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CM साय आज विभागीय बैठक कर ‘जाणता राजा’ में होंगे शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गुरुवार का दौरा कार्यक्रम तय किया गया है। मुख्यमंत्री आज सिविल लाइन स्थित अपने निवास में विभागीय बैठक लेंगे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री शाम 6.30 बजे आयोजित महानाट्य ‘जाणता राजा’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। किसानों की अहम बैठक आज रायपुर में आज किसानों की एक बैठक आयोजित होने वाली है। यह बैठक दोपहर 1 बजे कलेक्टर गार्डन रायपुर में होगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के घटक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ की भी सक्रिय भागीदारी रहेगी। इस दौरान भारत–अमेरिका ट्रेड डील का किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा होगी। साथ ही छत्तीसगढ़ में धान का ₹3286 प्रति क्विंटल अंतर राशि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। बैठक में किसानों के हितों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय किए जाने की संभावना है। सहयोग केंद्र में आज मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सुनेंगी समस्याएं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित सहयोग केंद्र में आज मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित रहेंगी। इस दौरान वे आम जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनकर उनके निराकरण करेंगी। सहयोग केंद्र के माध्यम से लोग अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर आवेदन कर सकेंगे। असम के चुनावी दौरे से लौटेंगे डिप्टी सीएम अरुण साव उप मुख्यमंत्री अरुण साव असम के तीन दिवसीय चुनावी दौरे के बाद आज रायपुर लौटेंगे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने असम में भाजपा संगठन के साथ मिलकर चुनावी रणनीति तैयार की। अरुण साव को लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र की 9 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दौरे के दौरान उन्होंने ढकुआखाना, लखीमपुर, तिनसुकिया और धेमाजी में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों पर चर्चा की।

MP में हॉट पोलिटिकल हूटर रेस: मंत्री और विधायक नियमों की अनदेखी कर रहे, पुलिस कार्रवाई से कतराती हुई

भोपाल  राजधानी में आपको हूटर प्रेमी बहुत दिख जाएंगे, जो खुलआम अपने वाहनों में हूटर लगाकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश से वीवीआईपी कल्चर खत्म करने को लेकर कई बार अलग-अलग मंचों से कह चुके हैं. इसके साथ ही इस कल्चर को खत्म करने के लिए कई नियमों में बदलाव भी किया गया. इसके बावजूद नेताओं और अधिकारियों का लाल बत्ती के साथ हूटर के लिए जो प्यार है, खत्म होने का नाम नहीं लेता है. मंत्री-विधायक और सांसदों के वाहन सांय-सांय की आवाज करते सड़कों पर दौड़ते नजर आ जाते हैं. हूटर नियम के बाद नहीं उतर रहे हैं. पीएम मोदी के आदेश एमपी में बेअसर करीब 8 साल पहले केंद्र सरकार की ओर से मंत्री अफसर समेत सभी जनप्रतिनिधियों के वाहनों पर हूटर लगाने के नियम को बंद कर दिया गया था. इसके बाद से गाड़ियों पर लगे हूटरों को उतारना शुरू भी कर दिया गया था. ज्यादातर गाड़ियों से हूटर और लाल बत्ती को प्रशासन द्वारा उतरावा भी दिया गया था, लेकिन मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधि हों या बड़े अधिकारी अब भी हूटर का उपयोग कर रहे हैं. केंद्र सरकार की मंशा ये थी की हूटर से काफी तेज आवाज निकलती है और ऐसे में सामान्य तौर पर उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने की अनुमति नहीं केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत इस तरह का कोई भी प्रेशर हॉर्न किसी वाहन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन पहले वीआईपी लोगों को इसकी इजाजत थी. केन्द्र सरकार के आदेश के बाद वीआईपी लोगों के वाहनों पर भी हूटर लगाना बंद कर दिया गया था. हूटर लगाने की इजाजत सिर्फ आपातकालीन सेवा में इस्तेमाल होने वाले वाहन जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के वाहन शामिल हैं. इन वाहनों के अलावा अगर और कोई हूटर इस्तेमाल करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है. हूटर लगाकर फर्राटा भर रहे नेतागण वर्तमान में विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारी बेखौफ होकर हूटर लगाकर अपना जलवा बिखेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. यातायात पुलिस की चालानी कार्रवाई 2 पहिया वाहनों, सीट बेल्ट व वाहनों के दस्तावेज चेक करने तक ही सिमट कर रह गई है. अनाधिकृत रूप से हूटर लगाकर शहर और मुख्य मार्गों में दौड़ने वाले वाहनों के विरुद्ध अब तक यातायात पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. इन वाहनों में हूटर लगाने की छूट अगर कोई इन नियमों के खिलाफ जाकर अपने वाहन पर हूटर लगाता है, तो उस पर 5000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है. केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 119(3) के तहत इन वाहनों को हूटर और साइरन के लिए छूट दी गई है, जिसमें एंबुलेंस, फायर बिग्रेड, आपातकालीन सेवा में चलने वाली गाड़ी और परिवहन विभाग के अफसरों की गाड़ियां शामिल हैं. नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई इस मामले में पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने कहा, "यातायात पुलिस की ड्यूटी है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करें. जरूरत पड़ी तो हूटर के खिलाफ अभियान भी चलाया जाएगा." हूटर के अलावा प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म, फ्लैशर लाइट और मॉडिफाइड साइलेंसर लगाना केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के खिलाफ है. ऐसा करने पर भी जुर्माना भरना पड़ सकता है. इसीलिए वाहन चलाते वक्त इन नियमों का ध्यान रखना काफी जरूरी है.

पीएफ निवेशकों के लिए खबर: EPFO ब्याज दर पर 11 दिन में फैसला होने वाला

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO वित्त वर्ष 2026 के लिए पीएफ अकाउंट होल्डर्स के लिए ब्याज में संशोधन करके इसे बढ़ाएगा या फिर PF Interest Rate यथावत रहेंगे, इस पर ऐलान महज 11 दिन बाद होने वाला है. इसे लेकर अगले महीने की शुरुआत में 2 मार्च को समिति की अगली बैठक होगी, जिसमें पीएफ ब्याज दर को लेकर अंतिम फैसला लिए जाने की उम्मीद है.  स्थिर रह सकता है ब्याज! बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च को होने वाली बैठक में PF Interest Rates पर फैसला होने की उम्मीद है.फिलहाल, पीएफ खाते पर सरकार की ओर से 8.25% का ब्याज दिया जा रहा है और ऐसे उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO इसे इसी स्तर पर बनाए रख सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ये लगातार तीसरी बार होगा, जब मेंबर्स को उनके भविष्य निधि जमा पर 8.25% का ही ब्याज मिलेगा. रिपोर्ट की मानें, तो EPFO ब्याज को स्थिर रखने का उद्देश्य बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर भी ग्राहकों को स्थिर और निरंतर ब्याज दर देते रहना है. ईपीएफओ के पास इस फाइनेंशियल ईयर में 8.25% ब्याज दर बनाए रखने के लिए अपने निवेश से पर्याप्त अधिशेष होगा.  मनसुख मंडाविया करेंगे बैठक का नेतृत्व  PF Interest Rate के प्रस्ताव पर ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा चर्चा करते हुए निर्णय लिया जाएगा. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे. इससे पहले सीबीटी की आखिरी बैठक बीते साल 15 अक्तूबर को हुई थी. उसमें कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिनमें पीएफ के पैसों की निकासी को आसान आसान बनाने के उद्देश्य से कई सुधारों की घोषणा की थी. सूत्रों के अनुसार, इस बार भी बोर्ड सदस्यों के लिए लेन-देन को सरल बनाने के लिए और अधिक सुधारों पर विचार किया जा सकता है. इनमें EPFO वेबसाइट को अपग्रेड करना, विद्ड्रॉल में तेजी और क्लेम सेटलमेंट में तेजी जैसे उपाय शामिल हो सकता हैं. हालांकि, अभी तक ईपीएफओ की ओर से अगली बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए ये अनुमान एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले सालों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को निवेश के नए रास्तों की तलाश करनी पड़ सकती है. मतलब साफ है कि अगर इनकम पर दबाव पड़ता है तो इससे अगले वित्तीय वर्ष से कम रिटर्न पर विचार-विमर्श देखने को मिल सकता है.  ईपीएफओ कहां-कहां करता है निवेश?  गौरतलब है कि EPFO करीब 28 लाख करोड़ रुपये के कोष मैनेज करता है. संगठन नए निवेश का 45 से 65% हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों (Govt Securities) में निवेश करता है. इसके अलावा करीब 20 से 45% अन्य ऋण साधनों (Debt Instruments) में निवेश किया जाता है. वहीं 5 से 15% तक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों के जरिए इक्विटी में लगाया जाता है, जबकि 5% तक शॉर्ट टर्म कर्ज साधनों में निवेश किया जाता है. निवेश का यह मैनेजमेंट ईपीएफओ बैलेंस को सुरक्षा और रिटर्न के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है, क्योंकि अधिकांश रकम अपेक्षाकृत स्थिर ऋण साधनों में ही निवेश की जाती है. इस तरह से आरक्षित कोष उन वर्षों में रिटर्न को सुचारू रखने में मददगार साबित होता है, जबकि निवेश से होने वाली इनकम कम होती है. 

कोविड के दौरान 10 लाख मजदूर परिवारों के नाम हटाए गए, 6 साल में केवल 1% को मिला 100 दिन का काम — विधानसभा में जानकारी

भोपाल  प्रदेश में मनरेगा के तहत पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया। यह खुलासा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में हुआ। जवाब में सामने आया कि बड़ी संख्या में मजदूर पंजीकृत होने के बावजूद सीमित परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों में से केवल 1 लाख 23 हजार परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 63 हजार 898 परिवार, वर्ष 2023 में 40 हजार 588, वर्ष 2024 में 30 हजार 420 और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवार रह गई। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरा रोजगार नहीं मिल सका। 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। चार जिलों में मात्र एक-एक परिवार को ही 150 दिन काम दिया गया। जानकारी में बताया गया कि सबसे अधिक अलीराजपुर जिले में 112 परिवारों को 150 दिन रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को यह लाभ मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा। मजदूरी की मांग बढ़ी, रोजगार नहीं विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कोविड काल के बाद से मजदूरी की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन रोजगार उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में परिवारों और श्रमिकों ने काम की मांग की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। जॉब कार्डधारी परिवार बढ़े, काम कम मिला प्रदेश में जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रति परिवार मिलने वाले कार्य दिवस घटे हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाने के कारण पलायन की स्थिति बन रही है। ऐसे घटता गया 100 दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा साल पंजीकृत मजदूर 100 दिन रोजगार पाने वाले परिवार 2021 1,70,19,681 1,23,624 2022 1,81,42,207 63,898 2023 1,69,07,207 40,588 2024 1,70,42,207 30,420 2025 1,86,57,080 32,560 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन 2025-26 में स्थिति कमजोर रही। जिलावार स्थिति (150 दिन रोजगार): 24 जिलों में — एक भी परिवार को नहीं मिला रोजगार 4 जिलों में — सिर्फ 1 परिवार को मिला रोजगार अलीराजपुर — 112 परिवार छिंदवाड़ा — 28 परिवार धार — 21 परिवार मंडला — 17 परिवार दमोह — 16 परिवार झाबुआ — शून्य विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में लाखों परिवारों और श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा नाम कोविड काल के दौरान काटे गए। कोरोना काल में सबसे ज्यादा नाम हटे विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के 43 लाख 43 हजार 378 श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। उस समय रोजगार की मांग सबसे अधिक थी, लेकिन बड़ी संख्या में मजदूर योजना से बाहर हो गए। वर्षवार जॉब कार्ड से हटाए गए नाम 2021: 10,46,786 परिवार — 43,43,378 श्रमिक 2022: 1,71,389 परिवार — 7,71,730 श्रमिक 2023: 5,28,579 परिवार — 20,24,552 श्रमिक 2024: 45,516 परिवार — 1,91,183 श्रमिक 2025: 25,684 परिवार — 1,23,524 श्रमिक रोजगार की मांग के बीच बाहर हुए मजदूर आंकड़ों के मुताबिक कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन उसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाने से मजदूरों को काम पाने में कठिनाई हुई। विपक्ष का आरोप कांग्रसे ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार की जरूरत थी, उसी समय नाम काटे जाने से उन्हें काम से वंचित होना पड़ा और पलायन की स्थिति बनी। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद मनरेगा के क्रियान्वयन और जॉब कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरी की मांग भी रही ऊंची वर्ष परिवार श्रमिक 2021-22 61,66,780 1,21,95,233 2022-23 53,13,454 92,99,519 2023-24 46,99,747 76,31,549 2024-25 44,79,776 69,86,086 2025-26 42,64,414 65,47,787  

बच्चों से जुड़े अपराध में लंबी जद्दोजहद: MP में तेजी, दिल्ली में 4.5 साल लगते हैं केस सुलझाने में

भोपाल  मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है। राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है। एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।     दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।     गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।     उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है। देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं। चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक 'चाइल्ड फ्रेंडली' माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है। 2.45 मामले अभी भी पेंडिंग न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं। 22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं। अब ट्रायल को भी समझ लीजिए     ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में 'ट्रायल' (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।     ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।     अवधि की गणना: दस्तावेजों में 'औसत विचारण समय' की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।     केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच 'जांच' का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।     त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

जहां दफन था पाकिस्तान का गुरूर, वहीँ भारत का ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा

विशाखापत्तनम  इंडियन नेवी के इतिहास में कुछ तारीखें और कुछ जगहें ऐसी हैं, जो दुश्मन के कलेजे में हमेशा खौफ पैदा करती हैं. इस साल का इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और ‘मिलन’ एक्सरसाइज एक बार फिर उसी इतिहास को जिंदा करने जा रहा है. इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश विशाखापत्तनम के उस समंदर से निकल रहा है, जहां आज से ठीक 55 साल पहले पाकिस्तान की अकड़ और उसका गुरूर पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) हमेशा के लिए दफन हो गया था. गर्व की बात यह है कि जहां गाजी की कब्र है, आज ठीक उसी जगह भारत का अपना स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा है. यह सिर्फ एक जहाज की मौजूदगी नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक ऐसा ट्रॉमा है जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा. 1971 की वो घटना, जब गाजी शिकार बन गया     बात 1971 की है, जब पाकिस्तान ने भारत के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को डुबोने के लिए अपनी सबसे घातक अमेरिकी सबमरीन पीएनएस गाजी को भेजा था. पाकिस्तान को लगा था कि गाजी चुपचाप आएगी और विशाखापत्तनम के पास विक्रांत का काम तमाम कर देगी. लेकिन इंड‍ियन नेवी की रणनीति के आगे गाजी की एक न चली.     आईएनएस राजपूत ने विशाखापत्तनम के तट के पास ही गाजी को ट्रैक किया और समंदर की गहराइयों में उसे हमेशा के लिए सुला दिया. उस वक्त जब गाजी के मलबे को खोजने और समंदर के नीचे डाइविंग ऑपरेशन चलाने की बारी आई, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने बखूबी अंजाम दिया था. आज उसी ‘निस्तार’ का आधुनिक और स्वदेशी अवतार उसी जगह मौजूद है, जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. आईएनएस निस्तार यानी समंदर का बादशाह भारतीय नौसेना को 18 जुलाई 2025 को अपना पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला. इससे पहले नौसेना के पास ऐसे जहाजों की भारी कमी थी, लेकिन अब निस्तार और निपुण के आने से भारत इस क्षेत्र में सेल्फ-रिलायंट बन गया है. न‍िस्‍तार की खूब‍ियां ऐसी हैं, ज‍िससे इसे समंदर के बादशाह के नाम से भी जाना जाता है. ‘निस्तार’ क्यों है इतना खास?     संस्कृत में ‘निस्तार’ का अर्थ होता है ‘मुक्ति’ या ‘उद्धार’. इससे आप न‍िस्‍तार की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं. वैसे तो इसका मुख्य काम किसी भी सबमरीन इमरजेंसी के दौरान नौसैनिकों का रेस्क्यू करना है. लेकिन यह बहुत काम की चीज है.     यह जहाज अपने साथ डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल ले जाता है, जो गहरे समंदर में जाकर फंसी हुई सबमरीन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया यह जहाज लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी है.     निस्तार 120 मीटर लंबा और 10,000 टन वजनी है. यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से सफर करता है. यह अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों और सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट सिस्टम से लैस है. विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के लिए ‘डेथ जोन’ इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में चीन और पाकिस्तान को कभी नहीं बुलाया जाता, लेकिन भारत की यह सामरिक तैयारी उनके लिए सबसे बड़ी चेतावनी है. जिस जगह गाजी डूबा था, आज वहां सिर्फ निस्तार ही नहीं, बल्कि भारत का स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है. यह वही विक्रांत है जिसे डुबोने का सपना लेकर गाजी आया था. आज विक्रांत का नया अवतार उसी जगह खड़ा होकर दुनिया को बता रहा है कि भारत की समुद्री सीमाएं अब अभेद्य हैं. निस्तार और निपुण की जोड़ी अभेद्य नेवी के इस प्रोजेक्ट के तहत दो डाइविंग सपोर्ट वेसल तैयार किए जा रहे हैं. निस्तार के बाद अब ‘निपुण’ पर काम तेजी से चल रहा है. ये दोनों जहाज भारतीय नौसेना को दुनिया की उन चुनिंदा नौसेनाओं की कतार में खड़ा कर देंगे जिनके पास अपनी सबमरीन रेस्क्यू क्षमता है. कुल मिलाकर, विशाखापत्तनम में आईएफआर (IFR) का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं है. यह पाकिस्तान की उस हार का जश्न है जिसने 1971 में दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया था. जहां पाकिस्तान का गुरूर दफन हुआ था, आज वहां भारत का ‘निस्तार’ खड़ा होकर नए भारत की बुलंद तस्वीर पेश कर रहा है.

AMCA प्रोजेक्ट में बड़ा कदम! टाटा के हाथ में 5th Gen जेट बनाने की जिम्मेदारी

मुंबई  भारत ने पांचवीं पीढ़ी के देसी स्टेल्थ फाइटर जेट (5th Gen Fighter Jet) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बड़ा कदम उठाया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस 5th जेन फाइटर जेट का प्रोटोटाइप डिजाइन करने के लिए तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है. इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड सबसे बड़ी दावेदार के तौर पर उभरी है, जबकि लार्सन एंड टुब्रो–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज (BEML लिमिटेड) डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह शामिल है. एएमसीए प्रोजेक्ट के तहत भारत का स्वदेशी सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट विकसित किया जाना है, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग और इंटरनल वेपन बे जैसी अत्याधुनिक खूबियां होंगी. इस परियोजना के अंतर्गत 125 से अधिक फाइटर जेट तैयार किए जाने की योजना है, जिनके 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. ये विमान अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के विमान F-35 और रूसी फिफ्थ जेन फाइटर जेट Su-57 की टक्कर के होंगे. इस 5th जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का पहला प्रोटोटाइप 2028 के आखिर तक रोल आउट होने वाला है, और पहली उड़ान 2029 में प्लान की गई है. इस प्रोजेक्ट का मकसद पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप डेवलप करना है, जिसका पूरा डेवलपमेंट 2034 तक पूरा होने और शुरुआती प्रोडक्शन 2035 तक होने का टारगेट है. HAL और अडाणी डिफेंस ने भी लगाई थी बोली रिपोर्ट के मुताबिक, डीआरडीओ ने अपनी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के जरिये जुलाई 2025 में इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए थे. शुरुआत में सात कंसोर्टियम ने बोली लगाई थी, जिनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अडाणी डिफेंस जैसे नाम शामिल थे. शॉर्टलिस्ट किए गए दावेदारों को अब सरकार की ओर से फंडिंग सहायता मिलने की संभावना है, ताकि वे एएमसीए के प्रोटोटाइप विकसित कर सकें. इसके बाद ही उत्पादन अधिकार दिए जाएंगे. सूत्रों के हवाले से बताया कि, HAL शुरुआती स्क्रीनिंग में एक अनिवार्य दस्तावेजी मानदंड में त्रुटि के कारण बाहर हो गया. हालांकि कंपनी को बाद में लाइसेंस निर्माण के लिए बोली लगाने का अवसर मिल सकता है. HAL के सीएमडी डीके सुनील ने हाल ही में कहा था कि एएमसीए एक 10 साल की परियोजना है और भले ही उनकी कंपनी शुरुआती चरण में चयनित न हो, वह आगे लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूर बोली लगाएगी. भारत के 5th Gen फाइटर जेट प्रोजेक्ट की खास बातें… भारत का AMCA प्रोग्राम क्या है? AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है, जिसे डीआरडीओ विकसित कर रहा है. AMCA की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी? यह एक सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग, इंटरनल वेपन बे और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम शामिल होंगे. AMCA के लिए किन कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है? डीआरडीओ ने तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है— टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (स्टैंडअलोन), लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज, बीईएमएल लिमिटेड और डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह AMCA प्रोजेक्ट के तहत कितने फाइटर जेट बनाए जाएंगे? इस प्रोजेक्ट के तहत 125 से अधिक फाइटर जेट बनाए जाने की योजना है. AMCA कब तक भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है? AMCA के 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. भारत में बनेंगे 90 राफेल जेट एएमसीए परियोजना भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है. इसी क्रम में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिनमें से 90 विमान भारत में बनाए जाएंगे. यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17 से 19 फरवरी के भारत दौरे से कुछ दिन पहले दी गई. इसके अलावा, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने नौसेना के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त पी-8आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है. यह सभी फैसले भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं.  

पाकिस्तान हॉकी टीम के खिलाड़ियों पर कप्तान ने जताया गुस्सा, बर्तन मांजने का करारा विरोध

 कराची/लाहौर पाकिस्तान हॉकी टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटते ही एक बड़ा विवाद सामने आ गया है. टीम के कप्तान शकील अम्माद बट (Shakeel Ammad Butt) ने पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि खिलाड़ियों को मैच खेलने से पहले बर्तन तक मांजने पड़े और कई घंटों तक सड़कों पर भटकना पड़ा. लाहौर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में बट ने साफ कहा, 'अब बहुत हो चुका है… जब खिलाड़ी मैच खेलने से पहले किचन साफ करें और बर्तन धोएं, तो उनसे आप किस तरह के नतीजों की उम्मीद करेंगे?' 13-14 घंटे एयरपोर्ट पर इंतजार ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद टीम को सबसे पहले सिडनी एयरपोर्ट पर 13-14 घंटे इंतजार करना पड़ा. इसके बाद जब टीम कैनबरा में FIH Pro League मुकाबलों के लिए होटल पहुंची तो पता चला कि बुकिंग ही नहीं की गई थी. खिलाड़ियों को बताया गया कि होटल प्रबंधन को अग्रिम भुगतान नहीं मिला है. नतीजा यह हुआ कि टीम को घंटों तक इंतजार करना पड़ा और अस्थायी व्यवस्था होने तक इधर-उधर भटकना पड़ा. अगले ही दिन पाकिस्तान को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला मैच खेलना था, जिसमें टीम 2-3 से हार गई. दौरे के दौरान पाकिस्तान को मेजबान ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी दोनों से हार का सामना करना पड़ा. 10 दिन का Airbnb, 13 दिन का दौरा कप्तान बट ने खुलासा किया कि टीम के लिए Airbnb आवास सिर्फ 10 दिनों के लिए बुक किया गया था, जबकि दौरा 13 दिनों का था. मजबूरी में खिलाड़ियों को बाद में सस्ते ठिकाने पर शिफ्ट होना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि फेडरेशन खिलाड़ियों से सच्चाई छिपाता रहा और मीडिया से बात करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी. बट ने कहा, 'मैं इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि जो हमने ऑस्ट्रेलिया में झेला, वह अस्वीकार्य है.' 10 मिलियन रुपये का सवाल इस पूरे विवाद के बीच Pakistan Sports Board ने पुष्टि की है कि उसने टीम के होटल इंतजाम के लिए PHF को 10 मिलियन पाकिस्तानी रुपये से अधिक की राशि जारी की थी. PSB के महानिदेशक नूर उस सबा (Noor us Sabah) ने कहा है कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जो PHF के पैट्रन-इन-चीफ भी हैं, ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं. विदेशी कोच की मांग कप्तान बट ने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान हॉकी को आगे बढ़ना है तो विदेशी कोच और बेहतर प्रबंधन की जरूरत है. बट ने कहा, 'हमारे पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अच्छा संयोजन है, लेकिन सही दिशा और पेशेवर प्रबंधन के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है.' पाकिस्तान हॉकी की साख पर सवाल एक समय दुनिया पर राज करने वाली पाकिस्तान हॉकी अब प्रशासनिक अव्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता के संकट से जूझ रही है. खिलाड़ियों की यह खुली नाराजगी बताती है कि मामला सिर्फ हार-जीत का नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या पाकिस्तान हॉकी को उसका खोया हुआ सम्मान वापस मिल पाएगा.

टीम इंडिया का बड़ा स्कोर, नीदरलैंड को 194 रन का लक्ष्य; शिवम और हार्दिक चमके

अहमदाबाद  भारतीय टीम ने नीदरलैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप 2026 के 36वें मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 193 रन बनाए। भारत की ओर से शिवम दुबे ने सर्वाधिक 66 रन बनाए। नीदरलैंड की ओर से वीक ने दो विकेट लिए। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को अभिषेक शर्मा के रूप में पहला झटका लगा। अभिषेक बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। जारी विश्व कप में लगातार तीसरे मैच में अभिषेक शर्मा का खाता नहीं खुला। सलामी बल्लेबाज ईशान किशन 7 गेंद में 18 रन बनाकर आउट हुए। तिलक वर्मा 27 गेंद में 31 रन बनाकर पवेलियन लौटे। उन्होंने अपनी पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। कप्तान सूर्यकुमार यादव 28 गेंद में 34 रन बनाकर पवेलियन लौटे। शिवम दुबे 31 गेंद में 66 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने अपनी पारी में चार चौके और 6 छक्के लगाए। हार्दिक पांड्या ने 21 गेंद में 30 रन का योगदान दिया। रिंकू ने 6 रन बनाए। भारतीय टीम ने नीदरलैंड के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। भारत ने प्लेइंग इलेवन में बदलाव किए हैं। भारत ने दो बदलाव करते हुए अक्षर पटेल और कुलदीप यादव की जगह वॉशिंगटन सुंदर और अर्शदीप सिंह को एकादश में शामिल किया है। नीदरलैंड ने एक बदलाव करते हुए नोह क्रोस को एकादश में जगह दी है। भारतीय टीम लगातार तीन मुकाबला जीतकर सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर चुकी है। जहां उसका पहली भिड़ंत साउथ अफ्रीका से होगी, जोकि शानदार फॉर्म में हैं। वहीं दूसरी तरफ नीदरलैंड की टीम दो मैच हारकर बाहर हो गई है। दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन इस प्रकार हैं: भारत (प्लेइंग XI): इशान किशन (विकेट कीपर), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह नीदरलैंड्स (प्लेइंग XI): माइकल लेविट, मैक्स ओ'डॉड, बास डी लीडे, कॉलिन एकरमैन, स्कॉट एडवर्ड्स (विकेट कीपर), ज़ैक लायन-कैशेट, रोएलोफ़ वैन डेर मर्व, लोगान वैन बीक, आर्यन दत्त, काइल क्लेन, नोआ क्रोस

श्रमिकों के खून-पसीने की मेहनत से ही प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा

रायपुर श्रमिकों के खून-पसीने की मेहनत से ही प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा श्रमिकों के सम्मान और उनके सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से कोरबा शहर के टीपी नगर स्थित राजीव गांधी ऑडिटोरियम में श्रमिक सम्मेलन का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।  सम्मेलन में श्रमिक कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा करते हुए श्रमिकों को विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई तथा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता राशि भी वितरित की गई। इस अवसर महापौर मती संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह, सभापति नगर निगम  नूतन ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रमवीर उपस्थित थे। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने श्रमिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमवीर प्रदेश की रीढ़ हैं। उनके अथक परिश्रम और समर्पण से ही बड़े निर्माण कार्य, अधोसंरचना विकास एवं औद्योगिक प्रगति संभव हो पा रही है। श्रमिकों के खून-पसीने की मेहनत से ही प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर रहा है।    मंत्री  देवांगन ने कहा कि श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा एवं सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में विभाग अंतर्गत श्रमिकों एवं उनके परिजनों के हित में अनेक कल्याणकारी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से श्रमिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि श्रमवीरों और उनके परिवार को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देते हुए विगत दो वर्षों में 800 करोड़ की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की जा चुकी है। श्रमिकों के लिए आवास निर्माण सहायता, सुरक्षा उपकरण सहायता, महतारी जतन योजना, मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, नोनी सुरक्षा योजना, नौनिहाल छात्रवृत्ति, श्रमिक सियान सहायता योजना सहित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ संचालित हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। श्रम मंत्री ने कहा कि श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन, छात्रवृत्ति, गणवेश एवं साइकिल वितरण जैसी सुविधाओं के साथ बोर्ड परीक्षा में मेरिट में आने वाले श्रमिकों के बच्चों  को 1 लाख रुपये की मेधावी छात्रवृत्ति तथा विदेश में अध्ययन हेतु 50 लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति का प्रावधान है। उन्होंने श्रमवीरों से अपील की कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। अब योजनाओं की सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। आज भी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में प्रेषित की गई है। मंत्री  देवांगन ने कहा कि कोरबा श्रमिक बाहुल्य जिला है, यहां बाल्को, एनटीपीसी एवं एसईसीएल जैसे प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित हैं। श्रमिकों के हित में वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित है, जिसके अंतर्गत मात्र 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से उद्योगों को प्रोत्साहन देकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु श्रमेव जयते पोर्टल एवं कॉल सेंटर संचालित है। श्रमिक इन माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज कर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। श्रम मंत्री ने उपस्थित सभी श्रमिकों से विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने तथा अन्य श्रमिक साथियों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों का सशक्तिकरण ही समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। महापौर मती राजपूत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि में श्रमिकों का योगदान अहम है। उनके बिना विकास की परिकल्पना भी संभव नही है। उन्होंने कहा कि श्रमवीरों एवं उनके परिवार के हित में सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की गई है। उन्होंने श्रमिकों को इन योजनाओं की जानकारी रखने एवं उनका लाभ उठाने का आग्रह किया।     जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन  तथा नगर निगम सभापति  ठाकुर ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शासन द्वारा संचालित योजनाएँ श्रमिकों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सक्रिय रूप से उनका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया, जिससे वे शासकीय सुविधाओं से अधिकतम रूप से लाभान्वित हो सकें। सम्मेलन में मुख्य अतिथि  देवांगन द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल, असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं श्रम कल्याण मंडल अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत  3110 श्रमिकों को कुल एक करोड़ 23 लाख रूपये की सहायता राशि वितरित की गई है। जिसमें मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के तहत 2840 श्रमिक परिवार के बच्चों को कुल 59 लाख 63 हजार रुपए,  मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना अंतर्गत 190 श्रमिकों को 38 लाख रुपए, मिनीमाता महतारी जतन योजना के 44 हितग्राहियो को 08 लाख 80 हजार रूपए, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के 20 हितग्राहियों को 04 लाख रूपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के 13 हितग्राहियों को 13 लाख रुपये, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के  3 हितग्राहियों को 26 हजार रूपये राशि से लाभान्वित किया गया। स्टॉल के माध्यम से श्रमिकों का किया गया पंजीयन/नवीनीकरण, पहुँचाया गया स्वास्थ्य लाभ सम्मेलन स्थल पर विभाग द्वारा स्टॉल लगाया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत पंजीकृत श्रमिकों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान श्रमिकों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण किया गया, साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा श्रमिको का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाइयाँ भी वितरित की गईं, जिससे उन्हें प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित हुआ।