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MP में बढ़ी गर्मी, खरगोन में तापमान 32.8 डिग्री पार, मौसम विभाग की चेतावनी

भोपाल  फरवरी का महीना मध्य प्रदेश में इस बार अपने अलग ही रंग दिखा रहा है। जैसे-जैसे महीना आगे बढ़ रहा है, मौसम अलग ही मिजाज दिखा रहा है। दिन के समय तेज धूप और गर्मी का एहसास होने लगा है, जबकि देर रात और सुबह ठंड का असर बरकरार है। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और अन्य बड़े शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। कई जिलों में 32 डिग्री के पार तापमान मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के कई शहरों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है. खरगोन 32.8 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया. वहीं मंडला और खंडवा में भी तापमान 32 डिग्री के आसपास पहुंच गया है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया. रात में भी बढ़ी गर्माहट दिन ही नहीं, रात के तापमान में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. पहले जहां रात में ठंड का अहसास होता था, अब हल्की गर्माहट बनी हुई है. इससे साफ है कि मौसम अब पूरी तरह बदलने की ओर है. दिन में गर्मी… रात में ठंड मध्यप्रदेश में फरवरी के इस दूसरे हफ्ते में मौसम का दोहरा मिजाज साफ देखने को मिल रहा है। दिन के समय तेज धूप और बढ़ते तापमान से गर्मी का एहसास बढ़ गया है। वहीं रात और सुबह का मौसम ठंडा बना हुआ है। राजधानी भोपाल और इंदौर में दिन का अधिकतम तापमान लगभग 30.2°C और 30.3°C दर्ज किया गया, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 13.4°C और 15.9°C के आसपास रहा। ग्वालियर में दिन का अधिकतम तापमान 29.4°C और न्यूनतम 13.6°C दर्ज हुआ। उज्जैन में अधिकतम तापमान 31°C और न्यूनतम 15.5°C रहा। इससे पता चलता है कि, दिन और रात के बीच तापमान का फर्क अब भी काफी है, जिससे मौसम का दोहरा स्वरूप बना हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ और ट्रफ सिस्टम का असर मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय दो पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) और ट्रफ सिस्टम के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाए रह सकते हैं। फिलहाल बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में बादल बनाए रह सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में सिस्टम के असर से कई शहरों में बादल बने हुए हैं। अगले 3-4 दिन तक ठंड का दौर जारी रहेगा। खासकर देर रात और सुबह ठंड अधिक महसूस होगी। दिन और रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी का ट्रेंड देखा जा सकता है, लेकिन सर्दी बहुत तेज नहीं होगी। क्यों बढ़ रहा तापमान? मौसम केंद्र का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल रही हैं. किसी प्रभावी मौसम प्रणाली के सक्रिय न होने के कारण धूप तेज हो गई है. इसी वजह से तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है. हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आने वाले दिनों में हल्का उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है. आगे क्या रहेगा हाल? मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में गर्मी का असर और तेज हो सकता है. अगर यही स्थिति बनी रही तो मार्च की शुरुआत से पहले ही प्रदेश में तेज गर्मी दस्तक दे सकती है.

राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का मामला, केंद्र सरकार नोटिस भेजने की तैयारी में

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ BJP के सांसद निशिकांत दुबे ने सदन में एक 'सब्सटेंटिव मोशन' (Substantive Motion) पेश किया है। इस प्रस्ताव के जरिए उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द करने और उन पर जीवनभर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाने की मांग की है।   क्या है पूरा मामला? निशिकांत दुबे ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में साफ किया कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक 'ठोस प्रस्ताव' (Substantive Motion) दिया है। दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसी बाहरी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। प्रस्ताव में की गई मुख्य मांगें भाजपा सांसद ने अपने प्रस्ताव में गंभीर आरोप लगाते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:     राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता को तुरंत खत्म किया जाए।     उन्हें भविष्य में किसी भी चुनाव को लड़ने के लिए आजीवन अयोग्य घोषित किया जाए।     दुबे ने कहा कि इस मामले पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए कि किस तरह विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को भ्रमित किया जा रहा है। किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर पलटवार केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि हम सदन को गुमराह करने और बेबुनियाद बयान देने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस फाइल करने जा रहे हैं। लोकसभा और राज्यसभा में प्रोसीजर और कंडक्ट ऑफ बिजनेस के बहुत साफ नियम हैं। जब कोई सदस्य दूसरे सदस्य पर गंभीर आरोप लगाना चाहता है, तो आपको नोटिस देना होगा और आरोप को साबित भी करना होगा। राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा जिस पर मचा घमासान किरेन रिजिजू ने कहा कि मैंने रिक्वेस्ट की है कि राहुल गांधी को सदन में बुलाया जाए ताकि वे अपनी बातों को साबित कर सकें। राहुल गांधी ने सरकार और प्रधानमंत्री पर बेकार और झूठे आरोप लगाए हैं, यह कहते हुए कि प्रधानमंत्री ने भारत और भारतीय हितों को बेच दिया है। किस आधार पर? उन्होंने बिना कोई नोटिस दिए हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाया है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया है और देश का विदेशी ताकतों के सामने 'समर्पण' कर दिया है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार विरोध हुआ। यूएस ट्रेड डील के मुद्दे पर बोले राहुल गांधी राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करते समय भारत के हितों को शर्मनाक तरीके से गिरवी रख दिया। उन्होंने इसे 'नॉनसेंस' कदम बताते हुए कहा कि सरकार ने कृषि, आईटी, डेटा और लोगों के हितों से जुड़े कई मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकाव दिखाया है। राहुल गांधी के बयान पर किरेन रिजिजू ने जताई आपत्ति उनके इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणियों को 'बेतुका' बताया और कहा कि आलोचना रचनात्मक होनी चाहिए। रिजिजू ने मांग की कि असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। सदन की कार्यवाही देख रहे अध्यक्षीय पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी से आपत्तिजनक शब्दों से बचने को कहा। राहुल गांधी ने इसे स्वीकार किया, लेकिन सरकार को घेरना जारी रखा। इस तरह सदन में शुरू हो गया हंगामे और नारेबाजी का दौर सदन में उस समय हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई जब विपक्षी सदस्यों ने राहुल के 'सरेंडर' वाले आरोप का समर्थन किया, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्य उनका विरोध करते रहे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह सरकार देश, किसानों, आईटी सेक्टर और ऊर्जा सुरक्षा को बेच चुकी है और अमेरिका के सामने पूरी तरह झुक गई है। इस पर किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो देश को बेच सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के अब तक के सबसे मजबूत नेता हैं। रुचिर शुक्ला निशिकांत दुबे का बयान सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "मैंने आज लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया है कि कैसे वह सोरोस जैसी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। मैंने प्रस्ताव में कहा है कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए, उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए और उन्हें जीवन भर चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।"

सोना-चांदी में तेज गिरावट, निवेशकों को झटका या खरीदारी का मौका?

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. इस साल की शुरुआत में जहां दोनों कीमती धातुओं ने रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए पहले रिकॉर्ड बनाए, फिर अचानक ये क्रैश (Gold-Silver Price Crash) नजर आईं. इसके बाद लगातार इसके भाव में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को जहां चांदी फिर सस्ती (Silver Price Fall) हो गई, तो सोने का भाव भी कम (Gold Rate Fall) हुआ है. अब अपने हाई से चांदी 1.59 लाख रुपये से ज्यादा कम रेट पर मिल रही है.  कहां तक टूटेगा Silver Rate?  चांदी की कीमत में गुरुवार को फिर से गिरावट देखने को मिली है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव बीते कारोबारी दिन 2,63,018 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था और ये खुलने के साथ ही 2,60,453 रुपये तक फिसल गया. यानी एक झटके में 1 Kg Silver Price 2,565 रुपये कम हो गया. कुछ एक्सपर्ट्स का आने वाले समय में इसके 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक टूटने का अनुमान जता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि ये एक बार फिर से तेज रफ्तार पकड़ सकती है.  हाई से अब इतनी सस्ती चांदी   इस साल के शुरुआती जनवरी महीने में ही चांदी ने लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था. बीते 29 जनवरी को Silver Price रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर के पार निकला था और 4,20,048 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल पर पहुंचा था. हालांकि, इसके उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली. गुरुवार के ओपनिंग भाव से तुलना करें, तो अभी 1 किलो चांदी 1,59,595 रुपये तक सस्ती (Silver Cheaper) मिल रही है.  Gold Rate भी चांदी के साथ फिसला गुरुवार को कमोडिटी मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर न सिर्फ चांदी की कीमत टूटी है, बल्कि सोने का भाव भी फिसला है और 1000 रुपये से ज्यादा सस्ता हो गया है. बीते कारोबारी दिन बुधवार को 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,58,755 रुपये पर क्लोज हुआ था और ये ओपनिंग के साथ ही गिरकर 1,57,701 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया. यानी ये 1,054 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है.  सोना भी हाई से काफी सस्ता  चांदी की तरह ही सोने की कीमत ने भी बीते 29 जनवरी को ही अपना रिकॉर्ड हाई लेवल टच किया था. जी हां, ये तूफानी तेजी से भागते हुए 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर जा पहुंचा था और इसमें भी लगातार गिरावट देखने को मिली. Gold Rate MCX High से तुलना करें, तो इसका वायदा भाव हाई से अभी 35,395 रुपये कम चल रहा है. 

जशपुर के सरकारी स्कूल में शिक्षक ने बांटे बाइबिल

जशपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केरसई में नियमों की अनदेखी कर छात्रों को बाइबिल बांटने का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय के एक व्याख्याता ने कक्षा में बाइबिल की प्रतियां वितरित की, जिसके बाद विद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी को व्याख्याता दीपक तिग्गा विलंब से विद्यालय पहुंचे और बिना प्राचार्य को सूचित किए सीधे कक्षा में चले गए, जहां विद्यार्थियों के बीच उन्होंने बाइबिल की पुस्तिकाएं वितरित की। मामला सामने आने के बाद छात्रों के बैग की जांच की गई, जिसमें बाइबिल की 14 प्रतियां बरामद होने की बात कही जा रही है। प्राचार्य ने इसे गंभीर प्रशासनिक उल्लंघन मानते हुए संबंधित व्याख्याता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। व्याख्याता के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग पूरे घटनाक्रम की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को दी गई है। साथ ही आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। फिलहाल प्रकरण की जांच की जा रही है। वहीं व्याख्याता के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

रूस-अमेरिका टकराव: पुतिन का जुकरबर्ग को सबक, चीन पर भी नजर

मॉस्को  मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने आरोप लगाया है कि रूस ने देश में उसकी सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है, ताकि यूजर्स को स्‍टेट सपोर्टेड डोमेस्टिक ऐप की ओर मोड़ा जा सके. Meta Platforms के स्वामित्व वाले इस ऐप के प्रवक्ता ने बताया कि रूस का यह कदम इंटरनेट स्पेस पर नियंत्रण बढ़ाने और विदेशी टेक कंपनियों की भूमिका सीमित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. तो क्‍या रूस भी चीन की राह पर चलने की तैयारी कर रहा है. दिलचस्‍प है कि चीन ने मैसेजिंग एप से लेकर सोशल साइट्स तक खुद की डेवलप की है. बीजिंग का उद्देश्‍य है कि इसके जरिये देश में पश्चिमी देशों के प्रभाव को रोका जा सकेगा और अमेरिका-यूरोप के टेक्‍नोलॉजी मोनोपोली पर लगाम लगाया जाएगा. अब रूस के कदम ने एक तरफ जहां मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग को उनकी औकात दिखा दी तो दूसरी तरफ अमेरिकी दादागिरी को भी ठोस चुनौती दी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद मॉस्को और वेस्‍टर्न टेक्‍नोलॉजिकल कंपनियों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है. रूसी अधिकारी घरेलू स्तर पर विकसित ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे सरकार समर्थित बताया जा रहा है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस ऐप का इस्तेमाल यूजर्स की निगरानी और डेटा ट्रैकिंग के लिए किया जा सकता है, लेकिन सरकारी मीडिया ने इन आरोपों को निराधार करार दिया है. WhatsApp ने कहा कि रूस द्वारा उठाए गए कदम यूजर्स को एक सरकारी-स्वामित्व वाले सर्विलांस ऐप की ओर धकेलने की कोशिश है. कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘हम उपयोगकर्ताओं को जुड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे.’ हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस में सेवा बहाली को लेकर आगे की रणनीति क्या होगी. WhatsApp पर सख्‍ती इस बीच, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए वीडियो बयान में कहा कि WhatsApp की वापसी रूसी कानूनों के पालन पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर Meta कॉरपोरेशन कानून का पालन करती है और रूसी अधिकारियों के साथ संवाद करती है, तो समझौते की संभावना बन सकती है. लेकिन यदि कंपनी अडिग रुख अपनाती है और कानून के अनुरूप ढलने के लिए तैयार नहीं होती, तो कोई संभावना नहीं है.’ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के संचार नियामक रोसकोमनादज़ोर ने WhatsApp को अपने ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है. बताया जाता है कि रूस में इस ऐप के करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाता है. इस कदम को रूस की डिजिटल नीति में एक और सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है. Apple पर भी गाज रूस ने पिछले साल WhatsApp और टेलीग्राम जैसी विदेशी मैसेजिंग सेवाओं पर कुछ कॉल सुविधाओं को सीमित करना शुरू कर दिया था. अधिकारियों का आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी और आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने से इनकार करते हैं. इसके अलावा दिसंबर में Apple के वीडियो-कॉलिंग ऐप FaceTime को भी ब्लॉक कर दिया गया था. टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल ड्यूरोव पहले ही कह चुके हैं कि उनकी कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर्स की गोपनीयता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी. वहीं, मानवाधिकार संगठनों और डिजिटल राइट ग्रुप्‍स का कहना है कि रूस द्वारा घरेलू प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देना और विदेशी सेवाओं को सीमित करना इंटरनेट स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकता है. डिजिटल संप्रभुता विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी कंपनियों और सरकारों के बीच नियामक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल संप्रभुता, डेटा नियंत्रण और नागरिकों की ऑनलाइन स्वतंत्रता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है. WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म के संभावित पूर्ण प्रतिबंध से रूस में लाखों यूजर्स की रोजमर्रा की संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. संकेत साफ है कि रूस और वेस्‍टर्न टेक कंपनियों के बीच टकराव आने वाले समय में और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है.

सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के भत्तों में बदलाव, राज्य सरकार ने नई दरें तय की

भोपाल मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को लेकर एक बडी खबर आई है। जो प्रदेश के लाखो कर्मचारियो के लिए अहम हो सकता है। दरअसल निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के भत्तों पर बड़ा फैसला आया है। यह फैसला यात्रा भत्ता की नई दरों को लेकर है। दरअसल मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम MPLUN ने यात्रा भत्ता की नई दरें लागू करने का निर्णय लिया है। निगम यात्रा भत्तों की नई दरों को किया गया लागू निगम की संचालक मंडल बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है। दरअसल लघु उद्योग निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संचालक मंडल की बैठक बड़ा कुछ लेकर आई है। बैठक में यात्रा भत्तों के संबंध में बहुत अहम निर्णय लिया गया है । संचालक मंडल ने निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के यात्रा भत्तों की नई दरें लागू करने का निर्णय लिया। इसमें खास बात यह है कि अब कर्मचारियों और अधिकारियों को मध्यप्रदेश शासन के समान ही यात्रा भत्ता देय होगा। आपको बता दें कि  लघु उद्योग निगम के संचालक मंडल की यह 294 वीं बैठक थी। बैठक में एमएसएमई प्रमुख सचिव और निगम प्रबंध संचालक दिलीप कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद थे।इस दौरान आडिट रिपोर्ट की समीक्षा भी गई। वहीं संचालक मंडल की बैठक में ये भी फैसला लिया है कि निगम आय बढ़ाने के लिए आगामी वित्त वर्ष में बड़ी मात्रा में कार्य आदेश जारी करेगा। लिहाजा निगम कर्मचारियों के लिए यात्रा भत्ता की नई दरें लागू होने का फैसला काफी बड़ा है। ‍मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम MPLUN के संचालक मंडल की बैठक राज्य के एमएसएमई मंत्री व निगम के अध्यक्ष चैतन्य कुमार काश्यप की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर जहां चर्चा हुई वहीं विचार विमर्श भी किया गया।

हड़ताल का असर: कई जगह कर्मचारी सिर्फ सांकेतिक विरोध में शामिल, स्कूल और बाजार सामान्य

भोपाल  केंद्र सरकार की ' नो वर्क नो पे' (No Work No Pay) सहित अन्य जनविरोधी और कॉर्पोरेट परस्त आर्थिक नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी गुरुवार को देशव्यापी आम हड़ताल का बिगुल फूंका गया है। ग्वालियर में भी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को छोड़कर सभी राष्ट्रीयकृत बैंक इस हड़ताल में शामिल होने जा रहे हैं। नए लेबर लॉ समेत कई मुद्दों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठन आज हड़ताल कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में इसका मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।जबलपुर और इटारसी में डिफेंस फैक्टरियों के सामने कर्मचारियों ने प्रदर्शन ​​किया। इटारसी में एक घंटा विरोध करने के बाद कर्मचारी काम पर लौट गए। हालांकि, इन जगह स्कूल, कॉलेज और बाजार खुले हुए हैं। हड़ताल में ट्रेड यूनियन के संयुक्त मोर्चा- आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, बैंक, बीमा, केंद्रीय कर्मचारी, बीएसएनएल के संगठन शामिल हैं।मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया, हड़ताल में सरकारी के साथ प्राइवेट बैंक भी शामिल होंगे। भारतीय स्टेट बैंक यूनियन ने हड़ताल का समर्थन किया है, लेकिन वह सीधे तौर पर हड़ताल में शामिल नहीं रहेगा। हड़ताल का असर बीमा सेक्टर पर भी पड़ेगा। भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहेंगे। वहीं, बीएसएनएल-डाक विभाग में भी हड़ताल का असर दिखाई देगा। बीओआइएसयूइयू के एजीएस सौरभ सिकरवार ने बताया कि ग्वालियर में राष्ट्रीयकृत 11 बैंकों की 70 शाखाओं के 900 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी इस हड़ताल में 'नो वर्क-नो पे' के आधार पर शामिल होंगे। हड़ताल के चलते कल सुबह 9 से 11 बजे तक फूलबाग स्थित बैंक ऑफ इंडिया के सामने जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान बैंक, बीमा, बीएसएनएल, डाक, आयकर और आंगनबाड़ी जैसे विभागों में भी काम पूरी तरह ठप रहेगा।  हड़ताल में ये भी शामिल ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के प्रवक्ता वीके शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर के दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं सौ से अधिक स्वतंत्र ट्रेड यूनियंस के आह्वान पर देशभर के 25 अधिकारी- इस राष्ट्रव्यापी आम हड़‌ताल में भाग लेंगे। इस हड़ताल में बैंक, बीमा, केंद्र, बीएसएनएल, पोस्टल, आयकर, आंगनबाड़ी, आशाकर्मी, मध्यान्ह भोजन कर्मी, खेतिहर मजदूर, किसान संघ, पेंशनर्स, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, हम्माल मजदूर सभा आदि से संबंधित यूनियंस के साथ-साथ इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआइयूटीयूसी, सेवा समेत दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं अन्य संस्थानों में कार्यरत ट्रेड यूनियंस के सदस्य भाग ले रहे हैं। संगठनों की प्रमुख मांगें     चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द करने की मांग।     ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेने की मांग।     बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग।     SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस लेने की मांग।     मनरेगा की बहाली की मांग।     विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को रद्द करने की मांग।

वन मेले हर दौर की जरूरत, वनौषधियों से असंभव बीमारी का भी इलाज संभव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय समुदाय की समृद्धि का आधार बन रहे हैं वन मेले : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन मेले हर दौर की जरूरत, वनौषधियों से असंभव बीमारी का भी इलाज संभव "समृद्ध वन-खुशहाल जन की थीम पर उज्जैन में पहली बार लगा ‘ महाकाल वन मेला’ महाकाल स्मृति उपहार किट और महाकाल वन प्रसादम् का किया शुभारंभ  वनौषधियों के जानकार वनरक्षक  जगदीश प्रसाद अहिरवार प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित मुख्यमंत्री ने वन मेले का किया शुभारंभ, 16 फरवरी तक चलेगा वन मेला उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन हमारी वसुंधरा का वैभव हैं, धरती की धरोहर और धरा का अलंकरण हैं। वन हमारी राष्ट्रीय पूंजी हैं। इनका संरक्षण एवं संवर्धन करना हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन मेले प्रदेश की समृद्ध जैविक और वानस्पतिक विविधताओं को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं। इनके जरिए हमारे जनजातीय भाई-बहनों को अपने वनोत्पाद और काष्ठ शिल्प विक्रय करने का सुनहरा मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि ‘ महाकाल वन मेले’ की आज से शुरूआत हो गई है। ये मेला शीघ्र ही अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। मेले में प्रदर्शित जड़ी-बूटियां तथा विभिन्न प्रकार के शुद्ध एवं सुरक्षित अकाष्ठीय लघु वनोत्पाद आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से रोगोपचार में बेहद उपयोगी होते हैं। वनौषधियां हर रोग के इलाज में कारगर साबित हो रही हैं। इनसे असंभव रोग का इलाज भी संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय बजट-2026 में एम्स की तर्ज पर देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की गई है। इनमें से एक अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान भगवान धनवंतरी की कर्मभूमि और सिंहस्थ भूमि उज्जैन में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में पहली बार आयोजित ‘ महाकाल वन मेला-2026’ का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस वन मेले में नागरिकों को प्राकृतिक रंग-गुलाल मिलेंगे। इसमें नाड़ी वैद्य और आयुर्वेदिक चिकित्सक भी अपनी सेवाएं देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन मेले में प्रदर्शित काष्ठ और बांस से निर्मित एथनिक क्रॉफ्ट आइटम्स न केवल पारम्परिक शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि सबके घरों की शोभा भी बढ़ाते हैं। उन्होंने उज्जैन के नागरिकों से अपील की कि वे इस वन मेले का भरपूर लाभ उठाएं और प्रदेश की वन संपदा तथा जनजातीय उत्पादों का उपयोग कर सबको प्रोत्साहित भी करें। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ‘महाकाल वन मेले’ के जरिए स्थानीय वन उत्पादों और शिल्पकारों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। पर्यावरण जागरूकता, आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रचार-प्रसार और आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक सार्थक कदम है। उज्जैन के दशहरा मैदान में यह वन मेला 16 फरवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार तेजी से प्रदेश में मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों की संख्या में वृद्धि कर रही है। पिछले साल हमने विभिन्न जिलों में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेज शुरू किए हैं। इस साल हम और भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विंध्य हर्बल के प्राकृतिक रंग-गुलाल, महाकाल स्मृति उपहार किट एवं 'महाकाल वन प्रसादम्' का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना जिले के वन औषधियों से उपचार पद्धति के विशेष जानकार वनरक्षक  जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने 25 जनवरी को 'मन की बात' में वनरक्षक  अहिरवार द्वारा वनौषधियों के देशज ज्ञान के संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की थी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय और वनांचल को समृद्धि देने के लिए भोपाल और उज्जैन जैसे वन मेले प्रदेश भर में लगाए जाने की आवश्यकता है। उज्जैन में महाशिवरात्रि और विक्रमोत्सव के अवसर पर आयोजित वन मेला प्रदेशवासियों के लिए अद्भुत है। वन विभाग ने प्राकृतिक रूप से महाकाल वन प्रसादम् तैयार किया है। इसमें काष्ठ से बने गमले में एक पौधा लगाया गया है। यह गमला महाकाल को भेंट स्वरूप दिया जाएगा। वापस मिलने पर इसे किसी भी जगह पर सीधे रोपित कर दिया जाएगा। काष्ठ गलकर खाद बन जाएगा और पौधा बिना गमला निकालते ही निर्बाध रूप से पल्लवित होता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के  महाकाल वन मेले में महुआ के लड्डू, अन्नों से बनी मिष्ठान्न सहित अनेक वनोपज उत्पाद भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के वन मेले में आए वैद्य और चिकित्सक अनेक असाध्य रोगों के उपचार के लिए नागरिकों को नि:शुल्क सेवाएं देंगे। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में जनजातीय समुदायों की आय बढ़ाने के लिए वन विभाग लगातार काम कर रहा है। उज्जैन की धरती पर आयोजित यह वन मेला निश्चित रूप से भोपाल वन मेले की तरह सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यहां विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक औषधियां एवं बांस से बने उत्पाद उपलब्ध हैं। नागरिक इसका भरपूर लाभ उठाएं। अपर मुख्य सचिव वन एवं सहकारिता  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के शहर-शहर में वन मेला लगाने की शुरुआत की है। भोपाल के बाहर यह पहला वन मेला उज्जैन में लगाया गया है। वन मेलों के दो उद्देश्य होते हैं। इनसे जनजातीय समुदायों को तो आमदनी होती ही है, शहरी लोगों को प्राकृतिक उत्पाद खरीदने और नेचर के साथ चलने-संवरने का अवसर भी मिल जाता है। उन्होंने बताया कि म.प्र. लघु वनोपज संघ के जरिए प्रदेश के 30 लाख जनजातीय संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। भोपाल में डेढ़ माह पहले हुए वन मेले में 3 करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री हुई थी।  महाकाल वन मेला में प्रदेशभर के विभिन्न उत्पादों के 250 स्टॉल लगाए गए हैं। इसके अलावा यहां 150 से अधिक वैद्य एवं आयुर्वेदिक चिकित्सक लोगों को परामर्श प्रदान करेंगे। वन मेले के शुभारंभ अवसर पर विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक  सतीश मालवीय, विधायक  जितेंद्र पंड्या, जिला पंचायत अध्यक्ष उज्जैन मती कमला कुंवर सहित डॉ. प्रभुराम जाटवा,  उमेश सेंगर,  राजेश पांचाल,  बहादुर सिंह,  ओम जैन, वन बल प्रमुख  वीएन अंबाड़े, प्रबंध संचालक, मप्र लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा, सीएफ उज्जैन  आलोक पाठक, अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी सहित बड़ी संख्या में … Read more

सिंहस्थ 2028 के लिए अनुभवी लोगों से चर्चा कर कार्ययोजना बनाने में लें मदद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गुणवत्ताके साथ समय पर हो सिंहस्थ के सभी विकास कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ 2028 के लिए अनुभवी लोगों से चर्चा कर कार्ययोजना बनाने में लें मदद उज्जैन मेट्रो शहर के रूप में स्थापित हो रहा है, सभी कार्य हो उसी अनुरुप संवेदनशीलता के साथ जनता की कठिनाई को कम करने में बने सहभागी अधिकारी अपने कार्य संपूर्ण जिम्मेदारी के साथ युद्ध स्तर पर कराए पूर्ण अब मुख्यमंत्री निवास से भी होगी सिंहस्थ कार्यों की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में की सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा  उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उज्जैन में सिंहस्थ 2028 अंतर्गत मंत्री मंडलीय समिति से अनुशंसित अधोसरंचना के प्रगतिरत विकास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व का आयोजन विश्व के लिए अद्वितीय है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस महापर्व के आयोजन पर विश्व की निगाह रहेगी। सिंहस्थ-2028 मध्यप्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पवित्र अनुष्ठानों में शामिल हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलग-अलग विभागों के माध्यम से सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेकर समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैनवासियों से सेवाभाव की तरह कार्य करने का आहवान किया है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराएं। मुख्यमंत्री ने की किसानों की फसल की चिंता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ 2028 के प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा के दौरान गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिप्रा नदी पर घाट निर्माण के दौरान किसानों को पानी की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। इसके लिए नर्मदा जल की आपूर्ति की जाए। वतर्मान में गेहूं की फसल को सिंचाई के लिए एक पानी की और जरुरत होगी। इसके लिए शिप्रा नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित बनाए रखे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि सभी अधिकारी गंभीरता के साथ काम करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा,  संजय दुबे को निर्देश दिए है कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के काम में किसी भी तरह की रुकावट न आए। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास पर भी सिंहस्थ सेल गठित कर मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाये और जिन विभागों में अधिकारियों की कमी है, वहाँ पदस्थापना तत्काल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि अनुभवी अधिकारियों के लिए यदि सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारिेयों को रखना है तो उसके लिए भी नियमानुसार कार्यवाही कर तत्काल रुप से उन्हें रखा जाए। सिंहस्थ-2028 के लिए अब रिवर्स कैलेंडर बनाकर निर्माण कार्य तीव्र गति से पूर्ण करें। वर्तमान समय से लेकर सिंहस्थ-2028 तक दो वर्षाकाल का समय आने वाला है। इसलिए समय-सीमा में काम गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न निर्माण एजेसिंयों द्वारा किए जा रहे कार्यो की समीक्षा की, साथ ही निर्देश दिए कि जो निर्माण एजेंसियां काम कर रही है उनके संसाधनों की भी लगातार मॉनीटरिंग हो। वर्तमान समय माइक्रों मैनेजमेंट से नैनो मैनेजमेंट की ओर जाने का है। युद्ध स्तर की तैयारियां शुरु करना है। सभी अधिकारी 24 घंटे-07 दिन सक्रिय रहें। सिंहस्थ 2028 को बेहतर प्रबंधन के साथ करने के लिए उज्जैन जिले के सभी नागरिकों को जिम्मेदारी के भाव के साथ काम करने के लिए प्रेरित करें, उनको यह लगना चाहिए कि यह हमारा व्यक्तिगत काम है। इसके लिए सभी नागरिकों में जिम्मेदारी के साथ समर्पण का भाव भी पैदा करने के लिए समन्वय बनाकर कार्य करें।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रचलित निर्माण कार्यों की समय-समय पर मॉनीटरिंग हो। उन्होंने सिंहस्थ के संदर्भ में विभागों को समन्वयपूर्वक कार्य करने और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अधिकारियों को निर्देश         1. सिंहस्थ-2028 के लिए होम स्टे, धर्मशाला, स्कूल, कॉलेज आदि में व्यवस्थाओं केलिए आधारभूत संरचना तैयार करने के लिए कार्य योजना बनाई जाए।         2. उज्जैन शहर से जोड़ने वाले आसपास के गांव में होम स्टे की व्यवस्था के लिए लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाए। सिंहस्थ-2028 मेला क्षेत्र में आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं की अलग-अलग रूपरेखा बनाएं। सिंहस्थ मेले की बाहर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाने के लिए जरूरी है कि उसकी समस्त जगहों की  मैपिंग की जाए।         3. उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारी में बेहतर प्रबंधन के लिए उज्जैन में  महाशिवरात्रि, श्रावण, नागपंचमी एवं अन्य त्योहारों पर व्यवस्थाओं को प्रायोगिक रूप से बनाए और उसके अनुभवों का लाभ लेते हुए सिंहस्थ के भीड प्रबंधन कार्य योजना बने।         4. उज्जैन शहर से जुड़ने वाले दूसरे जिलों के वैकल्पिक मार्गों का चयन कर लें और इन मार्गों को गुगल मैपिंग के साथ उन्नयन भी कराया जाए, जिससे भीड़ प्रबंधन में इन मार्गों का उपयोग हो सके। साथ ही उज्जैन शहर के महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का भी चयन करें, जिससे भीड़ प्रबंधन आसानी से हो सके।         5.  मंगलनाथ,  भूखीमाता रामघाट के आसपास घाटों को जोड़ने वाले मार्गों को चिन्हित कर उन्नयन करें। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के बाहर सामाजिक सामुदायिक भवन, स्कूल, कॉलेज धर्मशाला बनाने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करें।         6. सिंहस्थ 2028 के लिए काम कर रही निर्माण एजेंसी जो समय पर काम पूरा करें उनको प्रोत्साहन स्वरूप व्यवस्था भी बना कर दें। समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री उज्जैन  गौतम टेटवाल, महापौर  मुकेश टटवाल, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा,  सतीश मालवीय,  जितेन्द्र पंड्या, नगर निगम अध्यक्ष मती कलावती यादव, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त  आशीष सिंह, एडीजी  राकेश गुप्ता, कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह एवं अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।   

US ट्रेड डील से न्यू लेबर कोड तक, इन मांगों को लेकर देशव्यापी भारत बंद

नई दिल्ली  संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। आंदोलन को INTUC, AITUC, CITU, HMS सहित कई राष्ट्रीय यूनियनों का समर्थन प्राप्त है। संगठनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ मजदूर हड़ताल में भाग ले सकते हैं. बंद के समर्थन में कई बैंक यूनियनों के शामिल होने से देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है. AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी यूनियनों ने हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज धीमा रह सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? परिवहन सेवाएं कई राज्यों में प्रभावित हो सकती हैं. बस, ऑटो और ट्रक यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक और निजी परिवहन बाधित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है. बैंकिंग सेवाओं में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं और चेक क्लीयरेंस में देरी संभव है. हालांकि, बैंक औपचारिक रूप से बंद नहीं रहेंगे. ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी.बाजार और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है. कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को समर्थन दिया है, जिससे थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. सरकारी कार्यालयों में ट्रेड यूनियनों के प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रह सकती है, जिससे कामकाज धीमा हो सकता है. स्कूल और कॉलेजों के संबंध में स्थानीय प्रशासन स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकता है. परिवहन और सुरक्षा कारणों से कुछ जिलों में छुट्टी घोषित की जा सकती है. SKM की किसानों से अपील ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के लाखों मजदूर शामिल हो सकते हैं. एसकेएम ने किसानों से अपील की है कि वे भारी संख्या में प्रदर्शनों में शामिल हों और औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाएं. उनका कहना है कि सरकार की नीतियां केवल कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जिससे आम जनता की आजीविका पर सीधा हमला हो रहा है.  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने समर्थन किया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, 'आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने सड़कों पर हैं. मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी. किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा भी छिन सकता है.' उन्होंने सरकार पर किसानों-मजदूरों की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए आगे लिखा, 'जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नजरअंदाज किया गया. क्या मोदी जी अब सुनेंगे? या उन पर किसी 'grip' की पकड़ बहुत मजबूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं.' कौन-सी सेवाएं रहेंगी सामान्य? अस्पताल, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी. दमकल विभाग, हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन पर असर नहीं पड़ेगा. डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं भी चालू रहेंगी. क्या 12 फरवरी को बैंक बंद रहेंगे? भारतीय रिजर्व बैंक या किसी बैंक की ओर से 12 फरवरी को आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया गया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन की भागीदारी के कारण सेवाओं में आंशिक बाधा आ सकती है. अगर आप 12 फरवरी को बाहर निकलने की प्लान बना रहे हैं तो अपने शहर की परिवहन व्यवस्था की स्थिति पहले से जांच लें. बैंकिंग कार्यों को संभव हो तो ऑनलाइन निपटाएं और बाजार या सरकारी कार्यालय जाने से पहले स्थानीय अपडेट अवश्य देखें. बंद की वजह: किन मुद्दों पर आंदोलन? कई किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:     भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध     चार नए लेबर कोड वापसी की मांग     सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का विरोध     पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली     न्यूनतम वेतन में वृद्धि     निर्माण और बिजली क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा     कृषि संबंधित कानूनों और नीतियों में बदलाव की मांग कई राज्यों में बस, ऑटो-रिक्शा और ट्रक यूनियनों के भी हड़ताल में शामिल होने की संभावना है, जिससे परिवहन सेवाओं पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? 1. परिवहन सेवाएं कई राज्यों में बस, ऑटो और लॉरी ड्राइवर्स यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक व निजी परिवहन प्रभावित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था में बाधा आने की संभावना है.  2. बैंकिंग सेवाएं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं. चेक क्लीयरेंस में देरी की आशंका बनी हुई है. हालांकि, बैंक बंद नहीं होंगे और ऑनलाइन लेन-देन व एटीएम सेवाएं सामान्य रहेंगी. 3. बाजार और व्यापार कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है, जिससे बड़े शहरों में थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. 4. सरकारी कार्यालय ट्रेड यूनियनों के अधिक प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने की संभावना, जिससे सरकारी कामकाज धीमा हो सकता है. 5. स्कूल और कॉलेज सुरक्षा और परिवहन समस्याओं को देखते हुए, कुछ राज्यों में जिला प्रशासन स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर सकता है. जो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी     एंबुलेंस, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सेवाएं     दमकल विभाग     हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन     डिजिटल बैंकिंग और एटीएम क्या बैंक औपचारिक रूप से बंद रहेंगे? नहीं. भारतीय रिजर्व बैंक या किसी भी बैंक ने 12 फरवरी को अवकाश घोषित नहीं किया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन भागीदारी के कारण सेवा में रुकावट आ सकती है.