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पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए ₹65.64 करोड़ की राशि जारी की

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की ₹65.64 करोड़ की लिमिट – प्रत्येक परिषदीय विद्यालय को ₹5,000 की दर से उपलब्ध कराई गई लिमिट – इको क्लब्स के गठन, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर और सुझावात्मक गतिविधियां भी जारी – जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ,   योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए।  निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी। मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है। मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।

योगी सरकार की पहल से उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

यमुना जल परियोजना पर हरियाणा-राजस्थान में समझौता, राजस्थान को मिलेगा पेयजल

चंडीगढ़ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सोमवार को नई दिल्ली में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में हरियाणा सरकार और राजस्थान सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुए इस समझौते के अंतर्गत हरियाणा व राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग तीन दशक पुरानी समस्या का समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सहकारी संघवाद के मंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। दोनों राज्यों के बीच हुआ जल समझौता इस बात का उदाहरण है कि अगर राज्य सहकारी संघवाद की सोच को आगे बढ़ाएं तो तीन दशक पुरानी समस्या भी सरलता से सुलझ सकती है। समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइप लाइनों के जरिये राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन तीन पाइप लाइनों का व्यास 3.6 मीटर से भी अधिक होगा, जिनके माध्यम से राजस्थान और हरियाणा राज्यों के लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था होगी। अमित शाह ने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लिए विन-विन सिचुएशन का अच्छा उदाहरण है। समझौते में वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझीकरण, जल आवंटन और जल छोड़ने के प्रोटोकाल के साथ रखरखाव का बारीकी से ध्यान रखा गया है। हरियाणा, राजस्थान और विशेषकर केंद्रीय जल आयोग ने इस समझौते का जो प्रारूप बनाया है वह आने वाले कई दशकों तक विवादहीन समझौते के रूप में स्थापित रहेगा। समझौते के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में भी पीने का पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो जाएगी। परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के जरिये राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुंचाना है। इससे राज्य, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बंटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। हथनीकुंड बैराज से राजस्थान तक बिछेगी पाइपलान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि यमुना जल परियोजना को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में लगातार हरियाणा और राजस्थान के बीच बैठकें हुई। एमओयू के अंतर्गत हरियाणा में जुलाई और अक्टूबर के बीच जो वर्षा का सरप्लस पानी होता है, राजस्थान उसे पाइपलाइन के माध्यम से ले जाकर पेयजल के लिए उपयोग करेगा। इस परियोजना के अंतर्गत हथनीकुंड बैराज से राजस्थान तक पाइपलाइन बिछाई जाएगी और सरप्लस पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी समेत राजस्थान व केंद्र सरकार के अधिकारी मौजूद रहे।

गोमती नदी के उद्गम स्थल के विकास पर योगी सरकार का फोकस, ₹1.04 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

योगी सरकार 1.04 करोड़ से संवारेगी गोमती नदी का उद्गम स्थल पर्यटन विभाग की पहल, पीलीभीत जिले में स्थित मां गोमती उद्गम स्थल पर विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएं गोमती नदी की प्रदेश में 960 किमी. की है यात्रा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सम्मान मां गोमती के उद्गम स्थल के विकास से खुलेगा पर्यटन का नया अध्याय: मंत्री जयवीर सिंह लखनऊ/पीलीभीत  उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा। करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित गोमती नदी प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करते हुए करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन आकर्षण के लिए होंगे कई काम परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को मिली है। धार्मिक विरासत को मिलेगा सम्मान गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा क्षेत्र स्थित पौराणिक फुलहर झील (गोमत ताल) से होता है। लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों को जीवन प्रदान करती हुई अंततः गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। वहीं नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की वाहक मानी जाती है। मां गोमती सनातन आस्था की प्रतीक मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए।

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पर CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, दो नए विधेयकों से गुंडाराज पर होगा वार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के दो नए विधेयक पेश किए जाने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य में कानून का राज स्थापित करेगी और गुंडाराज का खात्मा करेगी।  मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि AJUP विधायक हुमायूं कबीर के खिलाफ उनके कथित भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले भाषण को लेकर एफआईआर दर्ज कर ली गई है. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर के दो भाषणों पर पहले ही उनकी पार्टी के विधायक ने सदन में आपत्ति उठाई थी।  'नफरत फैलाने वालों पर लगाम लगाने का वक्त' सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'अब बहुत हो चुका. ऐसे लोगों को सबक सिखाने का समय आ गया है.' उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले राज्य में कमजोर मुख्यमंत्री होने की वजह से लोग मनमानी बातें करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि हुमायूं कबीर के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं और कानून अपना काम करेगा. उन्होंने कहा, 'मैं सदन को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि कोई भी इस तरह की भाषा बोलने की हिम्मत न करे।  उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद मुर्शिदाबाद उपचुनाव से पहले मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करना है ताकि उनके बेटे को चुनाव में फायदा मिल सके. इस दौरान उन्होंने संदेशखाली के 'शेख शाहजहां' और 'फाल्टा के पुष्पा' का उदाहरण देते हुए कहा कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है।  'पुलिस किसी को नहीं छोड़ेगी' मुख्यमंत्री ने कहा कि 'उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई भी इस तरह की भाषा बोलने की हिम्मत न करे. सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "संदेशखाली के शेख शाहजहां को याद कीजिए, उनके भड़काऊ बयानों का क्या अंजाम हुआ. 'फाल्टा के पुष्पा' को भी याद कीजिए, जिसने कहा था 'झुकेगा नहीं'. पुलिस किसी को नहीं छोड़ेगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अगले सप्ताह मुर्शिदाबाद का दौरा करेंगे और यह साबित करेंगे कि कानून अपना काम करेगा. उन्होंने हुमायूं कबीर को चेतावनी देते हुए कहा, "अपनी बयानबाजी पर लगाम लगाइए. नफरत फैलाने वाला कोई भी बयान देने से पहले 25 बार सोचिए. पुलिस आपको नहीं छोड़ेगी। 

Modi Cabinet Expansion: दल बदलकर आए सांसदों की लग सकती है लॉटरी, जानें किस पर गिर सकती है गाज

नई दिल्ली कैबिनेट फेरबदल का ऐलान मंगलवार को हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से भारत लौटने के बाद मंत्री परिषद में बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम की है। फिलहाल, साफ नहीं हो सका है कि उन्हें लेकर NDA की तरफ से क्या फैसला लिया जाएगा। खास बात है इस बार कैबिनेट फेरबदल में हाल ही में पार्टियों की टूट के बाद NDA को समर्थन देने वाले नेताओं को भी जगह दी जा सकती है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया था। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। वह 6 से 11 जुलाई के बीच तीन देशों की यात्रा कर सकते हैं, जिनमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल है। वहीं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची भी भारत दौरे पर आ रहीं हैं और यह कार्यक्रम 1 से 3 जुलाई का है। अब संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो अगस्त तक चलेगा। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि मंगलवार को बड़ी घोषणा की जा सकती है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार फेरबदल होगा। मानसून सत्र से पहले हो सकता है कैबिनेट फेरबदल संसद का मानसून सत्र आम तौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके छह से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी एक से तीन जुलाई तक नयी दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम है। पार्टी संगठन पर भी फोकस सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः बीजेपी की उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है। 'एक व्यक्ति एक पद' का नियम होगा लागू इस बात की प्रबल संभावना है कि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करेगी जिसके कारण दोनों को सरकार से हटना पड़ सकता है। दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। कुरियन अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जबकि बिट्टू अब भी मंत्री हैं। रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर चल रही ये चर्चा ऐसा बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इन तीन राज्यों के और प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है। TMC, शिवसेना-UBT, AAP से आए MPs को मिल सकता है मौका तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। ऐसी भी संभावना है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों में से एक या दो को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी गुटों के सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का कोई भी फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों के मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, तभी से शुरू हुई चर्चा प्रधानमंत्री मोदी की 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गईं। इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं। हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी। हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को लेकर भी अपडेट दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बी एल वर्मा का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा। अब यह देखना होगा कि उच्च सदन के लिए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है। तीन राज्यपालों-कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह-का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है। गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में तथा सिंह का कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा। सरकार से हटाए जाने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दिए जाने की भी संभावना है। हालांकि, जानकार हलकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं और औपचारिक घोषणा होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। कौन हो सकता है शामिल अब तक यह साफ … Read more

संत कबीर के आदर्शों पर चलकर समाज में समरसता और सेवा की भावना मजबूत होगी : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

संत कबीर का संदेश आज भी समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक : कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत संत कबीर के आदर्शों पर चलकर समाज में समरसता और सेवा की भावना मजबूत होगी : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सोनपैरी कबीर आश्रम में संत कबीर जयंती महोत्सव आयोजित मुख्यमंत्री साय ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश 3 महीने बढ़ाई जाएगी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना : सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों के साथ लंबित बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे उपभोक्ता रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत आज राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लेकर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, गौसेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा,  डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, अखिलेश सोनी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि एवं कबीरपंथी अनुयायी उपस्थित थे।

रिकॉर्डतोड़ गर्मी से यूरोप बेहाल! फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में 40°C पार, आखिर क्यों ज्यादा प्रभावित होते हैं यूरोपीय?

लंदन /पेरिस  यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है. फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों, रेल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है।  सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में फ्रांस की सड़कों की ऊपरी परत भीषण गर्मी के कारण नरम पड़ती और पिघलती नजर आ रही है. वहीं जर्मनी में अत्यधिक तापमान की वजह से ट्राम की पटरियां टेढ़ी हो गईं, जिसके कारण कई जगह सेवाएं रोकनी पड़ीं या उनकी रफ्तार कम करनी पड़ी।  रॉयटर्स के मुताबिक, यह हीटवेव 20 जून के आसपास शुरू हुई और कुछ इलाकों में सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक तापमान दर्ज किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 'ओमेगा ब्लॉक' नाम के मौसमीय पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त असर का परिणाम है. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो यूरोप में गर्मी की भयावह स्थिति को दिखाते हैं।  भारतीयों से ज्यादा यूरोपीय लोगों को क्यों सताता है? जब यूरोप में तापमान 40 डिग्री पहुंचता है तो लोग कहते हैं कि जीवन रुक गया है. अस्पताल भर जाते हैं. मौतें बढ़ जाती हैं. वहीं भारत में कई इलाकों में 40-45 डिग्री आम बात है, लोग काम करते रहते हैं. यह फर्क सिर्फ तापमान का नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों की वजह से है. आइए समझते हैं दोनों में अंतर…  नमी का असर – सबसे बड़ा अंतर सबसे महत्वपूर्ण अंतर ह्यूमिडिटी (नमी) का है. भारत में गर्मी के मौसम में नमी बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोग इससे अभ्यस्त हैं. यूरोप में जब 40 डिग्री आता है तो अक्सर सूखी गर्मी होती है, लेकिन कई बार नमी भी बढ़ जाती है. जब नमी ज्यादा होती है तो पसीना सूखता नहीं है. शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता. इसे वेट बुल्ब टेम्परेचर कहते हैं. यूरोप में 40 डिग्री के साथ अगर नमी 60-70% हो जाए तो इंसान के लिए खतरनाक हो जाता है. भारत में लोग लंबे समय से गर्मी झेल रहे हैं, इसलिए उनका शरीर बेहतर तरीके से ढल जाता है।  ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एयर कंडीशनर (AC) खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं. दुकान के बाहर इतनी भीड़ है कि मानो खरीदारी नहीं, बल्कि होड़ मची हो। वहीं एक अन्य वीडियो में भीषण गर्मी के कारण सड़क का डामर नरम पड़ता और पिघलता नजर आ रहा है।  एक और वीडियो में यूरोप के समुद्र तटों (बीच) पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. गर्मी से राहत पाने के लिए हजारों लोग समुद्र किनारे पहुंच गए, जिससे वहां मेले जैसा माहौल बन गया। फ्रांस में गर्मी के कारण अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि गर्म नदियों के कारण कुछ परमाणु बिजली संयंत्रों का उत्पादन भी घटाना पड़ा. इटली, जर्मनी और मध्य यूरोप के कई हिस्सों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप में कभी 'सदी में एक बार' आने वाली ऐसी भीषण हीटवेव अब जलवायु परिवर्तन की वजह से कहीं ज्यादा बार देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं. इमारतें और घर कैसे बने हैं? यूरोप की इमारतें ठंड के लिए बनाई गई हैं. दीवारें मोटी, इंसुलेशन अच्छा पर गर्मी निकालने की व्यवस्था कम. जब 40 डिग्री की गर्मी पड़ती है तो घर के अंदर भी तापमान बहुत बढ़ जाता है. वहां एयर कंडीशनर कम घरों में हैं।  भारत में घरों में छतें ऊंची, खिड़कियां बड़ी, पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल आम है. लोग दोपहर में आराम करते हैं. शाम को काम करते हैं. यूरोप में ऐसी आदत नहीं है. स्कूल, ऑफिस और अस्पताल भी गर्मी के लिए तैयार नहीं होते।  सूर्य की तीव्रता यूरोप हाई एल्टीट्यूड पर स्थित है, इसलिए वहां गर्मियों में दिन बहुत लंबे (15 से 17 घंटे) हो जाते हैं. साफ आसमान और कम वायु प्रदूषण के कारण सीधी धूप बहुत तेज और चुभने वाली लगती है।  रात का तापमान और आराम यूरोप की हीटवेव में रात का तापमान भी बहुत ऊंचा रहता है. शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता. लगातार गर्मी से थकान, दिल का दौरा और मौतें बढ़ जाती हैं. भारत में दिन में गर्मी ज्यादा होती है लेकिन रात में तापमान काफी गिर जाता है. इससे शरीर को राहत मिलती है. यही वजह है कि भारत में 40 डिग्री सहन करना यूरोप की तुलना में आसान पड़ता है।  लोगों की आदत और स्वास्थ्य भारतीय शरीर गर्मी के लिए ज्यादा तैयार रहता है. बचपन से गर्मी में खेलना, काम करना सिखाया जाता है. पसीना आना, ज्यादा पानी पीना, छाछ-निम्बू पानी जैसी चीजें आम हैं।  यूरोप में ज्यादातर लोग ठंडे मौसम में रहते हैं. उनकी त्वचा पतली, शरीर गर्मी सहने के लिए कम तैयार होता है. खासकर बुजुर्ग और बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं. फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसी जगहों पर 40 डिग्री में हजारों अतिरिक्त मौतें हो जाती हैं।  तैयारियां और सरकारी व्यवस्था भारत में हीटवेव एक्शन प्लान है. स्कूलों की छुट्टी, पानी की व्यवस्था, जागरूकता अभियान चलते हैं. लोग जानते हैं कि दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर कम निकलना चाहिए।  यूरोप में अचानक गर्मी आने पर सरकारें भी हैरान रह जाती हैं. अस्पताल तैयार नहीं होते, बिजली की मांग बढ़ने से ग्रिड फेल हो जाते हैं. ट्रेनें रुक जाती हैं, सड़कें पिघल जाती हैं।  जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन यूरोप को तेजी से गर्म कर रहा है. पहले वहां 40 डिग्री बहुत दुर्लभ था, अब लगभग हर साल हो रहा है. यूरोप अब भी अनुकूलन (Adaptation) की प्रक्रिया में है  भारत गर्म देश है, इसलिए 40-45 डिग्री नया नहीं. लेकिन भारत को भी चिंता करनी चाहिए क्योंकि गर्मी और बढ़ रही है. दिल्ली, राजस्थान में 48-50 डिग्री भी पहुंच रहा है।  क्या सीख सकते हैं दोनों देश?     यूरोप को भारत से सीखना चाहिए- हल्के कपड़े, दिन की आदतें बदलना, … Read more

मध्य प्रदेश कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं ने पकड़ा जोर, मंत्रियों को हटाए जाने के बाद सियासी हलचल बढ़ी

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में से कई मंत्रियों को हटाया गया है। खास बात यह है कि ये मंत्री संघ, संगठन और सिंधिया गुट से आते हैं। इसके चलते राज्य कैबिनेट के विस्तार को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बता दें कि हाल ही में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बहुप्रतिक्षित सूची में 106 सदस्यों को शामिल किया, जबकि 40 नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनने का मौका मिला। वहीं, स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में केवल 70 साल की उम्र पार कर चुके नेताओं को ही जगह मिली। जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सूची में से चार कैबिनेट मंत्रियों को हटाया गया है। जिसमें कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला, प्रद्युम्न सिंह तोमर, करण सिंह वर्मा, नागर सिंह चौहान का नाम शामिल है। यह मंत्री संघ, संगठन और सिंधिया गुट से आते हैं। अब इन मंत्रियों की बैचेनी बढ़ी हुई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इन मंत्रियों को कार्यसमिति में से इसलिए हटाया गया है क्योंकि ये पार्टी के लिए प्रभावशाली काम करने में असमर्थ रहे। बताया जा रहा है ये मंत्री पार्टी समीकरण में फिट नहीं बैठ रहे थे। अब कार्यसमिति में सीएम सहित 18 मंत्रियों को जगह मिली है। जिसमें कैबिनेट मंत्री सहित राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कृष्णा गौर का नाम शामिल है। भिंड के मेहगांव से विधायक राकेश शुक्ला को कार्यसमिति में जगह नहीं मिली। वर्तमान में वह नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा का बतौर कैबिनेट मंत्री जिम्मा संभाल रहे हैं। 1998 में पहला चुनाव लड़ा था और जीते भी। लेकिन 2013 में पार्टी द्वारा टिकट काटने से नाराज होकर बगवात कर निर्दलीय लड़े और हार गए। 2018 में भी चुनाव हारे लेकिन 2023 में दोबारा विधायक चुने और मंत्री बने। आलीराजपुर विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार निर्वाचित हुए नागर सिंह को पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया। नागर को भी कार्यसमिति में जगह नहीं दी गई। कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे प्रद्युम्न सिंह तोमर कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे। लेकिन बाद में बगावत के दौर में सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थामा और शिवराज सरकार में भी मंत्री बने। उसके बाद मोहन सरकार में भी ऊर्जा मंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं। सिंधिया के करीबी नेताओं में माने जाते हैं, लेकिन इस बार कार्य समिति से इन्हें बाहर कर दिया। सिंधिया खेमे के मंत्री तुलसीराम सिलावट को जगह मिली है। वर्मा सीहोर जिले की इछावर सीट से 8वीं बार विधायक चुने गए। तीसरी बार मंत्री बने हैं और लगातार दूसरी बार राजस्व मंत्री बने हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह के दौरान भी राजस्व मंत्री रहे लेकिन कार्यसमिति में जगह नहीं बना पाए। प्रदेश कार्यसमिति की सूची सामने आने के बाद समूची पार्टी और कार्यकर्ताओं को सिर्फ मंत्री मंडल विस्तार का इंतजार है। लेकिन उससे पहले मौजूदा 4 कैबिनेट मंत्रियों को कार्यसमिति में जगह नहीं मिलने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरम है।

DGP कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल की शिष्टाचार भेंट, द्विपक्षीय सहयोग पर हुई चर्चा

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल ने की शिष्टाचार भेंट मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचारों, सेफ क्लिक 2.0 एवं नशे से दूरी है जरूरी अभियान पर हुई सार्थक चर्चा भोपाल पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के मुंबई स्थित कॉन्सुल जनरल (Consul General) नबील ताउआती ने आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर कॉन्सुल जनरल के साथ मुंबई के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार कौस्तुभ परिहार एवं कृषि सलाहकार प्रसाद पारते भी उपस्थित रहे। भेंट के दौरान पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण, आधुनिक पुलिसिंग, तकनीकी नवाचार एवं नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से संचालित राज्यव्यापी 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस अभियान के माध्यम से नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं विभिन्न संस्थानों तक व्यापक स्तर पर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता पहुंचाई जा रही है। पुलिस महानिदेशक ने प्रदेश सरकार एवं मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान की भी जानकारी देते हुए बताया कि युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने, समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से नशामुक्त एवं सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस निरंतर कार्यरत है। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच जनसुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा, जागरूकता अभियानों तथा आपसी सहयोग एवं अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जनहित में संचालित नवाचारों एवं व्यापक जन-जागरूकता अभियानों की सराहना करते हुए भविष्य में पारस्परिक सहयोग एवं संवाद को और सुदृढ़ बनाने की इच्छा व्यक्त की। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रकार के सौहार्दपूर्ण संवाद से आपसी समझ एवं सहयोग को नई दिशा मिलेगी तथा जनहित एवं सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।