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गरीब परिवार में जन्में प्रधानमंत्री मोदी आज देश के गरीब परिवारों के लिए हैं आदर्श: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नायक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव गरीब परिवार में जन्में प्रधानमंत्री मोदी आज देश के गरीब परिवारों के लिए हैं आदर्श: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 25 करोड़ लोगों को मकान दिलवाए, 80 करोड़ नागरिकों को बांटा जा रहा है नि:शुल्क अनाज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने पर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुफा मंदिर के कार्यक्रम में हुए शामिल प्रधानमंत्री मोदी को हनुमान चालीसा और प्रार्थना कार्यक्रम में शामिल होकर दी बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आज़ादी के बाद निर्वाचित रूप से सबसे अधिक अवधि तक देशसेवा करने का रिकॉर्ड आज अपने नाम किया है। वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नायक हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में सर्वाधिक लंबे समय तक कार्य किया है। यह सभी देशवासियों के लिए गौरवशाली क्षण है। प्रधानमंत्री मोदी, जनता के हित में एकजुटता के साथ कार्य करते हैं। वे अपनी पूर्ण क्षमता के साथ भारत को दुनिया में नंबर-1 देश बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आंतरिक रूप से सुरक्षित है, और सीमा से बाहर भी दुश्मनों के दांत खट्टे कर भारतीय सेना ने अपनी सामर्थ्य सिद्ध की है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा के 12 वर्ष पूर्णहोने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव, भोपाल के गुफा मंदिर में आयोजित हनुमान चालीसा और प्रार्थना कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हनुमान चालीसा का श्रवण कर भगवान का पूजन अर्चन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के बाद उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में स्थानीय सांसद आलोक शर्मा, रविन्द्र यति तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के भीतर जनसेवा और सीमा पर सामरिक सुरक्षा सशक्त हुई है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राम राज्य में कोई भूखा नहीं सोता था, बेटियां सुरक्षित थीं, गौमाता के पूजन के साथ-साथ सनातन संस्कृति के मंदिरों का वैभव था। प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल भी इन्हीं उपलब्धियों का साक्षी है। प्रधानमंत्री मोदी सादगीपूर्ण जीवनशैली के साथ देश सेवा में समर्पित हैं। उन्होंने देश के 25 करोड़ लोगों को मकान दिलवाए, 80 करोड़ नागरिकों को नि:शुल्क अनाज वितरित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलकर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं। हम सभी के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के भीतर जनसेवा और सीमा पर सामरिक सुरक्षा सशक्त हुई है। देश में एक नए संकल्प का वातावरण है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान राम और हनुमान जी के आशीर्वाद से पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी पवित्र गीता में बताए कर्मवाद के सिद्धांत पर काम करते हैं। उन्होंने अपने कार्यों से पृथ्वी पर अपने जन्म को सार्थक किया है। गरीब परिवार में जन्मे प्रधानमंत्री मोदी आज देश के गरीब परिवारों के लिए एक आदर्श हैं। देश में एक नए संकल्प का वातावरण है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सबको अवसर मिलता है। प्रदेशवासी अपने जीवन में संकल्प लें, संघर्ष करें और आगे बढ़ें। हम जो कहते हैं वो करके दिखाते हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बन चुका है। देश-दुनिया से श्रद्धालु मंदिर में प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का आशीर्वाद ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम जो कहते हैं वो करके दिखाते हैं। प्रभु श्रीराम की विशेष कृपा मध्यप्रदेश पर है, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के संकल्प के साथ देश आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का मध्यप्रदेश को लगातार आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है स्थानीय सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने विगत वर्षों में विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता, डिजीटल नवाचार और इन्फ्रास्ट्रक्टर निर्माण में अभूतपूर्व उपलब्धियां दर्ज की हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मन में गरीब, किसान, नारी सशक्तिकरण और युवाओं के गहरी संवेदना हैं। मध्यप्रदेश को हर पल उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त हो रहा है।  

विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का पंजाब दौरा तय

चंडीगढ़ पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से संगठनात्मक गतिविधियां तेज करनी शुरू कर दी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 19 से 22 जून के बीच पंजाब दौरे पर आ रहे है। यह दौरा दो दिवसीय होगा हालांकि इस का शेड्यूल फाइनल नहीं हुआ है। नितिन नबीन का अध्यक्ष बनने के बाद यह पंजाब का पहला दौरा होगा, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नितिन नबीन अपने दौरे की शुरुआत अमृतसर से करेंगे। अमृतसर पहुंचने के बाद वह सबसे पहले श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेककर आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद उनके दुर्गयाना मंदिर और जलियांवाला बाग जाने का भी कार्यक्रम प्रस्तावित है, जहां वह शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं। धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन की जमीनी स्थिति का फीडबैक लेंगे। तीन दिन पंजाब में रुकेंगे बताया जा रहा है कि तीन दिवसीय दौरे के दौरान वह प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में भी हिस्सा ले सकते हैं। नितिन नबीन पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, कोर ग्रुप के सदस्यों और जिला अध्यक्षों के साथ अलग-अलग दौर की रणनीतिक बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन विस्तार और 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा होगी। इसके अलावा पार्टी के जनाधार को मजबूत करने के लिए स्थानीय व्यापारियों, किसानों और प्रबुद्ध वर्ग के प्रतिनिधियों से संवाद का कार्यक्रम भी रखा जा सकता है। ध्यान रहे की हाल ही में पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी। गोल्डन टेंपल, दुर्ग्याणा मंदिर, जलियांवाला बाग भी जाएंगे जानकारी के मुताबिक, नितिन नबीन अपने पंजाब दौरे की शुरुआत गुरु नगरी अमृतसर से करेंगे। 20 जून को अमृतसर पहुंचने के बाद वे सबसे पहले गोल्डन टेंपल (दरबार साहिब) में नतमस्तक होंगे और गुरु घर का आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद वे दुर्ग्याणा मंदिर और जलियांवाला बाग जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित कर सकते हैं। धार्मिक स्थलों पर माथा टेकने के बाद वे पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे। अलग-अलग शहरों में होंगे बड़े कार्यक्रम राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पंजाब चुनावों की तैयारी के लिए अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वह पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, कोर ग्रुप के सदस्यों और जिला अध्यक्षों के साथ रणनीति बैठकें होंगी। पार्टी के वोट बैंक को मजबूत करने के लिए वे स्थानीय व्यापारियों, किसानों और प्रबुद्ध नागरिकों से भी संवाद कर सकते हैं। केवल सिंह ढिल्लों की रणनीति आई काम दरअसल, हाल ही में पंजाब भाजपा के प्रदेश प्रधान केवल सिंह ढिल्लों ने दिल्ली का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद ढिल्लों ने संकेत दिए थे कि पंजाब में भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए केंद्रीय आलाकमान पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने दावा किया था कि जल्द ही केंद्रीय नेताओं और राष्ट्रीय पदाधिकारियों के पंजाब दौरे शुरू होंगे, जो 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का शंखनाद करेंगे। नितिन नबीन का यह दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दौरा प्रस्तावित है, कार्यक्रम आएगा तो करेंगे शेयर भाजपा के मीडिया प्रभारी विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा प्रस्तावित है। अभी दौरा फाइनल नहीं हुआ है। जैसे ही पूरा शेड्यूल और कार्यक्रम फाइनल हो जाएगा, उसकी आधिकारिक जानकारी मीडिया के साथ साझा कर दी जाएगी।" संगठन को पंजाब में मजबूत करने की तैयारी मुलाकात के बाद ढिल्लों ने संकेत दिए थे कि पंजाब में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह गंभीर है और जल्द ही केंद्रीय नेताओं व राष्ट्रीय पदाधिकारियों के पंजाब दौरे शुरू होंगे। माना जा रहा है कि नितिन नबीन का प्रस्तावित दौरा इसी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा के मीडिया प्रभारी विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का पंजाब दौरा फिलहाल प्रस्तावित है और अभी कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही पूरा शेड्यूल तय हो जाएगा, उसकी आधिकारिक जानकारी मीडिया के साथ साझा कर दी जाएगी।

रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच होने पर भी होगा तबादला, पंचायत सचिवों के लिए सरकार का नया नियम

भोपाल तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई नीति के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही जिस पंचायत में सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाएंगे, वहां से भी सचिव का तबादला किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के आधार पर यह नई गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कराई जाए। बता दें कि मध्य प्रदेश में 23 हजार से ज्यादा पंचायत सचिव हैं। 15 जून तक होंगे तबादले 9 जून को जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक जिले के भीतर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद जारी किए जाएंगे। यह प्रक्रिया एक जून से ही मान्य की जाएगी। विभागीय निर्देशों के मुताबिक स्थानांतरण आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे। नई गाइडलाइन में जिला एवं अंतरजिला स्तर पर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी तय की गई है। सरकार को इसलिए रखनी पड़ी शर्त दिग्विजय सरकार ने वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति की थी, जो आज पंचायत सचिव हैं। तब नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी और ज्यादातर मामलों में ग्राम सभा ने सरपंच, उप सरपंच, पंच या गांव के प्रभावशाली व्यक्ति के रिश्तेदारों को नियुक्त किया था। ज्यादातर मामलों में देखने में आया है कि ये जनप्रतिनिधि रिश्तेदारी या अहसान के बदले सचिवों को वह सब करने के लिए राजी कर लेते हैं, जो वे चाहते हैं। ऐसे कई मामले जांच में आ चुके हैं। जिनमें सरपंच, उप सरपंच और सचिव ने मिलकर गड़बड़ी की है। इसलिए सरकार को तबादला नीति में यह शर्तें जोड़नी पड़ीं। इन परिस्थितियों में स्थानांतरण होगा अनिवार्य विभाग ने कुछ मामलों में ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य किया है, जिनमें इस तरह की परिस्थितियां शामिल हैं।     यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का रिश्तेदार पंचायत का सरपंच या उपसरपंच चुन लिया गया हो।     सचिव को उसके पैतृक ग्राम या ससुराल स्थित ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं किया जाएगा।     जो सचिव एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ हैं, उन्हें प्राथमिकता से स्थानांतरित किया जाएगा।     यदि 10 साल या अधिक समय से पदस्थ सचिवों की संख्या तबादला लिमिट से अधिक है तो पहले सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का तबादला किया जाएगा। प्रतिबंध अवधि में भी संभव होगा इनका स्थानांतरण     स्थानांतरण प्रतिबंध अवधि के दौरान विशेष परिस्थितियों में इन सचिवों के तबादले किए जा सकेंगे।     भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों के मामले।     अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने की स्थिति।     लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू अथवा अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े प्रकरण।     उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से प्राप्त निर्देश।     ऐसे मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त, संचालक पंचायत राज द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर     आदेश में अंतरजिला संविलियन (ट्रांसफर) को केवल स्वैच्छिक आधार पर अनुमति दी गई है।     महिला सचिवों को विशेष सुविधा मिलेगी। इसमें विवाहित, विधवा एवं तलाकशुदा महिला ग्राम पंचायत सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के निवास वाले जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी।     अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव, यदि उनकी नियुक्ति वाले जिले के अलावा किसी अन्य जिले से संबंध रखते हैं, तो वे भी अपने मूल जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगे।     इच्छुक सचिव को वर्तमान पदस्थापना जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन देना होगा।     आवेदन के साथ संबंधित जिले में रिक्त पद की उपलब्धता का सत्यापन किया जाएगा।     रिक्त पद उपलब्ध होने पर प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा।     प्रशासनिक स्वीकृति के बाद संविलियन आदेश जारी किए जाएंगे।     संविलियन के बाद सचिव का नाम वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।     अंतरजिला संविलियन का लाभ केवल एक बार ही दिया जाएगा।

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में नया अध्याय, CM साय ने PM मोदी के कार्यकाल को बताया कीर्तिमान

रायपुर  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। देश की जनता से लगातार प्राप्त जनादेश के आधार पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रहित के प्रति उनके समर्पित नेतृत्व का प्रमाण है। नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में अंत्योदय का संकल्प साकार हुआ है और भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ अग्रसर हुआ है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण से राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा मिली, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया तथा आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई और सशक्त सैन्य अभियानों ने विश्व के समक्ष नए भारत के सामर्थ्य और आत्मविश्वास को स्थापित किया है। साथ ही, उन्होंने संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए भारतीय जनता पार्टी को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज वे विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में अग्रणी हैं और उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि हम एक पारदर्शी और सुशासन पर आधारित सरकार चलाना चाहते हैं, और लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हमने राज्य में 'सुशासन और कन्वर्जेंस विभाग' भी बनाया है और इसी पहल के तहत आज हम मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नीति आयोग की बैठकों का एजेंडा तय होता है और उसी के अनुसार चर्चा होगी। जहां तक ​​बस्तर की बात है, नक्सलवाद के कारण यह इलाका लगभग 40 से 50 वर्षों तक पिछड़ा रहा। सरकार ने इसके विकास में तेजी लाने के लिए पहले ही काम शुरू कर दिया है और इसकी तेजी से प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। अब प्रदेशवासी टोल-फ्री नंबर 1076, मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें, सुझाव और समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे उसकी ट्रैकिंग, निगरानी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होगा। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो मामले की पुनः समीक्षा का भी प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास से जुड़े सुझाव भी नागरिक सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। सुशासन का मूल उद्देश्य जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। सुशासन को प्राथमिकता विष्णु देव साय ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। जनता को अधिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से राज्य में "सुशासन एवं कन्वर्जेंस विभाग" का गठन किया गया है और सीएम हेल्पलाइन 1076 उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बस्तर विकास के लिए तैयार हो रहा रोडमैप नीति आयोग की बैठकों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित एजेंडे के अनुसार विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। बस्तर क्षेत्र के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार से पांच दशकों तक विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए पहले से ही कई योजनाओं पर कार्य कर रही है तथा क्षेत्र की तीव्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण, CM विष्णु देव साय बोले- देश ने विकास और सुशासन की नई ऊंचाइयां छुईं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति प्रकट किया आभार नक्सल उन्मूलन, अधोसंरचना, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण में केंद्र की भूमिका को सराहा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकल्याणकारी नेतृत्व में संचालित योजनाओं ने छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति प्रदान की है तथा प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री साय ने पत्र में उल्लेख किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की केंद्र सरकार की नीति के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना के तहत ₹2,080.29 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही विशेष अधोसंरचना योजना (SIS), सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE), आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, जंगल वारफेयर प्रशिक्षण और एयर सपोर्ट जैसी पहलों ने सुरक्षा बलों को मजबूत बनाया है तथा राज्य को नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक बढ़त दिलाई।  मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ₹2,377 करोड़ की लागत से 3,222 किलोमीटर लंबी 391 सड़कों तथा 88 वृहद पुलों की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं ने बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकास और सुरक्षा दोनों को मजबूती प्रदान की है। पत्र में मुख्यमंत्री ने वित्तीय सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य को केंद्रीय करों में ₹3,46,806 करोड़ तथा विभिन्न योजनाओं में ₹1,43,328 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत ₹22,021 करोड़ तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में ₹22,600 करोड़ की अतिरिक्त सहायता भी मिली है। मुख्यमंत्री ने सड़क अधोसंरचना विकास को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना कोष (CRIF) के तहत ₹4,468 करोड़ तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए ₹35,766 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे रायपुर-विशाखापट्टनम, बिलासपुर-धनबाद, रायपुर-दुर्ग बायपास तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति मिली है और राज्य की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य के 24.50 लाख पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मनरेगा के तहत पिछले 12 वर्षों में ₹39,123 करोड़ व्यय कर 152 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ₹2,398 करोड़ की सहायता से 36.44 लाख परिवारों को शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के अंतर्गत 13,040 किलोमीटर सड़कों एवं 347 पुलों के निर्माण के लिए ₹7,951 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। वहीं पीएम जनमन के अंतर्गत 2,902 किलोमीटर सड़कों हेतु ₹2,007 करोड़ तथा पीएमजीएसवाई-4 के तहत 2,427 किलोमीटर सड़कों के लिए ₹2,246 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 25.51 लाख किसानों को अब तक ₹10,784 करोड़ की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹5,064 करोड़ की प्रीमियम सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा अन्य केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के 56 लाख राशन कार्डधारी परिवारों के 1.99 करोड़ सदस्यों को प्रति माह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹5,600 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। उज्ज्वला योजना के तहत 39.54 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। खनिज क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 62 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हुई है, जिनसे भविष्य में ₹4.34 लाख करोड़ से अधिक का संभावित राजस्व प्राप्त होगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) एवं पीएमकेकेकेवाई के माध्यम से ₹17,887 करोड़ से अधिक की राशि संकलित कर 81,553 विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने आदिवासी विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा वन अधिकारों की मान्यता को ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 56,569 पीवीटीजी परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4.83 लाख व्यक्तिगत और 48 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत किया गया है तथा 2,264 नए केंद्र स्वीकृत हुए हैं। राज्य के सभी जिलों में संचालित 42 सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहायता और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राज्य में 5,499 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 91 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 28 जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं तथा 23 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों की स्वीकृति प्राप्त हुई है। कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 18,330 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 82,952 हितग्राहियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि स्ट्राइव परियोजना … Read more

मध्य प्रदेश सरकार का अहम निर्णय, अब दो से अधिक बच्चों वाले भी सरकारी नौकरी के लिए होंगे पात्र

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एक बड़े फैसले में सरकारी सेवा नियमों से दो-बच्चों की शर्त को वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रस्तावित मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों में शामिल दो-बच्चों की शर्त के मसौदे को वापस ले लिया गया है और सरकारी पोर्टल से इसे ‘तत्काल’ हटाने का आदेश दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा देर शाम जारी एक रिलीज में कहा गया, ”मुख्यमंत्री ने यह बड़ा फैसला सरकारी कर्मचारियों और सरकारी सेवा की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के हित में यह बड़ा फैसला लिया है।” आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस मामले को देखा और आदेश दिया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के उस प्रस्ताव को वापस लिया जाए जिसमें सरकारी नौकरी के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त रखी गई थी। मोहन यादव ने आधिकारिक पोर्टल से ट्राफ्ट को तुरंत हटाने को कहा है। हालांकि, यह नियम प्रदेश में काफी पुराना है। 2001 में सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रावधान को लागू किया था। इसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सीधी भर्ती या विभागों में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। सीएम ने नया आदेश प्रकाशित करने को कहा मध्य प्रदेश में 2001 में लागू किए गए नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोग सरकारी नौकरी के योग्य नहीं थे। इसके अलावा एमपी सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1965 के तहत दो से अधिक बच्चे होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार माना जाता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अब तक के सबी नियमों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने नया मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है। नए मसौदे के बाद सीएम का ऐक्शन दरअसल, मध्य प्रदेश में सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026 का मसौदा तैयार किया गया था और इस पर आम लोगों से 15 जून तक सुझाव मांगे गए थे। इसमें लाए गए कई नए नियमों के बीच बच्चे वाले पुराने नियम को भी शामिल किया गया था। लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने इसे खत्म करने का आदेश दे दिया है। 2001 में लागू हुआ थआ ‘टू चाइल्ड’ का नियम यह याद किया जा सकता है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा लिए गए एक निर्णय के तहत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक प्रावधान लागू किया था जिसके अनुसार दो से ज्यादा जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा में सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था। 2001 में लागू मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक जीवित बच्चे थे, उन्हें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम, 1961 के तहत सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाता था। इसके अलावा, मध्य प्रदेश सेवा नियम (Conduct), 1965 के तहत दो से ज्यादा बच्चों का होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार (मिसकंडक्ट) माना जाता था। मुख्यमंत्री श्री यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को तुरंत प्रस्तावित नियमों का मसौदा वापस लेने और सरकारी सेवा से अयोग्यता से जुड़े उन सभी प्रावधानों को हटाने का निर्देश दिया है। यह प्रावधान दो से ज्यादा जीवित बच्चों के आधार पर लागू होते थे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए एक संशोधित मसौदा तैयार कर उसे प्रकाशित किया जाए। UCC लागू करने की तैयारी में मोहन सरकार क संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। यादव ने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए धर्मगुरुओं की राय लेगी। मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “मध्य प्रदेश में यूसीसी को लागू किया जाएगा, क्योंकि आज धार्मिक-सामाजिक-पारिवारिक रूप से भिन्न-भिन्न मतों की आवश्यकता नहीं है। आज जरूरत यूसीसी की ओर बढ़ने की है।”  

Ahmedabad Metro Phase-2A को हरी झंडी, 2169 करोड़ रुपये से एयरपोर्ट तक होगा विस्तार

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को अहमदाबाद मेट्रो के फेज 2A प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी. यह प्रोजेक्ट कोटेश्वर रोड से सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक 6 किलोमीटर का विस्तार है और इसकी अनुमानित लागत 2,169 करोड़ रुपये है. कैबिनेट की बैठक के बाद फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद अहमदाबाद में शहरी आवागमन को बेहतर बनाना और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर व डेवलपमेंट हब (जिनमें प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स की सुविधाएं भी शामिल हैं) तक कनेक्टिविटी को बेहतर करना है।  यह एक्सटेंशन बनने वाले कॉमनवेल्थ एन्क्लेव को एयरपोर्ट से जोड़ेगा, जिससे एथलीटों, अधिकारियों, आने वाले लोगों और निवासियों के लिए आसानी से आना-जाना मुमकिन हो जाएगा. अहमदाबाद 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला है।  अहमदाबाद मेट्रो का विस्तार अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के विस्तार में करीब 2169 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है. इसमें करीब 2500 लोगों को रोजगार भी मिलेगा. यह परियोजना पूरी होते ही अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो रूट का विस्तार 77.63 किलोमीटर तक हो जाएगा।  केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट निर्णयों की जानकारी दी. वैष्णव ने कहा, पंडित नेहरू एक बहुत बड़े राजनीतिक परिवार से आए थे. हमें अंग्रेजों से अभी-अभी आजादी मिली थी. माहौल और सोच अलग थी, जिन लोगों का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था, जो बहुत साधारण परिवारों से आए थे और जिन्होंने अपने काम से देश को आगे बढ़ाया, देश ने उन पर भरोसा किया।  रेल मंत्री ने कहा, आज पीएम मोदी ने एक चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने का नया रिकॉर्ड बनाया है. इस मौके पर केंद्रीय कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पास किया है. इस प्रस्ताव में पीएम मोदी के देश के लिए एक चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार सेवा के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर चर्चा की गई है और कई वादों और संकल्पों की रूपरेखा बताई गई है. 10 जून 2026 भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण है. आज नरेंद्र मोदी देश की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं. प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार 4399 दिनों तक सेवा करने का रिकॉर्ड बनाया है. यह एक ऐसा पड़ाव है जिसे आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार हासिल किया गया है।  कॉरिडोर के स्टेशनों के नाम इस कॉरिडोर की लंबाई 6.032 किलोमीटर होगी और इसमें 05 स्टेशन (04 एलिवेटेड और 01 अंडरग्राउंड) होंगे. फेज 2(A) के चालू होने पर, अहमदाबाद-गांधीनगर में 77.63 किलोमीटर का एक्टिव मेट्रो रेल नेटवर्क हो जाएगा. फेज 2(A) कॉरिडोर के स्टेशनों के नाम हैं- आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती नदी, सरदार नगर और एयरपोर्ट. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की कुल लागत (IDC – यानी निर्माण के दौरान लगने वाले ब्याज सहित) 2,169.04 करोड़ रुपये होगी।  फायदे और विकास को बढ़ावा अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का फ़ेज 2(A) शहर के इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में एक अहम प्रगति है. फेज़ 2(A) शहर में मेट्रो रेल नेटवर्क के बड़े विस्तार के तौर पर काम करता है।  बेहतर कनेक्टिविटी अहमदाबाद मेट्रो प्रोजेक्ट के फेज 2(A) में लगभग 6.032 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर का विकास शामिल है. इसका मकसद एयरपोर्ट तक आसान कनेक्टिविटी देकर और ऐसे प्रमुख रिहायशी व कमर्शियल इलाकों को जोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को काफी बेहतर बनाना है, जहां अभी ट्रांसपोर्ट की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं।  इस फेज का मकसद रिहायशी और कमर्शियल हब जैसे अहम इलाकों को मौजूदा अहमदाबाद-गांधीनगर कॉरिडोर से आसानी से जोड़ना है. साथ ही, वर्ल्ड पुलिस गेम्स 2029 और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए आस-पास स्पोर्ट्स सुविधाएं विकसित किए जाने की भी संभावना है।  इन अहम इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़कर, फेज 2(A) न केवल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और टूरिज्म को भी बढ़ावा देगा, साथ ही यहां रहने वालों और आने-जाने वालों के लिए शहरी आवाजाही को आसान बनाएगा।  आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के लिए ऑफिस अकोमोडेशन प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार को आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती में केंद्र सरकार के जनरल पूल ऑफिस अकोमोडेशन (CGGPOA) के निर्माण को मंजूरी दे दी है।  यह प्रोजेक्ट अमरावती के नए ग्रीनफील्ड शहर में एक अहम पहल है, जिसे एक वर्ल्ड-क्लास शहरी केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना है. इस प्रस्ताव का मकसद केंद्र सरकार के अलग-अलग दफ्तरों के लिए ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग को पूरा करना है, ताकि उन्हें एक ही जगह पर लाया जा सके. इससे विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा और आंध्र प्रदेश राज्य को केंद्र सरकार की तरफ से दी जाने वाली सेवाओं की क्षमता और असर में सुधार होगा।  5.53 एकड़ में बनेगा अकोमोडेशन आंध्र प्रदेश के नए राजधानी शहर अमरावती में सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल ऑफिस अकोमोडेशन (CGGPOA) को 5.53 एकड़ जमीन पर बनाने की योजना है. CGGPOA में दो ब्लॉक हैं।  एक ब्लॉक प्लॉट C-9 पर है जिसमें ग्राउंड फ्लोर के अलावा 13 मंजिलें हैं (ग्राउंड फ्लोप पर सर्विसेज, तीन मंजिलों पर पोडियम पार्किंग और दस मंजिलों पर ऑफिस स्पेस हैं), और दूसरा ब्लॉक प्लॉट C-8 पर है जिसमें ग्राउंड फ्लोर के अलावा 10 मंजिलें हैं (ग्राउंड फ्लोर पर सर्विसेज, तीन मंजिलों पर पोडियम पार्किंग और सात मंजिलों पर ऑफिस स्पेस हैं). इस सुविधा को लगभग 8,000 अधिकारियों और स्टाफ सदस्यों के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें लगभग 1,800 इक्विवेलेंट कार स्पेस (ECS) के लिए पोडियम पार्किंग की व्यवस्था का प्रस्ताव है. इस प्रोजेक्ट का कुल बिल्ट-अप एरिया 23,25,000 वर्ग फ़ीट (2,16,032 वर्ग मीटर) है। 

CM योगी की घोषणा पर तेजी से कार्रवाई, टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन ट्रांसफर के आदेश, निवेशकों के लिए अवसर

 बरेली जिले में टेक्सटाइल पार्क का इंतजार जल्द पूरा होने वाला है। मुख्यमंत्री ने जहां बरेली समेत पांच शहरों में टेक्सटाइल पार्क की घोषणा की है, वही मिल की भूमि का टेक्सटाइल पार्क के लिए हस्तांतरण का आदेश भी जारी हो गया है। अभी तक यह भूमि सहकारी कताई मिल संघ के पास है। खास बात यह है कि कैबिनेट के आदेश पर भूमि हस्तांतरण निश्शुल्क रूप से किया जाएगा। इसके लिए सहकारी कताई मिल की ओर से भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना में एकीकृत टेक्सटाइल पार्क का लाभ बरेली को भी मिलेगा। जिले में लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को इसकी घोषणा कर अंतिम मुहर भी लगा दी। प्रस्तावित पार्क बहेड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूर नानकपुरी-टांडा मार्ग पर ग्राम सैदपुर खुर्द स्थित उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल परिसर में विकसित किया जाएगा। करीब 79.61 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाला यह पार्क प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग को नई गति देने के साथ रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बनेगा। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से तैयार पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार पार्क का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल या नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है तथा योजना की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। पार्क में वस्त्र उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही रेडीमेड प्लग एंड प्ले शेड, आंतरिक सड़कें, विद्युत वितरण व्यवस्था, जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन, कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), गोदाम, लाजिस्टिक सुविधाएं, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्र, श्रमिक हास्टल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामान्य प्रसंस्करण केंद्र विकसित किए जाएंगे। हथकरघा व वस्त्र उद्योग के सहायक आयुक्त सर्वेश शुक्ला ने बताया कि सहकारी कताई मिल संघ की ओर से पुराना भवन ध्वस्त करने की निविदा की गई है। भवन ध्वस्त होने के साथ ही मौके से पुरानी मशीनरी को भी हटाया जाएगा। इसके बाद बाउंड्रीवाल आदि बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इन कार्यों में अभी एक महीने से अधिक समय लग सकता है। बिजली, पानी, सड़क का मांगा प्रस्ताव प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के विकास के लिए हथकरघा व वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बिजली, पानी आपूर्ति व सड़क निर्माण का प्रस्ताव संबंधित विभागों से मांगा गया है। इसके लिए विभाग की ओर से पत्र तैयार कर योजना की जानकारी देते हुए संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने के लिए कहा गया है। पार्क में सहायक उद्योगों को मिलेगा स्थान पार्क में केवल वस्त्र निर्माण इकाइयां ही नहीं बल्कि सहायक उद्योगों को भी स्थान मिलेगा। इनमें बटन, जिपर, फास्टनर, ट्रिम्स, लेबल एवं टैग निर्माण, पैकेजिंग सामग्री, तकनीकी वस्त्र, गोदाम तथा अन्य संबंधित उद्योग शामिल होंगे। योजना के अनुसार पार्क में न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी और किसी एक इकाई को कुल औद्योगिक भूमि का 40 प्रतिशत से अधिक आवंटित नहीं किया जाएगा। कौशल विकास, प्रयोगशाला, प्रदर्शनी पार्क निर्माण से पहले पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट में प्रशासनिक भवन, अनुसंधान एवं विकास केंद्र, कौशल विकास केंद्र, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, विपणन एवं प्रदर्शनी केंद्र, खुदरा सुविधाएं, ट्रक पार्किंग, औद्योगिक श्रमिक आवास, कामन कैंटीन, फायर स्टेशन और हरित क्षेत्र जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रस्ताव किया गया है। इससे एक ही जगह सभी सुविधाएं मिल सकेंगी। स्थापित होने वाली इकाइयों पर मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन उत्तर प्रदेश सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के अंतर्गत पार्क में स्थापित होने वाली इकाइयों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। इसके तहत प्लांट एवं मशीनरी पर 25 प्रतिशत पूंजी अनुदान, ऋण पर ब्याज की 60 प्रतिशत प्रतिपूर्ति तथा अन्य अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यदि पार्क का विकास पीपीपी माडल पर होता है तो राज्य सरकार मास्टर डेवलपर को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत पूंजी अनुदान प्रदान करेगी। यह अनुदान अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की सीमा तक होगा और छह किस्तों में जारी किया जाएगा। वहीं, यदि पार्क का विकास सीधे नोडल एजेंसी से किया जाता है तो सरकार परियोजना लागत के बराबर ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराएगी। योजना के कार्यान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं अपैरल औद्योगिक विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह एजेंसी भूमि चयन, व्यवहार्यता अध्ययन, मास्टर प्लान, भूमि आवंटन नीति तथा परियोजना के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएगी। उद्योग स्थापना के लिए उद्यमियों से मांगे आवेदन पार्क में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों से विभाग ने आनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस संबंध में सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग बरेली परिक्षेत्र सर्वेश कुमार शुक्ला को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। विभाग को उम्मीद है कि इस परियोजना के माध्यम से बरेली क्षेत्र उत्तर प्रदेश के उभरते हुए टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बहेड़ी में प्रस्तावित यह पार्क बरेली मंडल के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे विशेष रूप से महिलाओं और कुशल श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा प्रदेश के वस्त्र उद्योग को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता मिलेगी।

प्री-मानसून बारिश ने बदला मौसम का मिजाज, कुछ इलाकों में रिकॉर्ड बारिश, मौसम विभाग की चेतावनी बरकरार

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी बाकी है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं। जून के पहले नौ दिनों में हुई बारिश ने कई जिलों में सामान्य आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 14 जिलों में अब तक 100 प्रतिशत से लेकर 672 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग ने इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है, लेकिन मानसून पूर्व बारिश ने फिलहाल राहत और चुनौती दोनों हालात पैदा कर दिए हैं। 1 से 9 जून के बीच प्रदेश में औसतन आधा इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। बारिश के बीच गर्मी भी बरकरार एक ओर कई इलाकों में बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। मंगलवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में 44 डिग्री और राजगढ़, रीवा व टीकमगढ़ में 43 डिग्री के आसपास तापमान रहा। प्रदेश के 26 शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान 40 डिग्री के करीब रहा, जबकि ग्वालियर में 42.8 डिग्री दर्ज किया गया। निवाड़ी सबसे आगे, नीमच और भोपाल भी रिकॉर्ड सूची में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवाड़ी में सामान्य 1.9 मिमी के मुकाबले 14.7 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो 672 प्रतिशत अधिक है। नीमच में 493 प्रतिशत, आगर-मालवा में 385 प्रतिशत, श्योपुर में 346 प्रतिशत, मंदसौर में 334 प्रतिशत और भोपाल में 304 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा अलीराजपुर, अशोकनगर, देवास, हरदा, मुरैना, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर में भी सामान्य से दोगुने से ज्यादा पानी गिर चुका है। आज 16 जिलों में बारिश के आसार मौसम विभाग ने बुधवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में बारिश की संभावना जताई है। वहीं भोपाल समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है। बदला मौसम का मिजाज, लू की जगह ओलों का अलर्ट मौसम विभाग ने ताजा पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव किया है। जिन जिलों में पहले 10 और 11 जून के लिए लू का अलर्ट जारी किया गया था, वहां अब 12 जून को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मुरैना, भिंड, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओले गिर सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने के संकेत हैं।  

साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, कंबोडिया में चल रहे 36 हजार भारतीय सिम, 5,300 से हुई ठगी

जोधपुर/ लुधियाना प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंबोडिया से संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान और पंजाब में एक साथ छापेमारी की है.  यह कार्रवाई जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ (अजमेर) और लुधियाना सहित कुल 7 ठिकानों पर की गई.  जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क फर्जी और दुरुपयोग किए गए सिम कार्डों के जरिए भारत में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था, जिसमें स्थानीय सिम वेंडरों ने आम लोगों के आधार और पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर हजारों सिम बिना उनकी जानकारी के एक्टिवेट किए। जांच में खुलासा हुआ है कि हजारों भारतीय सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिव कर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाए जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल भारत में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।जांच के दौरान एजेंसी ने करीब 2.3 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया। इसमें सामने आया कि लगभग 36 हजार भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय थे। भारत के लोगों से करते थे ठगी  जांच में सामने आया कि राजस्थान के सिम विक्रेताओं ने आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 36 हजार फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट किए, जिन्हें मलेशिया के रास्ते कंबोडिया भेजकर देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की जा रही थी. लगभग 2.3 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया, जिनमें कई नंबर साइबर फ्रॉड गतिविधियों में इस्तेमाल होते मिले. यह सिम कार्ड पहले भारत से मलेशिया भेजे जाते थे, और वहां से इन्हें कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था, जहां से भारतीय नागरिकों को कॉल कर ठगी की जाती थी।  5300 सिम भारत में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल इनमें से करीब 5300 सिम कार्ड सीधे तौर पर भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में इस्तेमाल किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार इन नंबरों के जरिए देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया।ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जोधपुर साइबर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। 5 जून को शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत राजस्थान के किशनगढ़, नागौर और जोधपुर के साथ पंजाब के लुधियाना में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।छापेमारी के दौरान ईडी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 14 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मलेशियाई नागरिकों के जरिए भेजी जाती थीं सिम ईडी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। सिम विक्रेता टेलीकॉम कंपनियों की पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) आईडी का उपयोग कर लोगों को नया सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के बहाने बुलाते थे।कम पढ़े-लिखे और जागरूकता की कमी वाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड भी सक्रिय कर दिए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को मलेशियाई नागरिकों के जरिए कंबोडिया भेजा जाता था। पुलिस अधिकारी बनकर करते थे कॉल   पूरे रैकेट में ठगी का तरीका बेहद संगठित था, जिसमें फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' करते थे. मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी, और शेयर बाजार या क्रिप्टो निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते थे. कॉल के लिए भारतीय (+91) नंबरों का इस्तेमाल होने से पीड़ित इसे भरोसेमंद समझकर जाल में फंस जाते थे. ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के जरिए हवाला और क्रिप्टो चैनलों से विदेश भेज दी जाती थी।  मलेशिया के एजेंटों को सप्लाई किया  जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ POS सिम वेंडरों और एजेंटों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क चल रहा था, जिन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की आईडी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट किए और उन्हें कमीशन के बदले मलेशियाई एजेंटों को सप्लाई किया. छापेमारी के दौरान कई बैंक खातों, संदिग्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पहचान हुई है, जबकि कई चल और अचल संपत्तियां भी जांच के दायरे में आई हैं.  एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है और मामले में आगे और बड़े खुलासों की संभावना है।