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उमरिया में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में कपड़े बदल रही छात्राओं का वीडियो बनाकर शिक्षकों पर हमला

उमरिया. ग्राम पिपरिया स्थित हाईस्कूल में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान 3 से 4 नशे में धुत युवकों ने छात्राओं के कपड़े बदलने के लिए निर्धारित कक्ष में घुसकर मोबाइल से फोटो-वीडियो बनाने की कोशिश की। रोकने पर उन्होंने शिक्षकों पर हमला किया। घटना के बाद पीड़ित शिक्षकों ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामला जिले के ग्राम पिपरिया स्थित हाईस्कूल का है। राष्ट्रीय महापर्व गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था, जहां स्कूली छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया था। बताया गया कि कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छात्राओं के कपड़े बदलने के लिए एक कमरा तय किया गया था, जहां पुरुषों का आना मना था। कार्यक्रम के दौरान ही कुछ 3 से 4 नशेड़ी विद्यालय के उस कमरे में जा घुसे। कपड़े बदल रही छात्राओं का मोबाइलों से फोटो वीडियो बनाने लगे। इस दौरान ऑपरेटर रजनीश तिवारी और पुरुषोत्तम तिवारी कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर आए शिक्षक दिलीप मिश्रा ने युवकों को ऐसी घिनौनी हरकत करने से मना किया। नशे में धुत युवकों ने तीनों शिक्षकों पर हमला कर दिया। जमकर मारपीट की। गनीमत रही कि कार्यक्रम में उपस्थित अन्य लोगों ने समय पर झगड़े में बीच बचाव कर शिक्षकों की जान बचाई। शिक्षकों ने कराया मामला दर्ज घटना की पुलिस में शिकायत के बाद मौके पर आए पुलिस वालों के साथ भी आरोपियों द्वारा जमकर गाली गलौज की गई। पीड़ित शिक्षकों द्वारा थाना कोतवाली पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। देखना होगा पुलिस इन अपराधियों पर क्या कार्रवाई करती है।

भारत और यूरोप के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से US को लगी मिर्ची

वाशिंगटन. ट्रंप प्रशासन के प्रमुख सहयोगी और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय संघ (EU) की भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर तीखी आलोचना की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए यूरोप की तुलना में कहीं अधिक बलिदान दिए हैं। बेसेंट ने दावा किया कि अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए, जबकि पिछले सप्ताह यूरोपीय देशों ने भारत के साथ बड़ा व्यापार समझौता कर लिया। उन्होंने इसे यूरोप की दोहरी नीति करार दिया और कहा कि US ने रूस से ऊर्जा अलगाव के लिए ज्यादा आर्थिक और रणनीतिक कीमत चुकाई है। ट्रंप के नेतृत्व में युद्ध समाप्त करने की दिशा में प्रयास जारी हैं, लेकिन यूरोप इस दिशा में कमजोर कदम उठा रहा है। स्कॉट बेसेंट ने भारत के रूसी तेल व्यापार पर आधारित अमेरिकी टैरिफ नीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रूसी कच्चा तेल भारत में आता है, वहां रिफाइन होकर उत्पाद बनते हैं और यूरोपीय देश इन्हें खरीदते हैं। इससे यूरोप अनजाने में खुद के खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं, जिसमें रूसी तेल से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त दंड शामिल है। बेसेंट ने इससे पहले कहा था कि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल खरीद काफी कम कर दी है और टैरिफ हटाने का रास्ता हो सकता है, लेकिन अब वे टैरिफ को सफल बताते हुए इसका समर्थन कर रहे हैं। भारत और EU के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील्स' डोनाल्ड ट्रंप के करीबी ने यूरोप पर आरोप लगाया कि वे भारत के साथ व्यापार समझौता करने के लिए रूसी तेल पर टैरिफ नहीं लगाना चाहते थे। यह टिप्पणी भारत और EU के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहे जाने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा के ठीक समय पर आई है। यह समझौता 2007 से चल रही बातचीत का नतीजा है और भारतीय निर्यात (जैसे टेक्सटाइल और ज्वेलरी) को ट्रंप के हाई टैरिफ से राहत दे सकता है। 16वीं भारत-EU शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इसकी औपचारिक घोषणा की। बेसेंट की आलोचना से अमेरिका-EU के बीच व्यापार और रूस-यूक्रेन मुद्दे पर मतभेद उजागर हुए हैं, जबकि भारत अपनी ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर चला रहा है।

‘बॉयकॉट भाजपा’ पोस्ट कर इस्तीफा देने वाले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित

बरेली. बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है। देर रात तक उन्हें जिले के आला अधिकारी समझाते और मान मनौव्वल करते रहे लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहे। इसके बाद आधी रात उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। प्रशासनिक हलकों में अब यह सवाल तैर रहा है कि 10 साल तक आईटी सेक्टर में कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले और पहली बार में ही पीसीएस क्लियर करने वाले अलंकार अग्निहोत्री आखिर इस्तीफा देते समय कहां चूक गए? उनके इस्तीफे के बाद शासन ने न केवल उन्हें निलंबित किया, बल्कि शामली अटैच कर विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश भी दे दिए हैं। सर्विस कंडक्ट रूल्स की अनदेखी बताया जा रहा है कि अलंकार अग्निहोत्री की सबसे बड़ी चूक 'उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली' की अनदेखी मानी जा रही है। किसी भी सरकारी पद पर रहते हुए कोई अधिकारी सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध मोर्चा नहीं खोल सकता। अलंकार ने अपनी पोस्ट में बॉयकॉट भाजपा लिखकर सीधे अनुशासन की लक्ष्मण रेखा लांघ दी। इसने शासन को सख्त कार्रवाई का ठोस आधार दे दिया। इस्तीफे की प्रक्रिया और माध्यम इसके साथ ही सरकारी सेवा में इस्तीफा देने का एक तय प्रोटोकॉल होता है, जिसे नियुक्ति प्राधिकारी (Appointing Authority) के पास भेजा जाता है। अलंकार ने इस्तीफे को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया और सरकार की नीतियों को 'काला कानून' बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वे केवल व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा देते तो शायद मामला इतना तूल न पकड़ता, लेकिन राजनीतिक नारेबाजी ने इसे 'विद्रोह' का रूप दे दिया। 'गणतंत्र' दिवस का चुनाव जिस दिन मुख्यमंत्री और राज्यपाल संविधान और कानून के शासन की दुहाई दे रहे थे, उसी दिन एक अधिकारी द्वारा व्यवस्था को 'गनतंत्र' बताना शासन की छवि को वैश्विक स्तर पर प्रभावित करने वाला कदम लगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर इस तरह का प्रदर्शन 'अति-उत्साह' और 'अनुशासनहीनता' की श्रेणी में आ गया है। पद की गरिमा बनाम व्यक्तिगत विचारधारा अलंकार अग्निहोत्री काफी सुलझे हुए और लक्ष्य के प्रति समर्पित व्यक्ति रहे माने जाते हैं। लेकिन, प्रयागराज की घटना (शंकराचार्य के शिष्यों से व्यवहार) और यूजीसी के मुद्दे पर उन्होंने अपनी व्यक्तिगत विचारधारा और धार्मिक संवेदनशीलता को अपने प्रशासनिक दायित्वों के ऊपर रखा। प्रशासन में 'तटस्थता' (Neutrality) सबसे अनिवार्य गुण है, जिसकी कमी यहां साफ नजर आई। जांच का शिकंजा: अब आगे क्या? बरेली कमिश्नर को सौंपी गई जांच में अब अलंकार के पिछले रिकॉर्ड और उनके सोशल मीडिया व्यवहार की बारीकी से जांच होगी। निलंबन के दौरान वे शामली डीएम कार्यालय में उपस्थिति देंगे और उन्हें केवल आधा वेतन (गुजारा भत्ता) मिलेगा। यदि जांच में यह सिद्ध हो गया कि उन्होंने जानबूझकर सरकार की छवि खराब करने के लिए ऐसा किया तो उनकी सेवा स्थायी रूप से समाप्त भी की जा सकती है। अलंकार अग्निहोत्री का मामला बताता है कि व्यवस्था के भीतर रहकर सुधार की गुंजाइश तो होती है, लेकिन व्यवस्था के विरुद्ध 'सत्याग्रह' का रास्ता एक सरकारी अधिकारी के लिए करियर के अंत की शुरुआत हो सकता है।

एम्स भोपाल के शोध में बड़ा अलर्ट: रात को जागना और मोबाइल की लत कैंसर के जोखिम को बढ़ा रहे

 भोपाल  अगर आप भी ऐसे लोगों में शुमार हैं जो रात में घंटों मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं या फिर आपकी नींद का कोई तय समय नहीं है, तो अपनी जीवन शैली बदल डालिए। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के शोध में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि नींद की गड़बड़ी सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को न्योता दे रही है। शोध के मुताबिक, नींद प्रभावित होने से शरीर का सुरक्षा तंत्र इस कदर कमजोर हो जाता है कि कैंसर कोशिकाएं पैर पसारने लगती हैं। 'कुदरती अलार्म' की महत्ता बताई एम्स भोपाल में जैव रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार और उनकी टीम ने इस शोध के जरिए शरीर में चलने वाले उस 'कुदरती अलार्म' की महत्ता बताई है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'सर्कैडियन रिद्म' यानी जैविक घड़ी कहते हैं। डॉ. अशोक ने बताया कि हमारा शरीर दिन और रात के एक चक्र में काम करने के लिए बना है। यही चक्र हमारी नींद, पाचन, हार्मोन और सबसे महत्वपूर्ण रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को कंट्रोल करता है। देर रात तक जागने, नाइट शिफ्ट में काम करने और अनियमित दिनचर्या से जैविक घड़ी पटरी से उतर जाती है। शरीर की रक्षा कोशिकाएं भी 'सुस्त' पड़ जाती हैं ऐसी स्थिति में शरीर की रक्षा कोशिकाएं भी 'सुस्त' पड़ जाती हैं और कैंसर कोशिकाएं हमारी ऊर्जा प्रणाली पर कब्जा कर लेती हैं। धीरे-धीरे कैंसर कोशिकाएं इतनी शक्तिशाली हो जाती हैं कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें पहचान कर नष्ट ही नहीं कर पाती। इंटरनेशनल जर्नल में मिली पहचान, मिला सम्मान डॉ. अशोक कुमार ने यह शोध डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव (केजीएमयू लखनऊ), मनेन्द्र सिंह तोमर और मोहित के सहयोग से पूरा किया है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित जर्नल 'स्लीप मेडिसिन रिव्यूज' में प्रकाशित किया गया है। साथ ही डॉ. अशोक कुमार को 'बेस्ट पेपर अवार्ड' से नवाजा गया। आमजन के लिए 'सुरक्षा मंत्र'     सोने का समय तय करें रोज एक तय समय पर सोएं और जागें ताकि जैविक घड़ी संतुलित रहे।     सोने से एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन से दूरी बना लें।     अनियमित खान-पान शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ता है। समय पर भोजन करें।     नींद और कैंसर के बीच छुपे संबंध पर यह शोध समाज के लिए एक वेक-अप कॉल है। यह वैज्ञानिक उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत के लिए मूल्यवान है, बल्कि आम लोगों को यह समझाने में भी कारगर होगी कि स्वस्थ जीवनशैली ही कैंसर के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।     -डॉ. माधवानन्द कर, कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ, एम्स भोपाल।  

PM Kisan Yojna में किसानों को मिलेगी 4,000 रुपये की किस्त, जानें क्या है नई अपडेट

नई दिल्ली देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) की 22वीं किस्त का इंतजार अब खत्म होने वाला है। इस बार कई किसानों के बैंक खातों में खुशियां दोगुनी होकर आने वाली हैं, क्योंकि उन्हें 2,000 रुपये के बजाय सीधे 4,000 रुपये मिलने की संभावना है। आइए समझते हैं कि इस बार किस्त का गणित क्या है और किन किसानों को इसका विशेष लाभ मिलेगा। किसे मिलेंगे 4,000 रुपये? योजना के नियमानुसार, सरकार हर साल किसानों को 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है, जो 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में आती है। 22वीं किस्त में 4,000 रुपये केवल उन चुनिंदा किसानों को मिलेंगे जिनकी 21वीं किस्त किसी तकनीकी कारण या वेरिफिकेशन की वजह से रुक गई थी। सरकार ऐसे मामलों में पिछली बकाया राशि को अगली किस्त के साथ जोड़कर भेजती है। बजट 2026 पर टिकी हैं निगाहें 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से भी अन्नदाताओं को काफी उम्मीदें हैं। चर्चा है कि सरकार पीएम किसान योजना के बजट में बढ़ोतरी कर सकती है। यदि बजट में राशि बढ़ाई जाती है, तो भविष्य में सभी किसानों की किस्त राशि में इजाफा देखने को मिल सकता है। इन गलतियों के कारण अटक सकती है आपकी किस्त सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आपकी प्रोफाइल में नीचे दी गई जानकारियां अधूरी हैं, तो 22वीं किस्त आपके खाते में नहीं आएगी:     ई-केवाईसी (e-KYC): जिन किसानों ने अपना ई-केवाईसी अपडेट नहीं कराया है, उनका पैसा अटक जाएगा।     आधार सीडिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। चूंकि पैसा DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजा जाता है, इसलिए आधार लिंक न होने पर ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।     बैंक विवरण: गलत अकाउंट नंबर या गलत IFSC कोड होने पर भी राशि क्रेडिट नहीं हो पाएगी। कब आएगी 22वीं किस्त? आमतौर पर पीएम किसान की किस्तें चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। पैटर्न को देखते हुए, फरवरी 2026 में बजट सत्र के आसपास 22वीं किस्त जारी होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, आधिकारिक तारीख की घोषणा होना अभी बाकी है। कैसे चेक करें अपना स्टेटस? किसान भाई पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर जाकर अपना 'Beneficiary Status' चेक कर सकते हैं। वहां आपको पता चल जाएगा कि आपका ई-केवाईसी पूरा है या नहीं और पिछली किस्त का क्या स्टेटस है।  

निवेशकों की नजर Budget 2026 पर: ट्रांजेक्शन टैक्स और STCG में कमी की उम्मीद

नई दिल्ली अगले महीने पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार के निवेशकों और एक्सपर्ट्स ने सरकार के सामने अपनी मांगों की लिस्ट रख दी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि रिटेल इनवेस्टर्स को प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल साल भर में 1.25 लाख रुपए तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता, जिसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, निवेशक सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की ऊंची दरों को लेकर भी चिंतित हैं। बाजार का मानना है कि ट्रांजैक्शन पर लगने वाले टैक्स को कम करने से लिक्विडिटी बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार से जुड़ सकेंगे। टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने पर जोर मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में मौजूदा 1.25 लाख रुपए की LTCG छूट सीमा काफी कम है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपए किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे मिडिल क्लास निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर बेहतर रिटर्न मिलेगा और वे लंबी अवधि के लिए निवेश करने को प्रेरित होंगे। STT कम करने की मांग पिछले बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर STT की दरें बढ़ा दी गई थीं। ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स का कहना है कि ट्रांजैक्शन टैक्स ज्यादा होने की वजह से ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार के वॉल्यूम पर पड़ रहा है। निवेशकों की मांग है कि कैश मार्केट में होने वाली खरीदारी पर STT की दरें कम रखी जाएं ताकि सट्टेबाजी के बजाय निवेश को बढ़ावा मिले। होल्डिंग पीरियड में बदलाव की उम्मीद फिलहाल अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड और रियल एस्टेट के लिए 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा अलग-अलग है। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे सरल बनाने के लिए सभी एसेट्स के लिए 12 महीने का एक समान होल्डिंग पीरियड तय कर सकती है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा और निवेशकों के बीच किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा। इंडेक्सेशन का लाभ फिर से मिले रियल एस्टेट और गोल्ड जैसे एसेट्स पर से इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने के बाद से निवेशकों में नाराजगी है। मार्केट एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार कम से कम गैर-वित्तीय एसेट्स (नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स) पर इंडेक्सेशन का लाभ फिर से शुरू करे या फिर टैक्स की दर को 12.5% से घटाकर 10% कर दे। इससे लंबी अवधि के निवेशकों को महंगाई के अनुपात में राहत मिल सकेगी। निवेश बढ़ेगा तो इकोनॉमी को फायदा होगा टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कैपिटल गेन टैक्स के ढांचे को उदार बनाती है, तो इससे घरेलू बचत का फ्लो शेयर बाजार की तरफ बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को मजबूती दे सकता है। सरकार के लिए चुनौती रेवेन्यू और निवेशकों की उम्मीदों के बीच बैलेंस बनाने की होगी।

16 फरवरी से शुरू होगा मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र, 6 मार्च को होगा समापन

भोपाल मध्य प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा का नौवां सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा। यह सत्र भोपाल में सुबह 11 बजे राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। इस सत्र में वार्षिक बजट, अनुपूरक मांगें और विधायी कार्यों पर चर्चा होने की संभावना है। मुख्य रूप से विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस 17 और 18 फरवरी को होगी। इससे संबंधित संशोधन 16 फरवरी शाम 5 बजे तक जमा किए जा सकेंगे। निजी सदस्यों के विधेयक और प्रस्तावों पर शुक्रवार को अंतिम ढाई घंटे चर्चा होगी। यह कार्य 20 फरवरी, 27 फरवरी और 6 मार्च को होगा। इसके लिए नोटिस 4 और 5 फरवरी तक देने होंगे। सत्र से पहले स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े नोटिस 10 फरवरी से स्वीकार किए जाएंगे। विधानसभा सत्र 6 मार्च तक चलेगा। बैठकें 16 से 20 फरवरी, 23 से 27 फरवरी और 5 व 6 मार्च को होंगी। हर दिन प्रश्नकाल होगा। मंगलवार से गुरुवार तक सरकारी कामकाज पर चर्चा होगी, जबकि शुक्रवार को निजी सदस्यों के विधेयक और प्रस्ताव लिए जाएंगे। शनिवार और रविवार को अवकाश रहेगा। होली के कारण 3 मार्च को छुट्टी होगी, जबकि 2 और 4 मार्च को कोई बैठक नहीं होगी। विधानसभा सचिवालय ने सभी सदस्यों को आचरण नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। व्यक्तिगत आरोप लगाने और नोटिस की समय से पहले सार्वजनिकता पर रोक लगाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया को लेकर भी सख्ती बरतने को कहा गया है। विधायकों से अपने पते अपडेट रखने और नोटिस जमा करने के नियमों का पालन करने का आग्रह किया गया है, ताकि सत्र सुचारू रूप से चल सके। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के तहत होने वाला यह सत्र राज्य से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश की बड़ी आदिवासी और ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए, इस सत्र में समावेशी विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और कृषि सहायता योजनाओं जैसे पीएम-किसान और आयुष्मान भारत पर जोर रहने की उम्मीद है। पिछले विधानसभा सत्रों में महिला सशक्तीकरण और डिजिटल शासन से जुड़े महत्वपूर्ण कानून पारित हुए हैं और इस सत्र में भी उसी दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। यह आदेश 13 जनवरी को जारी किया गया था और 15 जनवरी को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इसे सभी 230 विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 का यह पहला बड़ा विधानसभा सत्र होगा। विधानसभा में भाजपा के 163 और कांग्रेस के 66 विधायक हैं। कांग्रेस से उम्मीद है कि वह महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।

घर की ये 8 जगहें टॉयलेट से भी ज्यादा गंदी होती हैं, सफाई ना करने से बढ़ सकते हैं बीमारियों के खतरे

 नई दिल्ली सभी लोग अपने घरों की खूब साफ-सफाई करते हैं. लेकिन सफाई सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं होती, बल्कि घर साफ होने या ना होने आपकी सेहत से भी सीधा जुड़ा होता है. आपके घरों में रोज झाड़ू-पोछा किया जाता है, फर्श चमकाया जाता है, फिर भी कई बार घर में बदबू महसूस होती है. कई बार घर के लोगों में इंफेक्शन फैल जाता है और वो बीमारी पड़ जाते हैं. इसकी बड़ी वजह है घर की कुछ ऐसी जगहें जो रोज इस्तेमाल होती हैं, जिन्हें साफ करना आप लोग अक्सर भूल जाते हैं. ये जगहें गंदी इसलिए नहीं होतीं क्योंकि आप सफाई नहीं करते, बल्कि इसलिए क्योंकि यहां सबसे ज्यादा हाथ लगते हैं. ऐसे में इन्हें हर रोज साफ करने की जरूरत होती है. आइए जानते हैं घर की उन 8 सबसे गंदी जगहों के बारे में, जिन्हें रोज साफ करना बेहद जरूरी है. 1. किचन सिंक और नल के हैंडल किचन सिंक में लगातार बर्तन धुलते हैं, जिसकी वजह से अक्सर लोग सोचते हैं कि ये तो पानी से धुलता रहता है इसलिए ये साफ ही होगा. लेकिन सच्चाई ये है कि किचन सिंक घर की सबसे गंदी जगहों में से एक होता है. कई रिसर्च के मुताबिक, इसमें टॉयलेट सीट से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: कच्ची सब्जी हो, मीट हो या फिर नमी..ये सभी बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देते हैं. रोज सफाई से बदबू और इंफेक्शन से बचा जा सकता है. ऐसे में गर्म पानी और डिसइंफेक्टेंट से सिंक और नल जरूर साफ करें. 2. चॉपिंग बोर्ड चॉपिंग बोर्ड, बाजारों में लकड़ी और प्लास्टिक दोनों तरह के मौजूद होते हैं. इन पर रोज सब्जी, फल से लेकर नॉन-वेज भी काटा जाता है. इसमें छोटे-छोटे कट्स बन जाते हैं, जिनमें खाना फंस जाता है और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: रोज सफाई से फूड पॉइजनिंग का खतरा कम होता है और बदबू नहीं आती. हर बार इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और साबुन से धोएं. अगर आप इस पर कुछ नॉन-वेज चॉप कर रहे हैं तो इसे नींबू या सिरके के पानी से साफ करें. 3. मोबाइल फोन और रिमोट  मोबाइल फोन, टीवी या एसी के रिमोट दिनभर आपके हाथ में रहते हैं. आप इन्हें खाते समय, बाहर से आकर और कभी-कभी बिना हाथ धोए भी छूते हैं. रिसर्च के अनुसार मोबाइल फोन पर टॉयलेट सीट से ज्यादा कीटाणु हो सकते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: अगर आप इन्हें रोज पोंछते हैं तो हाथों से चेहरे तक पहुंचने वाले कीटाणु कम होते हैं. ऐसे में इन्हें माइक्रोफाइबर कपड़े और 70% अल्कोहल से हल्के हाथों से रोज साफ करना चाहिए. 4. किचन स्पॉन्ज और डिशक्लॉथ बर्तन धोने वाला स्पॉन्ज और कपड़ा बहुत ज्यादा गंदे होते हैं. ये हमेशा गीले रहते हैं और इनमें खाने के कण फंस जाते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: इन्हें जब आप रोज साफ करते हैं तो इनमें बदबू नहीं आती और बैक्टीरिया भी नहीं बढ़ते हैं. इन्हें गर्म पानी और डिटर्जेंट में उबालें. स्पॉन्ज हफ्ते में बदलें और डिशक्लॉथ रोज धोएं. 5. बाथरूम के नल और हैंडल जब बाथरूम की बात आती है तो सबसे पहले दिमाग में पानी का नाम आता है. बाथरूम में नमी ज्यादा होती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस जल्दी बढ़ते हैं. नल, हैंडल और साबुन डिस्पेंसर बार-बार छुए जाते हैं, जिससे इंफेक्शन फैलने का खतरा रहता है. क्यों जरूरी है सफाई: अगर आप उन्हें रोज पोंछते हैं तो उससे कीटाणु फैलने से रुकते हैं और फंगस नहीं जमता. दिन के आखिर में डिसइंफेक्टेंट वाइप से साफ करें. 6. टॉयलेट फ्लश हैंडल टॉयलेट फ्लश हैंडल भी कीटोणुओं का घर होता है. वो बहुत ज्यादा गंदा होता है, क्योंकि इसे हाथ धोने से पहले छुआ जाता है. क्यों जरूरी है सफाई: रोज सैनिटाइज करने से खतरनाक बैक्टीरिया खत्म होते हैं. इसे डिसइंफेक्टेंट स्प्रे या वाइप से रोज साफ करें. बाथरूम के दरवाजों के हैंडल भी जरूर साफ करें. 7. पालतू जानवरों के खाने के बर्तन अगर आपके घर में पेट डॉग या और कोई पेट है तो उनके खाने के बर्तन भी जरूर होंगे. जानवरों के खाने और पानी के बर्तनों में लार और खाना जमा हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं. ऐसे में वो बीमारी की वजह बन सकते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: रोज पालतू जानवरों के बर्तन धोने से ना केवल उनकी सेहत अच्छी रहती है, बल्कि आपकी भी. उनमें बदबू भी नहीं आती है. हर बार खाने के बाद गर्म पानी और साबुन से बर्तन धोएं और आसपास की जगह भी साफ रखें. 8. लाइट स्विच लाइट स्विच ऐसी चीज है जिसे हर कोई छूता है, लेकिन साफ करने का ध्यान कम ही आता है. क्यों जरूरी है सफाई: जब आप इन्हें रोज साफ करते हैं, पोंछते हैं तो उससे वायरस और बैक्टीरिया फैलने से रुकते हैं. डिसइंफेक्टेंट वाइप से लाइट स्विच और दरवाजों के हैंडल साफ करें.

एमपी के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अब होगी हाईटेक और प्रैक्टिकल आधारित शिक्षा, प्राचार्य तैयार करेंगे भविष्य की नर्सें

 भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे। राज्य सरकार और एम्स भोपाल ने मिलकर एक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत नर्सिंग छात्रों को आधुनिक मशीनों के संचालन और गंभीर मरीजों की देखभाल में दक्ष बनाया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों को हाईटेक मेंटर के रूप में प्रशिक्षित करेंगे। वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ाई का ढांचा पारंपरिक है। छात्रों का अधिक समय थ्योरी पढ़ने और ब्लैकबोर्ड आधारित शिक्षण में ही निकल जाता है। उन्हें बड़े अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों और जटिल मेडिकल केसों को नजदीक से देखने का अवसर बहुत कम मिलता है। व्यावहारिक अनुभव की यही कमी दूर करने के लिए यह नई पहल शुरू की गई है। सात दिनों के प्रशिक्षण में सीखेंगे प्रबंधन और तकनीक मास्टर प्लान के पहले चरण में 24 जिलों के नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ‘एडवांस सिमुलेशन लैब’ के माध्यम से डमी (पुतलों) पर वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और कार्डियक मॉनिटर जैसे उपकरणों का अभ्यास कराया गया। साथ ही कॉलेज प्रबंधन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं, जो अब तक केवल एम्स जैसे बड़े संस्थानों तक सीमित थीं। इस नई पद्धति के जरिए भारतीय नर्सिंग परिषद के नए ‘दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम’ को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है, ताकि मध्य प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाया जा सके। छात्रों को ये होगा फायदा इस पहल से छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इमरजेंसी केयर में इस्तेमाल होने वाली मशीनें चलाना आ जाएगा। अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन करते समय उन्हें अलग से प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हाथों-हाथ प्रैक्टिस से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे मरीजों को बेहतर इलाज दे सकेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिलने से उनके लिए देश के बड़े निजी अस्पतालों और विदेशों में नौकरी के अवसर भी खुलेंगे। आम नागरिकों को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ माधवानंद कर ने कहा कि मप्र के नर्सिंग शिक्षकों और प्राचार्यों को नई तकनीकों और पाठ्यक्रमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

दिल्ली में यमुना अब गंगा जैसी होगी, मेगा प्लान के तहत डेढ़ साल में बदल जाएगी नदी की तस्वीर

नई दिल्ली दिल्ली में प्रदूषण से अंतिम सांसें गिन रही यमुना नदी को जीवनदान देने की तैयारी हो चुकी है. प्रदूषण से गंदी हो चुकी यमुना को गंगा की तरह साफ करने के लिए मेगा प्लान तैयार कर लिया गया है. यमुना की सफाई योजना के तहत दिल्ली सरकार 518.88 करोड़ रुपये की एक बड़ी परियोजना शुरू करने जा रही है. इस प्रोजेक्ट के तहत न केवल यमुना नदी को साफ किया जाएगा बल्कि गंदे पानी को ट्रीट कर दोबारा उसे यमुना छोड़ने और नदी में पानी का स्तर बनाए रखने की व्यवस्था की जाएगी. दिल्ली सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यमुना की सफाई योजना में नदी में पैरेलल वाटर सिस्टम, पंपिंग स्टेशन और ऊंचे (एलिवेटेड) चैनल बनाए जाएंगे, ताकि कोरोनेशन पिलर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पूरी तरह साफ किया गया पानी यमुना नदी तक दोबारा पहुंचाया जा सके. इस परियोजना में जहांगीरपुरी नाले से रोजाना 30 मिलियन गैलन प्रति दिन गंदे पानी को पाइपलाइन के जरिए कोरोनेशन पिलर प्लांट तक लाया जाएगा, जहां उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार इस काम के लिए बंद पाइप सिस्टम (क्लोज डक्ट सिस्टम), पंपिंग स्टेशन और ऊंचे चैनल बनाए जाएंगे. इससे साफ किया गया पानी वजीराबाद बैराज तक पहुंचाया जाएगा, ताकि यमुना में पानी का बहाव बढ़ सके. यह बहाव ई-फ्लो (पर्यावरणीय प्रवाह) कहलाता है, यानी नदी को जीवित और स्वस्थ रखने के लिए जरूरी न्यूनतम पानी का स्तर बनाए रखा जाएगा. कौन उठा रहा खर्च?  प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना की निर्माण लागत केंद्र सरकार देगी, जबकि इसके संचालन और रखरखाव का खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी. परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और सबसे बड़ी बात है कि इसे डेढ़ साल में पूरा किया जाएगा. यह फंड राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत दिया गया है. परियोजना में क्या-क्या होगा? . जहांगीरपुरी नाले से बिना साफ किया गया गंदा पानी पाइपलाइन से लाना . 64 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का पंपिंग स्टेशन बनाना . ट्रीटमेंट के बाद साफ पानी को पाइप से यमुना तक पहुंचाना  खबर के मुताबिक जहांगीरपुरी नाले को पार करने के लिए ऊंचे RCC चैनल बनाए जाएंगे. इसके लिए दो पंपिंग स्टेशन होंगे. एक 64 MLD का स्टेशन होगा जो गंदा पानी STP तक लाएगा. जबकि दूसरा 318 MLD का पंप हाउस जो साफ पानी को यमुना तक पहुंचाएगा. इसके अलावा, वजीराबाद तक पानी ले जाने के रास्ते में दो ट्रस ब्रिज भी बनाए जाएंगे. केंद्र सरकार के प्लान में थी यमुना की सफाई 24 जून 2025 को एक रिपोर्ट में बताया गया था कि केंद्र सरकार यमुना को फिर से साफ करने की योजना पर नजर रखे हुए है. खासकर कोरोनेशन पिलर और यमुना विहार प्लांट के जरिए ई-फ्लो बढ़ाने पर. दिल्ली में यमुना का कितना हिस्सा है प्रदूषित? वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक यमुना का 22 किमी का हिस्सा जो कि पूरी नदी का सिर्फ 2 फीसदी है सबसे ज्यादा प्रदूषित है. नदी में इसी हिस्से से सबसे ज्यादा 76 फीसदी प्रदूषण होता है. विशेषज्ञों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अनुसार यमुना को स्वस्थ रखने के लिए 23 क्यूमेक्स पानी की जरूरत है, जबकि अभी सिर्फ 10 क्यूमेक्स पानी ही बह रहा है. ऐसे में पानी को साफ कर फिर से पानी पहुंचाने से पानी के स्तर को बनाए रखने में सहायता मिलेगी. अधिकारियों ने बताया कि नया सिस्टम खुले नालों को बायपास करेगा, क्योंकि खुले नाले साफ पानी को दोबारा गंदा कर देते हैं. यमुना कार्यकर्ता भीम सिंह रावत ने कहा कि इससे थोड़ा प्रदूषण जरूर कम होगा, लेकिन पानी की मात्रा अभी भी कम है. उन्होंने कहा, ‘साफ किए गए पानी की गुणवत्ता पर खास ध्यान देना होगा. नदी में छोड़ा जाने वाला पानी इनलैंड वाटर स्टैंडर्ड के अनुसार और ज्यादा शुद्ध होना चाहिए.’