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नाड़ी विश्लेषण आयुर्वेद का विज्ञान और भारत का गौरव: राज्यपाल पटेल

नाड़ी विश्लेषण, आयुर्वेद का विज्ञान और भारत का गौरव : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी नाड़ी विश्लेषण- 2026 का शुभारंभ भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि नाड़ी विश्लेषण विज्ञान, भारत की समृद्ध चिकित्सकीय ज्ञान परंपरा है। यह विज्ञान के साथ भारतीय ज्ञान की गौरवशाली विरासत भी है। आधुनिक तकनीक और आयुष विज्ञान के साथ नाड़ी विश्लेषण को जोड़ना और विस्तारित करना स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत बनाने का मार्ग है। उन्होंने संगोष्ठी के आयोजन की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि “सबके लिए स्वास्थ्य” के लक्ष्य की पूर्ति में आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यह स्वस्थ जीवनशैली और स्व-देखभाल को बढ़ावा देता है। नाड़ी विश्लेषण, कम खर्चीली, बिना किसी शारीरिक नुकसान की जाँच विधि है, जिसमें जटिल उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए नाड़ी विश्लेषण ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सस्ती, सुलभ और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के द्वारा जन स्वास्थ्य को नया आयाम दे सकती है। राज्यपाल पटेल मंगलवार को नाड़ी विश्लेषण – 2026 पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन, राष्ट्रीय आयुष मिशन और पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ''नाड़ी परीक्षा की व्यवहारिक तकनीकों की खोज एवं निदान में नाड़ी का नैदानिकी महत्व'' विषय पर किया गया था। स्वस्थ जीवन और वेलनेस को बढ़ाता है आयुर्वेद राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आज दुनिया आयुर्वेद केहॉलिस्टिक विजन और जीवन दर्शन की ओर लौट रही है। आयुर्वेद आरोग्य का ऐसा विज्ञान है, जो रोग के उपचार से आगे बढ़कर स्वस्थ जीवन और वेलनेस को बढ़ावा देता है। इसके बहुउद्देश्यीय महत्व के कारण आयुर्वेद का भविष्य स्वर्णिम है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, हमें अनुशासन सिखाता है। मौसम के अनुसार खान-पान और जीवन शैली में परिवर्तन का मार्गदर्शन देता है। आयुष की अलग-अलग विधाएं भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। योग, हौम्योपैथी और नैचुरोपैथी हर घर-हर व्यक्ति तक पहुँच गई है। परिणामस्वरूप आज विश्वभर में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवनशैली और संयमित खान-पान की उपयोगिता बताई। सभी को नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, भरपूर नींद और पर्याप्त पानी को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी। एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने पर हो चिंतन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने आयुर्वेद को नई पहचान दिलाई है। समय की मांग है कि नाड़ी विश्लेषण के पारंपरिक ज्ञान से जुड़े दावों का आधुनिक वैज्ञानिक मानकों और शोध पद्धतियों के आधार पर विश्लेषण तथा सत्यापन किया जाए। नाड़ी विश्लेषण की व्यक्तिपरकता और विशिष्ट आकलन के अंतरों को कम करने पर चर्चा की जाए। आधुनिक वैज्ञानिक मापदण्डों के आधार पर प्रमाणित विश्लेषण द्वारा इसे एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने पर भी चिंतन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन क्षेत्रों में जहाँ आधुनिक जाँच सुविधाएँ सीमित हैं, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में नाड़ी विश्लेषण विधि के द्वारा बड़ी संख्या में लोगों तक स्वास्थ्य परामर्श तथा प्रारंभिक स्वास्थ्य आकलन में आयुर्वेद चिकित्सक और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संभावनाओं को भी खोजा जाना चाहिए। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ भगवान धन्वतरी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उनका आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने ''आयु वर्धनम् – सिकल सेल'' लघु पुस्तिका का लोकार्पण किया। भारत के प्रतिष्ठित नाड़ी विशेषज्ञों का सम्मान किया। महाविद्यालय परिसर में औषधीय पौधे का रोपण किया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी ने आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में महाविद्यालय की सतत और सक्रिय भूमिका की सराहना की। स्वागत उद्बोधन में आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने नाड़ी विश्लेषण विज्ञान के प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के उद्देश्य, महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। आभार आयुष विभाग की आयुक्त सुउमा माहेश्वरी ने व्यक्त किया। संगोष्ठी का प्रारंभ और समापन राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय गान से हुआ। कार्यक्रम में पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य उमेश शुक्ला, नाड़ी विशेषज्ञ, महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय प्रमुख, आचार्यगण और विद्यार्थी उपस्थित थे।  

कूनो-गांधीसागर के बाद अब बुंदेलखंड में बसेंगे चीते, CM मोहन यादव करेंगे दो चीतों को विमुक्त

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 7 अक्टूबर को 2 चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करेंगे विमुक्त मध्यप्रदेश में कूनो और गांधीसागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का तीसरा आवास वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन पर सागर और बुंदेलखंड के लिए ऐतिहासिक अवसर सागर वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा। चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के यहां पहुंचेंगे, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है। प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है तथा संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब यह अभियान मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीतें रहेंगे। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा।

सड़क से रेलवे और बंदरगाह तक सब होगा एक सिस्टम में, मोदी सरकार ने दी ITLA को मंजूरी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और छोटे कारोबार को लेकर दो बड़े फैसले किए हैं. केंद्रीय कैबिनेट ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी यानी ITLA बनाने को मंजूरी दी है. साथ ही स्‍मॉल एंड मीड‍ियम एंटरप्राइजेज ग्रोथ फंड (SGF) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी गई है. सरकार एक तरफ देश में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आपस में जोड़कर काम कराने की तैयारी कर रही है. दूसरी तरफ छोटे और मझोले कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड बनाया जा रहा है. इससे आम आदमी, किसान, छोटे दुकानदार और छोटे कारोबारी को सीधा फायदा होगा।  आपके भी मन में सवाल होगा क‍ि आख‍िर इस तरह की अथॉर‍िटी की जरूरत क्‍यों पड़ी. मान लीजिए किसी किसान ने अपने खेत में गेहूं पैदा किया. गेहूं गांव से मंडी जाएगा, वहां से किसी दूसरे शहर में जाएगा और फिर किसी फैक्ट्री या गोदाम तक पहुंचेगा. इस पूरे सफर में सड़क, ट्रक, रेलवे, गोदाम और कई बार बंदरगाह तक की जरूरत पड़ सकती है. अगर सड़क अच्छी है लेकिन रेलवे कनेक्शन नहीं है, रेलवे है लेकिन माल उतारने-चढ़ाने की व्यवस्था कमजोर है या बंदरगाह तक पहुंचने में बहुत समय लग रहा है तो पूरे सिस्टम का खर्च बढ़ जाता है. यही खर्च आखिरकार सामान की कीमत में भी जुड़ता है. मोदी सरकार की नई ITLA का मकसद इसी पूरी कड़ी को एक साथ देखकर योजना बनाना है।  अभी कैसे होता है? अभी सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा, जलमार्ग और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़े काम अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के जरिए होते हैं. ITLA इन सबके बीच बेहतर तालमेल बनाने वाली संस्था के तौर पर काम करेगी. ITLA को आप सरकार का ऐसा सिस्टम समझ सकते हैं, जो यह देखने की कोशिश करेगा कि देश में माल और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए कौन सा रास्ता सबसे बेहतर है. इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग, हवाई सेवा, जलमार्ग, कोस्टल शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स सभी को एक साथ देखा जाएगा।  यानी सरकार सिर्फ यह नहीं देखेगी कि सड़क कहां बनानी है. यह भी देखा जाएगा कि उस सड़क का रेलवे, बंदरगाह या दूसरे परिवहन साधनों से कनेक्शन कैसा है. इससे एक ही काम के लिए अलग-अलग विभागों में योजना बनाने की बजाय एक साझा प्लान के हिसाब से काम करने की कोशिश होगी।  10 साल या उससे ज्यादा का ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान बनेगा ITLA की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करना होगी. यह छोटी अवधि की योजना नहीं होगी. सरकार ने इसे 10 साल या उससे ज्यादा की अवधि को ध्यान में रखकर बनाने की बात कही है. इसका मतलब यह है कि सरकार आने वाले वर्षों में देश में ट्रांसपोर्ट की जरूरत कहां बढ़ेगी, किस इलाके में सड़क चाहिए, कहां रेलवे कनेक्शन चाहिए, किस बंदरगाह की क्षमता बढ़ानी है और माल की आवाजाही किस तरह आसान बनाई जा सकती है] इन सबको पहले से प्लान करने की कोशिश करेगी. अगर किसी इलाके में अगले 10-15 साल में उद्योग, खेती या कारोबार बढ़ने वाला है तो वहां की सड़क और माल ढुलाई की जरूरत का अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है।  500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट की भी होगी जांच ITLA की भूमिका सिर्फ प्लान बनाने तक सीमित नहीं होगी. 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा लागत वाली केंद्र सरकार की ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तकनीकी जांच भी ITLA करेगी. इन परियोजनाओं की निगरानी और उनके असर का आकलन भी किया जाएगा. यानी किसी बड़े सड़क, रेलवे या दूसरे ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं तो यह देखने की व्यवस्था होगी कि परियोजना तकनीकी रूप से सही है या नहीं और इससे अपेक्षित फायदा मिल रहा है या नहीं. यानी बड़ा प्रोजेक्ट सिर्फ बनाना ही मकसद नहीं होगा, उससे कितना फायदा हुआ, यह भी देखा जाएगा।  FASTag से GSTN तक का डेटा एक जगह आएगा ITLA का एक और महत्वपूर्ण काम नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी बनाना होगा. इसमें FASTag, Vahan, GSTN e-way bill, GPS और ट्रैफिक सिस्टम जैसे अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा को एक साथ लाने की योजना है।  इसका फायदा क्या होगा? मान लीजिए किसी हाईवे पर हर दिन हजारों ट्रक गुजर रहे हैं. FASTag से टोल और वाहनों की आवाजाही का डेटा मिलता है. GSTN e-way bill से यह पता लगाया जा सकता है कि सामान की आवाजाही किस तरह हो रही है. GPS और ट्रैफिक सिस्टम से यह समझने में मदद मिल सकती है कि ट्रैफिक कहां और कितना है. अगर यह जानकारी एक साथ मिलेगी तो सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि कहां सड़क पर दबाव बढ़ रहा है, माल किस रूट से ज्यादा जा रहा है और कहां नई सुविधा की जरूरत है. यानी भविष्य में ट्रांसपोर्ट से जुड़े फैसले ज्यादा डेटा के आधार पर लेने की कोशिश होगी।  इसका फायदा आम आदमी को क्‍या फायदा अगर माल एक शहर से दूसरे शहर तक जल्दी और कम खर्च में पहुंचता है तो कारोबारी की लागत घट सकती है. अगर किसान की फसल मंडी तक जल्दी पहुंचती है तो नुकसान कम हो सकता है. अगर फैक्ट्री तक कच्चा माल समय पर पहुंचता है तो उत्पादन बेहतर हो सकता है. और अगर पूरे सिस्टम की लागत कम होती है तो लंबे समय में इसका फायदा कारोबार, किसान और उपभोक्ता, तीनों को मिल सकता है।  10 हजार करोड़ का SGF फंड है क्‍या? SGF के लिए 10,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं. यह फैसला छोटे और मझोले कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है. देश में बहुत से कारोबार ऐसे हैं जो छोटी या मध्यम इकाई से शुरू होते हैं. इनमें मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, सप्लायर, सर्विस कारोबार और दूसरी कारोबारी इकाइयां शामिल हैं. इन कारोबारों को आगे बढ़ने के लिए नई मशीन खरीदने, उत्पादन बढ़ाने, कारोबार का विस्तार करने या नई क्षमता तैयार करने के लिए पूंजी की जरूरत पड़ती है. SGF का उद्देश्य ऐसे छोटे और मझोले उद्यमों की ग्रोथ को सहारा देना है. हालांकि 10 हजार करोड़ रुपये का मतलब यह नहीं है कि हर छोटे दुकानदार या कारोबारी को सीधे उसके खाते में पैसा … Read more

म.प्र लोक सेवा आयोग की वर्ष 2027 में होंगी दो परीक्षाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2027 प्रदेश में युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा और एक वर्ष में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की एक नहीं, दो परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही प्रदेश में 12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक कोर्स के लिए 12 नए विश्वविद्यालय आरंभ किए जाएंगे, जो कौशल उन्नयन पर केन्द्रित होंगे। प्रदेश के एक लाख युवाओं को कौशल उन्नयन योजना से जोड़ा जाएगा। युवा वर्ष 2027 के लिए एक पोर्टल की भी शुरूआत की जाएगी, जिसमें युवा अपने विचार और सुझाव दे सकेंगे। राज्य सरकार उपयुक्त सुझावों को लागू करने की दिशा में कार्य करेगी। प्रदेश के सभी जिलों के शासकीय महाविद्यालयों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। कॉलेजों में विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट के लिए विशेष एजेंसी निर्धारित की जाएगी, जो युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए काम करेगी। स्नातकोत्तर की छात्राओं को गांव की बेटी और प्रतिभा किरण योजना में शामिल किया जाएगा। सभी शासकीय महाविद्यालयों में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और एडवांस कम्प्युटिंग लैब की स्थापना की जाएगी। उच्च शिक्षा में शोध को प्रोत्साहन देने के लिए शोधार्थियों को मिलने वाली राशि को 16 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रूपए प्रतिमाह किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह घोषणाएं आज सीएम यूथ कॉन्क्लेव -2026 को संबोधित करते हुए कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड ग्राउंड पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। युवाओं के लिये लगाए गए अनेक स्टॉल्स मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में सीएम यूथ कॉन्क्लेव में यूथ आइकॉनिक सिंगर  जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे द्वारा मंत्रमुग्ध करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गयी। 'मेरी चौखट पर चलकर आज प्रभु राम आएं हैं', 'शंकर संकट हरना', 'कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' जैसे भजनों पर युवा झूम उठे। लाल परेड मैदान युवाओं के उत्साह, उमंग और ऊर्जा से सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर नेशनल एआई लिटरेसी मिशन के कौशल रथ द्वारा संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने युवाओं द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक भी देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य, योग, कॅरियर गाइडेंस, भारतीय ज्ञान परम्परा, कौशल उन्नयन, आयुष और नवाचार से उद्यमिता तक की थीम पर लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन भी‍किया। विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा भी अपने स्टॉल लगाए गए थे। 'मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संग-बदलाव के रंग' की रॉक प्रस्तुति ने युवाओं को किया आकर्षित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  जुबिन नौटियाल के साथ छात्रों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिवादन किया। रोबोट संग सीएम की कदमताल के अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रोबोट 'बडी' से हाथ मिलाया और उसके साथ वॉक भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के पंजीकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेश के उद्योगों और विकसित भारत @2047 पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, साथ ही 'डॉ. मोहन यादव के संग-बदलाव के रंग' की रॉक शैली में वीडियो प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, विधायक  भगवानदास सबनानी, विधायक  रामेश्वर शर्मा तथा अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण उपस्थित थे। राज्य स्तर पर 5 करोड़ रूपए का आइडिया फंड बनाया जाएगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं स्टार्टअप आइडिया को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तर पर 5 करोड़ रूपए का आइडिया फंड बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर भी शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रदेश में 500 नई इकाईयां बनाई जाएंगी। प्रत्येक संभाग में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2027 में पुन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होगा, जिससे सम्पूर्ण प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एशियन गेम्स-2026 में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 5 स्वर्ण पदक जीते हैं। बदलते दौर में भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। युवा शक्ति के बल पर भारत आगे बढ़ेगा और इसी के साथ मध्यप्रदेश भी आगे बढ़ेगा। मध्यप्रदेश सबसे युवा प्रदेश है। यहां बेरोजगारी दर देश में सबसे कम है। हम प्रदेश की समृद्धि और युवाओं के कल्याण के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। राज्य सरकार तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार कदम उठा रही है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष 7 अक्टूबर को पूर्ण हो रहे हैं। सेवा और देश की प्रगति को समर्पित प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश में कई असंभव कार्य पूर्ण हुए हैं। मध्यप्रदेश को पहले केवल कृषि आधारित प्रदेश माना जाता था, लेकिन पिछले ढाई साल में हमारा प्रदेश उद्योग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, मेडिकल एजुकेशन और आईटी सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ा है। प्रदेश सरकार ने सभी शासकीय विभागों में 85 हजार युवाओं को नौकरी दी। उन्होंने युवा साथियों में जोश भरते हुए कहा कि यही समय है – सही समय है। राज्य सरकार युवाओं के लिए तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार कई नए कदम उठा रही है। राज्य में नॉलेज सिटी और साइंस सिटी आकार ले रही हैं। हमारा प्रयास है‍कि राज्य के युवा नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बने, इसीलिए आईटी पार्क इंदौर, रीवा, उज्जैन सहित हम देश का सबसे बड़ा टेली कम्यूनिकेशन केन्द्र ग्वालियर में बनाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं से बड़े भाई के रूप में बातचीत की। वे रैम्प पर चलते हुए छात्रों के बीच पहुंचे, छात्रों से हाथ मिलाया और उनसे अनौपचारिक लहजे में संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को मंच पर बुलाकर उनसे, उनके सपनों, आकांक्षाओं और राज्य सरकार से अपेक्षाओं पर चर्चा की। भोपाल के ओरिएंटल कॉलेज की छात्रा सु आयशा खान ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पूछा कि – राज्य सरकार युवाओं को कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए क्या कर रही है ? मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि – कृषि क्षेत्र में समृद्धि के लिए सरकार ने पूरा वर्ष 2026 कृषक कल्याण को समर्पित किया है। हमारी सरकार फूड प्रोसेसिंग को लेकर वैल्यू चेन तैयार करने के लिए कार्य कर रही है। युवा साथी जैविक खेती के साथ नई … Read more

PM सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर, मंत्री शुक्ला ने दिए निर्देश

लोगों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का करें प्रभावी क्रियान्वयन : नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला भोपाल में सेवा सेतु अभियान अन्तर्गत आयोजित शिविर का किया शुभारंभ भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुसार लोगों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाये। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने यह बात मंगलवार को सेवा सेतु अभियान अन्तर्गत रवीन्द्र भवन भोपाल में आयोजित शिविर में कही। मंत्री शुक्ला ने कहा कि रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के लिए क्षेत्रवार लक्ष्य निर्धारित कर उसकी शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाये। इस कार्य की सतत मानीटरिंग होना चाहिए। योजना के क्रियान्वयन में आ रही कमियों को भी दूर करें। उन्होंने कहा कि आगे आने वाली पीढ़ी को हरा भरा और सोलर बिजली से युक्त मध्यप्रदेश सौंपना हम सबकी जिम्मेदारी है। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने कहा कि सोलर संयत्र से मिलने वाली बिजली 2 रूपये प्रति यूनिट है, जबकि कोयला बनने वाली बिजली 6 रूपये प्रति यूनिट है। साथ ही सोलर एनर्जी पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। अत: इस अभियान में सभी लोग सक्रिय सहभागिता करें। एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ऋषि गर्ग ने बताया कि प्रदेश में एक लाख 88 हजार रूफटॉप सोलर पैनल लग चुके हैं। प्रदेश में 750 मेगावॉट की सेालर एनर्जी की क्षमता विकसित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि शिविरों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आर.ई.सी. के पदाधिकारी विजय कुलकर्णी ने बताया कि देश में एक करोड़ घरों में रूफटाप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। अभी तक 51 लाख लगाये गये हैं। वीडियो के माध्यम से सोलर पैनल के उपयोग की जानकारी दी गयी। मंत्री शुक्ला ने सोलर पैनल से संबंधित लगे स्टॉल का भी अवलोकन किया। आभार प्रदर्शन एम.डी. ऊर्जा विकास निगम अमित तोमर ने किया।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति, मंत्री सुनील शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने किया स्वागत

योगी सरकार की ग्लोबल कनेक्टिविटी और निवेश नीति को मिला नया आयाम, जेवर पहुंचे स्विस राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति, मंत्री सुनील शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने किया स्वागत एविएशन के साथ आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर जोर स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी द्वारा विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का किया निरीक्षण, करीब 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद नोएडा/लखनऊ  उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और आधुनिक औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की योगी सरकार की नीति को आज उस समय एक और अंतरराष्ट्रीय आयाम मिला, जब स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति महामहिम गाय बर्नार्ड पारमेलिन अपने करीब 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर पहुंचे। यह दौरा उत्तर प्रदेश और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और एविएशन क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, नागरिक उड्डयन विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं आईआईडीसी दीपक कुमार तथा इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन और उनके प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। योगी सरकार की निवेश नीति से वैश्विक साझेदारी को मिल रहा विस्तार योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचे और निवेश के अनुकूल वातावरण को अपनी विकास नीति का प्रमुख आधार बनाया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसी व्यापक विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जेवर में विकसित हो रहा यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक हवाई संपर्क से जोड़ने के साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक, कारोबारी और निवेश गतिविधियों को नई गति देने की क्षमता रखता है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का जेवर एयरपोर्ट दौरा इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि एयरपोर्ट का विकास स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी द्वारा किया गया है। इससे उत्तर प्रदेश में स्विस तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश के साथ बने इस महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहयोग का नया अवसर सामने आया है। आधुनिक सुविधाओं का लिया जायजा दौरे की शुरुआत एनआईए ऑफिस में हुई, जहां अवनी बोर्ड रूम में एयरपोर्ट से संबंधित प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन ने भी प्रतिनिधिमंडल को संबोधित किया। इसके बाद एयरपोर्ट परिसर के आंगन में भारतीय संगीत की धुनों के बीच लंच का आयोजन किया गया और ग्रुप फोटो भी हुआ। इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल दो हिस्सों में विभाजित हुआ। राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन, उनकी पत्नी और चयनित अधिकारी एयरसाइड तथा एटीसी टॉवर के विशेष निरीक्षण के लिए गए। वहीं प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने टर्मिनल, सुरक्षा क्षेत्र, बोर्डिंग गेट्स, एप्रन और बैगेज रिक्लेम सहित एयरपोर्ट की विभिन्न सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल दोपहर करीब दो बजे एयरपोर्ट से रवाना हुआ। एविएशन के साथ आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स में सहयोग की उम्मीद करीब 65 सदस्यीय स्विस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति की पत्नी, स्विस राजदूत, राष्ट्रीय परिषद के सदस्य, राज्य सचिव और लगभग 40 उद्योगपति शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने इस दौरे को केवल एयरपोर्ट निरीक्षण तक सीमित न रखते हुए संभावित आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीतियों और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर प्रयासों से राज्य में वैश्विक कंपनियों के लिए निवेश का अनुकूल माहौल तैयार हुआ है। ऐसे में स्विस राष्ट्रपति का जेवर दौरा एविएशन के अलावा आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीक और इससे जुड़े क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग और निवेश की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है।

‘403 सीट पर है निगाहें’, अखिलेश की पोस्ट पर राजभर का तंज, बोले- सपने देखना बुरी बात नहीं

राज्यसभा का तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी सपा, राजभर ने अखिलेश पर कसा तंज; बोले- बस हो गया टांय-टांय फिस्स '403 सीट पर है निगाहें', अखिलेश की पोस्ट पर राजभर का तंज, बोले- सपने देखना बुरी बात नहीं तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर पीछे हटे अखिलेश तो राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं राज्यसभा चुनाव से पहले अखिलेश पर राजभर का वार, बोले- 'कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं' अखिलेश के राज्यसभा दांव पर राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं अखिलेश यादव पर ओपी राजभर ने साधा निशाना, बोले- बस हो गया टांय-टांय फिस्स लखनऊ, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी की तरफ से तीन की जगह दो ही उम्मीदवारों को उतारने का ऐलान किया है। सपा सुप्रीमो के इस फैसले पर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि अखिलेश कभी-कभी समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। 'बस हो गया टांय-टांय फिस्स' ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, "मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स!"। उन्होंने अखिलेश यादव के दो उम्मीदवार उतारने के फैसले पर कटाक्ष करते हुए लिखा, "वैसे कभी-कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया।" '403 के सपने देखना बुरी बात नहीं' राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव के 403 विधानसभा सीटों से जुड़े राजनीतिक दावे पर भी तंज कसा। उन्होंने लिखा, "रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।" इसके जरिए राजभर ने राज्यसभा चुनाव से आगे विधानसभा चुनाव की सियासत को भी निशाने पर लिया।  बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए सपा की तरफ से पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया जा चुका है। लेकिन अखिलेश यादव लगातार दावा कर रहे थे कि वो तीसरे उम्मीदवार के जरिए बीजेपी को सरप्राइज देंगे। लेकिन अब अखिलेश अपनी ही बात से पीछे हट गए हैं। अब इसी को लेकर ओपी राजभर ने अखिलेश पर तंज कसा है।

UPI MDR Charges: फीस लगी तो 76% यूजर्स छोड़ सकते हैं UPI, कैश और कार्ड का बढ़ेगा इस्तेमाल

नई दिल्ली UPI से 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की तैयारी है। यह नियम 15 अक्टूबर से लागू हो सकता है। इसमें UPI P2P यानी ग्राहक से व्यापारी वाले भुगतान शामिल होंगे। यह चार्ज व्यापारी को देना है। लेकिन, सवाल यह है कि अगर व्यापारी या दुकानदार यह खर्च ग्राहकों पर डाल देते हैं, तो क्या होगा? लोकल सर्कल्स के नए सर्वे में इसका बड़ा असर दिख रहा है। सर्वे में 291 जिलों के 67,000 से ज्यादा UPI यूजर्स ने जवाब दिए। ग्राहक क्या करेंगे अगर UPI पर फीस लगे? सर्वे के मुताबिक, अगर व्यापारी UPI पेमेंट पर अलग से फीस जोड़ते हैं, तो…     14 प्रतिशत लोग कहते हैं वे UPI से ही पेमेंट करेंगे और फीस भी देंगे।     27 प्रतिशत लोग कैश से पेमेंट करेंगे।     26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड पर शिफ्ट हो जाएंगे।     14 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड इस्तेमाल करेंगे।     4 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।     नौ प्रतिशत लोग व्यापारी से कोई और ऐसा पेमेंट ऑप्शन मांगेंगे जिस पर अलग चार्ज न हो।     2 प्रतिशत लोग खरीदारी टाल देंगे या करेंगे ही नहीं।     4 प्रतिशत लोग तय नहीं कर पाए कि वे क्या करेंगे। ₹2,000 से ऊपर की खरीद में कौन से पेमेंट मोड का करेंगे इस्तेमाल ? जब लोगों से पूछा गया कि अगर UPI पर अलग चार्ज लगे तो ₹2,000 से ऊपर की खरीद में वे सबसे ज्यादा कौन सा तरीका इस्तेमाल करेंगे तो उनका जवाब कुछ ऐसा रहा..     26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड चुनेंगे।     26 प्रतिशत लोग कैश चुनेंगे।     13 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड चुनेंगे।     11 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।     सिर्फ 20 प्रतिशत लोग UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।     4 प्रतिशत लोग अनिश्चित हैं। यानी LocalCircles का मानना है कि 76 प्रतिशत UPI यूजर्स बड़े पेमेंट के लिए UPI छोड़ सकते हैं, अगर उस पर अतिरिक्त शुल्क लगता है। क्या व्यापारी भी MDR नहीं देना चाहते? सर्वे में व्यापारियों की राय भी सामने आई है। 242 जिलों के 32,000 से ज्यादा व्यापारियों ने ये जवाब दिए…     सिर्फ 17 प्रतिशत व्यापारी ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR देने को तैयार हैं।     41 प्रतिशत व्यापारी कोई भी MDR देने को तैयार नहीं हैं।     9 प्रतिशत व्यापारी UPI ही नहीं लेते।     15 प्रतिशत व्यापारियों ने 0.04 प्रतिशत को अधिकतम सीमा बताया। UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत क्यों गिर सकती है? लोकल सर्कल्स का अनुमान है कि 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने के बाद पहले पूरे महीने में UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत तक घट सकती है। दरअसल, ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट संख्या में बहुत कम हैं। मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 5 प्रतिशत से भी कम, लेकिन वैल्यू के हिसाब से ये करीब 67 प्रतिशत हैं, यानी लगभग ₹6 लाख करोड़ महीना। यह कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब एक-पांचवां हिस्सा है। अनुमान है कि UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 4 प्रतिशत गिर सकती है। इसमें 1 पर्सेंटेज पॉइंट सीधा नुकसान MSME व्यापारियों पर होगा और 3 पर्सेंटेज पॉइंट नेटवर्क इफेक्ट से, क्योंकि लोग उन व्यापारियों के साथ कुल UPI इस्तेमाल भी कम कर सकते हैं। चूंकि 83 प्रतिशत व्यापारी 0.4 प्रतिशत MDR खुद नहीं झेलना चाहते, इसलिए हो सकता है कि वे यह खर्च सरचार्ज, प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाकर, या ग्राहकों को दूसरे पेमेंट मोड की तरफ मोड़कर वसूल करें। अगर ऐसा हुआ, तो 76 प्रतिशत ग्राहक ₹2,000 से ऊपर की खरीद में दूसरा पेमेंट मोड चुन सकते हैं।

पीएम मोदी के विजन को डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा: मुख्यमंत्री

असेंबली से एआई तक: नए उत्तर प्रदेश की नई उड़ान… मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को 'उप्र की प्रगति' से कराया साक्षात्कार सीएम योगी ने 'एक्स' पर किया पोस्ट- जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप व 8 यूनिकॉर्न हैं पीएम मोदी के विजन को डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा: मुख्यमंत्री पूर्ववर्ती सरकार को कटघरे में खड़ा कर सीएम ने लिखा- जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा तकनीक का निर्माता बन रहा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रदेशवासियों को उप्र की प्रगति से  साक्षात्कार कराया। उन्होंने 2017 के बाद प्रदेश की उड़ान को अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया। वहीं पूर्ववर्ती सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा? पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का नहीं किया उपयोग मुख्यमंत्री ने लिखा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का उपयोग नहीं किया, बल्कि इसे 'बीमारू' ही बनाए रखा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का जो विजन दिया, डबल इंजन सरकार ने उसे उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा है। मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही विकास यात्रा मुख्यमंत्री ने बताया कि आज साढ़े 9 वर्ष के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी है। जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही है, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप व8 यूनिकॉर्न हैं। यानी यात्रा मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही है। 2017 से पहले सैफई महोत्सव ही था सांस्कृतिक उत्थान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की तस्वीर भी दिखाई। कहाकि आज के परिदृश्य से अलग पहले सिर्फ घोषणाएं होती थीं, पर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए संघर्ष करती थीं। क्योंकि तब परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था। भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा उप्र मुख्यमंत्री ने बताया कि हमने प्राथमिकता बदली। परिवार के विकास की जगह प्रदेश का विकास, माफिया के संरक्षण की जगह निवेशक का संरक्षण और तुष्टीकरण की जगह टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स बढ़ा तो डेटा सेंटर की आवश्यकता बढ़ी और डेटा बढ़ा तो आज उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर से एआई सिटी तक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा है। तकनीक का निर्माता बन रहा उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने बताया कि एआई-प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम भी युवाओं को नौकरी खोजने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार देने वाला बना रहा है। कभी उत्तर प्रदेश तकनीक का बाजार था, आज उसका निर्माता बन रहा है। असेंबली  से एआई तक यह यात्रा केवल तकनीक की नहीं, हमारे युवाओं के रोजगार, उद्यम और समृद्धि की यात्रा है। 'नए उत्तर प्रदेश' की दिख रही नई उड़ान  सीएम ने बताया कि इसी कड़ी में आज (मंगलवार)  लखनऊ में एचसीएल टेक की स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता करूंगा। इस अवसर पर HCL GUVI Emerging Tech Skilling Centre का शुभारंभ भी होगा। 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प के साथ यही 'नए उत्तर प्रदेश' की नई उड़ान है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार; 2 महीने की राशि जारी

योगी सरकार में 1.28 लाख शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय का लाभ, सितंबर-अक्टूबर के लिए ₹460.23 करोड़ जारी – ₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार प्रतिमाह हुआ मानदेय, बढ़ी दर पर सितंबर-अक्टूबर के लिए धनराशि जारी – शैक्षिक सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ – प्रत्येक माह ₹230.11 करोड़, दो माह के लिए कुल ₹460.23 करोड़ का प्रावधान – जनपदवार आवंटित धनराशि के अनुसार मानदेय भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत शिक्षामित्रों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया है। ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹18 हजार प्रतिमाह किए गए मानदेय की बढ़ी दर पर शैक्षिक सत्र 2026-27 में कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों के सितंबर और अक्टूबर माह के मानदेय के लिए ₹460.23 करोड़ की धनराशि जारी की गई है। दोनों माह के मानदेय भुगतान के लिए जनपदवार धनराशि निर्धारित की गई है। सितंबर के मानदेय के लिए ₹230.11 करोड़ तथा अक्टूबर के लिए भी ₹230.11 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई है। इस प्रकार दोनों माह के लिए कुल ₹460.23 करोड़ का प्रावधान किया गया है। संबंधित जनपदों को निर्धारित आवंटन के अनुसार भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  प्रदेश के लगभग 1.28 लाख शिक्षामित्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। शैक्षिक सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों के लिए सितंबर और अक्टूबर के मानदेय का जनपदवार आवंटन किया गया है। इसके माध्यम से बढ़ी हुई दर पर मानदेय भुगतान की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी। मानदेय में 80 प्रतिशत की वृद्धि योगी सरकार द्वारा समग्र शिक्षा के अंतर्गत शिक्षामित्रों के मानदेय में ₹8 हजार प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। इससे मानदेय ₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार प्रतिमाह हो गया है, यानी इसमें 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़ी दर से मानदेय मिलने से शिक्षामित्रों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा। “योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि कर उनके आर्थिक हितों को मजबूती दी है। बढ़े मानदेय के साथ सितंबर और अक्टूबर के लिए ₹460.23 करोड़ की धनराशि जारी होना शिक्षामित्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।” संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा “मानदेय में वृद्धि से शिक्षामित्रों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा। इससे वे और अधिक उत्साह एवं प्रतिबद्धता के साथ विद्यालयों में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को सशक्त बनाने में योगदान दे सकेंगे।” मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा