसान जत्थेबंदियां का मालवा से संबंध है।   पंजाब के सभी राजनीतिक दल इस क्षेत्र का सियासी महत्व जानते हैं लिहाजा साल 2027 के मद्देनजर नेताओं ने इस क्षेत्र पर अपना फोकस और सक्रियता बढ़ा दी है। इसके इतर मालवा के मतदाताओं की खास बात यह है कि यहां के लोगों ने सभी दलों को परखा, समझा और फिर अपनी सेवा का मौका दिया। पिछले पांच विधानसभा चुनावों का ट्रेंड इसी बात को साबित करता है। यही वजह है कि भाजपा को छोड़कर कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और आम आदमी पार्टी इस क्षेत्र को अपना-अपना गढ़ मानते रहे हैं मगर यहां मतदाताओं का मिजाज पढ़ना आसान नहीं है। साल 2002 के विधानसभा चुनाव का परिणाम देखें तो कांग्रेस को यहां सबसे ज्यादा 29 सीटें मिली थीं जबकि 27 सीटों के साथ शिअद दूसरे नंबर पर थी। साल 2007 में मालवा की 37 सीटें कांग्रेस जीती थी जबकि अकालियों के खाते में 19 सीटें आई थीं। साल 2012 में शिअद ने 34 सीटों पर कब्जा किया जबकि कांग्रेस 31 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई।  साल 2017 में कांग्रेस ने 40 सीटें जीतकर मालवा में दोबारा जलवा दिखाया जबकि अकाली 8 सीटों पर सिमट गए। इसी चुनाव में सूबे में नया दल आम आदमी पार्टी (आप) ने पहली बार इस इलाके से 18 सीटें जीती। साल 2022 के चुनाव में मालवा के मतदाताओं ने आप पर इतना प्यार लुटाया कि पार्टी ने इस क्षेत्र की 69 में से 66 सीटों पर कब्जा किया। कांग्रेस 2 और अकाली 1 सीट पर सीमित रह गए। मतदाताओं का यह रुझान बताता है कि यहां के बाशिंदे लहर के साथ चलते हैं। पंजाब के बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का (अबोहर तहसील को छोड़कर), फिरोजपुर, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, मुक्तसर साहिब, रूपनगर व संगरूर मालवा का हिस्सा हैं। पार्टियों के अध्यक्ष यही सें, डेरा फैक्टर असरदार बरनाला से राजनीतिक मामलों के माहिर बघेल सिंह धालीवाल बताते हैं कि मालवा के लोग सरल मगर क्रांतिकारी प्रवृत्ति के हैं। यही वजह है कि नेताओं की घोषणाओं, उनके भाषणों, उनकी गतिविधियों और वादों का यहां के मतदाताओं पर बड़ा असर पड़ता है। पेंडू (ग्रामीण) कल्चर का भी यहां सियासत में काफी प्रभाव रहता है। अधिकतर बड़े नेता इसी संस्कृति की देन है। डेरा (सिरसा व ब्याास) फैक्टर भी अच्छी पकड़ रखता है। हालांकि सभी जातियों के लोग यहां बसते हैं मगर जट सिख बिरादरी की सियासत यहां ज्यादा अहम दिखती है। मोगा से सियासी मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि पंथक मसलों का इस बेल्ट में बहुत असर रहता है। बरगाड़ी, बहबलकलां, कोटकपूरा में बेअदबी कांड हो या फिर हाथ में गुटका साहिब रखकर सूबे से नशा खत्म करने की बात हो, पंथ के हर मसले से जुड़ी बात यहां से उठकर पूरे पंजाब में सियासी असर डालती है। राजनीतिक विषयों के विशेषज्ञ जगतार सिंह भुल्लर कहते हैं मालवा की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आप, कांग्रेस, शिअद और अब भाजपा ने अपने-अपने प्रदेशाध्यक्ष इसी क्षेत्र से चुने है। कांग्रेस, शिअद और आप तो यहां की सियासत में अपना जलवा दिखा चुके हैं, अब भाजपा यहां ज्यादा फोकस कर रही है। इस इलाके में विकास की बात भी होती है लेकिन लोक लुभावनी घोषणाओं की मतदाताओं पर गहरी छाप दिखती है। मिशन 2027 के लिए अहम क्यों? इन दिनों मालवा की सियासी महत्ता फिर बढ़ी हुई है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। सभी दल इन इलाकों में अपना-अपना पार्टी सर्वे करवा रहे हैं। कांग्रेस करवा चुकी है। बठिंडा, मानसा, सरदूलगढ़, मोड़ मंडी, रामपुरफूला, तलवंडी साबो इत्यादि क्षेत्रों में किसान वर्ग निर्णायक बनता है। साल 2022 के परिणामों में यहां दबदबा तो आप का है मगर कांग्रेस और अकाली यहां दोबारा अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं जबकि भाजपा के लिए यहां खाेने के लिए कुछ नहीं है। लिहाजा सभी दलों ने यहां ताकत झोंकनी शुरू कर दी है।  

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8th Pay Commission से वेतन में हो सकती है बंपर बढ़ोतरी

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग की जा रही है। अगर सरकार सबसे अधिक प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.83 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹68,940 हो सकता है। क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को नए सैलरी स्ट्रक्चर में परिवर्तित किया जाता है। वेतन आयोग की सिफारिशों में यह सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर वेतन, पेंशन, भत्ते और एरियर तय होते हैं। 7वें वेतन आयोग में कितना था फिटमेंट फैक्टर? 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। 8वें वेतन आयोग के लिए क्या हैं मांगें? विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।विशेषज्ञों का फिटमेंट फैक्टर का अनुमान 1.92 है। जबकि, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) का 3.00 और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) का 3.25 है। वहीं, जम्मू-कश्मीर कर्मचारी मंच का अनुमान 3.05 और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी समन्वय समिति का 2.86 से 3.68 है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)ने 3.83 का अनुमान लगाया है। फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कितना हो सकता है वेतन? मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 को आधार मानें तो संभावित वेतन इस प्रकार हो सकता है… 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹34,560 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹46,260 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹51,480 3.00 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹54,000 3.25 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹58,500 3.68 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹66,240 3.83 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹68,940 अगर सरकार 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर ही लागू करती है, तब भी न्यूनतम मूल वेतन ₹46,260 तक पहुंच सकता है। वहीं, कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर मंजूर होने पर वेतन में करीब 283 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। सिर्फ वेतन ही नहीं, भत्ते भी बढ़ेंगे फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का असर केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी होगी। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की समीक्षा होगी और मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में समाहित किया जाएगा। नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू होने के बाद DA की गणना फिर से शुरू होगी। कर्मचारियों की निगाह सरकार के फैसले पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, वेतन और पेंशन में उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है।

मोदी सरकार में बदलाव के संकेत, राज्यसभा चुनाव के बाद कई मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं

नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही एनडीए सरकार में कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अटकलें हैं कि इस बार कई राज्य मंत्रियों को बदला जा सकता है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि किन मंत्रालयों में बड़े स्तर पर बदलाव होंगे, लेकिन कहा जा रहा है कि इसकी संख्या एक दर्जन मंत्रियों तक जा सकती है। खास बात है कि 18 जून को राज्यसभा चुनाव हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी कैबिनेट को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कम से कम 2 कैबिनेट मंत्री और 3 राज्य मंत्रियों परिषद से बाहर हो सकते हैं। अटकलें ये भी हैं कि एक वरिष्ठ मंत्री को दक्षिण भारतीय राज्य में पार्टी की कमान भी सौंपी जा सकती है। दूसरे दलों को भी मिलेंगे पद रिपोर्ट के मुताबिक, सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि मोदी सरकार की नई कैबिनेट में JD(U), TDP, NCP और RLM जैसे सहयोगी दलों (Allies) को जगह मिल सकती है। इसमें भी नीतीश कुमार की JD(U) और चंद्रबाबू नायडू की TDP को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। जबकि, सहयोगी दलों के ज्यादातर नेताओं को राज्य मंत्री का पद मिलने की उम्मीद है। राज्यसभा चुनाव कहा जा रहा है कि राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे कई मंत्रियों को इस साल या 2027 की शुरुआत में संगठन में भेजा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि 70 साल से ज्यादा उम्र के कुछ राज्यसभा सांसदों को बदलने पर विचार किया जा सकता है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि भाजपा मोर्चा नेताओं को कैबिनेट में पहली बार शामिल किया जा सकता है। इन मंत्रालयों में बदलाव के आसार रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे, वित्त, कॉर्पोरेट अफेयर्स, कोयला, टेक्सटाइल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, ग्रामीण विकास, रसायन और उर्वरक, सहकारिता, मत्स्य पालन, जल शक्ति, कृषि और पर्यावरण, कानून और अन्य में बदलाव के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। राज्यसभा चुनाव 18 जून को होने वाले चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीट, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीट, झारखंड की दो सीट तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा। जिन 26 सीटों के लिए चुनाव एवं उपचुनाव हो रहा है उनमें एनडीए के पास 18 सीटें हैं और इनमें भी 12 सीटें भाजपा की हैं।

होम लोन लेने वालों के लिए बड़ा अपडेट! नए CIBIL नियम के बाद बढ़ सकता है ब्याज का बोझ

 नई दिल्ली RBI के ECL नियम लागू होने के बाद बैंकों को ज्यादा प्रावधान करना होगा, कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों के लिए बढ़ सकती हैं ब्याज दरें अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है तो आने वाले समय में होम लोन, ऑटो लोन और एजुकेशन लोन लेना पहले के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए 'ECL Direction-2026' के लागू होने के बाद बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को कर्ज देने में अधिक सतर्कता बरतेंगे. बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को या तो लोन मिलने में दिक्कत होगी या फिर उन्हें ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ेगा।  कई मामलों में बैंक अतिरिक्त गारंटी या कोलेटरल की भी मांग कर सकते हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात है कि देश में करीब 62 फीसदी लोन आवेदकों का CIBIL स्कोर 730 से कम है. ऐसे में अगले साल से बड़ी संख्या में लोगों के लिए होम, ऑटो और एजुकेशन लोन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नए नियम RBI का 'Expected Credit Loss (ECL) Direction-2026' 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. वर्तमान व्यवस्था में बैंक किसी लोन के एनपीए (Non-Performing Asset) बनने के बाद उसके लिए प्रावधान करते हैं. आमतौर पर ये स्थिति तब आती है, जब ग्राहक 90 दिनों तक किश्त नहीं चुकाता.  नई व्यवस्था में बैंकों को संभावित डिफॉल्ट का अनुमान पहले ही लगाना होगा और उसके हिसाब से अलग से रकम रखनी होगी. यानी लोन डूबने का इंतजार नहीं किया जाएगा और संभावित नुकसान के लिए पहले से तैयारी करनी होगी. जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है और कुल मिलाकर करीब 42 हजार करोड़ रुपये तक का असर पड़ सकता है।  प्रीमियम ग्राहकों पर रहेगा ज्यादा फोकस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए नियम लागू होने के बाद बैंक उन ग्राहकों से ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं जिनमें डिफॉल्ट का जोखिम अधिक है. वहीं, बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को ब्याज दरों में रियायत और बेहतर शर्तों पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है. इसी वजह से बैंक 730 या उससे ज्यादा CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों पर ज्यादा फोकस करेंगे. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक देश में करीब 7 करोड़ ऐसे ग्राहक हैं जिनका क्रेडिट स्कोर 730 या उससे ज्यादा है।  बैंक कैसे लगाएंगे भविष्य के जोखिम का अनुमान? ECL फ्रेमवर्क के तहत बैंक मौजूदा भुगतान स्थिति देखने के साथ कई दूसरे इंडिकेटर्स का भी एनालिसिस करेंगे जिनमें शामिल हैं- -ग्राहक का भुगतान रिकॉर्ड -CIBIL स्कोर में बदलाव -आय में कमी या अस्थिरता -नौकरी जाने का जोखिम -लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो  -मौजूदा कर्ज की स्थिति इन आंकड़ों के आधार पर बैंक तय करेंगे कि भविष्य में डिफॉल्ट की आशंका कितनी है.  डिफॉल्ट पर कई गुना बढ़ेगा प्रावधान नए नियमों के तहत बैंकों को डिफॉल्ट की स्थिति में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रकम अलग रखनी होगी. उदाहरण के तौर पर, 25 लाख रुपये के होम लोन पर: – 30 दिन की EMI डिफॉल्ट होने पर अभी करीब 10 हजार रुपये का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 25 हजार रुपये हो जाएगा. – 31 से 60 दिन तक डिफॉल्ट रहने पर ये रकम 10 हजार रुपये से बढ़कर 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. 90 दिन से ज्यादा के डिफॉल्ट की स्थिति में अभी 3.75 लाख रुपये (15%) का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाएगा इससे बैंकों की लागत बढ़ेगी और वे कर्ज देने के दौरान वो ज्यादा सावधानी बरतेंगे.  आम ग्राहकों पर क्या असर होगा? जानकारों का मानना है कि ECL फ्रेमवर्क बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने और जोखिम की पहचान पहले करने की दिशा में बड़ा कदम है. हालांकि इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका क्रेडिट स्कोर कमजोर है. ऐसे ग्राहकों को समय पर EMI भुगतान, क्रेडिट कार्ड बिल की नियमित अदायगी और कम कर्ज देनदारी बनाए रखने पर ध्यान देना होगा. बेहतर CIBIL स्कोर ही भविष्य में सस्ती ब्याज दर और आसान लोन मंजूरी की सबसे बड़ी कुंजी बन सकता है.  1 अप्रैल 2027 से नियम लागू होने के बाद बैंकों की लोन देने की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां फोकस लोन डिस्ट्रीब्यूशन के साथ ही ग्राहक की क्रेडिट क्वालिटी और जोखिम क्षमता पर रहेगा। 

ऊर्जा सुरक्षा पर चीन की बड़ी चाल, ‘समुद्री दैत्य’ से होर्मुज पर निर्भरता घटाने की तैयारी

बीजिंग  होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल-गैस की किल्लत को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग ने दुनिया के कई देशों को आर्थिक मंदी के मुहाने पर ला खड़ा किया है. डर यह जताया जा रहा है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री ट्रेड रूट में शामिल होर्मुज अगर जल्द नहीं खुला तो पेट्रोल,एलपीजी और एनएलजी की किल्लत और गहरा सकती है. इन्हीं चिंताओं के बीच चीन ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा दांव खेला है. चीन की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनी ने समुद्र में दैत्याकार जहाज उतारने की तैयारी शुरू कर दी है. दुनिया के इस सबसे बड़े जहाज से एक ही बार में 2.71 लाख क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस यानी एनएलजी लाई जा सकेगी. यह जहाज न केवल शिपबिल्डिंग उद्योग में नया रिकॉर्ड बनाएगा, बल्कि वैश्विक गैस सप्लाई चेन को भी नई मजबूती देगा।  क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट? हाल के महीनों में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने दुनिया को यह एहसास कराया कि तेल-गैस की सप्लाई कितनी संवेदनशील है. दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा और LNG की महत्वपूर्ण खेपें इसी रास्ते से गुजरती हैं. ऐसे में होर्मुज की नाकेबंदी से एशिया और यूरोप के कई देशों में गैस की कमी पैदा हो गई है।  यही वजह है कि LNG परिवहन क्षमता बढ़ाने को अब ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा माना जा रहा है. चीन का नया जहाज इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो एक बार में पहले की तुलना में कहीं ज्यादा LNG ढो सकेगा।  कितना विशाल है यह जहाज? नया LNG कैरियर 344 मीटर लंबा होगा और इसकी क्षमता 2,71,000 क्यूबिक मीटर LNG होगी. तुलना करें तो आज दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक LNG जहाजों की क्षमता करीब 1,70,000 से 1,80,000 क्यूबिक मीटर होती है. एक आधुनिक गैस कैरियर औसतन करीब 174,000 क्यूबिक मीटर LNG लेकर चलता है।  इस लिहाज से चीन का नया जहाज मौजूदा मानक जहाजों की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत अधिक LNG ढो सकेगा. इसका मतलब है कि एक ही यात्रा में अधिक गैस पहुंचाई जा सकेगी, जिससे परिवहन लागत कम होगी और सप्लाई चेन अधिक प्रभावी बनेगी।  एलएलजी जहाज क्यों कहलाते हैं ‘क्राउन ज्वेल’? LNG कैरियर बनाना आज भी बेहद जटिल है. प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस पर तरल रूप में सुरक्षित रखना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. इसके लिए विशेष टैंक, उन्नत इंसुलेशन सिस्टम और अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों की जरूरत होती है. यही वजह है कि इसे शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री का ‘क्राउन ज्वेल’ यानी सबसे प्रतिष्ठित जहाज माना जाता है।  ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस नए जहाज में NO96 Super+ मेम्ब्रेन कंटेनमेंट सिस्टम लगाया जाएगा, जो गैस को सुरक्षित रखने के साथ-साथ रिसाव और ऊर्जा हानि को भी कम करेगा।  पर्यावरण के लिहाज से भी खास जहाज में डुअल-फ्यूल इंजन सिस्टम होगा, जिससे यह पारंपरिक ईंधन और एलएनजी दोनों पर चल सकेगा. कंपनी का दावा है कि इससे ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों कम होंगे. यह जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के Tier-III पर्यावरण मानकों का भी पालन करेगा।  ऐसे समय में जब दुनिया हरित ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, LNG को कोयले और तेल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है. इसलिए LNG परिवहन क्षमता बढ़ना एनर्जी ट्रांजिशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।  समुद्र में चीन की बढ़ती ताकत एक समय एलएनजी जहाज निर्माण पर दक्षिण कोरिया और कुछ पश्चिमी कंपनियों का लगभग एकाधिकार था. लेकिन अब चीन तेजी से इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एनएलजी शिपबिल्डिंग बाजार में चीन की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।  चीन अखबार के मुताबिक, हुडोंग-झोंगहुआ शिपबिल्डिंग कंपनी के पास फिलहाल लगभग 60 LNG जहाजों के ऑर्डर हैं और उसके शिपयार्ड 2030 तक पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं. इससे साफ है कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में चीन अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहता है।  होर्मुज संकट और एनएलजी का भविष्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है तो LNG परिवहन क्षमता दुनिया के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी. यूरोप, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे बड़े आयातक देशों को ऊर्जा सुरक्षा के लिए अधिक बड़े और अधिक कुशल एलएनजी जहाजों की जरूरत होगी।  ऐसे में चीन का यह मेगा एलएनजी कैरियर सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक ऊर्जा राजनीति और सप्लाई चेन की नई तस्वीर का प्रतीक माना जा रहा है. 2028 में इसकी पहली डिलीवरी होने के बाद यह दुनिया की एलएनजी लॉजिस्टिक्स क्षमता को एक नया आयाम दे सकता है।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले जर्मनी के काउंसलेट जनरल हालियर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में जर्मनी के काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  हालियर का पुष्प-गुच्छ और विश्व धरोहर स्मारक सांची की फ्रेम युक्त तस्वीर भेंट कर स्वागत किया। हालियर ने भोपाल की सुंदरता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी जर्मनी की यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी जर्मनी यात्रा सुखद रही थी। भारत और जर्मनी के प्राचीन काल से संबंध हैं जिन्हें प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में अब नया आयाम मिल रहा है। उद्योग और व्यवसाय जगत में दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं। ये संबंध अब अधिक प्रगाढ़ हो रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में संयुक्त रूप से ठोस कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी और अन्य भाषाओं में अनुवाद किया था। वे संस्कृत के भी विद्वान थे और स्वामी विवेकानंद की नैसर्गिक प्रतिभा के कायल थे। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो, इस दृष्टि से नवम्बर 2024 में म्यूनिख जर्मनी में इण्टरैक्टिव सेशन भी आयोजित किया गया था। मध्यप्रदेश जर्मनी के साथ दोतरफा सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जर्मन प्रतिष्ठानों द्वारा निवेश के साथ ही जर्मन भाषा के प्रशिक्षण के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जर्मन भाषा के शिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश की दृष्टि से जर्मन के औद्योगिक संस्थानों का मध्यप्रदेश में स्वागत है। गत 2 वर्ष में निवेश के कई प्रस्तावों को क्रियान्वित किया गया है। उन्होंने अब फिर से वह समय आया है जब विश्व की प्रमुख भाषाओं का अध्ययन किसी भी देश में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में जर्मन के शिक्षण- प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं अनेक उच्च शिक्षा संस्थाओं में की गई हैं। हमारे युवा भी भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाएं सीखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मन कॉउंसलेट द्वारा पुन: जर्मनी आने के आमंत्रण पर कहा कि वे एक बार नहीं इससे अधिक बार जर्मनी आएंगे। निश्चित ही दोतरफा सहयोग का यह क्रम जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा सतत विकास के क्षेत्रों में जर्मनी के साथ साझेदारी को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर स्थित इंडो-जर्मन टूल रूम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के सफल औद्योगिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। बैठक में जर्मन ड्यूल एजुकेशन मॉडल के माध्यम से युवाओं के कौशल उन्नयन, मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और जर्मनी के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों एवं पेशेवरों के लिए नए अवसर विकसित करने के विषय में भी सार्थक चर्चा हुई। जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश आना अच्छा लगता है। वे यहां आकर प्रसन्न हैं। इंदौर और भोपाल में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से भेंट की है।  हालियर ने जानकारी दी कि इसी वर्ष जनवरी माह में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री  मोदी से जर्मन के फेडरल चान्सलर  फ्रेडरिक मर्ज ने भेंट की है।  मर्ज की भारत यात्रा का उद्देश्य भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करना था। भारत की संस्कृति से जर्मन चांसलर प्रभावित हुए थे और उन्होंने अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी हिस्सा लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने जर्मनी की ओर से विशेष स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।  हालियर ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान और आत्मीयता के लिए आभार माना। इस अवसर पर जर्मन काउंसलेट सेंटर इंडिया के पदाधिकारी  अविनाश कश्यप ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग पूर्ण सहयोग के लिए तत्पर रहता है। हाल ही में नागदा में जर्मन सहयोग से संचालित संस्थान की समस्या का अविलंब समाधान किया गया है। उद्योग संचालन में आने वाली किसी भी कठिनाई को मध्यप्रदेश शासन की ओर से तत्काल दूर किया जाता है। इस अवसर पर एमपी औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड में प्रबंध निदेशक  चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित थे।  

75 जिलों के 1183 केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई परीक्षा, पांच मामलों में गिरफ्तारी और एफआईआर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराने के लिए किए गए व्यापक प्रबंधों का असर दूसरे दिन भी देखने को मिला। मंगलवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के डीजी एसबी शिरडकर के अनुसार दोनों पालियों में कुल 9,62,833 अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए बुलाया गया था, जिनमें से 7,32,731 अभ्यर्थी उपस्थित हुए। कुल उपस्थिति 76.10 प्रतिशत दर्ज की गई। योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, फ्रिस्किंग, पहचान सत्यापन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। इसी का परिणाम रहा कि दूसरे दिन भी विभिन्न जिलों में नकल, प्रतिरूपण और भ्रामक प्रचार के मामलों का तत्काल पता लगाकर संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई। हरदोई में मोबाइल और प्रश्नपत्र के साथ अभ्यर्थी गिरफ्तार हरदोई के वेणी माधव विद्यापीठ इंटर कॉलेज में परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी रोहित पथौरी को नकल के उद्देश्य से छिपाकर लाए गए मोबाइल फोन और पूर्व प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्रों के साथ पकड़ा गया। पुलिस ने उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर में फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए अलीगढ़ में धर्म समाज महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर एक व्यक्ति फर्जी आधार कार्ड के सहारे दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। जांच में मामला उजागर होने पर आरोपी सहित उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी प्रकार मुजफ्फरनगर के डीएवी इंटर कॉलेज में भी एक व्यक्ति कूटरचित आधार कार्ड के जरिए दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देता पकड़ा गया। दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कानपुर में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के साथ अभ्यर्थी पकड़ा गया कानपुर के सिद्दीकी फैज-ए-आम इंटर कॉलेज मखनिया में द्वितीय पाली की परीक्षा शुरू होने से पहले फ्रिस्किंग के दौरान एक अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने का प्रयास करता पकड़ा गया। उससे पूछताछ की जा रही है तथा विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले पर कार्रवाई परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक और तथ्यहीन वीडियो पोस्ट करने के मामले में भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। इंस्टाग्राम आईडी से फर्जी वीडियो प्रसारित करने वाले अमरोहा निवासी इन्द्रजीत को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। नकल माफिया और फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के डीजी ने कहा है कि नकल, प्रतिरूपण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग अथवा सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने जैसे कृत्यों में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

गांव-गांव तक हाई स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने किया प्रोजेक्ट गंगा का शुभारंभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के गांवों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, डिजिटल समावेशन को नई गति देने और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'प्रोजेक्ट गंगा' का शुभारंभ किया। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, कौशल विकास और तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसरों का विस्तार करेगी। प्रोजेक्ट गंगा के तहत प्रदेश में डिजिटल सेवा प्रदाताओं (डीएसपी) का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के प्रथम चरण में 21 जनपदों में इसका संचालन प्रारंभ किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज के दौर में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। इंटरनेट की गति जितनी तेज होगी, विकास की रफ्तार भी उतनी ही तेज होगी। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार गंगोत्री से गंगासागर तक मां गंगा का प्रवाह अपने मार्ग में आने वाले क्षेत्रों के विकास, समृद्धि और जीवन का आधार रहा है, उसी प्रकार प्रोजेक्ट गंगा भी उत्तर प्रदेश की डिजिटल समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। यह पहल गांवों तक डिजिटल अवसर पहुंचाकर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की नई संभावनाएं सृजित करेगी। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में ई-ऑफिस, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), बीसी सखी, ग्राम सचिवालय सहित अनेक तकनीक आधारित पहलों के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी कम हुई है। इन प्रयासों ने डिजिटल सशक्तिकरण को नई गति दी है और आम नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया है। प्रोजेक्ट गंगा इसी यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम चरण में 21 जनपदों में प्रारंभ हो रही इस परियोजना को आगे चलकर प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और लगभग 8 हजार न्याय पंचायतों तक पहुंचाना होगा। इससे लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी की परिकल्पना साकार होगी और गांव स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 8 हजार डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। प्रोजेक्ट गंगा इस लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का प्रयास केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह परियोजना युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने हिंदुजा समूह को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार 'सीएम युवा' योजना के माध्यम से युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करा रही है। प्रोजेक्ट गंगा के अंतर्गत चयनित युवा भी इस सुविधा का लाभ उठाकर डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में अपना उद्यम स्थापित कर सकेंगे। चयन और प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना की सफलता प्रशिक्षित और सक्षम डिजिटल सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि चयनित युवाओं को तकनीकी, प्रबंधकीय और व्यावसायिक दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपने क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का प्रभावी नेटवर्क विकसित कर सकें। कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तकनीक तक व्यापक पहुंच सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का आधार बनती है। मोबाइल फोन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ने उन लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया है, जो कभी इससे दूर थे। आज सामान्य नागरिक डिजिटल माध्यमों से सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है और देश-दुनिया से सीधे जुड़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोजेक्ट गंगा डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाकर इस परिवर्तन को और गति देगा। सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के डिजिटल भविष्य की मजबूत नींव है। यह पहल प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी तथा आने वाले वर्षों में व्यापक बदलाव का माध्यम बनेगी। हिंदुजा समूह की ओर से ग्रुप प्रेसिडेंट कॉरपोरेट अफेयर्स सुनील कुमार चड्ढा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अभिनव मॉडल अपनाने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। हिंदुजा समूह इस परियोजना में ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के सिद्धांत के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप परियोजना में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और लाभार्थियों में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह ने प्रोजेक्ट गंगा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी विस्तार की परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में डिजिटल उद्यमिता का एक नया मॉडल है। इसके अंतर्गत स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अपने क्षेत्रों में फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित कर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक वाई-फाई, स्मार्ट कृषि और आईटी आधारित रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत चयनित युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, नेटवर्क निर्माण और व्यवसाय संचालन में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में टिकाऊ डिजिटल उद्यम स्थापित कर सकें।