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8th Pay Commission Update: कर्मचारियों की बढ़ सकती है चांदी, नया फॉर्मूला लागू हुआ तो मिल सकता है भारी एरियर

नई दिल्ली भारत के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों की आयोग के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। 8वें वेतन आयोग में अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो लेवल-14 के कर्मचारियों का 20 महीने में अनुमानित एरियर करीब 53 लाख के पार पहुंच सकता है। 15 जून 2026 तक आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 22-23 जून को लखनऊ में भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी और उन्हें कितना एरियर (Arrears) मिल सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए दिए गए 18 महीने के समय को देखते हुए इसका क्रियान्वयन 2027 की दूसरी छमाही में हो सकता है। नवंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल तय किया गया था और अगर यह मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपता है, तो उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इस स्थिति में अगस्त या सितंबर 2027 तक नई सैलरी लागू होने की संभावना है। चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है। अगर लागू होने में लगभग 20 से 21 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिल सकती है। वेतन स्तर (Pay Level) सामान्य प्रारंभिक बेसिक वेतन प्रमुख पद (Common Designations) लेवल 11 ₹67,700 उप सचिव (Deputy Secretary), ग्रुप-A में पदोन्नत वरिष्ठ सेक्शन अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer), डिप्टी कमांडेंट लेवल 12 ₹78,800 निदेशक (Director), संयुक्त निदेशक (Joint Director), केंद्रीय संस्थानों में प्रोफेसर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लेवल 13 ₹1,23,100 कुछ संगठनों में संयुक्त सचिव स्तर के पद, वरिष्ठ निदेशक, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), उच्च ग्रेड के वैज्ञानिक लेवल 14 ₹1,44,200 वरिष्ठ संयुक्त सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) स्तर के अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बड़े विभागों के प्रमुख लेवल 11 से 14 के कर्मचारी, जो आमतौर पर ग्रुप-A अधिकारी होते हैं, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा लाभ पाने वालों में शामिल हो सकते हैं। इनमें डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर, प्रोफेसर, चीफ इंजीनियर, वैज्ञानिक, वरिष्ठ संयुक्त सचिव और अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में लेवल 11 का शुरुआती बेसिक वेतन ₹67,700, लेवल 12 का ₹78,800, लेवल 13 का ₹1,23,100 और लेवल 14 का ₹1,44,200 है। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से लेकर 2.86 तक का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल 11 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर पर ₹1.35 लाख और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लगभग ₹1.94 लाख तक पहुंच सकती है। इसी तरह लेवल 14 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹4 लाख रुपये के करीब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 20 महीने के एरियर की गणना की जाए तो कई कर्मचारियों को लाखों रुपये का एकमुश्त भुगतान मिल सकता है। 8वें वेतन आयोग (2.0 फिटमेंट फैक्टर) पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,35,400 ₹67,700 ₹13,54,000 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,57,600 ₹78,800 ₹15,76,000 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,46,200 ₹1,23,100 ₹24,62,000 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹2,88,400 ₹1,44,200 ₹28,84,000 8वें वेतन आयोग (2.15 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,45,555 ₹77,855 ₹15,57,100 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,69,420 ₹90,620 ₹18,12,400 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,64,665 ₹1,41,565 ₹28,31,300 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,10,030 ₹1,65,830 ₹33,16,600 8वें वेतन आयोग (2.28 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,54,356 ₹86,656 ₹17,33,120 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,79,664 ₹1,00,864 ₹20,17,280 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,80,668 ₹1,57,568 ₹31,51,360 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,28,776 ₹1,84,576 ₹36,91,520 8वें वेतन आयोग (2.57 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर 20 माह के संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,73,989 ₹1,06,289 ₹21,25,780 लेवल 12 ₹78,800 ₹2,02,516 ₹1,23,716 ₹24,74,320 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,16,367 ₹1,93,267 ₹38,65,340 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,70,594 ₹2,26,394 ₹45,27,880 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 11-14 के कर्मचारियों को मिलने वाले 20 महीनों के अनुमानित एरियर लेवल वर्तमान मूल वेतन संशोधित मूल वेतन मूल वेतन में वृद्धि 20 महीनों का एरियर 11 67,700 1,93,622 1,25,922 25,18,440 12 78,800 2,25,368 1,46,568 29,31,360 13 1,23,100 3,52,066 2,28,966 45,79,320 14 1,44,200 4,12,412 2,68,212 53,64,240   ध्यान देने वाली बात यह है कि एरियर केवल बढ़ी हुई बेसिक सैलरी पर मिलता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) जैसे अन्य भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता, क्योंकि नए वेतन आयोग में इनकी दरें अलग से संशोधित की जाती हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की रहने वाली है। 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर रिपोर्ट 2027 में लागू होती है और कर्मचारियों को 20 महीने का एरियर मिलता है, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों के खातों में बड़ी रकम आ सकती है। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा।

भारत के लिए रूस की मेहरबानी! कच्चे तेल पर भारी छूट, वैश्विक बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है।  रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है।  क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी।  चीन ने कर द‍िया था मना चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं। 

उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार, योगी ने UPEIDA की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली

लखनऊ  ये बात तो पक्‍की है कि उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान अगर किसी सरकारी एजेंसी ने राज्य की तस्वीर बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है तो वह है UPEIDA (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority). आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट इसी ने जमीन पर उतारे हैं. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPEIDA की कमान सीधे अपने हाथ में ले ली है. सीएम ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की गति और तेज की जाएगी. राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस के रूप में देखा जा रहा है।  क्या है UPEIDA? दरअसल, UPEIDA यानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और उनसे जुड़े विकास काममों के लिए की गई थी. इसका मुख्य मकसद केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि सड़क के किनारे उद्योग, निवेश, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और रोजगार के मौके भी विकसित करना भी है. यही वजह है कि यूपी में एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में देखा जाता है. ऐसे में यह भी जान लेना जरूरी है कि UPEIDA ने प्रदेश में कौन से सबसे बड़े प्रोजेक्ट डिलीवर किए हैं.. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 302 किमी उद्घाटन: 2016 इससे यात्रा समय में भारी कमी आई. पश्चिमी यूपी और राजधानी लखनऊ के बीच सीधी कनेक्टिविटी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 341 किमी लखनऊ से गाजीपुर तक बनाया गया है. लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये आई. पूर्वी यूपी को राजधानी क्षेत्र से जोड़ा. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 296 किमी चित्रकूट से इटावा क्षेत्र तक कनेक्टिविटी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बुंदेलखंड क्षेत्र को NCR नेटवर्क से जोड़ने वाला अहम मार्ग है. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 91 किमी गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है. इससे पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया. गंगा एक्सप्रेसवे लंबाई: 594 किमी मेरठ से प्रयागराज तक लागत लगभग 36,000 करोड़ से अधिक. यह राज्य का सबसे महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है. यूपीडा अभी किन परियोजनाओं पर काम कर रहा है?     गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार और उससे जुड़े लिंक     आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-आगरा एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-पलवल एक्सप्रेसवे     अवध एक्सप्रेसवे     चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे     कई औद्योगिक कॉरिडोर और ई-वे हब परियोजनाएं     इसके अलावा पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे ई-वे हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।      पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे के बाद औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।  सीएम योगी के कमान संभालने से क्या बदलेगा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की रेगुलर समीक्षा करते रहे हैं. हाल के महीनों में उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं की वीकली मॉनिटरिंग और तय समयसीमा में काम पूरा करने पर जोर दिया है. वह कई बार मौकों पर निरीक्षण भी करने पहुंचे थे और मकसद साफ था कि ये इन अहम प्रोजेक्‍ट्स में भी किसी भी तरह का डिले नहीं चाहते. सीएम के UPEIDA की सीधी निगरानी में आने से भूमि अधिग्रहण में आने वाली दिक्‍कतें पहली बात तो तेजी से दूर हो सकती हैं. साथ ही विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा. खास बात ये भी है कि इसकी वित्तीय मंजूरियों में भी तेजी आएगी. परियोजनाओं की समयसीमा पर सख्ती बढ़ेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर दिखाई दे सकते हैं।  2027 चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर होगा सबसे बड़ा मुद्दा? देखा जाए तो यूपी की राजनीति में एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सड़क नहीं बल्कि विकास का भी हैं. भाजपा सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और नए लिंक एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहेगी. यही वजह है कि UPEIDA की कमान पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि विकास और राजनीति दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

Meta-Reliance की बड़ी डील! भारत में खुलेगा पहला AI डेटा सेंटर, टेक सेक्टर में हलचल तेज

 नई दिल्ली  फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा अब भारत में अपना पहला आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) डेटा सेंटर ओपन करने जा रही है. मेटा ने इसके लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ पार्टनरशिप की है और ये डेटा सेंटर गुजरात राज्य के जामनगर में शुरू होगा।  रिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में सेंटर तैयार करेगी, जिसके बाद मेटा इसमें अपना ऑपरेशन शुरू करेगा. मेटा का यह AI डेटा सेंटर भारत के AI मिशन को पावर देने का काम करेगा।  मेटा और रिलायंस पार्टनरशिप के तहत तैयार होने वाले AI डेटा सेंटर 168 मेगावॉट कैपिसिटी के साथ शुरू होगा. बाद में इसका एक्सपेंशन किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, यह सेंटर आने वाले 2 साल में शुरू होने जा रहा है। . रिलायंस तैयार कर रही है Meta AI डेटा सेंटर  रिलायंस इस फैक्टरी को तैयार करेगी, जबकि मेटा अपने AI सिस्टम को सपोर्ट देने के लिए इसका इस्तेमाल करेगी. यह सपोर्ट फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे प्रोडक्ट में काम करता है. साथ ही यह प्रोजेक्ट मार्क जकरबर्ग की उस बड़ी प्लानिंग को आगे बढ़ाएगा, जिसको वह पर्सनल सुपर इंटेलीजेंस भी कहते हैं।  मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि यह AI विस्तार में मदद करेगा मार्क जुकरबर्ग ने जारी एक बयान में कहा है कि उनको गर्व है कि हम रिलायंस के साथ मिलकर भारत में अपना पहला AI डेटा सेंटर बना रहे हैं. जामनगर में तैयार होने वाला यह डेटा सेंटर ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने में मदद करेगा. साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में हमारे निवेश को और मजबूत करने में मदद करेगा।  रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर को सर्विस देगी  पार्टनरशिप के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर के पूरे लाइफसाइकल के दौरान एंड-टू-एंड सर्विस देगी. इसमें डेटा सेंटर का डिजाइन, डेवलपमेंट, यूटिलिटी मैनेजमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और पूरी तरह से फुली मैनेज्ड ऑपरेशनल सर्विसेज को शामिल किया गया है।  रिलायंस अपनी स्थिति को और जमबूत करेगी  पार्टनरशिप के तहत रिलायंस भारत में हाइपरस्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिंगल-विंडो सॉल्यूशंस प्रोवाइडर के रूप में अपनी स्थिति को मजूबत करेगी. ग्राहकों को एक ही कंपनी के जरिए डेटा सेंटर से जुड़ी सभी प्रमुख सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 

यूपी पंचायत चुनाव से पहले बड़ा अपडेट, अंतिम मतदाता सूची में 40 लाख नाम हटाए गए

लखनऊ  यूपी पंचायत चुनाव के करोड़ों वोटर्स के लिए अच्छी खबर है. उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची 10 जून को जारी हो गई है. जिला स्तर पर ये अंतिम मतदाता सूची जारी की गई है. प्रत्येक पंचायत मतदाताओं को 9 अंक का पहचान नंबर दिया गया है. दावे-आपत्तियों के निस्तारण और सत्यापन के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की गई है. राज्य निर्वाचन आयोग ने 18 दिसंबर 2025 को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी।  इसके अलावा, अप्रैल और मई माह के दौरान मतदाता सूची में दर्ज डुप्लीकेट नामों के सत्यापन का विशेष अभियान भी चलाया गया, जिसकी प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बुधवार को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। पहली बार आयोग पंचायत चुनाव में तकनीकी का भरपूर प्रयोग करेगा। सभी मतदाताओं को स्टेट वोटर नंबर जारी किए गए हैं। मतदाताओं का फोटो सहित ब्योरा आनलाइन उपलब्ध रहेगा। कोई भी व्यक्ति दो बार वोट नहीं डाल सकेगा। मोबाइल एप की मदद से मतदाता की पोलिंग बूथ पर फोटो खींचते ही यह पता चल जाएगा कि इसने पहले वोट डाल दिया है। फाइनल वोटर लिस्ट में करीब 1.81 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए हैं. मतदाता सूची से करीब 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. पंचायत चुनाव मतदाता सूची में करीब 40.19 लाख वोटर्स की बढ़ोतरी हुई है. अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद पंचायत चुनाव गतिविधियां तेज हो सकती हैं।  गौरतलब है कि इससे पहले अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख में पांच बार बदलाव किया जा चुका है। आज देर शाम तक इस सूची को राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर पूरी तरह अपलोड कर दिया जाएगा। ​डिजिटल तकनीक से लैस होगा इस बार का चुनाव ​राज्य निर्वाचन आयोग इस बार पंचायत चुनाव में बड़े स्तर पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। चुनाव को पूरी तरह पारदर्शी और फर्जी वोटिंग से मुक्त बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:     ​स्टेट वोटर नंबर: इस बार पहली बार सभी मतदाताओं को एक यूनिक 'स्टेट वोटर नंबर' जारी किया जा रहा है।     ​ऑनलाइन फोटो ब्योरा: सभी मतदाताओं का पूरा विवरण फोटो सहित ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा।     ​फर्जी वोटिंग पर लगाम: कोई भी व्यक्ति दो बार वोट न डाल सके, इसके लिए विशेष मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। मतदान केंद्र पर वोटर की फोटो खींचते ही ऐप तुरंत बता देगा कि इस व्यक्ति ने पहले कहीं वोट डाला है या नहीं। ​वोटर लिस्ट का गणित: 40 लाख से अधिक बढ़े मतदाता ​23 दिसंबर 2025 को जारी की गई अनंतिम (provisional) मतदाता सूची के अनुसार, इस बार मतदाताओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। ​वर्ष 2021 की मतदाता सूची में कुल 12.29 करोड़ मतदाता थे, जबकि इस बार की अनंतिम सूची में यह संख्या बढ़कर 12.69 करोड़ हो गई है। इस प्रकार पिछले चुनाव की तुलना में 40.19 लाख नए मतदाता बढ़े हैं। इस सूची को तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया था, जिसमें 1.81 करोड़ नए नाम जोड़े गए, 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए और लगभग 21.08 लाख मतदाताओं के नामों में संशोधन किया गया। ​कहाँ और कैसे देख सकेंगे फाइनल वोटर लिस्ट? ​अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक अपना और अपने परिवार का नाम नीचे दिए गए तरीकों से चेक कर सकते हैं:     ​आधिकारिक वेबसाइट: मतदाता राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission, UP) की ऑफिशियल वेबसाइट sec.up.nic.in पर जाकर 'Search Voter' या 'Voter List Download' के विकल्प पर क्लिक कर अपना नाम देख सकते हैं।     ​जिला/ब्लॉक मुख्यालय: इसके अलावा यह सूची जिला निर्वाचन कार्यालय, विकास खंड (ब्लॉक) कार्यालय और ग्राम पंचायत स्तर पर भी उपलब्ध रहेगी, जहाँ जाकर ग्रामीण अपनी सूची देख सकते हैं। ​ग्राम प्रधानों (प्रशासकों) के लिए जारी हुई नई गाइडलाइन ​यूपी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के कारण 57,694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 27 मई से प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अब उनके लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं: ​नए कार्यों के लिए लेनी होगी DM की मंजूरी: प्रशासक बने पूर्व प्रधान अब अपनी मर्जी से कोई भी नया विकास कार्य शुरू नहीं करा सकेंगे। नया काम कराने के लिए उन्हें जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) के माध्यम से जिलाधिकारी (DM) को प्रस्ताव भेजना होगा। DM की अनुमति के बाद ही नया काम शुरू हो सकेगा। ​हालांकि, जो कार्य 27 मई से पहले स्वीकृत और अनुमोदित हो चुके हैं, जो निर्माण या मरम्मत कार्य वर्तमान में चल रहे हैं, अथवा जो पूरे हो चुके हैं, उनका भौतिक और तकनीकी मूल्यांकन कराकर प्रशासक पहले की तरह ही भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें नई अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।  

करोड़ों की संपत्ति का खुलासा, जमीन, मॉल और जिम के मालिक निकले सरकारी अधिकारी

इंदौर महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल पर लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कंडवाल के ठिकानों पर छापा मारते हुए 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार से ज्यादा की संपत्ति निकाली है। 30 वर्षों की सरकारी सेवा के दौरान उनकी कुल वैध आय लगभग 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। एसपी (लोकायुक्त) डॉ. राजेश सहाय के अनुसार कार्रवाई गुप्त शिकायत के बाद हुई है। पुलिस ने लक्ष्मी नारायण के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर सुबह करीब 6 बजे आनंद विहार कालोनी (स्कीम-103) में छापा मारा। पांच मंजिला इस भवन में कंडवाल का सुपर मार्केट, जिम भी संचालित हो रहा था। इस संपत्ति की कीमत 2 करोड़ 66 लाख से ज्यादा बताई गई है। सुपर मार्केट उनका बेटा पवन और अभिषेक चलाते हैं जबकि जिम 1 लाख 15 हजार रुपये प्रति माह किराये पर दे रखी है। ठिकानों से मिली अचल संपत्तियों और भूखंडों का ब्यौरा     ग्राम सोनवाय में 664170 रुपये कीमती 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि     ग्राम तारपुरा (धार) में 9,36,655 रुपये कीमत की सर्वे क्रमांक 33 रकबा 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि     भूखण्ड क्रमांक 149-सी, आनंद विहार कालोनी (स्कीम नम्बर-103) में भूखंड (सी-149) मिला है। इस पर जी 3 करीब 13560 वर्गफीट भवन निर्माण है। इसकी अनुमानित कीमत 2,66,57,450 रुपये है।     इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम-140 स्थित भूखण्ड क्रमांक- 220 (54 वर्गमीटर) मिला है। उसकी कीमत 21,90,806 रुपये है।     इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक- 140 के सेक्टर ए में टाईप एम का भूखण्ड (378) मिला है। इसकी कीमत 15,34,572 रुपये है।     ग्राम बनेडिया (धार) में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 12,26,118 रुपये है। धार और पीथमपुर में मिली करोड़ों की कृषि भूमि     ग्राम बनेडिया (धार) में 1.176 हेक्टेयर कृषि भूमि मिली है। इसकी कीमत 22,71,327 रुपये बताई है।     ग्राम बनेडिया (धार) में 2.100 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 40,55,940 रुपये है।     ग्राम तारपुरा सागौर (धार) में 2.195 कृषि भूमि है। इसकी कीमत 1,53,15,350 रुपये है।     ग्राम तारपुरा पीथमपुर (धार) में 0.345 हेक्टेयर एवं 0.606 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 67,27,239 रुपये है।     ग्राम बेकल्या पीथमपुर (धार) में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 11,94,185 रुपये है।     Gram बेकल्या पीथमपुर (धार) में 2.435 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 2,28,97,007 है।     ग्राम तारपुरा पीथमपुर (धार) में 1.212 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 25,00,000 रुपये है। बैंक लॉकर से मिला सोना, मिली 287.7% अनुपातहीन संपत्ति कुल अचल संपत्ति में 9,76,15,004 रुपये व्यय किया गया है। सांठा बाजार स्थित बैंक ऑफ इंडिया में लॉकर मिला है। उसमें 1.89 ग्राम सोना मिला है। एसपी के अनुसार आरोपित की 30 साल की नौकरी में कुल आय 2,80,00,000 रुपये है जबकि सर्चिंग में 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार रुपये की संपत्ति मिली है। उक्त संपत्ति 287.7 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति मिली है।

ड्रग नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने की तैयारी, पंजाब पुलिस ने 73 हवाला संचालकों को दबोचा

 चंडीगढ़  पंजाब पुलिस ने 'युद्ध नशों विरुद्ध' अभियान के अगले चरण के तहत नशे के कारोबार से जुड़े अवैध हवाला नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए राज्यव्यापी तीन दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन अवैध हवाला संचालकों पर कार्रवाई करना है, जो नशा तस्करी से अर्जित धन के लेन-देन में मदद कर तस्करी नेटवर्क को आर्थिक मजबूती प्रदान करते हैं। पंजाब पुलिस के अनुसार, 'युद्ध नशों विरुद्ध' अभियान के तहत अब तक 73 हवाला संचालकों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 10 करोड़ रुपये की हवाला राशि बरामद की गई है। इसके अलावा वर्ष 2022 से अब तक एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत 830 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां फ्रीज की जा चुकी हैं। 1727 प्रस्ताव कार्रवाई के लिए भेजे गए पुलिस ने बताया कि एक मार्च 2025 से अब तक नशा तस्करी से अर्जित 20 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई बरामद की गई है। वहीं, अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने के लिए भेजे गए 1,727 प्रस्तावों की सक्षम प्राधिकरण द्वारा पुष्टि की जा चुकी है। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी और नशा तस्करी की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि नशा तस्करों, हवाला संचालकों, नशे की कमाई और अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर संगठित नशा कारोबार के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि नशा मुक्त पंजाब के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।  

जबलपुर-ग्वालियर समेत कई जिलों में बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने दी चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले छतरपुर और छिंदवाड़ा में लू चली। बुधवार को छतरपुर जिले के खजुराहो का पारा 45.0 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा, वहीं नौगांव में भी पारा 44.6 डिग्री दर्ज किया गया। छिंदवाड़ा में दिन का तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक यानी 40.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, जिससे लोग लू के थपेड़ों से बेहाल रहे। प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में अधिकतम तापमान 34.0 से 43.6 डिग्री और पूर्वी क्षेत्रों में 39.0 से 45.0 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश के तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद पारे में 2 से 3 डिग्री गिरावट की संभावना जताई गई है। सिवनी में 3.0 मिलीमीटर हुई वर्षा और 70 किमी की रफ्तार से चली आंधी मौसम केंद्र के अनुसार बुधवार को सिवनी में 3.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और उमरिया में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली और बिजली चमकी। वहीं बैतूल, मंडला, अनूपपुर और शहडोल में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। शाम होते–होते जबलपुर, छतरपुर, दमोह, उज्जैन, रतलाम सहित कई जिलों में मौसम बदल गया। आज यहां चलेंगी तेज हवाएं, येलो अलर्ट जारी गुरुवार को रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सागर और छतरपुर सहित करीब 34 जिलों में गरज–चमक के साथ वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान शहर अधिकतम न्यूनतम भोपाल 40.4 27.6 इंदौर 38.9 25.4 ग्वालियर 43.1 29.4 जबलपुर 40.5 25.0  

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा दांव, 40 हजार करोड़ की परियोजना से तेल-गैस संकट का मिलेगा समाधान

नई दिल्ली ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग एक बार फिर जोर पकड़ती दिख रही है. अमेरिका ने अपने अपाचे हेलिकॉप्टर पर हमले पर बदला लेने के लिए होर्मुज के पास ईरान के अहम ठिकानों पर बुधवार तड़के (भारतीय समय) हमला कर दिया. वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बहरीन स्थित अमेरिका के पांचवें बेड़े को निशाना बनाने का दावा किया है. अमेरिका और ईरान के बीच इस ताजा वार और पलटवार ने होर्मुज स्ट्रेट के जल्द दोबारा खुलने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से मंडराते तेल-गैस के संकट के बीच भारत एक ऐसे मेगा प्रोजेक्ट पर गंभीरता से कदम आगे बढ़ा रहा है, जो आने वाले दशकों के लिए देश की ऊर्जा सुरक्षा की तस्वीर बदल सकता है. ओमान से गुजरात तक अरब सागर के नीचे लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी डीप-सी गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को फिर से गति मिली है. करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भारत के लिए ‘होर्मुज संकट का स्थायी समाधान’ माना जा रहा है।  भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत से ज्यादा प्राकृतिक गैस आयात करता है. इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से एलएनजी (LNG) के रूप में आता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अगर किसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है या वहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो भारत समेत दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।  ओमान से गुजरात तक पाइपलाइन यही वजह है कि भारत अब ओमान से सीधे गैस लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है. प्रस्तावित पाइपलाइन ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी और इसके जरिए गैस समुद्र के रास्ते टैंकरों में लाने की बजाय सीधे पाइपलाइन से भारत पहुंचेगी. इससे न केवल सप्लाई अधिक स्थिर होगी बल्कि समुद्री संकटों का असर भी काफी हद तक कम हो जाएगा।  इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी तकनीकी जटिलता है. पाइपलाइन का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से भी अधिक गहराई में बिछाया जाएगा. इतनी गहराई पर पाइपलाइन निर्माण दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना जाता है. अगर यह योजना सफल होती है तो यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री गैस पाइपलाइनों में से एक होगी।  इस प्रोजेक्ट को लंबे समय से बढ़ावा देने वाली कंपनी साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज (SAGE) का दावा है कि वह पहले ही तकनीकी और वित्तीय अध्ययन के साथ-साथ समुद्र तल का सर्वेक्षण भी कर चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब सरकारी कंपनियों जैसे गेल, इंडिया ऑयल कॉर्पोरेशन और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा है।  गैस आयात हो जाएगा सस्ता एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ गैस आयात का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भारत और खाड़ी देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगी. ओमान को लंबे समय के लिए स्थायी ग्राहक मिलेगा, जबकि भारत को गैस की सुरक्षित और लगातार आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।  वर्तमान में एलएनजी आयात की प्रक्रिया काफी लंबी और महंगी है. पहले गैस को तरल रूप में बदला जाता है, फिर विशेष जहाजों से हजारों किलोमीटर दूर ले जाया जाता है और भारत पहुंचने पर दोबारा गैस में परिवर्तित किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में भारी खर्च आता है. प्रस्तावित पाइपलाइन के जरिए गैस सीधे स्रोत से उपभोक्ता तक पहुंचेगी. शुरुआती अनुमान के मुताबिक गैस परिवहन की लागत 2 से 2.25 डॉलर प्रति MMBtu के बीच रह सकती है, जो कई परिस्थितियों में एलएनजी आयात से प्रतिस्पर्धी साबित हो सकती है।  इस प्रोजेक्ट में क्या है रोड़ा? हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी चुनौती इंजीनियरिंग की है. समुद्र की 3,000 मीटर गहराई पर पाइपलाइन बिछाना और उसका रखरखाव करना बेहद जटिल और महंगा काम होगा. किसी भी तकनीकी खराबी या रिसाव की स्थिति में मरम्मत करना आसान नहीं होगा. इसके लिए विशेष जहाजों और अत्याधुनिक उपकरणों की जरूरत पड़ेगी।  दूसरी बड़ी चुनौती लागत और फंडिंग की है. 40,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत शुरुआती आंकड़ा है. ऐसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अक्सर लागत बढ़ जाती है. इसके अलावा यह भी तय करना होगा कि निवेश कौन करेगा, लागत का बंटवारा कैसे होगा और गैस खरीद के दीर्घकालिक समझौते किस प्रकार होंगे।  तीन दशक से अटका था काम फिर भी हालात बदल चुके हैं. तीन दशक पहले जब यह परियोजना पहली बार सामने आई थी, तब तकनीक और आर्थिक व्यवहार्यता सबसे बड़ी बाधा थीं. लेकिन अब ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुकी है. रूस-यूक्रेन युद्ध, लाल सागर संकट और अब होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने यह दिखा दिया है कि किसी एक समुद्री मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता कितनी जोखिम भरी हो सकती है।  विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना सफल होती है तो भविष्य में इसी नेटवर्क का इस्तेमाल हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधनों के परिवहन के लिए भी किया जा सकता है. यानी यह सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की ऊर्जा रणनीति का आधार बन सकती है।  यही कारण है कि ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन को सिर्फ एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. होर्मुज संकट ने जिस खतरे की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है, भारत उसी का स्थायी समाधान खोजने में जुटा हुआ है. अगर यह मेगा प्लान जमीन पर उतरता है, तो देश की तेल-गैस आपूर्ति पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद हो सकती है।   

84 घंटे तक उग्रवादियों से लोहा लेने वाले मेजर अर्शदीप गिल को मिला कीर्ति चक्र सम्मान

 मोहाली  सेक्टर 79 मोहाली के भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी मेजर अर्शदीप सिंह गिल को उनकी असाधारण वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में प्रदान किया। मेजर अर्शदीप सिंह गिल, जो द आर्मर्ड कोर और 1 असम राइफल्स से संबद्ध हैं, ने मणिपुर में एक चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण सैन्य अभियान के दौरान अद्वितीय साहस, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। करीब 84 घंटे तक चले ऑपरेशन में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए आतंकवादियों के खिलाफ सफल कार्रवाई को अंजाम दिया और मिशन को सफलता पूर्वक पूरा किया। सेना के सूत्रों के अनुसार, अभियान के दौरान मेजर गिल ने विपरीत परिस्थितियों में भी असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। उनकी बहादुरी और समर्पण की देशभर में सराहना हो रही है। मेजर अर्शदीप सिंह गिल की इस उपलब्धि से पंजाब सहित पूरे देश को गौरव की अनुभूति हुई है। उनके सम्मानित होने पर परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। सेना और सुरक्षा बलों से जुड़े अधिकारियों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया है। मेजर गिल की यह उपलब्धि देश सेवा, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण की एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है। ऑपरेशन की बड़ी बातें मणिपुर में उग्रवादियों के खिलाफ यह काउंटर-इंसरजेंसी ऑपरेशन करीब 84 घंटे (साढ़े तीन दिन) तक चला था। खतरनाक और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद मेजर अर्शदीप ने अपनी टीम को आगे रहकर लीड किया और मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मेजर गिल 'द आर्मर्ड कॉर्प्स' के अधिकारी हैं और फिलहाल '1 असम राइफल्स' के साथ तैनात हैं। पूरे पंजाब में गर्व का माहौल, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल सेना के सूत्रों के मुताबिक, मेजर गिल ने बेहद खतरनाक हालातों में भी अद्वितीय पेशेवर कौशल और वीरता दिखाई। उनकी इस बहादुरी से न सिर्फ मोहाली बल्कि पूरे पंजाब और देश का नाम रोशन हुआ है। सम्मान की खबर मिलते ही मेजर अर्शदीप के मोहाली स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रक्षा विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने इसे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरक मिसाल बताया है। क्या है कीर्ति चक्र? यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान सेना, नौसेना और वायु सेना के जवानों के अलावा आम नागरिकों को भी असाधारण वीरता या आत्म बलिदान के लिए दिया जाता है। वरीयता में यह 'अशोक चक्र' के बाद आता है।