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मालवा-निमाड़ बना सियासी केंद्र, आदिवासियों के बीच आधार मजबूत करने में जुटी भाजपा

भोपाल आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट की बैठक कर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह आदिवासियों में पार्टी के आधार को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मालवा- निमाड़ से इसकी शुरुआत कर यह भी बता दिया है कि इसके केंद्र में मालवा- निमाड़ अंचल रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट को मंत्रालय के बंद कमरों से निकालकर सीधे आदिवासी अंचल और खेतों के बीच ले जाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण और किसान मतदाता हैं। बैठक के अलावा आदिवासियों की आस्था के केंद्र भीलट देव मंदिर में कैबिनेट के सदस्यों द्वारा माथा टेकना इस समुदाय को भावनात्मक रूप से पार्टी से जोड़ने का प्रयास भी रहा। बता दें, आदिवासी मतदाताओं के झुकाव से ही मध्य प्रदेश में सरकार बनती है। इन दिनों नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासियों को साधने के लिए निरंतर प्रवास कर रहे हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और एक सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) का विधायक है। इस संख्या को देखते हुए भी भाजपा को यहां विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। मिशन-2028 की तैयारी  भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 की तैयारी नागलवाड़ी में कैबिनेट कर आरंभ कर दी है। उसका पहला लक्ष्य आदिवासी वर्ग का भरोसा जीतना है। दरअसल, वर्ष 2013 तक भाजपा के पास प्रदेश की कुल 47 एसटी आरक्षित सीटों में से दो- तिहाई सीटें हुआ करती थी लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जनाधार खिसक गया था। खासतौर से आदिवासी वर्ग ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस कारण प्रदेश में कमल नाथ सरकार बन गई थी। वर्ष 2018 में राज्य की 47 एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटों पर कब्जा किया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में यह भाजपा के लिए 15 सीटों का बड़ा नुकसान था। हालांकि भाजपा को कुल वोट शेयर (41.6%) कांग्रेस (41.5%) से थोड़ा अधिक मिला था, लेकिन आदिवासी अंचल में सीटों के नुकसान ने उसे बहुमत से दूर कर दिया। वर्ष 2018 के झटके के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली, जिसके परिणाम 2023 के चुनावों में दिखे। पार्टी ने एसटी सीटों पर अपनी संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर ली। यही कारण है कि नागलवाड़ी जैसी बैठकें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी सुधारात्मक रणनीति का हिस्सा हैं। 'प्रयोगधर्मी' नेता की पहचान बना रहे डॉ. मोहन यादव नागलवाड़ी में आयोजित बैठक को 'कृषि कैबिनेट' नाम भी दिया गया। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक छवि में सुधार और मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। कैबिनेट को सुदूर गांव तक ले जाना डॉ. मोहन यादव को एक इनोवेटिव और 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करता है। यह छवि उन्हें पिछली सरकारों के पारंपरिक ढर्रे से अलग करती है। मुख्यमंत्री का आदिवासी अंचल में जाकर उन्हीं के बीच बैठना और भीलट देव जैसे स्थानीय लोक-देवताओं को सम्मान देना, उन्हें आदिवासियों के बीच 'अपना व्यक्ति' के रूप में प्रस्तुत करता है। यह छवि 2018 के 'आदिवासी विरोधी यानी एंटी-ट्राइबल' नैरेटिव को काटने में मददगार होगी। एक ही बैठक में 27,746 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्तावों को मंजूरी देना उन्हें एक अच्छा प्रशासक के रूप में प्रस्तुत करता है। इससे यह संदेश जाता है कि वह केवल घोषणाएं नहीं करते, बल्कि बजट का प्रविधान भी साथ रखते हैं। भाजपा की मौजूदा सक्रियता बताती है कि वह 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के महत्व को समझ चुकी है और इसे लेकर वर्ष 2028 में किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहती।  

मोहन सरकार की आदिवासी वोटरों पर नजर, बड़वानी बैठक से निकाय चुनाव की रणनीति का इशारा

भोपाल  सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है।  47 विस सीटें एसटी के लिए आरक्षित प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा–निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।  22% आबादी, 84 सीटों पर असर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है।  2023 में कांग्रेस ने दिखाई मजबूती  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा–निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद  उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की।  आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित प्रदेश की सीटों का गणित  – 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली।  – 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।  – 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की।  2027 में सेमीफाइनल और 2028 में फाइनल बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा।  आदिवासी किसानों को आखिर क्या मिला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार ने 'कृषक कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली "कृषि कैबिनेट" की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाए लाई जाएंगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला?   

डिजिटल प्लेटफॉर्म से गांव तक हुई पहुंच, खेती में बढ़ रही पेशेवर मार्गदर्शन की भूमिका

156 एग्री स्टार्टअप्स से प्रदेश के किसानों को मिल रही मदद, खेती में बढ़ रहा लाभ डिजिटल प्लेटफॉर्म से गांव तक हुई पहुंच, खेती में बढ़ रही पेशेवर मार्गदर्शन की भूमिका स्टार्टअप इकोसिस्टम से युवाओं को अवसर, ग्रामीण रोजगार को मिल रही मजबूती नीतिगत समर्थन और निवेश से यूपी बन सकता है एग्री इनोवेशन का उभरता हब लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और संस्थागत समर्थन से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में 156 पंजीकृत कृषि स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो किसानों को क्रेडिट सुविधा, सलाहकार सेवाएं और डिजिटल समाधान उपलब्ध करा रहे हैं। इन पहलों से योगी सरकार में खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार हुआ है। प्रदेश सरकार ने कृषि को परंपरागत ढांचे से बाहर निकालकर तकनीक आधारित मॉडल से जोड़ने पर जोर दिया है। स्टार्टअप्स के माध्यम से किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने, फसल प्रबंधन संबंधी परामर्श देने और बाजार से सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिल रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की निर्भरता पारंपरिक साहूकारी व्यवस्था पर कम हुई है तथा उन्हें पारदर्शी वित्तीय सेवाएं मिल रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना की पहुंच को आसान बनाया है। मौसम पूर्वानुमान, फसल चयन, बीज और उर्वरक संबंधी सलाह अब मोबाइल एप और कॉल सेंटर के माध्यम से उपलब्ध हो रही है। इससे उत्पादन लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि की संभावना बढ़ी है। प्रदेश सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित हस्तक्षेप से कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी। सरकार की स्टार्टअप नीति, निवेश प्रोत्साहन और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को कृषि उद्यमिता की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं और कृषि को आधुनिक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी कदम आगे बढ़े हैं। आने वाले वर्षों में प्रदेश को एग्री इनोवेशन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर कार्य जारी है। कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि क्रेडिट, बाजार संपर्क और तकनीकी परामर्श की यह श्रृंखला मजबूत होती रही तो उत्तर प्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने, कृषि जोखिम कम करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। 156 कृषि स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी को इसी व्यापक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

खरीफ क्रय सत्र 2025-26 में सरकार ने तय किया था 60 लाख मीट्रिक धान खरीद का लक्ष्य

लक्ष्य से अधिक धान खरीद योगी सरकार ने किसानों को किया 14,886 करोड़ रुपये का भुगतान  खरीफ क्रय सत्र 2025-26 में सरकार ने तय किया था 60 लाख मीट्रिक धान खरीद का लक्ष्य  10.53 लाख किसानों से हुई 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद, किया गया 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान 12.82 लाख से अधिक किसानों ने कराया था पंजीकरण, बीती 28 फरवरी को प्रदेश में पूरी हुई धान खरीद की प्रक्रिया पिछला रिकॉर्ड भी टूटा, 2024-25 में 57.70 लाख मीट्रिक टन हुई थी खरीद, तब भुगतान हुआ था 13370.17 करोड़ रुपये का  लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खरीफ क्रय सत्र 2025-26 के लिए धान खरीद प्रक्रिया पूरी हो गई। इसको लेकर किसान हितैषी योगी सरकार ने नया रिकॉर्ड बनाया है। धान खरीद के तय लक्ष्य को काफी पीछे छोड़ दिया। योगी सरकार ने खरीफ क्रय सत्र 2025-26 के लिए 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था। इसे पार कर 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। इसके एवज में किसानों को लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। उत्तर प्रदेश में धान खरीद प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी हो गई। यही नहीं, 2024-25 की अपेक्षा इस वर्ष अधिक खरीद व भुगतान किया गया।  62.30 लाख मीट्रिक टन धान खरीद, लगभग 14,886 करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान  प्रदेश के 4869 क्रय केंद्रों के जरिए 10.53 लाख किसानों से 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खऱीद हुई। धान की खरीद (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल की दर से हुई। इसके एवज में किसानों को लगभग 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सीएम योगी के निर्देश पर 48 घंटे के भीतर किसानों को डीबीटी के माध्यम से बैंक खातों में भुगतान किया गया। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने के साथ ही किसानों को समय से पैसा भी मिला।  12.82 लाख से अधिक किसानों ने कराया है पंजीकरण  धान बिक्री के लिए 12,82,892 किसानों ने पंजीकरण कराया है। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक धान की बिक्री के लिए ओटीपी आधारित सिंगल पंजीकरण की व्यवस्था की गई थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के संभागों तथा हरदोई, लखीमपुर खीरी व सीतापुर में 31 जनवरी तक धान खरीद चली। वहीं चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर, प्रयागराज संभाग तथा लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में 28 फरवरी तक धान खरीद हुई।  योगी सरकार ने पिछले साल के रिकॉर्ड को भी तोड़ा  (2025-26) इतने किसानों से हुई खरीद- 10,53,561  धान खरीद- 62,30,735.63 मीट्रिक टन भुगतान- 14,886.35 करोड़ रुपये  क्रय केंद्र- 4869 2024-25 इतने किसानों से हुई खरीद- 7,97,500 धान खरीद- 57,70,671.09 मीट्रिक टन   भुगतान- 13370.17 करोड़ रुपये क्रय केंद्र- 4372

एक अप्रैल से जबलपुर में स्कूली वाहनों में एलपीजी किट का उपयोग होगा बंद

जबलपुर  शहर की सड़कों पर स्कूली बच्चों को एलपीजी (LPG) किट लगे असुरक्षित वाहनों में ढोना अब स्कूल प्रबंधकों और वाहन स्वामियों को भारी पड़ेगा। जिला प्रशासन ने छात्र सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर कार्यालय सभागार में आयोजित इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत, आरटीओ संतोष पॉल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंजना तिवारी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी व स्कूलों के प्राचार्य मौजूद रहे। एलपीजी वाहनों से छात्रों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया है कि एक अप्रैल से जिले के किसी भी शासकीय या अशासकीय विद्यालय में एलपीजी संचालित वाहनों से विद्यार्थियों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बैठक में स्कूली परिवहन की सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। सड़कों पर होगा औचक निरीक्षण: आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस को स्कूल समय के दौरान औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी को जिले के समस्त सीबीएसई, आइसीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों को इस आदेश से अवगत कराने और उनसे अनुपालन प्रतिवेदन लेने को कहा गया है। डेडलाइन तय एक अप्रैल के बाद यदि कोई स्कूल एलपीजी वाहन का उपयोग करता पाया गया, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित संस्था व वाहन स्वामी पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। वैकल्पिक व्यवस्था स्कूल प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते इन वाहनों के स्थान पर वैधानिक रूप से अनुमन्य और फिटनेस प्रमाणित (पेट्रोल/डीजल/सीएनजी) वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। सत्यापन अभियान आरटीओ को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूली वाहनों का भौतिक सत्यापन कर गैस किट वाले वाहनों की पहचान करें।     विद्यार्थियों का सुरक्षित परिवहन हमारी प्राथमिकता है। एक अप्रैल के बाद अवैध गैस किट वाले वाहन सड़कों पर नहीं दिखने चाहिए। उल्लंघन करने वाले स्कूलों और वाहन मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     – राघवेंद्र सिंह, कलेक्टर  

देसी गाय के गोबर के कंडों की राख तथा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों से बन रहा गुलाल

होली में गोमाता ने रंग भरे गोपालकों व ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में देसी गाय के गोबर के कंडों की राख तथा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों से बन रहा गुलाल योगी सरकार की गोसंवर्धन नीति से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण व स्वास्थ्य अनुकूल उत्पादों का निर्माण भी बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश भर में किया जा रहा है निर्माण लखनऊ उत्तर प्रदेश में इस बार होली का उल्लास न केवल रंगों से, बल्कि गोमाता के आशीर्वाद और ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन से भी सराबोर होगा। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य के विभिन्न जिलों में पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों से पारंपरिक 'ऑर्गेनिक गुलाल' तैयार किया जा रहा है। यह गुलाल न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए नारी सशक्तिकरण का नया अध्याय लिख रहा है। प्रकृति के रंगों से सजेगा त्योहार गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस अनूठी पहल के तहत ग्रामीण महिलाएं गोशाला पालकों के सहयोग से प्राकृतिक तत्वों के जरिए गुलाल का निर्माण कर रही हैं। इसमें गोबर के कंडों की राख के अलावा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों और इंडिगो (नील) जैसे तत्वों का उपयोग किया जा रहा है। बाजार में मिलने वाले जहरीले केमिकल युक्त रंगों के मुकाबले यह गुलाल पूरी तरह इको-फ्रेंडली और त्वचा के लिए सुरक्षित है। गोबर की राख का 'वैज्ञानिक' आधार इस गुलाल की सबसे बड़ी विशेषता देशी गाय के गोबर के कंडों की राख का उपयोग है। पारंपरिक रूप से शुद्धिकारक मानी जाने वाली इस राख में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित 'क्षारीय तत्व' पाए जाते हैं, जो नमी को कम कर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं। प्रसंस्करण के बाद यह राख गुलाल को एक मुलायम आधार प्रदान करती है, जिससे रंगों का फैलाव बेहतर होता है और किसी कृत्रिम फिलर की जरूरत नहीं पड़ती। प्रदेश भर में रोजगार आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस योजना के तहत बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया गया है। यह प्रयास न केवल होली को स्वास्थ्यकर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है। गोशालाओं से प्राप्त सामग्री के उपयोग से गोवंश का संरक्षण हो रहा है और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा मुख्यमंत्री ने

गोसेवा में रमे सीएम योगी, गोवंश को खिलाया गुड़-रोटी नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा मुख्यमंत्री ने भोले नामक विशाल नंदी के शरीर की धूल-मिट्टी को अपने हाथों से साफ किया सीएम योगी ने गोरखपुर  गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह जनता दर्शन लगाकर जनसेवा करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा में भी रमे रहे। उन्होंने नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा, उन्हें गुड़-रोटी खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए। गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर मंगलवार प्रातःकाल सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह भी वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया।  गोशाला में सीएम योगी ने चारों तरफ भ्रमण करते हुए श्यामा, गौरी, गंगा, भोला आदि नामों से गोवंश को पुकारा। उनकी आवाज इन गोवंश के लिए जानी पहचानी है। प्यार भरी पुकार सुनते ही कई गोवंश दौड़ते-कूदते उनके पास आ गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाया। इसी क्रम में उन्होंने भोले नामक एक विशाल नंदी को स्नेह की थपकी देते हुए गुड़-रोटी खिलाया। उसके शरीर पर लगी धूल-मिट्टी को पहले अपने हाथों से साफ किया और फिर गोशाला कार्यकर्ता को निर्देशित किया कि भोले के शरीर को सूखे कपड़े से साफ कर दिया जाए। मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने मोर पर भी स्नेह बरसाया और उसे अपने हाथों से रोटी खिलाई।

खामेनेई की मौत पर ईरान में जश्न, लेकिन भारत में क्यों छाया मातम?

नई दिल्ली ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मिसाइल हमले में हत्या की खबर सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और पूरे इलाके में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए इस हमले के बाद जहां एक तरफ कई देशों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं और शिया मुस्लिम समुदाय के बीच गहरा शोक छा गया है. वहीं दूसरी तरफ ईरान और दुनिया के कुछ हिस्सों में लोगों ने इसे ‘फ्री ईरान' की दिशा में पहला कदम बताते हुए जश्न भी मनाया है. इसी बीच भारतीय सिनेमा में काम कर रहीं ईरानी एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी का सोशल मीडिया रिएक्शन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. ईरान से आई दो तस्वीरों ने पहले विरोध की आग दिखाई थी, अब वही तस्वीरें जश्न की कहानी बन गई हैं. कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में एक युवती देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती नजर आई थी. यह दृश्य ईरान में महिलाओं के गुस्से और सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती का प्रतीक बना. अब खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उसी तरह की महिलाएं ‘चीयर्स’ करती और जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों ने दुनिया भर में बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है या फिर दशकों से सख्त सामाजिक और धार्मिक पाबंदियों में जी रही ईरानी महिलाओं की आजादी की शुरुआत? ईरान में महिलाओं का संघर्ष क्यों बना वैश्विक मुद्दा?     पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं के अधिकार सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं. ड्रेस कोड, सार्वजनिक जीवन में पाबंदियां और मोरल पुलिसिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन होते रहे हैं. कई बार इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया, लेकिन विरोध की आवाज पूरी तरह खत्म नहीं हुई. महसा अमिनी की मौत के बाद आंदोलन और तेज हो गया.     खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संरचना में संभावित बदलाव महिलाओं के आंदोलन को नई दिशा दे सकता है. हालांकि यह भी सच है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. खामेनेई की मौत पर भारत में मातम क्यों  तेहरान में अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ताबड़तोड़ हमले किए और इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने जान गंवाई, उसे लेकर हंगामा मचा हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय में कुछ वर्गों के बीच खास प्रतिक्रिया नजर आई। लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और अलीगढ़ में शोक सभाओं, अंतिम संस्कार की प्रार्थना और ऑनलाइन संदेशों से संकेत मिलता है कि यह एक रेयर मूमेंट है। ऐसा पहली बार है जब शिया और सुन्नी, धार्मिक मतभेदों के लंबे इतिहास के बाद भी एक नेता के निधन पर साथ में शोक जताते नजर आए। खामेनेई 1989 से कर रहे थे ईरान का नेतृत्व     खामेनेई, जिन्होंने अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 से ईरान का नेतृत्व किया।     वो एक शिया धर्मगुरु थे और सुन्नियों के लिए कोई धार्मिक प्राधिकारी नहीं थे।     उनकी मृत्यु पर प्रतिक्रियाएं सांप्रदायिक सीमाओं को पार कर गईं।     कई सुन्नियों के लिए, यह भावना ईरान से कम और फिलिस्तीन से अधिक जुड़ी है।     ये एक ऐसा मुद्दा है जो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजनों को भी पार कर जाता है। खामेनेई पर क्यों आए शिया सुन्नी साथ? जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि खामेनेई का जीवन धार्मिक अधिकार के साथ-साथ राजनीतिक दृढ़ विश्वास को भी दर्शाता था। एक बयान में कहा गया कि रमजान के पवित्र महीने में खामेनेई की शहादत ने मुस्लिम जगत के लाखों लोगों को गहरा शोक पहुंचाया है। कुछ सुन्नी मौलवियों में शोक के साथ-साथ उन मुस्लिम सरकारों की आलोचना भी शामिल थी जिन्हें चुप्पी साधे हुए देखा गया।  सुन्नियों की इस प्रतिक्रिया पर क्या कह रहे जानकार विद्वान बशारत अली ने कहा कि शिया राजनीतिक कल्पना में, शहादत एकता और राजनीतिक शक्ति का स्रोत बन जाती है। भारत में कई शियाओं के लिए, ईरान का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा शिया-बहुसंख्यक देश है। ये कोम और मशहद जैसे धार्मिक केंद्रों का घर है। सुन्नियों के लिए प्रतिक्रिया काफी हद तक राजनीतिक रही है, जो फिलिस्तीन और इजरायल के विरोध के इर्द-गिर्द केंद्रित है।  

जनता दर्शन में गोरखनाथ मंदिर में 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

बेफिक्र होकर उपचार कराएं, सरकार देगी भरपूर आर्थिक सहायता: सीएम योगी जनता दर्शन में गोरखनाथ मंदिर में 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए समस्याओं के त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण के निर्देश जमीन कब्जाने व दबंगई के मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए: सीएम योगी गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग करने आए लोगों को आश्वस्त किया कि वे बेफिक्र होकर अच्छे अस्पताल में उपचार कराएं। सरकार उनको भरपूर आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने इसे लेकर अधिकारियों को निर्देशित भी किया कि जिन लोगों को उपचार में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, उनके इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से पूरा कराकर शासन को उपलब्ध कराया जाए। हर जरूरतमंद को इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।  होलिकोत्सव मनाने के लिए सोमवार को गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में करीब 150 लोगों से मुलाकात की। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों के पास जाकर, एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। समस्याओं के निस्तारण के लिए लोगों को आश्वस्त करते हुए उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को हस्तगत किए। मुख्यमंत्री ने सभी लोगों को भरोसा दिया कि किसी को भी परेशान होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का प्रभावी समाधान कराया जाएगा।  जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जनता की समस्याओं पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से ध्यान देकर उनका त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिपरक निस्तारण कराएं, ताकि किसी को भी परेशान न होना पड़े। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील रवैया अपनाया जाए और उसकी समस्या का समाधान कर उसे संतुष्ट किया जाए। इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कहीं कोई जमीन कब्जा या दबंगई कर रहा हो तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।  जनता दर्शन में एक व्यक्ति ने किडनी की बीमारी में धन की कमी आड़े आने की समस्या बताई। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले उससे आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा। कार्ड न होना बताए जाने पर उन्होंने कहा कि चिंता मत करिए। इलाज के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद मिलेगी। अन्य कई लोग भी गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार किसी भी जरूरतमंद के इलाज में धन की कमी को बाधक नहीं बनने देगी। विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दी जाएगी। जनता दर्शन में कुछ परिजनों के साथ उनके बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने सभी को स्नेहिल आशीर्वाद के साथ चॉकलेट दीं और खूब पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

खामेनेई की मौत के बाद भारत में बढ़ा हाईअलर्ट, कानून-व्यवस्था के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी

नई दिल्ली  मध्य पूर्व के हालात को देखते हुए भारत में हाईअलर्ट जारी किया गया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों को संदिग्ध लोगों पर नजर रखने और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स तैनात करने का निर्देश दिया है, जिससे देश में शांति व्यवस्था बनी रहे। अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राज्यों में पुलिस-प्रशासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है।  नागरिकों से कहा गया है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक, भड़काऊ या अनचाहा कंटेंट पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें। अफवाहें और भ्रामक संदेश माहौल को बिगाड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। पुलिस-प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान किया जाता है लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं से जान-माल का नुकसान होता है और पूरे समाज को परेशानी होती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल तत्वों, भड़काने वालों और असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस-प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोग किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहें जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो। पुलिस की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि लोग तोड़फोड़, दंगा-फसाद, पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हिंसा और अशांति की वजह से शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने, आवाजाही में रुकावट और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।