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मुख्यमंत्री डॉ. यादव देंगे छिंदवाड़ा और पांढुर्णा को नए विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव छिंदवाड़ा और पांढुर्णा को देंगे विकास कार्यों की सौगात गुरूवार को करोड़ों की लागत वाले विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमि-पूजन संबल और पेंशन के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक से राशि अंतरित करेंगे छिंदवाड़ा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को छिंदवाड़ा और नये जिले पांढुर्णा को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोनों जिलों में विकास को और अधिक गति देने के लिये विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 26 मार्च 2026 को पुलिस ग्राउंड, छिंदवाड़ा में जनसभा को संबोधित करेंगे। वे 506.29 करोड़ की लागत के 105 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर जिले को विकास की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में प्रदेश के संबल और पेंशन योजना के हितग्राहियों को आर्थिक सहायता राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण भी करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव चौरई के सिहोरा माल में आयोजित सहस्त्र कुंडीय यज्ञ में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नये जिले पांढुर्णा में गुरूवार को 362.80 करोड़ रूपये के 67 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। यह पहल जिले के समग्र विकास को नई गति प्रदान करते हुए आधारभूत संरचना को सुदृढ़ बनाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 34 विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे, जिनकी कुल लागत 111.63 करोड़ रूपये है। इन कार्यों से विभिन्न विभागों की अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी और आमजन को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण) का 30.5 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित पांढुर्णा फ्लाईओवर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो शहर के यातायात को सुगम बनाते हुए आवागमन में लगने वाले समय को कम करेगा तथा व्यापारिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 33 नवीन विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी करेंगे। इनकी कुल लागत 251.17 करोड़ रूपये है। इन परियोजनाओं में म.प्र. भवन विकास निगम के 3 महत्वपूर्ण कार्य (₹69.49 करोड़) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिनमें कलेक्टर कार्यालय, जिला चिकित्सालय एवं एसपी ऑफिस शामिल हैं। ये संस्थान जिले की प्रशासनिक, स्वास्थ्य एवं कानून-व्यवस्था की व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री राम नवमी पर हनुमान जन्मोत्सव 2026 का शुभारंभ करने जामसांवली धाम पधारेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव जामसांवली धाम में म.प्र. पर्यटन विभाग द्वारा विकसित हनुमान लोक परियोजना तथा मंदिर संस्थान द्वारा निर्मित नवनिर्मित विशाल सभामंडप का लोकार्पण कर हनुमान जन्मोत्सव 2026 का शुभारंभ करेंगे। हनुमान लोक परियोजना केवल मंदिर परिसर का विस्तार नहीं है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और पौराणिक परंपराओं के समन्वय का एक जीवंत उदाहरण है। लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहा यह कॉरिडोर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। जामसांवली धाम भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसमें आस्था के साथ जनभागीदारी और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का व्यापक समावेश है।  

सिंहस्थ-2028 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सिंहस्थ-2028 को विश्व-स्तरीय आयोजन बनाने के लिये सरकार संकल्पबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बनायेंगे "समृद्ध मध्यप्रदेश, विकसित मध्यप्रदेश" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन आकाशवाणी से दिया संदेश संदेश का प्रसारण प्रदेश के सभी 17 केन्द्रों से हुआ एक करोड़ से अधिक नागरिकों ने सुना संदेश उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  अपने जन्म-दिन पर आकाशवाणी उज्जैन से संदेश देते हुए सिंहस्थ-2028 को विश्व-स्तरीय आयोजन के साथ भव्य और अद्वितीय बनाने की सरकार की संकल्पबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार समृद्ध और विकसित मध्यप्रदेश बनाने के लिये प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के आकाशवाणी केंद्र से आप सभी के साथ जुड़ते हुए मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश आज विकास के उस सोपान पर है, जहाँ हमारी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रगति एक साथ कदमताल कर रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता और पराक्रम से प्रेरणा लेकर मध्‍यप्रदेश सरकार सुशासन के नए आयाम स्‍थापि‍त कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश प्रदेश के सभी 17 केन्द्रों से प्रसारित किया गया। संदेश को एक करोड़ से अधिक नागरिकों ने सुना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि हमारी सरकार सांस्‍कृतिक वैभव को साथ लेकर विकास के नए मापदंड स्‍थापित कर रही है। सनातन संस्‍कृति के वैभव को वैश्विक पटल पर नई उंचाईयां प्रदान करने के लिए सरकार सिंहस्थ-2028 को एक "विश्व स्तरीय आयोजन" बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। भारतीय संस्‍कृति में नदियों को माँ का स्‍थान दिया गया है। यह हमारी सभ्यता की जीवनरेखा हैं। क्षिप्रा नदी को निर्मल, प्रवाहमान बनाकर रिवर फ्रंट विकसित करने, केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं से जल संकट को जड़ से समाप्‍त करने के लिये सरकार हजारो करोड़ रुपयों की परियोजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान भाई प्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था की नींव है। मध्‍यप्रदेश वर्ष 2026 को किसान कल्‍याण वर्ष के रूप में मनाकर प्रत्‍येक खेत तक आधुनिक सिंचाई और कृषि यांत्रिकरण की सुविधा पहुंचाकर किसानों की आय में वृद्धि के लिए दृढ़ संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की उपस्थिति में ग्‍लोबल इनवेस्‍टर्स समिट, संभागीय स्‍तर पर स्‍थानीय इनवेस्‍टर्स समिट कर प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को प्रोत्‍साहन देकर हम 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' की नींव रख रहे हैं। उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी सहित प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के माध्यम से युवा शक्ति को स्टार्ट-अप और स्व-रोजगार के माध्यम से हम युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बना रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में मुझे गर्व है कि मध्यप्रदेश ने नई शिक्षा नीति (NEP) को देश में सबसे पहले लागू कर हमारे विद्यार्थियों के लिए वैश्विक द्वार खोले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार अंत्योदय के सिद्धांत पर चल कर वनवासी कल्‍याण और सामाजिक न्‍याय के लिए प्रतिबद्ध है। वनवासी भाइयों के संस्‍कृतिक संरक्षण के लिए सरकार भगोरिया को राजकीय पर्व और लोक उत्‍सव के रुप में नई पहचान प्रदान कर रही है। वन मेले प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में आयोजित कर वनोपज को बाजार और वनवासी भाईयों को आय के नवीन अवसर प्रदान कर रहें है। नक्सलवाद के विरुद्ध हमारी 'जीरो टॉलरेंस' नीति है, मध्यप्रदेश की धरती पर अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के बहुआयामी विकास के लिए प्रदेश में प्रकृति संरक्षण और इको-पर्यटन पर विशेष ध्‍यान दिया जा रहा है। प्रकृति संरक्षण में मध्यप्रदेश अग्रणी है। प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट, नौरादेही अभ्‍यारण्य का विस्तार, मगरमच्छ व कछुआ संरक्षण के कार्यों ने प्रदेश को 'इको-टूरिज्म' का वैश्विक केंद्र बना दिया है। पर्यटन के विकास से हम स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर सृजित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'लाड़ली बहनों' से लेकर स्व-सहायता समूहों तक, महिला सशक्तिकरण हमारी हर योजना के केंद्र में है। साथ ही, हम इंदौर, उज्‍जैन, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे नगरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित कर रहे हैं, जिससे शहरी जीवन सुगम और आधुनिक बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित और समृद्ध मध्यप्रदेश के लिये यह विकास यात्रा मेरे अकेले की नहीं है। इसमें मेरे कैबिनेट के सहयोगियों का समर्पण और आप सभी का विश्वास शामिल है। हम मिलकर एक ऐसा मध्यप्रदेश बनाएंगे जो वैभवशाली और समृद्धशाली होगा।  

उज्जयिनी आस्था से बढ़कर, अब उत्कर्ष की दिशा में आगे बढ़ेगा उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जयिनी आस्था से आगे अब बनेगी उत्कर्ष की नगरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेडिसिटी से बनेगी नई पहचान उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पुराकाल से धर्म और संस्कृति की राजधानी रही उज्जयिनी अब विकास के नए आयाम गढ़ रही है। उज्जयिनी अब केवल श्रद्धा और आध्यात्म का ही केंद्र नही, उत्कर्ष, आधुनिकता और समग्र विकास की नगरी बनने की ओर अग्रसर है। हम उज्जैन को स्वास्थ्य उपचार, अधोसंरचना विकास और सांस्कृतिक वैभव के संगम के रूप में विकसित करने के लिए संकल्पित प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को कालिदास अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने उज्जैन जिले में आयोजित नि:शुल्क जांच एवं उपचार शिविर के समापन समारोह में सहभागिता कर उज्जैन के समग्र विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं बताईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन में प्रस्तावित मेडिसिटी परियोजना शहर की पहचान को नई दिशा देगी। अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त यह मेडिसिटी न केवल उज्जैन बल्कि पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेगी। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सभी प्रकार के विकास कार्यों को तेज़ी से पूरा किया जा रहा है। उज्जैन की सभी दिशाओं में जरूरत के अनुसार 8 लेन, 6 लेन और 4 लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। पेयजल, स्वच्छता, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और सुव्यवस्थित अनुभव मिल सके। उज्जैन में हुए नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस प्रकार के नवाचार समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। सरकार जनकल्याण के ऐसे प्रयासों को निरंतर बढ़ावा देगी। हम इसे व्यापक स्तर पर लागू करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उज्जयिनी अब विकास, स्वास्थ्य, आध्यात्म और आधुनिकता का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हृदय जांच अभियान के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद हार्ट अटैक की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इन पीड़ितों में 15 से लेकर 30 साल की आयु के लोग अधिक हैं। सबसे अधिक मौतें हार्ट अटैक से हो रही है, यह आंकड़े अत्यंत कष्टकारी एवं सचेत करने वाले हैं। इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए इंदौर, उज्जैन और आसपास के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एक साथ आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान में लगीं उज्जैन जिले की करीब 5000 आशा कार्यकर्ताओं को 2-2 हजार की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की और बहनों का आभार मानकर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जन्म दिवस के अवसर पर पहले किसान और अब आम नागरिकों की स्वास्थ्य की चिंता करते हुए सेवा की संकल्प की पूर्ति की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले हृदय की बीमारी होने पर अधिकांश मरीज इलाज के लिए गुजरात जाते थे। लेकिन अब आयुष्मान भारत योजना शुरू होने के बाद उन्हें सही समय पर मध्यप्रदेश में ही उचित इलाज मिल रहा है। हृदय की बीमारियों के संदर्भ में उज्जैन में हुआ यह अभिनव प्रयास बेहद सफल रहा है। आज एक संकल्प की सिद्ध हुई है। उज्जैन जिले की धरती से एक अनोखा मॉडल बना है। अब इसे उज्जैन संभाग के शेष 6 जिलों में भी लागू किया जाएगा। उसके बाद यह अभियान प्रदेश स्तर पर क्रियान्वित होगा। आज हम सभी को यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हृदय संबंधी जांच एवं बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को प्रेरित करें। अगर किसी के साथ आर्थिक तंगी है तो राज्य सरकार मदद के लिए पूरी तरह से साथ खड़ी है। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने भी अपने विचार व्‍यक्‍त किए और मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव को जन्‍म दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में बताया गया कि विगत 02 माह में 104 विभिन्‍न स्‍थानों पर जांच शिविर लगाए गए। इनमें 26 हजार विभिन्‍न प्रकार की जांचें की गईं और 48 लोगों की सफलता पूर्वक बाईपास सर्जरी की गई। कार्यक्रम में संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, रवि सोलंकी, प्रदीप उपाध्याय,राय सिंह सेंधव, सत्यनारायण खोईवाल, पूर्व मंत्री पारस जैन, रूप पमनानी,राजेन्द्र भारती, सम्राट विक्रमादित्य विश्विद्यालय कुलगुरु अर्पण भारद्वाज उपस्थित रहे।  

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर, बस्तर और सरगुजा बने राष्ट्रीय खेल संगम के केंद्र देशभर से 9 खेल विधाओं में 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 2500 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती  एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय आयोजन की आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह खेल महाकुंभ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता सुसाइखोम मीराबाई चानू की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय है कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल में देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में 4 लाख तथा सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति गहरी रुचि है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर इन आयोजनों में सहभागी बने—जो परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार में खेलों को लेकर उत्साह और प्रयास दोनों दोगुने हैं। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत खेल अधोसंरचना निर्माण और प्रतिभाओं के चिन्हांकन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुर और बिलासपुर में खेलो इंडिया के तहत रेजिडेंशियल अकादमियां संचालित हैं, जबकि जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में चयनित खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण जनजातीय नायक शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर किया गया है, जो राज्य के गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं। जनजातीय संस्कृति, इतिहास और गौरव से जुड़ा आयोजन मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, बल्कि यह जनजातीय शौर्य और बलिदान की भूमि भी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह और गुण्डाधुर जैसे नायकों का उल्लेख करते हुए बताया कि नवा रायपुर में उनके सम्मान में म्यूजियम बनाया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने खिलाड़ियों से इस म्यूजियम का अवलोकन करने का आग्रह भी किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक है और आने वाले वर्षों में भी यह श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों ने खेलों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी में अपार क्षमता है और अब खेल प्रतिभाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों से भी उभर रही हैं।  उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान राम के ननिहाल में इस आयोजन का शुभारंभ होना अत्यंत शुभ संयोग है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज ने सदैव देश को वीरता और परिश्रम की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को नई दिशा मिल रही है और ‘ट्राइबल गेम्स’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह आयोजन ऐतिहासिक है और देशभर से आए खिलाड़ियों के स्वागत के लिए पूरा छत्तीसगढ़ उत्साहित है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय प्रतिभाओं को विश्व मंच तक ले जाने का सशक्त माध्यम बनेगा और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मुख्य सचिव विकासशील सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण,  बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

एमपी में पानी की स्थिति में 128 प्रतिशत की वृद्धि, देश में पहले स्थान पर, अमृत सरोवरों के मामले में भी नेतृत्व

भोपाल   मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विगत वर्षों में अभियान के दो चरणों में प्रदेश में 6 हजार 393 अमृत सरोवरों में पहले चरण में 5 हजार 839 अमृत सरोवर बनाए गए हैं। वहीं दूसरे चरण में 554 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। इस प्रकार अभियान के क्र‍ियान्‍वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। मध्यप्रदेश मिशन अमृत सरोवर के तहत देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पहले स्‍थान पर है। इसकी जानकारी आईआईटी दिल्ली और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित भू प्रहरी परियोजना की रिपोर्ट से आई है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में 128 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम स्‍थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य तालाबों के औसत सतह क्षेत्र में वृद्धि के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश में अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में 128.714 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 11.27 प्रतिशत से कहीं अधिक है। AI, सैटेलाइट और LiDAR तकनीक से किया आकलन भारत सरकार ने मध्यप्रदेश में बने अमृत सरोवरों की आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट, SONAR और LiDAR के माध्यम से न केवल तालाबों के औसतन सतह क्षेत्र बल्कि जल की कुल मात्रा (वॉल्यूम) का भी आकलन किया गया। इसमें सामने आया कि मानसून के दौरान जल संचयन क्षमता में सुधार हुआ है और सूखा-प्रवण एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी गर्मियों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। सतह क्षेत्र में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव भूजल पुनर्भरण पर भी पड़ा है, जिससे आसपास के कुओं और ट्यूबवेल का जल स्तर बढ़ा है। साथ ही, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों की आजीविका में सुधार हो रहा है। सिपरी सॉफ्टवेयर से किया चयन मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्‍त अवि प्रसाद ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रदेश में अमृत सरोवरों के निर्माण के लिए स्थानों का चयन वैज्ञानिक पद्धति से किया गया है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया। इसके माध्यम से भूविज्ञान, कंटूर, जल निकासी नेटवर्क, मिट्टी के प्रकार और भूमि का उपयोग जैसे विभिन्न डेटा लेयर्स का एकीकृत विश्लेषण किया गया। इस प्रक्रिया के जरिए ऐसे उपयुक्त स्थानों का चयन किया गया, जहां जल संरक्षण और संचयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह पहल प्रदेश में जल प्रबंधन को वैज्ञानिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

IPL 2026 का सबसे बड़ा सीजन: 84 मैचों का आयोजन, हर टीम खेलेगी 16 मुकाबले, 28 मार्च से शुरुआत

मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का 19वां सीजन इस बार अब तक का सबसे बड़ा और विस्तारित संस्करण होने जा रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआत 28 मार्च से होगी, जबकि फाइनल मुकाबला 31 मई को खेला जाएगा। इस सीजन में कुल 84 मैच खेले जाएंगे, जिसमें 10 टीमें हिस्सा लेंगी और हर टीम 16 मुकाबले खेलेगी। सीजन का उद्घाटन मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन टीम और हैदराबाद की टीम के बीच बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। शुरुआती चरण में 12 अप्रैल तक के 20 मैचों का शेड्यूल जारी किया गया है। अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण पूरा कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से घोषित किया जा रहा है। इस बार लीग का आयोजन देश के 13 अलग-अलग शहरों में किया जाएगा। सात टीमों के पास एक-एक होम ग्राउंड है, जबकि तीन टीमों को दो-दो घरेलू मैदान दिए गए हैं। खास बात यह है कि रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम 13 साल बाद IPL मैच की मेजबानी करेगा, जिसे एक टीम ने सेकेंड होम वेन्यू के रूप में चुना है। फॉर्मेट के लिहाज से इस बार लीग पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी होगी। सभी टीमों को 16-16 मैच खेलने का मौका मिलेगा, जिससे प्लेऑफ की दौड़ और दिलचस्प हो जाएगी। प्लेऑफ मुकाबले मई के अंतिम सप्ताह में खेले जाने की संभावना है, जिसमें क्वालिफायर, एलिमिनेटर और फाइनल शामिल होंगे। इस सीजन में कुछ नए नियम भी लागू किए गए हैं। मैच के दिन किसी भी टीम को नेट प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी और एक टीम दूसरी टीम के प्रैक्टिस एरिया का उपयोग नहीं कर सकेगी। खिलाड़ियों की यात्रा, सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े दिशा-निर्देश भी सख्त किए गए हैं। टीम स्टाफ के लिए आईडी कार्ड अनिवार्य किया गया है, वहीं डगआउट में सीमित लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। ब्रॉडकास्ट और ड्रेस कोड को लेकर भी बदलाव किए गए हैं। खास कैप धारण करने वाले खिलाड़ियों को मैच के दौरान नियमों का पालन करना होगा और पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन में निर्धारित ड्रेस कोड लागू रहेगा। पिछले सीजन में पहली बार खिताब जीतने वाली टीम इस बार डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में मैदान में उतरेगी। वहीं ऑक्शन में विदेशी और घरेलू खिलाड़ियों पर बड़ी बोली लगी, जिससे टीमों का संतुलन और मजबूत हुआ है। IPL 2026 के मुकाबले टीवी पर प्रसारित होंगे, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह सीजन लंबे समय तक रोमांच बनाए रखने वाला साबित हो सकता है। प्लेऑफ कब से होंगे? अभी पूरा शेड्यूल जारी नहीं हुआ है, लेकिन BCCI ने इतनी जानकारी दे दी है कि फाइनल 31 मई को बेंगलुरु में खेला जाएगा। इस हिसाब से 26 मई को पहला क्वालिफायर, 27 मई को एलिमिनेटर और 29 मई को दूसरा क्वालिफायर खेला जा सकता है। कितने ग्राउंड्स पर मैच होंगे IPL 2026 के मुकाबले इस बार भारत के 13 अलग-अलग शहरों में खेले जाएंगे। 10 टीमों में 7 ने 1-1 होमग्रउंड चुना, वहीं बेंगलुरु, पंजाब और राजस्थान के पास 2-2 होमग्राउंड हैं। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में 13 साल बाद कोई IPL मैच खेला जाएगा। RCB ने इसे अपना सेकेंड होम वेन्यू बनाया है। रायपुर स्टेडियम में आखिरी बार 2013 में दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच हुआ था। इस बार क्या नया? मैच वाले दिन प्रैक्टिस नहीं: किसी भी टीम को मैच के दिन नेट प्रैक्टिस करने की परमिशन नहीं होगी। कोई टीम दूसरी टीम के नेट्स का इस्तेमाल नहीं कर सकती। अगर एक टीम जल्दी प्रैक्टिस खत्म कर दे, तो भी दूसरी टीम उस पिच पर नहीं खेल पाएगी। यात्रा और सुरक्षा नियम: खिलाड़ियों को टीम बस से ही सफर करना होगा। परिवार के सदस्यों को केवल हॉस्पिटैलिटी जोन में ही रहने की परमिशन होगी। खिलाड़ी और टीम अनुशासन: सभी स्टाफ मेंबर्स को हर समय अपना आईडी कार्ड साथ रखना होगा। डगआउट और मैदान में बच्चों या बिना परमिशन वाले फैमिली मेंबर्स को लाने की मनाही रहेगी। ब्रॉडकास्ट और ड्रेस कोड: ऑरेंज और पर्पल कैप रखने वाले खिलाड़ियों को मैच के दौरान कैप पहनना ही होगा। अगर फील्डिंग के दौरान कैप उतारने का मन करे तो भी पारी के शुरुआती 2 ओवर कैप पहननी पड़ेगी। पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन के दौरान स्लीवलेस जर्सी नहीं पहन सकेंगे। पिछली चैंपियन कौन? IPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) डिफेंडिंग चैंपियन है। RCB ने पिछले सीजन शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना पहला IPL खिताब जीता था। टीम ने 2025 के फाइनल में पंजाब किंग्स को 6 रन से हराया था। सबसे महंगे खिलाड़ी IPL 2026 के ऑक्शन में ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर कैमरन ग्रीन सबसे महंगे खिलाड़ी रहे, जिन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स ने ₹25.20 करोड़ में खरीदा। वहीं भारतीय अनकैप्ड खिलाड़ियों में प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा को चेन्नई सुपर किंग्स ने 14.20-14.20 करोड़ में अपनी टीम में शामिल किया।

AI स्टार्टअप की बड़ी योजना, 2,347 करोड़ से भारतीय बाजार में खुलेंगे नए रास्ते

 नई दिल्ली भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) स्टार्टअप Sarvam AI मालामाल होने जा रहा है. कंपनी 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,347 करोड़ रुपये) की इनवेस्टमेंट के लिए AI जगत की दिग्गज कंपनियों से बातचीत कर रही है।  सरवम AI अभी एनवीडिया, वेंचर कैपिटल फर्म एसेल, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी HCL Tech के साथ बातचीत कर रही है।  यह बातचीत सफल होती है, तो यह सरवम एआई की ग्रोथ के लिए सकारात्मक साबित होगी. डील पर सहमति बन जाती है तो Sarvam की यह फंडिंग इस साल किसी भारतीय स्टार्टअप के लिए प्राइवेट मार्केट में सबसे बड़ा निवेश राउंड बन सकती है।  Sarvam AI पहले ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है Sarvam AI पहले से ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है. HCLTech को बतौर इनवेस्टर्स के रूप में शामिल करने से आईटी कंपनी को Sarvam की AI काबिलियत का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।  साथ ही Accel जैसा बड़ा वेंचर कैपिटल फंड भारतीय AI स्टार्टअप में इनवेस्टमेंट करता है तो सरवम AI दुनिया के दूसरे देशों में भी अपनी पहुंच बना सकेगा।  Sarvam AI क्या है?  Sarvam AI, असल में एक बेंगलुरु बेस्ड AI स्टार्टअप है. हाल ही में उसके दो टूल्स चर्चा में रहे हैं, जिनके नाम Sarvam Vision और Bulbul हैं. हाल ही में इन भारतीय AI मॉडल ने बड़े प्लेयर्स को पछाड़ चुका है.  Sarvam Vision AI ने ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) में सबसे शानदार परफॉर्म किया था।  एक बेंचमार्क पर देसी AI ने चैटजीपीटी, गूगल जेमिनाई और Anthropic Claude जैसे बड़े और पॉपुलर AI मॉडल्स को पछाड़ दिया दिया था. इसकी जानकारी Sarvam AI के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार दे चुके हैं. को-फाउंडर ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी थी। 

2029 में लागू होगा महिला आरक्षण, 50% सीटें बढ़ाने की योजना हुई तैयार

नई दिल्ली बीजेपी सरकार 2034 के बजाय, देश में महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से लागू करने के बारे में सोच रही है. केंद्र (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लाने पर विचार-विमर्श जारी है।  इंडिया टुडे/आज तक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीटों में बढ़ोतरी के लिए 50% 'स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला' प्रस्तावित है. गृह मंत्री अमित शाह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने की प्रक्रियाओं को पारित कराने के लिए पार्टियों के छोटे समूहों के साथ बैठकें कर रहे हैं।  23 मार्च को, गृह मंत्री ने NCP-SP, शिवसेना (UBT), AIMIM और YSRCP के सदस्यों के साथ बैठक की. BRS आखिरी समय में सूचना मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकी।  सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी उन सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने गृह मंत्री के साथ बैठक में भाग लिया. सरकार तीन बड़े संशोधन की तैयारी में है. सरकार की राय है कि 2034 की समय सीमा के बजाय, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए।  सदस्यों को बताया गया कि केंद्र को 2027 तक जनगणना पूरी होने की उम्मीद थी. इससे 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाती और दूसरी प्रक्रियाएं उसके बाद होतीं. हालांकि, अब 2011 की जनगणना को आधार माना जा सकता है।   50% सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार! इसके तहत 50% स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला, महिलाओं के लिए वर्टिकल आरक्षण हो. अहम बात ये है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है. इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50% का इजाफा हो सकता है और संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी। महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या (लगभग 813/814) में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इन 33% आरक्षित सीटों के भीतर एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा।  संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यूबीटी, एनसीपी-एसपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों के सदस्यों को सूचित किया गया कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है. पिछले परिसीमन के 25 साल पूरे होने के बाद, सीटों के परिसीमन (और पुनरीक्षण) की प्रक्रिया शुरू की जानी थी।  2029 में लागू हो सकता है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लोकसभा और विधानसभा के लिए परिसीमन प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा सकती है. बैठक में शामिल सदस्यों ने राज्यों पर प्रभाव, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के मानदंडों के संबंध में कई सवाल उठाए. सूत्रों ने बताया कि एनसीपी-एसपी ने पूछा कि क्या ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में भी लागू किए जाएंगे? कहा जा रहा है कि वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के इजाफे के बारे में इन बदलावों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम ने उस फॉर्मूले पर चिंता जाहिर की जिसका इस्तेमाल नए निर्वाचन क्षेत्रों को बनाने के लिए किया जा सकता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां आदिवासी, एससी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है।  दक्षिण भारत का परिसीमन पर ऐतराज दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों को जनसंख्या से जुड़े लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन पर कड़ा ऐतराज रहा है. डीएमके, टीडीपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों की राय है कि केंद्र सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बेहतर तरीके से लागू करने के लिए दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं दी जानी चाहिए।  इसके अलावा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने 2026 के जनसंख्या आधारित परिसीमन योजनाओं का विरोध करने के लिए JAC (संयुक्त कार्रवाई समिति) मंच बनाया था. सीएम स्टालिन ने इस पर विचार-विमर्श के लिए पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित गैर-बीजेपी हितधारकों को बुलाया था।  महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों में 50 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी का फॉर्मूला और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया इन चिंताओं को कम कर सकती है. दक्षिण के राज्यों के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर ये जनसंख्या से जुड़ा नहीं है, तो दक्षिण के राज्यों और क्षेत्रीय दलों को परिसीमन का विरोध नहीं करना चाहिए. वरना आपने हमें बेहतर परिवार नियोजन के लिए सजा नहीं दी होती. हालांकि, परिसीमन फॉर्मूले के लागू होने से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।   

नक्सल लीडर का जाल: एक छिपा, दूसरा फरार, कई ने सरेंडर किया, बस अंतिम चोट बाकी

  बस्तर छत्तीसगढ़ में बस्तर के घने जंगलों से इस समय जो खबरें सामने आ रही हैं, वे नक्सल आंदोलन के इतिहास में निर्णायक मोड़ का संकेत दे रही हैं. वर्षों तक सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने शीर्ष नक्सली नेताओं का नेटवर्क अब तेजी से कमजोर पड़ता दिख रहा है. ताजा घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन के भीतर दबाव बढ़ चुका है और नेतृत्व स्तर पर अस्थिरता साफ दिखाई दे रही है।  सूत्रों के अनुसार, नक्सल आंदोलन का बड़ा चेहरा माने जाने वाले गणपति के बारे में देश छोड़कर नेपाल में भागने  की ख़बर है, जबकि उसका करीबी सहयोगी मिशिर झारखंड में छिपा हुआ बताया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन दोनों तक पहुंच बनते ही नक्सल संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका लगेगा. इसी दिशा में केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियां समन्वित रणनीति के साथ लगातार अभियान चला रही हैं।  इसी बीच बस्तर से एक और बड़ी खबर सामने आई है. लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली नक्सली कमांडर पापा राव बुधवार को अपने 18 साथियों के साथ सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर रहा है. यह घटनाक्रम केवल औपचारिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि नक्सल आंदोलन के कमजोर पड़ते मनोबल का स्पष्ट संकेत है. वर्षों तक संगठन में सक्रिय रहे पापा राव पर कई गंभीर मामलों में संलिप्तता रही और वह सुरक्षाबलों की वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। सुरक्षा बलों की रणनीति में बदलाव पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब केवल मुठभेड़ों पर निर्भर रहने के बजाय खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया. स्थानीय लोगों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसका परिणाम यह हुआ कि संगठन के भीतर दरारें उभरने लगी हैं. कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल के समय में सैकड़ों नक्सली मारे गए हैं. हजारों ने आत्मसमर्पण किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि नक्सल संगठन की ताकत लगातार घट रही है. अब स्थिति यह है कि शीर्ष स्तर के नेता भी खुद को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं।  एक समय था जब दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिले नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे. अब इन क्षेत्रों में विकास कार्यों ने नई तस्वीर पेश की है. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने से स्थानीय युवाओं का रुझान हिंसा से हटकर मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है।  क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट? विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के पीछे दो मुख्य कारण हैं- सुरक्षाबलों की सटीक और निरंतर कार्रवाई, सरकार की पुनर्वास और विकास आधारित नीतियां. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई शुरुआत का अवसर देने की पहल ने भी इस दिशा में सकारात्मक प्रभाव डाला है।  हालांकि, यह भी सच है कि नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. अभी भी कुछ दूरदराज के इलाकों में इसकी उपस्थिति बनी हुई है. लेकिन जिस तरह से शीर्ष नेतृत्व बिखर रहा है और कैडर टूट रहा है, उससे यह संकेत स्पष्ट है कि संगठन अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है।  सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इस मौके को निर्णायक सफलता में बदला जाए. इसके लिए खुफिया तंत्र को और मजबूत करना, स्थानीय जनता का विश्वास बनाए रखना और विकास कार्यों की गति को लगातार बनाए रखना आवश्यक होगा।  बस्तर से लेकर झारखंड तक के हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है. यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो निकट भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।  फिलहाल, पापा राव का आज अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण और गणपति-मिशिर जैसे शीर्ष नेताओं की तलाश ने पूरे नक्सल नेटवर्क में हलचल मचा दी है. आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होंगे।  नक्सल नेतृत्व तेजी से खत्म देश में चल रहे नक्सल विरोधी ऑपरेशन के चलते अब नक्सली संगठन का टॉप नेतृत्व तेजी से खत्म हो रहा है. सुरक्षा एजेंसियों के ऑपरेशन में कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए हैं. कई बड़े नेता सरेंडर भी कर चुके हैं. स्थिति यह है कि अब कई इलाकों में नक्सलियों के बड़े नेता ही नहीं बचे हैं।  सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के 11 सदस्य मारे गए, जो संगठन के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. यह नक्सल संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।  ये टॉप नक्सली कमांडर ढेर सुरक्षा बलों की  रिपोर्ट के अनुसार जिन बड़े नक्सली नेताओं को ऑपरेशन में मारा गया, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं: सुधाकर हिडमा दामोदर विकास सुदर्शन अनिल रवि मोहन रमेश शंकर अन्य सेंट्रल कमेटी सदस्य (इनमें कई सेंट्रल कमेटी और स्टेट कमेटी स्तर के नेता शामिल थे) गिरफ्तार और सरेंडर रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 463 नक्सली मारे गए हैं. 1600 गिरफ्तार किए जा चुके हैं और करीब 2500 ने सरेंडर किया है. ये आंकड़े बताते हैं कि संगठन कमजोर हो रहा है।  बड़े नक्सलियों का सरेंडर 2025-26 में कई बड़े नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें प्रमुख हैं- पापा राव आज 18 नक्सलियों के साथ  सरेंडर कर रहा (बड़ा नक्सली कमांडर) है. इसके अलावा, कई स्टेट कमेटी, एरिया कमेटी और डिविजनल कमांडर स्तर के नक्सली सरेंडर कर चुके हैं. इनमें  टॉप 5 बड़े नक्सली नेता शामिल हैं।  सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में अब बड़े नक्सली लीडर नहीं बचे. कांकेर-बीजापुर में भी कई एरिया कमेटी खत्म किए जा चुके हैं. बड़े नेता नेपाल और झारखंड भाग रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जल्द ही नक्सल नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 31 मार्च 2026 तक की गई है, जिसका मात्र 6 दिन बचा हुआ है।   

6th जेनरेशन वॉरफेयर: F-35 और Su-57 जैसे जेट चक्रव्‍यूह में उलझेंगे, भारत का नई रणनीति का खुलासा

बेंगलुरु  डिफेंस टेक्‍नोलॉजी में लगातार नए बदलाव आ रहे हैं. जो देश खुद को इसके अनुरूप नहीं ढाल पा रहे हैं, उनकी नेशनल सिक्‍योरिटी पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. ईरान और अफगानिस्‍तान पर किए गए हमले इसके ताजा उदाहरण हैं. अमेरिका और इजरायल की तुलना में ईरान की डिफेंस टेक्‍नोलॉजी कमजोर है. यही वजह है कि एयर स्‍ट्राइक में ईरान को व्‍यापक नुकसान उठाना पड़ा है. तेहरान के फर्स्‍ट लाइन टॉप लीडरशिप का तकरीबन खात्‍मा हो चुका है. दूसरी तरफ, ईरानी अटैक में अमेरिका और इजरायल को भी व्‍यापक नुकसान हुआ है. THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के होते हुए भी ईरान ने गहरे जख्‍म दिए हैं. वहीं, अफगानिस्‍तान पर पाकिस्‍तान की ओर से किए गए अटैक में भारी नुकसान हुआ है. बता दें कि काबुल के पास डिफेंसिव और ऑफेंसिव फायर पावर की बेहद कमी है. इन दोनों वॉर सिनेरियो से एक बात साबित होती है- एयर पावर और डिफेंस सिस्‍टम को और मजबूत करने की जरूरत है. भारत इसको बखूबी समझता है. यही वजह है कि 5th और 6th जेनरेशन की टेक्‍नोलॉजी में महारात हासिल करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. भारतीय वैज्ञानिक अब 6th जेनरेशन वॉरफेयर को लेकर नए प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं. प्रोजेक्‍ट के सफल रहने पर पांचवीं पीढ़ी के F-35 और Su-57 जैसे सुपर फाइटर जेट आसमानी चक्रव्‍यूह में उलझ कर रह जाएंगे. साथ ही दक्षिण एशिया का पावर बैलेंस भी भारत की तरफ झुक जाएगा. दरअसल, भारत ने छठी पीढ़ी के हवाई युद्ध की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंटीग्रेटेड इंडियन कॉम्बैट एरियल सिस्टम (I²CAS) के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय वायुसेना के भविष्य के कॉम्‍बैट इंफ्रास्‍ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने की दिशा में अहम मानी जा रही है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2040 के दशक के मध्य तक एक अत्याधुनिक, नेटवर्क सेंट्रिक सिस्टम ऑफ सिस्टम्स तैयार करना है, जिसमें मानव चालित लड़ाकू विमान, ऑटोनोमस ड्रोन और एडवांस डिजिटल कॉम्‍बैट नेटवर्क एक साथ काम करेंगे. I²CAS का कॉन्‍सेप्‍ट कन्‍वेंशनल एयर कॉनफ्लिक्‍ट से अलग है, जहां अब सिंगल फाइटर जेट को स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है. इस ढांचे में प्रत्येक विमान एक कमांड नोड के रूप में काम करेगा, जो एक साथ कई ड्रोन, सेंसर और वेपन सिस्‍टम्‍स को कंट्रोल कर सकेगा. यह पहल वैश्विक स्तर पर चल रहे छठी पीढ़ी के कार्यक्रमों जैसे Future Combat Air System (FCAS) और Global Combat Air Programme (GCAP) के समान है. इन कार्यक्रमों में भी AI, ड्रोन और हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क को इंटीग्रेट करने पर जोर दिया जा रहा है. क्‍या है I²CAS? I²CAS के केंद्र में एक मानव चालित स्टील्थ फाइटर होगा, जो मदरशिप के रूप में कामय करेगा और कई मानव रहित प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करेगा. भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) के इस सिस्टम की रीढ़ बनने की उम्मीद है. इसके उन्नत संस्करण जैसे AMCA Mk2 और संभावित छठी पीढ़ी के मॉडल, युद्धक्षेत्र में कमांड और कंट्रोल हब की भूमिका निभा सकेंगे. इस ढांचे में पायलट की भूमिका भी बदल जाएगी. वह केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैटल मैनेजर के रूप में काम करेगा, जो रियल-टाइम में ड्रोन, सेंसर और स्ट्राइक एसेट्स को ऑपरेट करेगा. I²CAS का एक महत्वपूर्ण स्तंभ लॉयल विंगमैन ड्रोन और मानव रहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) होंगे. इस दिशा में भारत पहले ही कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. HAL CATS Warrior, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (CATS) का हिस्सा है, जिसे मानव चालित विमानों के साथ उड़ान भरने और सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉर इक्विपमेंट या हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसी तरह DRDO Ghatak UCAV एक स्टील्थ फ्लाइंग-विंग यूसीएवी है, जिसे गहराई में जाकर सटीक हमले करने के लिए विकसित किया जा रहा है. इसकी कम रडार विजिबिलिटी इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से बचने में मदद करेगी. कॉम्‍बैट क्‍लाउड क्‍यों है गेमचेंजर? I²CAS का एक और महत्वपूर्ण पहलू कॉम्बैट क्लाउड है, जो एक सुरक्षित और AI बेस्‍ड डिजिटल नेटवर्क होगा. यह नेटवर्क विमान, ड्रोन, सैटेलाइट और कमांड सेंटर को जोड़कर एक साझा युद्धक्षेत्र सूचना प्रणाली तैयार करेगा. इसके माध्यम से सभी प्लेटफॉर्म रियल टाइम में डेटा साझा कर सकेंगे, जिससे लक्ष्य की पहचान और हमले की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.उदाहरण के तौर पर यदि कोई स्टील्थ ड्रोन दुश्मन के रडार को पहचानता है, तो वह जानकारी कॉम्बैट क्लाउड के जरिए दूर मौजूद फाइटर जेट तक पहुंचा सकता है, जिससे वह बिना खुद को खतरे में डाले हमला कर सके. क्‍या है फ्यूचर प्‍लान? भविष्य में I²CAS में कई उन्नत तकनीकों को शामिल किए जाने की योजना है. इनमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन जैसे एयरबोर्न लेजर सिस्टम शामिल हैं, जिनका उपयोग मिसाइल डिफेंस और ड्रोन इंटरसेप्शन में किया जा सकता है. इसके अलावा ड्रोन स्वार्म तकनीक भी विकसित की जा रही है, जिसमें कई छोटे ड्रोन मिलकर दुश्मन की सुरक्षा प्रणाली को भेद सकते हैं. इसके साथ ही एडैप्टिव इलेक्ट्रॉनिक कैमोफ्लाज तकनीक पर भी काम चल रहा है, जो विमान की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नेचर को बदलकर उसे रडार से बचाने में सक्षम बनाएगी. यह तकनीक भविष्य के युद्धक्षेत्र में विमान की जीवित रहने की क्षमता को काफी बढ़ा सकती है. हालांकि, भारत इस परियोजना को स्वदेशी रूप से विकसित करने पर जोर दे रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विकल्प भी खुले रखे गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन, सेंसर और नेटवर्किंग तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी से इस कार्यक्रम को गति मिल सकती है. I²CAS भारत की रक्षा रणनीति में एक दीर्घकालिक परिवर्तन का संकेत है, जो देश को भविष्य के नेटवर्क सेंट्रिक और कटिंग एज टेक्‍नोलॉजिकल वॉरगेम के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.