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क्या केंद्र की राजनीति में होगा बड़ा उलटफेर? राघव चड्ढा को लेकर चर्चाएं तेज, दो मंत्री हो सकते हैं बाहर

 नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव परिणाम से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, अब तक NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। कहा जा रहा है कि इस दौरान टीम मोदी से कई मंत्री बाहर जा सकते हैं और संगठन में पद संभाल सकते हैं। वहीं, चुनावी राज्यों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों की भी एंट्री हो सकती है। राघव चड्ढा के नाम की अटकलें पंजाब में भारतीय जनता पार्टी खासी सक्रिय नजर आ रही है। इसके साथ ही अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि कैबिनेट में पंजाब के चेहरों को शामिल किया जा सकता है। भाजपा ने मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट से महासचिव तरुण चुघ को मैदान में उतारा है। उनके अलावा पूर्व कांग्रेस नेता और राज्य में भाजपा की कमान संभाल चुके सुनील जाखड़ के नाम की भी अटकलें हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आम आदमी पार्टी से आए राघव चड्ढा को भी कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है। हालांकि, इसे लेकर चड्ढा या पार्टी नेता की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। दरअसल, पंजाब से आने वाले नेता रवनीत सिंह बिट्टू को इस बार भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया है। ऐसे में पंजाब के कई नए चेहरों के मंत्री परिषद में आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। 2 मंत्रियों का कट सकता है टिकट  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि 2 मंत्री बाहर किए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक साफ नहीं है कि इनमें किन नेताओं नाम शामिल है और इसे लेकर आधिकारिक रूप से भी कुछ नहीं बताया गया है। खास बात है कि भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो केंद्रीय मंत्रियों को टिकट नहीं दिया है। इनमें बिट्टू के अलावा जॉर्ज कुरियन का नाम भी शामिल है। दक्षिण भारतीय राज्य की किसे मिलेगी कमान रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि कैबिनेट फेरबदल में 10 से 12 मंत्री शामिल या बदले जा सकते हैं। कई मंत्रियों के विभाग बदले जाने की भी अटकलें हैं। इसके अलावा कहा जा रहा है कि भाजपा किसी कैबिनेट मंत्री को कर्नाटक इकाई का प्रमुख भी बना सकती है। हालांकि, नाम अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल, पार्टी के कर्नाटक प्रमुख बीवाई विजयेंद्र हैं। याचिका समिति के अध्यक्ष हैं राघव चड्डा मई में चड्ढा को उच्च सदन की याचिका समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तब राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन की तरफ से समिति को दोबारा बनाया गया था और 10 सदस्यों को नामित किया था। समिति में चड्ढा के अलावा हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंक कुमार नायक, मस्तान राव यादव बीडा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रवंगवरा नारजारी और संदोष कुमार पी अन्य सदस्य हैं।

कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान आई सामने, मीनाक्षी नटराजन का खेल बिगड़ने के पीछे किसका हाथ?

भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्यसभा चुनाव में 'सीट चोरी' के आरोपों को नकारते हुए बुधवार को दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का 'खेल बिगाड़ने' का काम उन्हीं की पार्टी के नेताओं ने किया, क्योंकि उनमें से कई की नजर उस सीट पर थी। राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। अधूरा हलफनामा राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत की शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था। भाजपा उम्मीदवार ने की थी शिकायत मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है। कांग्रेस ने लगाए सीट चोरी के आरोप कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है। सीएम मोहन यादव के आरोप मुख्यमंत्री यादव ने इस संबंध में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 'जानबूझकर' और 'षडयंत्रपूर्वक' नटराजन के फॉर्म में गलतियां कीं। उन्होंने दावा किया, 'इस सीट पर कई सारे कांग्रेसियों की नजर थी। जब सीट नहीं मिली तो नटराजन का खेल बिगाड़ने का काम कांग्रेसियों ने ही कर दिया।' यादव ने कहा कि पंच और सरपंच के चुनाव तक में आपराधिक ब्योरा देना होता है और जब 10 से अधिक बार से चुनाव लड़ चुके लोग राज्यसभा जैसे प्रतिष्ठित चुनाव में ऐसी गलतियां करते हैं तो यह अनायास नहीं है। उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया 'षडयंत्र' करार दिया। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को 'आत्मावलोकन' करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को उनके गढ़ छिंदवाड़ा में हराकर भाजपा ने नया रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ठीक से अपने प्रत्याशी का फार्म नहीं भर सकती, विधायकों को एकजुट नहीं रख सकती और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों को स्वीकार नहीं कर सकती तो इसमें भाजपा क्या कर सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी गलतियां देखनी चाहिए और प्रत्याशी घोषित करने से पहले कम से कम उसकी पृष्ठभूमि जांच लेनी चाहिए। इससे पहले, राज्य सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को दावा किया था नटराजन मामले में तेलंगाना के कांग्रेस नेताओं ने ही जरूरी दस्तावेज मुहैया कराए थे। EC से होगी मीनाक्षी के नॉमिनेशन खारिज की शिकायत मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल थोड़ी ही देर में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, मीनाक्षी नटराजन, मोहम्मद अली खान और उमर होडा शामिल हैं। मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में अनियमितताएं पाए जाने के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली और भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर धरना दिया था। भाजपा का आरोप था कि उन्होंने शपथ पत्र में हैदराबाद कोर्ट के एक लंबित मामले की जानकारी छिपाई। नटराजन का नामांकन खारिज होने को कांग्रेस ने "लोकतंत्र की हत्या" और "सीट चोरी" बताया।इधर, भोपाल में कांग्रेस के कार्यकर्ता बुधवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) दफ्तर पहुंचे। गेट बंद मिलने पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गणवेश दफ्तर के बाहर गेट पर टांग दी और लौट गए। कहां से मिले दस्तावेज नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद विजयवर्गीय ने संवाददाताओं से कहा, 'जहां तक हमें मिले दस्तावेजों का सवाल है, उन्हें हमें किसने दिया? आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस किस राज्य में है? मुद्दा यह है कि हमें तेलंगाना से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं। एक ऐसा राज्य… जहां वे सत्ता में हैं। हमारे पास खुद कोई जानकारी नहीं थी। यह कांग्रेस के सदस्य होंगे जिन्होंने इसे हमें प्रदान किया होगा।' राज्य में राज्यसभा की तीन खाली सीटों में से सत्तारूढ़ भाजपा के लिए, दो सीटें जीतना तय था लेकिन नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद तीसरी सीट भी उसके खाते में जाती दिख रही है। भाजपा ने अपने महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट के लिए मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केवट पर दांव लगाया है।

डोनाल्ड ट्रंप का पलटवार! अपाचे हादसे के बाद अमेरिका ने ईरान पर किए हमले, होर्मुज में क्या-क्या हुआ?

वाशिंगटन ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की आग एक बार फिर भड़क गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने होर्मुज को बदलापुर बना दिया है. जिस बात के लिए डोनाल्ड ट्रंप इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को बार-बार रोक रहे थे. अपाचे हेलीकॉप्टर के गिरने के बाद खुद वो गलती कर बैठे. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर ताबड़तोड़ अटैक कर दिया है. अमेरिका का ईरान पर यह अटैक सीजफायर के बीच हुआ है. होर्मुज के पास गिराए गए अपाचे हेलीकॉप्टर का ट्रंप ने ईरान पर अटैक करके जवाब दिया है. हालांकि, तेहरान ने भी बदला लेने की कसम खाई है. इसका मतलब है कि युद्ध की आग अब और भड़कने वाली है।  दरअसल, मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया है. यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर गिर गया था. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान का हाथ था, जबकि तेहरान इस आरोप से इनकार कर रहा है. इस बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं. अमेरिका ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास एक अमेरिकन अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर गिराए जाने के कुछ घंटों बाद ईरान पर हमला किया।  अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले को सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक बताया है. उसने कहा कि ईरान पर यह ताजा हमला ट्रंप के ऑर्डर पर वाशिंगटन टाइम के हिसाब से शाम 5 बजे शुरू हुआ और इसका मकसद ईरानी हमले का प्रोपोर्शनल जवाब देना था. यह कदम तब उठाया गया जब ट्रंप ने ईरान पर अपाचे को मार गिराने का आरोप लगाया और कसम खाई कि ज़रूरत पड़ने पर अमेरिका इस हमले का जवाब देगा।   ट्रंप का बड़ा एक्शन, ईरान पर अमेरिकी हमले शुरू; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा बहरहाल, इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. तेल बाजार से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक… हर क्षेत्र पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है. आइए जानते हैं इस पूरे मामले के कुछ बड़े अपडेट्स. ट्रंप ने दिया सैन्य कार्रवाई का आदेश: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों और सैन्य उपकरणों पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसी के बाद ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को मंजूरी दी गई. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।  अपाचे हेलिकॉप्टर घटना बनी बड़ी वजह: दरअसल, अमेरिका का ईरान पर यह अटैक अपाचे के गिराए जाने का बदला है. ईरान पर आरोप है कि उसने अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर मार गिराया है. इससे ट्रंप भड़क उठे. उन्होंने अपाचे का बदला लेने के लिए ही ईरान पर अटैक करवाया. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान या उससे जुड़े समूहों की भूमिका थी. कुल मिलाकर अपाचे वाली घटना ही नई जंग की वजह बनी।  ईरान के कई ठिकाने निशाने पर: अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार केंद्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए. अमेरिका ने अब्बास समेत 3 ईरानी ठिकानों पर एक साथ हमला किया. इसके बाद तो ईरान में हर तरफ धमाकों की गूंज सुनाई देने लगी।  तेहरान में बढ़ी हलचल: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सैन्य ठिकानों पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. लोगों में खौफ का मंजर है. गौरतलब है कि अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल के साथ मिलकर अटैक किया था।  ईरान ने दी कड़ी चेतावनी: अमेरिकी हमलों पर ईरान ने भी पलटवार की कसम खाई है. ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी हमले का जवाब देगा. तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई जारी रखी तो पूरे क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं. इस बीच तेहरान ने भी पलटवार किया है. उसने भी कुछ मिसाइलें दागी हैं।  होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा: मिडिल ईस्ट का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जंग का अखाड़ा बन गया है. अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमला बोल दिया है. इससे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ गया है. यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है।  बेंजामिन नेतन्याहू को रोक खुद गलती कर रहे ट्रंप: डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही इजरायल को ईरान के खिलाफ नई जंग नहीं छेड़ने के लिए चेताया था. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर इजरायल ईरान पर अटैक करता है तो वह उसे अकेले जंग लड़नी पड़ेगी. मगर अपाचे के गिरने के बाद ट्रंप खुद आपा खो बैठे और ईरान पर अटैक कर दिया।  होर्मुज में फिर मचेगा हाहाकार: ईरान जंग पर अमेरिका अब तक शांत था. वह किसी तरह सीजफायर को मान रहा था और ईरान से डील चाहता था. मगर अपाचे के गिरने से ट्रंप का सब्र जवाब दे गया. भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अटैक करके नई जंग छेड़ दी है. इसका मतलब है कि होर्मुज में अब और हड़कंप मचेगा. इससे तेल और गैस की चिंता और बढ़ जाएगी। 

ममता बनर्जी की करीबी सुष्मिता देव ने छोड़ा TMC का साथ, इस्तीफे से बंगाल की राजनीति में चर्चा तेज

कोलकत्ता  ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद झटका पर झटका लग रहा है. कुछ दिन पहले वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सांसदी छोड़ दी थी और अब सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि राज्य चुनाव में हार के बाद टीएमसी के 80 में से 58 विधायक भी विरोधी गुट बना चुके हैं।  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं का सामना कर रही है. उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए एक और राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजहों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. सुष्मिता देव लंबे समय से टीएमसी का प्रमुख चेहरा रही हैं और पार्टी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।  गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने कल ही सोनिया गांधी से मुलाकात की है. ममता पार्टी में टूट रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी हुई हैं लेकिन एक-एक करके उनके साथी साथ छोड़ रहे हैं. कुछ दिन पहले ही लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने दावा किया था कि उनके पास टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 का समर्थन हासिल है. गौरतलब है कि दलबदल कानून से बचने के लिए विरोधी गुट को 19 सांसदों की जरूरत है।  गौरतलब है कि सुष्मिता देव एक वक्त पूर्व सीएम ममता बनर्जी की बेहद खास हुआ करती थीं. लेकिन अब सुष्मिता देब ने अपने पद से ही इस्तीफा दे दिया है. राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्ण को लिखे पत्र में सुष्मिता देव ने कहा है कि मैं राज्यसभा की सदस्य पद से इस्तीफा देता हूं. आपसे इसे तुरंत स्वीकार करने का आग्रह करती हूं।  मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सचिवालय पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा। उनका यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाएं लगातार चर्चा में हैं। सुष्मिता देव टीएमसी के उन नेताओं में शामिल रही हैं जिन्हें पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चेहरा माना जाता था। वह कांग्रेस छोड़कर वर्ष 2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं और तब से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के लिए एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। टीएमसी की चुनौतियों क्या कहा था हाल ही में बातचीत में देव ने टीएमसी के मौजूदा हालात पर चर्चा की थी। उन्होंने लिखा था, 'अच्छी खबर यह है कि ऐसा ही हमने दूसरे राज्यों में भी देखा है। इसकी वजह साफ है कि हमारे विधायकों और कैडर पर बहुत दबाव है…। जमीन पर यह पता चला है कि पुलिस और प्रशासन की तरफ से जबरदस्त दबाव है कि टीएमसी को छोड़ दें या परिणामों के लिए तैयार रहें। यह सच्चाई है। मुझे लगता है कि अगर हिंदी में कहें तो दूध का दूध और पानी का पानी होगा। मुझे लगता है कि यह हमें और मजबूत बनाएगा और आने वाले सालों के लिए तैयार करेगा।' उन्होंने कहा था, '…ममता दी की ताकत उनकी जनता है, ममता दी की ताकत ईमानदारी है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कह रहा है, हमारे बारे में क्या नारे लगाए जा रहे हैं। ममता दी में हालात बदलने की क्षमता है। यह चुनौती है और इससे निपटने में हम सक्षम हैं और यह कुछ समय की ही बात है।' सुखेंदु शेखर रे ने लगाए थे गंभीर आरोप रे ने इस्तीफा देने के बाद एक पत्र में लिखा था कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने 15 वर्ष से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा , शिक्षा, स्वास्थ्य , उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में बुरी तरह नाकाम रहने पर सत्ता से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा था, 'मैं लोगों के इस ऐतिहासिक फैसले को विनम्रता से स्वीकार करता हूं तथा तृणमूल कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।'

मौसम का कहर! तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट, IMD ने लोगों को किया सतर्क

नई दिल्ली  देश के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल रहा है। मॉनसून अपने पुराने अंदाज में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मॉनसून की उत्तरी सीमा इस समय हरनाई, सोलापुर, कलबुर्गी, नंद्याल, चेन्नई और सिलिगुड़ी से होकर गुजर रही है। अगले 4 से 5 दिनों के दौरान मॉनसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, पूरे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल के कुछ और इलाकों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके प्रभाव से जहां दक्षिण और पूर्व भारत में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है, वहीं उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत मिलने वाली है। उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी आंधी के साथ बारिश की संभावना है। 13 से 16 जून के बीच भी धूल भरी आंधी और हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं, लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में 10 से 16 जून के बीच बारिश के आसार हैं। विशेष रूप से 12 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओले गिरने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है। जयपुर सहित पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 11 से 13 जून के बीच भीषण आंधी और धूल का गुबार छाए रहने की आशंका है। 14 से 16 जून के बीच तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को व्यापक स्तर पर बारिश होगी। साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में इन दो दिनों में भारी ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। मुंबई में भारी बारिश, एमपी में ओले मुंबई सहित कोंकण और गोवा के इलाकों में मॉनसून सक्रिय हो चुका है। यहां 10 और 11 जून को भारी बारिश के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी 12 जून तक आंधी-बारिश का दौर रहेगा। भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश में 12 जून को ओलावृष्टि और 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 11 और 12 जून को तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट 10 जून को तटीय कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। बेंगलुरु सहित आंतरिक कर्नाटक में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल, माहे और तमिलनाडु के कई हिस्सों में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हैदराबाद सहित तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में 10 से 13 जून के बीच गरज-चमक के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की संभावना है। तेलंगाना में आज भारी बारिश भी हो सकती है। असम-मेघालय में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 7 दिनों (10-16 जून) तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 10 से 14 जून के बीच अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कोलकाता सहित गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 10 और 11 जून को तथा बिहार-झारखंड में 11 और 12 जून को 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से भीषण आंधी और बारिश होगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में आज बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि बिहार में 12 जून तक भारी बारिश हो सकती है।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर योगी सरकार का फोकस, फ्री घर और हेल्थ सिक्योरिटी का बड़ा ऐलान

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए योगी सरकार बड़ी तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में पात्र महिलाओं को मुफ्त आवास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है. इसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. महिला कल्याण विभाग लाभार्थियों का डाटा जुटाने में लगा है।  सरकार की योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ दिया जाएगा. इसका उद्देश्य उन महिलाओं को नई शुरुआत का अवसर देना है, जो सामाजिक या पारिवारिक संकटों के कारण असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं।  किन महिलाओं को मिलेगा लाभ सरकारी तैयारी के अनुसार तीन श्रेणियों की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. जिसमें पहले तीन तलाक से प्रभावित महिलाएं, दूसरे पर एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं और तीसरे पर निराश्रित एवं बेसहारा महिलाएं होंगी. इन महिलाओं को आवास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की व्यापक योजना पर काम शुरू हो चुका है. सरकार का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सम्मानजनक जीवन के लिए स्थायी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।  मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऐसी महिलाओं की पहचान की जाए जो गंभीर सामाजिक संकटों का सामना कर चुकी हैं और जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा था कि तीन तलाक और एसिड अटैक जैसी घटनाओं से प्रभावित महिलाओं को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।  महिला कल्याण विभाग जुटा रहा विस्तृत डाटा सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए महिला कल्याण विभाग ने व्यापक स्तर पर डाटा संग्रहण अभियान शुरू कर दिया है. विभाग तीन तलाक, एसिड अटैक और निराश्रित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित कर रहा है. इसके लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र महिला सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए. अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों की पहचान के बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा. इसके लिए शासन स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है।  क्यों खास है यह पहल? विशेषज्ञों का मानना है कि एसिड अटैक और तीन तलाक जैसी घटनाएं किसी महिला के जीवन को पूरी तरह बदल देती हैं. एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, प्लास्टिक सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता पड़ती है. वहीं तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं अचानक आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा के दायरे में आ जाती हैं. ऐसी परिस्थितियों में यदि उन्हें सुरक्षित आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है तो वे दोबारा आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकती हैं. यही वजह है कि सरकार केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि महिलाओं को स्थायी सुरक्षा देने के लिए बहुआयामी योजना पर काम कर रही है।  आवास के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी सरकार की इस योजना का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सुरक्षा है. कई बार गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं के पास इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते. आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को लाखों रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है. वहीं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सरकार चाहती है कि जिन महिलाओं को आवास मिलेगा, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा भी समान रूप से उपलब्ध हो ताकि वे भविष्य को लेकर निश्चिंत रह सकें।  जानकारी के अभाव में नहीं छूटेगा कोई लाभार्थी महिला कल्याण विभाग का कहना है कि अक्सर कई पात्र लोग केवल जानकारी के अभाव या जटिल प्रक्रियाओं के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते. इसी समस्या को देखते हुए विभाग विभिन्न जिलों से डाटा जुटा रहा है और पात्र महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है. सरकार का प्रयास है कि लाभार्थी महिलाओं को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ मिल सके। 

PM मोदी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर शक्ति प्रदर्शन, 35 पार्टियों के 75 नेता जुटेंगे, भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के 12 साल पूरे हो गए हैं.देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड पीएम मोदी ने मोदी तोड़ दिया है. यह रिकॉर्ड आजादी के बाद निर्वाचित सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का है. पंडित नेहरू चुनाव जीतकर 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे जबकि नरेंद्र मोदी का बतौर पीएम का 4399वां दिन है।  पीएम मोदी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल का ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा करने पर पूरे देश में जश्न का माहौल है. मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों को बीजेपी लोगों के सामने रख रही है और उपलब्धियों का जश्न भी मना रही है. इस मौके पर दिल्ली में बीजेपी और एनडीए के सभी सहयोगी दल के नेता दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाली बैठक में शिरकत करेंगे।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड बनाने उपलक्ष्य में भारत मंडपम में हो रही बैठक में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित प्रमुख नेता शामिल होंगे. एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा।  35 दल के 75 नेता करेंगे शिरकत पीएम मोदी ने 1952 के आमचुनावों के बाद चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा लिया है जबकि जवाहर लाल नेहरू  4,398 दिन तक पीएम रहे थे. इस तरह से नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।  मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में एक जश्न रखा गया है,  जिसमें बीजेपी और उसके सहयोगी दल के नेता हिस्सा लेंगे. बैठक में एनडीए के 22 शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों के अलावा गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के नेता शिरकत करेंगे।  बैठक में एनडीए के 35 सहयोगी दलों के करीब 75 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. बैठक की अध्यक्षता बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे. इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह,जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान जैसे केंद्रीय मंत्रियों के कार्यक्रम में शामिल होंगे।  वहीं, एनडीएमें शामिल पार्टियों के केंद्रीय मंत्रियों में टीडीपी से के राम मोहन नायडू, जेडीयू से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह,जेडीएस से एचडी कुमारस्वामी और अपना दल-सोनेलाल से अनुप्रिया पटेल इस बैठक में शामिल होंगी. इसके अलावा राज्यों के सहयोगी दल के नेता भी शिरकत करेंगे।  एनडीए की बैठक का एजेंडा क्या होगा एनडीए बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों सहित मोदी सरकार के 12 पूरे होने पर चर्चा होने की संभावना है. एनडीए के नेता और केंद्र और राज्य सरकारों के नेता 'विकसित भारत' के  सपने को साकार करने के लिए और सुधार लाने के तरीकों पर अपने विचार रखेंगे।  मोदी की अगुवाई में होने वाली बैठक में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने पर एनडीए नेता अपनी बात रख सकते हैं. बैठक में राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के मोदी सरकार के विजन की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. बैठक में इस बात पर भी चर्चा होने डंबल इंजन की सरकार चल रही, उन राज्यों में विकास योजनाओं को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए।  पिछले दिनों केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि केंद्रीय मंत्रियों को लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' की दिशा में काम करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन 2026 में भविष्य के लक्ष्यों और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. माना जा रहा है कि इस पर विस्तार के चर्चा हो सकती है।  बैठक में मोदी के लिए आएगा प्रस्ताव एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू एक विशेष प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसका समर्थन नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो करेंगे।  एनडीए के तरफ से लाए जाने वाले विशेष प्रस्ताव में 12 साल तक निर्वाचित रूप से प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए नरेंद्र मोदी को बधाई दी जाएगी और उनके नेतृत्व के लिए एनडीएका आभार जताया जाएगा  प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने से पहले गठबंधन के नेता चर्चा में हिस्सा लें. प्रस्ताव पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक को संबोधित कर सकते हैं।  एनडीए की बैठक को मोदी करेंगे संबोधित  दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली एनडीए बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. बैठक में मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धि पर चर्चा किए जाने के साथ ये बैठक करीब 3 घंटे तकतक चलेगी. मोदी सरकार के कामकाज पर प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पीएम मोदी एनडीए नेताओं को संबोधित करेंगे। 

सिंहस्थ के लिए प्रगति पर हैं 16 हजार 910 करोड़ रूपए के 148 विकास व निर्माण कार्य ओंकोरश्वर में बनेगा हेलीपेड

सिंहस्थ : 2028 के लिए 17 नए विकास कार्यों को मिली मंजूरी सिंहस्थ के लिए प्रगति पर हैं 16 हजार 910 करोड़ रूपए के 148 विकास व निर्माण कार्य ओंकोरश्वर में बनेगा हेलीपेड उज्जैन सहित ओंकारेश्वर, देवास, इंदौर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर और खरगोन में जारी हैं गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धालुओं की सुविधा, बेहतर आवागमन, सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-मंडलीय समिति की छठवीं बैठक सम्पन्न भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए जारी बेहतर रोड नेटवर्क के लिए इंफ्रॉस्ट्रक्चर निर्माण, शिप्रा घाटों के निर्माण, पुण्य स्नान के लिए जल की पर्याप्त उपलब्धता, श्रद्धालुओं के ठहरने और आवागमन की सुगम व्यवस्था तय समय-सीमा में पूर्ण की जाए। बेहतर प्रबंधन के लिए स्टाफिंग और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से आरंभ हो। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के लिए अद्यतन तकनीक के उपयोग और आपदा प्रबंधन व चिकित्सा सुविधाओं के लिए माइक्रो प्लानिंग की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में हुई सिंहस्थ : 2028 की मंत्रि-मंडलीय समिति की छठवीं बैठक में यह दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-मंडलीय समिति ने 491.66 करोड़ रुपये की लागत के 17 नए विकास कार्यों को मंजूरी दी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन एवं आसपास के 07 जिलों में जारी 16 हजार 910 करोड़ से अधिक लागत के 148 विकास एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा की और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्रालय में संपन्न बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, श्रम मंत्री गौतम टेटवाल तथा पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उज्जैन के विकास कार्यों को मिली स्वीकृति     उज्जैन में शनि मंदिर से प्रशांति धाम चौराहा मार्ग तक पुल और एप्रोच रोड का 30 करोड़ की लागत से निर्माण।     तपोभूमि से पिपलियाराघो पंचक्रोशी मार्ग पर कान्ह नदी पर 12 करोड़ रूपए की लागत से समानन्तर नया पुल।     तपोभूमि से गंगेडी व्हाया राघोपिपल्या तक 5.5 किलोमीटर की 30 करोड़ रूपए लागत की दो लेन की नई सड़क।     देवास रोड से लालपुर होते हुए गरोठ मार्ग तक ढाई किलोमीटर लंबा पंचक्रोशी मार्ग। फोर लेन की यह सड़क 18 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी।     उज्जैन में देवास रोड पर लोक निर्माण विभाग 2.36 करोड़ रुपये की लागत से विश्राम गृह (रेस्ट हाउस)।     उज्जैन के देवास रोड स्थित पीडब्लयूडी सर्किट हाउस का विस्तार और नवीनीकरण।     लेकोड़ा से टनकारिया रेलवे स्टेशन रोड तक 13.28 करोड़ रुपये से 2.50 किलोमीटर लंबी सड़क‍।     महाकाल पुलिस थाने से चौबीस खंबा मार्ग तक 4 करोड़ रुपये लागत से 180 मीटर लंबी नई सड़क।     कुशाभाऊ ठाकरे मार्ग से छोटी रपट तक 36.75 करोड़ रुपये लागत से सड़क चौड़ीकरण कार्य। ओंकारेश्वर के निर्माण कार्य स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर के 160 करोड़ रूपए लागत के निर्माण कार्य, नगर परिषद ओंकारेश्वर में 12.63 करोड़ रूपए लागत की सीसी रोड निर्माण, ओंकारेश्वर रोड सनावद पर 9.23 करोड़ रूपए लागत के रेलवे आरओबी निर्माण, ओंकारेश्वर में 24.99 करोड़ रूपए लागत की मल्टी लेवल पार्किंग, फूड कोर्ट, टॉयलेट और एडमिन ब्लॉक निर्माण, ओंकारेश्वर में 1.46 करोड़ रूपए लागत के बैरिक तथा प्रशिक्षण हॉल आदि के निर्माण, 4.74 करोड़ रूपए लागत से अस्पताल और स्टाफ क्वार्टर, 38 करोड़ रूपए लागत की 3 फ्लोर कुबेर भंडारी पार्किंग और 12.68 करोड़ रूपए लागत से अस्पताल भवन उन्नयन कार्यों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ : 2028 के लिए जारी विभिन्न गतिविधियों की विभागवार समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर में सर्वसुविधायुक्त अस्पताल बनाने और हेलीपैड बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह निर्माण आपदा की स्थिति में विशेष रूप से सहायक होंगे। एयर एम्बुलेंस के संचालन में भी इससे मदद मिलेगी। ओंकारेश्वर-बड़वाह क्षेत्र के विकास के लिए पृथक प्राधिकरण गठित करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वाह, ओंकारेश्वर, खेड़ी घाट क्षेत्र के आसपास होने वाले निर्माण कार्यों के लिए पृथक से प्राधिकरण गठित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इससे खंडवा खरगोन जिलों में होने वाले कार्यों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा और विकास गतिविधियां समय से पूर्ण करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भी निर्देश दिए। क्षिप्रा घाटों के प्रबंधन में आश्रमों और गुरूकुलों को भी जोड़ा जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया कि उज्जैन में शिप्रा नदी के साथ विकसित हो रहे घाटों का निर्माण चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। घाटों तक आने-जाने के मार्गों और पार्किंग व्यवस्था का निर्माण भी साथ-साथ किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिप्रा नदी पर बन रहे घाटों के पास के आश्रमों तथा गुरुकुलों को घाटों के प्रबंधन से जोड़ा जाए। इससे आश्रम और गुरुकुलों को मदद मिलेगी। साथ ही सिंहस्थ के बाद भी घाटों का दीर्घकालिक उपयोग हो सकेगा। पुलिस-प्रशासन-नगर निगम बेहतर समन्वय के लिए अभी से अभ्यास करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के लिए सम्पर्ण व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन का समन्वय कंट्रोल रूम से होगा। इसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। पुलिस, जिला प्रशासन, नगर निगम तथा अन्य सभी एजेंसियां बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिये कि इसके लिए प्रशिक्षण और अभ्यास की प्रक्रिया अभी से आरंभ की जाए। अतिक्रमण हटाने में भेदभाव न हो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मार्ग चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में कोई भेदभाव न हो, सबके लिए एक समान कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसे मामलों में तत्काल मुआवजा भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उज्जैन क्षेत्र में 15 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचक्रोशी मार्ग पर … Read more

जंग के माहौल का बाजार पर नहीं पड़ा असर, हरे निशान में खुला सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले

मुंबई  अमेरिका-ईरान के बीच हुए ताजा हमलों के बीच जहां दुनियाभर के अन्‍य प्रमुख बाजारों में बड़ी गिरावट देखी गई, वहीं भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में  खुले. मार्केट खुलते ही BSE सेंसेक्‍स में 416 अंक से ज्‍यादा का उछाल दिखा, जबकि निफ्टी 50 में भी करीब 100 अंकों का उछाल देखने को मिला. सेंसेक्‍स 74,300 के पार ट्रेड करता दिखा, जबकि निफ्टी 23,300 के पार कारोबोर करता दिखा।  करेंसी मार्केट में उथल-पुथल के बीच भारतीय रुपये में आज गिरावट देखी जा रही है. बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे की गिरावट के साथ 95.56 के लेवल पर कारोबार करता दिखा।  घरेलू शेयर बाजार की अच्‍छी शुरुआत भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख देखा गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 303.73 अंक चढ़कर 74,222.49 के स्तर पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 85.40 अंक की बढ़त के साथ 23,327.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से पैसा निकालना बदस्तूर जारी है. एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र यानी मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 4,566.03 करोड़ रुपये के शेयर बेचे (ऑफलोड किए) थे।  रुपये में क्‍यों दिखी गिरावट?  मिडिल ईस्ट में युद्ध के ताजा घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे टूटकर 95.56 के स्तर पर आ गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपये में शुरुआती गिरावट के बाद और कमजोरी आई. इससे पहले मंगलवार को रुपये में थोड़ी मजबूती देखी गई थी, जब यह 20 पैसे की बढ़त के साथ 95.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।  विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, इस भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय मुद्रा पर चौतरफा दबाव बना दिया है. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि बुधवार को बाजार खुलते ही 'डॉलर-रुपया' (USD/INR) की जोड़ी में भारी कमजोरी देखी गई. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराने के लिए ईरान जिम्मेदार है और अमेरिका इस हमले का 'करारा जवाब' देगा।  कच्चे तेल में उबाल से रुपये पर बढ़ा दबाव वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' (Brent Crude) वायदा बाजार में 0.73 प्रतिशत की तेजी के साथ 92.12 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था. बाजार विश्लेषकों और ट्रेडर्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट में नए सिरे से शुरू हुए तनाव की वजह से भारतीय रुपया गंभीर दबाव में है. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा (कच्चा तेल और गैस) जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बढ़ा देती है. इसी वजह से घरेलू मुद्रा लगातार कमजोर हो रही है।  अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक जवाबी कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर आत्मघाती ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं. इस सैन्य टकराव के चलते वैश्विक बाजार सहमे हुए हैं। 

आधुनिकता के साथ संस्कृति का संगम: PM मोदी के कार्यकाल में भारत की बदलती पहचान

  भोपाल मई 2014 में जब हमारे देवतुल्य नरेंद्र मोदीजी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब देश की जनता ने केवल एक सरकार नहीं चुनी थी, बल्कि शासन की एक नई कार्यशैली और राजनीतिक संस्कृति की अपेक्षा भी व्यक्त की थी. बारह वर्ष बाद इस यात्रा को केवल योजनाओं,आंकड़ों और उपलब्धियों के आधार पर नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टिकोण के आधार पर समझना अधिक उचित होगा, जिसने शासन की सोच को प्रभावित किया. यदि इन बारह वर्षों को तीन शब्दों में समेटना हो, तो वे शब्द होंगे- सेवा, सुशासन और संकल्प।  राजनीति से आगे सेवा का भाव भारतीय राजनीति में लंबे समय तक सत्ता को अधिकार और विशेषाधिकार के रूप में देखा जाता रहा. हमारे देवतुल्य नेता नरेंद्र मोदी जी ने इसे सेवा के रूप में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया. उन्होंने स्वयं को कई बार प्रधान सेवक कहा. यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि शासन की भाषा और शैली में दिखाई देने वाला दृष्टिकोण भी था. सेवा का अर्थ केवल कल्याणकारी योजनाएं चलाना नहीं है. सेवा का अर्थ है कि शासन स्वयं को जनता का संरक्षक नहीं, बल्कि उसका सेवक माने. इस दृष्टि से पिछले बारह वर्षों में शासन की प्राथमिकताओं में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की चिंता है. गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने की सफल कोशिश की गई है।  यह वही सोच है, जिसकी जड़ें पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद में दिखाई देती है. मोदी जी की सरकार ने बार-बार यह संदेश दिया है कि विकास का वास्तविक अर्थ तब है, जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचे।  सुशासन: व्यवस्था में विश्वास की पुनर्स्थापना लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि संस्थाओं और व्यवस्थाओं पर जनता के विश्वास से चलता है. लंबे समय तक भारतीय नागरिक की एक शिकायत रही कि सरकार दूर है, प्रक्रियाएं जटिल हैं और व्यवस्था आम आदमी के लिए कठिन हैं।  पिछले बारह वर्षों में शासन की चर्चा करते समय सुशासन एक प्रमुख शब्द बनकर उभरा. सुशासन का अर्थ केवल भ्रष्टाचार कम करना या तकनीक का उपयोग बढ़ाना नहीं होता है. इसका वास्तविक अर्थ है सरकार को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाना. डिजिटल तकनीक का उपयोग इसी दर्शन का हिस्सा था. तकनीक को केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि सुशासन का माध्यम माना गया. शासन और नागरिक के बीच की दूरी कम करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा निर्णयों को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हुए।  सुशासन का एक महत्वपूर्ण पहलू निर्णय लेने की क्षमता भी है. लोकतंत्र में संवाद आवश्यक है, लेकिन अनिर्णय विकास का सबसे बड़ा शत्रु होता है. हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार की कार्यशैली में यह स्पष्ट दिखाई दिया है कि बड़े निर्णयों से बचने के बजाय उन्हें समाधान तक कैसे पहुंचाया जाए? दरअसल इसे ही निर्णायक नेतृत्व कहते हैं. यह निर्विवाद है कि निर्णय लेने की क्षमता इस शासनकाल की प्रमुख पहचान रही है।  संकल्प: विकसित भारत का सपना हर युग की राजनीति का एक केंद्रीय विचार होता है. स्वतंत्रता आंदोलन का विचार स्वराज था. स्वतंत्रता के बाद का विचार राष्ट्र निर्माण था. इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में मोदी सरकार ने विकसित भारत को राष्ट्रीय संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया. यह संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है. इसके भीतर आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव की भावना भी जुड़ी हुई है. पिछले बारह वर्षों में बार-बार यह संदेश दिया गया कि भारत को केवल विकासशील राष्ट्र के रूप में संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे विश्व की अग्रणी शक्तियों में स्थान प्राप्त करना चाहिए।  यह दृष्टिकोण भारतीय समाज में एक नए आत्मविश्वास का निर्माण करता है. लंबे समय तक भारत अपनी संभावनाओं की चर्चा तो करता था, लेकिन उन्हें प्राप्त करने का साहस कम दिखाई देता था. आज विकसित भारत का विचार एक राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में स्थापित हुआ है।  मोदीजी का आशीर्वाद मध्यप्रदेश के साथ अपने देवतुल्य, 'प्रधानसेवक' से प्रेरणा लेकर हमने भी विकसित मध्यप्रदेश का सपना देखा. यह बताते हुए मन भाव विभोर है कि मोदीजी का हर कदम पर हर निर्णय पर मार्गदर्शन, स्नेह और आशीर्वाद मिला. चाहे वर्षों से लंबित केन बेतवा और पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना हो या पीएम मित्र पार्क, उन्होंने आगे बढ़कर परेशानियों को दूर किया, उनके जैसा नेतृत्व दुर्लभ है।  देश के सात राज्यों में पीएम मित्र पार्क बनाने का निर्णय हुआ, तो उस सूची में मध्यप्रदेश को भी रखा गया. यह अति प्रसन्नता का विषय है कि अब तक सिर्फ मध्यप्रदेश में ही पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन हुआ है और यह गौरव का विषय रहा कि धार में पार्क के भूमिपूजन में प्रधानमंत्री जी शामिल हुए. यह सब मध्यप्रदेश से उनके विशेष लगाव का परिणाम ही है।  प्रदेश में साइबर तहसील का सफल क्रियान्वयन हो या भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल, सब प्रधानमंत्रीजी के स्नेह आशीर्वाद मार्गदर्शन का ही परिणाम है. आज प्रदेश में नौ एयरपोर्ट हैं, तो इसके पीछे भी उनका ही मार्गदर्शन है।  आज हमारा मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त है, तो इसके पीछे उनका ही दिशा-निर्देश है. उन्होंने समय-समय पर समझाया तो चेताया भी. उन्होंने कहा कि गोली का जवाब गोली से दो पर जो लोग बंदूक-हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, उनके लिए बेहतर से बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था भी हो।  उनकी सलाह चेतावनी का ही सुफल है कि आज मध्यप्रदेश लाल सलाम को आखिरी सलाम कह चुका है. आज मध्यप्रदेश में उद्योगों का जाल बिछ रहा है, लाखों करोड़ का निवेश हो रहा है, तो इसके पीछे प्रधानमंत्रीजी का ही मार्गदर्शन है. फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में शामिल होना, उनका विशेष स्नेह ही तो दर्शाता है. उन्होंने हमें संवेदना की सीख दी है. बताया है कि नर ही नारायण हैं. वंचितों-गरीबों में नारायण के दर्शन करो. उनकी सीख ही थी कि हमने अपने शुरुआती निर्णयों में ही इंदौर के हुकुमचंद मिल के कामगारों को उनका बकाया अधिकार दिलवाने में सफलता हासिल की. कामगारों को चेक सौंपने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को प्रधानमंत्रीजी ने वर्चुअली संबोधित भी किया था।  मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में अग्रणी सरकारी कालेजों को प्रधानमंत्री … Read more