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मध्यप्रदेश में सिंचाई क्रांति की तैयारी, 14 जिलों के लिए केन-मंदाकिनी लिंक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा

भोपाल  मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश के 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और अगले छह माह में इनके लोकार्पण के साथ लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी। वहीं, केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है और स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी जल्द किया जाएगा।इससे 93 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का विकास होगा। वहीं, नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी शीघ्र किया जाएगा। 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसकी तैयारी के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। अब इनका लोकार्पण होना है। अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना पर फोकस केन-मंदाकिनी लिंक अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। 20 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जाएगी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन होगा। परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है। संशोधित पार्वती काली सिंध चंबल अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण के काम पूरा हो गया है। सिंहस्थ को लेकर तैयारी सिंहस्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत काम हो चुका है। कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत काम प्रगति पर है। शिप्रा तट पर 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य भी 60 प्रतिशत पूरा हो गया है। जल्द होगा स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन बरगी नहर से ढाई लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी बैठक में मुख्यमंत्री ने नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारी के निर्देश दिए। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करेगी। टनल का काम डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है।  

सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ा चुनौतीपूर्ण सवाल, GRP में भारी स्टाफ की कमी; कैसे संभलेगी भीड़?

उज्जैन   वर्ष 2028 में होने वाले उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो चुकी हैं, लेकिन रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु रेल मार्ग से उज्जैन पहुंचते हैं, ऐसे में रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसी बीच सामने आए आंकड़े बताते हैं कि जीआरपी (गवर्मेंट रेलवे पुलिस) में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, जिससे सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में रेलवे पुलिस के कुल स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा अभी भी रिक्त है। दूसरी ओर विभाग का दावा है कि तकनीक और अतिरिक्त बल के जरिए इस कमी को पूरा किया जाएगा। रेलवे पुलिस में पदों की स्थिति इकाई- स्वीकृत पद- उपलब्ध कर्मचारी- रिक्त पद भोपाल जीआरपी- 951- 328- 623 इंदौर जीआरपी- 785- 460- 325 जबलपुर जीआरपी- 724- 467- 257 कुल-2460- 1255- 1205 भोपाल ईकाई में सबसे अधिक कमी सबसे अधिक कमी भोपाल इकाई में दर्ज की गई है। नेतृत्व स्तर पर भी कमी। रेलवे सुरक्षा केवल जवानों के भरोसे नहीं चलती, बल्कि अधिकारी स्तर की मौजूदगी भी जरूरी होती है। लेकिन उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे) स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। पद- स्वीकृत- उपलब्ध -रिक्त उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे- 12-6-6) रिक्त स्थान भोपाल इकाई – बीना, ग्वालियर इंदौर इकाई – रतलाम, उज्जैन जबलपुर इकाई- जबलपुर, रीवा उज्जैन में डिप्टी एसपी स्तर का पद खाली होना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सिंहस्थ के दौरान रेलवे संचालन और सुरक्षा का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। सिंहस्थ को लेकर क्या तैयारी?     रेलवे स्टेशन और प्लेटफार्म पर सीसीटीवी आधारित निगरानी     कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम     डिजिटल संचार नेटवर्क     भीड़ विश्लेषण तकनीक     रनिंग ट्रेनों में विशेष निगरानी     खोया-पाया और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था लागू की जाएगी 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग विभाग ने सिंहस्थ के लिए करीब 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग भी की है। इसमें सिविल पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा इकाइयों की तैनाती प्रस्तावित है। साथ ही वर्तमान कर्मचारियों को भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों को भरने या वैकल्पिक तैनाती पर काम किया जा रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि जब तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, तब क्या 2028 से पहले खाली पद भरकर मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सकेगा या फिर सिंहस्थ जैसी विशाल व्यवस्था को सीमित मानव बल और तकनीक के भरोसे संभालना पड़ेगा। ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा- कोई तैयारी नहीं ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा कि भोपाल में बहुत जरूरी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुआ था। जिसमें DGP MP, DG RPF, DRM भोपाल, DRM रतलाम, ADRM झांसी के अलावा RPF के चार IG  IG RPF भोपाल, IG RPF मुंबई, IG RPF प्रयागराज, IG RPF कोलकाता उपस्थित थे। कमिश्न उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, ADG-IG उज्जैन और पुलिस अधीक्षक DIG भी मौजूद थें। DGP रेलवे उत्तर प्रदेश ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव बताए। राजा बाबू सिंह ने कहा हमारी जो GRP इकाई इंदौर है, जिस पर सिंहस्थ 2028 का जिम्मा होगा उसने कोई होमवर्क नहीं किया है। वहां, पुलिस अधीक्षक, 2 DSP उज्जैन और रतलाम के पद रिक्त हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर जो अस्थायी थाने और चौकी या मेला क्षेत्र बनेंगे उसके लिए अभी से अतिरिक्त बल मिल जाना चाहिए, जो अभी तक नहीं मिला है।  प्रयागराज महाकुंभ से सीख, इस बार ज्यादा फोकस क्राउड मैनेजमेंट पर बैठक में  पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ और जिला प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है, क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या पिछले आयोजनों की तुलना में अधिक हो सकती है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रमुख स्टेशनों और मेला क्षेत्र में अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग बनाए जाएं ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। साथ ही रेलवे स्टेशनों पर अंतिम समय में प्लेटफॉर्म बदलने से बचने के निर्देश भी दिए गए, क्योंकि इससे अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। AI और CCTV से होगी निगरानी सिंहस्थ 2028 में पहली बार बड़े स्तर पर AI आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, होल्डिंग एरिया, पार्किंग और मेला क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC से जोड़ा जाएगा। यह कंट्रोल सेंटर रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा पब्लिक एड्रेस सिस्टम, डिजिटल साइन बोर्ड और कलर कोडिंग जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से दिशा-निर्देश मिल सकें। रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति बैठक में रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। 2016 के सिंहस्थ की तुलना में इस बार तीन गुना ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही छोटी दूरी की मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल इंजन वाली ट्रेनें और दिशा आधारित प्लेटफॉर्म व्यवस्था लागू की जाएगी। लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों का पहले से डायवर्जन भी तय किया जाएगा ताकि मुख्य रूट पर दबाव कम किया जा सके। रेलवे द्वारा उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल, ओंकारेश्वर रोड और सीहोर के स्टेशनों पर विशेष तैयारी की जा रही है। यहां नए फुटओवर ब्रिज, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट स्टेशन और साइडिंग लाइन विकसित की जाएंगी। घाटों का विस्तार और बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि सिंहस्थ का आयोजन 9 अप्रैल से 8 मई 2028 तक प्रस्तावित है। मेले के लिए लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घाटों का विस्तार करीब 37 किलोमीटर तक किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा मिल सके। वैज्ञानिक तरीके से यह आकलन किया जा रहा है कि एक निश्चित समय में एक किलोमीटर घाट पर कितने श्रद्धालु सुरक्षित तरीके … Read more

भारत में रिकॉर्ड गर्मी का खुलासा, 365 में 360 दिन रहा तापमान का असर; क्लाइमेट चेंज या अल-नीनो जिम्मेदार?

 नई दिल्ली साल 2025 भारत के लिए मौसम के लिहाज से बेहद मुश्किल था. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट – CSE की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे साल में 365 में से 360 दिन देश के किसी न किसी हिस्से में मौसम की भयानक घटनाएं हुईं. इन घटनाओं में 4421 लोगों की मौत हुई. करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई. बढ़ता क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो जैसे मौसमीय पैटर्न भारत में मौसम को पहले से ज्यादा अनिश्चित बना रहे हैं।  2025 में मौसम ने तोड़े कई रिकॉर्ड 2025 में देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में किसी न किसी तरह का बिगड़ा हुआ मौसम दर्ज किया गया. यानी पूरे साल ऐसा कोई इलाका नहीं बचा, जहां मौसम का असर न दिखा हो. 2025 में देश के करीब 99% दिनों में कहीं न कहीं लू, भारी बारिश, बाढ़, बिजली गिरने, ओला पड़ने या तूफान जैसी घटनाएं हुईं. यह पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. 2024 में ऐसे मौसम की घटनाएं साल के 88 फीसदी दिनों में दर्ज हुई थीं।  मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है. 2024 में 3393 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025 में यह बढ़कर 4421 हो गई. खेती को हुआ नुकसान भी कई गुना बढ़ गया. 2024 में करीब 36 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी, लेकिन 2025 में यह बढ़कर 1.74 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच गई।  सबसे ज्यादा फसल का नुकसान महाराष्ट्र में हुआ, जहां करीब 84 लाख हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई. इसके बाद कर्नाटक और मध्य प्रदेश का नंबर रहा. वहीं हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा 267 दिन भयानक मौसम दर्ज किया गया. केरल में 173 दिन और मध्य प्रदेश में 162 दिन ऐसे हालात बने रहे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में 1.81 लाख से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा।  अब सिर्फ मानसून नहीं, पूरे साल बदल रहा है मौसम रिपोर्ट बताती है कि अब चरम मौसम सिर्फ मानसून तक सीमित नहीं है. मार्च, अप्रैल और मई जैसे महीनों में भी तेज गर्मी, अचानक बारिश, आंधी और ओले पड़ने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं. कई जगहों पर कुछ ही दिनों के अंदर मौसम पूरी तरह बदल जाता है. इसका सीधा असर खेती, पानी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।  अल-नीनो से क्यों बढ़ सकती है परेशानी? वैज्ञानिकों का कहना है कि हर खतरनाक मौसम की घटना की वजह अल-नीनो नहीं होता. लेकिन जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो भारत के मौसम का पैटर्न बदल सकता है. कई इलाकों में बारिश कम हो सकती है और गर्मी बढ़ सकती है. वहीं कुछ जगहों पर कम समय में बहुत ज्यादा बारिश भी हो सकती है।  अगर अल-नीनो का असर और क्लाइमेट चेंज साथ-साथ हों, तो मौसम और ज्यादा असामान्य हो सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लगातार ऐसे मौसम पर नजर रखने की बात कहते हैं।  2025 के आंकड़े साफ बताते हैं कि बेहद खराब मौसम अब भारत में पहले से ज्यादा आम होता जा रहा है. इसका असर सिर्फ लोगों की जान पर नहीं, बल्कि खेती, घरों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर क्लाइमेट चेंज की रफ्तार नहीं थमी और अल-नीनो जैसे मौसमी पैटर्न असर दिखाते रहे, तो आने वाले वर्षों में ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। 

मोदी कैबिनेट विस्तार में मध्यप्रदेश को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी, खजुराहो सांसद वीडी शर्मा रेस में

भोपाल  मोदी कैबिनेट के विस्तार की अटकलें हैं। संभावना है कि जून के अंत तक मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि कैबिनेट का विस्तार होगा। कैबिनेट में कई नए चेहरों के शामिल होने की अटकलें हैं। साथ ही संभावित नामों की चर्चा भी हो रही है। इसमें मध्य प्रदेश के खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा के नाम की भी चर्चा चल रही है। खजुराहो से सांसद हैं वीडी शर्मा दरअसल, संभावित सूची में मध्य प्रदेश के खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा के नाम की भी चर्चा है। उन्हें संगठन में काम करने का लंबा अनुभव रहा है। लंबे समय तक मध्य प्रदेश में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी को प्रचंड सफलता मिली है। 2023 के विधानसभा चुनाव में उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते ही लड़ा गया और पार्टी को ऐतिहासिक सफलता मिली। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी वीडी शर्मा ही प्रदेश अध्यक्ष थे। पार्टी ने पहली बार मध्य प्रदेश में 29-29 की सीटें जीत ली। सबको साथ लेकर चले वीडी शर्मा के कार्यकाल में मध्य प्रदेश में संगठन ने एक नई ऊंचाई हासिल की थी। उनके कार्यकाल के दौरान ही ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से अपने विधायकों के साथ पार्टी में आए थे। वीडी शर्मा के लिए उस दौरान सबसे बड़ी चुनौती थी कि नए और पुराने लोगों को साथ लेकर चलना है। उन्होंने इसे बखूबी अंजाम दिया और समन्वय बनाकर चले। विवादों को सरकार और संगठन के स्तर पर सुलझाकर चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं तारीफ वहीं, केंद्रीय नेतृत्व भी वीडी शर्मा की मुरीद रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान सार्वजनिक रूप से वीडी शर्मा की तारीफ कर चुके हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा था कि खजुराहो से हमारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा जी को भारी मतों से विजयी बनाना है। ये विष्णुदत्त शर्मा जी दिखते पतले दुबले हैं। लेकिन उनके नेतृत्व में भाजपा ने मध्य प्रदेश में इस बार नया इतिहास रच दिया है। संगठन में भी किए ऐतिहासिक काम वीडी शर्मा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए मध्य प्रदेश में संगठन ने भी कई ऐतिहासिक काम किए हैं। उनके नेतृत्व में सदस्यता अभियान के दौरान पार्टी ने एक नई कीर्तिमान स्थापित की थी। डेढ़ महीने में ही बीजेपी ने डेढ़ करोड़ सदस्य बनाए थे। साथ ही चुनावों में बूथ मैनजमेंट फॉर्मूला को अन्य राज्यों ने भी फॉलो किया था। वीडी शर्मा हैं कौन     वीडी शर्मा का पूरा नाम विष्णुदत्त शर्मा है     उन्होंने अखिल भारती विद्यार्थी परिषद से सियासी करियर की शुरुआत की     वीडी शर्मा लंबे समय तक विद्यार्थी परिषद में काम किया है     2019 में पहली बार वह खजुराहो लोकसभा सीट से सांसद बने     2024 में पार्टी ने उन्हें फिर से मौका दिया और सांसद बने     15 फरवरी 2020 को मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने     दो जुलाई 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं     मूल रूप से वह मध्य प्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं गौरतलब है कि प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व में उनके अच्छे संबंध हैं। गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी उनकी ट्यूनिंग अच्छी है। चुनावों में अमित शाह उनके साथ बाइक की सवारी कर चुके हैं। साथ ही वीडी शर्मा को जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे बखूबी निभाया है। 2024 में भी अटकलें थीं कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिलेगी क्योंकि चुनावों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। एक बार फिर से उनके नाम की चर्चा चली है। 

Irani Oil Offer: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलते ही भारत को मिले सस्ते तेल के ऑफर, फिर क्यों बना हुआ है इंतजार?

 नई दिल्‍ली अमेरिका और ईरान के बीच जंग थमी हुई है और शांति वार्ता चल रही है. इस समझौते के दौरान अमेरिका ने ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटा दिया है और 60 दिनों की छूट दी है, जिसके बाद ईरानी तेल मार्केट में आ चुका है. वहीं स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज भी खुल चुका है, जिसके बाद टैंकर पहले से ज्‍यादा स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजर रहे हैं।  इस बीच, रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका की छूट के बाद कई बिचौलियों ने ईरानी तेल को भारत को बेचने के लिए ऑफर दे रहे हैं. इन्‍होंने भारतीय रिफाइनरों को ईरानी तेल कम दाम पर बेचने का ऑफर दिया है. सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क सीधे नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) की ओर से और बिचौलियों के माध्यम से किया गया है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें ईरानी राज्य उत्पादक द्वारा तेल आवंटित किया गया है।  कितना सस्‍ता होगा ईरानी तेल?  रॉयटर्स ने कहा कि ऑयल रिफाइनर्स से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि एनआईओसी के अलावा, कई व्‍यापारी ईरानी तेल को बेचने के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हमारी प्राथमिता एनआईओसी को मौका देना है. उन्होंने बताया कि एनआईओसी भारतीय खरीदारों को बता रहा है कि ईरानी कच्चा तेल क्षेत्रीय स्तर पर समान गुणवत्ता वाले कच्चे तेल की तुलना में प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर सस्ता होगा।  रिपोर्ट में कहा गया है कि रिफाइनर से संपर्क करने वाले व्यापारी मुख्य रूप से सिंगापुर और दुबई स्थित छोटी और मध्यम आकार की व्यापारिक कंपनियों से हैं. इस सप्ताह ईरानी पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत को कच्चे तेल और LPG की संभावित आपूर्ति पर भी चर्चा हुई।  भारत बढ़ा सकता है आयात हालांकि, भारतीय रिफाइनर के पास फ्यूचर में ईरानी कच्चे तेल को रखने की सीमित गुंजाइश है, क्योंकि अधिकांश ने अगस्त तक आपूर्ति सुरक्षित कर ली है और मिडिल ईस्‍ट आपूर्तिकर्ता खरीदारों पर प्राथमिकता को लेकर दबाव बना रहे हैं. भारत पहले से ही व्यापारियों के माध्यम से ईरान से एलपीजी आयात कर रहा था और प्रतिबंधों में छूट मिलने के बाद यह आयात और बढ़ सकता है।  भारत क्‍यों नहीं खरीद सकता ज्‍यादा कच्‍चा तेल?  केप्‍लर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने अपने तेल की आपूर्ति के लिए कई देशों से कॉन्‍ट्रैक्‍ट कर लिया है. वहीं कई जगहों से तेल मंगा रहा है और बहुत से तेल को रिजर्व करके भी रख लिया है. इस कारण, उसे सस्‍ते पर तेल मिलने के बाद भी ज्‍यादा खरीदारी नहीं कर सकता है।  एक महीने की छूट पर भी भारत ने खरीदा था तेल  गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद तेल के दाम को नीचे लाने के लिए अमेरिका ने ईरानी तेल पर छूट दी थी. अमेरिका की ओर से 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दिए जाने के बाद भारत को अप्रैल में ईरानी तेल की दो खेपें मिली थीं, जिनका भुगतान चीनी युआन में किया गया था। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुकरू के सुप्रसिद्ध मावा का लिया स्वाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के हिल स्टेशन कुकरू में शनिवार को कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने समूह द्वारा तैयार किए गया मावा और रबड़ी का स्वाद लिया तथा महिलाओं से आत्मीय संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिलाओं से समूह की गतिविधियों, आय के स्रोत तथा शासकीय योजनाओं से प्राप्त सहयोग की जानकारी ली और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुकान में उपलब्ध मावा बनाने की प्रोसेस को देखा और महिलाओं से आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिलाओं से लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली राशि के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि योजना की राशि नियमित रूप से प्राप्त हो रही है या नहीं। महिलाओं ने योजना का लाभ मिलने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह कुकरू की अध्यक्ष श्रीमती शोभा गायने ने बताया कि समूह को विभिन्न योजनाओं में सीसीएल से 3 लाख रुपये, सीआईएफ से 1 लाख रुपये, आरएफ से 11 हजार रुपये तथा पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत 40 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि समूह में 11 सदस्य कार्यरत हैं। आजीविका मिशन से मावा बनाने की स्वचलित मशीन क्रय की गई। इससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपए की मासिक आय प्राप्त हो रही है। समूह की सदस्य महिलाओं ने बताया कि वे पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मावा, रबड़ी एवं श्रीखंड निर्माण के साथ-साथ कृषि कार्य भी कर रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से समूह की महिलाओं को लगभग 15 से 18 हजार की मासिक आय प्राप्त हो रही है। जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य एवं सांसद श्री दुर्गादास उइके, बैतूल विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायक श्री महेंद्र सिंह चौहान, मप्र जन अभियान परिषद उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, कमिश्नर श्री श्रीकांत बनोठ, आईजी श्री मिथलेश कुमार शुक्ल, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षक श्री वीरेंद्र जैन उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री श्री मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को बना रहे हैं ग्लोबल चैम्पियन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को ग्लोबल चैम्पियन बना रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र दूसरों के जीवन को सुखद बनाते हैं। उद्यमी कर्म को पूजा और श्रम को साधना मानते हैं। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी और सुख का सूरज निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में आगामी वर्ष 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जाएगा। समिट में प्रधानमंत्रीमोदी को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवीन्द्र भवन में "विश्व एमएसएमई दिवस" पर हुई "सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश" समिट को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों, कला शिल्पों की विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी सभी के लिए खुली रहेगी। शासन द्वारा कपास पर मंडी शुल्क आधा करने सहित उद्यमियों और किसानों के हित में अनेक निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बुरहानपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा अभिनंदन किया गया। समिट में लगभग 2000 उद्यमियों, निवेशकों, स्व-सहायता समूहों के सदस्यों सहित नीति निर्माताओं ने भागीदारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ एमएसएमई इकाइयां हैं, जिसमें 25 लाख मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश की इकाइयां लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है। जीडीपी में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर की है। निर्यात में 49 प्रतिशत और विनिर्माण उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत है। इस तरह एमएसएमई सेक्टर अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश का एमएमसएमई सेक्टर जनकल्याण का माध्यम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में रिमोट से एमएसएमई इकाइयों के साथ ही वृहद उद्योगों के लिए भी राशि जारी की। एमएसएमई इकाइयों को 225 करोड़ 19 लाख की राशि और विभिन्न स्टार्ट-अप के लिए लगभग 39 लाख की राशि प्रदान की गई। बड़े उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 1274 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई। इस तरह कुल 1500 करोड़ रुपए उद्योग क्षेत्र को प्रदान किए गए। मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां मई 2026 तक की समस्त देनदारी का भुगतान उद्यमियों को निवेश सहायता के रूप में किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों के विकास में मध्यप्रदेश आगे है। राज्य सरकार द्वारा कपास के मंडी शुल्क को आधा करने के निर्णय का लाभ किसानों और उद्यमियों को प्राप्त होगा। एमएसएमई दिवस पर एमओयू और उद्योगों के लिए भूखंडों के आवंटन का कार्य हुआ है। राज्य में प्रत्येक जगह उद्योग लगाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश के सबसे इंडस्ट्री प्रोमोटिंग स्टेट के रूप में पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कनाडा, यूके, अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रदेश में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस आदि क्षेत्रों में निवेश आ रहा है। भोपाल में वर्ष 2025 में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद 9 हजार 300 करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतरा हैं। नई नीतियां और नियम बने लाभकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत 2 वर्ष में बनाई गई 18 नई नीतियों और नए नियमों का लाभ उद्योगों को मिल रहा है। प्रदेश में ओडीओपी क्षेत्र में भी प्रगति है। वर्ष 2025- 26 में मध्यप्रदेश को 20 जीआई टैग प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष की थीम पर मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स का जिम्मा माताओं-बहनों के हाथों में है। गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67 प्रतिशत बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 क्लस्टर्स का निर्माण किया है और 14 नए क्लस्टर्स पर काम चल रहा है। राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य सरकार सभी की कठिनाइयों को समझते हुए विकास की धारा में सरलता, शुचिता और पारदर्शी निर्णयों के बलबूते आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस पूरे वर्ष में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तरीके से नई ऊंचाई पर लेकर जाएंगे। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। किसानों को ऋण चुकाने के लिए नई सौगात दी गई है। किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में ऋण भर सकेंगे। इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है। राज्य सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रही है। इसके दृष्टिगत वर्ष 2024 को गरीब कल्याण और वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया। मध्यप्रदेश औद्योगिक सुधारों को लागू करने में आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा तय 23 औद्योगिक सुधारों को शत-प्रतिशत लागू करने में मध्यप्रदेश टॉप अचीवर है। औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है। आज प्रदेश के 13 जिलों में 14 औद्योगिक केंद्र और भवनों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया है। इसी तरह 7 नए औद्योगिक क्षेत्र इंडस्ट्री सेक्टर को नया आकार प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में भारत एमएसएमई सेक्टर के अतिरिक्त कई सेक्टर्स में आगे बढ़ रहा है। इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना, क्लस्टर्स स्कीम जैसी अनेक योजनाएं शामिल हैं। पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार से उद्यमी निरंतर जुड़ रहे हैं। उद्यमियों से किया संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले से प्राप्त होने वाले राजस्व के मॉडल तैयार करने का कार्य करेगी, जिससे जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए समृद्धि का पूरा लाभ मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के उद्यमियों से संवाद के दौरान यह बात कही। विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में मध्यांचल कॉटन एंड जिंजर ट्रेडर्स एसोसिएशन के … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की आत्मीयता से रात्रि चौपाल में ग्रामीण हुए अभिभूत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बैतूल के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से सहज भाव से संवाद कर उनकी समस्याओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के कामों में यदि किसी भी विभाग के कर्मचारी या अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार से परेशान किया जाता है, तो वे निसंकोच होकर उन्हें बतायें। रात्रि चौपाल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मिलनसारिता और आत्मीयता से ग्रामीणों ने अभिभूत होकर मुख्यमंत्री के समक्ष खुलकर अपनी बातें रखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहजता और प्रेम से प्रभावित होकर रात्रि चौपाल में ग्रामीणों ने स्थानीय कोरकू भाषा में पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी "गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो" भजन सुनाकर सभी का मन मोह लिया। रात्रि चौपाल में गंदलो सुसुम कोरकू दल के 21 सदस्यीय तथा होलेरा नृत्य दल के 19 सदस्यीय दल द्वारा पारंपरिक जनजातीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रीमती शिपा शनवारे ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर भाई के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ बैठकर संवाद किया तथा बच्चों को स्नेहपूर्वक दुलार भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों से विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्चों से बचने तथा सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को भी समाज में हतोत्साहित करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहा है। सरकार के प्रयास हैं कि समृद्ध खेती के साथ-साथ पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 25 भैंस अथवा 25 गायों के लिए 40 लाख रुपए तक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 10 लाख रुपए का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोदो-कुटकी की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर निरंतर की जाएगी। ग्राम कुकरू में पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने तथा पशुशेड निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महिलाओं ने बताया कि आजीविका मिशन के माध्यम से ग्राम में कृषि सखी, जेंडर सखी, बकरी पालन, भैंस पालन, मुर्गी पालन सहित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जुड़कर समूह की अनेक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए किसान सम्मान निधि एवं लाड़ली बहना योजना के लाभों की जानकारी ली। उन्होंने किसान सम्मान निधि से वंचित किसानों की ई-केवाईसी शीघ्र कराने के निर्देश प्रशासन को देते हुए कहा कि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 79 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए तालाब निर्माण कराने के निर्देश प्रशासन को दिए। ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने बालिका छात्रावास की स्वीकृति एवं निर्माण, जामूखेड़ी मार्ग तथा बुंदियाखुर्द पुलिया निर्माण के निर्देश भी दिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि स्वयं सहायता समूहों के बड़े समूहों को सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जोड़कर रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। समूह की महिलाओं की मांग पर आजीविका भवन तथा कोदो-कुटकी प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने के लिए ऋण सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास तथा शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग ठकिया गायन की रोजगार संबंधी मांग पर उन्हें ट्राइसिकल उपलब्ध कराने तथा स्वरोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य एवं सांसददुर्गादास उइके, प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायकहेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायकमहेंद्र सिंह चौहान, उपाध्यक्ष जन अभियान परिषदमोहन नागर, संभागायुक्तश्रीकांत बनोठ, आईजीमिथलेश कुमार शुक्ला, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षकवीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

आदिवासी संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में डॉ. बुधरी ताती के योगदान की मुख्यमंत्री ने की सराहना

रायपुर मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के उत्थान, लोक संस्कृति के संरक्षण तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ. ताती के दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के कार्यों के लिए समर्पित किया है। उनका सेवा भाव, समर्पण और सामाजिक योगदान पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर डॉ. बुधरी ताती ने चार दशक से अधिक समय तक बस्तर अंचल सहित वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सतत कार्य किया है। उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डॉ. बुधरी ताती जैसे व्यक्तित्व हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत, लोक संस्कृति और सेवा की परंपरा के सशक्त प्रतीक हैं। उनका जीवन नई पीढ़ी को समाज के प्रति संवेदनशीलता, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। डॉ. बुधरी ताती ने जनजातीय समाज के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती के परिजन उपस्थित थे।

शुभेंदु सरकार लाने जा रही सख्त कानून, बिना सुनवाई एक साल की हिरासत के प्रस्ताव पर विवाद तेज

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है। विधेयकों पर होने लगा बवाल टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है। सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी। विधेयक में क्या प्रावधान है इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में 'गुंडा' ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा। इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।