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US को अब भारत ही होगा भरोसेमंद साथी, अमेरिकी कंपनियों का मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनेगा देश में

नई दिल्ली  भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो चुकी है. अब एक और अच्छी खबर आई है. भारत अब अमेरिकी कंपनियों का सहारा बनेगा. जी हां, खुद अमेरिका का कहना है कि भारत अब चीन से निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए नया ठिकाना होगा. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर के मुताबिक, चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक नया अड्डा हो सकता है. कारण कि यहां लोग हैं और मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए इंपोर्ट के मामले में भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है. दरअसल, फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जैमिसन ग्रीर ने ये बातें कहीं. जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहें तो क्या भारत सही जगह है, तो उन्होंने साफ कहा कि हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन अमेरिका में हों या जितना हो सके घर के पास हों. लेकिन जब ग्लोबलाइजेशन से हटते हैं तो सप्लाई चेन को बदलना पड़ता है. भारत इसके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकता है. वहां बहुत सारे लोग हैं, मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है.’ भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘हम चाहते हैं कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां हमें दूसरे देशों से आयात करना हो, वहां भारत एक अच्छा स्रोत हो सकता है,बशर्ते व्यापार संतुलित और निष्पक्ष हो.’ अमेरिका का यह बयान भारत के लिए बड़ा संदेश है. अमेरिका अब भारत को चीन का विकल्प मान रहा है. भारत की युवा आबादी, बढ़ती फैक्ट्री क्षमता, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की नीतियां इसे आकर्षक बनाती हैं. कई अमेरिकी कंपनियां पहले से ही भारत में प्लांट लगा रही हैं. ऐपल, गूगल, अमेजन, टेस्ला जैसे नाम इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. इससे क्या फायदा होगा? इस डील के बाद दोनों देशों को फायदा होगा. भारत को अमेरिकी बाजार में ज्यादा निर्यात का मौका मिलेगा, रोजगार बढ़ेंगे, टेक्नोलॉजी आएगी. वहीं, अमेरिका को सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन मिलेगी, चीन पर निर्भरता कम होगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है. साउथ एशिया में भारत अब अमेरिका का विश्वसनीय साथी बन रहा है. न सिर्फ ऊर्जा में, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में भी. भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है? अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर या ग्रीयर ने मंगलवार को कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को पहले ही धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिका एवं अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को फिर से बढ़ा रहा है. ‘फॉक्स बिजनेस’ के साथ इंटरव्यू में इस सवाल पर कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है, ग्रीयर ने कहा: ‘संक्षिप्त उत्तर हां है. उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने अन्य स्रोतों से खरीद को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है.' सप्लाई चेन पर ग्रीर का पूरा बयान क्या है? फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहती हैं, तो क्या भारत सही जगह होगी, तो इस पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन यहां यूनाइटेड स्टेट्स में हों और जितना हो सके घर के पास हों. हम जानते हैं कि जब आप ग्लोबलाइज़ेशन से हटते हैं और जब आप एक ज़्यादा मज़बूत और सुरक्षित इकॉनमी की ओर बढ़ते हैं, तो हमारे देश के सामने आने वाली सभी चुनौतियों का एक प्रोसेस होता है. किसी न किसी पॉइंट पर आपको सप्लाई चेन को इधर-उधर करना ही होगा; भारत इसके लिए एक रास्ता हो सकता है. उनके पास वहां बहुत सारे लोग हैं, उनके पास मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है. बेशक, हम यह पक्का करना चाहते हैं कि अमेरिकन मैन्युफैक्चरिंग सबसे पहले और सबसे ज़रूरी हो और अमेरिकन वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां तक हम दूसरे देशों से इंपोर्ट करना चाहते हैं, भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है, जब तक यह बैलेंस्ड और फेयर हो.' भारत पर अब कितना टैरिफ है? भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. ट्रेड डील के साथ ही अमेरिका ने भारत का टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. एडिशनल टैरिफ भी हटा दिया है.

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: 8वें वेतन आयोग पर सरकार ने दी नई जानकारी

नई दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) औपचारिक रूप से गठित किया जा चुका है और तय समय सीमा के भीतर अपनी सिफारिशें देगा। राज्यसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में वित्त मंत्रालय ने मंगलवार बताया कि 3 नवंबर 2025 को आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। सांसदों ने सरकार से यह जानना चाहा था कि आयोग किन-किन मुद्दों की समीक्षा करेगा और उसकी सिफारिशें लागू होने की संभावित समय-सीमा क्या होगी। क्या है डिटेल सरकार के मुताबिक, 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतनमान, भत्ते, पेंशन ढांचे और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। यानी मौजूदा समय-सीमा को देखते हुए रिपोर्ट 2027 तक आने की संभावना है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि सिफारिशें लागू करने का रोडमैप क्या होगा या कोई चरणबद्ध योजना तैयार की गई है या नहीं। सरकार के बजट पर कितना बोझ पड़ेगा संसद में यह सवाल भी उठा कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से केंद्र सरकार के बजट पर कितना बोझ पड़ेगा। इस पर सरकार ने कहा कि फिलहाल लागत का आकलन करना संभव नहीं है। आयोग की सिफारिशें आने और सरकार द्वारा उन्हें स्वीकार किए जाने के बाद ही वास्तविक वित्तीय प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकेगा। इसका मतलब है कि बजटीय योजना आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही बनेगी। 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल इधर, कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (CCGEW) ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। उनकी मांगों में 20% अंतरिम राहत, 50% महंगाई भत्ते का मूल वेतन में विलय और एनपीएस खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना शामिल है। ऐसे में संसद के अंदर सवालों और सड़कों पर बढ़ते दबाव के बीच 8वें वेतन आयोग की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

सरकारी योजना के तहत महिलाओं को मिलेगा 1500 रुपये, 14 फरवरी से शुरू; स्टेटस चेक करने का तरीका

भोपाल   मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना की 33वीं किस्त का इंतज़ार  महिलाएं बेसब्री से कर रही हैं. स्कीम की 32वीं किस्त 16 जनवरी को जारी की गई थी. नियमों के मुताबिक हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच किस्तें जारी की जाती हैं, इसलिए लोग फरवरी 2026 की किस्त जारी होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. जिन महिलाओं को इस बार पैसे नहीं मिलेंगे वे ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकती हैं. लाडली बहना योजना अपडेट मध्य प्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक अहम पहल बन गई है. इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक मदद सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें. मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव 14 फरवरी को खंडवा जिले में होने वाले कार्यक्रम से 33वीं किस्त महिलाओं के खाते में ट्रांसफर करेंगे। इस बार कार्यक्रम खंडवा जिले के पंधाना में आयोजित होगा। लाडली बहना योजना के अलावा पंधाना विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का उदघाटन भी मुख्यमंत्री करने वाले हैं। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 32वीं किस्त 16 जनवरी को नर्मदापुरम से जारी की गई थी। पिछली बार पात्र महिलाओं के खाते में 1856 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस बार महिलाओं को यही सौगात मिलने वाली है। इस बीच लाडली बहना योजना से करीब 1 लाख से ज्यादा नाम कम हो चुके हैं। क्यों कम हुए लाडली बहना योजना से नाम लाडली बहना योजना जब शुरू हुई थी, तब इसमें 1.32 करोड़ नाम जुड़े थे। लेकिन बाद में इसे 1.29 करोड़ और फिर 1.26 करोड़ कर दिया गया। पिछले महीने इस योजना से एक लाख नाम और कम हो गए। जानकारी के मुताबिक जो महिलाएं पात्रता की शर्त पूरी नहीं कर रही थीं, उनके नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा जिनकी उम्र 60 साल हो चुकी है, उनके नाम भी योजना से हटा दिए गए हैं। गाइडलाइंस के मुताबिक इस योजना का लाभ 60 की उम्र तक ही मिल सकता है। कैसे चेक करें स्टेटस अगर आप इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि आपका नाम लिस्ट में है भी या नहीं, तो आप ऑनलाइन पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाकर पता कर सकते हैं। यहां आपके पास दो विकल्प होंगे। आप चाहें तो अंतिम सूची में जाकर अपना नाम चेक कर सकती हैं। या फिर 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' में जाकर भी स्टेटस चेक कर सकती हैं। इस पर क्लिक करने के बाद बस आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी ही भरना है। इसके बाद मोबाइल पर आए ओटीपी से वेरिफाई करना है, आपका स्टेटस खुल जाएगा। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि, 14 फरवरी को सीएम मोहन यादव खंडवा आ रहे हैं। वे पंधाना में लाडली बहना योजना की राशि अंतरित करेंगे।  14फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खंडवा जिले के पंधाना का दौरा प्रस्तावित है। यह से लाडली बहना योजना की राशि का विवरण किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री डॉ मोहन पंधाना विधानसभा में अभी जितने में कार्य पूरे हो चुके है उन निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि सीएम के दौरे को लेकर विधायक की अध्यक्षता में विभागों की बैठक भी ली गई है। सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। बता दें कि लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की बेहद महत्वपूर्ण योजना है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में इस योजना का शुभारंभ किया था। जिसके तहत लाभार्थी महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की राशि सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलती है। फरवरी में इस योजना की 33वीं किस्त जारी की जाएगी।  क्या बजट में लाडली बहना को लेकर होगा ऐलान लाडली बहना योजना में नए रजिस्ट्रेशन लंबे समय से शुरू नहीं हुए हैं। ऐसे में प्रदेश की महिलाएं 18 फरवरी को आने वाले बजट से उम्मीदें लगाए बैठी हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव से उन्हें बड़ी सौगात मिल सकती है। इसके अलावा इस साल लाडली बहना योजना का पैसा बढ़ाने की भी बात है, उसे लेकर बजट में घोषणा हो सकती है।  

“देश के विभिन्न राज्यों में किसान कर्ज की स्थिति: एमपी में ₹74,420, आंध्र में ₹2.45 लाख

भोपाल देश के किसानों की आर्थिक स्थिति पर संसद में पेश ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के हर किसान परिवार पर औसत बकाया 74,420 रुपए का कर्ज है। यह राष्ट्रीय औसत 74,121 रुपए के लगभग बराबर है। आंकड़े केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दिए। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में किसानों पर कर्ज का बोझ मध्य भारत की तुलना में काफी अधिक है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में यह सबसे कम है। दरअसल, संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के किसानों की मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। वहीं आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण 74,121 रुपए है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं। टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के सवाल के जवाब में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी दी। एमपी की स्थिति: राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ ₹1,13,865 है, वहीं मध्य प्रदेश में यह ₹74,420 पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (₹21,443) की तुलना में एमपी के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। दक्षिण के राज्यों के किसान सबसे ज्यादा कर्जदार आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण ₹74,121 है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं । केसीसी (KCC) का कर्ज ₹10 लाख करोड़ के पार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत बकाया धनराशि ₹10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण (NSS 77वां दौरा) साल 2019 में ही किया गया था। राजस्थान कर्ज के मामले में आगे     राजस्थान: ₹1,13,865     मध्य प्रदेश: ₹74,420     उत्तर प्रदेश: ₹51,107     बिहार: ₹23,534 इन राज्यों में बोझ कम     नागालैंड: सिर्फ ₹1,750     मेघालय: ₹2,237     अरुणाचल प्रदेश: ₹3,581 किसानों की आया बढ़ाने में जुटी राज्य सरकार इधर, मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बढ़ती लागत और ऋण दबाव को देखते हुए वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। राज्य में जून 2026 तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध रहेगा। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर किसानों को पुनर्वित्त के माध्यम से मुख्यधारा में लाने की योजना लागू है। साथ ही नर्मदा-क्षिप्रा सहित नदी जोड़ो परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ 1,13,865 रुपए है। वहीं मध्य प्रदेश में यह 74,420 रुपए पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (21,443) की तुलना में मध्यप्रदेश के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। केसीसी का कर्ज 10 लाख करोड़ के पार शिवराज ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बकाया धनराशि 10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण साल 2019 में ही किया गया था। उत्तरप्रदेश-बिहार में औसत बोझ कम आंध्र प्रदेश प्रति किसान परिवार औसत 2,45,554 के साथ देश में सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। इसके बाद केरल (2,42,482), पंजाब (2,03,249), हरियाणा (1,82,922) और तेलंगाना (1,52,113) का स्थान है। इसके विपरीत नागालैंड में औसत कर्ज मात्र 1,750, मेघालय में 2,237 और अरुणाचल प्रदेश में 3,581 दर्ज किया गया। उत्तर और मध्य भारत में राजस्थान (1,13,865) के किसान अपेक्षाकृत अधिक कर्जदार पाए गए, जबकि उत्तर प्रदेश (51,107) और बिहार (23,534) में औसत बोझ कम है। कर्ज में टॉप-5 राज्य राज्य         कर्ज रुपए में आंध्रप्रदेश    2,45,554 केरल          2,42,482 पंजाब         2,03,249 हरियाणा    1,82,922 तेलंगाना    1,52,113 एमपी सरकार की रणनीति: 'किसान कल्याण वर्ष' और जीरो ब्याज योजना बढ़ते कर्ज और खेती की लागत को देखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित किया है। सरकार की ओर से किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं।     ब्याज मुक्त ऋण: प्रदेश में किसानों को जून 2026 तक 0% ब्याज पर फसल ऋण (Crop Loan) मिलता रहेगा। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 4% अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा।     डिफॉल्टरों को राहत: सरकार ने सहकारी बैंकों के उन किसानों को फिर से मुख्यधारा में लाने की योजना बनाई है जो कर्ज के कारण डिफॉल्टर हो गए थे।     सिंचाई विस्तार: नर्मदा-क्षिप्रा और अन्य नदी जोड़ो परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य है, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके। एमपी में भी बढ़ रहा किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा आंकड़ों के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कर्ज का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश में भी ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से केसीसी का वितरण तेजी से हुआ है। सरकार का कहना है कि यह कर्ज किसानों की निवेश क्षमता बढ़ाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के उचित दाम (MSP) और प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह कर्ज किसानों के लिए बोझ बन जाता है।  

खुशखबरी: भारत की ट्रेड डील में संशोधन, दाल हटाई गई सूची से और अन्य बदलाव भी हुए लागू

नई दिल्ली India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में एक नया अपडेट हुआ है. अमेरिका ने भङारत के साथ हुई ट्रेड डील के फैक्टशीट में बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव से भारत को बड़ा फायदा होगा. दरअसल, वाइट हाउस ने फैक्टशीट में जो बदलाव किया है, उसके मुताबिक ट्रेड डील वाली लिस्ट से अब दाल हट गई है. पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी. उस समय वाइट हाउस ने एक फैक्टशीट जारी की थी. उसमें कुछ बातें ऐसी थीं, जिनसे भारत को थोड़ी परेशानी हो सकती थी. इसे लेकर सवाल उठ रहे थे. लेकिन अब अमेरिका ने उस फैक्टशीट को अपडेट कर दिया है. ट्रेड डील वाली फैक्टशीट से कई चीजें हटा दी गई हैं या शब्द बदले गए हैं. इसमें सबसे अहम है दाल. जी हां, सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि दाल का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है. पहले फैक्टशीट में साफ लिखा था कि भारत अमेरिकी दालों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा. अब उस लिस्ट से ‘certain pulses’ शब्द निकाल दिए गए हैं. इसका मतलब साफ है कि भारत को अब अमेरिकी दालों पर टैरिफ घटाने की जरूरत नहीं है. भारतीय किसानों और दाल उत्पादकों के लिए यह बहुत अच्छी खबर है. पहला बड़ा बदलाव दाल दरअसल, बीते दिनों ही पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. इसके बाद अमेरिका और भारत के बीच ड्रेड डील पर सहमति बनी थी. इसके बाद एक फैक्टशीट जारी किया गया था. अब वाइट हाउस ने भारत के साथ हुए व्यापार समझौते का फैक्टशीट थोड़ा बदल दिया है. पहले की फैक्ट शीट में जो बातें लिखी गई थीं, अब उनमें से कुछ हिस्से हटा दिए गए हैं और कुछ शब्द भी बदल दिए गए हैं. पहला सबसे बड़ा बदलाव दाल ही है. दूसरा बड़ा बदलाव क्या? दूसरा बड़ा बदलाव है 500 अरब डॉलर खरीद का वादा. जी हां, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के फैक्टशीट में पहले लिखा था कि भारत ‘committed’ है यानी वादा कर चुका है कि वह अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदेगा. अब शब्द बदलकर ‘intend’ कर दिया गया है यानी ‘इरादा है’. मतलब कि भारत ने कोई वादा नहीं किया है, बल्कि भारत इरादा रखता है. इरादा डील के हिसाब से बदल भी सकता है, मगर वादा नहीं. यहां भी राहत ही राहत इसके अलावा खरीद की लिस्ट से ‘Agricultural products’ भी हटा दिए गए हैं. अब सिर्फ एनर्जी, आईसीटी, कोयला और दूसरे उत्पादों का जिक्र है. यानी कृषि उत्पादों को खरीदने का कोई दबाव नहीं रहा. बदले हुए वर्जन में टेक्स्ट से खेती के सामान का ज़िक्र हटा दिया गया है. अब इसमें लिखा है, ‘भारत ज़्यादा अमेरिकी प्रोडक्ट खरीदने और $500 बिलियन से ज़्यादा की US एनर्जी, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, कोयला और दूसरे प्रोडक्ट खरीदने का इरादा रखता है.’ और क्या बदलाव हुए? इसके अलावा, व्हाइट हाउस की अपडेटेड फैक्टशीट में भारत के अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने से जुड़ा टेक्स्ट भी हटा दिया गया है. पहले के टेक्स्ट में कहा गया था, ‘भारत अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटा देगा और डिजिटल ट्रेड में भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने के लिए कमिटेड है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी लगाने पर रोक लगाने वाले नियम भी शामिल हैं. इसमें अब कहा गया है, ‘भारत ने डिजिटल ट्रेड के लिए भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने का वादा किया है.’ राहत देने वाले हैं ये यूटर्न ये सारे बदलाव भारत के लिए राहत देने वाले हैं. अगर टैरिफ की बात करें तो भारत पर अब 18 फीसदी टैरिफ लग रहा है. यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से कम है. यह समझौता लगभग एक साल की बातचीत के बाद हुआ. फरवरी 2025 से बातें चल रही थीं. पहले ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिए थे. बाद में यह 18 फीसदी कर दिया गया. अब जब अमेरिका ने फैक्टशीट में ये बदलाव किए हैं तो लगता है कि भारत ने अपनी बात काफी मजबूती से रखी. भारत की दलीलों के कारण ही अमेरिका को कुछ बातें माननी पड़ीं. फैक्टशीट में बदलाव का क्या मतलब     दाल पर टैरिफ न घटाने का फैसला भारतीय किसानों के लिए बहुत बड़ा है. दाल हमारे देश में बहुत महत्वपूर्ण फसल है. अगर अमेरिकी दाल सस्ती होकर आती तो किसानों को नुकसान होता. अब वह खतरा टल गया.     500 अरब डॉलर की खरीद को भी ‘वादा’ से ‘इरादा’ बना दिया गया. इससे भारत पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं रहेगी.     डिजिटल टैक्स पर भी भारत को तुरंत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.  सिर्फ भविष्य में नियमों पर बात होगी. भारत का हित सर्वोपरि पहले समझौते की घोषणा के समय कुछ बातें थोड़ी सख्त लग रही थीं. लेकिन अब अमेरिका ने खुद अपनी लिस्ट को नरम कर दिया है. इससे साफ है कि भारत ने डील में अपना हित अच्छे से सुरक्षित रखा है. आगे जब पूरा डिटेल्ड समझौता आएगा तब और साफ होगा. लेकिन फिलहाल ये बदलाव भारत के लिए सकारात्मक हैं.

महाकाल की नगरी में 9 भव्य द्वार, सनातन गौरव की शुरुआत, सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी ‘उज्जैन’, अपने प्रवेश मार्गों पर भव्य और प्रतीकात्मक पहचान गढ़ने जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख रुपये से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है। यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल–कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है। योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार निर्मित किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और ट्रैफिक सुव्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामयी बने। स्थापत्य में दिखेगा काल और संस्कृति का संवाद नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी–सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे। रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे। यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। जानिये, किस द्वार के लिए कितना बजट     अमृत द्वार 9.68 करोड़     पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़     गज द्वार 8.51 करोड़     कालगणना द्वार 11.07 करोड़     उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़     सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़     त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़     विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़     डमरू द्वार 13.29 करोड़ सदियों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी रही है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न केवल सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की यह योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने का प्रयास है। नामों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता     अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।     पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।     गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।     कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।     उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।     सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।     त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।     विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।     डमरू द्वार : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत। (नोट : इन नौ भव्य प्रवेश द्वारों के साथ उज्जैन न केवल भौतिक रूप से भव्य दिखेगा, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी आधुनिक स्वरूप में सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।) 

बागेश्वरधाम :नागपुर की रबड़ी, राजस्थान के रसगुल्ले के बीच 301 जोड़ों का महाशिवरात्रि विवाह समारोह

छतरपुर  छतरपुर जिले के गढ़ा गांव स्थित बागेश्वर धाम एक बार फिर भव्य आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर 15 फरवरी को यहां 300 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। सभी अतिथियों को औपचारिक आमंत्रण भेजे जा चुके हैं और धाम समिति ने उनके आगमन को लेकर संकेत भी जारी कर दिए हैं। देशभर के दिग्गज राजनेताओं को न्योता बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर सामूहिक कन्या विवाह की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस वर्ष यह आयोजन अपने सातवें संस्करण में प्रवेश कर रहा है, जिसे लेकर खास उत्साह है। समारोह में देश के कई बड़े राजनीतिक चेहरों को आमंत्रित किया गया है। आयोजन की व्यापकता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जा रही है। बुंदेलखंड के जिलों के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल संभाग से अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। धाम परिसर में भव्य तैयारियां जोरों पर हैं। खजुराहो के बागेश्वर धाम में 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि पर होने वाली 301 जोड़ों के विवाह समारोह की तैयारियां आखिरी दौर में हैं। 12 फरवरी से तीन दिन कल्चरल नाइट होगी। इन दिनों में करीब 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है. मेहमानों के लिए नागपुर से रबड़ी और राजस्थान से रसगुल्ले मंगवाए जा रहे हैं। 100 एकड़ में कार्यक्रम की व्यवस्था है। बारातियों के लिए बुफे की व्यवस्था रहेगी। पिछले साल इलाहाबाद में हुए महाकुंभ की तर्ज पर 11 तोरण द्वार भी बनाए गए हैं। मुख्य कार्यक्रम में छह प्रदेशों के मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश के राज्यपाल, विदेशी मेहमान, सेलिब्रिटी और खिलाड़ी शामिल होंगे। दो किमी दूर से नजर आने लगती है सजावट अलसुबह अभी सूरज नहीं निकला है। जैसा कि बताया गया था कि शादी के लिए बागेश्वरधाम तिरंगा थीम पर सजाया जाएगा। उसकी झलक धाम के पांच किलोमीटर दूर से ही नजर आने लगती है। सड़क के दोनों पर तिरंगा थीम पर लाइटिंग की गई है। कुछ देर में धाम के मुख्य मंदिर के सामने पहुंच गए। यहां आरती हो रही है। दूर-दूर से दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं की भी भीड़ है। जिस जगह पर समाराेह होना है, वहां 24 घंटे काम चल रहा है। सामान से भरी लारियां आ रही हैं। सेवादार सही जगह पर सामान अनलोड कराने में व्यस्त हैं। किसी में टेंट का सामान है, तो किसी में खाने-पीने का। कोलकाता से आए कारीगर रंग-बिरंगा छत्री नुमा टेंट लगा रहे हैं। दूसरे लोग डोम के लिए पाइप कस रहे हैं। राज मिस्त्री करीब छह लाख लोगों के लिए बनने वाले खाने के लिए बड़ी-बड़ी भट्टियां बना रहे हैं। शादी वाली इस जगह की जिम्मेदारी संभाल रहे सेवादार नितेंद्र चौबे कहते हैं कि चार दिन बचे हैं, सभी काम समय से पूरे हो जाएंगे। पंडित प्रदीप मिश्रा से लेकर मोरारी बापू तक आएंगे नितेंद्र कहते हैं- पहले 300 बेटियों की शादी होनी थी, लेकिन अब ये संख्या 301 हो गई है। उसी हिसाब से तैयारियां हो रही हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली की मुख्यमंत्री कन्याओं को आशीर्वाद देने आ रहे हैं। 12 फरवरी को गुरुकुलम के भूमिपूजन के लिए एमपी के राज्यपाल मंगुभाई पटेल आने वाले हैं। 13 से 15 फरवरी तीनों दिन अलग-अलग लोग आएंगे। इसमें संत राजेंद्र दास, इंद्रेश कुमार, अनिरुद्धचार्य, पुंडरीक महाराज, मोरारी बापू, बाबा रामदेव, पंडित प्रदीप मिश्रा और रमेश भाई ओझा का आना तो तय हो चुका है। कई दूसरे संत भी आएंगे, लेकिन उनकी अभी तारीख फिक्स नहीं हुई है। कुछ खिलाड़ी भी आने वाले हैं- उमेश यादव और शिखर धवन का आना तय हो चुका है। 1500 विदेशी भक्त भी आएंगे शादी समारोह के मुख्य व्यवस्थापक धीरेंद्र गौर कहते हैं कि आस-पास के ग्रामों में पीले चावल बांटे जा रहे हैं। विदेश से करीब 1500 भक्त आएंगे। अभी करीब 100 श्रद्धालु आ चुके हैं। दुबई, नेपाल, फिजी आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और लंदन से गुरुभाई आना शुरू हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के तो एमएलए भी आ रहे हैं। तीन दिन में 10 से 12 लाख लोगों के आने का अनुमान है। बहुत बड़ी व्यस्था होनी है। भारत में धाम से रजिस्टर्ड 75 सेवादारों के संगठन अलग-अलग जगह हैं। इनके करीब 12 हजार सदस्य शादी समारोह की व्यवस्था संभालने आ रहे हैं। उनकी अलग-अलग ड्यूटी लगाई जाएगी। धीरेंद्र शास्त्री को पसंद है मटर-पनीर की सब्जी भंडारा प्रभारी कपिल साहू के पास भंडार की जिम्मेदारी है। शादी पंडाल के आसपास ये तीन जगह होगा। एक बराता-घराती के लिए तो दूसरा सेवादारों के लिए। वहीं, तीसरा– शादी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए। इसके अलावा, धाम में आठ-दस जगह भी भोजन-फल की व्यवस्था है। वह कहते हैं कि गुरु धीरेंद्र शास्त्री को मटर-पनीर की सब्जी बहुत पसंद है, वो खासतौर पर शादी वाले दिन ही बनाई जाएगी। ये खास सब्जी आने वाले पांच सीएम के अलावा अन्य VVIP को भी परोसी जाएगी। इसमें सबसे खास बात है कि इस बार माल-पुआ के साथ लाखों मेहमानों के लिए नागपुर से रबड़ी और राजस्थान से रसगुल्ले मंगवाए जा रहे हैं। अस्थायी अस्पताल भी बनाया समारोह के लिए प्रशासन द्वारा यहां अस्पताल भी बनाया गया है। राजनगर बीएमओ और बागेश्वर धाम में स्वास्थ व्यवस्था प्रभारी अवधेश चतुर्वेदी ने बताया कि टीम 24 घंटे काम करेगी। तीन शिफ्ट में 50 स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर रहेंगे। जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय और ड्रेसर शामिल हैं। अस्पताल में ऑक्सीजन, पलंग और आपातकालीन दवाओं की सुविधा रहेगी। फिलहाल 6 बेड की व्यवस्था की गई है। दो एम्बुलेंस तैनात रहेंगी। 12 से 14 फरवरी के दौरान तीन और एम्बुलेंस आ जाएंगी। हालत गंभीर होने पर मरीज को छतरपुर रेफर किया जाएगा। इसलिए दी जा रही 30-30 हजार रुपए की FD समारोह के मुख्य व्यवस्थापक धीरेंद्र गौर को बनाया गया है। इस बार नव दंपत्ति को बाइक और होम आटा-चक्की नहीं दी जा रही है। धीरेंद्र गौर कहते हैं कि इन दो उपहार से नए परिवार का खर्च बढ़ रहा था, इसलिए इस बार प्रत्येक जोड़े को 30- 30 हजार की फिक्स डिपॉजिट (FD) दी जा रही है। इसके साथ ही सोने की लौंग और बाली। मंगलसूत्र के … Read more

अमेरिका की ईरान पर हमले की तैयारी, सैटेलाइट तस्वीरों ने किया बड़ा खुलासा

न्यूयॉर्क मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों पर लड़ाकू विमानों, टैंकरों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्लैनेट लैब्स और रॉयटर्स की तस्वीरों में कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब के अड्डों पर बदलाव साफ दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमले की तैयारी या जवाबी कार्रवाई से बचाव का संकेत हो सकता है.   अमेरिका-ईरान के बीच तनाव  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से न्यूक्लियर डील चाहते हैं, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी रोक की मांग कर रहे हैं. ईरान ने साफ मना कर दिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर डील नहीं हुई तो अगला हमला बहुत बुरा होगा. पिछले साल अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे. अब फिर तनाव बढ़ रहा है. ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स को मिट्टी से ढक रहा है. टनल बंद कर रहा है, जो हमले की आशंका दिखाता है. सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिख रहा है? अल उदेद एयर बेस, कतर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय. 17 जनवरी से 1 फरवरी के बीच विमानों की संख्या बढ़ी है. मोबाइल पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर्स तैनात किए गए है, जो ईरान की मिसाइलों से बचाव के लिए हैं.  मुवाफक साल्टी एयर बेस, जॉर्डन: 25 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दर्जनों F-15E फाइटर जेट्स, A-10 ग्राउंड अटैक विमान और MQ-9 ड्रोन आए. यह ईरान के करीब है.  प्रिंस सुल्तान एयर बेस, सऊदी अरब: C-5 गैलेक्सी और C-17 ट्रांसपोर्ट विमान दिखे, जो भारी सामान ले जाते हैं. अन्य जगहों जैसे ओमान और डिएगो गार्सिया में भी विमान बढ़े हैं. कुल मिलाकर फाइटर जेट्स, टैंकर और डिफेंस सिस्टम की तैनाती बढ़ी है. इसका मतलब क्या है?     ट्रंप प्रशासन साफ संदेश दे रहा है कि वह तैयार है.     यह हमले की तैयारी हो सकती है, क्योंकि इतनी तैनाती महंगी है.     या ईरान की जवाबी मिसाइलों से बचाव, क्योंकि ईरान ने पहले अल उदेद पर हमला किया था.     ईरान भी अपनी न्यूक्लियर साइट्स (जैसे इस्फहान) को मजबूत कर रहा है, टनल मिट्टी से भर रहा है. आगे क्या? बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों तरफ तैयारी जोरों पर है. अगर हमला हुआ तो क्षेत्रीय युद्ध हो सकता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि यह डिप्लोमेसी को मजबूत करने का दबाव भी हो सकता है. 

चुनावी वादों ने खोली जापान की सच्चाई: वह तस्वीर जो दुनिया नहीं देखती

टोक्यो  यह खबर तो आपको भी पता चल गई होगी कि जापान में संपन्‍न हुए हालिया चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता सनाए तकाची ने 75.7 फीसदी सीटों पर कब्‍जा जमाकर जीत हासिल की है. यह दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद किसी भी जापानी नेता को मिला सबसे बड़ा समर्थन है. इस चुनाव ने न सिर्फ जापान की सत्‍ता को ग्‍लोबल चर्चा का विषय बना दिया, बल्कि दुनिया के सामने जापान की ऐसी तस्‍वीर भी पेश की जिसके बारे में ज्‍यादातर लोगों को पता ही नहीं है. हमें आपको यही लगता होगा कि विकसित देशों की सूची में शामिल जापान आर्थिक प्रगति का रोल मॉडल है, लेकिन इस बार के चुनाव में की गई घोषणाओं ने जापान की पिछड़ी तस्‍वीर भी दुनिया के सामने रखी. दूसरा विश्‍व युद्ध समाप्‍त होने के बाद जापान साल 1960 से 1980 के बीच इकनॉमिक सुपरपॉवर बनकर उभरा. 90 के दशक तक जापान की जीडीपी ग्रोथ जी-7 में शामिल अन्‍य देशों के मुकाबले काफी तेज रही थी. इसके बाद से ही जापान की अर्थव्यवस्‍था पर दबाव बढ़ने लगा और आज तो यह भयंकर आर्थिक संकट में घिर चुका है. 60 से 70 और 70 से 80 के दशक में जापान की जीडीपी ग्रोथ 16.4 फीसदी और 17.9 फीसदी रही थी. साल 2010 से 2024 तक जापान की जीडीपी ग्रोथ शून्‍य से भी 2.4 फीसदी नीचे रही यानी फिलहाल वहां मंदी चल रही है. दुनिया में सबसे ज्‍यादा सरकारी कर्ज जापान इस समय आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति में है. एक तो उसकी जीडीपी ग्रोथ माइनस में चल रही है, जबकि सरकारी कर्ज जीडीपी के मुकाबले 230 फीसदी पहुंच गया है. यह दशकों से चले आ रहे घाटे वाले खर्चों का नतीजा है. जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने अपने चुनावी वादों में अतिरिक्‍त खर्चों को घटाने और टैक्‍स कम करने का ऐलान किया था. इसके बाद से ही जापान के बॉन्‍ड मार्केट में हलचल बढ़ गई है. फिलहाल बॉन्‍ड यील्‍ड 3.56 फीसदी के साथ रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है. इसे जापान के लिए डेट क्राइसिस की शुरुआत माना जा रहा है, जो ग्‍लोबल इकनॉमी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है. कमजोर मुद्रा बन रही परेशानी जापान की मुद्रा येन भी लगातार कमजोर हो रही है, जो फिलहाल डॉलर के मुकाबले कई साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गई है. जापान ने ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे आयात महंगा हो रहा है और महंगाई भी बढ़ रही है. अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर की वजह से निर्यात में कमी आ रही और निवेश भी कमजोर पड़ा है. फिलहाल सबकुछ बैंक ऑफ जापान पर निर्भर करता है, जो आने वाले समय के लिए नीतियां निर्धारित करेगा और जापान को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. गरीबों के लिए चुनावी वादे प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने चुनावी वादों में गरीबों और निम्‍न आय वर्ग के लिए कई घोषणाएं की हैं. उनका कदम महंगाई से निपटने और स्थिर मजदूरी और बढ़ते खर्च से निपटने के लिए है. इस कड़ी में पीएम ने खाद्य उत्‍पादों पर 8 फीसदी का कंजप्‍शन टैक्‍स भी दो साल के लिए खत्‍म कर दिया है. इससे गरीब परिवारों के लिए भोजन की लागत कम होगी और उनके जीवन यापन में सुधार आएगा. साथ ही टैक्‍स छूट का दायरा भी बढ़ाए जाने की तैयारी है, ताकि निम्‍न आय वर्ग वालों की बचत को बढ़ाया जा सके.  

नियुक्ति निरस्त करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे, 66 उप अभियंता बहाल

रायपुर ग्रामीण अभियांत्रिक सेवा की वर्ष 2011 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट द्वारा 66 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध बताते हुए रद्द किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। दरअसल, इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर याचिकाकर्ता रवि तिवारी ने अधिवक्ता शाल्विक तिवारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 3 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने भर्ती को अवैध करार देते हुए 66 उप अभियंताओं की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि भर्ती विज्ञापन के अनुसार अभ्यर्थियों के पास कट-ऑफ तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य था, जबकि कई चयनित अभ्यर्थियों ने आवश्यक डिग्री या डिप्लोमा बाद में प्राप्त किया। ऐसे में उनकी नियुक्तियां प्रारंभ से ही अवैध मानी गईं। कोर्ट ने यह भी पाया कि 275 पदों के लिए जारी विज्ञापन के बावजूद उससे अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं, जो सेवा कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। सुनवाई के दौरान नियुक्त उप अभियंताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि वे करीब 14 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, इसलिए उनके मामलों में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती। इसके बाद कोर्ट ने क्वो वारंटो का रिट जारी करते हुए नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। हाईकोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए प्रभावित कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली का रुख किया। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 11 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य को नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर स्थगन आदेश पारित किया है। यह प्रकरण लगभग 60 शासकीय कर्मचारियों की सामूहिक सेवा-समाप्ति से संबंधित है, जिन्हें प्रारंभिक रूप से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन में उप अभियंता (सिविल) के पद पर नियुक्त किया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में यह कहते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया था कि संबंधित अभ्यर्थियों के पास भर्ती विज्ञापन के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक अर्हता उपलब्ध नहीं थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की सेवा की निरंतरता अब सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। मामले में याचिकाकर्ताओं एवं निजी प्रत्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, परमेश्वर के. तथा गौरव अग्रवाल ने पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा, चंद्रशेखर ए. चकलाब्बी (AOR) और सुधांशु प्रकाश (AOR) भी उपस्थित रहे।