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किसान कल्याण वर्ष में एक लाख करोड़ से अधिक राशि किसानों के कल्याण पर होगी व्यय

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए दृढ़संकल्पित होकर कार्य कर रहे है। मध्यप्रदेश विधानसभा में 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया गया है। कृषि कल्याण वर्ष में प्रदेश के किसानों के लिए एक लाख करोड़ से अधिक राशि का प्रावधान किसान हितैषी योजनाओं के लिये किया गया है। प्रदेश सरकार का किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का यह प्रमाण है। उन्होंने कहा गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी कल्याण के साथ हम प्रदेश को प्रगति पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में लंबे समय से अग्रणी है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने का संकल्प लिया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष में ग्वालियर जिले में भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि ग्राम कुलैथ में आयोजित हुए विशाल किसान सम्मेलन में किसान भाईयों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 करोड़ 21 लाख रुपए से अधिक लागत के 41 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। साथ ही कुलैथ क्षेत्र के विकास के लिये बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भी की। उन्होंने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के लिये लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। किसानों की पट्टों वाली जमीन की अपने खर्चे पर सरकार कराएगी रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जमीन के पट्टों की रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार उठाएगी, इसके लिए बजट में पर्याप्ट धनराशि का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को बैंकों से योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश के किसानों को सोलर पंप वितरित कर उन्हें बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। बुंदेलखंड की केन-बेतवा लिंक परियोजना का लाभ चंबल क्षेत्र के किसानों को भी मिलने वाला है। सिंचाई की सुविधा मिलने से यहां खेतों में फसलें लहलहाएंगी। सुपोषण के लिये सरकार स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पहली से 8वीं कक्षा तक के बच्चों के सुपोषण के लिये सरकार नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी। इस साल के बजट में यह योजना प्रस्तावित की गई है। साथ ही बजट में लाड़ली बहनों के लिए 23 हजार करोड़ से अधिक राशि आवंटित की गई है। कन्हैया लोकगीतों का लिया आनंद और पुष्पवर्षा कर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण का स्मरण करने से जीवन की अनेक कठिनाइयां खत्म हो जाती हैं। बाबा महाकाल ने सभी के जीवन का समय निश्चित किया है, इसलिए समाज कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण पारंपरिक लोक गायकों द्वारा प्रस्तुत कन्हैया लोकगीतों का आनंद भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया। उन्होंने मनमोहक कन्हैया लोक गीत प्रस्तुत करने वाले लोक गायकों का पुष्प वर्षा कर अभिनंदन और उत्साहवर्धन किया। लोक गायन में भाग लेने वाली सभी 18 टीमों को 5 – 5 हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। बैलगाड़ी दौड़ में शामिल लोगों का किया उत्साहवर्धन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन स्थल के समीप स्थानीय किसानों द्वारा आयोजित पारंपरिक बैलगाड़ी दौड़ भी देखी। उन्होंने बैलगाड़ी दौड़ में शामिल हुईं 28 बैलगाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप 5-5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही बैलगाड़ी दौड़ में प्रथम और द्वितीय पुरस्कार के लिए क्रमश: 21 व 11 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। रोड-शो में स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर किया अभिनंदन ग्वालियर के कुलैथ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव जब हैलीपेड से रथ पर सवार होकर रोड-शो करते हुए आगे बढ़े तो मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में मौजूद जनसमुदाय द्वारा उनका पुष्प वर्षा कर भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी जनता का अभिवादन किया। कुलैथ क्षेत्र के लिये की बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि कुलैथ में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में शामिल होने आए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुलैथ क्षेत्र को विकास कार्यों की बड़ी-बड़ी सौगातें देने की घोषणा की। इनमें डंडे वाले बाबा मंदिर तक एक किलोमीटर लम्बी सड़क व ट्रांसफार्मर, भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिये आने वाले श्रृद्धालुओं को ठहरने के लिये सामुदायिक भवन, युवाओं के लिये खेल मैदान व कुलैथ क्षेत्र में उद्योग की स्थापना शामिल है। साथ ही ग्राम पंचायत सुसैरा, ब्रह्मपुरा, साईंपुरा व ग्राम पंचायत सोजना के बंजारे का पुरा को आबादी क्षेत्र बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस क्षेत्र की महेश्वरा पत्थर खदान को फिर से चालू कराने के लिये आशवस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा सौगातें लेकर आते हैं – सांसद  कुशवाह सांसद  भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा बड़ी-बड़ी सौगातें लेकर आते हैं। उन्होंने आज भी 87 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगातें दी हैं। साथ ही विधानसभा में प्रस्तुत हुए बजट में विकास के लिये लगभग 4 लाख करोड़ से अधिक धनराशि का प्रावधान किया है। सांसद  कुशवाह ने कहा कि खुशी की बात है कि ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में पुल-पुलियाओं व सड़कों के निर्माण के लिये भी लगभग 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति क्षेत्रीय जनता की ओर से धन्यवाद व्यक्त किया। हितलाभ वितरण एवं प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान सम्मेलन में सरकार की किसान हितैषी व अन्य योजनाओं के तहत मुख्य मंच से प्रतीक स्वरूप हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगी कृषि प्रदर्शनी में लगाए गए 16 स्टॉलों का भ्रमण कर विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा प्रदर्शित योजनाओं, नवाचारों एवं तकनीकी जानकारी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ फूलों की खेती एवं ड्रिप स्प्रिंकलर का लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया। … Read more

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बोले— असम में एसआर का मकसद योग्य मतदाताओं की भागीदारी

 गुवाहाटी असम में चल रही विशेष पुनरीक्षण (SR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि असम में कराए गए विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि सभी पात्र मतदाता सूची में शामिल हों और अपात्र नामों को हटाया जाए। तीन दिवसीय दौरे के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानूनन अनिवार्य है। असम में यह प्रक्रिया इसलिए कराई गई क्योंकि यह देश का एकमात्र राज्य है जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। बीहू को लेकर चुनाव तिथियों पर होगा विचार चुनाव तिथियों के निर्धारण पर पूछे गए सवाल के जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बीहू असम का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इसलिए समीक्षा बैठकों के दौरान विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव कार्यक्रम तय करते समय राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, आयोग की प्राथमिकता स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु चुनाव कराना है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों से प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन कर संतुलित और व्यावहारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। 12 राज्यों में SIR, असम में SR मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि चुनावी नियमों के अनुसार मतदान से पहले मतदाता सूची का अद्यतन जरूरी है। इसी के तहत 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराया गया, जबकि असम में विशेष पुनरीक्षण (SR) आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया सफल रही है। राज्य के सभी जिलों से कुल लगभग 500 लोगों ने ही अपने नाम जोड़ने या किसी अन्य नाम को हटाने के लिए अपील दायर की है, जो इस बात का संकेत है कि सूची काफी हद तक सटीक है। चुनाव तैयारियों की व्यापक समीक्षा मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी तीन दिवसीय दौरे पर असम आए थे। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर मतदान केंद्रों, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सूची और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने भरोसा जताया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाएगी। 1200 मतदाताओं की सीमा तय चुनाव आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा तय की है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयोग का मानना है कि इससे लंबी कतारों और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी और मतदान प्रतिशत भी बढ़ सकता है। मोबाइल फोन रखने की नई सुविधा पहली बार असम में मतदाताओं को मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर अपने मोबाइल फोन रखने की अनुमति दी जाएगी। अब तक कई जगहों पर मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था, जिससे मतदाताओं को असुविधा होती थी। नई व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर सुरक्षित जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि मतदाताओं को अधिकतम सुविधा देना भी है। रंगीन फोटो, बड़े अक्षरों में नाम, सीमित मतदाता संख्या और मोबाइल जमा सुविधा जैसे कदम उसी दिशा में उठाए गए हैं। असम में चुनावी माहौल के बीच आयोग की ये घोषणाएं प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मतदाता-हितैषी बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं।

गुरु घासीदास के अनुयायियों का दल पावन गिरौदपुरी धाम के लिए हुआ रवाना

रायपुर. गुरु घासीदास के अनुयायियों का दल पावन गिरौदपुरी धाम के लिए हुआ रवाना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन परिसर से “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का शुभारंभ किया। उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर पावन गिरौदपुरी धाम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना कर गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण किया तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।             मुख्यमंत्री  साय ने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास बाबा का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पदयात्रा समाज में सद्भावना, समरसता और भाईचारे को और सुदृढ़ करेगी।  साय ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामाजिक हितों को गति देने हेतु विशेष प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। पदयात्रा के उपरांत विशाल मेले के आयोजन की जानकारी भी उन्होंने दी।              कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी से सामाजिक भेदभाव और द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएगी। कार्यक्रम में धर्मगुरु गुरु  बालदास साहेब, विधायक  ललित चंद्राकर, विधायक  मोतीलाल साहू, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष  प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, संत समाज के प्रतिनिधि एवं सर्व समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।                   गौरतलब है कि रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक प्रस्तावित “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का आयोजन 18 से 22 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इस दौरान गिरौदपुरी धाम मेले में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए।

जेपी अस्पताल में आग से हड़कंप, सुरक्षित निकाले गए मरीज; मौके पर दमकल

भोपाल।  राजधानी के प्रमुख शासकीय जय प्रकाश (जेपी) अस्पताल में बुधवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब ओपीडी ब्लॉक की पहली मंजिल पर स्थित स्टोर रूम से अचानक आग की लपटें उठने लगीं। दोपहर में हुई इस घटना ने अस्पताल के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी। प्लास्टिक और सर्जिकल सामान जलने से निकला काला धुआं चंद मिनटों में पूरे परिसर में फैल गया, जिससे ओपीडी में मौजूद डॉक्टर और मरीज जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। करीब 45 मिनट तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा गार्ड हरिदेव का अदम्य साहस… ताला तोड़कर बुझाई आग जब आग लगी, तब स्टोर रूम का गेट बंद था और चाबी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में सुरक्षा गार्ड हरिदेव यादव ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए गेट का ताला तोड़ा और फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग बुझाने में जुट गया। एक के बाद एक करीब आठ कंटेनर खाली करने के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान धुआं फेफड़ों में भरने से हरिदेव की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। दमकल की गाड़ियां सूचना के 30 मिनट बाद पहुंचीं, तब तक गार्ड आग बुझा चुका था। लाखों के स्प्रिंकलर हुए फेल, सिस्टम का नहीं हुआ था हैंडओवर हैरानी की बात यह है कि बीते साल अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए ऑटोमैटिक वाटर स्प्रिंकलर और फायर डिटेक्शन सिस्टम ने काम ही नहीं किया। जांच में सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने अब तक फायर सेफ्टी एजेंसी को सिस्टम का हैंडओवर ही नहीं दिया था, जिसके चलते आधुनिक उपकरण केवल दीवार की शोभा बढ़ा रहे थे। जेपी अस्पताल में हुई आगजनी की घटना की प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट की बात सामने आ रही है। अस्पताल में फायर सेफ्टी उपकरणों के हैंडओवर और उनके संचालन में हुई देरी को लेकर सिविल सर्जन से रिपोर्ट तलब की गई है। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला अस्पतालों को पुनः फायर ऑडिट के निर्देश दिए गए हैं। – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल  

आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश के लिए उपयुक्त

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "कर्मयोगी बनें" की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं है, राष्ट्र के भविष्य की कार्यशालाएं हैं। भगवद्गीता में कहा गया है कि कर्म को उत्कृष्टता और दक्षता के साथ करना ही योग है। आज जब हम "कर्म योगी शिक्षाविद्" की बात करते हैं, तो हम केवल एक आदर्श नहीं गढ़ रहे, बल्कि एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें। संस्थान नियमों के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिये संचालित हों। विद्यार्थी केवल नौकरी न खोजें, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। हमें शिक्षण को अधिक प्रासंगिक और जीवन सापेक्ष बनाना होगा। अनुसंधान की सामाजिक उपयोगिता पर भी और ध्यान अपेक्षित है। डिग्री और रोजगार के बीच जो दूरी है, उसे हमें खत्म करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, इसे दृष्टिगत रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय आरंभ किया गया है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों में अलग-अलग दक्षता वाले कर्मियों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वहां के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई आदि तकनीकी संस्थाओं में कोर्स आरंभ कर रही है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और युवा अपनी क्षमता और योग्यता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इन्हीं गतिविधियों से कर्मयोगी बनने का स्वप्न साकार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बजट को 5 वर्ष में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए चरणबद्ध रूप से पांच लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। हर वर्ष एक क्षेत्र पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सम्बद्ध 16 विभागों के लक्ष्य समग्र रूप से तय किए गए हैं। इससे किसान की आय को दोगुना करने का राज्य सरकार का संकल्प भी पूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें सहकर्मी संस्कृति को पुनर्जीवित करना होगा। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि अपने कर्तव्य का पालन ही श्रेष्ठ है। हमने "अभ्युदय मध्यप्रदेश" का जो संकल्प लिया है, उसमें शिक्षा केंद्रीय भूमिका निभाती है। हम यदि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें विकसित विश्वविद्यालयों का निर्माण करना होगा। मध्यप्रदेश को मूल्य आधारित, गुणवत्ता संपन्न और रोजगार सक्षम शिक्षा का मॉडल राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। 'कर्मयोगी बने' कार्यशाला इसी दिशा में एक गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास है। कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी के सदस्य प्रो. आर. बालासुब्रमणियम, जेएनयू नई दिल्ली की कुलपति प्रो. शांति धुलिपुडी पंडित, यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के कन्वीयर डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, कुलसचिव और शिक्षाविद उपस्थित थे।  

भारत एआई में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, PM से मुलाकात के बाद बोले गूगल प्रमुख पिचाई

नई दिल्ली गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने राजधानी दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की। पिचाई भारत में आयोजित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने आए हैं और 20 फरवरी को समिट में मुख्य भाषण देंगे। भारत पहुंचने पर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत लौटकर खुशी हो रही है और यहां हमेशा की तरह गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारत पहुंचने पर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत लौटकर खुशी हो रही है और यहां हमेशा की तरह गर्मजोशी से स्वागत किया गया।   पीएम मोदी ने क्या कहा? पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान श्री सुंदर पिचाई से मिलकर बेहद खुशी हुई। हमने एआई के क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे कार्यों और इस क्षेत्र में हमारे प्रतिभाशाली छात्रों और पेशेवरों के साथ गूगल कैसे काम कर सकता है, इस बारे में चर्चा की। गूगल देश के एआई परिवर्तन में साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध पिचाई ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में असाधारण प्रगति के लिए तैयार है और गूगल देश के एआई परिवर्तन में साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एआई हमारे जीवन का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बदलाव है, जो स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर डायग्नोस्टिक्स से लेकर किसानों को रियल-टाइम अलर्ट देने जैसे बड़े स्तर की चुनौतियों को हल करने में सक्षम है। पिचाई ने भारत की विविधता, बहुभाषी पारिस्थितिकी और मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नवाचार के लिए मजबूत आधार बताते हुए कहा कि यह वैश्विक स्तर पर एआई के लोकतांत्रिक उपयोग का एक मॉडल बन सकता है। उन्होंने जोर दिया कि एआई का विकास भरोसे, सुरक्षा और समावेशिता को प्राथमिकता देते हुए होना चाहिए, ताकि तकनीक स्थानीय भाषाओं और संदर्भों में लोगों तक वास्तविक लाभ पहुंचा सके। इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव की घोषणा इस दौरान पिचाई ने 'इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव' की भी घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका, भारत और दक्षिणी गोलार्ध के कई क्षेत्रों के बीच एआई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नए सबसी केबल रूट विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गूगल भारत में फुल-स्टैक कनेक्टिविटी पर काम कर रहा है और भविष्य को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने भारत में 15 अरब डॉलर के एआई हब की योजना का भी जिक्र किया, जिसमें गीगावॉट-स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे शामिल होगा, जिससे रोजगार सृजन और उन्नत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। गूगल ने स्किलिंग कार्यक्रमों की घोषणा इसके साथ ही गूगल ने स्किलिंग कार्यक्रमों की भी घोषणा की, जिसमें अंग्रेजी और हिंदी में गूगल एआई प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल है, जो छात्रों और शुरुआती करियर के पेशेवरों को लक्षित करेगा। अन्य पहलों में कर्मयोगी भारत के साथ 2 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को समर्थन, अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ 10,000 स्कूलों में जेन एआई टूल्स की शुरुआत और 30 मिलियन डॉलर का 'एआई फॉर साइंस इम्पैक्ट चैलेंज' भी शामिल है। पिचाई ने कहा कि एआई का सबसे बड़ा प्रभाव तब होता है जब इसे समुदायों को समझने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर विकसित और लागू किया जाए, और इसी दिशा में आईआईटी, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय संस्थानों के साथ साझेदारी के जरिए जिम्मेदारीपूर्ण और व्यापक स्तर पर एआई पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।  

जनसंख्या संतुलन पर मोहन भागवत की चिंता, हिंदू समाज से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील

लखनऊ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन उसे सजग और संगठित रहना चाहिए। उन्होंने यह बात लखनऊ स्थित विद्या भारती के भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, सरस्वती कुंज, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान कही। डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू परिवारों को कम से कम तीन बच्चों का संकल्प लेना चाहिए। उनका तर्क था कि जिन समाजों में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत कम हो जाती है, वे धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाते हैं। 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता इसके बाद माधव सभागार में आयोजित 'कार्यकर्ता कुटुंब मिलन' कार्यक्रम में उन्होंने 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पुनः हिंदू धर्म में लौटते हैं, उनके साथ संवाद और सहयोग बनाए रखना चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों की भागीदारी इस कार्यक्रम में सिख, बौद्ध और जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

जनजातीय अस्मिता और स्वाभिमान को सशक्त करने का किया आह्वान

रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने जशपुर जिले के डांडटोली में कोल विद्रोह के महानायक, अमर शहीद वीर बुधु भगत की 234 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उरांव समाज के लिए निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा उपस्थित जनसमूह को शुभकामनाएं प्रदान कीं। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि अमर शहीद वीर बुधु भगत ने जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उनका जीवन संघर्ष, साहस और संगठन शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास के संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक उसके प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि “अमर शहीद वीर बुधु भगत का बलिदान हमें अन्याय और शोषण के विरुद्ध     दृढ़तापूर्वक खड़े रहने की प्रेरणा देता है। उनका संघर्ष केवल इतिहास की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है।” ज्ञातव्य है कि वीर बुधु भगत की जयंती प्रतिवर्ष 17 फरवरी को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 234वीं जयंती मनाई गई। वे उरांव समुदाय से थे और 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक काल में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले प्रमुख जनजातीय क्रांतिकारी थे। उन्होंने 1831-32 के कोल विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों, अत्यधिक कर वसूली और स्थानीय शोषण के विरुद्ध जनजागरण किया। उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज संगठित हुआ और विदेशी शासन को चुनौती दी। अंग्रेजी शासन ने उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए सैन्य अभियान चलाया। संघर्ष के दौरान 13 फरवरी 1832 को वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनका बलिदान जनजातीय अस्मिता और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट है। समारोह में जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठजनों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने अमर शहीद वीर बुधु भगत को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

जनगणना 2027 पर मुख्यमंत्री साय का संदेश— हर व्यक्ति, हर परिवार जरूरी

रायपुर  भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है. उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है. यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा. एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है. उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी. मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी. छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा. यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है. यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा. प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है. उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए. मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो. उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए. साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने वर्ष 2001 के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए. मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे. इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है. यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है. उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी. उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है. इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्यों के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए. राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

मध्यप्रदेश के नगरों के युगांतकारी परिवर्तन और आधुनिक अधोसंरचना का मार्ग प्रशस्त करेगा यह बजट : मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश के शहरी परिदृश्य में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने वाला एक दूरदर्शी रोडमैप बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश के नगरों के सुनियोजित विकास हेतु पूर्णतः संकल्पित है, जिसकी स्पष्ट झलक विभागीय बजट प्रावधानों में परिलक्षित होती है। यह बजट न केवल नगरीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता को संवर्धित करेगा, बल्कि विकास की उपलब्धता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाकर नागरिकों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करेगा। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि आगामी 'सिंहस्थ-2028' को वैश्विक भव्यता और दिव्यता प्रदान करने के लिए बजट में 3060 करोड़ रूपये का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन के प्रति शासन की अटूट आस्था को दर्शाता है। नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से स्वावलंबी और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रवेश कर के हस्तांतरण हेतु 3600 करोड़ रूपये तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुरूप स्थानीय निकायों हेतु 2057 करोड़ रूपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है, जिससे स्थानीय स्वशासन की नींव और अधिक सुदृढ़ होगी। अधोसंरचना विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं के मध्य अनूठे समन्वय पर बल देते हुए मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) बी.एल.सी. के अंतर्गत आवंटित 2000 करोड़ रूपये शहरी निर्धनों के 'निज निवास' के स्वप्न को साकार करने में निर्णायक सिद्ध होगी। साथ ही, अमृत 2.0 (मिलियन प्लस शहरों हेतु) 1418 करोड़ रूपये और स्थानीय निकायों को मूलभूत सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 1058 करोड़ रूपये के विशेष अनुदान की व्यवस्था की गई है। महानगरों में त्वरित, सुगम एवं प्रदूषण मुक्त यातायात सुनिश्चित करने हेतु मेट्रो रेल परियोजना के लिए 656 करोड़ रूपये तथा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक केंद्रों के उत्थान हेतु गीता भवन योजना के अंतर्गत 60 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। मंत्री  विजयवर्गीय ने विश्वास जताया कि यह बजट प्रदेश के 'सर्वस्पर्शी समावेशी विकास' का आधार स्तंभ बनेगा और 'समृद्ध मध्यप्रदेश @2047' के दूरगामी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक सशक्त एवं निर्णायक कदम सिद्ध होगा।