samacharsecretary.com

किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों के कल्याण के लिए मिशन मोड में करें काम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन किसान रथ निकालें, उड़द और मूंगफली के अधिकाधिक उत्पादन को दें प्रोत्साहन कृषि वर्ष की गतिविधियों की करें नियमित मॉनिटरिंग मंडियों का करें भ्रमण, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर दें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के लिए सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को वीसी से दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं रोक, किसानों को जागरूक किया जाए कि वे खेत का भूसा गौशालाओं में पहुंचाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करें समन्वित प्रयास – पशुपालकों के लिए तैयार हो रहा एक ऐप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना पर करें अमल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं। फरवरी में डिण्डोरी में होगा कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम, मार्च में होगा राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत … Read more

मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा

सीएम योगी से मिले ‘गोदान’ फिल्म के निर्माता-निर्देशक, ट्रेलर लांच मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा गोरक्षा के संकल्प, भारतीय संस्कृति और पंचगव्य विज्ञान को बड़े पर्दे पर लाएगी ‘गोदान’ पंचगव्य से पंच परिवर्तन व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है फिल्म, 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होगी लखनऊ गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व और पंचगव्य आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर फिल्म का ट्रेलर लांच किया गया। फिल्म के निर्माता व निर्देशक ने स्पष्ट किया कि देश में गो-रक्षा को लेकर सबसे व्यापक, ठोस और जमीनी स्तर पर कार्य उत्तर प्रदेश में हुआ है, और इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन और प्रतिबद्ध नेतृत्व है। इन्हीं बातों ने उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के लिए प्रेरित किया। सीएम योगी के सत्ता संभालते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर शुरु हुआ ताबड़तोड़ एक्शन योगी आदित्यनाथ के सीएम बनते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरु हुआ और बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी की गई। गोवंश के प्रति मुख्यमंत्री के स्नेह और गो संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता का इसी बात से पता चलता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में साढ़े सात हजार से ज्यादा गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा चुके हैं। गो सेवा और उनके संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन किया गया है। हर जनपद के डीएम व एसएसपी इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया विनोद चौधरी द्वारा निर्मित व निर्देशित ‘गोदान’ फिल्म 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का समग्र दस्तावेज है। निर्माता ने मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया। गोरक्षा को लेकर सीएम योगी के अभूतपूर्व कार्य बने प्रेरणा फिल्म निर्माता विनोद चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान कहा कि आज देश में गो-रक्षा के क्षेत्र में जो ठोस कार्य दिख रहा है, उसका सबसे बड़ा केंद्र उत्तर प्रदेश है। प्रदेश में गोशालाओं का विस्तार, निराश्रित गोवंश की व्यवस्था, तस्करी पर सख्ती और गो संरक्षण को शासन की प्राथमिकता बनाना, ये सभी कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संभव हो पाए हैं। निर्माता विनोद चौधरी ने कहा कि जो दायित्व सामान्यतः समाज और हर नागरिक का होना चाहिए, उसे मुख्यमंत्री स्वयं उदाहरण बनकर निभा रहे हैं। गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा है, जो वैदिक काल से हमारे जीवन का आधार रही है। समुद्र मंथन से कामधेनु की प्राप्ति की कथा से लेकर आज तक गाय भारतीय सभ्यता की पोषक रही है। नई पीढ़ी को गाय के महत्व से जोड़ने का प्रयास विनोद चौधरी ने कहा कि नई युवा पीढ़ी धीरे-धीरे गाय के महत्व को भूलती जा रही है। दूध देने तक गाय को रखा जाता है और उसके बाद उसे छोड़ दिया जाता है, फिर यह कहा जाता है कि इसकी जिम्मेदारी सरकार निभाए। जबकि यह केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी नागरिकों का नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है कि गोमाता का पालन-पोषण करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाय हमारी माता है। जो लोग गाय को केवल पशु कहते हैं, वे स्वयं पशुता की मानसिकता में जी रहे हैं। जैसे मां हमें पोषण देती है, वैसे ही गाय संपूर्ण मानव समाज का पोषण करती है।   पंचगव्य से पंच परिवर्तन का संदेश फिल्म ‘गोदान’ में पंचगव्य से पंच परिवर्तन को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि पंचगव्य किस प्रकार मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। निर्माता के अनुसार, गाय पर हाथ फेरने मात्र से मानसिक शांति मिलती है, रक्तचाप संतुलित होता है और अनेक बीमारियों पर इसका प्रभाव पड़ता है। फिल्म में यह संदेश वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए फिल्म निर्माता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने की अपेक्षा भी व्यक्त की। उनका कहना था कि यह फिल्म किसी एक जाति, धर्म या वर्ग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए है। विशेषकर युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। स्कूल के बच्चों, परिवारों और समाज के हर वर्ग तक इसका संदेश पहुंचना चाहिए। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान विनोद चौधरी (निर्माता), शांतनु शुक्ला (प्रचार-प्रसार प्रमुख), डॉ. कपिल त्यागी (सीएमडी, यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा) और नवल किशोर उपस्थित रहे। प्रदेश में गो सेवा-संरक्षण के अभूतपूर्व प्रबंध गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि धरती, कृषि, प्रकृति और मानव जीवन, सभी के लिए गोमाता  सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। प्रदेश में गोसेवा और संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। गोमाता पर बनी यह फिल्म हर युवा, बच्चे और बुजुर्ग को सपरिवार देखनी चाहिए।

भाजपा प्रमुख नितिन नवीन ने बताई टीम बनाने की योजना: मेहनत इन राज्यों में, दिल्ली में मिलेगा मौका

नई दिल्ली भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए देश भर से चुने गए भाजपा नेताओं के प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने की संभावना है। असम के लिए विशेष टीम की तैनाती भाजपा ने असम के लिए लगभग एक दर्जन राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सूची तैयार की गई है। इस पूरी टीम का मार्गदर्शन राज्य के चुनाव प्रभारी बैजयंत 'जय' पांडा कर रहे हैं। इस टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं। राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे 'परखे हुए' नेताओं को भी इस मिशन में जोड़ा गया है। यह टीम राज्य में भाजपा, आरएसएस और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी। नेताओं की जिम्मेदारियां और कार्य इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं को केवल प्रचार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर के ठोस काम सौंपे गए हैं। जैसे हर नेता को एक से दो लोकसभा सीटों के भीतर चुनावी प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है। जनसांख्यिकीय आंकड़ों का विश्लेषण और बूथ स्तर की रणनीति बनाना का काम भी दिया गया है। इसके अलावा, चुनाव करीब आने पर ये नेता टिकटों के बंटवारे से जुड़े फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि को मजबूत करेंगे। चयन का आधार क्या है? इन नेताओं के चयन में उनकी आरएसएस पृष्ठभूमि, ABVP और युवा मोर्चा के साथ उनके पुराने जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि भाजपा पहले भी अन्य राज्यों के नेताओं को चुनावी ड्यूटी पर लगाती रही है, लेकिन इस बार का उद्देश्य नए अध्यक्ष के तहत 'संगठनात्मक निरंतरता' बनाए रखना है। चुनाव परिणामों के बाद किए जाने वाले विश्लेषण में जिन नेताओं का प्रदर्शन शानदार रहेगा, उन्हें नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। पीढ़ीगत बदलाव के संकेत 45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा में एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नबीन की टीम में नए चेहरों और अनुभवी दिग्गजों का मिश्रण होगा। चूंकि इस साल कई बड़े नेता राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं और एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का आधा समय पूरा होने वाला है, ऐसे में कैबिनेट फेरबदल की भी संभावनाएं हैं। वर्तमान में असम के लिए जो टीम बनाई गई है, वैसी ही टीमें जल्द ही पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए भी घोषित की जाएंगी। इन नेताओं के लिए यह चुनाव केवल जीत-हार का सवाल नहीं है, बल्कि भाजपा के नए सांगठनिक ढांचे में अपने भविष्य को सुरक्षित करने का एक मौका है। नितिन नवीन की पहली परीक्षा असम और पश्चिम बंगाल के आगामी 2026 विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। नए अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए ये चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा होंगे। असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने (हैट्रिक) के लक्ष्य के साथ मैदान में है। भाजपा का पूरा जोर 'घुसपैठ' और 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन' जैसे मुद्दों पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार 'मियां' वोटर्स और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं। नितिन नवीन ने असम में बूथों की संख्या को 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य रखा है, ताकि माइक्रो-मैनेजमेंट को मजबूत किया जा सके। कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी को असम के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस विपक्षी एकजुटता के जरिए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। भाजपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि गठबंधन लगभग 103 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने की स्थिति में है। हालांकि असम के मुकाबले बंगाल में भाजपा के लिए चुनौती थोड़ी कठिन है क्योंकि यहां वह 14 साल के ममता बनर्जी के शासन को चुनौती दे रही है। भाजपा के पास बंगाल में ममता बनर्जी के कद का कोई एक 'मास लीडर' नहीं है। इसलिए पार्टी एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे और 'विकास' के मॉडल पर निर्भर है। भाजपा ने बंगाल को अलग-अलग जोन में बांटकर 'क्षेत्रीय वॉर-रूम' बनाए हैं। हर जोन के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को तैनात किया गया है। पार्टी भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। साथ ही, केंद्रीय योजनाओं के लाभ को सीधे जनता तक पहुँचाने का वादा किया जा रहा है। नितिन नवीन ने पद संभालते ही बंगाल का दौरा शुरू कर दिया है। उन्होंने दुर्गापुर में कोर टीम के साथ बैठक कर जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का 'रोडमैप' तैयार किया है।

अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन: शांति, विश्वास और विकास का सामूहिक दौड़

रायपुर. अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन: शांति, विश्वास और विकास का सामूहिक दौड़ अबूझमाड़ की पावन धरती से शांति, सद्भाव और विकास का सशक्त संदेश देते हुए आज अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने आज अलसुबह नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर के समीप आयोजित हाफ मैराथन सहभागिता की और धावकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सांकेतिक रूप से स्वयं भी दौड़ लगाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विजयी प्रतिभागियों को प्रदान किए जाने वाले मैडल का अनावरण भी किया।    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज अबूझमाड़ की धरती से पूरे देश और दुनिया को अमन और शांति का मजबूत संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही अबूझमाड़ है, जहाँ कभी आम नागरिकों और जवानों का पहुँचना भी कठिन था, लेकिन आज सकारात्मक वातावरण के कारण हजारों लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में माओवाद से मुक्ति की दिशा में युवा वर्ग का जोश और उत्साह यह संकेत दे रहा है कि जल्द ही यह क्षेत्र खुशियों से आबाद होगा।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की नीतियों और नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है और बस्तर लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में लगे सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों के अदम्य साहस और पराक्रम को नमन करते हुए कहा कि उन्हीं के बलिदान और समर्पण से आज बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की मजबूत नींव पड़ी है।  मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में बस्तर क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है तथा नए विकास कार्यों की घोषणा भी की गई है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार दशकों से विकास से वंचित रहा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और बस्तर में विकास की गंगा निरंतर बहेगी। उन्होंने सम्पूर्ण बस्तर और छत्तीसगढ़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के सरकार के संकल्प को दोहराया।  उल्लेखनीय है कि यह 21 किलोमीटर लंबी हाफ मैराथन नारायणपुर से बासिंग तक आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से आए 60 से अधिक विदेशी प्रतिभागियों सहित बस्तर संभाग, प्रदेश एवं अन्य राज्यों के 10 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया। मैराथन से पूर्व हाईस्कूल परिसर में जुंबा वॉर्मअप कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों प्रतिभागियों ने एक साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की।  आत्मसर्पित माओवादी बने मैराथन का हिस्सा  इस आयोजन की सबसे विशेष और ऐतिहासिक बात यह रही कि आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं ने भी हथियार छोड़कर शांति और मुख्यधारा में लौटने का संदेश देते हुए मैराथन में हिस्सा लिया। नारायणपुर की अबूझमाड़िया जनजाति सहित स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी बनाया।  कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक   केदार कश्यप, जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद   महेश कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष   रूपसाय सलाम, वैद्यराज पद्म हेमचंद मांझी, मुख्यमंत्री के सचिव   राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर   डोमन सिंह, आईजी   पी. सुंदरराज, कलेक्टर  मती नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक   राबिनसन गुरिया, जिला सीईओ  मती आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

सर्वाधिक धनराशि बाढ़ से नुकसान की क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए की गई आवंटित

आपदा राहत प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध है प्रदेश सरकार, वर्ष 2025-26 में जारी किए 710.12 करोड़ रुपये सर्वाधिक धनराशि बाढ़ से नुकसान की क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए की गई आवंटित  निराश्रितों को शीतलहरी से बचाने के लिए रैन बसेरों, कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था से दी गई राहत लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार बाढ़, भूकंप, सूखा, अग्निकांड, शीतलहर एवं मानव-जीव संघर्ष जैसी आपादाओं से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध और संवेदनशील है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का राहत आयुक्त कार्यालय आपादा प्रभाव को कम करने तथा पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए सभी संभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा राहत निधि के तहत 710.12 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से विभिन्न प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा पीड़ितों को सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही राज्य में आपदा राहत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किये गए हैं, जिससे वर्तमान में उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है। त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को मिली रफ्तार    प्रदेश में आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, प्रभावी राहत वितरण एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी 710.12 करोड़ रुपये में सर्वाधिक 365.73 करोड़ रुपये बाढ़ प्रभावितों के बचाव के लिए जारी किए गए। इसे विशेष रूप से सरयू, गंगा और घाघरा के बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास पर खर्च किया गया। चक्रवात व आंधी-तूफान से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति के लिए 14.13 करोड़, ओलावृष्टि से नुकसान की भरपाई के लिए 0.13 करोड़, अग्निकांड में क्षतिपूर्ति के लिए 14.63 करोड़ रुपये और शीतलहरी से बचाव के लिए 50.72 करोड़ रुपये जारी किये गये। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा अन्य आपदाओं के लिए लगभग 246.63 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। सामान्य मद के लिए 0.44 करोड़ व अन्य राहत कार्यों के लिए 17.71 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इस राशि को प्रदेश में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को गति प्रदान करने एवं आपदा राहत तंत्र को प्रभावी बनाने में खर्च किया गया।  बांटे गये 5 लाख 89 हजार से अधिक कंबल  राहत आयुक्त कार्यालय ने ठंड के मौसम में बचाव के लिए व्यापक प्रबंध किए, जिससे इस वर्ष शीतलहर से होने वाली जनहानि में विशेष रूप से कमी आई। इस क्रम में प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित एवं असहाय व्यक्तियों को कंबल वितरण हेतु 45.51 करोड़ व अलाव जलाने के लिए 3.51 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई। जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में 27,027 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जहां अब तक 1,69,834 अलाव जलाए जा चुके हैं, जरूरत के हिसाब से ये कार्य अभी भी जारी है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा गरीबों और निराश्रितों को 5,89,689 कंबल वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही प्रदेश भर में 1,242 रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं, जहां अब तक 64 हजार से अधिक व्यक्तियों को रैन बसेरों ने राहत प्रदान की। ये व्यवस्थाएं शीतलहरी के दौरान निराश्रित और असहाय लोगों की जान बचाने में उल्लेखनीय प्रयास साबित हुईं। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि हर आपदा प्रभावित व्यक्ति को त्वरित सहायता मिले और जीवन-रक्षा के साथ आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित हो। इसके लिए राहत आयुक्त कार्यलय की ओर से आपदा प्रहरी एप और 1070 टोल फ्री नंबर का संचालन भी किया जाता है। जो आपदा प्रभावितों को त्वरित सहायता और प्रभावी समन्वय को सुनिश्चित करता है।

नारायणपुर-कोंडागांव निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का मुख्यमंत्री साय ने किया निरीक्षण

रायपुर. मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान नारायणपुरदृकोंडागांव के मध्य निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। डबल इंजन सरकार में बस्तर के विकास को गति डबल इंजन की सरकार के तहत विकास कार्यों को गति देते हुए बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता दी जा रही है। एनएच-130डी, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है, एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह मार्ग कोंडागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह मार्ग बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुंचता है, जहां यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। छत्तीसगढ़ में 122 किमी लंबा हिस्सा नेशनल हाईवे 130-डी का कोंडागांव से नारायणपुर तक लगभग 50 किलोमीटर का हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है, जबकि कुतुल से महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक 21.5 किलोमीटर की दूरी है। इस प्रकार इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी में से लगभग 122 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के पूर्ण होने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा, सुरक्षित और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा। साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुगम एवं सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित होगा। प्रधानमंत्री के सहयोग से मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी के सहयोग से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस एवं निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने कहा कि “राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल एक सड़क नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। सरकार इस परियोजना को तेज गति से पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगा, बल्कि बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी और क्षेत्र में विश्वास, निवेश तथा आवागमन को नई दिशा देगी। इस अवसर पर राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, सांसद   महेश कश्यप, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष   रूपसाय सलाम, मुख्यमंत्री के सचिव   राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

सेवा और समर्पण की मिसाल: मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण मिशन की भूमिका को सराहा

रायपुर. रामकृष्ण मिशन के सेवा कार्यों की मुख्यमंत्री ने की सराहना मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने आज नारायणपुर के रामकृष्ण मिशन आश्रम परिसर स्थित इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के बिना मानव जीवन अधूरा है। शिक्षित और अशिक्षित व्यक्ति के जीवन में बड़ा अंतर होता है। अशिक्षित व्यक्ति शोषण का शिकार होता है, जबकि शिक्षित व्यक्ति अपने विवेक का उपयोग कर निरंतर आगे बढ़ता है। रामकृष्ण मिशन के सेवा कार्यों की मुख्यमंत्री ने की सराहना मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह समय अध्ययन का है। उन्होंने एक आदर्श विद्यार्थी के पांच गुणों- “काकचेष्टा बको ध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च। अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पञ्चलक्षणम।” का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर एकाग्रता के साथ अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने माता-पिता के सपनों को साकार करते हुए देश और प्रदेश की सेवा करें। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने नारायणपुर के रामकृष्ण आश्रम के बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में आर्थिक स्थिति कभी बाधा नहीं बननी चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, छात्रवृत्ति, प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। उच्च शिक्षा के लिए ऋण की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु नालंदा परिसर का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री   साय ने रामकृष्ण मिशन के सेवा भावी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अबूझमाड़ जैसे सुदूर और अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना अत्यंत सराहनीय कार्य है। मिशन द्वारा यहां कृषि के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में भी लोगों की सहायता की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सेवा कार्य करते हुए रामकृष्ण मिशन को 40 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद प्रभावित होने के कारण पहले लोग इस क्षेत्र में आने से डरते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे माओवाद समाप्ति की ओर है और विकास कार्यों में तेजी आई है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से अब तक 400 ग्रामों में विकास कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। लोगों के राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी बन रहे हैं। राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय अपने भविष्य को संवारने का है। भगवान ने सभी को विवेक और क्षमता प्रदान की है, जिससे जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच रखने, अच्छी पुस्तकें पढ़ने और अच्छे संगत में रहने का आग्रह किया। इस अवसर पर बस्तर सांसद   महेश कश्यप, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष  रूपसाय सलाम, सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

नारायणपुर अंचल में अमन शांति

रायपुर. दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास पर पहुँचे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अबूझमाड़ क्षेत्र में आयोजित पीस हाफ मैराथन के शुभारंभ के साथ-साथ अनेक सामाजिक, खेल और पर्यटन गतिविधियों में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन और स्थानीय सहभागिता को बढ़ाने के लिए राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का अवलोकन किया, उन्हें प्रोत्साहित किया तथा लोगों से संवाद कर सहभागिता और विश्वास को और मजबूत किया। बाइकर्स को दिखाई हरी झंडी  मुख्यमंत्री साय ने शांत सरोवर के समीप रायपुर के छत्तीसगढ़ राइडिंग क्लब के 40 बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बाइकर्स समूह नारायणपुर के सुदूर पर्यटन स्थल कच्चापाल तक की यात्रा करेगा। इस पहल के माध्यम से अबूझमाड़ को जानने, समझने और शांति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। शांत सरोवर में नौका विहार  बिजली गाँव के समीप स्थित शांत सरोवर में मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय ने वन मंत्री   केदार कश्यप, राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, सांसद बस्तर  महेश कश्यप एवं लघु वनोपज के अध्यक्ष   रूपसाय सलाम के साथ नौका विहार का आनंद लिया। स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष पहल स्थानीय प्रशासन के द्वारा की गई है।  तीर-धनुष से साधा लक्ष्य  मुख्यमंत्री साय ने बिंजली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीरंदाजी के स्थानीय युवा खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की और स्वयं तीर-धनुष उठाकर लक्ष्य साधते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अंचल में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आदिवासी समाज की पारंपरिक दक्षताओं को आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। शांति, आजीविका और खेलों के विकास में प्रशासन द्वारा समन्वित प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन, खेल प्रतिभाओं को मंच देने और विश्वास का वातावरण बनाने के लिए सतत कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव   राहुल भगत, कमिश्नर   डोमन सिंह, आईजी   सुंदरराज पी, कलेक्टर सु  नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक   रॉबिन्सन गुरिया, सीईओ सु  आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

इतिहास रचा सुनेत्रा पवार ने: महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी CM का भव्य राजतिलक

मुंबई  एनसीपी (अजित गुट) की विधायक दल बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए सुनेत्रा पवार को पार्टी का नया विधायक दल नेता चुन लिया गया है. इस फैसले के साथ ही उनके आज ही महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का रास्ता साफ हो गया है. बैठक से पहले ही संकेत मिल गए थे. पार्टी नेता दिलीप वलसे ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे पार्टी के अन्य नेताओं ने समर्थन दिया. सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद के रूप में विधान भवन पहुंची थीं, जहां सर्वसम्मति से उन्हें पार्टी का नेता बनाए जाने का फैसला लिया गया. इससे पहले एनसीपी नेताओं ने दिवंगत अजित पवार को श्रद्धांजलि दी. पार्टी नेताओं के मुताबिक यह फैसला संगठन और राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक माना जा रहा है. NCP मर्जर की खबरों के बीच इसलिए लिया फैसला राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार को उनके पति एवं दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तीन दिन बाद शनिवार (31 जनवरी) को महाराष्ट्र में सर्वसम्मति से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक दल की नेता चुना गया। इसके बाद सुनेत्रा पवार को आज (31 जनवरी) राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। इससे पहले NCP विधायक दल की नेता के रूप में सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव वरिष्ठ नेता दिलीप वालसे पाटिल ने किया। जबकि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने इसका समर्थन किया। बारामती में 28 जनवरी को हुई एक विमान दुर्घटना में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली 'महायुति' सरकार में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रहे अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई। बैठक के दौरान सुनेत्रा पवार ने अपने दिवंगत पति की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। उनके छोटे बेटे जय भी इस अवसर पर मौजूद थे। विधान भवन परिसर में प्रवेश करते समय कई मंत्री और विधायक भावुक दिखाई दिए। लोक भवन ने पुष्टि की है कि सुनेत्रा पवार का शपथ ग्रहण समारोह मुंबई में शाम पांच बजे आयोजित किया गया। सुनेत्रा पवार ने साल 2024 में बारामती से लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्हें अपनी ननद और NCP (SP) की मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले से पराजय का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सुनेत्रा पवार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुईं। डिप्टी सीएम बनने का फैसला क्यों लिया? कुछ लोग जल्दबाजी में डिप्टी सीएम बनने के पीछे की वजह को लेकर हैरान हैं। पार्टी सूत्रों ने News18 को बताया कि सुनेत्रा पवार शुरुआत में इसके लिए तैयार नहीं थीं। लेकिन पार्टी की भलाई और अजित पवार के विजन को आगे बढ़ाने के लिए NCP वफादारों की राय पर विचार करने के बाद भारी मन से वह सहमत हुईं। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली 'महायुति' सरकार में उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रहे अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती में एक विमान दुर्घटना में चार अन्य लोगों के साथ मौत हो गई थी। NCP सूत्रों के अनुसार, डिप्टी CM अजित पवार की मौत के बाद सुनेत्रा को लगा कि पार्टी प्रमुख के तौर पर अपने पति के विजन को आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है। सूत्रों ने कहा, "जब अजित पवार ने बगावत की, तो वह अकेले थे… सुनेत्रा पवार ने एक पत्नी के तौर पर उस पार्टी की रक्षा करना अपना कर्तव्य समझा, जिसे अजित पवार ने सालों की कड़ी मेहनत से बनाया था। दुख की घड़ी में भी, उन्हें लगा कि अपने पति के काम को आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है।" अजित पवार ने NCP को दो गुटों में बांट दिया था। एक गुट यानी असली NCP अजित पवार का है। जबकि दूसरा NCP (SP) उनके चाचा शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले के नेतृत्व में है। इसके बाद वह BJP-शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गए। जबकि SP गुट शिवसेना UBT और कांग्रेस के साथ विपक्ष में रहा।  

परिवहन सुविधा की सौगात: नारायणपुर के परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय को मिलेगी बस

रायपुर. नारायणपुर के परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय को बस देने की घोषणा मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय आज नारायणपुर जिले के गरांजी स्थित परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय में अचानक छात्रों के बीच पहुंचे। विद्यालय पहुंचने पर संस्था में अध्ययनरत दिव्यांग छात्र रंजीत बड्डे सहित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा स्वागत गीत, हनुमान चालीसा एवं बस्तर अंचल के पारंपरिक गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मांग पर मुख्यमंत्री   साय ने विद्यालय को एक बस उपलब्ध कराने की घोषणा की। दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री साय  मुख्यमंत्री   साय ने बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। विद्यालय में उपलब्ध सुविधाएं अच्छी हैं, उनका पूरा लाभ लेकर सभी अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। उन्होंने बच्चों को आईएएस, आईपीएस जैसे उच्च पदों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया और कहा कि किसी भी प्रकार की शारीरिक कमी से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों पर ईश्वर का विशेष आशीर्वाद होता है। बच्चों ने जब उनसे पूछा गया कि उन्हें विद्यालय आकर कैसा लगा, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। एक बच्ची के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि बचपन में उन्हें पिट्ठू, फुटबॉल जैसे खेल खेलना बहुत पसंद था।   मुख्यमंत्री ने संस्था के सभी बच्चों को चॉकलेट वितरित कर आशीर्वाद दिया। दिव्यांग बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुख्यमंत्री   साय सहित राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद   महेश कश्यप, अन्य जनप्रतिनिधियों, मुख्यमंत्री सचिव   राहुल भगत, कमिश्नर   डोमन सिंह एवं आईजी   सुंदरराज पी. ने सराहना की। उल्लेखनीय है कि परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय का शुभारंभ 11 सितंबर 2023 को किया गया था। इसका संचालन जिला खनिज न्यास निधि से किया जा रहा है। विद्यालय का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समावेशी शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिससे उनका आत्मविश्वास सुदृढ़ हो और वे समाज में अपनी भूमिका प्रभावी रूप से निभा सकें। यह विद्यालय सामान्य और दिव्यांग बच्चों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में विद्यालय में कुल 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में आडियोलॉजी, फिजियोथेरेपी, विशेष शिक्षा संगीत शिक्षा, खेलकूद, योग एवं व्यायाम, तथा कंप्यूटर शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हैं।