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‘बिना आंख’ वाला F-35! पेंटागन ने रडार के बिना सौंपे 6 स्टील्थ फाइटर जेट, जानें पूरी कहानी

वाशिंगटन अमेरिका की सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट F35 की कहानी अब एक बड़े घोटाले और देरी की मिसाल बन गई है. पेंटागन ने हाल ही में मरीन कॉर्प्स को छह F35 फाइटर जेट बिना रडार के डिलीवर कर दिए हैं. नया एएन/एपीजी-85 रडार सिस्टम अप्रैल 2028 तक प्रोडक्शन शुरू नहीं होगा।  F35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी मासिएलो ने सीनेट की सुनवाई में साफ कहा कि बिना रडार वाले ये जेट्स पूरी तरह मिशन कैपेबल नहीं माने जा सकते. यह बात इतनी सच्ची है कि इसे कोई छिपा नहीं सकता. दुनिया का सबसे महंगा फाइटर प्रोग्राम, जो अब तक 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है, अब बिना आंखों वाले विमानों को डिलीवर कर रहा है।  ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को बुलाकर मिसाइल स्टॉक की कमी पर सवाल किए. उसी समय पेंटागन F35 जैसे जेट्स बिना मुख्य हिस्से के दे रहा है. भारत के संदर्भ में यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने भारत की यात्रा के दौरान और पहले कई बार भारतीय वायुसेना (IAF) को F35 ऑफर किया था।  प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के समय ट्रंप ने कहा था कि वे भारत को F35 स्टेल्थ फाइटर उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार कर रहे हैं. यह ऑफर भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को ऊंचाई देने वाला था लेकिन अब इस प्रोग्राम की समस्याएं भारत के लिए सोचने वाली बात हैं।  F35 प्रोग्राम की महंगाई और समस्याएं  F35 लाइटनिंग II को दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टेल्थ फाइटर माना जाता है. इसमें एक से ज्यादा रोल हैं – जमीन पर हमला, हवा में लड़ाई और टोही. लेकिन इसका कुल खर्च अब 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जो इसे इतिहास का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम बनाता है. एक जेट की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है, लेकिन रखरखाव, अपग्रेड और लाइफ साइकिल कॉस्ट इसे और महंगा बनाती है।  अब नया AN/APG-85 रडार पुराने APG-81 की जगह लेने वाला था. यह ज्यादा पावरफुल AESA रडार है, जो बेहतर टारगेट डिटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता देता है. लेकिन नाक के अंदर माउंटिंग सिस्टम में बदलाव की वजह से पुराना रडार फिट नहीं हो पा रहा।  इसलिए लॉकहीड मार्टिन ने कुछ जेट्स नाक में बैलास्ट लगाकर डिलीवर किए. मरीन कॉर्प्स ने इंतजार किया, लेकिन अब छह जेट्स बिना रडार के उनके पास हैं. जनरल मासिएलो ने माना कि ये जेट्स ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, लेकिन असली लड़ाई में पूरी क्षमता नहीं दिखा सकते।  यह समस्या सिर्फ रडार तक सीमित नहीं. F35 प्रोग्राम लंबे समय से देरी, कॉस्ट ओवररन और कम तैयार दरों से जूझ रहा है. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि तैयार जेट्स का छोटा प्रतिशत ही पूरी तरह मिशन तैयार रहता है. ट्रंप ने कॉन्ट्रैक्टर्स से मिसाइल स्टॉक की कमी पर जवाब मांगा, जो दिखाता है कि अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री सप्लाई चेन की दिक्कतों से गुजर रही है।  ट्रंप का भारत दौरा और F35 ऑफर  ट्रंप ने भारत यात्रा के दौरान और इससे पहले मोदी के व्हाइट हाउस दौरे पर F35 का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचेगा और F35 का रास्ता भी खोलेगा. यह ऑफर भारत को क्वाड और इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ मजबूत बनाने का संकेत था. भारत के पास अभी राफेल, Su-30MKI जैसे जेट्स हैं, लेकिन पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर IAF को नई ताकत दे सकता था।  भारत ने हालांकि इस ऑफर को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रेड टेंशन और टैरिफ की वजह से भारत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. भारत Make in India पर जोर देता है. रूस, फ्रांस के साथ लंबे संबंध रखता है. F35 खरीदने पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रखरखाव और इस्तेमाल पर सख्त शर्तें लगती हैं, जो भारत को पसंद नहीं आतीं. ट्रंप का ऑफर दिखाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक पार्टनर मानता है।  भारत अगर F35 खरीदता तो क्या होता?  एक तरफ यह IAF को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर सेंसर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर देता. पाकिस्तान और चीन के एयर डिफेंस को चीरने में मदद करता. लेकिन दूसरी तरफ, बिना रडार वाले जेट्स की डिलीवरी, देरी और भारी खर्च भारत के बजट पर बोझ बन सकता था. भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA जैसे अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. F35 जैसी विदेशी टेक्नोलॉजी खरीदने से पहले इन समस्याओं को समझना जरूरी है।  F35 प्रोग्राम की समस्याएं अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की कमजोरियों को उजागर करती हैं. सप्लाई चेन, प्रोडक्शन डिले और कॉस्ट कंट्रोल में दिक्कतें हैं. ट्रंप इन मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन समाधान आसान नहीं. भारत के लिए यह सबक है कि कोई भी हथियार परफेक्ट नहीं होता. रडार, सॉफ्टवेयर, इंजन और रखरखाव सब पर निर्भर रहना पड़ता है।  F35 2028 तक नया रडार मिलने के बाद बेहतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह प्रोग्राम चुनौतियों से भरा है. भारत को ट्रंप के ऑफर पर फिर से सोचना चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर. संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत प्रभावी डील जरूरी है।  यह मामला सिर्फ एक जेट का नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध और रक्षा खरीद की जटिलताओं का है. भारत जैसे देश को मजबूत एयर फोर्स चाहिए, लेकिन बिना आंखों वाला विमान नहीं. ट्रंप की यात्रा और ऑफर ने नए द्वार खोले, लेकिन फैसला सावधानी से लेना होगा. F35 की कहानी जारी है – महंगा, शक्तिशाली लेकिन अभी सही नहीं।   

एपीडा ने किया सहयोग, मप्र की उदयानिकी उत्पादों को मिला विदेशी बाजार

भोपाल रीवा का सुंदरजा आम अब वैश्व‍िक बाजारों की शान बन गया है। केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आम मध्यप्रदेश से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पहले वाणिज्यिक निर्यात के रूप में पहुंच गये हैं। वैश्विक बाजारों में भारत के वि‍शिष्‍ट कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कृषक कल्याण वर्ष के चलते यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है। पिछले कई महीनों से एपीडा ने मध्यप्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), पैकिंग हाउस संचालकों और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के साथ मिलकर इस उत्‍कृष्‍ट किस्म के आम के निर्यात के लिए संपर्क स्थापित करने का काम किया है। इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप संयुक्त अरब अमीरात में एक खरीदार की पहचान हुई जिससे प्रसिद्ध रीवा सुंदरजा आम के अंतर्राष्ट्रीय विपणन का मार्ग खुला। जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप में एक मीट्रिक टन आम शामिल थे और यह 26 जून 2026 को मेसर्स साल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात की गई। यह ऐतिहासिक खेप रीवा सुंदरजा आम की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है और आने वाले समय में नियमित निर्यात का मार्ग प्रशस्त करने की उम्मीद है। निर्यात खेप में उच्च गुणवत्ता वाले जीआई टैग से युक्त रीवा सुंदरजा आम शामिल थे जिन्हें मध्यप्रदेश के रीवा जिले के गोविंदगढ़ निवासी से ओन्धा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और प्रगतिशील किसानसोनू गुप्ता से प्राप्त किया गया था। आमों की कटाई निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार की गई थी और उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित त्रिसागर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के एपीडा-सुविधा प्राप्त पैक हाउस में इनकी ग्रेडिंग, छँटाई और निर्यात-योग्य पैकेजिंग की गई थी। निर्यात पैकेजिंग और पौध स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद आमों की खेप को वाराणसी हवाई अड्डे लाया गया जहां से उसे हवाई मार्ग द्वारा आगे संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया। इस व्यावसायिक निर्यात से रीवा क्षेत्र के आम उत्पादकों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय बाजार में रीवा सुंदरजा आम का मौजूदा भाव लगभग 100 से 110 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि निर्यातक ने इसे 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा है। प्रति किलोग्राम 40 से 50 रुपये का यह लाभ किसानों को सीधे तौर पर मिलता है जो निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं में उत्पादकों को शामिल करने के आर्थिक लाभों को दर्शाता है। इस पहल से अधिक से अधि‍क किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और कटाई के बाद की प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ने की भी उम्मीद है। इस सफल निर्यात से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्षेत्र-विशिष्ट कृषि उत्पादों को एक अलग पहचान दिलाने में भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण के महत्व पर और जोर दिया गया है। असाधारण मिठास, भरपूर सुगंध, रेशे रहित गूदे और विशिष्ट स्वाद के लिए प्रसिद्ध रीवा सुंदरजा आम में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। वाणिज्यिक निर्यात से इस स्वदेशी किस्म की वैश्विक पहचान बढ़ने की उम्मीद है और इसके साथ ही मध्यप्रदेश उत्‍कृष्‍ट कि‍स्‍म के आम निर्यात के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित होगा। संयुक्त अरब अमीरात को जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 26 जून 2026 को ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन मध्यप्रदेश से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍ध‍ि साबित हुआ और एपीडा मध्यप्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, पैक हाउस संचालकों और किसानों के बीच सहयोग की सफलता दर्शाता है। एपीडा निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करके, अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित कर, बाजार संपर्क विकसित करके और वैश्विक बाजारों में भारत के कृषि उत्पादों को बढ़ावा देकर जीआई-टैग वाले और मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रीवा सुंदरजा आमों के वाणिज्यिक निर्यात की सफल शुरुआत से भारत से जीआई उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा होने, कृषि निर्यात तंत्र को मजबूत करने और रीवा क्षेत्र के आम उत्पादकों की स्थायी आय में वृद्धि में योगदान देने की उम्मीद है। सुंदरजा की विशेषता दो साल पहले रीवा ज़िले के गोविंदगढ़ में उगने वाले सुंदरजा आम को जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन टैग मिला। 1968 में सुंदरजा पर एक पोस्टेज स्टैम्प जारी किया गया था। यह दिखने में सुंदर और स्वाद में लाजवाब होता है और इसकी खुशबू भी बहुत अच्छी होती है। यह पहली बारिश के बाद पक जाता है और सिर्फ़ गोविंदगढ़ के माहौल में ही उगता है क्योंकि यहाँ की मिट्टी और तापमान सुंदरजा के पेड़ के फलने-फूलने के लिए सही हैं। पत्ती, छाल, बीज हर हिस्सा काम का होता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट है और इसमें विटामिन-A, विटामिन-C और आयरन भरपूर होता है। डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे पसंद करते हैं क्योंकि इसमें शुगर की मात्रा कम होती है। सुंदरजा रीवा ज़िले और पूरे मध्यप्रदेश की पहचान बन गया है। रीवा के फ्रूट रिसर्च सेंटर, कथुलिया में आम पर और रिसर्च चल रही है। यहाँ अलग-अलग वैरायटी के 2345 आम के पेड़ उगाए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से बॉम्बे ग्रीन, इंदिरा, दशहरी, लंगड़ा, गधुवा, आम्रपाली, मल्लिका शामिल हैं। बाणसागर डैम नहर रीवा और आस-पास के जिलों में बागवानी फसलों के लिए लाइफलाइन साबित हुई है, जिससे फूड प्रोसेसिंग के छोटे उद्योगों के लिए काफी अवसरA बने हैं। गोविंदगढ़ इलाके में ही आम के अच्छे बाग हैं। यहां करीब 237 तरह के आम उगाए जाते हैं। सभी का स्वाद बहुत अच्छा होता है। रीवा फ्रांस, USA, UK और UAE को आम एक्सपोर्ट कर रहा है। 

Bhopal Eastern Bypass: ₹3900 करोड़ से बनेगी 10-लेन सड़क, राजधानी की कनेक्टिविटी होगी और बेहतर

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक बड़ी आधारभूत सौगात मिलने जा रही है। शहर में प्रस्तावित 52 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास को अब 10-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए री-डिजाइन किया जा रहा है। नई डिजाइन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। हाल ही में हुई एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास परियोजना को दोबारा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने परियोजना की नई डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आने वाले वर्षों की ट्रैफिक मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।  राजधानी को बड़ी सौगात मिली है। भोपाल में 52 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास अब दस लेन होगा। इसे वेस्टर्न बायपास से 11 मील व भानपुर, भौंरी पर मिलना था, लेकिन अब इसमें समय लगेगा। पीडब्ल्यूडी MPPWD को इसे री-डिजाइन करने के लिए भेजा है। नई डिजाइन के साथ इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, फिर काम शुरू होगा। ये 3900 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। गौरतलब है कि हाल में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास पर फिर से काम शुरू करना तय हुआ है। दरअसल भविष्य की अनुमानित मांग को देखते हुए मौजूदा सड़क कनेक्टविटी को मजबूत और बेहतर बनाने की आवश्यकता थी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ईस्टर्न बायपास के लिए प्रक्रिया शुरु हो गई है। शिक्षा-प्रशिक्षण प्रोजेक्ट होंगे किनारे पर प्रस्तावित मार्ग पर कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, विशेष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्रों में, विकसित की जा रही हैं। अफसरों के अनुसार, क्षेत्र में आगामी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर कनेक्टविटी और जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए इसके रूट और डिजाइन में संशोधन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग हब और एजूकेशन हब के तौर पर विकसित होगा। वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली है। इसके अलाइनमेंट और लागत अनुमानों में बदलाव के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। एमपीआरडीसी अभी वेस्टर्न पर काम कर रहा, फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा पीडब्ल्यूडी के जीएम कैपिटल, पीसी वर्मा बताते हैं कि अभी एमपीआरडीसी वेस्टर्न पर काम कर रहा है। फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा। इसे री-डिजाइन किया जा रहा है। अभी के बायपास से यह बेहतर होगा। एजुकेशन और ट्रेनिंग हब से जुड़ेगा बायपास अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित ईस्टर्न बायपास के आसपास कई बड़े शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जा रहे हैं। इसी वजह से इसके रूट और डिजाइन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके। वेस्टर्न बायपास के बाद ईस्टर्न पर होगा काम पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल एमपीआरडीसी वेस्टर्न बायपास परियोजना पर काम कर रहा है। इसके बाद ईस्टर्न बायपास के निर्माण को गति दी जाएगी। नई डिजाइन के साथ यह परियोजना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और उपयोगी होगी। रिंग रोड नेटवर्क होगा पूरा ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास बनने के बाद भोपाल का लंबे समय से लंबित रिंग रोड नेटवर्क पूरा होने की उम्मीद है। इससे दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहन बिना शहर के भीतर प्रवेश किए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा। पर्यावरण मंजूरी भी होगी जरूरी परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से आवश्यक मंजूरी भी लेनी होगी। प्रस्तावित मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणीय अनुमति अहम मानी जा रही है। रिंग रोड पूरा होने की उम्मीद ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास से भोपाल के बहुप्रतीक्षित रिंग रोड नेटवर्क के पूरा होने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। देशभर में भोपाल ही एकमात्र ऐसी राजधानी है, जिसकी पूरी रिंग रोड नहीं है। ईस्टर्न कॉरिडोर के साथ पश्चिमी का काम पूरा होने पर ये रोड भी पूरी हो जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एनजीटी की मंजूरी की भी दरकार हो सकती है। मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर NGT में मामला जा सकता है।

ESIC अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की पहल, राज्यमंत्री गौर ने केंद्रीय मंत्री से किया आग्रह

भोपाल के ESIC अस्पताल के उन्नयन और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने की मांग की केंद्रीय मंत्री मांडविया को राज्यमंत्री गौर ने लिखा पत्र भोपाल केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल, सोनागिरी के उन्नयन के संबंध में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उल्लेख किया है कि यह अस्पताल भोपाल, मंडीदीप, सतलापुर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों तथा उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। वर्तमान में लगभग 6.5 लाख बीमित कामगार इस अस्पताल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में यह अस्पताल राज्य शासन के श्रम विभाग द्वारा राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं द्वारा संचालित था, लेकिन दिनांक 22 जून 2023 को भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने इसका संचालन अपने हाथ में ले लिया और आज भी भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के नियंत्रण में है। इसलिए बीमित श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए इसका 300 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेष चिकित्सकों एवं मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता और सेकेंडरी व सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है।  

औद्योगिक विकास को नई दिशा, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 10वें अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश समित के पूर्व रवींद्र भवन में ही दो पवेलियन में विकसित औद्योगिक परिवेश का संदेश देती प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के एमएसएमई एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की उद्यमिता, नवाचार तथा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनेक उत्पादों की जानकारी ली और स्टार्टअप एवं सूक्ष्म,लघु मध्यम उद्यमियों से चर्चा कर उनका उत्साह वर्धन किया प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टाल लगाये गए थे ।ड्रोन निर्माण समाधान, आईओटी-आधारित फिजियोथेरेपी उपकरण, सोलर वाटर हीटर एवं डीट पंप, रेलवे तथा रक्षा इंजीनियरिंग उत्पाद, पेटेंटयुक्त इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स एवं ईवी चार्जिंग समाधान, कृषि-अवशेष पैलेट्स तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उत्पादों सहित विविध नवाचारी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'बाजार से' नामक एआई-आधारित प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया, जो ग्राहकों एवं व्यवसायों को जोड़ता है तथा इसे देश के पहले एआई-संचालित बाज़ार के रूप में स्थापित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बांसकारी स्टॉल पर बांस से बनी अनेक वस्तुओं की जानकारी ली। एमएसएमई विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के सात जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक समर्पित पवेलियन (एमपी पवेलियन) भी स्थापित किया गया। इसके साथ ही औद्योगिक नीतियों एवं योजनाओं संबंधी एमएसएमई की जिज्ञासाओं के निवारण संबंधी एक हेल्पडेस्क तथा उद्यमियों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फेसिलिटेशन डेस्क की भी स्थापना की गई। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई), एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) सहित विभिन्न संस्थानों ने भी राज्य में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के विकास के लिये इस प्रदर्शनी में सहभागिता की। 

महाराष्ट्र TET एग्जाम टला, पेपर लीक की आशंका; वायरल प्रश्नों से हूबहू मैच होने पर बड़ा फैसला

मुंबई  सरकारी नौकरी और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं पर से पेपर लीक का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है. अब बेहद चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र से आया है. 28 जून 2026 को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा को अचानक स्थगित कर दिया गया है. महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने भिवंडी में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया है. इस फैसले से राज्य के लाखों उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया है, जो इस रविवार को परीक्षा देने की पूरी तैयारी कर चुके थे।  महाराष्ट्र टीईटी (Maha TET 2026) को लेकर छात्रों का गुस्सा और निराशा साफ देखी जा सकती है. भिवंडी में कुछ संदिग्धों के पास से प्रश्नपत्र से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी बरामद हुई थी, जिसके बाद प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा. महाराष्ट्री टीईटी परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इस खुलासे ने परीक्षा कराने वाली सुरक्षा व्यवस्था और एजेंसियों की पोल खोल दी है. .भिवंडी पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को हिरासत में लिया है. परिषद का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इसे टालना बेहद जरूरी था।  भिवंडी में पुलिस की छापेमारी से हुआ खुलासा भिवंडी पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों और प्रश्नपत्र से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने की गुप्त सूचना मिली थी. पुलिस ने बिना वक्त गंवाए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की और वहां से कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद की. भिवंडी पुलिस के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लग गए, जिसने महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा कराने वाली परिषद के होश उड़ा दिए. इसके तुरंत बाद भिवंडी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।  बरामद दस्तावेज और असली पेपर में निकली समानता शुरुआती जांच में जब पुलिस की तरफ से बरामद की गई सामग्री का मिलान 28 जून को होने वाली असली TET 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र से किया गया तो अधिकारी हैरान रह गए. बरामद सामग्री और परीक्षा के कुछ प्रश्नों में गजब की समानता पाई गई. इसका साफ मतलब था कि पेपर लीक की पूरी तैयारी हो चुकी थी और कुछ चुनिंदा लोगों तक सवाल पहुंच चुके थे. इस गंभीर गड़बड़ी के सामने आते ही परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।  पारदर्शिता के लिए टाली परीक्षा महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस रिलीज जारी की. परिषद ने साफ किया कि उनके लिए परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे ऊपर है. अगर इस स्थिति में परीक्षा कराई जाती तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता. इसलिए 28 जून को प्रस्तावित महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा 2026 को फिलहाल रोकने का सख्त फैसला लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को दागदार होने से बचाया जा सके।  उम्मीदवारों के भविष्य पर सस्पेंस, कब होगी परीक्षा? इस अचानक आए फैसले से उन लाखों उम्मीदवारों को गहरा झटका लगा है जो महीनों से दिन-रात एक करके इस शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. सोशल मीडिया पर छात्र अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. परीक्षा परिषद ने उम्मीदवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा है कि इस रैकेट की गहराई से जांच की जा रही है. परीक्षा की नई तारीखों और आगे के शेड्यूल को लेकर जल्द ही परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर नया नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।  दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई परीक्षा परिषद की डिप्टी कमिश्नर प्रिया शिंदे ने बताया कि पुणे परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित यह परीक्षा राज्य के 37 शहरों के 1728 केंद्रों पर होने वाली थी. इसमें करीब 6 लाख 12 हजार 500 उम्मीदवारों को शामिल होना था. लेकिन ठाणे और भिवंडी में पेपर लीक होने के बाद इसे स्थगित करना पड़ा. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में उम्मीदवारों की कोई गलती नहीं है. इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा के लिए न तो रजिस्ट्रेशन कराना होगा और न ही कोई फीस देनी होगी. डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि एक परीक्षा आयोजित करने में करीब 3 हफ्ते लगते हैं. दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।   

रूस में इवानोव की मौत से बढ़ीं अटकलें, पुतिन के भरोसेमंद सहयोगी को लेकर कई सवाल

मॉस्को  कभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के उत्तराधिकारी समझे जाने वाले सर्गेई इवानोव की मृत्यु हो गई है. सर्गेई इवानोव रूस के रक्षा मंत्री रह चुके थे. उन्हें कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वे 73 साल के थे।  खास बात यह है कि क्रेमलिन ने बताया कि इवानोव की मौत शुक्रवार को हुई, लेकिन मौत की वजह या अन्य कोई जानकारी नहीं दी. लेकिन क्रेमलिन इसके बारे में कोई डिटेल नहीं दे रहा है. हालांकि पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की. रूस समेत सोशल मीडिया में इस बारे में चर्चा हो रही है।  पुतिन ने 2001 में इवानोव को अपना रक्षा मंत्री नियुक्त किया था. इवानोव भी रूस की खुफिया एजेंसी KGB के अधिकारी थे. इवानोव वे 2007 तक इस पद पर रहे और चेचन्या में दूसरे युद्ध के दौरान कामकाज संभाला, जिसमें उस इलाके की अलगाववादी कोशिशों को कुचल दिया गया था।  द सोवियत जेम्स बॉन्ड लेनिनग्राद में जन्मे इवानोव ने KGB में नौकरी की. यहीं पर पुतिन के साथ उनकी दोस्ती हुई. दोनों KGB के लेनिनग्राद डायरेक्टोरेट में साथ काम करते थे. 1998 में जब पुतिन FSB के प्रमुख बने, तो इवानोव उनके डिप्टी बने. पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद इवानोव ने अहम पद संभाले।  इन पदों में सुरक्षा परिषद सचिव, रक्षा मंत्री, प्रथम उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख शामिल हैं. वे ‘सिलोविकी’ के प्रमुख चेहरे थे. सिलोविकी सुरक्षा एजेंसियों से आए अफसरों के शक्तिशाली समूह को कहा जाता है. एक समय उन्हें पुतिन का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता था. पुतिन के साथ उनका रिश्ता KGB के दिनों से गहरा और विश्वास-आधारित था. पुतिन उन्हें अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद साथियों में गिनते थे. लेकिन जैसा कि राजनीति में होता है जिससे नजदीकी होती है उसी से अविश्वास भी होता है।   इवानोव को रूस के सर्कल में सोवियत जेम्स बॉन्ड कहा जाता था. इवानोव के करियर में हुई तरक्की का काफी हद तक श्रेय पुतिन के साथ उनकी पुरानी दोस्ती को जाता है. दोनों दोस्त पहली बार 1970 के दशक के आखिर में KGB अफसरों के तौर पर मिले थे. दोनों ने सोवियत जासूसी केंद्रों में काम किया. पुतिन पूर्वी जर्मनी में थे और इवानोव की तैनाती फिनलैंड और केन्या में थी।  पत्रकार मिखाइल ज़ीगर ने अपनी किताब 'ऑल द क्रेमलिन मेन्स' में लिखा, "वह एक आदर्श सोवियत जासूस हैं. आप उन्हें भीड़ में अलग से नहीं पहचान सकते, वह 'द मैट्रिक्स' के एजेंट स्मिथ जैसे हैं, नाम में भी और शक्ल में भी. "1990 के दशक में रूस की दो मुख्य खुफिया एजेंसियां FSB (फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस) और SVR (फ़ॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस) उन्हें पाने के लिए होड़ कर रही थीं।  SVR में इवानोव को यूरोपीय विभाग का पहला डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया और 40 साल की उम्र के शुरुआती दौर में ही वह सबसे कम उम्र के जनरलों में से एक बन गए. लेकिन इस एजेंट को पाने की होड़ में जीत FSB की हुई, जब पुतिन उसके प्रमुख बने. 1998 में उन्होंने इवानोव को अपना डिप्टी नियुक्त किया. जिससे एजेंसी का एनालिटिकल काम मज़बूत हुआ. जब पुतिन प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इवानोव को रूसी सुरक्षा परिषद का प्रमुख नियुक्त किया।  इवानोव पुतिन के उत्तराधिकारियों में से थे जब 2008 में पुतिन ने कार्यकाल की सीमा के कारण पद छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने का फ़ैसला किया, तो इवानोव को उनका सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था.  लेकिन पुतिन ने अपने एक और पुराने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को अपनी जगह काम करने के लिए चुना ताकि 2012 में राष्ट्रपति पद पर वापसी कर सकें।  इवानोव की महात्वाकांक्षा और पुतिन का डर कुछ जानकारों का मानना ​​था कि पुतिन ने इवानोव की उम्मीदवारी को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इवानोव बहुत ज़्यादा महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें डर था कि वे राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं।  इवानोव 2007 से 2011 तक उप-प्रधानमंत्री के तौर पर पुतिन के साथ रहे और फिर 2011 से 2016 तक क्रेमलिन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के तौर पर काम किया।  2016 में इवानोव को पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया; इस पद का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था और इसे ज़्यादातर लोग सम्मानजनक रिटायरमेंट के तौर पर देख रहे थे. उन्होंने इस साल की शुरुआत में यह पद छोड़ दिया।  यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के जवाब में रूस के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ इवानोव पर भी अमेरिका और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं। 

नक्सल मुक्त बस्तर के नव निर्माण में समाज की होगी अहम भूमिका, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का आह्वान

रायपुर : नक्सल मुक्त बस्तर के नव निर्माण में समाज निभाए अग्रणी भूमिका : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक में सामाजिक एकता, वन संरक्षण और देवस्थलों के संरक्षण पर दिया जोर रायपुर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर के नव निर्माण में समाज की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। विकास, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए समाज को संगठित होकर आगे आना होगा। उन्होंने यह बात आज नारायणपुर के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए कही। नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद कुछ लोग यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि अब जंगलों की कटाई होगी या बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने समाज प्रमुखों से ऐसे भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने और लोगों को सही जानकारी देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर के नवनिर्माण का जिम्मा अब बस्तर के युवाओं के मजबूत कंधों पर टिका है और सरकार विकास के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक           उन्होंने कहा कि समाज के भीतर आदिवासी परंपरा का पालन करने वाले लोगों और उससे अलग हो चुके लोगों के बीच अनावश्यक द्वंद की स्थिति बन रही है। यह समाज के हित में नहीं है। समाज प्रमुखों को आगे आकर आपसी वैमनस्य समाप्त करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।         उप मुख्यमंत्री ने सामाजिक स्थलों एवं देवस्थलों का राजस्व अभिलेखों में चिन्हांकन कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शासन और प्रशासन के सहयोग से देवभूमियों का सफलतापूर्वक चिन्हांकन कराया जा रहा है। इसी तर्ज पर नारायणपुर में भी सभी समाज प्रमुख मिलकर एक समिति का गठन करें, ताकि सामाजिक एवं धार्मिक स्थलों का चिन्हांकन शीघ्र पूरा हो सके और भविष्य में उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।         बैठक के दौरान समाज प्रमुखों द्वारा गढ़िया बाबा के देवस्थल के संरक्षण का विषय उठाए जाने पर उप मुख्यमंत्री शर्मा ने तत्काल बाउंड्री वॉल, नलकूप तथा सोलर लाइट की व्यवस्था कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों का संरक्षण समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।         उप मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण को समाज का साझा दायित्व बताते हुए कहा कि जंगलों को बचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से लघु वनोपजों का संग्रहण एवं दोहन किया जाए तो वन भी सुरक्षित रहेंगे और ग्रामीणों को खेती की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है। उन्होंने समाज प्रमुखों से इस विषय पर गांव-गांव लोगों को जागरूक करने का आग्रह किया।        उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। शर्मा ने कहा कि जैविक कृषि अपनाने से लोगों का खुद का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, भूमि की उर्वरता बनी रहेगी और जैविक उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार बस्तर में सहकारी रूप से दुग्ध उत्पादन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया।        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने अबूझमाड़ की पहाड़ी क्षेत्रों में स्थाई कृषि को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अबूझमाड़ के 10-10 युवाओं का दल बनाकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों का शैक्षणिक भ्रमण कराकर ऊंचाइयों पर खेती के आधुनिक कृषि तकनीक सिखाने को कहा। उन्होंने अबूझमाड़ के ग्रामों में पर्यटन को विकसित करने के लिए होम स्टे विकसित करने को कहा ताकि ग्रामीणों को स्थायी आय का नया माध्यम प्राप्त हो सके।        बैठक में समाज प्रमुखों ने क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकास संबंधी समस्याओं और सुझावों से उप मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी की बातों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना तथा संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से ही नक्सल मुक्त बस्तर का समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य तैयार किया जा सकेगा।        इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, ओरछा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष मंगलूराम नरेटी, नगर पालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल, छोटे डोंगर की सरपंच श्रीमती संध्या पवार, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।    

जेवर से CM योगी का बड़ा संदेश, 75 हजार एकड़ लैंड बैंक और आसान मंजूरी के साथ निवेशकों को बुलाया उत्तर प्रदेश

 नोएडा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को देश और दुनिया के निवेशकों को राज्य में निवेश करने के लिए  आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश 75,000 एकड़ का लैंड बैंक, सेक्टर-स्पेसिफिक पॉलिसी, इंसेंटिव और सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहा है. गौतम बुद्ध नगर के जेवर में एम्बर और एसेंट-के सर्किट्स के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में बड़ा परिवर्तन हुआ है, जिससे यह निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन गया है।  उन्होंने कहा, 'पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जेवर क्षेत्र, जो कभी पहचान के संकट से जूझ रहा था, आज पूरी तरह बदल चुका है. कानून-व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और उत्तर प्रदेश आज 75,000 एकड़ के लैंड बैंक के साथ देश और दुनिया के निवेशकों का स्वागत कर रहा है.' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने 36 विभिन्न क्षेत्रों के लिए नीतियां बनाई हैं, जिससे निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार क्षेत्र चुन सकते हैं और सरकार उन्हें हर संभव सहयोग दे रही है।  हमारे पास हर सेक्टर के लिए नीति: CM योगी योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हमारे पास हर सेक्टर के लिए नीति है. निवेशक यहां आकर निवेश कर सकते हैं. सरकार समय पर इंसेंटिव देती है और सिंगल-विंडो क्लियरेंस की सुविधा उपलब्ध है. कोई भी निवेशक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने प्रोजेक्ट स्थापित कर सकता है और विकास की गति को तेज करने में योगदान दे सकता है.' सीएम योगी ने कहा कि एम्बर ग्रुप और दक्षिण कोरिया की एसेंट-के सर्किट्स (प्राइवेट इंडिया-कोरिया जॉइंट वेंचर) द्वारा किए जा रहे 6,045 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में और अधिक एंकर यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा।  उन्होंने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया. साथ ही केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को भी उनके मंत्रालय से समय पर मंजूरी दिलाने के लिए धन्यवाद दिया. इस कार्यक्रम में दोनों केंद्रीय मंत्रियों के साथ उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।  उत्तर प्रदेश देश का MSME हब बना: CM योगी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हमारा उद्देश्य है कि जिन उत्पादों का आज हम आयात करते हैं, उनका निर्माण भारत में हो और उन्हें दुनिया भर में निर्यात किया जाए. भारत को इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का वैश्विक हब बनना है.' उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले ही 96 लाख से अधिक पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के साथ देश का एमएसएमई हब बन चुका है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य अब भारत का मोबाइल फोन निर्माण केंद्र बन गया है, जहां देश के लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55-60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उत्पादन नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हो रहा है।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन 2047 तक भारत को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है और उस दिशा में यात्रा उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से गौतम बुद्ध नगर में, शुरू हो चुकी है. उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों की भागीदारी और उनके नागरिक कर्तव्यों का पालन बेहद आवश्यक होगा।   

नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकास की राह पर, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बोलीं- बदल रही है बस्तर की तस्वीर

रायपुर : नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर की ओर बढ़ रहा-मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े कैबिनेट मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रेस-वार्ता में कहा— सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं से बदलेगी जिले की तस्वीर, सरकार समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रायपुर दो दिवसीय प्रवास पर बीजापुर पहुंचीं  महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने शनिवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से अब जिले में विकास का नया दौर शुरू हो चुका है और शासन की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बीजापुर वासियों को दी बधाई मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जिलेवासियों को सशस्त्र माओवाद से मुक्ति के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे बस्तर अंचल और देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में माओवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अब बीजापुर सहित बस्तर संभाग शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। अब विकास की रफ्तार होगी और तेज प्रेस-वार्ता में मंत्री ने कहा कि वर्षों तक माओवादी गतिविधियों के कारण जिले के कई अंदरूनी क्षेत्रों तक विकास कार्य पूरी गति से नहीं पहुंच पाए थे। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और शासन-प्रशासन पूरी क्षमता एवं प्रतिबद्धता के साथ उन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, संचार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाएगा, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगी शासन की योजनाएं मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी है। महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की व्यक्ति-मूलक योजनाओं से जिले के अंतिम व्यक्ति को जोड़कर समावेशी विकास का मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे हर परिवार विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन सके। शांति और विकास साथ-साथ चलेंगे मंत्री ने कहा कि शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। अब जब बीजापुर में शांति का वातावरण स्थापित हुआ है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को और गति मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का दायरा लगातार बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासन, प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयासों से बीजापुर आने वाले समय में विकास, सुशासन और जनकल्याण का एक नया उदाहरण बनेगा। सरकार जिले के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता और गंभीरता के साथ कार्य कर रही है।