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कॉन्ट्रैक्टर शिलोम संग सोनम का बैग ठिकाने लगाने के आरोप में पुलिस की थ्योरी फेल, गार्ड और बिल्डिंग मालिक बरी

इंदौर  इंदौर के बहुचर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस केस में आरोपी बनाए गए गार्ड बलवीर सिंह अहिरवार और बिल्डिंग मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। सबूतों की कमी के कारण इन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया है। पुलिस ने पहले इन्हें साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन मामले की गहन जांच में हत्याकांड से इनका कोई सीधा संबंध साबित नहीं हो पाया।  चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में कोर्ट ने गार्ड और बिल्डिंग मालिक को दोषमुक्त कर दिया है। शिलॉन्ग पुलिस द्वारा सबूत छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए बलवीर सिंह अहिरवार और लोकेंद्र सिंह तोमर को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर राहत दी गई है। कोर्ट के इस फैसले से जांच एजेंसियों की शुरुआती थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरी किए गए आरोपियों में लसूड़िया क्षेत्र की एक बिल्डिंग का गार्ड बलवीर सिंह अहिरवार और भवन मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर शामिल हैं। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने कॉन्ट्रैक्टर शिलॉम के साथ मिलकर राजा रघुवंशी की हत्या के बाद सोनम रघुवंशी का बैग और अन्य सबूत ठिकाने लगाने में मदद की। इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के शामिल होने को लेकर ठोस सबूत नहीं बिजली बिल और अन्य तकनीकी तथ्यों की जांच के बाद पुलिस को आरोपियों की संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं मिले। शिलॉन्ग की ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सिगम ने बताया कि शुरुआती परिस्थितियों और मिली जानकारियों के आधार पर गिरफ्तारी की गई थी। बाद में जांच और वेरिफिकेशन में उनकी भूमिका साबित नहीं हो सकी। इसी कारण दोनों को दोषमुक्त कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी और राज कुशवाह सहित अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में क्यों कमजोर पड़ी पुलिस की दलील? विस्तृत जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की संलिप्तता से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले। बिजली बिल, किराया एग्रीमेंट और अन्य तकनीकी दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट नहीं हो सका कि गार्ड या बिल्डिंग मालिक ने जानबूझकर किसी साक्ष्य को नष्ट किया हो। शिलॉन्ग के ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सिगम ने अदालत में बताया कि शुरुआती परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद की जांच में आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। शिलॉन्ग में खाई में मिला था राजा का शव इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की 11 मई को सोनम के साथ शादी हुई थी। 20 मई को राजा और सोनम हनीमून के लिए इंदौर से मेघालय रवाना हुए थे। 22 मई को दोनों सोहरा की यात्रा पर निकले थे। उन्होंने एक एक्टिवा भी किराए पर ली थी। पेड़ काटने वाले हथियार से की गई राजा की हत्या 24 जून को राजा-सोनम से परिवार का संपर्क टूट गया था। 27 मई से दोनों की सर्चिंग शुरू की गई। 29 मई को तेज बारिश के कारण सर्चिंग रोकनी पड़ी थी। इसके बाद 30 मई को दोबारा सर्चिंग शुरू की गई। 2 जून को खाई में राजा का शव मिला। 3 जून को राजा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि उसकी हत्या पेड़ काटने वाले हथियार से की गई थी। सोनम यूपी के गाजीपुर स्थित एक ढाबे पर मिली इसके बाद पुलिस सोनम की तलाश में जुट गई। 9 जून को सोनम यूपी के गाजीपुर स्थित एक ढाबे पर मिली थी। इसके बाद परत-दर-परत मामले में कई खुलासे हुए। इन खुलासों ने रघुवंशी परिवार सहित सभी को चौंका दिया था। इसमें मामले में पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कहां रुके थे सोनम और विशाल? पुलिस जांच में सामने आया था कि राजा की हत्या के बाद सोनम रघुवंशी और विशाल चौहान कुछ समय के लिए इंदौर के लसूड़िया क्षेत्र स्थित एक बिल्डिंग में ठहरे थे। यह बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर शिलॉम जेम्स के किराए की बताई गई थी, जिसे ब्रोकर के माध्यम से लिया गया था। कमरे का एग्रीमेंट विशाल चौहान के नाम पर हुआ था। इसी कड़ी में गार्ड और बिल्डिंग मालिक की भूमिका की जांच की गई, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की 11 मई को सोनम से शादी हुई थी। 20 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय रवाना हुए। 22 मई को वे सोहरा (चेरापूंजी) क्षेत्र घूमने निकले, जहां 2 जून को राजा का शव एक खाई में मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसकी हत्या पेड़ काटने वाले धारदार हथियार से की गई थी। मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी, राज कुशवाह और अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है।

वन्यजीव सुरक्षा को बड़ी सफलता, उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व से 3 शिकारी दबोचे गए

रायपुर छत्तीसगढ के गरियाबंद और धमतरी जिलें में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व  के कोर क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। यहाँ मुख्य रूप से संकटग्रस्त एशियाई जंगली भैंसों और बाघों के संरक्षण के लिए विशेष प्रजनन केंद्र, गश्ती, और सामुदायिक भागीदारी जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। हाल ही में पेरेग्रीन फाल्कन जैसे दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी भी यहाँ के बेहतर पारिस्थितिक तंत्र का संकेत देती है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए वन विभाग एवं एंटी पोचिंग टीम ने अवैध शिकार में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के मद्देनज़र क्षेत्र में बढ़ाई गई विशेष निगरानी के दौरान की गई।  वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को दक्षिण उदंती परिक्षेत्र के नागेश बीट में नियमित गश्त के दौरान छह संदिग्ध सशस्त्र व्यक्तियों की गतिविधि देखी गई। तत्काल कार्रवाई करते हुए एंटी पोचिंग टीम ने घेराबंदी कर राजमन यादव को मौके से हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों गुप्ताराम, भादुराम तथा ओडिशा के कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर प्रतिबंधित कोर क्षेत्र में अवैध रूप से डेरा डालने की बात स्वीकार की। जांच में सामने आया कि 16 जनवरी 2026 को गोमारझरी नाले के पास पानी पीने आए जंगली सुअरों का शिकार किया गया। इसके बाद मांस को टांगापानी गांव ले जाकर आपस में बांटा गया।  टाइगर रिज़र्व के उपनिदेशक श्री वरुण जैन के मार्गदर्शन में तथा गरियाबंद पुलिस के सहयोग से 20 जनवरी 2026 को मुख्य आरोपी गुप्ताराम को भूतबेड़ा बाजार से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के घर से एक भरमार बंदूक, 3.100 किलोग्राम जंगली सुअर का मांस, भालू का पंजा तथा शिकार में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए। वहीं अन्य आरोपी भादुराम के घर से वन्यजीवों को फंसाने के लिए उपयोग किए जाने वाले फंदे और क्लच वायर जब्त किए गए। रिकॉर्ड जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी पेशेवर शिकारी हैं तथा मुख्य आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी वन्यजीव अपराध का प्रकरण दर्ज है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को 22 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 13 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है।  उल्लेखनीय है कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उनके मार्गदर्शन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में नियमित रूप से एंटी स्नेर वॉक अभियान, सतत गश्त और निगरानी को सुदृढ़ किया गया है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप वन विभाग अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर रहा है और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

3645 करोड़ से 4 जिलों के 2497 गांव-ढाणियों की बुझेगी प्यास

जयपुर. मेवाड़ और वागड़ के सीमावर्ती जिलों में गहराते जल संकट को खत्म करने के लिए सरकार ने 'जाखम बांध पेयजल परियोजना' को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के जरिए चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों के करीब 800 गांव 622 ढाणी में पाइप लाइन से पीने का शुद्ध पानी पहुंचाया जाएगा। इसके प्रथम चरण में 1692.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसकी टेक्निकल बिड जल्द खोली जाएगी। दूसरे चरण में उदयपुर और राजसमंद के गांव-ढाणी में पानी पहुंचाया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 3645.56 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जल जीवन मिशन के तहत होंगे काम जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना के तहत पानी पहुंचाया जाएगा। पेयजल किल्लत से जूझते चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर और राजसमंद जिले के गांव-ढाणियों तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 3 वर्ष पहले जाखम बांध पेयजल परियोजना की घोषणा की थी। उक्त योजना को अब धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। योजना के प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिले के करीब 800 गांवों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसकी टेक्निकल बिड को 16 फरवरी को खोली जाएगी। इसकी जांच में सब कुछ सही पाए जाने पर सरकार के पास फाइनेंशल स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने पर ही संबंधित फर्म को टेण्डर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के जल्द ही धरातल पर उतरने की उम्मीद जगी है। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रोजेक्ट की करीब तीन साल पहले घोषणा की गई थी। इसके बाद इसकी डीपीआर तैयार कराई गई है। अब टेण्डर प्रक्रिया चल रही है। दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ होंगे खर्च जाखम बांध पेयजल परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। दूसरे चरण में राजसमंद और उदयपुर जिले के 1697 गांव और ढाणी में पानी पहुंचाने की योजना है। इसमें राजसमंद जिले के 790 गांव-ढाणी और उदयपुर जिले के 907 गांव-ढाणी को शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1692.30 करोड़ एवं दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह होगा प्रोजेक्ट का फायदा – घरों तक शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी – लगातार गहराते पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा – गांव-ढाणी तक पानी पहुंचने से श्रम और समय की बचत होगी – इसके निर्माण कार्य आदि होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे यह ब्लॉक अतिदोहित की श्रेणी में चित्तौड़गढ़ जिले का अधिकांश भाग भू-जल उपयोग के मामले में अतिदोहित श्रेणी में है। इसमें भैंसरोडगढ़, गंगरार, बेगूं, डूंगला, बड़ी सादड़ी, भदेसर, चित्तौड़गढ़, राशमी भोपालसागर, कपासन और निम्बाहेड़ा ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में है। इन ब्लॉक का भूमिगत जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है। जाखम प्रोजेक्ट की जल्द खुलेगी टेक्निकल बिड जाखम बांध पेयजल परियोजना के प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिला शामिल है। इसके लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए हैं, इसकी टेक्निकल बिड 16 फरवरी को खोली जाएगी। इसके बाद ही कुछ बता पाएंगे। – सुनीत कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्री विभाग चित्तौड़गढ़

गुप्तारघाट पर रावण वध, हनुमान व जटायु स्टेच्यू तैयार

अयोध्या  अयोध्या में गुप्तारघाट का वैभव पुनः लौट रहा है। पर्यटन विकास तेजी से हो रहा है। योगी सरकार की रामराज्य की परिकल्पना के अनुरूप आने वाले दिनों में गुप्तारघाट का हर एक नजारा त्रेता युग को जोड़ता दिखेगा। क्योंकि सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल इस महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल पर तीसरे चरण का विकास कार्य अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। विशेष रूप से यहां बन रहा ओपन एयर थियेटर संभवतः होली तक जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस थियेटर के साथ रावण वध, हनुमान और जटायु की भव्य मूर्तियां भी तैयार हो चुकी हैं, जो रामायण की भावना को जीवंत रूप से दर्शाएंगी। गुप्तारघाट ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि भगवान श्री राम ने इसी घाट से जल समाधि ली थी और यहां अंतिम बार सरयू नदी में प्रवेश किया था। राम भक्तों के लिए यह स्थान आस्था का केंद्र है। योगी सरकार ने इसे विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने का संकल्प लिया है। पहले दो चरणों में बड़े पैमाने पर विकास हो चुका है, जिसमें घाट का सौंदर्यीकरण, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं, आधुनिक पार्क, योग-ध्यान केंद्र आदि शामिल हैं। अब तीसरे चरण में कुल 1833.63 लाख रुपये (लगभग 18.34 करोड़) की लागत से अंतिम छोर का काम चल रहा है। जानिए, क्या क्या बन रहा है तीसरे चरण में तीसरे चरण में मुख्य रूप से पार्किंग क्षेत्र, पाथवे, टिकट घर, गार्ड रूम, टॉयलेट ब्लॉक, किचन के फिनिशिंग कार्य प्रगति पर हैं। साथ ही इंटरप्रिटेशन सेंटर, अन्य स्ट्रक्चरल म्यूरल्स (भित्ति चित्र), बाउंड्री वॉल का काम भी तेजी से चल रहा है। सबसे आकर्षक हिस्सा ओपन एयर थियेटर है, जहां फिनिशिंग, विद्युतीकरण और हॉर्टिकल्चर का कार्य जारी है। इस थियेटर में रामायण से जुड़े नाटक, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रामलीला जैसे आयोजन होंगे। यहां रावण वध का दृश्य, हनुमान जी की विशाल प्रतिमा और जटायु की मूर्ति पर्यटकों को राम कथा की याद दिलाएंगी। ये मूर्तियां पहले से ही तैयार हैं और थियेटर के परिसर में स्थापित की जा रही हैं। मनोरंजन का प्रमुख केंद्र भी बनेगा गुप्तारघाट आगामी दिनों में गुप्तारघाट न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और मनोरंजन का भी प्रमुख केंद्र बन जाएगा। योगी सरकार का फोकस अयोध्या को ग्लोबल टूरिज्म हब बनाने पर है। राम मंदिर के बाद गुप्तारघाट का यह विकास राम नगरी की चमक को और बढ़ाएगा। यहां आने वाले श्रद्धालु सरयू के किनारे शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं का आनंद ले सकेंगे। ओपन एयर थियेटर से शाम के समय रामायण आधारित प्रदर्शन देखना एक अनोखा अनुभव होगा। फरवरी में परियोजना पूरा करने का लक्ष्य यह परियोजना पर्यटन विभाग की है। यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड इस परियोजना को क्रियान्वित कर रहा है। अयोध्या परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि अब तक 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना में कुछ विलंब हुआ है, क्योंकि कार्यों में बढ़ोतरी की गई। मूल लक्ष्य से दो महीने पीछे चल रही यह परियोजना अब फरवरी 2026 में पूरी हो जाएगी। होली के आसपास या होली तक (मार्च 2026) यह ओपन एयर थियेटर और पूरा परिसर श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।

गणना कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग 10 हजार नागरिकों द्वारा लिया गया भाग

लखनऊ.  योगी सरकार की ओर से वन व वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में बढ़ाया गया कदम कारगर साबित हो रहा है। सरकार के प्रयासों का असर है कि उत्तर प्रदेश में साल दर साल राज्य पक्षी सारस का कुनबा बढ़ता जा रहा है। राज्य में प्रतिवर्ष दो बार (ग्रीष्मकालीन/शीतकालीन) सारस की गणना की जाती है। प्रदेश के 68 वन प्रभागों में हुई शीतकालीन गणना में कुल 20,628 सारस पाए गए। पिछले वर्ष हुई गणना में प्रदेश में सारसों की संख्या 19,994 थी। राज्यव्यापी गणना में इटावा वन प्रभाग में सर्वाधिक 3304 सारस मिले। 10 वन प्रभागों में यह संख्या 500 से अधिक रही। प्रदेश में शीतकालीन गणना कार्यक्रम में 10 हजार नागरिकों द्वारा भाग लिया गया। साल दर साल बढ़ रही सारस की संख्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पशु-पक्षी व पर्यावरण प्रेम जगजाहिर है। 2017 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने विभाग को राज्य पक्षी सारस के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। 2023 में प्रदेश में 19,196 सारस मिले। 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 19,994 हो गई। अब इस शीतकालीन सत्र में प्रदेश में कुल सारसों की संख्या 20,628 दर्ज की गई है।  इटावा वन प्रभाग में मिले सर्वाधिक 3304 सारस, 10 प्रभागों में यह संख्या 500 से ऊपर रही  सारस की शीतकालीन गणना में 10 प्रभागों में इनकी संख्या 500 से ऊपर रही। इटावा वन प्रभाग में सर्वाधिक 3304 सारस पाए गए। मैनपुरी में 2899, औरैया में 1283, शाहजहांपुर में 1078, गोरखपुर में 950, कन्नौज में 826, कानपुर देहात में 777, हरदोई में 752, सिद्धार्थनगर में 736 तथा संतकबीर नगर वन प्रभाग में 701 सारस पाए गए।  29 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 100 से 500 तक रही 29 वन प्रभागों में सारस की संख्या 100 से 500 के बीच रही। रायबरेली वन प्रभाग में 480, सीतापुर में 452, उन्नाव में 385, बरेली में 380, सोहगीबरवा में 378, बाराबंकी में 345,  बांदा में 270, फिरोजाबाद में 258, बस्ती में 224, अमेठी में 181, अलीगढ़ में 177, बिजनौर में 174, गौतमबुद्धनगर में 169, दक्षिण खीरी में 168, रा.चंबल में 167, सुल्तानपुर में 162, कानपुर में 156, बहराइच व फर्रुखाबाद में 150-150, मथुरा में 135, कासगंज में 128, फतेहपुर में 127, एटा में 119, बदायूं में 115, श्रावस्ती में 109, गोंडा में 108, चित्रकूट में 106 व देवरिया वन प्रभाग के अंतर्गत 105 सारस पाए गए। 29 वन प्रभागों में 100 से कम सारस मिले राज्य में 29 वन प्रभाग ऐसे भी रहे, जहां शीतकालीन गणना में 100 से कम सारस मिले। पीलीभीत सामाजिक वानिकी में 98, हमीरपुर में 95, सोहेलवा में 88, अयोध्या में 82, कुशीनगर में 64, हाथरस में 62, अंबेडकर नगर में 59, मेरठ में 51, मुरादाबाद में 50, उत्तर खीरी में 46, बुलंदशहर में 42, कौशांबी में 40, ललितपुर में 39, अवध में 38, मुजफ्फरनगर में 32, प्रतापगढ़ में 31, कतर्नियाघाट में 28, महोबा व संभल में 25-25, आगरा में 24, नजीबाबाद में 18, उरई में 15, प्रयागराज में 14, आजमगढ़ में 12, जौनपुर में 8, मऊ में 6, पलिया में 5, रामपुर में 4 व हापुड़ में दो सारस मिले। वर्जन  उत्तर प्रदेश में सारस की ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन, दो बार गणना होती है। हाल में ही संपन्न शीतकालीन गणना में राज्य पक्षी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि मिली है। गणना से पहले वन विभाग कर्मियों द्वारा सारस बाहुल्य प्राकृतवास का सर्वेक्षण कर महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है।   अनुराधा वेमुरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), यूपी

राजिम कुंभ कल्प 2026: पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने संतों से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद लिया

रायपुर. राजिम कुंभ कल्प 2026: पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने त्रिवेणी संगम पर संतों से की भेंट, बिहान दीदियों द्वारा बनाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का चखा स्वाद प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने राजिम कुंभ कल्प 2026 के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम के तट पर पहुंचकर विभिन्न अखाड़ों, पीठों से पधारे पूज्य धर्माचार्यों, संतों एवं लाखों श्रद्धालुओं से आत्मीय भेंट की। उन्होंने कुंभ की सभी व्यवस्थाओं का सघन निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मंत्री अग्रवाल ने कुंभ स्थल पर विभिन्न अखाड़ों के पूज्य संतों से भेंट कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया। संतों ने कुंभ की भव्यता की सराहना करते हुए राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने श्रद्धालुओं से भी बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं तथा तत्काल समाधान के निर्देश दिए।  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के स्टॉल पर पहुंचे मंत्री अग्रवाल ने स्वयं समूह की दीदियों से बातचीत की। उन्होंने दीदियों द्वारा तैयार छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसे चीला, फरा और ठेठरी का स्वाद लिया तथा उनकी कुशलता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। अग्रवाल ने कहा कि बिहान दीदियों की मेहनत से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि राजिम कुंभ जैसे वैश्विक आयोजन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर भी विश्व पटल पर चमक रही है।  मंत्री ने बांस और लकड़ी से बनी आदिवासी कलाकृतियों के स्टॉल पर जाकर स्थानीय कारीगरों से मुलाकात की। उन्होंने मूर्तियों, शोपीस और उपयोगी वस्तुओं की बारीकी से सराहना की तथा उनके उत्साहवर्धन के लिए खरीदारी भी की। अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार राजिम कुंभ के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करेगी। मंत्री अग्रवाल ने राजिम कुंभ स्थल पर बनाई गई रामवनगमन पथ की जीवंत प्रतिकृति का भी निरीक्षण किया। छत्तीसगढ़ के पौराणिक राम वनगमन मार्ग को चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाती यह प्रतिकृति श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अग्रवाल ने प्रतिकृति की बारीकी और कलात्मकता की प्रशंसा की। राजिम कुंभ कल्प 2026 की अन्य व्यवस्थाओं जैसे पानी की आपूर्ति, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधा, यातायात और सुरक्षा का जायजा लेते हुए मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने सुनिश्चित किया कि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस अवसर पर विधायक रोहित साहू, गरियाबंद कलेक्टर बी एस उइके, एसडीएम विशाल महाराणा, गरियाबंद जिला प्रशासन व पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।  राजिम कुंभ कल्प 2026 छत्तीसगढ़ की सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक बन चुका है, जहां लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर स्नान कर रहे हैं। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक-आर्थिक उत्सव के रूप में चमक रहा है।

बाघ गणना की तैयारी तेज, कोटा परियोजना मंडल में हुआ विशेष प्रशिक्षण

रायपुर. अखिल भारतीय बाघ गणना पर कोटा परियोजना मण्डल में विशेष प्रशिक्षण आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक की प्रेरणा एवं क्षेत्रीय महाप्रबंधक बिलासपुर के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय बाघ गणना से संबंधित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम कोटा परियोजना मण्डल द्वारा आयोजित की गयी। यह प्रशिक्षण विगत दिवस शिवतराई विश्राम गृह में निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आयोजित की गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य बाघों की संख्या का वैज्ञानिक आंकलन, उनके आवास एवं गतिविधियों की पहचान तथा क्षेत्र में पाए जाने वाले अन्य मांसाहारी एवं शाकाहारी वन्यप्राणियों की गणना की आधुनिक विधियों से कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना था। प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाघों की पहचान, पगमार्क, मल एवं खरोंच के निशानों के माध्यम से उपस्थिति की पुष्टि, कैमरा ट्रैप तकनीक का व्यावहारिक उपयोग, फील्ड डाटा संग्रहण एवं निगरानी की आधुनिक प्रणालियों की जानकारी दी गई। साथ ही हिरण, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर जैसे शाकाहारी वन्यप्राणियों तथा तेंदुआ जैसे अन्य मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना की वैज्ञानिक पद्धतियों पर भी प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि एकत्रित आंकड़ों के विश्लेषण के माध्यम से बाघों की वास्तविक संख्या, उनके शिकार प्रजातियों की उपलब्धता तथा वन्यजीव संरक्षण की स्थिति का आंकलन कैसे किया जाता है। इससे वन अधिकारियों को संरक्षण योजनाओं के निर्माण एवं प्रभावी रणनीति तय करने में सहायता मिलेगी। उल्लेखनीय है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से बाघ संरक्षण को सशक्त बनाने, अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा वन्यजीव प्रबंधन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण में मण्डल प्रबंधक, कोटा उपमण्डल प्रबंधक, परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी, सहायक परियोजना क्षेत्रपाल, क्षेत्ररक्षक एवं चौकीदारों ने भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बाघ संरक्षण एवं वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी पहल सिद्ध होगा।

सुप्रीम कोर्ट में SIR केस की चर्चा, ममता बनर्जी ने रखीं दलीलें, CJI ने उठाए अहम मुद्दे

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. सीएम ममता बनर्जी ने खुद अदालत में अपनी बात रखने की कोशिश की. हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने बीच में ही उन्हें टोकते हुए कहा कि उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान पहले ही सभी दलीलें रख चुके हैं. बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी. चुनाव आयोग पर ममता के आरोप बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया. इस पर CJI ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही अदालत के सामने रख चुके हैं. वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जी सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट के लिए अब सिर्फ 11 दिन बचे हैं और यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होनी है, जबकि इस मामले की सुनवाई के लिए केवल चार दिन का समय बचा है. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 32 लाख ‘अनमैप्ड वोटर्स’ हैं और लगभग 3.26 करोड़ नामों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ पाई गई है, जो कुल मतदाताओं का करीब 20 प्रतिशत है. श्याम दीवान ने मांग की कि चुनाव आयोग को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में शामिल हर मतदाता का नाम सार्वजनिक करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद कई मामलों में केवल नाम, उम्र और लिंग दर्ज हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया कि मतदाता का नाम सूची से क्यों हटाया गया. लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे वोटर लिस्ट में क्यों नहीं हैं. इस पर CJI ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक सामान्य सूचना नहीं है, बल्कि संबंधित लोगों को व्यक्तिगत नोटिस भी दिए जा रहे हैं. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यह समय कृषि और त्योहारों का है, ऐसे में कई लोग अपने गृह जनपद से बाहर हैं. CJI ने सवाल किया कि जब बंगाल में बीएलओ पर दबाव और मौतों की बातें सामने आ रही हैं, तो असम जैसे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो रहा. 'बंगाल को टारगेट किया जा रहा है' ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग सभी दस्तावेज स्वीकार कर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में उन्हें खारिज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब त्योहार और फसल कटाई का मौसम है और बड़ी संख्या में लोग राज्य से बाहर हैं. इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ तक कह दिया. उन्होंने कहा, “इलेक्शन कमीशन… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.” सुनवाई के अंत में CJI ने कहा कि अदालत समय बढ़ाने का निर्देश दे सकती है. उन्होंने ममता बनर्जी से कहा कि अदालत को उनके वकील श्याम दीवान की काबिलियत पर पूरा भरोसा है और उन्होंने अपने लिए श्रेष्ठ वकील चुने हैं. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है. CJI ने कहा कि चुनाव आयोग आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर अदालत के समक्ष आए. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार को उपलब्ध ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा गया है. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों के प्रति ‘होस्टिलिटी’ को लेकर लिखित आशंका जताई गई है. अदालत में क्या-क्या हुआ, यहां देखें ECI के वकील: 'मेरी इंस्ट्रक्शन यह थी कि सिर्फ स्पेलिंग की मामूली गलती पर नोटिस जारी नहीं किया जाएगा.' CJI: 'राज्य का एग्जीक्यूटिव हेड भी आज यहां मौजूद है. क्या यह संभव नहीं कि राज्य बंगला भाषा के विशेषज्ञ उपलब्ध कराए, जो समिति के साथ बैठकर स्थानीय उच्चारण और स्पेलिंग पर सलाह दें?' ममता बनर्जी: 'मैं इस पर सफाई दे सकती हूं, क्योंकि मैं उसी राज्य से हूं.' CJI: 'इसमें कोई संदेह नहीं कि आप वहीं से हैं.' ममता बनर्जी: 'बेंच का धन्यवाद कि मुझे बोलने की अनुमति दी गई. 'समस्या यह है कि वकील तब लड़ते हैं, जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है. जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय दरवाजों के पीछे रोता रहता है. मैंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया.'  'मैं कोई खास व्यक्ति नहीं हूं. मैं एक बंधुआ मजदूर जैसी हूं. मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं, मैं एक साधारण नागरिक हूं.' CJI: 'पश्चिम बंगाल सरकार ने भी याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट के सर्वश्रेष्ठ वकील राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं—कपिल सिब्बल, गोपाल और श्याम दीवान. हमारी मदद के लिए सर्वश्रेष्ठ लीगल टीम मौजूद है. 19 जनवरी को जब मामला आया था, तब श्री सिब्बल ने पश्चिम बंगाल सरकार और नागरिकों की समस्याएं बहुत स्पष्टता से रखी थीं. सभी मुद्दे चिन्हित हो चुके हैं. हर समस्या का समाधान होता है. हमें यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी निर्दोष नागरिक बाहर न रह जाए. 'सिर्फ तीन आधार ऐसे हैं, जिन पर किसी को आपत्ति नहीं होगी— पहला, दोषसिद्ध व्यक्ति. दूसरा, जो राज्य या देश से बाहर जा चुके हैं. तीसरा, गैर-नागरिक.'  लेकिन बंगाल में नामों का उच्चारण अलग तरीके से होता है. आजकल AI-आधारित रिकॉर्डिंग हो रही है. ऐसी तकनीकी या भाषाई गलती के कारण किसी असली नागरिक को बाहर नहीं किया जाना चाहिए. ECI: 'हमें अभी तक याचिका की कॉपी नहीं मिली है. हमें यह भी नहीं पता कि असली समस्या क्या है. हमें जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाए.' CJI: 'आपको कॉपी इसलिए नहीं दी गई क्योंकि यह मामला पहली … Read more

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर. उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज मंत्रालय में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने पत्रकार-वार्ता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।  

सीएम विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग, विकास से जुड़े अहम फैसले

रायपुर. मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – मंत्रिपरिषद की बैठक मादक पदार्था की रोकथाम की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के गठन हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में प्रावधानित 100 नवीन पदों की  स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव एवं कोरबा जिला शामिल हैं।  मंत्रिपरिषद की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा अंतर्गत एस.ओ.जी. (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन के लिए प्रावधानित 44 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है। एसओजी का काम किसी भी बड़ी या अचानक हुई घटना में तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को संभालना और आतंकी हमला या गंभीर खतरे को जल्दी खत्म करना होता है। एसओजी एक खास तरह की प्रशिक्षित टीम होती है, जिसे ऐसे खतरनाक कामों के लिए तैयार किया जाता है।  मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न एयरपोर्ट एवं हवाई पट्टियों में उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) की स्थापना का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया तथा इसके संचालन के दिशा-निर्देशों का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ में पायलट प्रशिक्षण की सुविधा के लिए राज्य में उड़ान प्रशिक्षण संगठन की स्थापना की जाएगी। विमानन क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह संस्थान उपयोगी होगा। इससे एयरक्राफ्ट रिसाइकिलिंग, हेलीकॉप्टर बंकिंग तथा एयरो स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित होगी। फ्लाइट ट्रेनिग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना निजी सहभागिता से किया जाएगा।  मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-26 का अनुमोदन किया गया। इस नीति से स्टार्टअप ईको सिस्टम के साथ-साथ इन्क्यूबेटर्स एवं अन्य हितधारकों का विकास होगा। छत्तीसगढ़ को देश में एक प्रमुख नवाचार केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में सुधार होने से राज्य में निवेश का आकर्षण बढ़ेगा। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इन कॉलोनियों में खुले भू-खंड, उद्यान और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी। हालांकि, आवासीय, व्यावसायिक और अर्द्धसार्वजनिक बिक्री योग्य संपत्तियां इसमें शामिल नहीं होंगी। अभी इन कॉलोनियों का हस्तांतरण नहीं होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को कई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कॉलोनियों के रखरखाव के लिए निवासियों को दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा है। एक ओर वे नगर निगम को संपत्ति कर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गृह निर्माण मंडल को भी रखरखाव शुल्क देना पड़ता है। इन कॉलोनियों के हस्तांतरण से नगरीय निकायों द्वारा यहां पानी, बिजली, सड़क, सफाई जैसी सुविधाएं दी जा सकेंगी और कॉलोनीवासियों को अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से राहत मिलेगी। मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय विभागों तथा निगम मंडल के कार्यालयों के लिए नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा एक वृहद बहुमंजिला भवन बनाने का निर्णय लिया गया है और यहां विभागों को स्पेस आबंटित किया जाएगा, ताकि भूमि का पूर्ण उपयोग किया जा सके।  मंत्रिपरिषद द्वारा सिरपुर एवं अरपा क्षेत्र में सुनियोजित विकास और विकास कार्यों को गति देने के लिए संबंधित क्षेत्र में शासकीय भूमि के आबंटन का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को प्रदान किया गया है।  गौरतलब है कि सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का उद्देश्य संबंधित नदी तटीय क्षेत्रों का योजनाबद्ध और समग्र विकास करना है। इसके लिए मास्टर प्लान के क्रियान्वयन, भूमि नियोजन एवं नगर विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है। विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय भूमि का आबंटन जरूरी था। वर्तमान में दोनों प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए शासकीय भूमि का आबंटन रु. 1/- प्रीमियम एवं भू-भाटक पर किए जाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, भूमि आबंटन के अधिकार संबंधित जिला कलेक्टरों को दिया गया है।  मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति‘‘ को प्रदेश में लागू किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया।  छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति के अनुसार राज्य शासन के सभी विभाग, उपक्रम एवं स्वायत्त संस्थाएं केवल भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनुमोदित क्लाउड सेवा प्रदाताओं या भारत में स्थित सुरक्षित डेटा सेंटर एवं डिजास्टर रिकवरी सेंटर से ही क्लाउड सेवाएं लेंगी। किसी विशेष या असाधारण आवश्यकता के लिए राज्य क्लाउड परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।  नीति के तहत कम प्राथमिकता वाले एप्लिकेशन एवं आर्काइव डेटा का क्लाउड माइग्रेशन वर्ष 2027-28 तक तथा उच्च प्राथमिकता सेवाओं का माइग्रेशन 2029-30 तक किया जाएगा। सभी नए एप्लिकेशन क्लाउड-नेटिव तकनीक पर विकसित किए जाएंगे।  कैबिनेट ने इस नीति में भविष्य में आवश्यक संशोधन करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को अधिकृत किया है। इस नीति से आईटी ढांचे में लागत में कमी, संचालन में दक्षता, बेहतर साइबर सुरक्षा, आपदा के समय सेवाओं की निरंतरता तथा नागरिक सेवाओं की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रैकिंग व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विस्तार देने के लिए मोबाइल टावर योजना का अनुमोदन किया गया है। भौगोलिक विषमता और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित होने से शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित हो रहा है। इस योजना से मोबाइल टावर स्थापना हेतु चयनित सेवा प्रदाताओं को अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाएगा।  मोबाइल टावर योजना के अंतर्गत चयनित मोबाइल नेटवर्क विहीन बसाहटों में टावर की स्थापना की जाएगी। डिजिटल कनेक्टिविटी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, ई गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार होगा सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। योजना से सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार होगा विशेष कर वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में संचार सुविधा उपलब्ध होने से प्रशासनिक कार्य में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। मोबाइल टावर योजना के लागू होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आपातकालीन सेवाएं … Read more