samacharsecretary.com

मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में तबादलों की लिस्ट जारी, 1 IPS समेत 64 SPS अधिकारी हुए ट्रांसफर

भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग ने 1 आईपीएस (IPS) और 64 राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों समेत कुल 65 पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर के आदेश जारी किए हैं। नई सूची में एसडीओपी, नगर पुलिस अधीक्षक (CSP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), उप पुलिस अधीक्षक (DSP) और सहायक सेनानी जैसे पदों पर अधिकारियों की नई पोस्टिंग की गई है।  सबसे ज्यादा SDOP और Assistant Commandant बदले तबादला सूची में सबसे ज्यादा बदलाव 22 SDOP और 30 Assistant Commandant के पदों पर हुए हैं। बड़ी संख्या में अधिकारियों को हॉकफोर्स बालाघाट और विशेष सशस्त्र बल (विसबल) की अलग-अलग वाहिनियों में भेजा गया है। वहीं कई जिलों में नए SDOP की तैनाती की गई है। इसके अलावा 9 CSP, 7 ACP, 7 DSP और 1 ASP की भी नई पदस्थापना की गई है। इससे जिला और शहर स्तर पर पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई शहरों में नई जिम्मेदारी तबादला आदेश के तहत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, धार, बुरहानपुर और पीथमपुर जैसे शहरों में नए CSP और ACP की तैनाती की गई है। वहीं कई अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय भोपाल में DSP के रूप में पदस्थ किया गया है। कुछ प्रशिक्षु अधिकारियों को पहली बार अलग-अलग जिलों में SDOP की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इन बदलावों से पुलिस व्यवस्था और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। कई जिलों में नए अधिकारी संभालेंगे कमान मुरैना, शिवपुरी, अलीराजपुर, मंदसौर, सिवनी, दमोह, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बैतूल, नीमच, बड़वानी, धार, ग्वालियर, सिंगरौली और बालाघाट सहित कई जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा हॉकफोर्स और विशेष सशस्त्र बल की अलग-अलग इकाइयों में भी बड़ी संख्या में अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का मानना है कि समय-समय पर ऐसे प्रशासनिक बदलाव से पुलिस व्यवस्था में बेहतर समन्वय और कामकाज में तेजी आती है। तुरंत प्रभाव से लागू होंगे आदेश गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों की नई पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। संबंधित अधिकारियों को जल्द अपनी नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने भी आदेश के पालन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और आम लोगों को बेहतर कानून व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर अधिकारियों के तबादले किए जाते हैं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ग्रामीणों की सुनी समस्याएं, अधिकारियों को दिए निर्देश

रायपुर. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के अचानकमार क्षेत्र के सुदूर वनांचल ग्रामों- जमुनाही, जकड़बांधा, सुरही और बम्हनी, कटामी और अचानकमार में जनचौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने इस दौरान अनेक विकास कार्यों की घोषणाएं भी की। ग्राम जमुनाही में उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर का सपना साकार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिवतराई से केवची तक बहुप्रतीक्षित सड़क को स्वीकृति मिल चुकी है। वर्षा ऋतु समाप्त होते ही निर्माण कार्य शुरू होगा। वहीं बिजराकछार से औरापानी सड़क को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।  ग्रामीणों द्वारा बिजली एवं पेयजल की समस्या उठाए जाने पर उन्होंने तत्काल अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने जमुनाही में सड़क की मरम्मत, गांव में 5 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण, देवभूमि में हैंडपंप स्थापना की घोषणा की तथा पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टैंकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि महतारी वंदन योजना, पेंशन, राशन सहित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से प्राप्त आवेदनों के त्वरित निराकरण के निर्देश देते हुए मंच निर्माण के लिए 2 लाख रुपये तथा गणेश चौक में गणेश पंडाल हेतु शेड निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कोटरा-पथरा-मनियारी मार्ग पर पुल निर्माण का सर्वे पूरा हो चुका है और कार्य शीघ्र प्रारंभ कराया जाएगा। उन्होंने जनचौपाल के दौरान पेयजल समस्या के समाधान के निर्देश देने के साथ ही स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ियों को खेल सामग्री भी वितरित किए। सुरही में उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वनांचल क्षेत्रों में बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सुरही में 5 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्राम बम्हनी में जनचौपाल के दौरान उप मुख्यमंत्री ने बताया कि गांव के 111 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा 206 महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और सभी आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने निवासखार में पुलिया निर्माण के लिए भी शीघ्र प्रयास करने का भरोसा दिलाया। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम कटामी एवं छपरवा में हैंडपंप एवं पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम बिंदावल में सीसी रोड निर्माण के लिए 5 लाख रुपए की घोषणा की तथा पानी एवं बिजली की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। जनचौपालों में मुंगेली के कलेक्टर कुंदन कुमार और वनमंडलाधिकारी अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! शिक्षकों के साथ अब अधिकारी भी ऑनलाइन दर्ज करेंगे उपस्थिति

भोपाल. मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने उपस्थिति व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब तक ई-अटेंडेंस (E-Attendance Mandatory) केवल शिक्षकों के लिए लागू थी, लेकिन अब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से स्कूल शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी हमारे शिक्षक प्रणाली के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे। इसके साथ ही अवकाश संबंधी जानकारी भी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य होगा। सभी स्तरों पर लागू होगी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि E-Attendance प्रणाली अब स्कूल शिक्षा विभाग के सभी स्तरों पर समान रूप से लागू होगी। इसका उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों की उपस्थिति की बेहतर निगरानी करना है। एक जुलाई 2026 से पूरी व्यवस्था डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इन कार्यालयों में लागू होगा नया नियम DPI के आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यालयों में लागू रहेगी। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), राज्य शिक्षा केंद्र, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, जिला शिक्षा केंद्र और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को नियमित रूप से हमारे शिक्षक एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। साथ ही अवकाश से जुड़ी जानकारी भी इसी प्रणाली में अपडेट करनी होगी। कार्यालय प्रमुखों की तय की गई जिम्मेदारी डीपीआई ने आदेश में संबंधित कार्यालय प्रमुखों और प्रशिक्षण संस्थान प्रमुखों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत सभी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करें। यदि किसी स्तर पर व्यवस्था के पालन में लापरवाही सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख की होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। शिक्षक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत इस निर्णय का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि संगठन लंबे समय से मांग कर रहा था कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय होगी।

वेनेजुएला भूकंप: 1000 से अधिक इमारतें ढहीं, राहत-बचाव कार्य जारी

नई दिल्ली दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है। खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है। जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

कटनी वन्यजीव त्रासदी! जहरीला तालाब बना काल, 14 चीतल-सांभर मरे, टाइगरों की सुरक्षा पर सवाल

कटनी. जिले में वन्य प्राणियों की लगातार संख्या बढ़ रही है। वन्य प्राणियों से जहां आमजन को खतरा है तो वहीं वन्य प्राणी भी आमजन से सुरक्षित नहीं है। इसका एक उदाहरण सामने आया है कि विजयराघगढ़ क्षेत्र में करौंदी-घुघरी के पास तालाब में जहर मिलाकर 14 निर्दोष वन्य प्राणियों (चीतल व सांभर) का शिकार किया गया। जिले के बरही क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव में बाघों का ठिकाना है, तो इसके साथ ही शाहडार के जंगल में बाघ और तेंदुए सहित वन्य प्राणियों की उपस्थिति लगातार बनी हुई है। घटना सामने आने के बाद अब बाघों और अन्य प्राणियों के जीवन को भी खतरा बना हुआ है। जलस्त्रोतों की बढ़ा दी गई है सुरक्षा जिले में सक्रिय शिकारी वन विभाग के जल स्रोतों के आसपास निगरानी न रखने का फायदा उठाकर इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना से पहले भी जिले में एक बार जलस्त्रोत में जहर मिलाने की घटना हो चुकी है। ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र में कुंड में जहर मिलाने से तेंदुए सहित अन्य वन्यप्राणियों की जान गई थी। घटना सामने आने के बाद अब वन विभाग अलर्ट हुआ है। जिले में जलस्त्रोतों के आसपास सुरक्षा व गश्त बढ़ाई गई है। दूसरी ओर शिकार करने वाले पकड़े गए तीनों आरोपियों को वन विभाग ने 14 दिन की रिमांड पर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है कि घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह तो शामिल नहीं है। बरही, शाहडार का जंगल स्थाई ठिकाना जिले के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी है, जिसमें विशेष रूप से बड़वारा वन परिक्षेत्र के बरही के करौंदीकला, खितौली, झिरिया, सलैया, कुआं सहित अन्य कई गांवों हैं, जिनके जंगलों में वनराज का ठिकाना है। विशेष रूप से कुआं बीट में बाघों की स्थाई मौजूदगी है और लगभग आठ बाघों का मूवमेंट यहां रहता है। इसके साथ ही बगल से लगे बांधवगढ़ के जंगल से भी बाघों का आना-जाना रहता है। दूसरी ओर ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र का शाहडार का घना जंगल भी वन्य प्राणियों का पसंद का ठिकाना है। यहां पर भी बाघ का स्थाई ठिकाना है और उसके साथ तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणी बड़ी संख्या में हैं। गर्मी के दिनों में वन्य प्राणी रात को प्यास बुझाने के लिए जंगल के किनारे से लगे गांवों के जलस्त्रोतों तक पहुंचते रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना सामने आने के बाद अब बड़े वन्य प्राणियों पर जान का खतरा मंडराने लगा है। ढीमरखेड़ा में सामने आई थी घटना विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में तालाब के पानी में जहर मिलाकर वन्य प्राणियों के शिकार की घटना जिले में पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2010-11 में भी जिले के ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के करौंदी बीट के पास ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें एक प्राकृतिक जलस्त्रोत में शिकारियों ने जहर मिलाया था। उसका पानी पीने से तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणियों की मौत हुई थी। ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ही इस साल अप्रैल माह में वन विभाग की टीम ने तीन शिकारियों को वन्य प्राणियों को मारने लगाए गए करंट के तार के साथ पकड़ा था तो उमरियापान, ढीमरखेड़ा, बड़वारा क्षेत्र में करंट लगाकर शिकार करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। घटना के बाद जागा वन अमला विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में शुक्रवार की सुबह तालाब के किनारे 12 चीतल व दो सांभर मृत अवस्था में मिले थे। बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत से वन विभाग सकते में आ गया था। आनन-फानन में डॉग स्क्वाड बुलाकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई, जिसमें वन विभाग ने शिकार करने वाले तीन शिकारियों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद सामने आया कि जंगल की सीमा से लगे जलस्त्रोतों के आसपास शिकारी सक्रिय न हों, इसको लेकर वन विभाग का फील्ड का अमला नजर नहीं रख रहा है और उसी का नतीजा था कि 14 निर्दोष वन्य प्राणियों की जान चली गई। घटना के बाद विभाग ने जहां तालाब का पानी खाली करा दिया है तो वहीं जलस्त्रोतों की सुरक्षा बढ़ाई गई है और अब नजर रखी जा रही है। अमले को दिया प्रशिक्षण वन्य प्राणियों की मौत के बाद अब वन विभाग के वनरक्षकों व अधिकारियों को जिले भर में ऐसे जलस्त्रोत जहां पर वन्य प्राणियों का आना-जाना रहता है, वहां पर तैनात करने के साथ गश्त करने और निगरानी रखने को लगाया गया है। शनिवार को डीएफओ सहित अन्य अधिकारियों ने फील्ड के अमले को पानी में जहर की जांच करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया, जिससे गश्त करते समय कर्मचारी पता लगा सकें कि पानी कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं घोला गया है। वन विभाग की टीम बड़वारा के बांधवगढ़ की सीमा से लगे गांवों, बाघ, तेंदुए सहित अन्य वन्य प्राणियों के ठिकानों के आसपास, ढीमरखेड़ा के शाहडार व अन्य वन क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी कर रही है। इनका कहना है विजयराघवगढ़ की घटना के बाद आरोपितों को पकड़ा गया है और उनसे रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की जा रही है। जिले में बाघों का ठिकाना है और ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी कराई जा रही है। जंगलों से लगे जलस्त्रोतों के आसपास गश्त बढ़ाने के साथ ही अमले को पानी की जांच करने के लिए भी जानकारी दी गई है। – गर्वित गंगवार, जिला वनमंडल अधिकारी

पीएम मोदी बोले- सोना न खरीदने और कार पूलिंग अपनाने की अपील का देशभर में दिखा असर

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम के 135वें एपिसोड के जरिए देश की जनता को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते आत्मनिर्भरता के कदमों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा देश अब समुद्र से लेकर आकाश तक सुरक्षित और आत्म निर्भर है। पीएम मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देश-विदेश में हुए कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा प्रस्तावित योग दिवस के मौके पर दुनिया भर के करोड़ों लोगों ने योग किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों की दी गई सलाहों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने न सिर्फ इन सलाहों को माना, बल्कि उस पर अमल भी किया। पीएम मोदी ने कहा कि देश के कई परिवारों ने फैसला किया है कि वह शादी विवाह में सोना नहीं खरीदेंगे। अगर जरूरत पड़ी भी तो वह पुराने सोने को गलाकर नए जेवर बना लेंगे। इसके अलावा पीएम ने बताया कि कई लोगों ने अपनी विदेश यात्राएं रद्द कर दी, तो कई लोगों ने साथ मिलकर कार पूलिंग को भी अपनाने का काम किया है। इसके अलावा लोगों ने पेट्रोल और डीजल के उपयोग को भी कम करने का जबरदस्त प्रयास किया है। बता दें, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट से निपटने के लिए लोगों को सोने को न खरीदकर विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। इसके अलावा उन्होंने लोगों से सोना न खरीदने और कार पुलिंग करने की सलाह दी थी। हरगिला की यात्रा, अविश्वास से विश्वास तक की यात्रा पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में असम के हरगिला पक्षी के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कैसे असम में विलुप्ती की कगार पर आए हरगीला पक्षी को लोग अंधविश्वास की वजह से मार रहे थे। पीएम ने बताया कि हरगिला पक्षी हमारे पर्यावरण को साफ करने में मदद करता है। लेकिन असम में लोग अंधविश्वास की वजह से इसे मिटाने पर तुले हुए थे। आलम यह था कि जिस पेड़ पर हरगिला के घोंसले होते थे, वह उस पेड़ को ही काट देते थे। इसके बाद एक जीव विज्ञानी ने इस पर ध्यान दिया और लोगों को इससे जोड़ा। इसके बाद आज लोग हरगिला को लेकर अपने विचार बदल रहे हैं। हरगिला को बचाने वाली इस टीम को हरगीला आर्मी कहते हैं।

India-US Trade Deal पर बड़ी अपडेट, सर्जियो गोर ने कहा- जल्द हो सकता है समझौता

वाशिंगटन   भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसमें बस कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और पक्षों इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर ध्यान दे रहे हैं। व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में, अमेरिकी राजदूत गोर ने भरोसा जताया कि यह एग्रीमेंट आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कई दूसरे बड़े व्यापार समझौतों के मुकाबले बातचीत पहले ही बहुत तेजी से आगे बढ़ चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते की शेष कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा, "समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) की भाषाई रूपरेखा पर अभी काम होना बाकी है। करीब 48 घंटे पहले दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ मैं उन बैठकों में शामिल था, जहां हमने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। वे मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। यह वार्ता बेहद सार्थक रही। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। अब बहुत कुछ उस अंतिम मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।" गोर ने कहा कि बातचीत को सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौते पर सिर्फ लगभग 18 महीने से चर्चा चल रही थी। उन्होंने कहा, "देखिए, इसे सही नजरिए से देखें तो, हम इस समझौते पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं।  यूरोपीय संघ समझौता, जो अभी भी पूरी नहीं हुई है, उसे 20 साल हो गए हैं। हर कोई कहता है, 'इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?' हम इसे पूरा करने की दिशा में एक शानदार रास्ते पर हैं।"प्रस्तावित समझौते के कंटेंट को लेकर बात करने से इनकार करते हुए, अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि दोनों सरकारें ऐसे नतीजे की ओर काम कर रही हैं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो। उन्होंने कहा, "मैं ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता। आपको इंतजार करना होगा और देखना होगा। यह उन चीजों में से एक है जब आपको कॉमन ग्राउंड मिलता है और हम उन चीजों की पहचान कर पाते हैं जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी हैं, तभी डील होती है।" अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया मीटिंग के बाद भी भारत आने के लिए उत्सुक हैं। गोर ने कहा, "मेरे पास अभी पक्की तारीखें नहीं हैं। मैं अभी राष्ट्रपति से मिला हूं। मैं उनके साथ ओवल ऑफिस में कई घंटे रहा। राष्ट्रपति ने जो बातें पूछी, उनमें से एक यह थी, 'तो मैं कब आ रहा हूं?' वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बुलाया है। मुझे लगता है कि यह किसी समय होगा।"हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव शेड्यूल के कारण टाइमलाइन बताने से मना कर दिया, लेकिन गोर ने कहा कि भारत अभी भी उनकी प्राथमिकता वाली जगह बना हुआ है। अमेरिकी राजदूत ने कहा, "अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें वे अन्य देश में घूमने पर फोकस करेंगे। लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की लिस्ट में सबसे ऊपर है जहां वे जल्द ही जाएंगे।" गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की अटकलों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छी जगह पर हैं। उस संबंधों की एक बड़ी वजह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच का रिश्ता है जो हमेशा मजबूत रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं और यह बात सालों पुरानी है और यह बात आगे भी जारी रहेगी।" भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना, टैरिफ की रुकावटें कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। दोनों सरकारों ने बार-बार इस समझौते को अपनी प्राथमिकता बताया है और एक बड़े ट्रेड फ्रेमवर्क पर जाने से पहले एक शुरुआती समझौते को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। व्यापार, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सबसे तेजी से बढ़ते स्तंभ में से एक बनकर उभरा है, जिसमें रक्षा, तकनीक, जरूरी और नई तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध भी शामिल हैं। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में अपने बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आर्थिक इंटीग्रेशन को भी गहरा करने की कोशिश की है।

सरकार का बड़ा कदम! 5 नक्सल प्रभावित नागरिकों समेत 2 आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगी सरकारी नौकरी

मोहला. मोहला–मानपुर –अंबागढ़ चौकी जिले में शासन की पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नक्सल पीड़ितों को पुनर्वास नीति का लाभ देने एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। 24 जून को कार्यालय कलेक्टर सभागार में जिला स्तरीय नक्सल पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलवादी पुनर्वास समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के अध्यक्ष कलेक्टर तुलिका प्रजापति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय पी सिंह, जिला वनमंडलाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में पात्र 5 नक्सल पीड़ितों एवं 2 आत्मसमर्पित नक्सलियों कुल 7 लोगों को पुनर्वास नीति के अंतर्गत शासकीय सेवा में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा 1 एक नक्सल पीड़ित परिवार को उसके जीवन यापन करने हेतु 15 लाख रुपए प्रदाय किए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होगा समिति के अध्यक्ष के द्वारा नक्सल पीड़ित परिवारों को भी मीटिंग में सम्मिलित किया गया था जिसमें अध्यक्ष के द्वारा सभी पीड़ितों से बात कर उनकी अन्य योजनाओं के संबंध में जानकारी ली एवं उनके आवेदन अनुसार शीघ्र लाभ प्रदाय सनिश्चित करने हेत संबंधित विभाग को आदेश किया जा गया है। जिला पुलिस एवं प्रशासन के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास एवं विश्वास का वातावरण निरंतर मजबूत हो रहा है। शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। शासकीय नौकरी मिलने से लाभार्थियों को स्थायी रोजगार के साथ समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास की राह अपनाने वाले आत्म समर्पित माओवादियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है। जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी 31 मार्च 2026 को पूर्ण रूप से नक्सली मुक्त हो चुका है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से पहले बड़ा फैसला संभव, जानें ताजा अपडेट

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है।  जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।  क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद?  दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है।  अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा।  नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है?  आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है।  फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई।  कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है।  अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है?  केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।   अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा?  जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

केरल में मानसून की रफ्तार धीमी, अल-नीनो के असर से 33 फीसदी कम बारिश; खेती पर संकट के आसार

नई दिल्ली केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है।  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं।  IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे 'बारिश की कमी' (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है।  खेती पर कम बारिश का असर बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है।  मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर? सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है।  पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप 'तिरुवाथिरा नजट्टुवेला' कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है।  IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।